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26 जुलाई : आइए एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 की नवीनतम जानकारी पर

26 जुलाई : आइए एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 की नवीनतम जानकारी पर

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 43.51 करोड़ खुराक लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,05,79,106 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.35 प्रतिशत हुई।

पिछले 24 घंटों के दौरान 35,968 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 39,361 मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,11,189 हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.31 प्रतिशत हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.31 प्रतिशत है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 3.41 प्रतिशत, लगातार 35वें दिन भी 3 प्रतिशत से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 45.74 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

 कोरोना की तीसरी लहर की आहट! यहां हुआ एक हफ्ते में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत

कोरोना की तीसरी लहर की आहट! यहां हुआ एक हफ्ते में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत

नई दिल्ली: बच्चों पर कोरोना की तीसरी लहर का खतरा सबसे ज्यादा बताया जा रहा है और यही वजह है कि भारत में बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक सितंबर तक भारत में कोरोना की वैक्सीन आ सकती है और इसके ट्रायल तेजी से चल रहे हैं. लेकिन अन्य देशों में बच्चों पर तीसरी लहर का असर भयावह असर देखने को मिल रहा है.

100 से ज्यादा बच्चों की मौत
इंडोनेशिया में बीते एक हफ्ते के दौरान ही 100 से ज्यादा बच्चों की संक्रमण की चपेट में आने के बाद जान चली गई जिससे तीसरी लहर का खतरा और बढ़ गया है. मरने वाले बच्चों में कई की उम्र तो पांच साल से भी कम बताई जा रही है. बच्चों की मृत्यु दर यहां सबसे ज्यादा है जिसने डॉक्टरों की ओर से बच्चों पर कोरोना के कम असर वाले दावे के सामने चुनौती पेश की है.

मनी कंट्रोल की खबर के मुताबिक इंडोनेशिया में इतनी बड़ी तादाद में बच्चों की मौत से कोहराम मच गया है और स्थानीय लोग इसे सरकार की विफलता बता रहे हैं. लोगों में गुस्सा है कि सरकार की ओर से तीसरे लहर के खतर को देखते हुए पहले से तैयारियां क्यों नहीं की गईं. 

स्थानीय डॉक्टर अमन पुलुगन ने बताया कि हमारे आंकड़े दुनिया में सबसे ज्यादा हैं, बच्चों की मौत लगातार हो रही है लेकिन हम अपने बच्चों के लिए बेहतर इंतजाम क्यों नहीं कर पाए. साउथ ईस्ट एशिया में बच्चों की मौत के बढ़ते मामलों की पीछे डेल्टा वेरिएंट को वजह माना जा रहा है साथ ही इन मुल्कों में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी धीमी चल रही है. 
 
इंडोनेशिया दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा आबादी वाला मुल्क है लेकिन भारत और ब्राजील को पीछे छोड़ वहां संक्रमण में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. शुक्रवार के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 50 हजार मामले और 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इंडोनेशिया ही नहीं, थाईलैंड, मलेशिया, म्यांमार और वियतनाम जैसे मुल्कों में भी संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. 

इंडोनेशिया के अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत होने लगी है. सरकार ने उद्योग के बजाय चिकित्सा उपाय के लिए ऑक्सीजन देने का निर्देश दिया है. देश में पहले 25 प्रतिशत ऑक्सीजन चिकित्सा क्षेत्र को मिलता था जो अब बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक कर दिया गया है. उधर भारत ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं और इंडोनेशिया को 300 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सौ मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की है.
तेजी से बढ़ेगी हाइट, बस रोजाना दबाएं ये एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेजी से बढ़ेगी हाइट, बस रोजाना दबाएं ये एक्यूप्रेशर प्वाइंट

अगर उम्र के हिसाब से आपकी या फिर आपके बच्चों की हाइट छोटी रह गई है तो यकीनन इसे बढ़ाने के लिए आप काफी मशक्कतें करते होंगे। यह जरूरी भी है क्योंकि अच्छी हाइट पर्सनालिटी में चार चांद लगाने में मदद जो करती है। इसके लिए आप चाहें तो कुछ एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स दबा सकते हैं। आइए आज हम आपको कुछ ऐसे एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स बारे में बताते हैं, जिन्हें रोजाना दबाकर तेजी से हाइट बढ़ाई जा सकती है।


क्या है एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स?
शरीर में कई ऐसे प्रेशर प्वाइंट्स होते हैं, जिनका संबंध शरीर के विभिन्न भागों से होता है। इन प्वाइंट्स के द्वारा शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे पैरों और हाथों के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर दबाव डालकर विभिन्न रोगों का इलाज किया जाता है।


