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कोरोना संकट के बीच जाने देश के इन बड़े डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर कही ये बात

कोरोना संकट के बीच जाने देश के इन बड़े डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर कही ये बात

नई दिल्ली, कोरोना संकट के बीच एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान, एम्स के प्रोफेसर और एचओडी डॉ. नवीत विग और डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज़ डॉ. सुनील कुमार एक साथ सामने आए और उन्होंने लोगों के बीच पैदा हो रहे तमाम भ्रम को तोड़ने की कोशिश की. इन तमाम डॉक्टरों ने कोरोना से जुड़े तमाम सवालों पर गहराई से जवाब दिए. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति में जनता में पैनिक है. उन्होंने कहा, "लोगों ने घर में इंजेक्शन, सिलेंडर रखने शुरू कर दिए हैं, जिससे इनकी कमी हो रही है. कोविड आम संक्रमण है, 85-90% लोगों में ये आम बुखार, जुकाम होता है, इसमें ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की जरूरत नहीं पड़ती है."


रेमडेसिविर की ज़रूरत कब?


रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जो मरीज घर पर हैं और जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से ज़्यादा है, उन्हें रेमडेसिविर की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर आप रेमडेसिविर लेते हैं तो उससे आपको नुकसान ज़्यादा हो सकता है, फायदा कम होगा.


मेदांता के चेयरमैन नरेश त्रेहान ने कहा कि जब आपका आरटी पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो सबसे पहले आप अपने लोकल डॉक्टर से संपर्क करें. उन्होंने कहा कि इलाज का प्रोटोकॉल सबको पता है, वो (डॉक्टर) उसके हिसाब से आपका इलाज शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि 90 फीसदी से ज्यादा लोग घर पर ही ठीक हो जाएंगे, जिनको सही वक्त पर सही दवाई दी जाएगी.


सुरक्षा डबल करें


डॉ. नरेश त्रेहान ने कहा कि आपको अपना बचाव सबसे पहले करना है. उन्होंने कहा कि बाहर जाने से पहले दो मास्क पहने, एन95 मास्क है तो उसके अंदर सर्जिकल मास्क पहनें. अगर कपड़े का मास्क है तो भी दो पहनें. ताकी अंदर वायरस न जाए. भीड़ भाड़ वाली जगहों से शादी और पार्टियों से दूर रहे.


"वाट्सएप यूनिवर्सिटी पर ध्यान न दें"


वैक्सीन को लेकर फैले भ्रम पर देश के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज़ सुनील कुमार ने कहा कि वैक्सीन को लेकर बहुत सी अफवाहे हैं. वैक्सीन का कोई सीरियस साइड इफेक्ट्स नहीं है, जो आए भी हैं वह नगण्य हैं. वैक्सीन और कोरोना नियमों को मानना, ये वो दो चीज़ें हैं जो चेन को ब्रेक करने में हमारी मदद करेंगी. उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा खबरों पर फोकस न करें. कुछ सेलेक्टिव खबरें ही देखें. वाट्सएप यूनिवर्सिटी भी है, उधर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है. इस व्यवहार का पालन आपको, डॉक्टरों, समाज के साथ-साथ मीडिया को भी करना होगा.


एम्स के एचओडी ऑफ मेडिसिन प्रोफेसर नवीत विग ने कहा कि दिल्ली में आज पॉजिटिविटी रेट 30 फीसदी है, मुंबई में एक दिन 26 फीसदी था और मुंबई में कड़े प्रतिबंध लगाए गए तो पॉजिटिविटी रेट 14 फीसदी हो गया. हमें कड़े प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे. 

Covid- 19:  घर पर आइसोलेशन के दौरान कई कोरोना के मरीज कर रहे हैं ये गलतियां, जो हो सकता है खतरनाक

Covid- 19: घर पर आइसोलेशन के दौरान कई कोरोना के मरीज कर रहे हैं ये गलतियां, जो हो सकता है खतरनाक

Covid- 19: कोरोना वायरस की दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है. इस खतरनाक संक्रमण के कारण एक बार फिर लोगों के बीच काफी डर का माहौल बना हुआ है. कोरोना का यह नया स्ट्रेन बच्चों और युवाओं को भी अपनी शिकार बना रहा है. बहुत से लोग कोरोना संक्रमण होने पर खुद को घर पर ही आइसोलेट कर रहे हैं. ऐसे में बहुत से लोग ऐसे हैं जो इस दौरान कई गलतियां कर रहे हैं. कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचने के लिए कुछ लोग अपने मन से दवाई खा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करने से आपकी दिक्कतें काफी बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं लोगों द्वारा की जाने वाली इन गलतियों के बारे में-
पेनकिलर्स- सेल्फ आइसोलेशन में लोग बुखार और सिरदर्द से छुटकारा पाने के लिए पैरासिटामोल का सेवन कर रहे हैं. आपको बता दें कि यह दवाई आपके सिर दर्द को तो ठीक कर सकती हैं लेकिन कोरोना के संक्रमण को नहीं, ऐसे में बहुत अधिक दवाई खाने से बचे. और डॉक्टर से परामर्श जरूर करें.
कफ सिरप- कोरोना में खांसी से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह से ही कफ सिरप लें. गले में खराश से राहत पाने के लिए आप शहद और नींबू भी ले सकते हैं. या फिर गुनगुने पानी से गरारे कर सकते हैं.
एंटीबायोटिक्स- कोरोना से बचने के लिए अगर आप भी एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं तो यह सही नहीं है. इससे कोरोना वायरस को नहीं मारा जा सकता. इससे बेहतर है कि आप एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करें.
आयुर्वेदिक उपचार- कोरोना का वायरस जब से भारत में आया हा आए दिन लोग कोई ना कोई आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बताते रहते हैं. ऐसे में इन आयुर्वेदिक उपचारों को फॉलो करने से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें.

 

कोरोना कहर के बीच इन बैसिक बातों को जरूर जानें और समझें

कोरोना कहर के बीच इन बैसिक बातों को जरूर जानें और समझें

कोरोना बहुत तेजी से फैल रहा है, इस बीच कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं। लोग कन्‍फ्यूज्‍ड हैं कि किस सलाह पर ध्‍यान दें और किस पर नहीं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ बहुत ही सामान्‍य सी बातों के बारे में जो आपको सुरक्षि‍त और स्‍वस्‍थ्‍य रखने में बहुत काम आएगी।

क्‍या अच्‍छा होता है साबुन या सैनिटाइज़र?
साबुन और पानी से हाथों को साफ करने का तरीका अब भी सबसे अच्छा है। हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से धोया जाना चाहिए। यह तरीका सैनि‍टाइजर से ज्‍यादा कारगर है क्‍योंकि बाजार में नकली सैनिटाइजर भी चल रहे हैं।

कौन सा सैनिटाइज़र सही रहेगा?
यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं है, तो कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें। अच्‍छी कंपनी का सैनिटाइजर पर लिखा रहेगा कि उसमें कितना प्रतिशत अल्‍कोहल शामिल है।

अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र क्यों होना चाहिए?
अल्कोहल वायरस और बैक्टीरिया सहित विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं को मारने में प्रभावकारी है। कोरोना वायरस एक ऐसे प्रकार का वायरस है, जिसमें एक बाहरी आवरण होता है। इसे आवरण को इनवेलप कहा जाता है। अल्कोहल इस आवरण को खत्म कर सकता है।

