स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलियाई समाचार पोर्टल की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ब्रिटेन में भी लैंब्डा वेरिएंट का पता चला है. द स्टार ने बताया कि रिसर्चर्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यह वेरिएंट 'डेल्टा की तुलना में अधिक संक्रामक' हो सकता है. यूरो न्यूज ने पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (पीएएचओ) के हवाले से बताया कि पेरू में मई और जून के दौरान रिपोर्ट किए गए कोरोनावायरस केस के कुल सैंपल्स में से 82 फीसदी में लैंब्डा पाया गया.
केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और टीके लगाने की गति को तेज करने के लिये प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के टीकों की सर्व-उपलब्धता का नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू किया गया है। टीकाकरण अभियान को अधिक से अधिक वैक्सीन की उपलब्धता के जरिये बढ़ाया गया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूर्व सूचना प्रदान की गई, ताकि वे बेहतर योजना के साथ टीके लगाने का बंदोबस्त कर सकें और टीके की आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त किया जा सके। देशव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड वैक्सीन प्रदान करके उन्हें समर्थन दे रही है। टीकों की सर्व-उपलब्धता के नये चरण में, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से 75 प्रतिशत टीके खरीदकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क प्रदान करेगी। केंद्र सरकार द्वारा सभी प्रकार के स्रोतों से अब तक वैक्सीन की 37.07 करोड़ से अधिक (37,07,23,840) खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदान की गई हैं। इसके अलावा 23,80,000 खुराकें भेजे जाने की तैयारी है। आज आठ बजे सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से उपरोक्त खुराकों में से बेकार हो जाने वाली खुराकों को मिलाकर कुल 35,40,60,197 खुराकों की खपत हो चुकी है। अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 टीके की 1.66 करोड़ से अधिक (1,66,63,643) अतिरिक्त खुराकें बची हैं, जिनका अभी इस्तेमाल नहीं हुआ है।
देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 35.75 करोड़ डोज लगाई गई हैं।
पिछले 24 घंटों में भारत में 34,703 नये मामले दर्ज हुये, जो 111 दिनों में सबसे कम हैं।
भारत में सक्रिय मामले कम होकर 4,64,357 तक पहुंचे, जो 101 दिनों में सबसे कम हैं।
कुल मामलों में सक्रिय मामले 1.52 प्रतिशत हैं।
अब तक पूरे देश में कुल 2,97,52,294 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले 24 घंटों के दौरान 51,864 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले लगातार 54वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।
रिकवरी दर में इजाफा, वह 97.17 प्रतिशत पहुंची।
साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 2.40 प्रतिशत है।
दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.11 प्रतिशत है, जो लगातार 15वें दिन तीन प्रतिशत से कम पर कायम है।
जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 42.14 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।
CoronaVirus Third Wave: कोविड-19 महामारी की मॉडलिंग से संबंधित सरकारी समिति के एक वैज्ञानिक ने कहा है कि अगर हम कोरोना गाइडलाइंस का सही से पालन नहीं करेंगे, तो कोरोना वायरस की तीसरी लहर अक्तूबर-नवंबर के बीच चरम पर पहुंच सकती है, लेकिन इससे ज्यादा चिन्तित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संभावित तीसरी लहर में कोरोना से संक्रमित दूसरी लहर के दौरान दर्ज किए गए दैनिक मामलों के आधे मामले देखने को मिल सकते हैं.
‘सूत्र मॉडल’ या कोविड-19 के गणितीय अनुमान पर काम कर रहे मनिंद्र अग्रवाल ने यह भी कहा कि यदि वायरस का कोई नया स्वरूप उत्पन्न होता है तो तीसरी लहर तेजी से फैल सकती है, लेकिन यह दूसरी लहर की तुलना में आधी होगी.
अग्रवाल ने कहा, डेल्टा स्वरूप उन लोगों को संक्रमित कर रहा है जो एक अलग प्रकार के स्वरूप से संक्रमित थे. इसलिए इसे ध्यान में रखा गया है.’ उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टीकाकरण अभियान आगे बढ़ेगा, तीसरी या चौथी लहर की आशंका कम होगी.
बता दें कि भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पिछले साल गणितीय मॉडल का उपयोग कर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक समिति का गठन किया था और इस समिति में आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक मनिंद्र अग्रवाल के अलावा आईआईटी हैदराबाद के वैज्ञानिक एम विद्यासागर और एकीकृत रक्षा स्टाफ उप प्रमुख (मेडिकल) लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर भी शामिल हैं.
