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चाय और कॉफी में चीनी की जगह इन चीजों का कर सकते हैं इस्तेमाल

चाय और कॉफी में चीनी की जगह इन चीजों का कर सकते हैं इस्तेमाल

कई लोग अपने दिन की शुरूआत चाय या फिर कॉफी के सेवन से करना पसंद करते हैं, लेकिन इनमें मिलाई जाने वाली चीनी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से अगर आप चाय और कॉफी में मिठास के लिए चीनी की जगह कुछ अन्य विकल्प खोज रहे हैं तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि चाय और कॉफी में चीनी की बजाय किन चीजों को मिलाया जा सकता है।
मेपल सिरप
मेपल सिरप कई तरह के मिनरल्स और विटामिन्स के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट गुण से समृद्ध होता है। यहीं नहीं, इसमें कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है, इसलिए इसे चीनी का एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है। आप चाहें तो अपनी चाय या कॉफी में चीनी की जगह मेपल सिरप को मिलाकर उनका स्वाद बढ़ा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आप मेपल सिरप को कई तरह के मीठे व्यंजनों का हिस्सा बना सकते हैं।
गुड़
गुड़ भी चीनी का एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है क्योंकि इसका सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। गुड़ में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और कार्बोहाइड्रेट जैसे कई पोषक तत्व के साथ-साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण और एंटी-एलर्जिक गुण आदि शामिल होते हैं, इसलिए इसे स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। आप चाहें तो अपनी चाय या कॉफी के लिए गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि गुड़ को चाय और कॉफी को बनाने के बाद डालना है।
कोकोनट शुगर
आजकल बाजार में कई तरह की चीनी मौजूद है, जिनमें कोकोनट शुगर यानी नारियल से बनी हुई चीनी भी शामिल है। यह चीनी कई तरह के पोषक तत्वों से समृद्ध होती है, इसलिए इन दिनों यह काफी प्रचलन में है और फिटनेस फ्रीक लोगों के लिए अच्छी मानी जा रही है। इसलिए अगर आप चाहें तो अपनी चाय और कॉफी में कोकोनट शुगर को मिलाकर उनकी मिठास बढ़ा सकते हैं।
शहद
शहद एक बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है क्योंकि इसमें कई प्रकार के खनिज व पोषक तत्व सम्मिलित होते हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें एंटी-इंफेक्शन, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं, इसलिए इसे चाय या फिर कॉफी में चीनी की जगह मिलाना काफी अच्छा विचार हो सकता है। इससे न सिर्फ इन चीजों में मिठास आएगी बल्कि यह कई तरह से स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। आप चाहें तो स्मूदी और शेक आदि में भी शहद को मिला सकते हैं।

 

कोरोना वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी कब तक हो जाती है खत्म, भारत में हुई रिसर्च का बड़ा खुलासा

कोरोना वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी कब तक हो जाती है खत्म, भारत में हुई रिसर्च का बड़ा खुलासा

नई दिल्‍ली. लगभग 30 फीसदी यानी हर 10 में से 3 लोगों में कोरोना वैक्‍सीन का असर मात्र 6 महीने तक रहता है. इसके बाद, इससे बनी इम्‍यूनिटी उनमें कमजोर या खत्‍म हो जाती है. यह तथ्‍य भारत में हुई एक रिसर्च से सामने आया है. यह रिसर्च हैदराबाद के AIG अस्‍पताल और एशियन हेल्‍थ केयर के साथ मिलकर पूरी की गई है. इसमें करीब 1600 से अधिक लोगों को शामिल किया गया था. इन सभी लोगों को वैक्‍सीन के दोनों डोज लग चुके थे.

AIG अस्‍पताल के चैयरमैन डॉ नागेश्‍वर रेड्डी ने बताया कि इस रिसर्च का उद्देश्‍य लोगों को वैक्‍सीन के बाद मिली इम्‍यूनिटी के असर को जानना था. इसके साथ ही यह पता लगाना था कि किस आयुवर्ग में बूस्‍टर डोज की ज्‍यादा जरूरत है. उन्‍होंने बताया कि रिसर्च में लोगों की एंटीबॉडी लेवल की जांच की गई. कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी का स्‍तर कम से कम 100 एयू प्रति एमएल होना चाहिए. इससे कम होने पर संक्रमित होने का खतरा ज्‍यादा होगा.

डॉ नागेश्‍वर रेड्डी ने बताया कि इम्‍यूनिटी का स्‍तर कम से कम 100 एयू प्रति एमएल होना चाहिए. लेकिन जिनमें इसका स्‍तर 15 तक पहुंच गया हो, उसमें मानना होगा कि इम्‍यूनिटी खत्‍म हो गई है. डॉ रेड्डी ने बताया कि ऐसा पाया गया है कि हाइपर टेशन और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 40 साल से ऊपर के लोगों की इम्‍यूनिटी कमजोर हो गई है. करीब 6 प्रतिशत ऐसे भी थे, इनमें इम्‍यूनिटी का स्‍तर न्‍यूनतम स्‍तर पर था.

बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में लंबे समय तक इम्‍यूनिटी बनी रहती है. गंभीर रोगों से जूझ रहे 40 साल से अधिक आयु वाले मरीजों में यह एंटीबॉडी 6 महीने में कम हो जाती है. 

