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30 दिनों के अंदर वजन कम करने में मदद कर सकती हैं ये एक्सरसाइज

30 दिनों के अंदर वजन कम करने में मदद कर सकती हैं ये एक्सरसाइज

आजकल लोगों के लिए बढ़ता वजन सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है क्योंकि यह शरीर को कई बीमारियों का घर बना सकता है। यही वजह है कि इसे नियंत्रित करने के लिए लोग तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप खास डाइट प्लान के साथ कुछ एक्सरसाइज की मदद से 30 दिनों के अंदर बढ़ते वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। आइए आज हम आपको ऐसी कुछ एक्सरसाइज के बारे में बताते हैं।

पुल-अप्स
इसके लिए सबसे पहले एक पुल-अप्स रोड के नीचे खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और कंधों की चौड़ाई की दूरी पर रोड को पकड़ लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों पर जोर डालते हुए कोहनियों को मोड़ें और पूरे शरीर को ऊपर उठाएं। फिर दोबारा से अपने शरीर को नीचे करें और शरीर को ढीला छोड़ते हुए लटकें। यह पुल-अप्स एक्सरसाइज की एक रेप्स है। ऐसे कम से कम 10 रेप्स करें।

स्क्वाट
सबसे पहले अपने दोनों हाथ सामने की ओर खोलकर सीधे खड़े हो जाएं। इस दौरान आपकी छाती एकदम तनी हुई होनी चाहिए। अब धीरे-धीरे अपने घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें, जिस तरह से कुर्सी पर बैठा जाता है। इसके बाद सांस भरते हुए धीरे-धीरे नीचे झुकें और फिर ऊपर आते समय सांस छोड़ें। ऐसा आप 10 मिनट तक कर सकते हैं। शुरूआत में 10 स्क्वाट करें, फिर धीरे-धीरे 12-15 तक ले जाएं।

लंज
सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े होकर अपने दाएं पैर को आगे बढ़ाएं और उसको घुटनों से मोड़ते हुए 90 डिग्री का कोण बनाएं। अब बायां पैर पीछे के ओर सीधा करें और दोनों पैरों के बीच में कम से कम दो-तीन फीट की दूरी कायम करें। कुछ सेकेंड इसी स्थिति में रहने के बाद खुद को ऊपर की ओर उछालें। इससे आप प्रारंभिक स्थिति में आ जाएंगे। इसे रेप्स कहते हैं। इसी तरह दोनों पैर से 12-15 रेप्स करें।

पुश अप्स
सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं, फिर गर्दन को सीधा रखें और हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। वहीं, पंजे जमीन से सटे हुए हों। अब हाथों पर जोर डालते हुए शरीर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें, लेकिन इस दौरान ध्यान रखें कि शरीर को नीचे लाते समय छाती जमीन से छूनी चाहिए। इसके बाद अपने हाथों को सीधा करें और 10 सेकंड इसी अवस्था में रहें, फिर वापस धीरे-धीरे नीचे आकर सामान्य हो जाएं।

महत्वपूर्ण टिप्स
इन बातों पर भी दें ध्यान
30 दिनों के अंदर सिर्फ एक्सरसाइज ही वजन नियंत्रित करने में मदद नहीं कर सकती बल्कि आपको अपनी डाइट संबंधी आदतों को भी बदलना जरूरी है। बेहतर होगा कि आप अपनी में डाइट में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की बजाय अधिक प्रोटीन शामिल करें। इसके अलावा, अपने वर्कआउट सेशन से पहले और बाद में वार्म-अप और कूल-डाउन स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज को करना न भूलें। वहीं, समय-समय पर ब्रिस्क वॉक को भी अपने रूटीन में शामिल करें।
 

कोहनी के दर्द से छुटकारा दिला सकते हैं ये योगासन, ऐसे करें अभ्यास

कोहनी के दर्द से छुटकारा दिला सकते हैं ये योगासन, ऐसे करें अभ्यास

आमतौर पर कोहनी में दर्द का कारण चोट को माना जाता है, लेकिन कुछ गतिविधियां और बीमारियां भी इस दर्द की वजह हो सकती हैं। कई लोग इस दर्द से राहत पाने के लिए पेनकिलर दवा का सेवन कर लेते हैं, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के अभ्यास का तरीका बताते हैं, जो प्राकृतिक रूप से कोहनी के दर्द को दूर करने में मदद कर सकते हैं। 

कुंभकासन

कुंभकासन के लिए पहले योगा मैट पर टेबलटॉप स्थिति में आ जाएं, फिर अपने एक पैर को पीछे की ओर करके पंजे को जमीन से सटा दें। इसी तरह दूसरे पैर को भी फैलाएं। अब अपने पैरों के पंजों और हाथों की हथेलियों पर पूरे शरीर का भार डालते हुए शरीर को ऊपर उठाने की कोशिश करें। इस दौरान कमर और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें और कुछ देर इसी अवस्था में बने रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। 

अधोमुख श्वानासन

अधोमुख श्वानासन के लिए पहले योगा मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें। अब सामने की तरफ झुकते हुए अपने हाथों को जमीन पर रखें और गहरी सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं। इस दौरान घुटनों को सीधा करके सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इस योगासन में शरीर का पूरा भार हाथों और पैरों पर होना चाहिए और शरीर का आकार ङ्क जैसा नजर आना चाहिए। कुछ मिनट इसी अवस्था में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। 

कपोतासन

कपोतासन के लिए पहले योगा मैट पर घुटने के बल खड़े हो जाएं, फिर अपने हाथों को सामने की ओर से ऊपर उठाकर शरीर को वक्र का आकार देते हुए पीछे की ओर ले जाएं और अपनी हथेलियों को जमीन पर रखें। अब इसी मुद्रा में रहते हुए अपने सिर को एडियों के बीच रखें। इसके बाद अपने दोनों हाथों से पैरों की एडियों को पकड़ें। अपनी क्षमतानुसार इस मुद्रा में बने रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। 

बिटिलासन

बिटिलासन के लिए पहले योगा मैट पर वज्रासन की मद्रा में बैठें, फिर आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को अपने आगे सीधे जमीन पर टिका लें। अब अपने कूल्हे को ऊपर की तरफ और पेट को जमीन की ओर दबाएं। इसके बाद सिर को उठाते हुए कुछ सेकंड सीधे या फिर आसमान की तरफ देखें। कुछ देर इस मुद्रा में बने रहने के बाद धीरे-धीरे वज्रासन की अवस्था में वापस आ जाएं और आसन छोड़ दें। 

 
अगर आप भी माइक्रोवेव में गर्म करते हैं ये चीजें, तो आज से ही बदल दें अपनी आदत, वरना होगा स्वास्थ्य को नुकसान

अगर आप भी माइक्रोवेव में गर्म करते हैं ये चीजें, तो आज से ही बदल दें अपनी आदत, वरना होगा स्वास्थ्य को नुकसान

आजकल माइक्रोवेव आपको घर घर की रसोई में मिल जाएगा. कोई भी चीज इसमें झटपट बन जाती है. फटाफट इसमें खाने को गर्म किया जा सकता है. इसलिए लोगों को माइक्रोवेव काफी सुविधाजनक लगता है. सिर्फ घर पर ही नहीं, बल्कि वर्कप्लेस की कैन्टीन में भी खाने को गर्म करने के लिए माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया जाता है.