सैनिटाइज़र का उपयोग कैसे करें?
हैंड सैनिटाइज़र को एक हथेली पर लगाने के बाद दोनों हाथों को एक साथ रगड़ना चाहिए। रगड़ते समय, जेल को हाथ की सभी सतहों को कवर करते हुए अंगुलियों पर फैलाया जाना चाहिए। यह प्रक्रिया जेल के पूरी तरह सूखने तक की जानी चाहिए।

क्या हम किसी और चीज को कीटाणुरहित कर सकते हैं?
क्लीन्ज़र और वाइप्स उन वस्तुओं, सतहों की सफाई करने और कीटाणुरहित करने में प्रभावी होते हैं, जिन्हें अक्सर छुआ जाता है।

क्‍या किसी खास मौसम में कोरोना खत्‍म हो जाएगा?
यह मानने का कोई कारण नहीं है कि ठंड का मौसम नोवेल कोरोनावायरस या अन्य बीमारियों को खत्म कर सकता है। बाहरी तापमान या मौसम कोई भी हो, सामान्य मानव शरीर का तापमान लगभग 36.5 डिग्री सेल्सियस से 37 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। कोरोनावायरस से खुद को बचाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका अल्कोहल पर आधारित हैंड रब से साफ करना या साबुन और पानी से धोना है।

क्या वोदका का सैनिटाइज़र के रूप में उपयोग किया जा सकता है?
कई DIY (डू इट योरसेल्फ) साइटों और कार्यक्रमों में यह सुझाव दिया गया है। लेकिन इसके बावजूद वोदका में प्रभावी रूप से रोगाणुओं को मारने के लिए पर्याप्त मात्रा में एल्कोहल नहीं होता है, बेहतर होगा मेड‍िकल आधारित चीजों का ही इस्‍तेमाल करें। 

वैक्सीन लगवाने से पहले या बाद में कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, जानिए ऐसी स्थिति में क्या करें?

वैक्सीन लगवाने से पहले या बाद में कोरोना हो जाए तो घबराएं नहीं, जानिए ऐसी स्थिति में क्या करें?

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत में अब 1 मई से 18 साल से ऊपर के लोगों को भी वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी. हालांकि कोरोना वैक्सीन को लेकर अभी भी लोगों के मन में कई सवाल हैं. लोगों को डर है कि वैक्सीन के बाद उन्हें कोरोना हो जाएगा. अगर वैक्सीन लगने से पहले ही कोरोना के लक्षण दिख जाएं तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए. अगर कोरोना वैक्सीन लगने के बाद बुखार आ जाए तो क्या करना चाहिए. आइये जानते हैं हेल्थ एक्सपर्ट का इस पर क्या कहना है.

1- अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना होने या इसके लक्षण दिखने पर अपको वैक्सीन अपॉइंटमेंट टाल देना चाहिए. आपकी वजह से सेंटर पर वैक्सीन लगवाने आए दूसरे लोगों को भी कोरोना हो सकता है. संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है


2- अगर आप वैक्सीन लगवाने जा रहे हैं तो अपॉइंटमेंट से पहले आपकी हेल्थ से जुड़े कई सवाल पूछे जा सकते हैं. वैक्सीनेशन सेंटर पर स्क्रीनिंग भी की जाती है. अगर डॉक्टर को किसी तरह के लक्षण दिखते हैं तो आपका अपॉइंटमेंट कैंसिल हो सकता है.


3- CDC की गाइडलाइन के अनुसार COVID-19 के मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने पर ही वैक्सीन लगवानी चाहिए. आइसोलेशन से बाहर आने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं.


वैक्सीन के बाद संक्रमित होने पर क्या करें?


अगर आपने वैक्सीन लगवा ली है और आप संक्रमित हो गए हैं तो ऐसी स्थिति में आपको दूसरी डोज की डेट 3-4 हफ्ते आगे बढ़ा देनी चाहिए. आपको इस मामले में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. कई स्टडीज की मानें तो वैक्सीन की पहली डोज के बाद अगर आप कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो आपको कई हफ्तों तक दूसरी डोज नहीं लेनी चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे शरीर में एंटीबॉडी मजबूत और ज्यादा दिनों तक रहती है.


वैक्सीन से पहले दवा को लेकर रहें सावधान
1 अगर आपको किसी तरह की कोई बीमारी है या फिर पहले से कोई दवा चल रही है तो वैक्सीनेशन लेने के दौरान इस बात की जानकारी जरूर दें.
2 वैक्सीन लगवाने से पहले किसी भी तरह के पेन किलर खाने से बचें.
3 एलर्जी से बचने के लिए वैक्सीन लगवाने से पहले एंटीहिसटामाइन दवा लेने से मना किया जाता है.
4 वैक्सीन लगवाने के बाद 15 से 30 मिनट तक वैक्सीनेशन सेंटर पर जरूर रूकें और देखें कि कहीं आपको कोई गंभीर साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा.
5 वैसे वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट बहुत कम हैं, लेकिन खुजली, बेहोशी, उल्टी होना, एलर्जी रिएक्शन, सांस लेने में दिक्कत होना इसके गंभीर लक्षण हैं. आपको ऐसा कुछ लगे तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें.

 

कोरोना महामारी: जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन, तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित

कोरोना महामारी: जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन, तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित

नईदिल्ली। कोरोना महामारी से तबाह भारत के ड्रग्स रेगुलेटर ने शुक्रवार को महामारी के मरीजों के इलाज के लिए जाइडस Zydus Cadila की (Virafin) वीराफिन दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने जानकारी दी कि फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल में दवा देने के बाद कोरोना से जंग लड़ रहे मरीजों में काफी सुधार पाया गया है। ट्रायल्स के दौरान ज्यादातर मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट सात दिनों में निगेटिव आ गई। यह दवा तेजी से वायरल को खत्म करने में मददगार साबित होती है।

कितनी कारगर है दवा
दवा बनाने वाली कंपनी जायडस ने दावा किया है कि वीराफिन के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट 7 दिन बाद निगेटिव आई है। ऐसा कोरोना के 91.15 प्रतिशत मरीजों के साथ हुआ है। कंपनी ने बताया कि इस दवा से कोरोना के मरीजों को वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है। अगर वायरस से संक्रमण के शुरुआती लक्षणों के बाद यह दवा मरीज को दी जाए तो उसे कोरोना से तेजी से उबरने में मदद मिलेगी।

जानकारी के मुताबिक, जायडस ने इसका ट्रायल देश के तकरीबन 25 सेंटर्स पर किया था, जिसमें उत्साहजनक नतीजे सामने आए। इसे देखते हुए भारत की दवा नियंत्रक संस्था (डीसीजीआई) ने कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।

अब इसे अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा और डॉक्टरों की सलाह के बाद इसे मरीजों को दिया जाएगा। इससे पहले रेमडेसिविर का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए किया जा रहा था। यह मरीजों को कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाने में मदद करता है।

बता दें कि भारत में बीते 24 घंटों के भीतर 3 लाख 32 हजार 730 नए मामले सामने आए हैं। वहीं एक दिन में 2 हजार 263 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। फिलहाल देश में 24 लाख 28 हजार 616 ऐक्टिव केस हैं। 

WHO ने जारी की फूड गाइड लाइन, भोजन में इन्हें करें शामिल...

