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कुछ तो सस्ता हुआ पेट्रोल,डीजल

कुछ तो सस्ता हुआ पेट्रोल,डीजल
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कैबिनेट की बैठक में सरकार ने कई अहम फैसले किए हैं। इसमें धान खरीदी एक दिसंबर से,स्कूल सभी बच्चों की उपस्थिति के साथ खुलने तथा पेट्रोल व डीजल के दाम में कमी सबसे ज्यादा अहम फैसले हैं। धान खरीदी एक दिसंबर से शुरू होनी है और अभी तक बोरों की ठीक ठीक व्यवस्था नहीं हुई है। सरकार के मंत्री ने कहा था कि खरीदी के पहले बोरों की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन 23 नवंबर तक नहीं हुई है। इससे किसानों को परेशानी होगी लेकिन सरकार को कोई परेशानी नहीं है। वह तो कह सकती है कि बोरे केंद्र सरकार ने नहीं दिए। पिछली बार बोरा संकट होने पर सरकार ने यही कहा था। सीएम बघेल ने तो इसके लिए पीएम को चिट्ठी भी लिख दी है। अब सारी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। धान खरीदी में बोरों के कारण परेशानी होती है तो उसके लिए केंद्र सरकार दोषी होगी। राज्य में रोज 20 से ज्यादा कोरोना मरीज मिलने के बाद भी सभी स्कूलों को पूरी उपस्थिति के साथ खोलने का फैसला किया गया है। शिक्षा की दृष्टि से यह ठीक कहा जा सकता है लेकिन बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए की गई सुविधाओं की द़ष्टि से यह ठीक नहीं कहा जा सकता। यह सरकार ने अच्छा किया है कि आनलाइन पढ़ाई बंद नहीं की है। इससे जो पालक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते वह घर में पढ़ाई करवा सकते हैं। पालक अपने बच्चों के लिए कोई रिस्क लेना नहीं चाहते हैं, फिर बच्चों को टीका भी नहीं लगा है। जहां तक पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने का सवाल है तो सरकार अपने वादे के अनुरूप पड़ोसी राज्या की तुलना में कुछ पैसे कम किया है। सरकार ने पेट्रोल में 77 -78 पैसे तथा डीजल में 1.45-1.47 रुपए कम किए हैं। वादे के अनुरूप पेट्रोल मप्र महाराष्ट्र से से छह व आठ रूपए सस्ता है। ओडिशा व झारखंड में चार पैसा, तीन रुपए सस्ता है। इसी तरह डीजल मप्र,ओडिशा व झारखंड में छत्तीसगढ़ से सस्ता है। केंद्र सरकार ने तो पेट्रोल व डीजल पर कुल मिलाकर 15 रुपए की कमी की है, इस हिसाब से देखा जाए तो भूपेश सरकार ने बहुत ही कम दाम घटाए हैं। माना जाता है कि ज्यादातर राज्यों ने पांच से छह रुपए की कमी है। जबकि छत्तीसगड़ में तो तीन रुपए की कमी भी नहीं की गई है। इसके बाद भी सरकार को एक हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है तो यह भी सोचना चाहिए कि इससे जनता को फायदा हो रहा है। विपक्ष और लोग तो कहेंगे ही कि राज्य सरकार ने जनता को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाया। भाजपा तो पूछेगी ही कि पेट्रोल डीजल में 15 रुपए की कटौती को ऊंट के मुंह में जीरा कहा गया था तो दो रुपए तेईस पैसे की कमी को क्या कहा जाना चाहिए। 


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