जीवन का अनुशासन देगा इस कोरोना महामारी से मुक्ति

जीवन का अनुशासन देगा इस कोरोना महामारी से मुक्ति

जिस तेजी से कोरोना की लहर देश में फैली है, उसने चकित किया है। कहां तो यह सोचा जा रहा था कि भारत में टीकाकरण की रिकॉर्ड सफलता के कारण, एक बरस में ही लोगों को डेढ़ सौ करोड़ टीका लग जाने के कारण कोरोना की तीसरी लहर का मार्ग अवरुद्ध हो जायेगा। कोरोना की दूसरी लहर का दबाव बीते वर्ष के पूर्वार्द्ध में बहुत कम हो गया था। सोचा जा रहा था कि अब पश्चिमी देशों के विपरीत भारत में कोरोना लहर के तीसरे चरण का संक्रामक, रुग्ण एवं मारक प्रभाव या तो होगा ही नहीं, यदि होगा भी तो बहुत हल्का और विलम्ब के साथ।
बीते वर्ष बेशक देश को कुछ खुले महीने मिल गये, जहां टीकाकरण का बोलबाला रहा और संक्रमण की दहला देने वाली खबरें कम होती चली गयीं। देश ने राहत की सांस ली थी। आम लोगों ने तो जैसे महामारी को अलविदा कह दिया। शारीरिक अंतर और मास्क पहनने को तिलांजलि देकर ये सब लोग आम दिनों की तरह पुन: अपने काम में जुट गये। परिणाम सबके सामने हैं। अपनी जिंदगी को पुन: पटरी पर लाने के लिये, किसान, उद्यमी, निवेशक और कामगार जुटे थे, अब उखड़ते नजर आ रहे हैं।
वैसे पिछले वर्ष के बीतने के साथ ही नये वर्ष के पहले पखवाड़े में न केवल केंद्रीय सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने पुष्टि की कि देश के सात में से छह उत्पादन घटकों ने वर्ष 2020-21 में कोरोना पूर्व के स्तर को स्पर्श कर लिया। रिजर्व बैंक ने स्वीकार किया कि इस वर्ष देश आर्थिक विकास दर में वृद्धि करके 9.2 प्रतिशत प्राप्त कर लेगा, जबकि इससे पहले यह अनुमान 8.5 प्रतिशत का था। जहां तक इससे पिछले वर्ष का संबंध है, कोरोना की प्रथम लहर के प्रहार और एक पूर्ण बंद व एक अपूर्ण बंद के कारण यही आर्थिक विकास दर गिर कर शून्य से भी नीचे -7 प्रतिशत पर चली गयी थी। सकल घरेलू उत्पाद भी कोरोना पूर्व साल 2019 की तुलना में बहुत नीचे चला गया था। नतीजा, बेकारी में बेतहाशा वृद्धि हुई जितनी देश ने पिछले पैंतालीस बरस में नहीं देखी थी और महंगाई का स्तर बढ़कर मनमोहन काल तक चला गया। इसी को नियंत्रित करने की घोषणा मोदी सरकार ने अपनी दूसरी शासन पारी में की थी।
केंद्रीय सरकार और रिजर्व बैंक के इस विकास मूल्यांकन की पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय मानक एजेंसियों ने भी कर दी है। वर्षांत के उत्सवों वाले चार महीनों में आम लोगों की ओर से बढ़ती डिमांड ने देश के बाजारों में मांग का अवसाद हर लिया। इससे पहले कोरोना की असाधारण परिस्थितियों में न तो भारत सरकार द्वारा जारी किये गये आर्थिक बूस्टर और न ही रिजर्व बैंक द्वारा जारी रखी गयी उदार साख नीति काम कर रही थी। लोगों का जिंदगी के सामान्य हो जाने में विश्वास लौटा तो ये सभी आर्थिक प्रयास सफल होने लगे।
इस बीच सरकार की आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की घोषणा और वित्त मंत्री द्वारा कुटीर, लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन की प्रतिबद्धता निवेशकों में उत्साह भर रही थी। तभी तो शेयर मार्केटों में जिंदगी की उछाल और विकास दर और सकल घरेलू उत्पाद में पिछली गिरावट को पूरा कर आगे बढ़ जाने की ललक दिखायी देने लगी। नये बरस की शुरुआत में मिले आंकड़े साहस बढ़ा रहे थे कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र ने तरक्की की है, इसी तेवर के कारण देश 9.2 प्रतिशत विकास दर पर पहुंच जायेगा, जो कि भारत के लिए स्वत:स्फूर्त दर है।
लेकिन नये बरस की शुरुआत में कोरोना की तीसरी लहर के आगमन का यह अप्रिय कुठाराघात! ओमीक्रोन वायरस के संक्रमण के समाचार कर्नाटक से मिले थे। देखते ही देखते ये समाचार देश के हर राज्य से आने लगे। वहीं इसके साथ दूसरी लहर का डेल्टा प्लस भी तेज होकर अपना संक्रामक प्रभाव दिखाने लगा। तेजी इतनी कि अगर पहली लहर में एक लाख लोगों के संक्रमण का आंकड़ा 149 दिन में पहुंचा था, दूसरी लहर में पचास दिन में और अब मात्र ग्यारह दिन में दोनों वायरसों से संक्रमण का आंकड़ा एक लाख से ऊपर हो गया। इसकी गिरफ्त में केवल महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली ही नहीं आये, बल्कि पंजाब और हरियाणा भी इसकी गंभीरता झेलने लगे। पंजाब में तो पांच दिनों में संक्रमण ने तीन गुना हो जाने की तेजी दिखायी।
देश के लिए इस महामारी जिसे दोनों वायरसों के संक्रमण के कारण डेल्माक्रोन कहा जा रहा है, की पुन: अग्निपरीक्षा शुरू हो गयी। लेकिन इस अग्निपरीक्षा से न केवल प्रशासन, बल्कि किसानों, निवेशकों और कामगारों को भी सामना करके सफल होकर निकलना है। जो गलतियां पिछले वर्ष के शुरू के महीने में दूसरी लहर में झेलीं, वह इस बार न हों।
यह लहर हर स्तर पर अधिक तैयारी और अधिक साहस की अपेक्षा कर रही है। पहले तो दोनों महामारियों के प्रकोप से उबरकर संवरती हुई अर्थव्यवस्था को बचाना है। पूर्ण और अपूर्ण लॉकडाउन चलती अर्थव्यवस्था को रोक अवरोध और क्षरण का माहौल पैदा कर देते हैं। इसलिए इस बार सम्पूर्ण के आदेशों के स्थान पर परिस्थितियों के अनुरूप स्थानीय बंदिशों के आदेश दिये जायें और स्थिति सुधरते ही उन्हें हटा दिया जाये।
कटु सत्यों की अवहेलना ही हमें बार-बार इस मझधार में ले आती है। क्या कारण था कि जबकि पश्चिमी देशों में कोरोना की तीसरी लहर रंग दिखाने लगी थी, हमने अपने देश में इसके संभावित आगमन की उपेक्षा कर के टीकाकरण की गति को धीमा कर दिया। लोगों ने अपने व्यावहारिक जीवन में सामाजिक अंतर न रखने और चेहरों पर मास्क न पहनने का जीवन फिर से जीना शुरू कर दिया। रिपोर्ट तो यह कहती है कि भारत ने अपने द्वारा निर्मित टीकों का एक हिस्सा जरूरतमंद देशों को देना शुरू कर दिया और टीका लगाने वाली सिरिंजों का उत्पादन भी कम हुआ।
अब इन हिमालय जैसी भूलों के सुधार के लिए प्रचार अभियान चलाया जा रहा है लेकिन प्रश्न है कि देश ने कोरोना लहरों के पुन: आगमन की अनिवार्य संभावना को अभी तक स्वीकार क्यों नहीं किया? उसके अनुरूप अपनी जीवनशैली को क्यों नहीं बदला? ये टीके कोरोना निरोधी हैं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले। सही है कि भारत द्वारा बनाये गये कोवैक्सीन टीके सफल रहे हैं। लेकिन शोध का यह कारवां द्रुत गति से चलता हुआ अभी तक कोरोना के सटीक उपचार तक क्यों नहीं पहुंचा? पश्चिम के चिकित्सा विज्ञानियों ने इसके उपचार के लिए एंटी वायरल दवा विकसित की है। इसके दाम घटाकर, सहज उपलब्ध बनाकर अभी तक अपने देश की हर दवा मंडी तक पहुंच जाना चाहिये था। ऐसा क्यों नहीं हुआ?
चिकित्सा ढांचे का विकास हो। साथ ही दवा मंडियों में पैदा हो जाने वाली जमाखोरी और कालाबाजारी का निराकरण जरूरी है, यह कमी पिछली लहर के समय इस देश के लोगों ने झेली।
सामान्य जिंदगी को ओर लौटने के नाम पर हमेशा प्रशासनिक व्यवस्था और आम आदमी द्वारा पुराने ढर्रे की ओर लौटना क्यों होता है? सामान्य जिंदगी के नाम पर इस अस्वस्थ ललक ने ही आज पूरे देश को महामारी की विकट लहर के तीसरे दौर के समक्ष खड़ा कर दिया है। स्थिति के अनुरूप जिंदगी जीने के ढंग में स्थायी परिवर्तन अर्थात शारीरिक अंतर रखने और मास्क पहनने का अनुशासन ही इस देश के लोगों को अपनी हाराकिरी से बचा सकता है। इसी प्रकार, मुसीबत पडऩे पर ही प्रशासन सचेत हो, के स्थान पर अगर सदैव सचेत और ठोस निर्णय लेने की सरकारी तत्परता उपज सके, तो सम्भवत: इन क्रमश: आ धमकने वाले मौत के हरकारों से देश को छुटकारा मिल जाये।
- सुरेश सेठ
लेखक साहित्यकार एवं पत्रकार हैं।

 

