नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |

श्रीपद्मनाभ स्वामी मंदिर प्रबंधन पर शाही परिवार का अधिकार बरकरार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

श्रीपद्मनाभ स्वामी मंदिर प्रबंधन पर शाही परिवार का अधिकार बरकरार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Share

नई दिल्ली | उच्चतम न्यायालय ने केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन पर त्रावणकोर के पूर्ववर्ती राजपरिवार के अधिकार को सोमवार को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने त्रावनकोर रॉयल परिवार की अपील मंजूर कर ली। राज परिवार ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। तिरुवनंतपुरम के जिला जज की अध्यक्षता वाली कमिटी फिलहाल मंदिर की व्यवस्था देखेगी।  

ग़ौरतलब है कि शीर्ष अदालत में केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन का विवाद नौ सालों से लंबित था। मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रु. की संपत्ति है।
माना जाता है कि यह भारत का सबसे अमीर मंदिर है। कुछ साल पहले यह मंदिर तब चर्चा में आया था जब एक लाख करोड़ से अधिक का खजाना वहां मिला था, कहते हैं कि इससे कहीं अधिक वहां के तहखानों में बंद है। अब यह मंदिर एक बार फिर से चर्चाओं में है। 2016 में यहां से 186 करोड़ रुपये का सोना चोरी भी हो गया था। 
कहा जाता है कि 10वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। हालांकि कहीं-कहीं इस मंदिर के 16वीं शताब्दी के होने का भी जिक्र है। लेकिन यह काफी साफ है कि 1750 में त्रावणकोर के एक योद्धा मार्तंड वर्मा ने आसपास के इलाकों को जीत कर संपदा बढ़ाई। त्रावणकोर के शासकों ने शासन को दैवीय स्वीकृति दिलाने के लिए अपना राज्य भगवान को समर्पित कर दिया था। उन्होंने भगवान को ही राजा घोषित कर दिया था। मंदिर से भगवान विष्णु की एक मूर्ति भी मिली है जो शालिग्राम पत्थर से बनी हुई है। 
 

Share

Leave a Reply