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सीबीआई जांच की आंच में झुलसने की ओर है पूर्व सरकार के मुखिया रमन सिंह सहित चार पूर्व मंत्री ?

सीबीआई जांच की आंच में झुलसने की ओर है पूर्व सरकार के मुखिया रमन सिंह सहित चार पूर्व मंत्री ?
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रायपुर |  छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के कथित एक हजार करोड़ घोटाला प्रकरण की सीबीआई जांच की आंच से अब पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के मुखिया एवं कुछ मंत्रियों के झुलसने की आशंका प्रबल होती दिखाई दे रही है। उल्लेखनीय है, कि पूर्व में नान घोटाले में भी इसी तरह राजनीतिक रंग के चलते मंत्री व अफसर फंसे थे। कुल मिलाकर समाज कल्याण विभाग में नि:शक्तजनों के नाम पर हुए घोटाले में एक विशेष अधिकारी को लक्ष्य बनाकर लिप्त करने की साजिश खंडित होजी नजर आ रही है। स्थिति यहां तक निर्मित हो गई है, कि फंसाने की साजिश रचने वाला ही फंस जाने की कगार पर पहुंचता जा रहा है। अब देखना यह है, कि सीबीआई जांच की दिशा किस ओर मुड़ती है। 

विश्वसनीय  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई की एक टीम जांच के लिए रायपुर आई हुई है, जिसमें दिल्ली के अफसर भी हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि घोटाला पिछली भाजपा सरकार के समय का है। मगर इसमें कौन-कौन शामिल हैं, इसको लेकर कयास ही लगाए जा रहे हैं। बताया जाता  हैं कि नि:शक्तजन संस्थान के जरिए सोसायटी का गठन किया गया था, उस पर तत्कालीन विभागीय मंत्री रेणुका सिंह से लेकर वित्त मंत्री अमर अग्रवाल  और तत्कालीन सीएम रमन सिंह की सहमति रही है। इससे संबंधित फाइलों पर सीएम रमन सिंह के अनुमोदन से सोसायटी की प्रबंध कार्यकारिणी में सच्चिदानंद जोशी, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सुधीर देव और दामोदर गणेश को अशासकीय सदस्य मनोनीत किया गया था। अब जब इस संस्थान और सोसायटी को कथित तौर पर फर्जी करार दिया जा रहा है, तो ऐसे में इन तमाम दिग्गजों पर आंच आना स्वाभाविक है। 
संस्थान के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक सोसायटी की तीन-चार मीटिंग हुई थी, जिसमें पहली बार रेणुका सिंह, फिर लता उसेंडी और आखिरी बार मीटिंग की अध्यक्षता रमशीला साहू के समाज कल्याण मंत्री रहते हुई थी। सीबीआई उपरोक्त पूर्व मंत्रियों से भी पूछताछ कर सकती है। भाजपा शासनकाल में सुपर सीएम कहे जाने वाले अमन ङ्क्षसह और आईपीएस मुकेश गुप्ता की दखल के कारण भी एक विशेष अफसर को इंगित कर फंसाने की साजिश की जा रही है। यही नहीं, जिस संस्थान में करीब एक हजार करोड़ का घोटाला बताया जा रहा है, उसमें पिछले 15 सालों में सिर्फ 23 करोड़ ही खर्च हुए हैं। 
ऐसे में बाकी की राशि कहां से आई, और कहां गईं, इसका जवाब भी सीबीआई को ढूंढना है। नान घोटाले की जांच के चलते वहां के छोटे-बड़े कर्मचारी पिछले कई साल से तनाव में हैं, लेकिन सोसायटी में काम कर रहे लोग सीबीआई जांच से बेफिक्र और बेखौफ दिख रहे हैं। 
 

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