कोरोना की बूस्टर डोज है जरूरी, लगवाने से पहले जान लें ये 5 बातें

कोरोना की बूस्टर डोज है जरूरी, लगवाने से पहले जान लें ये 5 बातें

कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए लोगों को बूस्टर शॉट लगाया जा रहा है. वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को ये डोज दी जा रही है. हालांकि अभी सिर्फ 60 साल से अधिक आयु के लोगों, हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को ही बूस्टर शॉट दिया जा रहा है. जो लोग बूस्टर डोज ले रहे हैं उन्हें कई और बातों का भी ध्यान रखना जरूरी है. बूस्टर डोज लेने के लिए आपके वैक्सीन की सेकेंड डोज और बूस्टर के बीच 9 महीने का गैप होना जरूरी है. यानी अप्रैल 2020 से पहले जिन लोगों को दूसरा डोज लग चुका है अभी सिर्फ वही लोग बूस्टर डोज लगवा सकते हैं. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि इसके लिए आपको नए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी. आप सेंटर पर जाकर भी सीधे वैक्सीन लगवा सकते हैं. अगर आप भी कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने वाले हैं तो ये बातें जान लीजिए.
1- क्यों जरूरी है बूस्टर डोज? -
रिसर्च में सामने आया है कि बूस्टर डोज एंटीबॉडी के लेवल को बढ़ा देती है. इसके बाद इम्यूनिटी पहले से ज्यादा मजबूत हो जाती है. हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि आपको कोरोना का खतरा नहीं है, लेकिन नए वैरिएंट ओमिक्रोन के खतरे को इससे काफी कम किया जा सकता है.
2- किसे लग सकता है बूस्टर शॉट? -
बूस्टर डो फिलहाल हेल्थ वर्कर या फ्रंटलाइन वर्कर को लगाए जा रहे हैं. ऐसे लोग जिन्होंने कोविड वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी हैं. इसके अलावा 60 साल के अधिक उम्र के बीमार बुजुर्गों को भी बूस्टर डोज लगाई जा रही है. बूस्टर डोज में फ्रंटलाइन वर्कर के परिवार के लोग शामिल नहीं होंगे.
3- कौन से वैक्सीन का बूस्टर शॉट लगाया जाएगा –
आपने पहले जिस वैक्सीन दोनों डोज ली हैं आपको उसी का बूस्टर शॉट लगाया जाएगा. अगर आपने कोवीशील्ड की दोनों डोज लगवाई है तो आपको कोवीशील्ड का बूस्टर शॉट लगेगा.
4- दूसरी डोज के कितने दिन बाद लगेगा बूस्टर शॉट -
आपकी दूसरी डोज और बूस्टर लगवाने के बीच 39 हफ्ते यानी 9 महीने का अंतर होना जरूरी है. यानि अगर आपने अप्रैल में दूसरी डोज लगवाई है तो ही आपको बूस्टर डोज लग सकती है.
5- कौन सी बीमारियों के मरीजों को लगेगा बूस्टर डोज? -
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो आपको बूस्टर शॉट लग सकता है. कॉर्डियोवैस्कुलर डिसीज, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट रेसिपिएंट, कैंसर, सिकल सैल डिसीज, डायबिटीज, किडनी डिसीज जैसी बीमारी से पीड़ित मरीज को बूस्टर शॉट लग सकता है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

 

सर्दियों में बार-बार हो रही है खांसी तो अपनाए यह घरेलू उपाय, जल्द मिलेंगे राहत

सर्दियों में बार-बार हो रही है खांसी तो अपनाए यह घरेलू उपाय, जल्द मिलेंगे राहत

दुनियाभर के लोग इन दिनों कोरोना संक्रमण से बचने के उपायों को खोज रहे हैं। ऐसे में इन उपायों के बीच जब लोगों को सर्दी-खांसी हो जाए तो लोग परेशान हो जाते हैं और घरेलु उपाय खोजने लगते हैं। अब आज हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हे अपनाकर आप खांसी से छुटकारा पा सकते हैं। आइए बताते हैं।
खांसी के कारण-
वायरल संक्रमण के कारण
सर्दी या फ्लू के कारण
प्रदूषण और धूल-मिट्टी से युक्त वातावरण के कारण।
अधिक धूम्रपान करने के कारण।
टीबी या दमा रोग होने के कारण।
खांसी के घरेलू उपाय-
* सूखी खांसी में शहद बहुत ही लाभदायक होता है। एक चम्मच शहद को गर्म दूध में मिलाकर पिएं।
* तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पिएं। इससे आपको राहत मिलेगी।
* तुलसी की पत्तियों का रस, एवं अदरक के रस के साथ मिलाकर शहद के साथ खाएं।
* खांसी के लिए एक चम्मच अदरक के रस को शहद के साथ चाट लें।
* आधा चम्मच प्याज का रस, और एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से खांसी में आराम मिलता है।
* गिलोय के रस को रोज सुबह-शाम खाली पेट पीने से पुरानी खांसी भी ठीक हो जाती है।
* अनार के छिलकों को सुखा लें। उसके बाद एक-एक टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहें। क्योंकि इससे सूखी खांसी में बहुत लाभ मिलता है।
* कफ वाली खांसी के लिए एक चम्मच सरसों के बीजों को एक गिलास गर्म पानी में उबाल लें। उसके बाद अच्छी प्रकार उबल जाने पर पानी को पिएं। इससे जमा हुआ कफ बाहर निकलने लगता है। जी दरअसल सरसों के बीज में मौजूद सल्फर जमे हुए कफ को बाहर निकालने में मदद करता है।

 

सर्दी में गाजर खाने से होते हैं चौकाने वाले फायदे

सर्दी में गाजर खाने से होते हैं चौकाने वाले फायदे

गाजर खाना बहुत कम लोगों को पसंद होता है लेकिन ठंड के दिनों में गाजर बहुत बेहतरीन होती है। ऐसे में इसे खाने से कई चौकाने वाले फायदे होते हैं और आज हम आपको उन्ही फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं गाजर के फायदे।
गाजर के फायदे-
माइग्रेन के दर्द से राहत-
माइग्रेन से राहत दिलाने में गाजर लाभकारी है। इसके लिए इसके पत्तों को घी से चुपड़कर गर्म करके उनका रस निकालकर 2-3 बूंद नाक और कान में डालने से दर्द से राहत मिलती है।
आँखों के लिए-
गाजर आँखों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जी हाँ, इसके लिए आप 250 ग्राम सौंफ को साफ करके कांच के पात्र में रखें, उसके बाद इसमें बादामी रंग की गाजरों के रस दें। वहीं सूख जाने के बाद 5 ग्राम रोज रात में दूध के साथ सेवन करने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
मुंह के रोगों में फायदेमंद –
गाजर का औषधीय गुण मुँह के रोगों में फायदेमंद होता है। ऐसे में गाजर के ताजे पत्तों को चबाने से मुँह का अल्सर, मुख में दुर्गंध, दांत के जड़ से ब्लीडिंग होने तथा पूयस्राव (पस डिस्चार्ज) में लाभ मिलता है।
खांसी –
खांसी से परेशान है तो गाजर से इसका इलाज किया जा सकता है। इसके लिए गाजर के 40-60 मिली रस में चीनी तथा काली मिर्च के चूर्ण को डालकर सेवन करने से कफ निकलने लगता है जिससे कफ संबंधी समस्या से राहत मिलती है।
एनीमिया –
खून में लौह की कमी होने के कारण लाल रक्तकण नहीं बन पाते हैं, जो एनीमिया होने का कारण होता है। ऐसे में गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालकर खीर की तरह खाने से हृदय को ताकत मिलती है, खून की कमी मिटती है।
 

टीकाकरण अभियान ने पूरे किए एक साल, जानें कैसा रहा 1 से 157 करोड़ खुराक तक का सफर…

टीकाकरण अभियान ने पूरे किए एक साल, जानें कैसा रहा 1 से 157 करोड़ खुराक तक का सफर…