WHO ने जारी की फूड गाइड लाइन, भोजन में इन्हें करें शामिल...

कोरोना वायरस महामारी से पुनः दहशत का माहौल बना हुआ है। कोरोना का नया रूप बहुत संक्रामक है और जरा सी लापरवाही से हर कोई इसकी चपेट में आ रहा है। पिछले साल 2020 की तुलना में साल 2021 में कोरोना वायरस और अधिक आक्रामक और भयावह होता जा रहा है। भारत में चल रही कोरोना की दूसरी लहर में हर आयु वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।

इस महामारी का सही इलाज अभी भी उपलब्ध नहीं है लेकिन इम्यून सिस्टम को बूस्ट कर इस महामारी को जरूर हराया जा सकता है। इस भयानक माहौल में आपकी जीवनशैली सबसे अधिक मायने रखती है। आपका खान-पान, आपकी दैनिक एक्टिविटी आपको इस बीमारी की चपेट में आने से बचा सकती है। WHO ने बताया है कि कोरोना के दौर में कैसी डाइट लेना चाहिए...

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी की गई फूड गाइड में बताया गया है कि अधिक से अधिक ताजे फल, कच्ची सब्जी या अनप्रोसेस्ड सब्जियों का सेवन करें। इससे आपकी बॉडी को जरूरी विटामिन, मिनरल्स, फाइबर, प्रोटीन मिलते रहेंगे।

सब्जियों को खाने का सही तरीका
- डब्ल्यूएचओ ने बताया कि सब्जियों को अधिक पकाकर खाने से उसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इसलिए कोशिश करें। उन्हें भाप में पका कर खाएं या कच्ची सब्जी खाएं।


- शाम को भूख लगने पर कच्ची सब्जियां और ताजे फल ही खाएं। इससे पोषक तत्व आपके शरीर में पहुंच सकेंगे। वहीं अगर आप डिब्बा बंद सब्जियां और फ्रूट्स या अन्य कुछ खाते हैं तो ध्यान रहे उसमें अधिक नमक या चीनी नहीं हो। यह दोनों ही, शरीर के लिए नुकसानदायक है।

एक और रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी में आपका डाइट प्लान इससे बचाने में सहायक हो सकता है। इसलिए जानते हैं कैसे अपनी इम्यूनिटी को बूस्ट करें -

इम्यूनिटी बूस्टर फूड्स

सहजन फली - सहजन फली में मौजूद तत्व आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करेंगे। यह सुपरफूड में गिना जाता है।

नारियल पानी - नारियल पानी पीने से शरीर में ताजगी बनी रहती है। कमजोरी महसूस होने पर तुरंत एक नारियल पानी पी लीजिए। इससे शरीर में पानी की कमी भी पूरी हो जाएगी और तरावट बनी रहेगी।

प्याज, लहसन और हल्दी - किसी भी तरह की बीमारी में यह तीनों ही रामबाण की तरह कारगर होती है। जी हां, यह आपके इम्यूनिटी को बूस्ट करने में कारगर है।

मिक्स बीज - अलसी, सूरजमूखी और कद्दू के बीज में प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं। कोरोना की दवाई यह है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इन बीज का सेवन करने से आपको विटामिन ई, फाइबर, मैग्निशियम, आयरन की प्रचुर मात्रा मिल जाती है।

अलसी - इसे तीसी भी कहा जाता है। विदेश में भी इसकी काफी डिमांड होती है। इसमें काफी मात्रा में फाइबर और प्रोटीन मौजूद होता है। ओमेगा-3 अलसी में काफी मात्रा में होता है। हार्ट मरीजों के लिए काफी कारगर मानी जाती है।

सूरजमूखी बीज - इसमें विटामिन बी और ई की मात्रा अधिक पाई जाती है। विटामिन ई आपके अंदर मौजूद कोशिकाओं की रक्षा करता है। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में यह सहायता करता है। वहीं गर्भवती महिलाओं को इसके बीज दिए जाते हैं।

कद्दू के बीज - अक्सर खाने की मूल चीज को फेंक देते हैं। कद्दू के बीज में विटामिन बी की प्रचूर मात्रा पाई जाती है। इसमें मैग्निशियम, आयरन, जिंक और प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। इतना ही नहीं इसका सेवन करने से मानसिक तनाव और डिप्रेशन जैसी बीमारी में भी आराम मिलता है।
 

Corona को फेफड़े तक पहुंचने से रोक सकता है यह साधारण उपाय

Corona को फेफड़े तक पहुंचने से रोक सकता है यह साधारण उपाय

मुंह की स्वच्छता के लिए अपनाए गए साधारण उपाय नए कोरोनावायरस (Coronavirus) के मुंह से फेफड़ों तक पहुंचने के जोखिम को कम करने में मददगार हैं और कोविड-19 के गंभीर मामलों को रोकने में इनसे मदद मिलती है। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है।
‘जर्नल ऑफ ओरल मेडिसिन एंड डेंटल रिसर्च’ में प्रकाशत इस शोध में पाया गया कि इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि मुंह साफ करने के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध कुछ सस्ते उत्पाद (माउथवॉश) कोविड-19 के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 को निष्क्रिय करने में काफी प्रभावी हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोनावायरस लार के जरिए लोगों के फेफड़ों में जा सकता है। इसमें वायरस मुंह से सीधे रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है- विशेष तौर पर व्यक्ति यदि मसूड़े के रोग से पीड़ित हो।

शोधकर्ताओं के मुताबिक साक्ष्यों से पता चलता है कि फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं शुरू में कोविड-19 फेफड़ों की बीमारी में प्रभावित होती हैं और लार में वायरस की उच्च सांद्रता होती है। दांतों के आसपास के उत्तकों में सूजन के मामलों में मौत का जोखिम बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, दां तों पर जमा गंदगी और मसूड़ों के आसपास के उत्तकों में सूजन सार्स-सीओवी-2 वायरस के फेफड़ों में पहुंचने और ज्यादा गंभीर संक्रमण करने की आशंका को और बढ़ा देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह की साफ-सफाई एक प्रभावी जीवनरक्षक उपाय हो सकता है। उन्होंने अनुशंसा की कि दांतों और मुंह की साफ-सफाई से जुड़े आसान, लेकिन प्रभावी उपाय अपनाकर लोग जोखिम को कम कर सकते हैं।
ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक इयान चैपल ने कहा, इस मॉडल से हमें यह समझने में मदद मिल सकती है कि क्यों कुछ लोगों को कोविड-19 फेफड़े की बीमारियां होती हैं और कुछ को नहीं।उन्होंने कहा कि इससे वायरस के प्रबंधन का तरीका भी बदल सकता है- मुंह के लिए लक्षित सस्ते या यहां तक कि मुफ्त उपचार की संभावना के जरिए और अंतत: जिंदगी बचाकर।
इसमें कहा गया है कि सावधानीपूर्वक दांतों को ब्रश से साफ कर उनके बीच जमा होने वाली गंदगी को दूर करके, माउथवॉश का उपयोग कर या फिर साधारण तौर पर नमक के पानी से गरारे करके भी मसूड़ों की सूजन कम की जा सकती है- जिसके लार में वायरस की सांद्रता को कम करने में मदद मिल सकती है।(भाषा)

 