लेकिन किसी भी चीज के जितने फायदे होते हैं, उतने ही नुकसान भी होते हैं. माइक्रोवेव में भी हर चीज को गर्म नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ चीजों को इसमें गर्म करने से इसके पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. वहीं कुछ चीजें इसमें गर्म होने के बाद शरीर के लिए नुकसानदायक हो जाती हैं. यहां जानिए उन चीजों के बारे में जिन्हें माइक्रोवेव में गर्म नहीं करना चाहिए.

मशरूम

अगर आप माइक्रोवेव में मशरूम को गर्म करें तो इससे इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. ऐसे में आपको मशरूम का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा. इसलिए मशरूम को बनाने के बाद तुरंत खा लेना चाहिए. माइक्रोवेव में गर्म किया गया मशरूम आपका डाइजेशन भी खराब कर सकता है.

चावल

कई बार लोग चावल को माइक्रोवेव में गर्म करते हैं. लेकिन ऐसा करने से फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है. दरअसल चावल को माइक्रोवेव में गर्म करने से बैसिलस सीरियस नामक बैक्टीरिया नष्ट होने से ऐसे बीज पैदा हो जाते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक माने जाते हैं. ऐसे में इन चावलों को खाने से उल्टी दस्त और पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है.

चिकन

चिकन को माइक्रोवेव में गर्म करने से उसकी प्रोटीन की संरचना में बदलाव हो जाता है. ऐसे में माइक्रोवेव में गर्म चिकन खाने से आपका हाजमा बिगड़ सकता है. इसलिए अगर आप अब तक ऐसा करते आए हैं, तो आज ही इस आदत को बदल दें.

तेल

किसी भी तरह के तेल को माइक्रोवेव में गर्म नहीं करना चाहिए. इससे तेल का गुड फैट बैड फैट में बदल जाता है और वो तेल आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो जाता है. इसलिए ऐसी गलती कभी नहीं कीजिएगा.

अंडा

अगर आप माइक्रोवेव में अंडे उबालते हैं तो अब से ऐसा मत कीजिएगा क्योंकि माइक्रोवेव में अंडे को गर्म करने पर उसके अंदर का तापमान बढ़ता है. इससे अंडा फट जाता है. इसके अलावा अंडे से बनी किसी चीज को भी माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना चाहिए. इससे उसके पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं.

 
क्या आपके भी साँसों में बदबू आती है, तो जाने इसके कारण और इसे दूर करने के उपाय

क्या आपके भी साँसों में बदबू आती है, तो जाने इसके कारण और इसे दूर करने के उपाय

आप अपने दोस्त को कुछ करने के लिए फुसफुसाते हैं और आप अपने दोस्त के चेहरे पर नजऱ से बता सकते हैं कि कुछ गड़बड़ है। क्या यह आपकी सांस हो सकती है? हो सकता है कि आपको दोपहर के भोजन पर अपने हैमबर्गर पर अतिरिक्त प्याज नहीं रखना चाहिए। बदबूदार सांस वाले लोगो को क्या करना चाहिए?

यह गंध कैसी है?

खराब सांस का चिकित्सकीय स्थिति के लिए सामान्य नाम है जिसे हैलिटोसिस कहते हैं: हाल-उह-टो-सीस)। कई अलग-अलग चीजें मुंह से दुर्गंध पैदा कर सकती हैं जैसे अपने दांतों को ब्रश न करने से लेकर कुछ अलग चिकित्सकीय स्थिति।

कभी-कभी, किसी व्यक्ति की बुरी सांस आपको बहुत परेशान करती है – और उसे पता नहीं चलता कि कोई समस्या है। खराब सांस के बारे में किसी को बताने के तरीके (अच्छे) हैं। आप बिना कुछ कहे पुदीना या चीनी रहित गोली पेश कर सकते थे।

यदि आपको संदेह है कि आपकी खुद की सांस बेईमानी है, तो किसी ऐसे व्यक्ति से पूछें जो आपको मज़ाक उड़ाए बिना एक ईमानदार जवाब देगा। बस अपने भाई या बहन से मत पूछिए – वे आपको बता सकते हैं कि आपकी सांसें तब भी बदबू मारती हैं, जब ऐसा नहीं होता।

हालाँकि हर किसी को कभी-कभी बुरी सांस मिलती है, अगर आपकी सांस बहुत खराब है, तो आपको अपने दंत चिकित्सक या डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता हो सकती है।

सांसों की बदबू क्या है?

खाद्य पदार्थ और पेय, जैसे कि लहसुन, प्याज, पनीर, संतरे का रस और सोडा को खराब दंत स्वच्छता देते है ।

ही जीन जिसका अर्थ है नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉसिंग नहीं करना।

बदबूदार सांस को रोकना

तो एक बच्चे को क्या करना चाहिए? धूम्रपान न करें या तंबाकू उत्पादों का उपयोग न करें। और दिन में कम से कम दो बार अपने दांतों को ब्रश करके और दिन में एक बार फ्लॉसिंग करके अपने मुंह का ख्याल रखें। अपनी जीभ को भी ब्रश करें, क्योंकि बैक्टीरिया वहां बढ़ सकता है। दिन में एक बार फ्लॉसिंग करने से आपके दांतों के बीच मौजूद कणों से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा, नियमित जांच और सफाई के लिए साल में दो बार अपने डेंटिस्ट के पास जाएं।

डेंटिस्ट पर जाने से न केवल आपके दांतों को पूरी तरह से सफाई मिलेगी बल्कि दंत चिकित्सक आपके मुंह के चारों ओर किसी भी संभावित समस्याओं का पता भी लगा सकते है। उदाहरण के लिए, मसूड़ों की बीमारी, जिसे पीरियडोंटल बीमारी के रूप में भी जाना जाता है, खराब सांस और आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है।