नई दिल्ली, आज देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। दरअसल, कोरोना महामारी को हराने के लिए चलाए गए टीकाकरण अभियान के आज एक साल पूरे हो गए। आज के ही दिन 16 जनवरी 2021 को देश में स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाए जाने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से कोरोना टीके दिए जाने का सिलसिला लगातार जारी है। अबतक देश में वैक्सीन की 157 करोड़ खुराक लगाई जा चुकी हैं। हालांकि अभी भी पूरी आबादी को टीका लगाने में बहुत समय लगेगा।
थोड़ी चिंता करने वाली बात यह है कि देश में 8 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे अब तक एक भी टीका नहीं लगा। वहीं, 31 फीसदी आबादी ऐसी है, जिन्हों अब तक दोनों टीके नहीं लगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मौके पर खुशी जताते हुए एक ट्वीट किया उन्होंने लिखा कि भारत में अब तक 156 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराकें लगा दी गई हैं। जिनमें से 99 करोड़ खुराक ग्रामीण भारत में दी गई हैं। हमारी 70 फीसदी वयस्क आबादी पूरी तरह से टीकाकृत है। कार्यक्रम शुरू होने के बाद से तीन करोड़ से अधिक किशोर-किशोरियों को उनकी पहली खुराक मिल चुकी है। भारत ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया है।
बीते एक साल में टीकाकरण का पड़ाव
16 जनवरी 2021 को टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी। देश में अब तक 18+ की 87 करोड़ आबादी को पहली डोज लग चुकी है। यानी करीब 92 फीसदी आबादी को पहली डोज लग चुकी है। वहीं करीब 65 करोड़ की आबादी को दोनों डोज लग चुकी हैं, यानी करीब 70 फीसदी लोगों को दोनों डोज लग गई है। देश में अब तक 15 से 18 साल की उम्र के करीब सवा तीन करोड़ बच्चों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। यानी करीब 41 फीसदी। इन बच्चों को अभी दूसरी डोज लगाई जानी बाकी है।
10 जनवरी से बूस्टर डोज (एहतियाती खुराक) की शुरुआत
बीते सोमवार से ही बूस्टर डोज(एहतियाती खुराक) लगनी शुरू हुई है। करीब तीन लाख लोगों को बूस्टर डोज लगाई जानी है, जिसमें से 38 लाख बूस्टर डोज लगाई जा चुकी है। यानी करीब 13 फीसदी लोगों को बूस्टर डोज लगाई जा चुकी हैं।
भारत के लिए अब भी चुनौती
जनसंख्या अधिक होने की वजह से देश में अभी भी 33 फीसदी आबादी को टीका नहीं लग सका है। देश की कुल आबादी 138 करोड़ है जिसमें 90 करोड़ को ही पहली डोज लगी है यानी अभी भी 48 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाना बाकी है।
टीकाकरण की रफ्तार
0 से 50 करोड़ डोज- 203 दिन
50 से 100 करोड़ डोज- 75 दिन
100 से 150 करोड़ डोज– 82 दिन

 

कोरोना के हल्के इंफेक्शन को खतरनाक बना सकती हैं ये 5 गलतियां, भूलकर भी न करें ये काम

कोरोना के हल्के इंफेक्शन को खतरनाक बना सकती हैं ये 5 गलतियां, भूलकर भी न करें ये काम

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि संक्रमित होने पर हल्के लक्षणों को भी इग्नोेर न करें और तुरंंत जांच कराकर इलाज शुरू करें. बीमारी को लेकर लापरवाही से हल्का इंफेक्शन गंभीर रूप ले सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोविड-19 के नए वेरिएंट से संक्रमित होने पर कुछ जरूरी एहतियात बरतें.
लक्षणों को न करें इग्नोर
ओमिक्रॉन संक्रमितों में पहले तीन से पांच दिन गले में दर्द और बुखार की शिकायत रहती है. इस दौरान 102-103 डिग्री तक बुखार हो सकता है. बॉडी पेन और सिरदर्द की शिकायत भी लोगों में देखने को मिल रही है. कोरोना के सामान्य और गंभीर लक्षणों पर नजर रखें. हल्के लक्षणों को भी गंभीरता से लें. वायरल बुखार की तरह इसका इलाज न करें. कोई भी संकेत दिखने पर तुरंत कोविड टेस्ट कराएं.
डॉक्टर्स की सलाह पर ही दवा लें
डॉक्टर्स की सलाह पर ही दवाएं लें. बेवजह स्टेरॉयड का इस्तेमाल न करें. कोरोना संक्रमित होने पर अगर आप बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेते हैं तो इससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है.
देरी से टेस्ट कराने से बढ़ जाएगी बीमारी
ज्यादातर लोग देर से टेस्ट कराते हैं. इससे बीमारी बढ़ सकती है. टेस्टिंग में देरी न करें और शरीर में दिख रहे लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें. जांच से पहले और इसके बाद आइसोलेशन में रहें.
अगर है हाई बीपी और डायबिटीज की समस्या
हाई बीपी या डायबिटीज के मरीजों पर कोरोना ज्यादा हावी रहता है, इसलिए ऐसे मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. कोविड-19 के ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों से शुरू होते हैं, लेकिन म्यूटेंट स्ट्रेन में वृद्धि से इंफेक्शन गंभीर रूप ले सकता है.
पहले दिन से लक्षणों को कंट्रोल करें
डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों को पहले दिन से ही इसे कंट्रोल करने का प्रयास करना चाहिए. कोविड-19 के लक्षणों को बिल्कुल इग्नोर न करें और रिकवरी के दौरान इस बात का खास ध्यान रखें कि लक्षण गंभीर रूप न लें.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
 

क्या आपके शरीर में आ रहे हैं ये बदलाव, तो हो जाइये सावधान, आप को सकते हैं किडनी से जुड़ी बिमारियों के शिकार, ऐसे रखें किडनी का ध्यान

क्या आपके शरीर में आ रहे हैं ये बदलाव, तो हो जाइये सावधान, आप को सकते हैं किडनी से जुड़ी बिमारियों के शिकार, ऐसे रखें किडनी का ध्यान

शरीर में 2 गुर्दे होते हैं, जो खून से विषाक्त पदार्थों को निकालने का काम करते हैं. लेकिन अगर गुर्दे (Kidney) में किसी तरह की परेशानी होने लगे तो पूरे शरीर पर इसका असर पड़ता है. लाखों लोग अलग-अलग तरह की किडनी से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं. परेशान करने वाली बात ये है कि कई बार लोगों को किडनी की बीमारी के बारे में पता नहीं चल पाता है. इसीलिए किडनी की बीमारी को एक ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है. ज्यादातर लोगों को किडनी की समस्या के बारे में तब पता चलता है जब बीमारी उग्र रूप ले लेती है. भारत में मृत्यु दर के आठवें प्रमुख कारणों में से एक क्रोनिक किडनी रोग (CKD) है. किडनी की समस्या होने पर कई बार लोगों को लक्षण समझ नहीं आते हैं. कुछ लोग लक्षणों को अनदेखा भी कर देते हैं. ऐसे में आपको बहुत सतर्क रहने की जरूरत है. अगर आपके परिवार में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और किडनी फेल होने की हिस्ट्री रही है तो 60 साल से ज्यादा की उम्र होने पर आपको नियमित रुप से चेकअप करवाते रहना चाहिए. जानते हैं किडनी की समस्या होने पर क्या संकेत नजर आते हैं.

1- किडनी में किसी तरह की परेशानी होने पर आपको शुरुआती संकेतों में टखनों, पैरों और एड़ी के पास सूजन दिख सकती है.
2- किडनी की समस्या होने पर एडिमा की शिकायत होने लगती है. इसमें आंखों के आसपास सूजन आ जाती है, जो कोशिकाओं में तरल पदार्थ के संचय की वजह से होता है.
3- किडनी में परेशानी होने पर कमजोरी आना सामान्य लक्षण है. इसमें शुरुआत में काफी थकान रहती है और ज्यादा एक्टिविटी करने में परेशानी होने लगती है.
4- किडनी में खराबी आने पर भूख कम हो जाती है. यूरिया, क्रिएटिनिन, एसिड जैसे विषाक्त पदार्थों शरीर में ही जमा होने लगते हैं जिससे भूख कम हो जाती है और स्वाद भी बदल जाता है.
5- गुर्दे के खराब होने के लक्षणों में सुबह मिचली और उल्टी आने का अहसास होता है. सुबह दांतों को ब्रश करते वक्त ऐसा हो सकता है. इससे भूख भी कमी आने लगती है.

इस तरह किडनी को रखें स्वस्थ
1- किडनी को स्वस्थ रखने के लिए खूब पानी पिएं. कोशिश करें कि गर्म पानी पीएं इससे किडनी शरीर से सोडियम, यूरिया और विषाक्त पदार्थों बाहर देती है.
2- किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कम नमक वाला खाना खाएं. इसके लिए पैकेज्ड और रेस्टोरेंट वाले खाने से परहेज करें.
3- किडनी को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ भोजन करें और अपना वजन कंट्रोल करें.
4- अपनी किडनी को हेल्दी रखने के लिए समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल का लेवल चेक करवाते रहें.
5- तले हुए और मीठे पदार्थों से दूर रहें और ढ़ेर सारे फल और सब्जियां खाएं.