आइब्रो के बीच का हिस्सा दबाएं
हाइट को बढ़ाने के लिए रोजाना आइब्रो के बीच का हिस्सा दबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए आप अपनी आइब्रो के बीचों-बीच कोई भी एक उंगली रखें और उससे माथे पर दबाव बनाएं। इसके बाद इसे सर्कुलेशन मोशन में घुमाएं। आप इसे 10-15 बार दबा सकते हैं। बेहतर परिणाम के लिए दिन में 2 बार इस एक्यूप्रेशर प्वाइंट को दबाएं, इससे आपको कुछ समय के बाद अपनी हाइट में काफी बदलाव नजर आने लगेगा।


हाथ के अंगूठे के नीचे दबाएं
अपनी हाइट बढ़ाने में हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से को दबाना काफी प्रभावी है। इसके लिए आप पहले अपने दाएं हाथ को आगे करें और फिर इसके अंगूठे के नीचे के हिससे को बाएं हाथ के अंगूठे से दबाएं। आप इसे 10 बार दबा सकते हैं। इसके बाद दाएं हाथ के अंगूठे से बाएं हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से को दबाएं। बेहतर परिणाम के लिए दिन में 2 बार इसका अभ्यास करें।


पैरों के तलवों के बीच से दबाएं
हाइट बढ़ाने के लिए पैरों के तलवों को दबाना भी लाभकारी माना जाता है। इसके लिए पहले अपने दोनों पैरों के तलवों के बीच में दोनों हाथों की कोई दो उंगली रखें और फिर इस प्वाइंट को दबाएं। आप 8-10 बार इस प्वाइंट को दबा सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास से आपका कद तेजी से बढऩे लगेगा। इसी के साथ इससे आप कई तरह अन्य स्वास्थ्य लाभ भी मिलने लगेंगे।


पिंडलियों को दबाएं
हाइट बढ़ाने के लिए पिंडलियों को दबाना भी फायदेमंद है। इसलिए रोजाना अपनी पिंडलियों को हाथों की मदद से कम से कम 10 बार दबाएं। इससे बेहतर परिणाम पाने के लिए आप पिंडलियों को दिन में दो-तीन बार दबा सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर आपके बच्चे की हाइट छोटी है तो एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स की बजाय उसे बचपन से ही हाइट बढ़ाने के लिए एक अच्छी डाइट दें और कुछ एक्सरसाइज करवाएं।

25 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

25 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकाकरण अभियान के जरिये ज्यादा टीकों की उपलब्धता के साथ, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण उपलब्धता की अग्रिम जानकारी देकर तेज किया गया है ताकि टीकों को लेकर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बेहतर योजना बना सकें और टीकों की आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित की जा सके। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। सबको टीका उपलब्ध कराने से जुड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के नए चरण के तहत केंद्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत टीके खरीदेगी और उनकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को (नि:शुल्क) आपूर्ति करेगी। भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 45.37 करोड़ से अधिक खुराक (45,37,70,580) सभी स्रोतों के माध्यम से प्रदान की है। इसके अलावा टीके की 11,79,010 खुराक प्रक्रियारत हैं। आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार इनमें अपव्यय सहित कुल 42,08,32,021 खुराक की खपत हुई है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अब भी टीके की 3.29 करोड़ से अधिक (3,29,38,559) खुराक उपलब्ध हैं जो बची हुई हैं, जिनका अभी इस्तेमाल किया जाना है।

25 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

25 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 43.31 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,05,43,138 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.36 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 39,972 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 39,742 मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,08,212हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.30% हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.24% है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.31%, लगातार 34 वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 45.62 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

पहला मौका जब ऑक्सीजन एक्सप्रेस को पड़ोसी देश के लिए परिचालन में लगाया गया, जाने कहा जाएगी ट्रेन

पहला मौका जब ऑक्सीजन एक्सप्रेस को पड़ोसी देश के लिए परिचालन में लगाया गया, जाने कहा जाएगी ट्रेन

नई दिल्ली | भारतीय रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ी बांग्लादेश की यात्रा पर जाने के लिए तैयार है। यह पहला मौका है जब ऑक्सीजन एक्सप्रेस को पड़ोसी देश के लिए परिचालन में लगाया गया है। आज दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत चक्रधरपुर मंडल के टाटा में 200 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) को बांग्लादेश के बेनापोल तक पहुंचाने का मांगपत्र रखा गया।  10 कंटेनर रेक में एलएमओ की 200 मीट्रिक टन की लोडिंग 09.25 बजे पूरी हो चुकी है।  उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे द्वारा 24 अप्रैल, 2021 को मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले भारतीय राज्यों को राहत देने के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस शुरू की गई थी। 35000 मीट्रिक टन से अधिक एमएलओ को 15 राज्यों में पहुंचाया गया। लगभग 480 ऑक्सीजन एक्सप्रेस का संचालन किया गया था। भारतीय रेलवे का प्रयास है कि कम से कम समय में जितना संभव हो उतनी एलएमओ पहुंचायी जाए।