आमतौर पर, खराब सांस के लिए एक कम जटिल कारण है-जैसे कि आपके पास दोपहर के भोजन के लिए क्या था। तो अपने ब्रशिंग और फ्लॉसिंग को सही ढंग से करते रहे और गंध मुक्त रहे।

 
बैंगन यह सब भी कर सकता है, कभी सोचा नहीं होगा आपने

बैंगन यह सब भी कर सकता है, कभी सोचा नहीं होगा आपने

अच्छी बात ये है कि अगर आप चाहें तो इस अपने घर में रखे गमले में भी उगा सकते हैं वो भी बहुत आसानी से बैंगन के फायदे हमेशा ही अनदेखे रहे हैं लेकिन जब आप इसके फायदे जानेंगे तो वाकई आश्चर्य में पड़ जाएंगे।
याददाश्त तेज करना
अगर आपको अपनी याददाश्त तेज करना है तो खाने में बैंगन को जरूर शामिल करें बैंगन में फाइटो न्यूट्रिएंट्स होते है जो सेल मेम्बरेन को नुकसान होने से बचाता है जो एक संदेशवाहक की तरह काम करता है।
वजन कम करने में
अगर आपका वजन ज्यादा है और आप उसे कम करने का प्रयास कर रहे हैं तो अपने भोजन में बैंगन को शामिल करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है दरअसल बैंगन में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर भरपूर होता है जो वजन कम करने में मदद करता है।
बैंगन में बहुत
हर महिला अपनी उम्र से कम दिखना चाहती है बैंगन; की मदद से आप अपनी उम्र से कम दिख सकती है बैंगन में बहुत सारे एंथोकायनिन होते हैं और ये एंटीऑक्सिडेंट एंटीएजिंग एजेंट के रूप में कार्य करते हैं।
दांत दर्द में बैंगन
बैंगन के इस्तेमाल दांत दर्द में दर्द निरोधक की तरह काम करता है इसके रस से दांतों के दर्द में आराम मिलता है साथ ही इसकी जड़ का इस्तेमाल अस्थमा की रोकथाम में भी किया जाता है।
बालों का झडऩा
बालों को झडऩे से रोकने के लिए हम कई महंगे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते है लेकिन क्या आपको पता है कि बैंगन आपके बालों को झडऩे से बचा सकता है बैंगन में पाये जाने वाले एंजाइम आपके स्कैल्प को मजबूत बनाते है जिससे बालों का झडऩा काफी हद तक कम हो जाता है।

 

Omicron के बढ़ते संक्रमण के बीच इस तरह रखें अपने सेहत का ख्याल....

Omicron के बढ़ते संक्रमण के बीच इस तरह रखें अपने सेहत का ख्याल....

ओमिक्रोन महामारी के बढ़ते मामलों के कारण लोगों में दहशत का माहौल है. ऐसे में आपको अपने गले और फेफड़ों का सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए. सर्दियों में होने वाले इनफेक्शन से बचाव करने के लिए आपको खान-पान के अलावा कुछ घरेलू नुस्खे भी अपनाने चाहिए. ठंड में जुकाम, गले में खराश, बुखार और कई तरह के इनफेक्शन की समस्या बढ़ जाती है. ये सभी बीमारी गले, लंग्स और सांस नली से जुड़ी हैं. कोरोना वायरस से होने वाला इंफेक्शन भी सबसे ज्यादा गले, लंग्स और सांसनली को प्रभावित करता है. ऐसे में आप कुछ अचूक नुस्खों से अपने फेफड़ों, नाक और गले का ख्याल रख सकते हैं.

आइये जानते हैं.

1) गर्म पानी पीएं- अगर आप सुबह गर्म पानी पीने की आदत बना लेते हैं तो इससे आप लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं. गर्म पानी पीने से गले में होने वाले बैक्टीरिया और फंगस खत्म हो जाती है. गर्म पानी पीने से मोटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन भी कम होता है. बदलते मौसम में सुबह गर्मपानी पीने की आदत बना लें.


2) भाप जरूर लें- गले में खराश या किसी और तरह की परेशानी होने पर भाप जरूर लें. भाप से फेफड़ों में जमा बलगम बाहर आ जाता है और सर्दी खांसी में भी आराम पड़ता है. भाप लेते वक्त आप पानी में अजवाइन भी डाल सकते हैं. भाप लेने से गला और सांसनली भी साफ हो जाती है.


3) गहरी और लंबी सांस लें- स्वस्थ शरीर का संबंध काफी हद तक सांसों से भी है. आप जितनी गहरी सांस लेंगे, शरीर में उतना ही ऑक्सीजन जाएगा. शरीर को सही ऑक्सीजन मिलने से फेफड़ों और बाकी अंग भी ठीक से काम करते हैं. इसलिए लंबी-लंबी गहरी सांस लेने की आदत बना लेनी चाहिए।


4) योग और व्यायाम करें- स्वस्थ रहने के लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए. सांसों के अभ्यास के लिए आप योग का सहारा भी ले सकते हैं. इससे आपके फेफड़े मजबूत होते हैं. योग से शरीर स्वस्थ रहता है. आपको रोज 15-20 मिनट खुली हवा में प्राणायाम करना चाहिए. आप घर के काम करके भी स्वस्थ रह सकते हैं. स्वस्थ रहने के लिए वर्कआउट और एक्टिव रहना जरूरी है.


5) अदरक लहसुन का सेवन करें- सर्दियों में जुकाम-खांसी को दूर भगाने के लिए खाने में अदरक लहसुन का सेवन जरूर करें. अदरक लहसुन से शरीर गर्म रहता है और इम्यूनिटी मजबूत होती है. खांसी को दूर करने के लिए आप शहद और अदरक के रस को इस्तेमाल कर सकते हैं. लहसुन खाने से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या कम होती है.
 