चाय पीने के 10 मिनट बाद क्या होता है जान कर चौक जाओगे

चाय पीने के 10 मिनट बाद क्या होता है जान कर चौक जाओगे

चाय की खूबियों के निभाने वाले तारीख भी बहुत हैं परंतुु यदियह देखा जाए कि शरीर में क्या बदलाव होता है।
गर्म चाय लेकिन ठंडा शरीर
हम देखे तो चाय पीने के बाद चाय नाम बता गर्म होती है परंतु उसको हम तो उसको पीने के बाद हमारा शरीर हल्का ठंडा हो जाता है यही कारण है कि चाय गरम एवं शरीर ठंडा रहता है यह आप आजमा सकते हो चाय गरम होने के पश्चात भी हमारा शरीर ठंडा रहता है अत: यह प्रभाव डालता है आता है 10 से 5 मिनट के अंदर यह अपना फर्क बताता है पता है यह चाय का प्रभाव है जो शरीर पर प्रभाव डालता है चाय पीने के 10 मिनट के अंदर यह होता है।
ब्रिटिश साइंटिस्ट ने इस मामले में रिसर्च की और थर्मामीटर सीने पर जांचने पर यह पाया गया कि एक गर्म दिन में कोल्ड ड्रिंक पीने पर जीरो पॉइंट 5 डिग्री शरीर का तापमान कम हो जाता है लेकिन सिर्फफ 9 मिनट के अंतर्गत डीपी जाए तो तापमान जीरो पॉइंट डिग्री तक बढ़ जाता है आता यह कहा जा सकता है किजितनी अधिक गर्म चाय होगी हमारा उतना ही ज्यादा ठंडा पड़ेगा, चाय पीने के कुछ देर बाद लगेगी प्यास 10 मिनट से 30 मिनट के अंदर:
यह कुछ लोगों के साथ तुरंत होता है और कुछ लोगों के लिए थोड़ी देर बाद लेकिन चाय पीने के बाद प्यास लगती है वैसे तो चाय बहुत हाइड्रिडिक ड्रिक है क्योंकि इसमें शक्कर एसिड आदि सब होता है लेकिन फिर भी शरीर के साथ कुछ ऐसा रिएक्शन होता है कि प्यास लगी इसीलिए चाय पीने के बाद प्यास लगती है।
दिन भर में ज्यादा चाय पीने से नुकसान
सोशल मीडिया पर इस बारे में बहुत बहस चलती थी कि है कि चाय की नेशनल ड्रिंकिंग घोषित कर देना चाहिए चाय पीने वाले लोगों में किस तरह की सोच में बदलाव देखता है वह भी सोचने वाली बात हैै इसकालगातार प्रयोग करने से हानि प्रद हो सकती है यह शरीर में बहुत भारी मात्रा में जगह को कहती है एवं यह एक बहुत ही भारी पिए के रूप में लिया जाता है।
 

बच्चों के लिए कहर बन रहा है ओमिक्रोन, लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच ऐसे रखें इनका ध्यान

बच्चों के लिए कहर बन रहा है ओमिक्रोन, लगातार बढ़ते संक्रमण के बीच ऐसे रखें इनका ध्यान

ओमिक्रोन, कोरोना के अन्य वेरिऐंट्स की तुलना में भले ही तेजी से फैल रहा है. लेकिन हेल्थ एक्सपर्टस ने इस वायरस के कारण मौत का खतरा या शरीर के अंगों के खराब होने का डर बेहद कम बताया है. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि यह वायरस बच्चों को जल्दी अपनी चपेट में ले रहा है। इसकी मुख्य वजह इस वायरस का अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (Upper Respiratory Tract Infection) को प्रभावित करना. बच्चों का ऊपर श्वसन पथ बड़ों के मुकाबले अधिक संवेदनशील होता है. इसलिए हवा में मौजूद इंफेक्शियस ड्रॉपलेट्स बच्चों को जल्दी चपेट में ले रही हैं.
हालांकि यह स्थिति ओमिक्रोन के केसेज में अधिक देखने को मिल रही है. जबकि कोविड-19 के केस में ऐसा बिल्कुल नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि ओमिक्रोन अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को ही प्रभावित कर रहा है. बच्चों का रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट बड़ों की तुलना में छोटा होता है और ओमिक्रोन इसी ट्रैक्ट में इंफेक्शन फैला रहा है. यही वजह है कि ओमिक्रोन बच्चों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है और संक्रमण से पीड़ित बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक तेजी से सर्दी-जुकाम-बुखार हो रहा है.

बच्चों को संक्रमण से बचाने का तरीका
• बच्चों को संक्रमण से बचाने के तरीके बताते हुए अलग-अलग हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, सबसे पहले जरूरी है कि आप बच्चों को इस वायरस की गंभीरता के बारे में समझाएं.
• बच्चों को यह बताना जरूरी है कि गंदे हाथों को अपने मुंह पर ना लगाएं. जूते के फीते बांधने, जमीन पर गिरी वस्तु को उठाने, बाहर से कुछ भी खरीदने पर सबसे पहले अपने हाथों को सैनिटाइज करें.
• बच्चों को मास्क की जरूरत के बारे में बताएं और जितना हो सके बच्चों को घर के अंदर ही रखें.
• बच्चों की डायट, न्यूट्रिशन और एक्सर्साइज का ध्यान रखें. ज्यादातर बच्चे घरों में बंद हैं, इससे ये शारीरिक रूप से ऐक्टिव नहीं रह पा रहे हैं. इसलिए इन्हें योग और एक्सर्साइज करना सिखाएं. जिन्हें घर के अंदर ही आराम से किया जा सके.

 

ओमिक्रोन के ये लक्षण Delta से हैं बिल्कुल अलग, इस तरह करें पहचान

ओमिक्रोन के ये लक्षण Delta से हैं बिल्कुल अलग, इस तरह करें पहचान

देश में कोरोना संक्रमण तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. वहीं कोविड-19 के नए स्ट्रेन ओमिक्रोन को लेकर देश में दहशत का माहौल है. ओमिक्रोन के देश में करीब 2,600 से अधिक केस हो गए हैं. इस वेरिएंट की शुरूआत दक्षिण अफ्रीका से हुई थी और इसके बाद वह पूरी दुनिया में पैर पसार चुका है. वहीं ओमिक्रोन को पिछले डेल्टा वेरिएंट से घातक माना जा रहा है, ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह बहुत ही कम समय में अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है. वहीं भारत में ओमिक्रोन और डेल्टा दोनों से संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन इन दोनों वेरिएंट के लक्षणों में कुछ अंतर है जिनके बारे में जानना काफी जरूरी है. ऐसे में हम यहां आपको बताएंगे कि ओमिक्रोन और डेल्टा के लक्षणों में क्या अंतर हैं. चलिए जानते हैं.
ओमिक्रोन वेरिएंट और डेल्टा वेरिएंट- ओमिक्रोन वेरिएंट और डेल्टा वेरिएंट दोनों ही कोविड-19 के वेरिएंट हैं. वहीं साल 2020 में पहली बार डेल्टा वेरिएंट की पहचान इंडिया में हुए थी. वहीं ओमिक्रोन की पहचान नवंबर 2021 में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी.
ओमिक्रोन वेरिएंट और डेल्टा वेरिएंट के लक्षण-
• ओमिक्रोन वेरिएंट और डेल्टा वेरिएंट के लक्षणों में कुछ अंतर देखे गए हैं. ओमिक्रोन के लक्षणों में थकान, जोड़ों का दर्द, सर्दी सिरदर्द और सर्दी के चार सामान्य लक्षण हैं. वहीं नाक बहना, छींक आना, गले में खराश और भूख ना लगना जैसे लक्षण भी ओमिक्रोन के हो सकते हैं.
• डेल्टा वेरिएंट के लक्षणों में गंध और स्वाद की हानि सबसे बड़ा लक्षण है, लेकिन इसके साथ ही गला खराब होना, नाक बहना, सिरदर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं.
• ओमिक्रोन वेरिएंट फेफड़े की बजाए गले पर हमला करता है, जबकि डेल्टा वेरिएंट फेफड़ो को नुकसान पहुंचा रहा है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news.com पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
 