24 जुलाई : आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण अपडेट पर

24 जुलाई : आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण अपडेट पर

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकाकरण अभियान के जरिये ज्यादा टीकों की उपलब्धता के साथ, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण उपलब्धता की अग्रिम जानकारी देकर तेज किया गया है ताकि टीकों को लेकर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बेहतर योजना बना सकें और टीकों की आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित की जा सके।
राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। सबको टीका उपलब्ध कराने से जुड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के नए चरण के तहत केंद्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत टीके खरीदेगी और उनकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को (नि:शुल्क) आपूर्ति करेगी। भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 44.53 करोड़ से अधिक खुराक (44,53,86,390) सभी स्रोतों के माध्यम से प्रदान की है। इसके अलावा टीके की 85,58,360 खुराक प्रक्रियारत हैं। 
आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार इनमें अपव्यय सहित कुल 41,55,50,543 खुराक की खपत हुई है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अब भी टीके की 2.98 करोड़ से अधिक (2,98,35,847) खुराक उपलब्ध हैं जो बची हुई हैं, जिनका अभी इस्तेमाल किया जाना है।

24 जुलाई : आइये एक नज़र डालते हैं आज के  कोविड-19 से जुडी ताज़ा जानकारी पर

24 जुलाई : आइये एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 से जुडी ताज़ा जानकारी पर

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 42.78करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,05,03,166मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.35प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 35,087मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 39,097मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,08,977हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.31% हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.22% है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.40%, लगातार 33 वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 45.45करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

23 जुलाई :  कोविड-19 टीकाकरण पर ताज़ा जानकारी

23 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण पर ताज़ा जानकारी

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की गति को तेज करने और इसके दायरे का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीकाकरण के सार्वभौमिकरण का नया चरण 21 जून 2021 से शुरू हुआ। टीकाकरण अभियान को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अधिक टीकों की उपलब्धता और वैक्सीन उपलब्धता की अग्रिम स्थिति के माध्यम से बेहतर योजना बनाने और वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने के माध्यम से तेज किया गया है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के अंग के रूप में, भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निःशुल्क में कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी सहायता कर रही है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नए चरण में, केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए देश में वैक्सीन निर्माताओं द्वारा उत्पादित किए जा रहे टीकों की 75 प्रतिशत खरीद और आपूर्ति (निःशुल्क) करेगी। सभी स्रोतों के माध्यम से अब तक राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को 43.87 करोड़ (43,87,50,190) से अधिक वैक्सीन की खुराक प्रदान की जा चुकी हैं और 71,40,000 और खुराक की आपूर्ति का जानी हैं। इसमें से अपव्यय सहित कुल खपत 41,12,30,353 खुराक (आज सुबह 8 बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अभी भी 2.75 करोड़ (2,75,19,837) से अधिक शेष और अप्रयुक्त कोविड वैक्सीन खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना है।

 

23 जुलाई :  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

23 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 42.34 करोड़ खुराक लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,04,68,079 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.36 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 38,740 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 35,342 मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,05,513 हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.30 प्रतिशत हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.14 प्रतिशत है।

 

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.12 प्रतिशत, लगातार 32 वें दिन भी 3 प्रतिशत से कम।

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 45.29 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

बर्ड फ्लू पर एम्स के डायरेक्टर कही ये बात... पढ़े पूरी खबर

बर्ड फ्लू पर एम्स के डायरेक्टर कही ये बात... पढ़े पूरी खबर

एवियन इन्फ्लूएंजा से देश में पहली मौत की पुष्टि के बीच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रमुख रणदीप गुलेरिया ने बुधवार को कहा कि एच5एन1 वायरस का मानव से मानव में संक्रमण बहुत दुर्लभ है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। एम्स निदेशक ने पीटीआई-भाषा से कहा कि हालांकि संपर्क में आने से बचना चाहिए और वायरस के कारण जहां पर बच्चे की मौत हुई, उस क्षेत्र से नमूने लिए जाने की जरूरत है तथा कुक्कुटों की मौत पर नजर रखनी चाहिए। हरियाणा के 12 वर्षीय लड़के की एच5एन1 वायरस के संक्रमण से हाल में एम्स दिल्ली में मौत हो गयी। गुलेरिया ने कहा, ''पक्षियों से मानवों में वायरस का संक्रमण बहुत दुर्लभ है और एच5एन1 का मानव से मानव में संक्रमण का मामला अब तक साबित नहीं हुआ है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। डॉ. गुलेरिया ने कहा, लेकिन पोल्ट्री के निकट काम करने वाले लोगों को निश्चित तौर पर एहतियात बरतना चाहिए और साफ-सफाई रखना चाहिए।
एम्स में मेडिसीन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने कहा कि एवियन इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से पक्षियों की बीमारी है और मानव से मानव के बीच संक्रमण का अब तक प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ''हालांकि संक्रमण से प्रभावित कुछ छिटपुट क्षेत्रों का पता चला है। इन क्षेत्रों में दुर्लभ स्थिति में संक्रमण का प्रसार हो सकता है। हालांकि मानव से मानव के बीच संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। डॉ निश्चल ने कहा, सीरो सर्वेक्षण में बिना लक्षण वाले मामलों में कोई प्रमाण नहीं मिला है और उपचार के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण फैलने के कोई सबूत नहीं हैं। उन्होंने कहा, ''अगर कोई ठीक से पका हुआ पोल्ट्री उत्पाद खा रहा है तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