Covid-19 Mouth Symptoms: मुंह में दिखने वाले इन लक्षणों को ना करें इग्नोर, जल्द से जल्द कराएं कोरोना टेस्ट

Covid-19 Mouth Symptoms: मुंह में दिखने वाले इन लक्षणों को ना करें इग्नोर, जल्द से जल्द कराएं कोरोना टेस्ट

Oral Symptoms of Coronavirus: कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में हर जगह दहशत फैला दी है. कोरोना के सबसे कॉमन लक्षण है बुखार और खांसी है. कोविड-19 के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है बुखार आने के बाद कई लोगों को स्वाद और गंध महसूस होना या तो कम हो जाती है या पूरी तरह से बंद हो जाती है. कई मरीजों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक स्वाद और गंध (Taste and Smell) महसूस नहीं हो रही है.
एक स्टडी के अनुसार कोविड-19 से ग्रस्त होने वाले 60 प्रतिशत मरीजों में स्वाद और गंध ना महसूस होने की समस्या देखी गई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (National Institute of Health) की एक स्टडी के अनुसार कोरोना संक्रमित आधे से ज्यादा लोगों में यह देखा गया है कि उन्हें मौखिक लक्षण दिखने लगते हैं पर लोग इन लक्षण पर ध्यान नहीं देते है और इन्हें हल्की-फुल्की समस्या मानने की गलती कर बैठते है.
अगर आपको भी यह पांच लक्षण अपने मुंह में दिखने लगे तो तुरतं डॉक्टर से करें संपर्क-


जीभ में सूजन और जलन-

आपकों बता दें कि कोरोना वायरस हमारी जीभ पर भी अपना असर डालता है. स्टडी के अनुसार कई कोरोना के मरीज जीभ में सूजन और जलन महसूस कर रहे हैं. कई मरीजों के शरीर पर हल्के रैशेज भी देखने को मिले हैं. अगर आपकों भी यह लक्षण दिखाई देते हैं तो देर ना करे और जल्द से जल्द अपना कोविड-19 टेस्ट करा लें.
जीभ पर गहरे लाल निशान-

कोविड-19 संक्रमण हमारी ओरल कैविटी (Oral Cavity) को इफेक्ट कर देता है जिससे जीभ अपना रंग बदलना शुरू कर देती है. मरीजों मे कभी-कभी होठों पर झुनझुनी और चिड़चिड़ापन दिखने लगता है. जीभ पर गहरे लाल निशान दिखना भी कोविड-19 संक्रमण का सूचक हो सकता है.
बदबूदार सांस –
सांस से बदबू आना कभी-कभी मुंह सूखने का आम संकेत है, जिसे व्यक्ति आसानी से समझ नहीं पाता। इससे भोजन चबाने और बोलने में कठिनाई पैदा हो सकती है. कोरोना महामारी में ऐसे असामान्य लक्षण दिखें, तो आपको एक बार जांच जरूर करानी चाहिए.
सांस मे बदबू आना-

कई मरीजों में यह देखने को मिला है कि उन्हें सांस में बदबू भी आने लगती है और यह लक्षण समझने में ज्यादातर व्यक्ति चूक जाते है. उन्हें कभी-कभी बोलने में भी कठनाई महसूस होती है.
मुंह का बार-बार सूखना-

कोरोना के कई मरीजों में देखा गया है कि मुंह में सूजन के कारण उनका मुंह सूखने लगता है. ऐसा इस कारण होता है क्योंकि यह वायरस मसल फाइबर पर अटैक करता है जिससे कुछ लोगों को माउथ इंफेक्शन अल्सर, जलन और एलर्जी जैसी समस्या देखने को मिलती है.

 

क्या डबल मास्क पहनने से कम होता है कोरोना का खतरा? यहां जानें इससे जुड़ी सभी बातें

क्या डबल मास्क पहनने से कम होता है कोरोना का खतरा? यहां जानें इससे जुड़ी सभी बातें

Coronavirus Prevention: देशभर में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि ऐसे तरीकों को अपनाया जाए जिससे लोग इस खतरनाक वायरस से इंफेक्ट ना हो. कोरोना की इस दूसरी लहर से लोग इतना अधिक डरे हुए हैं कि कुछ का मानना है कि इस खतरनाक दौर में केवल एक मास्क से सुरक्षा नहीं मिल सकती है. ऐसे में क्या आप भी दो मास्क (Double Mask) को लेकर कंफ्यूज हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में सभी बातें.
फोर्टिस अस्पताल, मुंबई के कल्याण में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ कीर्ति सबनीस के अनुसार, डबल मास्किंग से सुरक्षा बढ़ सकती है और वायरस को प्रसारण को रोका जा सकता है. उन्होंने बताया कि “रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) में एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि अगर सभी लोग डबल मास्क का इस्तेमाल करें तो इससे कोरोना के मामलों में 96.4 प्रतिशत की कमी आ सकती है.
क्या है डबल मास्किंग?
जब कोई व्यक्ति एक मास्क दूसरे के ऊपर पहनता है, तो उसे ‘डबल मास्किंग’ कहा जाता है. दो मास्क को एक साथ पहलले से एक सील बन जाती है. जैसा कि सभी जानते हैं कि कोरोना व वायरस सांस से फैलता है. इसलिए दो परतें फिल्टरेशन को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं और यदि आपके आस-पास कोई व्यक्ति छींकता है या खांसी करता है तो उससे भी सुरक्षा प्रदान करता है.

कब पहनें डबल मास्क 
हवाई अड्डों और बस स्टैंड जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बाहर निकलने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय डबल मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए.

क्या है डबल मास्क पहनने का सही तरीका
सर्जिकल मास्क के ऊपर एक कपड़ा मास्क या दो कपड़े मास्क पहनना एक सही तरीका है. इसके साथ ही सबसे ऊपर एक कपड़े का मास्क और अंदर 3 प्लाई मास्क पहनना भी अच्छा उपाय है. लेकिन अगर आप एन 95 मास्क पहन रहे हैं तो डबल मास्क ना पहनें.

 

कोरोना के इस खतरनाक दौर में शरीर में ऑक्सी्जन लेवल मेंटेन करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

कोरोना के इस खतरनाक दौर में शरीर में ऑक्सी्जन लेवल मेंटेन करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

How To Improve Oxygen Level: कोरोना वायरस संक्रमण एक बार फिर तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है. इस बार कोरोना की यह दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में इस दौरान खून में ऑक्सीजन लेवल की सबसे बड़ा संकट है. कोरोना से बचने के लिए लगभग हर किसी को ऑक्सीजन की जरूरत हैं लेकिन मांग बढ़ने के कारण ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है. अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन को सिक्योर करके रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है. देश में ऑक्सीजन के लिए चल रही जद्दोजहद के बीच जरूरी है कि लोग अपने शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को ठीक रखें. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपके शरीर में ऑक्सीजन का लेवल ठीक रहेगा.
शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को मेंटेन करने के लिए डाइट और एक्सरसाइज का अहम रोल होता है. इससे आपक शरीर में ऑक्सीजन को मेंटेन कर सकते हैं. आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स-
ब्रीदिंग एक्सरसाइज- ऑक्सीजन के लेवल को मेंटेन रखने के लिए ताजी हवा काफी जरूरी होती है. ऐसे में ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से बॉडी में ऑक्सीजन का लेवल मेंटेन रहता है. जितना हम सांसों को लेते और छोड़ते हैं उतनी फ्रेश एयर और ऑक्सीेजन हमारे अंदर जाती है और हमारे फेफड़ों को अच्छेत से एनर्जी मिलती है.
आयरन को करें डाइट में शामिल- आयरन शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करता है. आयरन शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन को लेकर जाता है और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत रखता है. इसके लिए आप अपनी डाइट में सेब, गुड, किशमिश समेत उन चीजों को शामिल करें जिनमें आयरन अधिक होता है.
पीएं भरपूर पानी- पानी हमारी बॉडी के लिए काफी जरूरी होता है इशमें ऑक्सीजन की मात्रा होती है. जो लोग पानी कम पीते हैं उनमें सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की कमी होती है. पानी कई समस्याओं का समाधान होता है. ऐसे में भरपूर पानी पीएं.