इससे पहले इस समिति को कोविड की दूसरी लहर की सटीक प्रकृति का अनुमान नहीं लगाने के लिए आलोचना का सामना भी करना पड़ा था. मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि तीसरी लहर का अनुमान जताते समय प्रतिरक्षा की हानि, टीकाकरण के प्रभाव और एक अधिक खतरनाक स्वरूप की संभावना को कारक बताया गया है, जो दूसरी लहर की मॉडलिंग के दौरान नहीं किया गया था. इस बारे में उन्होंने कहा कि इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित की जाएगी.
उन्होंने कहा, ‘हमने तीन परिदृश्य बनाए हैं. एक ‘आशावादी’ है. इसमें, हम मानते हैं कि अगस्त तक जीवन सामान्य हो जाता है, और वायरस का कोई नया स्वरूप नहीं होगा. दूसरा ‘मध्यवर्ती’ है. इसमें हम मानते हैं कि आशावादी परिदृश्य धारणाओं के अलावा टीकाकरण 20 प्रतिशत कम प्रभावी है.’
अग्रवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘तीसरा ‘निराशावादी’ है. इसकी एक धारणा मध्यवर्ती से भिन्न है- अगस्त में एक नया, 25 प्रतिशत अधिक संक्रामक उत्परिवर्तित स्वरूप फैल सकता है (यह डेल्टा प्लस नहीं है, और डेल्टा से अधिक संक्रामक नहीं है). अग्रवाल द्वारा साझा किए गए ग्राफ के अनुसार, अगस्त के मध्य तक दूसरी लहर के स्थिर होने की संभावना है, और तीसरी लहर अक्तूबर और नवंबर के बीच अपने चरम पर पहुंच सकती है.
वैज्ञानिक ने कहा कि ‘निराशावादी’ परिदृश्य के मामले में, तीसरी लहर में देश में रोजाना 1,50,000 से 2,00,000 के बीच मामले बढ़ सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा मई के पूर्वार्ध में दूसरी लहर के चरम के समय आए मामलों से आधा है, जब अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ आ गई थी और हजारों लोगों की मृत्यु हो गई थी.
पिछले 24 घंटों के दौरान भारत में 40,000 से कम दैनिक नये मामले दर्ज किये गये। लगातार आठ दिनों से 50,000 से कम मामले आ रहे हैं। यह केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की मिली-जुली कोशिशों का नतीजा है। भारत में सक्रिय मामलों में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आज के हवाले से देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 4,82,071 रही। पिछले 24 घंटों के दौरान सक्रिय मामलों में कुल 3,279 की गिरावट देखी गई, जो देश के कुल पॉजिटिव मामलों का महज़ 1.58 प्रतिशत हैं। भारत में आमूल टीकाकरण दायरा कल 35.28 करोड़ के पार हो गया। आज सुबह सात बजे तक मिली अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार 46,34,986 सत्रों के जरिये टीके की कुल 35,28,92,046 खुराकें लगाई गईं। पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 14,81,583 खुराकें दी गईं। सबके लिये कोविड-19 टीकाकरण का नया अध्याय 21 जून, 2021 को शुरू हुआ था। केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये कटिबद्ध है। भारत में ज्यादा से ज्यादा लोग कोविड-19 से उबर रहे हैं, जिसे मद्देनजर रखते हये अब 53वें दिन लगातार नये मामलों की तुलना में रोजाना स्वस्थ होने वालों की संख्या अधिक बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में 42,352 रिकवरी दर्ज की गई। रोजाना आने वाले नये मामलों की तुलना में पिछले 24 घंटों के दौरान दो हजार (2,556) से अधिक लोग स्वस्थ हुये हैं। महामारी की शुरुआत से जितने लोग संक्रमित हुये हैं, उनमें से 2,97,00,430 लोग कोविड-19 से पहले ही उबर चुके हैं, और पिछले 24 घंटों में 42,352 मरीज स्वस्थ हुये हैं। इस हवाले से रिकवरी दर 97.11 प्रतिशत है, जिसमें लगातार बढ़ने का रुझान कायम है। देश में जांच क्षमता को लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिसके सिलसिले में देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 15,22,504 जांचें की गईं। आमूल रूप से भारत ने अब तक 41.97 करोड़ से अधिक (41,97,77,457) जांचें की गईं हैं। एक तरफ देशभर में जांच क्षमता बढ़ाई गई, तो दूसरी तरफ साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर में भी लगातार गिरवाट दर्ज की गई। इस समय साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 2.40 प्रतिशत है, जबकि आज दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.61 प्रतिशत रही। यह पिछले 28 दिन से लगातार पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।