ठीक से पके हुए भोजन से लोगों में फैलने के सबूत नहीं
अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह ठीक से पके हुए भोजन से लोगों में फैल सकता है। भोजन को उच्च तापमान पर पकाने पर वायरस नष्ट हो जाता है। संक्रमित, खासकर बीमार मुर्गे-मुर्गियों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि पूर्व में जब मुर्गे-मुर्गियों में एच5एन1 एवियन फ्लू इन्फ्लूएंजा के मामले सामने आए थे तो संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उन क्षेत्रों में कुक्कुटों को मार दिया गया था। उन्होंने कहा कि एच5एन1 वायरस का प्रसार मुख्य रूप से प्रवासी पक्षियों के जरिए कुक्कुटों में होता है। गुलेरिया ने कहा कि जो लोग पोल्ट्री के निकट संपर्क में काम करते हैं, उनमें संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।

12 साल के लड़के की मौत
एम्स के एक सूत्र ने कहा था कि 12 वर्षीय लड़के को दो जुलाई को निमोनिया और ल्यूकेमिया की दिक्कतों के साथ एम्स में भर्ती कराया गया था। उसकी 12 जुलाई को मृत्यु हो गई। इलाज के दौरान कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा की जांच की गयी। सूत्र ने कहा था, ''लड़के की कोविड-19 जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। इन्फ्लूएंजा संक्रमण की पुष्टि हुई। नमूने को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे भेजा गया जहां एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई।

कुछ राज्यों ने बीमारी के फैलने के बाद कुक्कुटों को मार डाला
सूत्रों ने कहा कि मामले का विवरण राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) को भेज दिया गया है और उनकी टीम ने निगरानी और संपर्क का पता लगाना शुरू कर दिया है। यह देखा जा रहा है कि क्या इसी तरह के लक्षणों वाला कोई और मामला है जिनके साथ बच्चा संपर्क में आया था। इस बीच, संक्रमित बच्चे के संपर्क में आए एम्स के सभी कर्मचारियों को फ्लू के किसी भी लक्षण पर नजर रखने और तुरंत अधिकारियों को सूचित करने को कहा गया। जनवरी में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे कुछ राज्यों ने बीमारी के फैलने के बाद कुक्कुटों को मार डाला था।

वायरस मनुष्यों को आसानी से संक्रमित नहीं करता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, लोगों में एच5एन1 संक्रमण के लगभग सभी मामले संक्रमित जीवित या मृत पक्षियों या एच5एन1 प्रभावित वातावरण के निकट संपर्क से जुड़े हैं। वर्तमान में उपलब्ध महामारी विज्ञान की जानकारी से पता चलता है कि वायरस मनुष्यों को आसानी से संक्रमित नहीं करता है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलना दुर्लभ प्रतीत होता है। जब लोग संक्रमित होते हैं तो मृत्यु दर लगभग 60 प्रतिशत होती है।

21 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

21 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकाकरण अभियान के जरिये ज्यादा टीकों की उपलब्धता के साथ, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण उपलब्धता की अग्रिम जानकारी देकर तेज किया गया है ताकि टीकों को लेकर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बेहतर योजना बना सकें और टीकों की आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित की जा सके। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। सबको टीका उपलब्ध कराने से जुड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के नए चरण के तहत केंद्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत टीके खरीदेगी और उनकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को (नि:शुल्क) आपूर्ति करेगी। भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 43.25 करोड़ से अधिक खुराक (43,25,17,330 ) सभी स्रोतों के माध्यम से प्रदान की है। इसके अलावा टीके की 53,38,210 खुराक प्रक्रियारत हैं। आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार इनमें अपव्यय सहित कुल 40,36,44,231 खुराक की खपत हुई है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अब भी टीके की 2.88 करोड़ से अधिक (2,88,73,099) खुराक उपलब्ध हैं जो बची हुई हैं, जिनका अभी इस्तेमाल किया जाना है।