 

मेडिकल फेस्क मास्क या फैब्रिक मास्क: WHO ने शेयर की गाइडलाइन्स, बताया किसे कब और कैसे पहनना चाहिए

मेडिकल फेस्क मास्क या फैब्रिक मास्क: WHO ने शेयर की गाइडलाइन्स, बताया किसे कब और कैसे पहनना चाहिए

Coronavirus prevention: मेडिकल मास्क और फैब्रिक मास्क दोनों कोविड-19 का एक महत्वपूर्ण एहतियाती उपाय है. रोजाना संक्रमण का ग्राफ ऊपर चढ़ने के बीच स्वास्थ्य पोर्टल और विशेषज्ञ अपनी सुरक्षा में मास्क समेत अन्य उपायों के प्रति ढिलाई नहीं बरतने का आह्वान कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी एक पोस्ट में समझाया गया है कि किसे कैसे कब मास्क पहनना चाहिए.


मेडिकल या सर्जिकल मास्क
ट्विटर पर जारी एक वीडियो में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सलाह दी है कि इस प्रकार के मास्क पहनने जाने चाहिए:
हेल्थ वर्कर्स
लोग जिनको कोविड-19 का लक्षण है
वो लोग जो संदिग्ध या कोवि-19 से संक्रमित किसी की देखभाल कर रहे हों
ऐसे इलाके में जहां वायरस का व्यापक रूप से प्रसार हो गया हो और कम से कम एक मीटर की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो गया हो, तब मेडिकल मास्क का इस्तेमाल किया जाना चाहिए:
ऐसे लोग जिनकी उम्र 60 या उससे ज्यादा हो
ऐसे लोग जिनको चिह्नित बीमारियां हों


फैब्रिक मास्क
• ये मास्क ऐसे समय सप्लीमेंट के तौर पर उभरे हैं जब दुनिया में मेडिकल मास्क की कमी हो गई है. डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी कि फैब्रिक मास्क उन लोगों के जरिए पहने जा सकते हैं जिनको कोविड-19 का लक्षण नहीं है. इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो सोशल वर्कर, कैशियर के साथ करीबी संपर्क में हैं.
• फैब्रिक मास्क व्यस्त सार्वजनिक जगहों जैसे परिवहन, कार्य स्थल, किराना स्टोर और अन्य भीड़भाड़ वाले वातावरण में पहने जाने चाहिए.
मेडिकल मास्क
• मेडिकल मास्क एक बार के इस्तेमाल योग्य हैं जिसे रोजाना विधिवत कूड़ेदान में फेंकने की आवश्यकता है
• मेडिकल मास्क को सर्जिकल मास्क भी कहा जाता है, जबकि फैब्रिक मास्क फिर से इस्तेमाल करने योग्य है. फैब्रिक मास्क को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी से धोए जाने की जरूरत है.

 

Covid-19 : हमारे शरीर में ही मौजूद है कोरोना की दवा, जानिए जरूरी बातें

Covid-19 : हमारे शरीर में ही मौजूद है कोरोना की दवा, जानिए जरूरी बातें

कोरोनावायरस से निजात पाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी है। अभी इस वायरस से राहत पाने के लिए कोई कारगर इलाज सामने नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञ, डॉक्टर्स इस वायरस से निपटने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं। यदि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है तो आप पर वायरस हावी नहीं हो सकता है यानी आपके शरीर में ही इस वायरस को मात देने की शक्ति मौजूद है। लेकिन जरूरी ये है कि हमें इस बारे में संपूर्ण जानकारी हो कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और ऐसी कौन-कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है?
आइए सबसे पहले पहले जानते हैं कि कौन-कौन-सी वे चीजें है जिनके सेवन से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं?

नियमित योगाभ्यास

शरीर को अंदर से मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित योगाभ्यास करना जरूरी है। शारीरिक व्यायाम आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।

शारीरिक गतिविधियां

फिजिकल एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान दें। शारीरिक गतिविधियों से आप एक्टिव रहेंगे और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इसके लिए आप खेल को शामिल कर सकते हैं जिससे शरीर का व्यायाम भी होता रहे और मानसिक रूप से आप फ्रेश भी महसूस करें।
बाहर का खाना न खाएं

बाहर के खाने से मतलब है कि आपको घर में बने हुए शुद्ध भोजन का ही सेवन करना चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि आप वायरस से दूरी बनाए रखें तो आपको खुद पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए इस बदलाव को जरूर शामिल करें और घर का बना शुद्ध भोजन करें।

विटामिन सी का सेवन

इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करें। इसके लिए आप आंवले का सेवन कर सकते हैं।
फल और हरी सब्जियां

अपनी डाइट में फलों को शामिल करें। हरी सब्जियों का सेवन करें। यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगी और किसी भी वायरस से लड़ने की शक्ति देगी।

तुलसी का सेवन

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए तुलसी का सेवन करें। रोज खाली पेट तुलसी का सेवन आप कर सकते हैं।

आइए अब जानते हैं ऐसी कौन-सी चीजें हैं जिनके सेवन से आपकी इम्युनिटी घट सकती है।
यदि आप ऐसी चीजों का सेवन करते हैं, जो मैदे से बनी हैं तो तुरंत इनका सेवन करना बंद कर दें। ये आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। मैदे से बनी चीजें जैसे ब्रेड, नॉन, भटूरे, पिज्जा आदि।

चीनी का सेवन न करें, बल्कि चीनी की जगह आप गुड़ का सेवन कर सकते हैं।

यदि कोल्ड ड्रिंक्स पीने के शौकीन हैं, तो अपने शौक को बदलने का समय आ गया है। कोरोना काल में जब दिनचर्या में इतना बदलाव आ चुका है और लोग सेहतमंद जिंदगी ओर बढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उन सभी आदतों का त्याग करना होगा, जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
पैकिंग वाली चीजों को खाने से बचें।

जंकफूड के सेवन से बचें, यह आपके इम्यून सिस्टम को घटाने का काम करता है।

कोरोनावायरस से निपटने के लिए यदि हम अपनी डाइट व अपनी लाइफस्टाइल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करें तो इस वायरस को खुद पर हावी होने से रोका जा सकता है। अब वक्त है बदलाव का। कोरोना काल में बदलाव और समझदारी के साथ बढ़ाया गया कदम आपको सेहतमंद जिंदगी की तरफ ले जाएगा इसलिए इस वायरस से डरें नहीं, बल्कि खुद को अंदर से मजबूत करें और इस वायरस को मात दें।

 

