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पीढ़ी दर पीढ़ी से मिट्टी की मूर्ति बना रहा है महोबिया परिवार पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे

पीढ़ी दर पीढ़ी से मिट्टी की मूर्ति बना रहा है महोबिया परिवार पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे
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इस वर्ष गणेश उत्सव की शुरुआत 22 अगस्त से हो रही है इस दिन विघ्नहर्ता भगवान की प्रतिमा  विश्वव्यापी कोरोनावायरस के चलते हैं केवल घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठान में ही स्थापित होने वाली है अंचल के सभी मूर्तिकारों द्वारा मूर्ति निर्माण का कार्य लगभग अपने अंतिम चरण में हैं |

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इस वर्ष कोरोना वायरस के कारण सर्वजनिक पंडाल में गणपति स्थापना नहीं के बराबर होगा और इसका सीधा असर स्थानीय मूर्तिकारों के रोजी-रोटी पर प्रभाव डालेगा फिर भी कुछ मूर्तिकार आज के तमाम संकटों और मुसीबतों से संघर्ष करते हुए पर्यावरण पूरक मिट्टी की कलात्मक मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं जिसे भक्तजन अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं |

भक्त जनों की भावनाओं और कल्पनाओं को अभिव्यक्त करने की कला को  मूर्त रूप देना शिल्प कला कहलाती है जहां लोग अपनी भावनाओं को भली भांति शब्दों में व्यक्त करने में सक्षम नहीं होते हैं वही एक शिल्पकार अपनी भावनाओं और कल्पनाओं को मूर्त रूप में जीवंत करने में समर्थ होते हैं इतनी महत्वपूर्ण कला के जानकारों को आधुनिक और आर्थिक प्रधान समाज में अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है इस बात से हर कोई परिचित नहीं है फिर भी कुछ मूर्तिकार नफा नुकसान को त्याग कर अच्छे दिन की आस में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं  जिसमें तमेर पारा निवासी श्री छबिलाल महोबिया आर्ट्स के विमल महोबिया अपने पुरखौती कार्य को आगे बढ़ाते हुए मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं  वह भक्तजनों से निवेदन भी करते हैं कि वह सिर्फ मिट्टी से निर्मित मूर्तियों का ही स्थापना करें तथा उसे अपने घर पर ही विसर्जन करें विमल महोबिया कहते हैं कि हमें अपने तलाब और नदियों को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए इसलिए आप घर या कॉलोनी में कुंड बना कर विसर्जन करें और उस पवित्र मिट्टी में एक पौधा लगा दें इससे ना सिर्फ ईश्वर का आशीर्वाद बल्कि उनकी याद भी साल दर साल घर आंगन में महकती  रहेगी । यह पौधा बड़ा होकर पर्यावरण में योगदान देगा । साथ ही घर में न‌ई समृद्ध परंपरा का संचार होगा |

मूर्तिकला को दूर-दूर तक पहुंचाने की सोच

मूर्तिकार विमल महोबिया अपने आसपास के बच्चों को मूर्ति कला की बारीकियां सिखाते हुए उन्हें उसकी शिक्षा भी देते हैं मूर्तिकला की शिक्षा  की निशुल्क ट्रेनिंग देकर अपने आसपास के बच्चों के लिए एक रोजगार का अवसर भी प्रदान करते हैं  मूर्तिकार विमल ने बताया कि शुद्ध काली मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने का काम उनके यहां तीन पीढ़ियों से चल रहा है पिता ने दादा से या कला  सीखी  फिर उन्हें और छोटे भाई आशीष महोबिया को भी सिखाया दोनों पर्यावरण पूरक मिट्टी की मूर्तियां बनाने में पारंगत है वे दोनों मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं

 



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