केंद्र सरकार देशभर में कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाने और टीके लगाने की गति को तेज करने के लिये प्रतिबद्ध है। कोविड-19 के टीकों की सर्व-उपलब्धता का नया चरण 21 जून, 2021 से शुरू किया गया है। टीकाकरण अभियान को अधिक से अधिक वैक्सीन की उपलब्धता के जरिये बढ़ाया गया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूर्व सूचना प्रदान की गई, ताकि वे बेहतर योजना के साथ टीके लगाने का बंदोबस्त कर सकें और टीके की आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त किया जा सके। देशव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड वैक्सीन प्रदान करके उन्हें समर्थन दे रही है। टीकों की सर्व-उपलब्धता के नये चरण में, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से 75 प्रतिशत टीके खरीदकर उन्हें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क प्रदान करेगी। केंद्र सरकार द्वारा सभी प्रकार के स्रोतों से अब तक वैक्सीन की 36.97 करोड़ से अधिक (36,97,70,980) खुराकें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदान की गई हैं। आज आठ बजे सुबह तक उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से उपरोक्त खुराकों में से बेकार हो जाने वाली खुराकों को मिलाकर कुल 34,95,74,408 खुराकों की खपत हो चुकी है। अभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 टीके की 2.01 करोड़ से अधिक (2,01,96,572) खुराकें बची हैं,जिन्हें लगाया जाना है।
देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 35.28 करोड़ डोज लगाई गई हैं।
पिछले 24 घंटों में भारत में 39,796 नये मामले दर्ज हुये।
भारत में सक्रिय मामले कम होकर 4,82,071 तक पहुंचे।
कुल मामलों में सक्रिय मामले 1.58 प्रतिशत हैं।
अब तक पूरे देश में कुल 2,97,00,430 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले 24 घंटों के दौरान 42,352 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले लगातार 53वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।
रिकवरी दर में इजाफा, वह 97.11 प्रतिशत पहुंची।
साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 2.40 प्रतिशत है।
दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.61 प्रतिशत है, जो लगातार 28वें दिन पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।
जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 41.97 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 का टीका लगवाने के लिए टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (National Technical Advisory Group on Immunization – NTAGI) की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय गर्भवती महिलाओं को कोविड टीकाकरण लेने के बारे में सूचित विकल्प चुनने का अधिकार देता है। गर्भवती महिलाएं अब CoWIN पर पंजीकरण करा सकती हैं या टीकाकरण के लिए निकटतम कोविड टीकाकरण केंद्र में जा सकती हैं।
भारत के कोविड टीकाकरण कार्यक्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञों की सिफारिशें शामिल हैं। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक और महामारी विज्ञान के साक्ष्य के आधार पर भारत की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने पर प्राथमिकता प्रदान करता है। इससे पहले, गर्भवती महिलाओं को छोड़कर सभी समूह कोविड टीकाकरण के लिए पात्र थे। अब, टीकाकरण कार्यक्रम का विस्तार गर्भवती महिलाओं तक भी कर दिया गया है।
गर्भावस्था के दौरान कोविड
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान कोविड के संक्रमण से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आती है। उन्हें गंभीर बीमारियों का खतरा अधिक होता है। संक्रमण भ्रूण को भी प्रभावित कर सकता है। COVID-19 संक्रमण वाली गर्भवती महिलाओं को भी समय से पहले जन्म का खतरा अधिक होता है।
राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (NITAG)
NITAG एक सलाहकार समिति है जिसमें विशेषज्ञों के बहु-विषयक समूह शामिल हैं जो सरकारों को टीकों से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं। यह जानकारी वैक्सीन और टीकाकरण नीति के संबंध में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद करती है। प्रत्येक देश में NITAG के अलग-अलग नाम हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में इसे Advisory Committee on Immunization Practices (ACIP) कहा जाता है, यूके में इसे Committee on Vaccination and Immunisation (JCVI) कहा जाता है और इसे भारत में National Technical Advisory Group on Immunisation (NTAGI) कहा जाता है।
भारत में राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक कोविड-19 टीके की 35.12 करोड़ खुराक दी गयीं
पिछले 24 घंटे में 43,071 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए
भारत में सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 4,85,350 हुई
सक्रिय मामले कुल मामलों का 1.59 प्रतिशत
देश में अब तक कुल 2,96,58,078 लोग बीमारी से उबरे
पिछले 24 घंटे में 52,299 लोगों में बीमारी ठीक हुई
लगातार 52वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा
रिकवरी रेट बढ़कर 97.09 प्रतिशत हुआ
साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट पांच प्रतिशत से कम बना हुआ है, इस समय 2.44 प्रतिशत
दैनिक पॉजिटिविटी रेट 2.34 प्रतिशत, लगातार 27वें दिन पांच प्रतिशत से कम
नई दिल्ली, कोरोना महामारी से संबंधित सरकार के पैनल में शामिल वैज्ञानिक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल ने कहा है कि अगर कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन नहीं किया गया तो अक्टूबर-नवंबर के बीच कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर अपने पीक पर पहुंच सकती है. इस पैनल को कोविड -19 मामलों की मॉडलिंग का काम सौंपा गया है.
प्रो. अग्रवाल सूत्र मॉडल पर काम कर रहे हैं. इससे कोविड -19 मामलों का गणितीय अनुमान लगाया जाता है. अग्रवाल ने कहा कि तीसरी लहर में रोजना जितने मामले सासने आए उसकी तुलना में दूसरी लहर में डेली आधे मामले सामने आने की आशंका है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई नया स्ट्रेन आता है तो तीसरी लहर के दौरान संक्रमण तेजी से फैल सकता है.
तीसरी लहर के संभावित तीन सिनेरियो बनाए
प्रोफेसर अग्रवाल ने एक ट्वीट में कहा कि "हमने तीन सिनेरियो बनाए हैं. एक आशावादी है. इसमें हम मानते हैं कि अगस्त तक जीवन सामान्य हो जाता है और कोई नया म्यूटेंट नहीं होता है. दूसरा मध्यवर्ती है. इसमें हम मानते हैं कि आशावादी परिदृश्य धारणाओं के अलावा टीकाकरण 20% कम प्रभावी है. "
"तीसरा निराशावादी है. इसकी एक धारणा मध्यवर्ती एक से अलग है, अगस्त में एक नया म 25% अधिक संक्रामक म्यूटेंट फैलता है (यह डेल्टा प्लस नहीं है जो डेल्टा वेरिएंट से अधिका संक्रामक है)," प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि "यदि कोई तेजी से फैलने वाला म्यूटेंट नहीं है, तो तीसरी लहर एक कमजोर होगी और यदि ऐसा म्यूटेंट है, तो तीसरी लहर पहले की तुलना में ज्यादा होगी."
दूसरी लहर को लेकर पैनल की हुई थी आलोचना
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पिछले साल गणितीय मॉडल का उपयोग करके कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि का पूर्वानुमान लगाने के लिए सरकारी पैनल का गठन किया था. इसमें प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, एम विद्यासागर, लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर आदि पैनल के सदस्य हैं. मार्च और अप्रैल के महीनों में कहर बरपाने वाली कोविड -19 की दूसरी लहर की स्टीक भविष्यवाणी नहीं करने के लिए पैनल को आलोचना का भी सामना करना पड़ा था. देश में 7 मई को 4,14,188 कोविड -19 मामले सामने थे, जो दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा थे.