अगर बहुत ज्यादा पेट में गैस बनती है तो उसके पीछे हो सकते हैं ये कारण

अगर बहुत ज्यादा पेट में गैस बनती है तो उसके पीछे हो सकते हैं ये कारण

गैस बनने की समस्या तब होती है, जब गले और पेट को जोडऩे वाली एक प्रकार की नली कमजोर हो जाती है और इससे पेट में मौजूद एसिड ऊपर की ओर आ जाता है। यह एक सामान्य शारीरिक समस्या है और इससे डॉक्टरी इलाज की मदद से राहत पाई जा सकती है। हालांकि, अगर आपको बहुत ज्यादा पेट में गैस बनने की समस्या रहती है तो उसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं। आइए उन्हीं के बारे में जानते हैं।
कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का अधिक सेवन
सोडा या फिर बियर जैसे किसी भी तरह कार्बोनेटेड पेय पदार्थ का अधिक सेवन करने से आपको बार-बार पेट में गैस बनने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में मौजूद एसिड पेट में गैस बनाने का कारण बनता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप इनका सेवन करने से बचें और इनकी बजाय स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थों का सेवन करें क्योंकि इससे आपको कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
हैवी और मसालेदार खाना खाने
अगर आप हैवी या फिर अधिक मसालेदार खाना खा लेते हैं तो इसके कारण भी आपको गैस की समस्या से जूझना पड़ सकता है। यही नहीं, रोजाना हैवी और अधिक मसालेदार खाना खाने से गैस्ट्रिक अल्सर और पेप्टिक अल्सर की बीमारी भी हो सकती है। ये दोनों बीमारियां पेट के अंदर घाव बनने से होती हैं। इसलिए अपने खाने में मिर्च-मसाले का सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें और हैवी खाना न खाएं।
पित्ताशय में पथरी होने की वजह से
पित्ताशय में जरूरत से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है तो वह पथरी का रूप ले लेता है, जिसके कारण असहनीय दर्द और सूजन के साथ खाली पेट गैस बनने की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है। दरअसल, यह बीमारी लंबे समय तक अनहेल्दी फैट्स के सेवन और खराब लाइफस्टाइल के कारण होती है। पित्ताशय में पथरी के लक्षणों के रूप में लोगों को बदहजमी, जी मचलाना और खट्टी डकार आने की समस्या भी हो सकती है।
बीमारियों के कारण
अमूमन लोग समझते हैं कि पेट में अधिक गैस बनने का कारण सिर्फ गलत खान-पान ही होता है, लेकिन कुछ बीमारियों की वजह से भी आपको बार-बार गैस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको डाइवर्टिक्युलाइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, क्रोहन्स डिजीज, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, डायबिटीज, थायराइड डिसफंक्शन या फिर इंटेस्टाइन ब्लॉकेज जैसी बीमारियों में से कोई बीमारी है तो आपके पेट में अधिक गैस बनने की समस्या हो सकती है।

 

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच मिली बड़ी राहत, मिले इतने मरीज, देखे आकड़े

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच मिली बड़ी राहत, मिले इतने मरीज, देखे आकड़े

नई दिल्ली: देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच बड़ी राहत की खबर आई है। दरअसल, 558 दिनों में संक्रमण के सबसे कम मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़े के अनुसार बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 6,822 मामले सामने आए हैं जो कि 558 दिनों में सबसे कम है। इस दौरान 220 लोगों की मौत भी हो गई। इसके अलावा 10,004 लोग स्वस्थ भी हुए और रिकवरी दर 98.36 फीसदी पहुंच गई है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में अब कुल 95,014 सक्रिय मरीज बचे हैं जो कि 554 दिनों बाद सबसे कम है। वहीं देश में अब तक कोरोना के कुल 3,46,48,383 मामले आ चुके हैं जबकि कुल 3,40,79,612 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं कुल मृतकों की संख्या की बात करें तो यह 4,73,757 हो गई है। देश में कुल वैक्सीनेशन का आंकड़ा 128 करोड़ (1,28,76,10,590) के पार हो गया है।

मुंबई में और दो लोगों में मिला ओमिक्रॉन वैरिएंट, देश में कुल संख्या पहुंची 23

मुंबई में और दो लोगों में मिला ओमिक्रॉन वैरिएंट, देश में कुल संख्या पहुंची 23

सोमवार शाम मुंबई में और दो लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इस संख्या के साथ ही महाराष्ट्र की ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इसके अलावा देश में इस तरह के नए संक्रमण मरीजों की संख्या 23 हो गई है।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका से लौटा 37 वर्षीय व्यक्ति और उसका 36 वर्षीय अमेरिकी रिटर्न मित्र ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित पाया गया है। यह लगातार दूसरा दिन है जब महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के मामले सामने आए हैं। मुंबई में नवीनतम मामलों के साथ भारत में अब तक ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या बढ़कर 23 हो गई हैं।
इससे पहले महाराष्ट्र ने ओमिक्रॉन संस्करण के सात और मामले दर्ज किए थे। रविवार को जिन संक्रमितों का पता चला, उनमें से सभी पुणे जिले के थे, छह पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) में और एक पुणे शहर और जिले के ग्रामीण इलाकों में था। इन सात मरीजों में से तीन हाल ही में लागोस गए थे और एक ही परिवार के हैं। दूसरे व्यक्ति ने हाल ही में फिनलैंड की यात्रा की थी।
उधर, राजस्थान महाराष्ट्र के बाद रविवार को ओमिक्रॉन संक्रमण की रिपोर्ट करने वाला दूसरा राज्य था। राजस्थान राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि उसने जयपुर में कोरोनावायरस के वायरल संस्करण वाले नौ लोगों का पता लगाया है। जयपुर में ओमिक्रॉन संस्करण से संक्रमित नौ लोगों में से चार दक्षिण अफ्रीका से लौटे हैं, जहां पहली बार इस प्रकार का पता चला था। पिछले हफ्ते दिल्ली में ओमिक्रॉन वैरिएंट के एक मामले का पता चला था। कर्नाटक में पहले दो मामलों का पता चला, जिसके बाद महाराष्ट्र और गुजरात में मामले सामने आए।
 

इस च्युइंग गम को खाने से कम हो सकता है कोरोना वायरस का खतरा, विकसित करने में जुटे वैज्ञानिक

इस च्युइंग गम को खाने से कम हो सकता है कोरोना वायरस का खतरा, विकसित करने में जुटे वैज्ञानिक