21 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

21 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 41.54 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,03,90,687  मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.36 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 36,977 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 42,015 मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,07,170 हैं

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.30 % हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई हैवर्तमान में 2. 09 % है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.27 %लगातार 30 वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.91करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

सामने आया जीका वायरस का एक और मामला, अब तक 38 लोग संक्रमित

सामने आया जीका वायरस का एक और मामला, अब तक 38 लोग संक्रमित

तिरुवनंतपुरम: केरल में जीका वायरस का एक और नया मामला सामने आया है। एक और व्यक्ति के जीका वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद राज्य में इस संक्रमण के अब तक 38 मामले सामने आये हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज ने एक बयान में कहा कि जीका वायरस की जांच में तिरुवनंतपुरम के कुलाथुर में 49 वर्षीय एक महिला जीका से संक्रमित पाई गई। उनके अनुसार इस संबंध में तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज की विषाणु प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया था। मंत्री ने बताया कि सभी संक्रमितों का स्वास्थ्य फिलहाल संतोषजनक है तथा आठ मरीज उपचाराधीन हैं। 

 BREAKING : कोरोना के बाद अब नोरोवायरस ने बढ़ाई चिंता, बच्चों को ले रहा चपेट में

BREAKING : कोरोना के बाद अब नोरोवायरस ने बढ़ाई चिंता, बच्चों को ले रहा चपेट में

नई दिल्ली। दुनियाभर के लोगों के लिए कोरोनावायरस आज भी परेशानी का सबब बना हुआ है। लोग अभी इस वायरस के खौफ से पूरी तरह उभर भी नहीं पाएं हैं कि एक और वायरस ने उनकी चिंता बढ़ाकर रख दी है। माना जा रहा है कि यह वायरस कोरोनावायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। सबसे ज्यादा डराने वाली बात है कि इस वायरस के केस नर्सरी और चाइल्ड केयर सेंटर्स जैसी उन जगहों पर ज्यादा पाए गए हैं जहां पर बच्चों की संख्या ज्यादा होती है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाने वाले इस वायरस का नाम है नोरोवायरस, जिसे उल्टी बग के रूप में भी जाना जाता है।  सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की तरफ से कहा गया है कि नोरोवायरस कोरोना वायरस की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक है और इसकी वजह से संक्रमण तेजी से फैलता है। जो भी व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित है उसमें उल्टी और डायरिया जैसे लक्षण दिखााई देते हैं।


सीडीसी के अनुसार नोरोवायरस एक बहुत ही संक्रामक वायरस है जो उल्टी और दस्त का कारण बनता है। इससे पीडि़त व्यक्ति काफी संख्या में दूसरों को भी बीमार कर सकता है। क्योंकि यह कम्युनिकेबल डिजीज (संक्रामक बीमारी) यानि एक से दूसरे को फैलने वाली बीमारी की श्रेणी में आती है। नोरोवायरस को 'वोमेटिंग बग' के रूप में भी जाना जाता है।
 
नोरोवायरस के लक्षण 
- डायरिया, उल्टी, सिर चकराना और पेट में तेज दर्द होना सबसे अहम लक्षण हैं।
- इसके अलावा बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द भी कई मरीजों में देखा गया है।
- वायरस के शरीर में दाखिल होने के अंदर 12 से 48 घंटे में ही संक्रमण फैल जाता है।
- वायरस से संक्रमित व्यक्ति को 2 से 3 हफ्ते तक उल्टी होती है।
सीडीसी का कहना है कि नोरोवायरस में कई अरब वायरस हैं। कोई भी व्यक्ति अगर इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है, संक्रमित खाना खाता है, वायरस से प्रभावित सतह को छूता है या बिना हाथ धोएं मुंह में डाल लेता है, उसे इस वायरस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। ये वायरस दूसरे वायरस की ही तरह शरीर में दाखिल होकर उसे संक्रमित करता है। 

नोरोवायरस से बचाव
साफ-सफाई रखकर काफी हद तक नोरोवायरस से सुरक्षित रहा जा सकता है। नोरावायरस का संक्रमण खाने-पीने की चीजों से भी फैल सकता है। सीडीसी के मुताबिक इस बीमारी से बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि कुछ भी छूने के बाद, बाहर से आने पर और कुछ खाने से पहले हमेशा अपने हाथों को ठीक से धोएं। इसके अलावा जिस तरह से कोविड-19 से बचने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग लोग कर रहे हैं, उसी तरह से इसके लिए भी एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का प्रयोग करना बेहतर रहेगा।
20 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