source: ABP News
केंद्र सरकार 'समग्र सरकार' और 'समग्र समाज' केदृष्टिकोण के साथ वैश्विक महामारी कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रही है। कोविड प्रबंधन के लिए विभिन्न राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों की कोशिशों को मजबूत करने के लिए जारी प्रयास के रूप में, केंद्र सरकार समय-समय पर विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करने के लिए केंद्रीय टीमों की प्रतिनियुक्ति करती रही है। ये टीमें राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ बातचीत करती हैं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों एवं मुद्दों की प्रत्यक्ष समझ प्राप्त करती हैं ताकि राज्यों की ओर से जारी गतिविधियों को मजबूत किया जा सके तथा किसी तरह की बाधाएं होने पर उन्हें दूर किया जा सके। केंद्र ने केरल, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मणिपुर में कोविड-19 मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बहु-अनुशासनात्मक टीमों की प्रतिनियुक्ति की है। ईएमआर के अतिरिक्त उपमहानिदेशक और निदेशक डॉ. एल स्वस्तिचरण मणिपुर जाने वाली टीम का नेतृत्व करेंगे। अरुणाचल प्रदेश की टीम का नेतृत्व अखिल भारतीय स्वच्छता और जन स्वास्थ्य संस्थान (एआईआईएच एंड पीएच) के प्रोफेसर, डॉ. संजय साधुखान करेंगे।त्रिपुरा जाने वाली टीम का नेतृत्वअखिल भारतीय स्वच्छता और जन स्वास्थ्य संस्थान (एआईआईएच एंड पीएच) के प्रोफेसर डॉ. आर एन सिन्हा करेंगे। केरल जाने वाली टीम का नेतृत्व क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय (आरओएचएफडब्ल्यू), ग्रुप 2 जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रुचि जैन करेंगी। ओडिशा जाने वाली टीम का नेतृत्व अखिल भारतीय स्वच्छता और जन स्वास्थ्य संस्थान (एआईआईएच एंड पीएच) के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. ए डैनकरेंगे और छत्तीसगढ़ जाने वाली टीम का नेतृत्व एम्स रायपुर के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिबाकर साहू करेंगे। लक्षित कोविड प्रतिक्रिया और प्रबंधन के लिए तथा महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए टीमें उनके प्रयासों में सहयोग करेंगी।
इन राज्यों के लिए गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम में एक चिकित्सक और एक सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हैं। टीमें तुरंत राज्यों का दौरा करेंगी और कोविड-19 प्रबंधन के समग्र कार्यान्वयन की निगरानी करेंगी, विशेष रूप से जांच पर ध्यान देंगी। इनमें निगरानी एवं नियंत्रण संचालन; कोविड उपयुक्त व्यवहार तथा उसका प्रवर्तन; अस्पताल के बिस्तरों की उपलब्धता; एम्बुलेंस, वेंटिलेटर, चिकित्सीय ऑक्सीजन आदि सहित पर्याप्त रसद, और कोविड-19 टीकाकरण की प्रगति शामिल हैं। टीमें स्थिति की निगरानी करेंगी और उपचारात्मक कार्रवाई का सुझाव भी देंगी।
केंद्रीय टीमें स्थिति का आकलन करेंगी और संबंधित राज्य सरकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों पर उपचारात्मक कार्रवाई का सुझाव देंगी। रिपोर्ट की प्रति केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कुल मिलाकर 37 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 9,41,03,985लोगों को टीके की पहली खुराक तथा 22,73,477 लोगों को टीके की दूसरी खुराक दी गई हैं। आठ राज्यों यानि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में 18-44 आयुवर्ग के 50 लाख लोगों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक दी गई हैं। देश के सबसे कमजोर जनसंख्या समूहों को कोविड-19 से बचाने के लिए टीकाकरण प्रक्रिया की उच्चतम स्तर पर लगातार समीक्षा और निगरानी की जाती है।
देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 34 करोड़ डोज (34,00,76,232) लगाई गई है।
पिछले 24 घंटों में भारत में 46,617 नये मामले दर्ज हुये।
भारत में सक्रिय मामले कम होकर 5,09,637 तक पहुंचे।
कुल मामलों में सक्रिय मामले 1.67 प्रतिशत हैं।
अब तक पूरे देश में कुल 2,95,48,302 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले 24 घंटों के दौरान 59,384 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले लगातार 50वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।
रिकवरी दर में इजाफा, वह 97.01 प्रतिशत पहुंची।
साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 2.57 प्रतिशत है।
दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.48 प्रतिशत है, जो लगातार 25वें दिन पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।
जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 41.42 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।