वैज्ञानिक पौधों के जरिए तैयार किये गए प्रोटीन से लैस एक ऐसा च्यूइंग गम विकसित कर रहे हैं, जो सार्स-कोवी-2 वायरस के लिए एक ‘जाल’ का काम करता है और यह कोराना वायरस संक्रमण को घटा देता है. अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात का जिक्र किया कि जिन लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है, वे अब भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं. अमेरिका स्थित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के हेनरी डेनियल ने बताया, ‘‘सार्स-कोवी-2 लार ग्रंथी में प्रतिकृति बनाता है और हम उस वक्त इस बारे में जानते हैं जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता, खांसता या बोलता है और वह दूसरों में पहुंच जाता है.
मोलेक्यूलर थेरेपी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डेनियल ने कहा, ‘‘यह गम लार में वायरस को न्यूट्रल कर देता है, जो रोग के संक्रमण के स्रोत को संभावित रूप से बंद करने का एक सामान्य तरीका है.’’ महामारी से पहले डेनियल उच्च रक्तचाप के लिए एक प्रोटीन हार्मोन का अध्ययन कर रहे थे. उन्होंने प्रयोगशाला में एसीई2 प्रोटीन और कई अन्य प्रोटीन विकसित किये, जिनमें उपचार में उपयोग लाये जाने की क्षमता है. इसके लिए उन्होंने पौधा आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग किया. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि एसीई2 का इंजेक्शन गंभीर संक्रमण वाले मरीजों में वायरस की संख्या को घटा सकता है.
च्यूइंग गम का परीक्षण करने के लिए अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने पौधों में एसीई2 तैयार किया, उसे अन्य यौगिक के साथ संलग्न किया ताकि वह प्रोटीन के जुड़ने में सहायक हो सके. इसके बाद पौधे की सामग्री को गम टैबलेट में तब्दील किया गया.
(इनपुट भाषा)
 

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट के दशहत के चलते देश में बढ़ रहे कोरोना के मामले, देखे आकड़े

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट के दशहत के चलते देश में बढ़ रहे कोरोना के मामले, देखे आकड़े

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। देश में अभी तक 21 मामले आ चुके हैं। इसको लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डरने से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर कोरोना के दैनिक मामले बीते कुछ समय से 10 हजार से कम मामले आ रहे हैं। हालांकि, देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। दिल्ली, बंगाल, महाराष्ट्र, गोवा समेत अन्य प्रदेशों में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।


पिछले 24 घंटे में कोरोना के 8,306 नए मामले सामने आए हैं। यानी रविवार के मुकाबले सोमवार को जारी आंकड़ों में पांच सौ मरीजों की कमी आई है। इस दौरान 8834 लोग स्वस्थ्य होकर घर भी लौट गए हैं। राहत की बात है कि कोरोना के सक्रिय मामले लगातार कम हो रहे हैं। 552 दिन बाद कोरोना के कोरोना के एक्टिव केस कम हुए हैं। कोरोना के सक्रिय मामले 98,416 है। रविवार को देश में 8,895 नए मामले सामने आए थे जबकि 6,918 स्थवस्थ्य हुए थे।


वहीं, 3 करोड़ 46 लाख 41 हजार 561 कुल मामले सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही स्वस्थ्य होने वाले लोगों की संख्या भी तेजी से आगे बढ़ रही है। देश में महामारी से मरने वालों की कुल संख्या 4,73,555 हो गई है।


देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 63 नए मामले सामने आए हैं। साथ ही बीते पांच दिनों में संक्रमण दर बढ़कर 0.11 फीसदी बढ़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि एक भी मरीज ने दम नहीं तोड़ा।

जानवरों के शरीर में जाकर बदला कोरोना? वैज्ञानिकों ने बताया कैसे बना ओमिक्रॉन

जानवरों के शरीर में जाकर बदला कोरोना? वैज्ञानिकों ने बताया कैसे बना ओमिक्रॉन

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने दुनियाभर में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। भारत में भी इसकी दस्तक शुरू हो गई है। इस बीच अमेरिका की एक संस्था की रिसर्च सामने आई है। जिसमें ये खुलासा हुआ है कि जब कोरोना संक्रमित इंसान जानवरों के संपर्क में आते हैं और संक्रमित जानवर किसी स्वस्थ इंसान के संपर्क में आ जाए तो नए तरह के वैरिएंट का जन्म हो सकता है। इसे रिवर्स जूनोसिस कहते हैं। यानि सार्स-कोव-2 जैसा प्रकार उत्पन्न हो सकता है। बता दें कि ओमिक्रॉन सार्स-कोव-2 प्रकार का वैरिएंट है।
अमेरिका के कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन एंड बायोमेडिकल साइंसेज में रिसर्च टीम ने बिल्लियों, कुत्तों, फेरेट्स और हैम्स्टर्स में संक्रमण के बाद कोरोना वायरस में होने वाले उत्परिवर्तन प्रकारों का विश्लेषण किया। यह रिसर्च हाल ही में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की आधिकारिक पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित हुई थी। इसमें विभिन्न प्रकार के जानवरों जैसे जंगली, चिड़ियाघर और घरेलू जानवरों में रिसर्च की गई। रिसर्च के मुताबिक, यदि कोई जानवर कोरोना संक्रमित इंसान के संपर्क में आता है तो नए प्रकार के कोरोना वायरस वैरिएंट का जन्म हो सकता है। इस रिसर्च से इस बात को बल मिला है कि कहीं ओमिक्रॉन वैरिएंट का जन्म भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा तो नहीं ?
अमेरिका में माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग में डॉक्टरेट की छात्रा लारा बशोर के मुताबिक, " आम तौर पर कई प्रकार के वायरस जानवरों की अन्य प्रजातियों को संक्रमित नहीं कर सकते हैं, वे बहुत विशिष्ट हो गए हैं। लेकिन कोरोना फैमिली का सार्स-कोव-2 इससे अलग है।"
वहीं, पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में वन्यजीव रोग पारिस्थितिकी के सहायक प्रोफेसर एरिक गग्ने कहती हैं, "मनुष्यों के आस-पास रहने वाले जानवरों के लिए ये वायरस अधिक जोखिम वाला है, इसलिए इसने कोविड-19 फैमिली के विभिन्न वैरिएंट को उत्पन्न करने का अवसर दिया है।"
दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के खतरनाक वेरिएंट ओमिक्रॉन पर कुछ दिन पहले वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाले खुलासे किए थे। वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि ओमिक्रॉन रोडेंट्स यानी चूहों जैसे जीव के जरिए इंसानों तक पहुंचा है। इस प्रक्रिया को रिवर्स जूनोस‍िस कहते हैं।
जूनोसिस और रिवर्स जूनोसिस में अंतर
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जब जानवरों से इंसान तक कोई बीमारी पहुंचती तो इस प्रक्रिया हो जूनोसिस कहते हैं। वहीं, जब जानवरों से बीमारी अपना रूप बदलकर इंसानों में वापस आती है तो इसे रिवर्स जूनोसिस कहते हैं। यही दावा वैज्ञान‍िकों ने अपनी रिपोर्ट में किया है। वैज्ञान‍िक कहते हैं कि जितना ज्यासदा म्यू टेशन इस वैरिएंट में पाया गया है उतना कोरोना के दूसरे वैरिएंट में नहीं देखा गया, क्योंकि ओमिक्रॉन में 32 म्यूटेशन हैं। हालांकि अभी भी पुख्तारतौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि ओमिक्रॉन जानवरों से फैला या इंसानों में धीरे-धीरे विकसित हुआ।
 

तो क्या भारत में आएगी कोरोना की तीसरी लहर, क्या फिर से लग जाएगा लॉकडाउन?