Corona की तीसरी लहर का पीक कब? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Corona की तीसरी लहर का पीक कब? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

देश मे एक लंबे वक्त के बाद एक दिन में एक लाख से ज्यादा कोरोना के नए केस सामने आए हैं. पिछले 24 घंटो में 1 लाख 17 हज़ार 100 नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं. केस काफी तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन ऐसा कब तक होगा और भारत में कोरोना की तीसरी लहर का पीक कब आएगा? इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष और कम्युनिटी मेडिसीन के डॉ संजय राय के मुताबिक, भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय में केस बढ़ेंगे और उसी हिसाब से पीक आएगा. पूरे भारत का पीक फरवरी के महीने में आने की संभावना है.
28 दिसंबर को भारत मे 6,538 नए कोरोना के मामले रिपोर्ट हुए और केस पॉजिटिव रेट 0.61% थी. इसके बाद-
- 1 जनवरी को 22,775 नए मामले सामने आए और केस पॉजिटिव रेट 2.05% थी.
- 2 जनवरी को 27,553 नए मामले सामने आए और केस पॉजिटिविटी रेट 2.48% थी.
- 3 जनवरी को 33,750 नए मामले सामने आए औए केस पॉजिटिव रेट थी 3.84%.
- 4 जनवरी को 37,379 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए और केस पॉजिटिव रेट 3.24% थी.
- 5 जनवरी को 58,097 नए मामले सामने आए और केस पॉजिटिविटी रेट 5.03% हो गई.
- 6 जनवरी को 90,928 नए मामले सामने आए और केस पॉजिटिव रेट 6.43% है.
- 7 जनवरी 1,17,100 नए केस.
हर दिन कोरोना के मामले और पॉजिटिव रेट बढ़ रहे हैं. कुछ वैसे ही जैसे पहली और दूसरी लहर में हुआ था. लेकिन पीक के बाद केस कम होने लगे. अभी जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं ये तीसरी लहर की तरफ इशारा कर रहे हैं. ऐसे में अगर तीसरी लहर आती है तो इसका पीक कब आएगा.
इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष और एम्स में कम्युनिटी मेडिसीन के डॉ संजय राय के मुताबिक, कुछ भी हम कर लें केस को रोक पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई देश नहीं रोक पा रहा है और कोई भी एक्शन चाहे लॉकडाउन लगाना या नाईट कर्फ्यू लगाना, इससे रफ्तार स्लो हो सकती है लेकिन रोक नहीं सकते हैं.
उन्होंने कहा कि हर देश में इंफेक्शन रेट अलग अलग है क्योंकि ये पुरानी इम्युनिटी पर निर्भर करता है कि पहले कितनी इम्युनिटी हो चुकी है. जो अभी तक का एविडेंस है की सबसे इम्युनिटी नेचुरल इंफेक्शन से है. दिल्ली मुम्बई में इंफेक्शन काफी ज्यादा था तो यहां पीक जल्दी आना चाहिए और वो महीने के अंत तक प्लस माइनस 10 दिन हो सकता है.
डॉक्टर संजय राय ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में थोड़ा इंफेक्शन स्लो होता है तो उसको देखकर लगता है इसकी संभावना की जा सकती है कि फरवरी मध्य से फरवरी के आखिर तक आ जाना चाहिए. अलग-अलग इलाकों अलग-अलग राज्य में अलग पीक आएगा लेकिन हिंदुस्तान का पीक वो फरवरी के आसपास आना चाहिए.
बता दें कि भारत मे कोरोना की पहली लहर में सबसे ज्यादा केस एक दिन में 17 सिंतबर 2020 को आए थे. उस दिन 97,894 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं दूसरी लहर के दौरान 7 मई 2021 को एक दिन में सबसे ज्यादा 4,14,188 नए मामले रिपोर्ट हुए थे. यानी अगर इसी रफ्तार से केस आए तो फरवरी के महीने में सबसे ज्यादा केस एक दिन में रिपोर्ट होंगे जिसे पीक कहा जायेगा.
इसी तरह दुनिया के बाकी देश भी पीक के करीब है. दक्षिण अफ्रीका, यूएस, यूके जैसे देश जहां ओमिक्रोन के अधिकतर मामले आ रहे है वहां भी अलग-अलग शहरों में अलग-अलग समय पीक आएगा. लेकिन, इन देशों में भी अगले एक से दो हफ्ते में जिस रफ्तार से केस बढ़ रहे हैं और जो डेटा है उस आधार पर अनुमान है कि एक से दो हफ्ते में पीक आ जायेगा.
डॉ संजय राय के मुताबिक पूरी दुनिया में ओमिक्रोन डेल्टा वैरिएंट जिसने पूरी दुनिया मे कोहराम मचाया उसको रिप्लेस कर रहा है. कुछ हद तक अच्छा भी है कि ये समाज के बीच से डेल्टा को रिप्लेस कर रहा है. उन्होंने इसका कारण बताया कि इस वैरिएंट में मोर्टेलिटी कम है तो उसको रिप्लेस करेगा. दक्षिण अफ्रीका, यूके और यूएस जैसी जगहों पर ज्यादातर केस ओमिक्रोन के हैं. पीक वहां भी जल्द आएगा अगले 10 से 12 दिनों में पीक आ जाना चाहिए. सिर्फ लंदन में पीक आ चुका है, लंदन में गिरावट शुरू हो जाएगी जो डेटा से लगता है. उसी तरह यूएस में एक दो हफ्ते में आना चाहिए. हालांकि, इनका अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि वहां वैक्सीन की पूरी डोज और बूस्टर के बाद भी केस आ रहे है. वहां मिक्स इम्युनिटी है.
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना का ये नया वैरिएंट तेज़ी से संक्रमित करता है लेकिन उतना घातक नहीं है जितना कि डेल्टा वैरिएंट था. इसमे संक्रमण ज्यादातर में माइल्ड हैं और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है. दुनिया के देशों से सामने आए आंकड़ों और स्टडी से भी ये बात सामने आई है कि संक्रमण तेज़ है लेकिन दूसरी लहर की तरह अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ रही है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि दुनिया के जिन देशों में ओमिक्रोन संक्रमण के केस सामने आए है वहां ये देखने को मिल रहा है कि केस बढ़ रहे लेकिन हॉस्पिटल में भर्ती करने की ज्यादा लोगो को जरूरत नहीं पढ़ रही है. यानी ये वैरिएंट संक्रामक है लेकिन उतनी गंभीर बीमारी अभी नहीं पैदा कर रहा है.

 

ओमिक्रॉन का पता लगाने वाली पहली स्वदेशी किट हुई तैयार , ICMR ने दी मंजूरी

ओमिक्रॉन का पता लगाने वाली पहली स्वदेशी किट हुई तैयार , ICMR ने दी मंजूरी

नई दिल्ली : कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की जांच के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने ओमीस्योर किट को मंजूरी दे दी है। ओमीस्योर किट को टाटा मेडिकल ने तैयार किया है। ओमीस्योर टेस्ट किट अन्य आरटी-पीसीआर टेस्ट किट के जैसे ही काम करेगी।

इस किट से जांच के लिए भी नाक या मुंह से स्वाब लिया जाएगा। फिर केवल 10 से 15 मिनट में जांच की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी जैसा कि अन्य आरटी-पीसीआर टेस्ट में होता है। ओमीस्योर से जांच का तरीका अन्य आरटी-पीसीआर टेस्ट से कुछ भी अलग नहीं होगा। आईसीएमआर की तरफ से टाटा मेडिकल एंड डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड की ओमीस्योर को बीते 30 दिसंबर को ही मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इसकी जानकारी आज मंगलवार को सामने आई है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में ओमिक्रॉन संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,892 हो गई है। 568 मामलों के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है वहीं 382 मरीजों के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर है। 185 मामलों के साथ केरल तीसरे स्थान पर बना हुआ है। ओमिक्रॉन के 1,892 मरीजों में से 766 मरीज़ रिकवर हो गए हैं।
 