अगर आपके में लक्षण हैं लेकिन रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो तो, ये टेस्ट कराने  विशेषज्ञ दे रहे है सलाह

अगर आपके में लक्षण हैं लेकिन रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो तो, ये टेस्ट कराने विशेषज्ञ दे रहे है सलाह

नई दिल्ली। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच भारत के शीर्ष विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि करीब 80 प्रतिशत मामलों में आरटी-पीसीआर जांच से कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल पाता है, ऐसे में लक्षण वाले रोगियों की रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं होने पर उनका सीटी स्कैन या छाती का एक्सरे कराना चाहिए और 24 घंटे बाद दोबारा जांच करानी चाहिए।
सार्स सीओवी-2 के नए स्वरूपों के प्रकोप के बीच विशेषज्ञों ने कहा कि आरटी-पीसीआर जांच से वायरस के उत्परिवर्तित स्वरूप बच नहीं पाते, क्योंकि भारत में हो रहीं जांच में 2 से अधिक जीन्स का पता लगाने की क्षमता है। सरकार के 15 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में सार्स सीओवी-2 के विभिन्न स्वरूपों से कुल 1,189 नमूने संक्रमित पाए गए जिनमें से 1,109 नमूने ब्रिटेन में पाए गए कोरोना वायरस के स्वरूप से संक्रमित मिले, 79 नमूने दक्षिण अफ्रीका में मिले स्वरूप से और एक नमूना ब्राजील में मिले वायरस के स्वरूप से संक्रमित पाया गया।
आईसीएमआर के डेटा के मुताबिक वर्तमान आरटी-पीसीआर जांच में वर्तमान स्वरूपों का भी पता चल रहा है।आरटी-पीसीआर जांच में 80 मामलों में सही परिणाम निकल आता है लेकिन 20 फीसदी मामलों में हो सकता है कि नतीजे सही नहीं मिलें। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि यदि नमूना ठीक से नहीं लिया गया है या फिर जांच समय पूर्व कर ली गई जब तक संक्रमण अधिक नहीं फैला हो तो रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि नहीं होगी। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण हैं तो कोविड-19 का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला की रिपोर्ट, सीटी/चेस्ट एक्स-रे के मुताबिक उपचार शुरू किया जाना चाहिए। 24 घंटे बाद फिर से जांच करानी चाहिए।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान एवं संचारी रोग विभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मिले वायरस के स्वरूप का आरटी-पीसीआर जांच में पता लग जाता है। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण का पता नहीं चल पाता है। एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि केवल आरटी-पीसीआर जांच के परिणाम पर निर्भर रहने की बजाए लक्षण तथा सीटी स्कैन की रिपोर्ट के आधार पर उपचार किया जाना चाहिए। (भाषा)
 

Corona संक्रमण का इन्हें सबसे अधिक है खतरा, देखें लिस्ट, कहीं आप भी तो इसमें नहीं?

Corona संक्रमण का इन्हें सबसे अधिक है खतरा, देखें लिस्ट, कहीं आप भी तो इसमें नहीं?

कोरोना वायरस पूरे देश में तेजी से फैल रहा है. ऐसे में राज्य सरकारों द्वारा एहतियात के तौर पर कहीं कर्फ्यू तो कहीं लॉकडाउन लगाया जा रहा है. हालांकि कोरोना के मामले पहले की अपेक्षा काफी बढ़ चुके हैं. इस कारण आपका यह जानना जरूरी है कि इस बार कोरोना से किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है. क्योंकि अगर आपको पता होगा तो आप एहतियात के तौर पर कदम उठा सकेंगे. सरकार के #IndiaFightsCorona ट्विटर अकाउंट से एक तस्वीर को साझा किया गया है. इस तस्वीर में बताया गया है कि अखिर किन लोगों को कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा है.
ट्वीट के मुताबिक धूम्रपान, हृदय और सांस लेने से संबंधित जो लोग हैं उन्हें कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. इस कारण सरकार द्वारा गाइडलाइन भी जारी किया गया है. इसके मुताबिक जिनकी आय़ु 60 वर्ष या फिर उससे अधिक है. उन लोगों को कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है. क्योंकि वृद्ध लोगों में कोरोना एक गंभीर बिमारी बन सकता है.
वहीं अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो तंबाकू के सेवन करने वालों, धूम्रपान करने वालों में कोरोना संक्रमण का काफी खतरा है. डायबिटीज से संबंधित मरीजों में कोरोना के गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं. इसमें लोगों के मरने व संक्रमित होने की संभावना तीन गुणा ज्यादा होती है. नॉन कम्युनिकेबल बिमारी भी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण के खतरने को बढ़ाती है. कॉर्डियोवस्कुलर बीमारी, हृदय संबंधित बिमारी और हार्ट फेलियर जैसी बीमारियों में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिले हैं.
 

 जानिए कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना-पीना चाहिए

जानिए कोविड-19 वैक्सीन लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना-पीना चाहिए

बहुत सारे लोगों ने कोरोना वायरस के खिलाफ कोविड-19 की वैक्सीन लगवा ली है. हालांकि, उसके संबंध में कई सारे सवाल बने हुए हैं. मिसाल के तौर पर वैक्सीन का असर, साइड-इफेक्ट्स और ये भी कि डोज लगवाने से पहले और बाद में क्या खाना चाहिए. आपके सवालों का जवाब देने के लिए हार्वर्ड न्यूट्रिशनल मनोचिकित्सक डॉक्टर उमा नायूड ने इंस्टाग्राम का सहारा लिया और बताया, "वैक्सीन लगवाने के वक्त जरूरी है कि आप अपनी डाइट पर ध्यान दें, जिससे होनेवाले किसी साइड-इफेक्ट्स को कम किया जा सके."


टीकाकरण से पहले संतुलित आहार खाएं
अपनी डाइट से कोविड-19 वैक्सीन लेने से पहले और बाद में समझौता न करें. वैक्सीन के साइड-इफेक्ट के तौर पर बेहोशी की सूचना मिली है, जिसे स्वस्थ, साबुत भोजन खाकर कम किया जा सकता है. उन्होंने कुछ फूड्स सुझाए हैं जिसे वैक्सीन लगवाने के पहले और बाद में खाया जा सकता है.


फाइबर से भरपूर फूड्स का इस्तेमाल करें

शांत शरीर और शक्तिशाली इम्यून सिस्टम के लिए फाइबर में भरपूर फूड्स जरूरी हैं. वैक्सीन के दौरान आपको आपको अच्छी तरह से आराम और सक्रिय होना चाहिए, जो ये उसी वक्त संभव है जब आपने साबुत अनाज खाया है. इसलिए सचुरेटेड फैट और शुगर वाले फूड्स से परहेज करें.


प्रोसेस्ड फूड के बजाए साबुत अनाज खाएं
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, स्वस्थ खानपान की आदतें इस महामारी के दौरान स्वस्थ शरीर के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए, जब आप कोविड-19 वैक्सीन का डोज लेने का फैसला करते हैं, स्वस्थ साबुत अनाज के फूड्स का इस्तेमाल करें जो फाइबर में भरपूर हो. बजाए इसके कि वो प्रोसेस्ड फूड जो सैचुरेटेड फैट में ज्यादा और कैलोरी की अधिक मात्रा होती है.


