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ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर निजी स्कूलों एवं महाविद्यालयों में हो रही जमकर वसूली, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में बुरा हाल

 ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर निजी स्कूलों एवं महाविद्यालयों में हो रही जमकर वसूली, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में बुरा हाल
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रायपुर। कोरोना काल के दौरान छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश में स्कूल एवं कॉलेज इन दिनों बंद है। बावजूद इसके नर्सरी से लेकर महाविद्यालयों में उपलब्ध पाठ्यक्रमों में विषयवार स्नातक एवं स्नातकोत्तर विषयों में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर मनमानी फीस वसूली की जा रही है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता निभाकर ट्यूशन फीस की आड़ में वसूली पर विद्यार्थियों में जमकर आक्रोश है। 

इधर मध्यप्रदेश में भी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के अधीनस्थ इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ कालेज में फर्जी पत्र भेजकर जुलाई माह में विद्यार्थियों के अभिभावकों अथवा माता पिता से 45 हजार रुपये के फीस जमा करने के लिए पत्र नहीं नोटिस भेजा गया है। 

ज्ञातव्य है कि महाविद्यालयों में पत्र भेजने की परंपरा रही है। इस संबंध में अधिवक्ता दीपाली पांडेय से चर्चा करने पर उन्होंने इंदौर इंस्टीट्यूट की एचओडी मनप्रीत कौर राजपाल द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में नोटिस शब्द पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सख्त कार्रवाई की मांग की है। छत्तीसगढ़ में 22 निजी स्कूल संस्थानों के डायरेक्टरों द्वारा दायर की गई याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने फैसला लेते हुए केवल कोरोना काल ट्यूशन फीस लेने की अपील की है जिसपर पालकों ने कड़ी आपत्ति करते हुए पुन: उच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिका दायर की है। सीबीएसई स्कूलों की याचिका पर उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा 24 अगस्त को सुनवाई की जाएगी तब तक स्कूलों पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिये गये अंतरिम आदेश की व्यवस्था कायम रहेगी। निजी स्कूलों कॉलेजों की मनमानी पर छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा लापरवाही बरतने पर ऑनलाइन ठगी का धंधा फलफूल रहा है। पढ़ाई कम बल्कि पढ़ाई के नाम पर पैरेंट्स के अनुसार केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। विशेष तकलीफ छोटे बच्चे के माता-पिता को है जिनके पास खरीदने के लिए ना तो एनड्राइड मोबाइल है न ही लेपटॉप अथवा कंप्यूटर की सुविधा है। जिन परिवारों में दो से अधिक बच्चे है वहां लॉकडाउन के चलते कई परिवार अपने संस्थानों से जहां नौकरी से निकाल दिये गये हैं वहीं ऑनलाइन पढ़ाई की समझ कम शिक्षित माता पिता को नहीं है ऐसी स्थिति में बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय है। 

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