20 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केंद्र सरकार पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकाकरण अभियान के जरिये ज्यादा टीकों की उपलब्धता के साथ, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को टीकाकरण उपलब्धता की अग्रिम जानकारी देकर तेज किया गया है ताकि टीकों को लेकर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश बेहतर योजना बना सकें और टीकों की आपूर्ति श्रृंखला सुव्यवस्थित की जा सके।

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। सबको टीका उपलब्ध कराने से जुड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान के नए चरण के तहत केंद्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादित 75 प्रतिशत टीके खरीदेगी और उनकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को (नि:शुल्क) आपूर्ति करेगी। भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 42.15 करोड़ से अधिक खुराक (42,15,43,730) सभी स्रोतों के माध्यम से प्रदान की है। इसके अलावा टीके की 71,40,000 खुराक प्रक्रियारत हैं।
आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार इनमें अपव्यय सहित कुल 40,03,50,489 खुराक की खपत हुई है। 
राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अब भी टीके की 2.11 करोड़ से अधिक (2,11,93,241) खुराक उपलब्ध हैं जो बची हुई हैं, जिनका अभी इस्तेमाल किया जाना है।

 

 

आइये एक नज़र डालते है आज के कोविड-19 की ताज़ा जानकारी पर

आइये एक नज़र डालते है आज के कोविड-19 की ताज़ा जानकारी पर

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 41.18 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,03,53,710 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.37 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 45,254 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 30,093 नए मामले सामने आए हैं, 125 दिनों में सबसे कम हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,06,130 हैं, जो 117 दिनों में सबसे कम हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.30 % हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.06 % है

 

 

दैनिक पॉजिटिविटी दर 1.68%, लगातार 29वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.73 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

19 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

19 जुलाई : कोविड-19 टीकाकरण अपडेट

केन्द्र सरकार देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की गति और उसका दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीके की व्यापक उपलब्धता से जुड़ा नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू हुआ है। टीकों की ज्यादा उपलब्धता, बेहतर ढंग से योजना बनाने में राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सक्षम बनाने के लिए उन्हें अग्रिम रूप से टीके की उपलब्धता के बारे में बताकर तथा टीका आपूर्ति को सुचारू करके टीकाकरण अभियान में तेजी लाई गई है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत, भारत सरकार राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क टीका उपलब्ध कराकर उनकी सहायता करती रही है। कोविड-19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नये चरण में, केन्द्र सरकार देश में टीका विनिर्माताओं द्वारा बनाए गए टीकों की 75 प्रतिशत खरीद करेगी और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को आपूर्ति (नि:शुल्क) करेगी। अभी तक राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से 42.15 करोड़ से अधिक (42,15,43,730) टीके उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें से अपव्यय सहित कुल 39,55,31,378 टीकों की (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) खपत हुई है। राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास अभी भी 2.60 करोड़ (2,60,12,352)से अधिक शेष तथा अप्रयुक्त टीके उपलब्ध हैं।

 

 

19 जुलाई :  कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

19 जुलाई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 40.64 करोड़ डोज लगाई गई हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 3,03,08,456 मरीज स्वस्थ हुये।

रिकवरी दर बढ़कर 97.32 प्रतिशत हुआ।

पिछले 24 घंटों के दौरान 38,660 मरीज ठीक हुए।

भारत में पिछले 24 घंटों में 38,164नए मामले सामने आए हैं।

भारत में सक्रिय मामले वर्तमान में 4,21,665हैं।

सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.35% हैं।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5% से नीचे बनी हुई है, वर्तमान में 2.08% है

 

दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.61%, लगातार 28वें दिन भी 3% से कम

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई - कुल 44.54 करोड़ नमूनों की जांच की गई है। 

अल्फा वैरियंट से बी.1.617.2 डेल्टा वैरियंट 40-60 प्रतिशत अधिक संक्रामक – डॉ. एन के अरोड़ा

अल्फा वैरियंट से बी.1.617.2 डेल्टा वैरियंट 40-60 प्रतिशत अधिक संक्रामक – डॉ. एन के अरोड़ा

हाल के एक साक्षात्कार में इंडियन सार्स-कोव-2 जेनोमिक्स कॉन्सॉर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के सह-अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने वैरियंट की जांच और उसके व्यवहार के हवाले से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)के बारे में चर्चा की। यह जांच यह जानने के लिये की जाती है कि डेल्टा वैरियंट इतना संक्रामक क्यों है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह जेनोमिक निगरानी के जरिये इसे फैलने से रोका गया। उन्होंने फिर जोर देकर कहा कि कोविड उपयुक्त व्यवहार बहुत अहमियत रखता है।

आईएनएसएसीओजी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की 28 प्रयोगशालाओं का संघ है, जो कोविड-19 महामारी के संदर्भ में जिनोम सीक्वेंसिंग करता है। आईएनएसएसीओजी को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 25 दिसंबर, 2020 को गठित किया था।

आईएनएसएसीओजी ने हाल में अपना दायरा बढ़ाया है। इस विस्तार के पीछे की क्या सोच है?