तो क्या भारत में आएगी कोरोना की तीसरी लहर, क्या फिर से लग जाएगा लॉकडाउन?

दुनिया में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से हड़कंप मचा हुआ है और भारत में भी अब इसने अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है. बता दें कि 24 नवंबर को ओमिक्रॉन के पहले केस की पुष्टि के बाद से अबतक यानी सिर्फ दस दिनों में ही ये कोरोना का नया वैरिएंट दुनिया के 38 देशों में फैल चुका है और पूरी दुनिया में ओमिक्रॉन वैरिएंट के अबतक करीब 400 केस सामने आ चुके हैं. ओमिक्रॉन का पहला केस दक्षिण अफ्रीका में मिला था. जहां अबतक 183 लोग इस वेरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं. इसके बाद सबसे ज्यादा 19 केस बोत्सवाना में आए हैं.ब्रिटेन में 32 और नीदरलैंड्स में 19 केस की पुष्टि हो चुकी है.
भारत में भी कड़ी जांच और सख्ती के बाद भीपांचमरीज अबतक मिल चुके हैं. कर्नाटक में पहले दो केस मिलने के बाद आज एक केस गुजरात के जामसे और दूसरा मुंबई में सामने आया है. जामनगर में ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति हाल ही में जिम्बाब्वे से भारत आया था. जबकि मुंबई में मिला मरीज केपटाउन से मुंबई लौटा था.और आज एक मरीज दिल्ली में मिला है जोकि तंजानिया से लौटा है.
भारत में ओमिक्रॉन लाएगा कोरोना की तीसरी लहर…
दुनिया में जिस तरह से ओमिक्रॉन फैल रहा है, उसे देखकर लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में कोरोना की तीसरी लहर ओमिक्रॉन लेकर आएगा. बता दें कि अभी भी ओमिक्रॉन पर रिसर्च पूरी नहीं हुई है. लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि ओमिक्रॉन से भारत में तीसरी लहर आ सकती है और सभी को सावधान रहने की जररूत है. अगर राहत की बात कोई दिखाई पड़ रही है तो वो सिर्फ ये है कि भारत में टीकाकरण की गति तेज बनी हुई है. ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर मामले बढ़ते भी हैं, तो शायद भारत में कोरोना के नए वैरिएंट की स्थिति दूसरी लहर जितनी खतरनाक नहीं होगी.
डेल्टा से कितना खतरनाक है ये ओमिक्रॉन ?
भारत में डेल्टा से ज्यादा संक्रमितों को मिली सीरोपॉजिविटी की वजह से नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा यहां कुछ कम हो सकता है. लेकिन अभी भी वैज्ञानिक कुछ भी सही नहीं बता पा रहे हैं कि यह डेल्टा से कितना खतरनाक होगा. अब इस राहत के बीच चिंता का विषय ओमिक्रॉन का अपना स्वरूप बदलना है. कहा गया है कि ओमिक्रॉन में तीस से ज्यादा बार म्यूटेशन हुआ है. डेल्टा के मुकाबले भी इसे पांच गुना ज्यादा संक्रामक माना जा रहा है. ऐसे में हमारी थोड़ी भी लापरवाही फिर बड़ा संकट खड़ा कर सकती है.
क्या फिर से लगेगा लॉकडाउन
अभी के लिए भारत में एक ट्रैवल एडवाइजरी पहले ही जारी कर दी गई है. एयरपोर्ट पर भी स्क्रीनिंग और टेस्टिंग बढ़ा दी गई है. दूसरे राज्यों ने भी एट रिस्क देशों से आने वाले यात्रियों को क्वारंटीन में रखने का फैसला किया है.ऐसे में सख्ती दिखाई जा रही है, अब ये वायरस को रोकने में कितना असरदार साबित होता है, ये आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा. अगर लापरवाही बरती गई और केसेज बढे तो भारत में लॉकडाउन के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

 

ओमिक्रॉन के खतरे के बीच बड़ी राहत, देश की 50 फीसदी आबादी का टीकाकरण पूरा

ओमिक्रॉन के खतरे के बीच बड़ी राहत, देश की 50 फीसदी आबादी का टीकाकरण पूरा

भारत में ओमिक्रॉन के पैर पसारने के बीच देश ने कोरोना वायरस के खिलाफ एक नई उपलब्धि हासिल की है। भारत में अब 50 फीसदी योग्य आबादी का टीकाकरण पूरा हो गया है। देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने रविवार को इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि भारत में अब तक कुल 1 अरब 27 करोड़ 61 हजार वैक्सीन डोज दी जा चुकी है।


स्वास्थ्य मंत्री ने रविवार को ट्वीट किया, 'यह गर्व का मौका है। 50 प्रतिशत योग्य आबादी का टीकाकरण पूरा हो गया। हम साथ में कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे।'
बीते 24 घंटे में कोरोना वैक्सीन की 1 करोड़ 4 लाख 18 हजार 707 डोज दी गई है।

 

स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बन सकता है सेब का अधिक सेवन, हो सकती हैं ये समस्याएं

स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बन सकता है सेब का अधिक सेवन, हो सकती हैं ये समस्याएं

