मानसून सत्र से पूर्व मोदी मंत्रिमंडल में होगा विस्तार, राज्योंं से शुरू हुआ विमर्श का सिलसिला
नई दिल्ली | मोदी सरकार की दूसरी पारी का पहला मंत्रिमंडल विस्तार संसद के मानसून सत्र के पहले हो सकता है। सत्र अगस्त महीने के दूसरे हफ्ते में बुलाए जाने की संभावना है। इससे पहले विस्तार की संभावनाओं पर मंथन का सिलसिला शुरू हुआ है। इस क्रम में राज्योंं से विमर्श का सिलसिला भी शुरू कर दिया गया है। दरअसल विस्तार के जरिए प्रधानमंत्री अपने कई मंत्रियों को काम से भारी दबाव से मुक्त करना चाहते हैं।
सूत्र के मुताबिक हालांकि अभी चर्चा प्रारंभिक दौर में है। विस्तार की संभावनाओं के मद्देनजर ही भाजपा की केंद्रीय टीम की सूची तैयार होने के बावजूद जारी नहींं की गई है। हालांकि इस सिलसिले में कुछ राज्यों के साथ विमर्श किया गया है।
कई मंत्रियों पर काम का बोझ ज्यादा
दरअसल वर्तमान मंत्रिमंडल मेंं करीब एक दर्जन मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं। कई मंत्री तो तीन-तीन मंत्रालयों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। विस्तार केजरिए इन मंत्रियोंं के काम केबोझ को कम करने की योजना है। गौरतलब है कि इस समय पीयूष गोयल रेलवे के साथ कॉमर्स, नरेंद्र सिंह तोमर कृषि मंत्रालय के साथ पंचायती राज और ग्रामीण विकास, प्रकाश जावड़ेकर सूचना प्रसारण, वन एवं पर्यावरण के साथ भारी उद्योग, रविशंकर प्रसाद कानून के साथ इलेक्ट्रोनिक्स-आईटी, निर्मला सीतारमण वित्त के साथ कार्पोरेट, धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम के साथ स्टील, प्रहलाद जोशी संसदीय कार्य के साथ कोयला, हर्षवर्धन स्वास्थ्य के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान और रामविलास पासवान उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मार्च में भी हुई थी एक चर्चा
बजट सत्र के बीच में मार्च महीने के दौरान भी मंत्रिमंडल विस्तार पर शीर्ष स्तर पर मंथन हुआ था। हालांकि उस दौरान कोरोना वायरस के दस्तक और फिर चीन के साथ एलएसी पर तनाव के कारण इस पर चर्चा आगे नहीं बढ़ पाई। अब इस महीने के पहले हफ्ते से विस्तार पर नए सिरे से विमर्श का दौर शुरू हुआ है।
सिंधिया को आश्वासन और पासवान पेच
हाल ही में राज्यसभा के जरिए उच्च सदन पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया को शीर्ष नेतृत्व की ओर से जल्द मंत्री बनाने का आश्वासन मिला है। सिंधिया मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव से पहले मंत्री बनना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान अपनी जगह अपने पुत्र चिराग पासवान को मंत्री बनाने के इच्छुक हैं। फिर दूसरी पारी में सरकार के गठन के दौरान कुछ सहयोगी दलों को सरकार में प्रतिनिधित्व नहींं मिला था। सूत्रों का कहना है कि नीतीश बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में जदयू को शामिल कराना चाहते हैं।







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