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ऑटो चालक के नाम पर खोल दी कंपनी, कर दिया करोड़ों का कारोबार

ऑटो चालक के नाम पर खोल दी कंपनी, कर दिया करोड़ों का कारोबार
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इंदौर : इंदौर और नीमच की आधा दर्जन फर्मों पर छापेमार कार्रवाई करते हुए स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट ने 315 करोड़ रुपए का फर्जी और अस्तित्वहीन कारोबार उजागर किया है। जिसके आधार पर 15 करोड़ रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लैम किया गया था। इसमें श्रीनाथ सोया एक्सिस कॉपोर्रेट भी शामिल है। जिसका संचालक सचिन पटेरिया है। छानबीन में पता चला सचिन ऑटो चालक है। उसके कूटरचित दस्तावेज बनाकर फर्म रजिस्टर्ड की गई। डाटा एनालिसिस के दौरान पता चला था कुछ फर्मों ने जीएसटी पंजीयन बनाया और कुछ ही दिन में बड़ा टर्नओवर कर रही है।

आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्स और जीओ टेगिंग के बाद जब फर्मों पर छापेमार कार्रवाई की गई तो पता चला कि जिन पतों पर फर्में पंजीबद्ध होना बताई गई हैं वहां ऐसी कोई फर्र्मे पंजीबद्ध है ही नहीं। न किसी तरह की व्यवसायिक गतिविधियां हुई। इसके बाद भी करोड़ों रुपए के बिल सबमिट किए गए और फर्जी तरीके से आईटीसी क्लैम किया गया है। आईटीसी की कुछ किश्तें जारी भी हो चुकी हैं। बाद में डिपार्टमेंट कारोबार की चेन मिलाई। पता चला कि पूरा फर्जीवाड़ा 315 करोड़ का है। इस दौरान इंदौर सहित नीमच में एक साथ कई फर्मों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। छापे की कार्रवाई के दौरान कई फर्म बोगस पाई गयी, जो केवल कागजों पर ही संचालित हो रही थी।

इनके द्वारा रिटर्न में डीओसी की 315 करोड़ की सप्लाई दर्शाकर लगभग 15 करोड़ रुपये का बोगस आईटीसी का लाभ अन्य फर्मों को दिया गया। इन बोगस फर्मों द्वारा प्रदेश और प्रदेश के बाहर की जिन फर्मो को आईटीसी का लाभ दिया गया है, उनके विरुद्ध विभाग द्वारा कार्यवाही कर आईटीसी रिवर्सल की कार्यवाही की प्रक्रिया जारी है। फर्जी बिल जारी कर अन्य फर्मों को आईटीसी पासऑन करने वाले बोगस व्यवसायियों के विरुद्ध वाणिज्यिक कर विभाग अभियान चला रहा है। इसी तारतम्य में स्टेट जीएसटी एंटी ईवेजन ब्यूरो इंदौर-ए के अधिकारियों द्वारा एनलिसिस पर बोगस फर्मां की सप्लाई चेन को उजागर किया गया, जो करोड़ों रुपए का बोगस टर्न ओवर कर रहे थे।

इसमें ऑटो चालक सचिन पटेरिया की प्रोपइटरशिप में चल रही श्रीनाथ सोया एक्सिस कॉरपोरेट भी शामिल है। इनता ही नहीं, पंजीयन में जो किराएदारी नामा लगाया गया है वह भी फर्जी है। असल में जिस मकान मालिक के नाम और साइन के साथ किराएदारी नामा बनाया गया था वह कई वर्षों पहले ही मर चुका है। वैभव लक्ष्मी इंडस्ट्रीज का प्रोप्राईटर अजय परमार व्यवसाय स्थल पर नहीं पाया गया। इसका किराएदारीनामा भी फर्जी है। किरायेनामे में दर्ज व्यवसायी स्थल के मालिक द्वारा किरायेनामे को फर्जी बताते हुए बयान दिया गया कि मेरे द्वारा किसी भी फर्म को व्यवसाय स्थल किराये पर नहीं दिया गया। अग्रवाल आर्गेनिक और अग्रवाल ओवरसीज अस्तित्वहीन पाई गई।


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