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छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर 2500 करोड़ का बिजली बिल बकाया, फिर भी स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी—आखिर कब होगा भुगतान?

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर 2500 करोड़ का बिजली बिल बकाया, फिर भी स्मार्ट मीटर लगाने की तैयारी—आखिर कब होगा भुगतान?
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 छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ में एक तरफ आम नागरिकों को समय पर बिजली बिल नहीं भरने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी जाती है, वहीं दूसरी ओर राज्य के सरकारी विभाग बिजली के सबसे बड़े बकायेदार बन चुके हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 2500 करोड़ रुपये का बिजली बिल सिर्फ सरकारी विभागों पर बकाया है। इसके बावजूद बिजली विभाग इन्हीं दफ्तरों में स्मार्ट मीटर लगाने की कवायद में जुटा है।

कौन हैं सबसे बड़े बकायेदार?

बिजली वितरण कंपनी के आंकड़ों के अनुसार:

    • नगरीय प्रशासन विभाग पर सबसे अधिक 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है।
  • इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और जल संसाधन विभाग भी महीनों से बिल नहीं चुका रहे हैं।
  • वर्ष 2022 में यह बकाया केवल 837 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 2489 करोड़ रुपए के करीब पहुंच चुका है।

बिल भुगतान नहीं, फिर भी स्मार्ट मीटर?

सरकार ने प्रदेश को डिजिटल और स्मार्ट बनाने की दिशा में 1.29 लाख सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना शुरू की है। लेकिन अब तक केवल 12 हजार दफ्तरों में ही स्मार्ट मीटर लग पाए हैं। सवाल यह है कि जब पहले से बिजली बिल बकाया है, तो प्रीपेड सिस्टम वाले स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली कैसे चलेगी?

बिजली विभाग की दोहरी नीति?

बिजली विभाग आम जनता को बिजली की बचत और समय पर भुगतान के लिए प्रेरित करता है। एक महीना बिल बकाया रहने पर आम उपभोक्ता का कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन करोड़ों की राशि बकाया होने के बावजूद सरकारी विभागों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियमित रूप से पत्राचार और नोटिस भेजे जाते हैं। कुछ विभाग जवाब देते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में फाइलें आगे बढ़ती हैं, भुगतान नहीं।

कब होगी कार्रवाई?

पावर कंपनी का दावा है कि भुगतान न होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस पर कोई समय-सीमा स्पष्ट नहीं की गई है। नतीजतन, बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है और राजकोष पर भार बनता जा रहा है।

इससे एक अहम सवाल ये उठने लगा है कि जब सरकारी विभाग खुद बिजली बिल भुगतान में लापरवाह हैं, तो स्मार्ट मीटर और ऊर्जा सुधार की योजनाएं आखिर किस दिशा में जा रही हैं?



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