सोशल मीडिया पर नकेल कसने जा रही है सरकार, जानिये क्या होने जा रहा है बदलाव
नईदिल्ली, केंद्र सरकार सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के लिए नया कानून बना रही है। इस महीने के अंत तक यह कानून आने की संभावना है। वर्तमान समय में हर तीसरा इंसान सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में आसानी से सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट भी बनाए जाते हैं, जिसके जरिए आसानी से फेक न्यूज फैलाई जाती है। इस नए नियम के मुताबिक, अगर सरकार फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर और टिक टॉक एप के मालिकों से सभी यूजर्स की पहचान उजागर करने के बारे में जानना चाहे तो इसकी जानकरी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संस्थापकों को देनी होगी। यानी गुमनाम पहचान को आसानी से नए नियम के अनुसार सामने लाया जा सकता है। ऐसे में स्पष्ट है कि नया कानून आने पर देश के करीब 40 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स की गोपनीयता खत्म हो जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज, चाइल्ड पोर्न, रंगभेद और आतंकवाद संबंधित कंटेंट के प्रसार को देखते हुए पूरी दुनिया में उनकी जिम्मेदारी तय करने की कोशिशें हो रही हैं। इसके लिए सोशल मीडिया से संबंधित नियम-कायदे बनाए जा रहे हैं, लेकिन भारत में बन रहा कानून इन सबसे विस्तृत है। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार का निर्देश मानना ही होगा और इसके लिए वारंट या अदालत के आदेश की अनिवार्यता भी नहीं होगी।
भारत सरकार ने सोशल मीडिया से संबंधित दिशानिर्देश दिसंबर, 2018 में जारी किए थे और इस पर आम लोगों से सुझाव मांगे गए थे। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने नए प्रावधानों का विरोध करते हुए इन्हें निजता के अधिकार के खिलाफ बताया था, लेकिन जानकारी के मुताबिक सरकार इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं करने जा रही। प्रस्तावित कानून में सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार के आदेश पर 72 घंटे के अंदर पोस्ट का मूल पता करने का प्रावधान किया गया था। भारत में करीब 50 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विदेशी यूजर्स इस कानून के दायरे में आएंगे या नहीं।







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