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महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय में हर्षोल्लास से मनाया गया हिन्दी दिवस

महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय में हर्षोल्लास से मनाया गया हिन्दी दिवस
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रायपुर :- महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय, रायपुर के हिंदी विभाग द्वारा आज हिंदी दिवस के अवसर पर एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात समीक्षक, भाषाविद् एवं पूर्व प्राचार्य, शहीद राजीव पांडेय शासकीय महाविद्यालय, भाठागांव, रायपुर के डॉ. राजेश दुबे ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

डॉ. दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। यह भाषा हमें न केवल संवाद की सुविधा देती है, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों को भी संरक्षित करती है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य केवल एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि यह स्मरण करने का अवसर है कि स्वतंत्र भारत ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। यह दिवस हमें हमारी मातृभाषा के प्रति गौरव और उत्तरदायित्व का बोध कराता है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में भारत में लगभग 60 करोड़ लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 43.63% है। हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक हिंदी बोलने वालों की संख्या 2 बिलियन से अधिक हो सकती है। डॉ. दुबे ने यह भी कहा कि हमें हिंदी की उपयोगिता को आधुनिक तकनीकी, प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में बढ़ावा देना चाहिए, जिससे यह वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित हो सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शांतनु पाल ने की। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. किरण अग्रवाल एवं डॉ. पाल द्वारा संयुक्त रूप से शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर डॉ. राजेश दुबे का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री प्रीतम दास द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किरण तिवारी ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हिंदी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह भाषा के प्रति चेतना, सम्मान और संवर्धन का दिन है। हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुँचाना, उसका सम्मान बढ़ाना और उसकी व्यावसायिक एवं तकनीकी उपयोगिता को बढ़ाना हम सबका दायित्व है।


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