किडनी रोगियों के लिए लाभदायक हैं इन पेय पदार्थों का सेवन, स्वास्थ्य में होगा फायदा

किडनी रोगियों के लिए लाभदायक हैं इन पेय पदार्थों का सेवन, स्वास्थ्य में होगा फायदा

किडनी शरीर के मुख्य अंगों में से एक है, जो खून को साफ करके शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है। हालांकि, जब किसी कारणवश किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है तो यह कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाती है। अगर आप किसी किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं तो कुछ स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों को डाइट में शामिल करके आपको बीमारी के जोखिम कम करने में काफी मदद मिल सकती है। 

पानी
अगर आप किडनी से जुड़ी किसी बीमारी से ग्रस्त हैं तो आपको पानी के सेवन पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए। दरअसल, पेशाब के जरिए शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए किडनी को पानी की जरूरत होती है और जब रोगी कम पानी पीता है तो पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और पेशाब कम बनने से किडनी की बीमारी बढऩे लगती है। इसलिए किडनी रोगी रोजाना 10-12 गिलास पानी पीने का लक्ष्य तय कर लें। 
ग्रीन टी
ग्रीन टी कई जरूरी पोषक तत्वों के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होती है। एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर से मुक्त कणों को दूर करने में मदद करते हैं। ये मुक्त कण किडनी की बीमारियों को बढ़ावा देने या फिर स्वस्थ किडनी को नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए अगर आप किसी तरह की किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं तो अपनी डाइट में ग्रीन टी को जरूर शामिल करें। हालांकि, ध्यान रखें कि ग्रीन टी बिना चीनी की होनी चाहिए। 
क्रैनबेरी का जूस
किडनी की बीमारियों के जोखिम कम करने या फिर स्वस्थ किडनी की कार्यक्षमता को सुधारने में क्रैनबेरी के जूस का सेवन भी सहायक हो सकता है। दरअसल, यह किडनी में मौजूद कीटाणु और विषाक्त पदार्थों को दूर करने के साथ ही बीमारियों के जोखिम कम करने में सहायक हो सकता है, इसलिए रोजाना क्रैनबेरी के जूस का सेवन करें। हालांकि, ध्यान रखें कि बिना चीनी का क्रैनबेरी जूस का सेवन ही किडनी और पूरे शरीर के लिए लाभदायक होता है। 
ब्लैक कॉफी
ब्लैक कॉफी का सेवन भी किडनी के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। कई अध्ययनों के मुताबिक, कॉफी बीन्स में कई खास एंटी-ऑक्सीडेंट, पॉलीफेनोल और कैफीन जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो किडनी की बीमारियों के जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि चीनी और क्रीम आदि चीजों के बिना सीमित मात्रा में कॉफी पीना ही किडनी रोगियों के लिए लाभदायक है। 
 
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
आज से शुरू हुआ 15-18 एज ग्रुप के लिए कोरोना वैक्सीन रजिस्ट्रेशन , 10वीं का आईडी कार्ड दिखाकर करवा सकते है वैक्सिनेशन

आज से शुरू हुआ 15-18 एज ग्रुप के लिए कोरोना वैक्सीन रजिस्ट्रेशन , 10वीं का आईडी कार्ड दिखाकर करवा सकते है वैक्सिनेशन

नई दिल्ली : नए साल पर केन्द्र सरकार ने 15 से 18 साल के किशोरों को वैक्सिनेशन का तोहफा दिया है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच शनिवार यानी एक जनवरी 2022 से कोविन पोर्टल या ऐप पर 15 से 18 साल के किशोरों के लिए रजिस्ट्रेशन विंडो सुबह 10 बजे खुल गई है। सोमवार से इनका वैक्सिनेशन भी शुरू हो जाएगा।

हाल ही में पीएम मोदी ने 3 जनवरी से 15-18 साल के किशोरों के लिए वैक्सिनेशन शुरू करने की घोषणा की थी। खास बात यह है कि अगर किशोरों के पास आधार कार्ड नहीं है, तो भी वह सिर्फ अपने 10वीं के आईडी कार्ड के साथ वैक्सिनेशन के लिए अपना स्लॉट बुक कर सकते हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में भी 15-18 एज ग्रुप के किशोरों के लिए कोरोना वैक्सिनेशन की तैयारियां जोरों पर हैं। जानकारी के मुताबिक, इस कैटिगरी में करीब 10 लाख किशोरों का वैक्सिनेशन होना है। एलएनजेपी अस्पताल और दिल्ली में अन्य चिकित्सा केन्द्र के अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को कोविड टीका लगाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार है। बड़ी संख्या में स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी कोविड वैक्सिनेशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और वहां भी व्यवस्था की जा रही है।
 

ओमिक्रॉन से देश में दूसरी मौत, 73 साल के बुजुर्ग ने दम तोड़ा

ओमिक्रॉन से देश में दूसरी मौत, 73 साल के बुजुर्ग ने दम तोड़ा

 उदयपुर : राजस्थान के उदयपुर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित हुए 73 साल के बुजुर्ग ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। सम्भवत: यह देश में कोरोना के इस वैरिएंट से दूसरी मौत है। CMHO डॉ. दिनेश खराड़ी ने कहा कि मौत पोस्ट कोविड निमोनिया से हुई है। बुजुर्ग की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी। साथ ही 21 और 22 दिसंबर को जांच में ये निगेटिव हो गए थे। 25 दिसम्बर को उनकी रिपोर्ट में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिलने की पुष्टि हुई थी। डॉ. दिनेश खराड़ी ने कहा कि उन्हें डायबिटीज और हायपरटेंशन और हाइपोथॉइरोडिज्म था। ऐसे में शरीर पर वायरस असर डालता है। साथ ही अगर डायबिटीज जैसी बीमारी हो तो रिस्क काफी बढ़ जाता है।

राजस्थान में ओमिक्रॉन के अब तक 69 मरीज मिल चुके हैं। ओमिक्रॉन संक्रमितों के मामले मंख राजस्थान देश में 5वें नंबर पर है। उदयपुर में ओमिक्रॉन के अब तक 4 मामले सामने आ चुके हैं। 27 दिसंबर को उदयपुर में ओमिक्रॉन का नया केस सामने आया था। इससे पहले 25 दिसम्बर को तीन मामले उदयपुर में सामने आए थे। इसमें पति, पत्नी और एक 68 वर्षीय महिला ओमिक्रॉन पॉजिटिव पाई गई थी। जबकि 73 वर्षीय बुजुर्ग ओमिक्रॉन पॉजिटिव आने वाले चौथे व्यक्ति थे। उदयपुर एमबी अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉ. आरएल सुमन ने बताया कि बुजुर्ग का इलाज हमारे ही अस्पताल में हो रहा था। 15 दिसंबर को उन्हें भर्ती किया गया था। पहले से उन्हें डायबिटीज, हायपरटेंशन और हाइपोथॉइरोडिज्म था। जिसके चलते वे हाई-रिस्क पर थे। इन्हें वही लक्षण थे जो आमतौर पर कोरोना संक्रमित रोगियों को होते हैं। मृतक बुजुर्ग एमबी अस्पताल में ही कंपाउंडर रहे चुके थे।

महाराष्ट्र में गुरुवार को 52 साल के व्यक्ति की मौत ओमिक्रॉन से हुई थी। वे दो सप्ताह पहले नाइजीरिया से लौटे थे। उनका कोविड टेस्ट भी करवाया गया था, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव थी। 28 दिसंबर को उन्हें हार्ट अटैक आया। इसके बाद उन्हें नगर निगम के यशवंत राव चव्हाण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के बाद संदेह के आधार पर उनका सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे भेजा गया, तब ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई।

फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं ये एक्सरसाइज

फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं ये एक्सरसाइज

प्रदूषित हवा और खराब जीवनशैली जैसे कई कारण हैं, जिनके कारण हमारे फेफड़ों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है और शरीर कई तरह की फेफड़ों से संबंधित समस्याओं से घिर जाता है। इसलिए, शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बताते हैं, जो फेफड़ों को स्वस्थ रखने के साथ ही इनकी कार्यक्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकती हैं।