अति गंभीर रूप से बीमार करने वाले वैरियंट के उभरने पर कड़ी नजर रखने की जरूरत थी। उसके फैलाव को भी बराबर देखना था, ताकि बड़े इलाके में उसके फैलाव को पहले ही रोका जा सके। आईएनएसएसीओजी को दिसम्बर 2020 में गठित किया गया था, जो उस समय दस प्रयोगशालाओं का संघ था। हाल में 18 और प्रयोगशालायें उससे जुड़ गई हैं।

सार्स-कोव-2 की जिनोम आधारित पड़ताल करने के लिये प्रयोगशालाओं के मजबूत तंत्र की जरूरत महसूस की गई, ताकि उनके जरिये जिनोम सीक्वेंसिंग के सारे आंकड़ों का रोग और महामारी वाले आंकड़ों के साथ मिलान किया जाये तथा देखा जाये कि वैरियंट-विशेष कितना संक्रामक है, उससे बीमारी कितनी गंभीर होती है, वह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को चकमा दे सकता है या नहीं या टीके लगवाने के बाद उससे दोबारा संक्रमण हो सकता है या नहीं; यानी, उससे वैक्सीन के प्रभाव पर कितना असर पड़ता है और निदान का जो मौजूदा तरीका है, वह उसके लिये पर्याप्त है या नहीं।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) फिर इन आंकड़ों का विश्लेषण करता है। पूरे देश को भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा गया है और हर प्रयोगशाला को किसी न किसी विशेष क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। हमने 180-190 क्लस्टर बनायें हैं और हर क्लस्टर में चार-चार जिलों को रखा है। हम औचक रूप से नमूनों की जांच करते रहते हैं। साथ ही गंभीर रूप से बीमार, टीका लगवाने के बाद संक्रमित लोगों के नमूनों की भी जांच करते हैं। इसके अलावा लक्षण रहित लोगों के नमूनों को भी देखा जाता है। इन सब नमूनों को जमा करके उनकी सीक्वेंसिंग करने के लिये इलाके की प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है। इस समय देश में हर महीने 50 हजार से अधिक नमूनों की सीक्वेंसिंग करने की क्षमता है। पहले हमारे पास लगभग 30 हजार नमूनों को हर महीने जांचने की ही क्षमता था।

वैरियंट की जांच और उसके व्यवहार की निगरानी करने की क्या प्रणाली देश के पास है?

भारत के पास बीमारियों पर नजर रखने के एक मजबूत प्रणाली मौजूद है, जो इंटीग्रेटेड डिजीज सर्वेलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) के तहत काम करती है। आईडीएसपी नमूनों को जमा करने और उन्हें जिलों/निगरानी स्थलों से क्षेत्रीय जिनोम सीक्वेंसिंग प्रयोगशालाओं (आरजीएसएल) तक पहुंचाने का समन्वय करता है। आरजीएसएल की जिम्मेदारी है कि वह जिनोम सीक्वेंसिंग करे,गंभीर रूप से बीमार करने वाले (वैरियंट ऑफ कंसर्न - वीओसी) या किसी विशेष वैरियंट (वैरियंट ऑफ इंटरेस्ट - वीओआई) की पड़ताल करे और म्यूटेशन पर नजर रखे। वीओसी/वीओआई की सूचना सीधे केंद्रीय निगरानी इकाई को दी जाती है, ताकि राज्य के निगरानी अधिकारियों के साथ रोग-महामारी के आपसी सम्बंध पर समन्वय बनाया जा सके, ताकि उन्हें मालूम हो सके कि यह रोग या महामारी कितनी भीषण है। उसके बाद नमूनों को बायो-बैंकों में भेज दिया जाता है।

आरजीएसएल जब जन स्वास्थ्य से जुड़े किसी जिनोम म्यूटेशन की पहचान कर लेती है, तो उसकी रिपोर्ट वैज्ञानिक और उपचार सलाहकार समूह (एससीएजी) को सौंप देती है। एससीएजी उसके बाद वीओआई और अन्य म्यूटेशन पर विशेषज्ञों की राय लेता है और अगर जरूरी हुआ तो आगे पड़ताल के लिये केंद्रीय निगरानी इकाई को उसकी सिफारिश करता है।

एनसीडीसी की इकाई आईडीएसपी रोग-महामारी के आपसी सम्बंध और अन्य सूचनाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद्, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा राज्य के अधिकारियों के साथ साझा करती है।

आखिर में, नये म्यूटेशन/गंभीर रूप से बीमार करने वाले वैरियंट को प्रयोगशाला में जांचा जाता है और उसकी संक्रामकता, घातकता, वैक्सीन के प्रभाव और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने की ताकत का मूल्यांकन किया जाता है।

पूरी दुनिया में डेल्टा वैरियंट से चिंता फैली हुई है। यह वैरियंट इतना घातक क्यों है?

