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राजधानी के बूढ़ा तालाब में गोबर के दीयें और मूर्तियो की खरीददारी हुई आसान

 राजधानी के बूढ़ा तालाब में गोबर के दीयें और मूर्तियो की खरीददारी हुई आसान
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रायपुर। राजधानी रायपुर में मनोरंजन, सुकून और सैर-सपाटे का पर्याय विवेकानंद सरोवर-बूढ़ा तालाब में शाम होते ही लोगों की भीड़ उमड़ रही है। शाम होते ही जैसे-जैसे अंधेरा कायम होता है वैसे ही रंग-बिरंगी लाइटें और रंगीन फब्वारें के साथ यहां की खूबसूरती में कई गुनी बढ़ जाती है। यहां बूढ़ा तालाब के पानी में रंग-बिरंगी रोशनी दूर-दूर तक बिखर कर न सिर्फ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है अपितु एक अलग रंगीन दुनियां का अहसास भी कराती है।
 
 
राज्य स्थापना दिवस एक नवंबर को उद्घाटन के साथ इस बूढ़ा तालाब की रंगीन दुनियां में लोग सुकून, मनोरंजन और सैर-सपाटे के लिए ही पहुच रहे थे, लेकिन दो दिन से यहां आने वालों को मनोरंजन, सुकून, सैर-सपाटे के साथ स्व-सहायता समूह की महिलाओं के हाथों दीपावली त्यौहार के लिए विशेष रूप से तैयार स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी पकवान, घरों में पूजा के काम आने वाली गोबर व अन्य सामग्री से बनी मूर्तियां, एक से बढ़कर एक मन को लुभाने वाली सजावटी सामान की वेरायटी इत्यादी भी बहुत ही कम दामों पर मिल रही है। जो कि यहां पहुचने वालों को खूब पसंद भी आ रही है और लोग इसकी खरीददारी भी करने लगे हैं।
 
 
विवेकानंद सरोवर-बूढ़ा तालाब के नए स्वरूप के साथ राजधानी के लोगों को अपने मनोरंजन, सैर सपाटे और सुकून के लिए नया अवसर मिलने लगा है। लोग बड़ी सख्ंया में यहां पहुच रहे हैं। बच्चों से लेकर, युवक-युवतियां और बड़े सभी का आना-जाना लगा हुआ है। नए स्वरूप में बूढ़ा तालाब सभी को भा रहा है। तालाब के पानी में झिलमिलाती रंगीन रोशनी, चलने के लिए पाथ-वे, बोटिंग, फब्वारा सहित मनोरंजन के अन्य साधन सभी को आकर्षित कर रहे हैं। खास बात यह है कि अब यहां मनोरंजन के साथ लोगों को दीपावली में खरीददारी का मौका भी मिल गया है।
 
 
जो लोग चाहते है कि वे अपनी खरीददारी का शौक भी पूरा कर सके और समय पर घूमना-फिरना भी हो जाए उनके लिए बूढ़ा तालाब सबसे अच्छी जगह है। यहां स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए जैविक एवं हर्बल उत्पाद कम कीमत पर बेची जा रही है। अलग-अलग स्टालों में अलग-अलग उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध है। खाने, घर सजाने, दीया जलाने से लेकर पूजा करने सहित अन्य सामान यहां बेची जा रही है।
 
 
परिसर में अपनी स्टाल लगाने वाली जय संतोषी मां स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष रश्मि श्रीवास्तव ने बताया कि उनके स्टाॅल में दीपावली के लिए आकर्षक दीया, लाइटिंग के सामान, फ्लोटिंग दीये, पूजा की थाली, तोरण, मिट्टी से निर्मित फोटो फे्रम, उजाला ग्राम संगठन सेरीखेड़ी की महिलाओं द्वारा बेकरी के एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट मिठाईयां, बिस्कुट, मिक्चर, केक, नमकीन, सेव कुकीज, गरमा-गरम पेटीज, सजावटी सामानों में गोबर से निर्मित आकर्षक दीये, फूल रूपी गुलदस्ते, झालर भी उपलब्ध है।
 
 
सेरीखेड़ी की महिलाओं द्वारा दीपावली त्यौहार की जरूरतों को ध्यान रखकर अपनी स्टाॅल में उत्पादों को बेचा जा रहा है वही घर के लिए आवश्यक दैनिक जरूरतों से जुड़ी सामग्रियों को भी बेचा जा रहा है। यहां उनके स्टाॅल में हर्बल सेनेटाइजर, हैण्डवाॅश, नीम, एलोविरा से निर्मित अलग-अलग वेरायटी के साबुन, डिजाइन वाले कैण्डल, मास्क, जूट के बैग, खूशबूदार अगरबत्ती, पेन्सिल, हर्बल चायपत्ती, फेश शील्ड आदि की बिक्री की जा रही है। समूह से जुड़ी सुमन तार्की, दया धु्रव ने बताया कि यहा उपलब्ध सभी उत्पादों को ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत से तैयार किया है। अधिकांश उत्पाद प्रदूषण व केमिकल रहित है। इससे पर्यावरण और सेहत को नुकसान नहीं होता है।
 
 
उन्होंने बताया कि इन उत्पादों की डिमाण्ड लगातार बढ़ रही है। आसपास के जिलों से भी उनके उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। ज्वाला उज्ज्वला क्षेत्रीय स्तरीय संगठन से संबंधित समूह के अलावा एक पहल से जुड़ी समूह के सदस्यों द्वारा भी रंग बिरंगी दीये, जैविक खाद, गमले, मूर्तियां, हर्बल रंगोली, गोबर की लकड़ी आदि बेची जा रही है। इन उत्पादों की कीमत भी बहुत कम है, जिसे आसानी से कोई भी खरीद सकता है। श्रीमती जमीला अली, हेमलता धु्रव, बिन्देष्वरी साहू,मोनिका सिंगाडे, स्मृति साहू, निशा साहू, बानू पाठक सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि गोठानों के माध्यम से गोबर के उत्पादों को तैयार किया जाता है। इससे बेरोजगार महिलाओं को रोजगार से जुड़ने और आमदनी का अवसर मिला है। 


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