हाइड्रेटिंग वाले फल खाएं और पर्याप्त पानी पीएं
अच्छे स्वास्थ्य के लिए हाइड्रेट रहना बुनियाद है, खासकर जब आप कोविड-19 वैक्सीन का डोज लगवाने जा रहे हैं. आपको हाइड्रेटिंग वाले फल या खूब पानी पीकर खुद को तरोताजा बना लेना चाहिए, जो गंभीर साइड-इफेक्ट्स के खतरे को कम कर सकेगा और टीकाकरण की प्रक्रिया के दौरान आपको अच्छा महसूस होने देगा. 

कोवि‍ड ने दी एक नई बीमारी, नाम है ‘कोविड सोम्निया’, जानिए क्या है इसका इलाज?

कोवि‍ड ने दी एक नई बीमारी, नाम है ‘कोविड सोम्निया’, जानिए क्या है इसका इलाज?

कोरोना के कारण लोगों की जान ही नहीं जा रही, बल्कि इसकी वजह से कई तरह की मानसिक बीमारियां भी हो रही है। स्ट्रेस, ड‍िप्रेशन और कई तरह के फोब‍िया के साथ अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसकी वजह से कोविड सोम्निया हो रहा है।

यानि‍ नींद नहीं आने की बीमारी। वैसे नींद नहीं आने की बीमारी को इन्सोिमेनिया कहा जाता है, लेकिन चूंकि अब यह कोविड की वजह से हो रहा है इसलिए इसे कोवि‍ड सोम्निया कहा जा रहा है।

कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से दुनियाभर में यह देखने को मिला है कि लोग ठीक से सो नहीं पा रहे। रॉयल फिलिप नाम की एक संस्था ने 13 देशों में नींद से जुड़ा एक सर्वे किया गया है। सर्वे में 37 प्रतिशत लोगों ने माना है कि महामारी ने उनकी नींद पर बुरा असर डाला है।

सर्वे में शामिल 70 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि कोरोना महामारी शुरू होने के बाद उन्हें नींद से जुड़ी एक या उससे अधिक प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं में इस तरह की समस्या और ज्यादा देखी गई है।

स्लीप न्यूरोलॉजिस्ट ने इसे ‘कोविडसोम्निया’ का नाम दिया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के मुताबिक इसके पीछे कोरोना वायरस से संक्रमित होने का भय, फैमिली मेम्बर्स और करीबियों के स्वास्थ्य की चिंता है।


कोरोना के कारण तनाव बढ़ रहा है। इसी तनाव के चलते लोग इंसोम्निया (नींद न आना या टूट जाना) के शिकार हो रहे हैं। अगस्त, 2020 में ब्रिटेन के साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च कहती है कि लॉकडाउन के दौरान चीन में इंसोम्निया की दर 14.6 से 20% तक बढ़ गई। इटली और ग्रीस में यह दर 40% तक पाई गई।

क्या है लक्षण?
नींद न आना या बार-बार टूटना। दिन के वक्त थकान महसूस होना या नींद आना। सोते वक्त बार-बार उठना। या देर से सोने के बाद भी जल्दी नींद खुल जाना जैसे लक्षण कोविडसोम्निया के हैं।

कैसे करें इलाज?
इसके इलाज के खुद ही अपने ऊपर ध्यादन दें। अपनी आदतों को बदलें। दोपहर में कैफीन न लें। यह नींद को प्रभावित करती है। सोने से पहले मोबाइल से बचें। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर की ब्लू स्क्रीन हार्मोन मेलाटोनिन की मात्रा को कम करती है। पलकों का झपकना भी कम होता है।

नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक बेडरूम का तापमान 16-19 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। यह नींद लाने में मदद करता है।

(साभार- वेब दुनिया )

 

कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे तेजी से हो रहे संक्रमित, जानें लक्षण, कैसे करें बचाव

कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे तेजी से हो रहे संक्रमित, जानें लक्षण, कैसे करें बचाव

Covid-19 Symptoms In Kids: देश भर में कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. चिंता की बात ये है कि कोरोनावायरस की दूसरी लहर में अब बच्चे भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं. डॉक्टर्स भी इस बात को लेकर चिंतित हैं. गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख और निदेशक डॉ. कृष्ण चुघ ने कहा, “इस दूसरी लहर में बच्चों में कोविड-19 संक्रमण के काफी नए मामले सामने आ रहे हैं और इनकी संख्या पहले की तुलना में काफी अधिक है.”
बच्चों में कोविड 19 के लक्षण
डॉक्टर्स के मुताबिक, ज्यादातर बच्चे जो कोविड-19 से प्रभावित हैं, उनमें मौजूद लक्षण हल्का बुखार, खांसी, जुकाम और पेट से संबंधित समस्याएं हैं. कुछ को शरीर में दर्द, सिरदर्द, दस्त और उल्टी की भी शिकायत है.
पीएसआरआई अस्पताल साकेत में वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता शर्मा ने कहा कि इस दूसरी लहर में सभी आयु वर्ग के बच्चे, यहां तक कि एक वर्ष से कम आयु के बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कोविड की नई लहर में बच्चे पहले की तुलना में संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हैं. बच्चों के लिए स्थिति पिछले साल से काफी अलग है, जो कि चिंता बढ़ानी वाली बात है.
नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा, “अब अधिक बच्चे 103-104 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार से प्रभावित हो रहे हैं, जो 5-6 दिनों तक बना रहता है.” उन्होंने कहा कि ऐसे भी कुछ मामले हैं, जिनमें निमोनिया भी देखा गया है.
कुछ बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) जैसी अधिक गंभीर जटिलताएं भी देखी गई हैं.
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों में हल्के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और माता-पिता को बच्चों में संभावित डायरिया, सांस लेने में समस्या और सुस्ती जैसे लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने खासकर बुखार के साथ इस तरह के लक्षणों पर सतर्क रहने की सलाह दी.
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में ऐसी समस्याओं को पहचानने में माता-पिता को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि शुरूआती तौर पर एक्शन लेने से बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी.
गुप्ता ने कहा, “अगर बुखार 5-6 दिनों तक रहता है, तो माता-पिता को अपने बच्चों के रक्तचाप की निगरानी करनी चाहिए. हालांकि, पल्स ऑक्सीमीटर के साथ उनके ऑक्सीजन के स्तर की जांच करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनमें ऑक्सीजन संबंधी दिक्कतों का सामना करने की ज्यादा संभावना नहीं है. बच्चों के लिए यह डिवाइस अनफिट है.”
(एजेंसी से इनपुट)

 

कोरोना की दूसरी लहर से जीतना है तो इम्यूनिटी कमजोर करने वाली इन चीजों से बना लें दूरी

कोरोना की दूसरी लहर से जीतना है तो इम्यूनिटी कमजोर करने वाली इन चीजों से बना लें दूरी