सेब का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें पॉलीफेनोल्स, डाइटरी फाइबर, कैरोटीनॉयड, आयरन, पौटेशियम, प्रोटीन, फास्फोरस और कार्बोहाइड्रेट जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसी वजह से लोग इसका सेवन करना पसंद करते हैं, लेकिन अगर सेब का अधिक सेवन किया जाए तो यह आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। आइए आज आपको बताते हैं कि सेब का अधिक सेवन करने से किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पेट संबंधी समस्याओं का रहता है खतरा
जरूरत से ज्यादा सेब का सेवन करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम प्रभावित होता है, जिसके कारण पेट में गैस, जलन और कब्ज जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। दरअसल, सेब में फाइबर की अधिकता होती है और अधिक फाइबर के सेवन से पाचन क्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप सीमित मात्रा में ही सेब का सेवन करें ताकि आपको किसी भी तरह की पेट संबंधी समस्या से जूझना न पड़े।
बढ़ सकता है वजन
सेब का अधिक सेवन बढ़ते वजन का कारण बन सकता है और इसकी मुख्य वजह इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी है। इस समस्या को सामान्य न समझें क्योंकि यह शरीर को कई अन्य बीमारियों का घर बना सकती है। इसलिए रोजाना सीमित मात्रा में ही सेब का सेवन करें। वैसे कभी-कभी कुछ शारीरिक समस्याओं के कारण भी लोगों का वजन बढऩे लगता है, इसलिए बढ़ते वजन की समस्या की असल वजह जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
लो ब्लड प्रेशर का बन सकता है कारण
अगर आपको लो ब्लड प्रेशर यानि निम्न रक्तचाप की समस्या रहती है तो ऐसे में आपको भूल से भी सेब का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। दरअसल, जरूरत से ज्यादा सेब का सेवन करने से आपका ब्लड प्रेशर और भी ज्यादा कम हो सकता है। इसलिए अगर आपको पहले से ही लो ब्लड प्रेशर की समस्या है तो सेब का अधिक सेवन करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है और आपको कई गंभीर पेरशानियां हो सकती हैं।
दांतों का स्वास्थ्य हो सकता है प्रभावित
सेब का अधिक सेवन दांतों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। कई अध्ययनों में इस बात का जिक्र मिलता है कि सेब में एक ऐसा एसिड मौजूद होता है, जो अगर दांतों के संपर्क में ज्यादा आता है तो इससे दांत संवेदनशील हो जाते हैं। वहीं, दांतों में संवेदनशीलता से दांतों में दर्द और इनके टूटने की संभावना अधिक हो सकती है। अगर आपको अपने दांतों में संवेदनशीलता महसूस होती है तो तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करें।

 

ओमिक्रॉन के खिलाफ ज्यादा कारगर हो सकती है कोवाक्सिन...

ओमिक्रॉन के खिलाफ ज्यादा कारगर हो सकती है कोवाक्सिन...

नई दिल्ली: दुनियाभर में ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता जा रहा है, इस बीच कई वैक्सीन कंपनियों ने इस वैरिएंट के खिलाफ अपने टीके की प्रभावशीलता को लेकर शक जताया है। हालांकि, भारत में बनी कोरोना वैक्सीन- कोवाक्सिन को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक्सपर्ट्स ने भरोसा जताया है। अधिकारियों का कहना है कि भारत बायोटेक की कोवाक्सिन कोविड के इस परिष्कृत रूप से निपटने में ज्यादा प्रभावी हो सकती है।


एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि कोवाक्सिन के डोज बाकी मौजूदा वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। क्योंकि यह इनएक्टिवेटेड वायरस की तकनीक पर बनाया गया टीका है, जो कि पूरे वायरस को ही निष्क्रिय कर देता है और यह नए वैरिएंट पर भी प्रभावी पाया जा सकता है।


कोवाक्सिन को इससे पहले कोरोना के अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ भी कारगर करार दिया जा चुका है। अधिकारी ने कहा, `हम मान सकते हैं कि कोवाक्सिन बाकी वैरिएंट्स के खिलाफ भी उतनी ही कारगर होगी।` हालांकि, अधिकारी ने साफ किया कि वैक्सीन लगवा चुके लोगों को बिल्कुल एहतियात बरत कर रहना चाहिए। हम लोग इस वैरिएंट के खिलाफ टीके की प्रभावशीलता परखने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में टेस्ट्स करेंगे।

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट के दस्तक के साथ ही देश में कोरोना के मामलो में इजाफा, देखे आकड़े

कोरोना अपडेट: नए वैरिएंट के दस्तक के साथ ही देश में कोरोना के मामलो में इजाफा, देखे आकड़े

नई दिल्ली: कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की दस्तक के साथ ही देश में संक्रमण के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में 9 हजार से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जबकि 477 लोगों की मौत हो गई। वहीं, आठ हजार लोग स्वस्थ्य भी हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना के 99 हजार 763 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं।


बुधवार को जारी आंकड़े की अपेक्षा एक्टिव केस में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, 3 करोड़ 40 लाख 37 हजार 054 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 3 करोड़ 46 लाख 22 हजार 776 कुल मामले सामने आए हैं। भारत में अब तक कोरोना से 4 लाख 69 हजार 724 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना टीकाकरण की बात करें तो देश में 2 दिसंबर तक जारी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अरब 24 करोड़ 96, 19, 515 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इसमें बुधवार को 80 लाख 35 हजार 261 लोगों को वैक्सीन दी गई।

World AIDS Day 2021 : HIV और AIDS में होता है अंतर, जानें AIDS से बचने के उपाय

World AIDS Day 2021 : HIV और AIDS में होता है अंतर, जानें AIDS से बचने के उपाय

हर साल 1 दिसंबर को एड्स विश्‍व दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए आज भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
एड्स /AIDS (Aquired Immnue Deficiency Syndrome) होता और एचआईवी /HIV (Human
Immnuno Deficiency Virus) को एक ही माना जाता है लेकिन यह दोनों अलग-अलग है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति ने वर्ष 1995 में एड्स के बारे में आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद से हर साल 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस मनाया जाता है।

एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसका अभी तक किसी प्रकार का सही उपचार नहीं मिला है। इस बीमारी में इंसान के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। सालों से जारी
रिसर्च में एड्स की कोई वैक्‍सीन और प्रभावी इलाज सामने नहीं आया है। हालांकि एचआईवी और एड्स का नाम सुनते ही हवाइया उड़ जाती है। लेकिन बहुत से ऐसे लोग है जिन्‍हें एचआईवी और एड्स के बारे में नहीं पता है। तो आइए जानते हैं

 

एचआईवी और HIV/एड्स AIDS में क्‍या अंतर है। साथ ही इससे बचने के उपाय -

 

- दरअसल, एचआईवी एक वायरस है। जिस वजह से AIDS की बीमारी होती है। एचआईवी वायरस से प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर पड़ता है। जबकि एड्स एक मेडिकल सिंड्रोम है। जो एचआईवी वायरस होने के बाद की स्थिति में होता है।