दौडऩा
फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर करने के लिए रोजाना कुछ मिनट दौडऩा सबसे अच्छी एक्सरसाइज है। दरअसल, दौड़ते समय फेफड़ों के फूलने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं, दौड़ते समय व्यक्ति के शरीर की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इन लाभ के लिए हर रोज कम से कम दो किलोमीटर दौडऩे का लक्ष्य जरूर बनाएं। हालांकि, अगर आपको दौडऩे में किसी तरह की परेशानी होती है तो कुछ मिनट खुली हवादार और हरियाली जगह में जॉगिंग करें।

साइकिलिंग
साइकिलिंग एक एरोबिक एक्सरसाइज है, जो फेफड़ों को स्वस्थ रखने में काफी मदद कर सकती है। इसके अतिरिक्त, इससे हृदय रोगों का खतरा भी कम होता है। दरअसल, साइकिल चलाते समय दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, जो शरीर में रक्तसंचार को ठीक करने और हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों के खतरे को कम करने में बहुत मददगार है। इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक साइकिलिंग जरूर करें।

लिप ब्रीथिंग एक्सरसाइज
इस एक्सरसाइज को आप टीवी देखते-देखते या फिर कोई भी काम करते समय कर सकते हैं। लिप ब्रीथिंग करने के लिए नाक से सामान्य तरीके से सांस लें। इसके बाद होंठों से सांस को इस तरह धीरे-धीरे छोड़ें जैसे कि केक पर लगी मोमबत्तियों को बुझाने के लिए फूंक मारी जाती है। इस क्रम को आप पांच से छह बार या फिर अपनी सुविधानुसार दोहरा सकते हैं। इस एक्सरसाइज से फेफड़े और हृदय के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बैलून एक्सरसाइज
बैलून एक्सरसाइज भी फेफड़ों को स्वस्थ रखने में काफी मदद कर सकती है। सुनने में भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन इस एक्सरसाइज को करने के लिए आपको अपने मुंह से गुब्बारे फुलाने होंगे। दरअसल, गुब्बारा फुलाने के दौरान गहरी सांस लेते है, जिसकी वजह से फेफड़ों में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और शरीर में ब्लड ऑक्सीजन की कमी नहीं होती हैं। इसके अतिरिक्त, इस एक्सरसाइज से पसलियों पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

 

गले की अकडऩ को दूर करने में मदद कर सकते हैं ये घरेलू नुस्खे

गले की अकडऩ को दूर करने में मदद कर सकते हैं ये घरेलू नुस्खे

कई बार असामान्य गतिविधियों या कुछ बीमारियों के कारण कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है गले का अकडऩा, जिसे अक्सर कई लोग सामान्य समझकर नजर अंदाज कर देते हैं और यही लापरवाही भविष्य में उन्हें भारी पड़ सकती है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप गले की अकडऩ से छुटकारा पा सकते हैं।


ठंडी सिकाई करें
ठंडी सिकाई की मदद से गले में होने वाली अकडऩ से काफी राहत मिल सकती है। राहत के लिए कोल्ड पैड से प्रभावित हिस्से की सिकाई करें। अगर आपके पास कोल्ड पैड नहीं है तो एक तौलिये का थोड़ा सा हिस्सा ठंडे पानी में डुबो लें, फिर इसे निचोड़कर चार-पांच मिनट तक इसे प्रभावित जगह पर लगाकर रखें। ऐसा दिन में दो से तीन बार करने से आपको काफी आराम मिलेगा।


तेल मालिश से मिलेगा आराम

अगर आपको गले में अकडऩ महसूस हो तो इससे छुटकारा दिलाने में तेल मालिश काफी मदद कर सकती है। इसके पहले किसी भी मालिश वाले तेल की कुछ बूंदें हथेली पर लें, फिर अपनी उंगलियों की मदद से प्रभावित हिस्से पर इसे लगाएं। इसके बाद हल्के हाथ से उस जगह को दबाएं और गोलाकार में मालिश करें। इस तरह करीब 10-15 मिनट तक रोजाना मालिश करें। ऐसा करने से गले की अकडऩ कुछ ही दिनों में छूमंतर हो जाएगी।


सेब के सिरके का करें इस्तेमाल
सेब का सिरका एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से समृद्ध माना जाता है, जिसकी वजह से यह गले की अकडऩ से राहत दिलाने में सहायक है। राहत के लिए आप एक छोटी बाल्टी में हल्का गर्म पानी और सेब के सिरके की कुछ बूंदें अच्छे से मिलाएं, फिर इस मिश्रण में एक तौलिये को डूबोकर निचोड़ दें। इसके बाद उस तौलिये को गले पर अच्छे से लपेटकर 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। इससे आपको काफी आराम मिलेगा।


योग और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी है प्रभावी

अगर गले में अकडऩ की समस्या होने लगे तो घरेलू नुस्खे के तौर पर योग और स्ट्रेचिंग करना अच्छा विकल्प हो सकता है। जब भी आपको गले में अकडऩ महसूस हो तो कम से कम 15 मिनट तक वीरासन, गोमुखासन और वृक्षासन आदि योगासनों का अभ्यास करें। वहीं, योगाभ्यास से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग करना न भूलें क्योंकि इसके अभ्यास से मांसपेशियों में लचीलापन आता है, जिससे गले को आराम मिलता है।
 

अब 15 से 18 वर्ष के किशोरों लगाए जाएंगे कोरोना रोधी टीके , जानिये कब होगा पंजीयन

अब 15 से 18 वर्ष के किशोरों लगाए जाएंगे कोरोना रोधी टीके , जानिये कब होगा पंजीयन

जांजगीर-चांपा: कोरोना के खिलाफ जंग मे जांजगीर-चांपा जिले में 15 से 18 वर्ष के किशोर-किशोरियों को 3 जनवरी से टीके लगाए जाएंगे। इसके लिए पात्र लाभार्थी 1 जनवरी से कोविन एप पर अपना पंजीयन करा सकते हैं। जांजगीर-चांपा जिले में इस वर्ग के करीब एक लाख चार हजार एक सौ पैंसठ हितग्राहियों को टीके लगाए जाएंगे। कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने जिले के 15-18 आयु वर्ग के हितग्राहियों को इस टीकाकरण अभियान का लाभ उठाने की अपील की है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और गंभीर बीमारियों से पीड़ित 60 वर्ष से अधिक के लोगों को 10 जनवरी से कोरोना वैक्सीन की तीसरी खुराक (प्रिकाशन डोज) दी जाएगी। इस वर्ग के ऐसे लोग जिन्हें दूसरी खुराक लिए नौ महीने या 39 सप्ताह पूरे हो चुके हैं, उन्हें तीसरी खुराक दी जाएगी। पात्र नागरिक कोविन एप में पंजीयन कर तीसरा टीका लगवा सकते हैं।

कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने बताया कि 15 से 18 वर्ष के जिले के 1 लाख 4 हजार 165 (अनुमानित) किशोरों के टीकाकरण की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। इसके लिए सभी जिले के टीकाकरण अधिकारियों का उन्मुखीकरण किया गया है। इन लाभार्थियों के लिए केवल को-वैक्सीन टीके का ही विकल्प रहेगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस आर बंजारे ने बताया कि जांजगीर-चांपा
जिले में- 18+,45, फ्रंट लाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स सहित कुल 16 लाख,11 हजार 104 हितग्राहियों का टीकाकरण किया जा चुका है। इनमें पहला डोज 10 लाख 55 हजार ( 88 प्रतिशत ) और दूसरा डोज का टीका करीब 5 लाख 56 हजार (53%) लोगों को लगाया जा चुका है।

कोविड टीकाकरण की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक् ने बताया कि राज्य के करीब तीन लाख 40 हजार स्वास्थ्य कर्मियों, तीन लाख 19 हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स और गंभीर बीमारी जैसे हार्ट डिसीज़, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन, किडनी डिसीज़, हीमोडायलिसिस, कैंसर, सिकलसेल, एचआईवी एवं अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित 5 लाख 16 हजार , 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को 10 जनवरी से कोरोना वैक्सीन की तीसरी खुराक दी जाएगी।