Worst Food For Immunity: दुनिया में एक बार फिर कोरोना वापिस लौट आया है. और एक बार फिर कौरोना के आंकड़ों में तेजी देखी जा रही है. ऐसे में भारत के लिए कोरोना की यह दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है. युवाओं और बच्चों में भी अब कोरोना का संक्रमण फैल रहा है. ऐसे में जरूरी है कि आप सावधानी बरतें, घर से बाहर ना निकले और ऐसी चीजों का सेवन करें जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती हो. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन आपको कोरोना के इस समय में नहीं करना चाहिए. ये चीजें आपके इम्यून सिस्टम को काफी कमजोर बनाती हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
स्मोकिंग- कोरोना कीा दूसरी लहर काफी खतरनाक हैं. ऐसे में इससे बचने के लिए शराब और स्मोकिंग से आपको दूरी बना लेनी चाहिए. यह आपकी इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं.
फास्ट फूड- फास्ट फूड में शुगर, सोडियम, सैचुरेटेड फैट की मात्रा काफी अधिक होती है. इसे फाइबर ना के बराबर होता है. ऐसे में यह आपकी इम्यूनिटी को कमजोर कर सकता है.
मीठा- अगर आप मीठे के शौकीन हैं तो सावधान हो जाएं, क्योंकि अधिक मात्रा में मीठी चीजों का सेवन करने से इम्यूनिटी कमजोर होती है. इसलिए आज ही से ही अपने मीठा खाने की मात्रा को सीमित कर दें.
चाय और कॉफी- ज्यादा मात्रा में चाय और कॉफी पीना भी इम्यूनिटी को नुकसान पहुंचता है. इनमें कैफीन की मात्रा काफी अधिक होती है. इसलिए यह इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है.
आइसक्रीम- आइसक्रीम में अधिक मात्रा में सैचुरेटेड फैट और शुगर पाया जाता है. जो इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है. इसलिए आइसक्रीम का ज्यादा सेवन करने से बचें.

 

हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

हवा के जरिए तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे

coronavirus spreading through air? लैंसेट पत्रिका में शुक्रवार को प्रसारित एक नयी अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया कि इस बात को साबित करने के मजबूत साक्ष्य हैं कि कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 वायरस मुख्यत: हवा के माध्यम (coronavirus in Air) से फैलता है. हालांकि हवा के जरिए इमारतों के अंदर ट्रांसमिशन बाहर के मुकाबले ज्यादा है और वेंटिलेशन होने से यह कम हो जाता है.
ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा से ताल्लुक रखनेवाले छह विशेषज्ञों के इस आकलन में कहा गया है कि बीमारी के उपचार संबंधी कदम इसलिए विफल हो रहे हैं क्योंकि वायरस मुख्यत: हवा से फैल रहा है. अमेरिका स्थित कोलराडो बाउल्डेर विश्वविद्यालय के जोस लुई जिमेनजे ने कहा, ‘‘वायरस के हवा के माध्यम से फैलने के मजबूत साक्ष्य हैं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए यह आवश्यक है कि वे वायरस के प्रसार के वैज्ञानिक साक्ष्य को स्वीकार करें जिससे कि विषाणु के वायुजनित प्रसार को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.’’
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ में छपी एक स्टडी में कहा गया है कि ऐसे ट्रांसमिशन का हवा (aerosol) के जरिए होना ज्यादा आसान है बजाय बूंदों के. दरअसल रिपोर्ट में कहा गया है कि क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बीच ट्रांसमिशन देखा गया, बिना एक-दूसरे के कमरे में गए.(इनपुट भाषा)
 

सावधान : अगर आप में है ये लक्षण, तुरंत कराएं जाँच क्योकि बदल रहा है कोरोना का लक्षण

सावधान : अगर आप में है ये लक्षण, तुरंत कराएं जाँच क्योकि बदल रहा है कोरोना का लक्षण

नई दिल्ली, कोरोना की लहार ने भारत में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। गुरुवार को दो लाख से ज्यादा मामलों और हजार से ज्यादा मौतों ने साबित कर दिया है कि कोरोना की दिस्री लहार देश में कहर बनकर टूटी है। ऐसे में खुद को संक्रमण से बचाने के लिए आपके पास जो एक मात्र उपाय है वह है सावधानी बरतना। साथ ही जरूरी है कोरोना के लक्षणों पर नजर रखना। म्यूटेशन की वजह से कुछ दिन बाद ही कोरोना अपना रूप बदल रहा है जिस वजह से उसके लक्षणों में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

कोरोना के लक्षणों में बदलाव
कोलकाता के डॉक्टरों के अनुसार, बहुत उच्च संचरण दर के साथ-साथ कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के लक्षणों में मामूली और सूक्ष्म परिवर्तन हुए हैं, जिससे वायरस की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। डॉक्टर भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के लक्षणों में हुए बदलाव की बात कह रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो रही है, जिन्हें न बुखार आया और ना ही सर्दी-जुकाम हुआ। ये लोग तो बदन दर्द, सिर दर्द या पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे और जब उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट हुआ तो पता चला कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

डायरिया और बदन दर्द जैसे लक्षणों को इग्नोर न करें
डॉक्टरों की मानें तो पेट में दर्द, उल्टी-दस्त, डायरिया और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले करीब 40 प्रतिशत मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।ज्यादातर लोगों को अब तक यही लगता है कि सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार ही कोरोना के लक्षण हैं। इसलिए अगर उन्हें पेट दर्द, सिरदर्द या बदन दर्द की समस्या होती है तो वे डॉक्टर के पास जाने की बजाए घर पर ही घरेलू नुस्खों से इलाज करते रहते हैं, लेकिन जब काफी समय तक बीमारी ठीक नहीं होती तब वे डॉक्टर के पास जाते हैं और तब तक वायरस शरीर को काफी नुकसान पहुंचा चुका होता है।
ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बदन दर्द या पेट में दर्द की समस्या हो तो देर किए बिना कोरोना का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इलाज में जुटे डॉक्टरों का भी कहना है कि कोरोना के कई सारे स्ट्रेन सामने आने के बाद मरीजों को सांस लेने में दिक्कत बुखार और सूखी खांसी के लक्षण आम हो गए हैं। इसके साथ ही मरीजों में गंध का पता न चल पाना और खाने का स्वाद गायब होना भी आम लक्षणों में से एक है।

दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण में बदलाव
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना दूसरी लहर के दौरान बहुत उच्च संचरण दर के साथ आगे बढ़ रहा है जबकि मृत्यु दर कम है। वहीं खास बात यह है कि पिछली बार कोरोना संक्रमण के शिकार ज्यादातर 59-60 साल के बुजुर्ग लोग हो रहे थे वहीं इसी बार कोरोना 45-59 साल के बीच के लोगों को ज्यादा संक्रमित कर रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस उम्र के लोग बाहर अपने काम से या नौकरी करने के लिए ज्यादा निकलते हैं। साथ ही इस उम्र के लोगों का अभी टीकाकरण भी किया जा रहा है।

कोरोना के नए लक्षण
-थकान
-कमजोरी
-सुस्ती
-बदन दर्द
-डायरिया
-उल्टी
-पेट दर्द

-जोड़ो में दर्द
वहीं गौर करने वाली बात यह है कि सर्दी और बुखार जैसे लक्षण 10-15 फीसदी मामलों में नहीं नजर आ रहे हैं। साथ ही फेफड़ों में संक्रमण नहीं आने की एक वजह यह भी है कि युवाओं का इम्युन सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है।

कोरोना के पुराने लक्षण
-सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना
-सीने में दर्द या दबाव
-बोलने या चलने-फिरने में असमर्थ
-गले में खराश
-दस्त
-आंख आना
-सिरदर्द
-स्वाद और गंध न पता चलना

कम पाए जाने वाले लक्ष्ण
-खुजली और दर्द
-त्वचा पर चकत्ते आना या हाथ या पैर की उंगलियों का रंग बदल जाना।