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वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को मिला तृतीय पुरस्कार

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को मिला तृतीय पुरस्कार
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 रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 1 से 5 नवम्बर तक नवा रायपुर अटल नगर, तूता स्थित पंडित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व्यावसायिक परिसर मेला स्थल में राज्योत्सव का आयोजन किया गया। राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा “25 वर्षों की विकास यात्रा” थीम पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे जनता द्वारा काफी सराहना मिली। इस पांच दिवसीय राज्योत्सव के दौरान ज्यूरी समिति द्वारा मूल्यांकन उपरांत, वन विभाग की इस प्रदर्शनी को तृतीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। राज्योत्सव के समापन समारोह में उप राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन के हाथों वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने विभाग की इस उपलब्धि पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता टीमवर्क, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का परिणाम है। पुरस्कार मिलने से विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उत्साहित हैं। राज्योत्सव में आने वाले आगंतुकों ने इस स्टॉल को रोचक, आकर्षक और ज्ञानवर्धक बताया। यह प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ की हरित सोच, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सशक्त प्रतीक बनी।

उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी में 25 वर्षों की उपलब्धियों की जीवंत झलक वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, एवं हरित विकास से जुड़े मॉडल और योजनाओं की जानकारी आकर्षक रूप में दिखायी गई। राज्य स्थापना वर्ष 2000 से वर्ष 2025 तक लागू की गई विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभाव को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।

प्रदर्शनी में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में अब तक 6.41 करोड़ पौधारोपण का उल्लेख,शहरों में विकसित मियावाकी सूक्ष्म वन,ग्रीन गुफा परियोजना, घोटुल संस्कृति प्रदर्शन,गज संकेत ऐप एवं गजरथ यात्रा द्वारा मानव-हाथी संघर्ष में कमी को प्रदर्शित किया गया। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से वन उत्पादों का मूल्यवर्धन,राज्य के प्रमुख प्राकृतिक स्थलों जैसे हांदावाड़ा जलप्रपात, कांगेर घाटी की कुटुमसर गुफा, बारनवापारा अभयारण्य की जानकारी भी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष तौर पर यह प्रदर्शित किया गया कि राज्य में वन्य जीव संरक्षण प्रयासों के फलस्वरूप काला हिरण की संख्या 77 से बढ़कर 190 हुई। इसी तरह बाघों की संख्या वर्ष 2021 में 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 में 35 पहुँची।



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