कोविड-19 के बी.1.617.2 को डेल्टा वैरियंट कहा जाता है। पहली बार इसकी शिनाख्त भारत में अक्टूबर 2020 में की गई थी। हमारे देश में दूसरी लहर के लिये यही प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। आज नये कोविड-19 के 80 प्रतिशत मामले इसी वैरियंट की देन हैं। यह महाराष्ट्र में उभरा और वहां से घूमता-घामता पश्चिमी राज्यों से होता हुआ उत्तर की ओर बढ़ा। फिर देश के मध्य भाग में और पूर्वोत्तर राज्यों में फैल गया।

यह म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन से बना है, जो उसे एसीई2 रिसेप्टर से चिपकने में मदद करता है। एसीआई2 रिसेप्टर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद होता है, जिनसे यह मजबूत से चिपक जाता है। इसके कारण यह ज्यादा संक्रामक हो जाता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में सफल हो जाता है। यह अपने पूर्ववर्ती अल्फा वैरियंट से 40-60 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है और अब तक यूके, अमेरिका, सिंगापुर आदि 80 से ज्यादा देशों में फैल चुका है।

अन्य वैरियंट की तुलना में क्या यह ज्यादा गंभीर रूप से बीमार करता है?

ऐसे अध्ययन हैं, जो बताते हैं कि इस वैरियंट में ऐसे कुछ म्यूटेशन हैं, जो संक्रमित कोशिका को अन्य कोशिकाओं से मिलाकर रुग्ण कोशिकाओं की तादाद बढ़ाते जाते हैं। इसके अलावा जब ये मानव कोशिका में घुसपैठ करते हैं, तो बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। इसका सबसे घातक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है। बहरहाल, यह कहना मुश्किल है कि डेल्टा वैरियंट से पैदा होने वाली बीमारी ज्यादा घातक होती है। भारत में दूसरी लहर के दौरान होने वाली मौतें और किस आयुवर्ग में ज्यादा मौतें हुईं, ये सब पहली लहर से मिलता-जुलता ही है।

क्या डेल्टा वैरियंट के मुकाबले डेल्टा प्लस वैरियंट ज्यादा घातक है?

डेल्टा प्लस वैरियंट – एवाई.1 और एवाई.2 – अब तक 11 राज्यों में 55-60 मामलों में देखा गया है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश शामिल हैं। एवाई.1 नेपाल, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, जापान जैसे देशों में भी मिला है। इसके बरक्स एवाई.2 कम मिलता है। वैरियंट की संक्रामकता, घातकता और वैक्सीन को चकमा देने की क्षमता आदि का अध्ययन चल रहा है।

क्या डेल्टा वैरियंट के खिलाफ वैक्सीन कारगर है?

जी हां। इस मुद्दे पर आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार मौजूदा वैक्सीनें डेल्टा वैरियंट के खिलाफ कारगर हैं।

देश के कुछ भागों में अब भी मामलों में तेजी देखी जा रही है। ऐसा क्यों?

देश के तमाम भागों में मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन कुछ हिस्सों में आज भी पॉजीटिविटी दर ऊंची है, खासतौर से देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों और दक्षिणी राज्यों के कई जिलों में। इनमें से ज्यादातर मामले डेल्टा वैरियंट के कारण हो सकते हैं।

क्या महामारी की भावी लहरों को रोका जा सकता है?

वायरस ने आबादी के उस हिस्से को संक्रिमत करना शुरू किया है, जो हिस्सा सबसे जोखिम वाला है। संक्रमित के संपर्क में आने वालों को भी वह पकड़ता है। आबादी के एक बड़े हिस्से को संक्रमित करने के बाद वह कम होने लगता है और जब संक्रमण के बाद पैदा होने वाली रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, तो वह फिर वार करता है। अगर नये और ज्यादा संक्रमण वाले वैरियंट पैदा हुये, तो मामले बढ़ सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो अगली लहर उस वायरस वैरियंट की वजह से आयेगी, जिसके सामने आबादी का अच्छा-खासा हिस्सा ज्यादा कमजोर साबित होगा।

दूसरी लहर अभी चल रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीके लगें, लोग कड़ाई से कोविड उपयुक्त व्यवहार करें और जब तक हमारी आबादी के एक बड़े हिस्से को टीके न लग जायें, हम सावधान रहें, तो भावी लहर को नियंत्रित किया जा सकता है और उसे टाला जा सकता है।

लोगों को कोविड-19 के खिलाफ टीके और कोविड उपयुक्त व्यवहार पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।