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छत्तीसगढ़ में क्यों नही चलाई जा रही पैसेंजर ट्रेन, स्पेशल ट्रेनों में क्यों नहीं है जनरल बोगी: हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार से मांगा जवाब

 छत्तीसगढ़ में क्यों नही चलाई जा रही पैसेंजर ट्रेन, स्पेशल ट्रेनों में क्यों नहीं है जनरल बोगी: हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार से मांगा जवाब
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पैसेंजर ट्रेन क्यों नहीं चलाई जा रही है। यहां स्पेशल ट्रेनों में जनरल बोगी क्यों नहीं है। इस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। हाईकोर्ट ने यह जवाब सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव द्वारा दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मांगा है। संदीप दुबे द्वारा दाखिल याचिका पर शुक्रवार 8 अक्टूबर 2020 को डिवीजन बेंच मुख्य न्यायाधिपति रामचंद्र मेनन एवं न्यायाधीश पीपी साहू ने सुनवाई की। प्रकरण में याचिकर्ता ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण मार्च से पूरे देश मे केंद्र सरकार और रेलवे द्वारा ट्रेन का संचालन बन्द कर दिया गया।
 
 
उसके पश्चात लॉक डाउन के समय श्रमिक स्पेशल ट्रेन राज्य सरकारों की मांग पर कुछ दिनों तक चलाई गई। उसके बाद आज तक पूरे देश मे स्पेशल ट्रेन करीब 151 ट्रेनें स्टार्ट की गई। ट्रेन का नंबर बस चेंज किया गया, जबकि ट्रेन का नाम और रूट वहीं रखा गया। उसके साथ साथ ट्रेन का किराया बढ़ा दिया गया और यात्रियों को कॉन्सेसशन समाप्त कर दिया गया। सारी ट्रेनों में सामान्य श्रेणी के बोगी हटा दी गयी, जिससे सामान्य गरीब और गांव के लोगो को जरूरत में भी महंगी यात्रा संभव नहीं है। पैसेंजर ट्रेन नहीं चलाने से छत्तीसगढ़ के गाड़ी आदिवासी और गांव के लोगो को परेशानी हो रही है। वो अपने इलाज के लिए भी ट्रेवल नही कर पा रहे हैं जबकि केंद्र ने ही अपने महामारी अधिनियम के तहत जारी निर्देश में कहा है कि देश मे कोई भी कही भी बिना रोक टोक के यात्रा कर सकता है। फिर पैसेंजर ट्रेन छत्तीसगढ़ और आसपास के लिए क्यो नही चलाई जा रही है।
 
 
ये संविधान में प्रदत अनुछेद 19(1)का स्पष्ट उल्लंघन है। क्योकि संविधान कहता भारत का नागरिग कही भी आ जा सकता है। दिल्ली में मेट्रो ट्रेन एवं मुम्बई में लोकल ट्रेनों को स्टार्ट कर दिया गया है। डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार के वकील रमाकांत मिश्रा से पूछा इस संबंध में क्या कहना है। उन्होंने कहा केंद्र की पालिसी महामारी अधिनियम के अनुसार बनाई गई है और सही है। दोनो पक्ष की सुनवाई के बाद केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि गरीब और छोटो शहरों के लिए पैसेंजर ट्रेन क्यो नही चलाई जा रही और जो स्पेशल ट्रेन चल रही है उसमें जनरल बोगी क्यो नहीं है। सभी रुट में एक पैसेंजर ट्रेन कम से कम होनी चाहिए। सारी स्पेशल ट्रेन ऐसी वाली या स्लीपर क्लास की हैं। केंद्र को इस संबंध में 3 सफ्ताह में एफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया है।


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