- एचआईवी एक इंसान से दूसरे इंसान को हो सकता है। लेकिन एड्स नहीं हो सकता है।

- यदि कोई एचआईवी से संक्रमित है तो ऐसा जरूरी नहीं है कि उसे एड्स हुआ हो। लेकिन एचआईवी संक्रमित व्‍यक्ति को एड्स हो सकता है।

- एचआईवी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर करता है। इस वायरस की चपेट में आने पर इंसान संक्रमण और बीमारियों से लड़ नहीं पाते हैं। और धीरे - धीरे इंफेक्‍शन फैलने लगता है। जिसके बाद एड्स से पीड़ति हो जाते हैं।

- सहीं समय पर सही उपचार मिलने से स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं।

 

आइए जानते हैं AIDS से बचने के उपाय -

 

दुनिया में इस लाइलाज बीमारी का फिलहाल कोई उपाचार नहीं है लेकिन अंग्रेजी दवाओं के माध्‍यम से इसका कुछ समय के लिए उपचार किया जा सकता है। अलग-अलग डॉक्‍टर अलग-अलग प्रकार से इसका उपचार करते हैं।

एड्स का कोई इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन एंटी-रेट्रोवायरल रेजीम का पालन कर इस रोग का बढ़ना कम किया जा सकता है।

एचआईवी एंटीवायरल - संक्रमण के खतरे का कम कर HIV का प्रभाव कम करता है। साथ ही दूसरों को संक्रमित करने से बचते हैं।

मनोविज्ञानी - बातचीत कर मानसिक रूप से संक्रमित मरीजों को ठीक किया जाता है।

प्राथमिक उपचार - रोग की पहचान कर रोकथाम के लिए इलाज करते हैं।

 

क्‍या खाना चाहिए -

 

- कम फैट वाला आहार करें।

- फल और सब्जियां।

- साबुत अनाज।

- दालें।

घरेलू उपाय क्‍या कर सकते हैं?

- अपने हाथों को बार-बार धोएं। खाने बनाने से पहले धोएं, खाना खाने से पहले धोएं, शोचालय जाने के बाद अच्‍छे हाथों को धोएं।

- नाखूनों को साफ रखें।

- रुखी त्‍वचा होने पर क्रीम लगाते रहे।

- स्‍वच्‍छता का पूरा ख्‍याल रखें।

- तनाव मुक्‍त रहे, मेडिटेशन करें, योग करें।

- मादक पदार्थ का सेवन नहीं करें।

- आराम करें।

NOTE:- यह एक सामन्‍य जानकारी है। ठीक नहीं लगने पर डॉक्‍टर से जरूर चर्चा करें।

 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटे में 7 हजार से कम नए मामले, 190 मौत

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटे में 7 हजार से कम नए मामले, 190 मौत

नई दिल्ली: भारत में कोरोनावायरस महामारी का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है। पिछले 24 घंटे की ही बात कर लें तो देश में कोरोना के 6,990 नए मामले सामने आए। यह पिछले साल मई यानी डेढ़ साल बाद एक दिन में कोरोना केसों का सबसे कम आंकड़ा है। उधर संक्रमण से 190 और लोगों की मौत दर्ज की गई

इसी के साथ भारत में अब तक कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 3,45,87,822 हो चुकी है। वहीं, मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 4,68,980 हो गया। देश में कोविड-19 के सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 1,00,543 हो गई है।

वजन घटाने के लिए पीएं Apple Cider Vinegar, जानिए पीने का सही तरीका

वजन घटाने के लिए पीएं Apple Cider Vinegar, जानिए पीने का सही तरीका

वजन घटाने के लिए एक्सरसाइज के साथ-साथ डाइट भी जरूरी है. आपको खाने में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जिससे मोटापा जल्दी कम हो. अगर आप लंबे समय से वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वजन कम नहीं हो रहा है तो आप Apple Cider Vinegar का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे सेब का सिरका कहते हैं. वजन घटाने (Weight Loss) और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में ये बहुत मदद करता है. मोटापा कम करने के लिए आपको रोज सुबह खाली पेट एप्पल साइडर विनेगर पीना चाहिए. इसके सेवन से शरीर को कई फायदे मिलते हैं. जानते हैं इसका इस्तेमाल करने का तरीका.
एप्पल साइडर वेनेगर पीने का तरीका
वजन कम करने के लिए आप Apple Cider Vinegar को रोज सुबह खाली पेट पिएं. आपको 2 चम्मच एप्पल साइडर वेनेगर लेना है इसमें आधा नींबू का रस, 1 चम्मच शहद और आधा चम्मच पिंक सॉल्ट जिसे सेंधा नमक कहते हैं. इन चीजों को एक गिलास पानी में डालकर पी लें. आप इसी तरह एक बार रात को खाना खाने से पहले भी पी सकते हैं. इससे आपको वजन कम करने में काफी मदद मिलेगी.

एप्पल साइडर वेनेगर के फायदे

1- मोटापा घटाए-
एप्पल साइडर वेनेगर से वजन कम करने में मदद मिलती. इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. एप्पल साइडर विनेगर पीने से शरीर को भरपूर पोषण मिलता है. आप सलाद या किसी ड्रिंक में डालकर आप इसे पी सकते हैं. नियमित रुप से इसका सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है.


2- डायबिटीज में फायदा-
एप्पल साइडर वेनेगर पीने से डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है. शरीर में हाई ब्लड शुगर लेवल होने से वजन बढ़ता है. अगर आप एप्पल साइडर वेनेगर पीते हैं तो इससे शुगर कम हो जाता है. शरीर में फैट स्टोर करने का काम इंसुलिन हार्मोन करता है और Apple Cider Vinegar इंसुलिन को टैप करने में मदद करता है. इससे वजन भी कम होता है.


3- चर्बी कम करता है-
शरीर में मोटापा बढ़ने से कई तरह की बीमारियां शुरु हो जाती हैं. सेब का सिरका शरीर से एक्स्ट्रा फैट को गलाकर कम करने का काम करता है. कई रिसर्च में भी इस बारे में पता चला है कि एप्पल साइजर वेनेगर पीने से शरीर में वसा की मात्रा कम हो जाती है.


4- भूख मिटाता है-
एप्पल साइडर वेनेगर से पीने से काफी समय तक भूख नहीं लगती है. सेब के सिरका में एसिटिक एसिड होता है जिससे भूख शांत होती है. इसे पीने से दिमाग में फुल होने के संकते जाते हैं और आप ज्यादा खाने से बचते हैं.


Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की Just36News पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.