लंदन। अगर कोई व्यक्ति कोरोनावायरस से संक्रमित होता है तो उसके पालतू कुत्तों और बिल्लियों के भी संक्रमित होने का खतरा रहता है। एक अध्ययन में यह कहा गया है। नीदरलैंड में यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के पालतू कुत्तों और बिल्लियों में संक्रमण का अध्ययन किया। यह अध्ययन अभी प्रकाशित नहीं हुआ है।
एक चलंत पशु चिकित्सा क्लीनिक ने संक्रमित लोगों के पालतू जानवरों के नमूने लिए। पीसीआर जांच में स्वैब के नमूने से वर्तमान संक्रमण और रक्त के नमूनों में एंटीबॉडीज की जांच की गई। एंटीबॉडीज से पूर्व के संक्रमण का पता चलता है। इस अध्ययन में 196 घरों के 156 कुत्तों और 154 बिल्लियों के नमूनों की जांच की गई। अध्ययन में पाया गया कि पीसीआर जांच में 6 बिल्लियां और 7 कुत्ते (4.2 प्रतिशत) संक्रमित पाए गए और 31 बिल्लियों और 23 कुत्तों (17.4) में एंटीबॉडीज मिली।
यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय के एल्स ब्रोइंस ने कहा कि अगर आप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं तो आपको दूसरे लोगों की तरह ही अपने कुत्ते और बिल्लियों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। ब्रोइंस ने एक बयान में कहा, ‘‘मुख्य चिंता पशुओं के स्वास्थ्य की नहीं बल्कि वायरस के उनके भीतर घर बनाने और फिर स्वरूप बदलकर मानव आबादी तक पहुंचने का है।
पशुओं में हो सकता है कि किसी तरह के लक्षण नहीं दिखे या मामूली लक्षण दिखे। जिन 13 लोगों के पालतू जानवर संक्रमित पाए गए उनमें से 11 लोगों ने पहली जांच के बाद तीन सप्ताह बाद फिर से जांच करायी। जिन 11 जानवरों में एंटीबॉडीज मिली उनके मालिकों ने स्वीकार किया कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे।
देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 33.57 करोड़ डोज लगाई गई हैं।
पिछले 24 घंटों में भारत में 48,786 नये मामले दर्ज हुये।
भारत में सक्रिय मामले कम होकर 5,23,257 तक पहुंचे।
कुल मामलों में सक्रिय मामले 1.72 प्रतिशत हैं।
अब तक पूरे देश में कुल 2,94,88,918 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले 24 घंटों के दौरान 61,588 मरीज स्वस्थ हुये।
पिछले लगातार 49वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।
रिकवरी दर में इजाफा, वह 96.97 प्रतिशत पहुंची।
साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 2.64 प्रतिशत है।
दैनिक पॉजिटिविटी दर 2.54 प्रतिशत है, जो लगातार 24वें दिन पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।
नई दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान एक निजी अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस संक्रमण के पांच मरीजों को मलाशय में साइटोमेगालो वायरस की वजह से रक्तस्राव हुआ और अस्पताल के अधिकारियों ने मंगलवार को दावा किया कि यह मामला उन लोगों में पहली बार सामने आया है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य थी।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि कोविड-19 का पता चलने के बाद इन मरीजों में यह समस्या औसतन 20-30 दिन तक रही। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने बताया कि मलाशय में सीएमवी संबंधी रक्तस्राव अब तक सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले उन मरीजों को प्रभावित करता था, जिनका कोई अंग प्रतिरोपण हुआ हो, या वे कैंसर और एड्स से पीड़ित हों। मगर भारत में यह पहली बार हुआ है कि कोविड से संक्रमित सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को मलाशय में साइटोमेगालो वायरस की वजह से रक्तस्राव हुआ है।
अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं पैंक्रिएटोबाइलेरी साइंसेज के अध्यक्ष प्रो अनिल अरोड़ा के मुताबिक, अप्रैल-मई में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 से संक्रमित, सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में सीएमवी संक्रमण के पांच मामले देखने को मिले। उन्होंने कहा कि इन मरीजों के पेट में दर्द था और शौच के दौरान रक्त आ रहा था। उन्होंने कहा कि इन मरीजों को इसके अलावा कोई और बीमारी नहीं थी जिस वजह से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि कोविड संक्रमण और इसके उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं (जैसे स्टीरॉयड) मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती हैं और उन्हें असामान्य संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील बना देती हैं।
बयान के मुताबिक, सीएमवी साइटोमेगालो वायरस 80 से 90 प्रतिशत भारतीय आबादी में मौजूद है लेकिन इसका कोई लक्षण नहीं होता है, क्योंकि लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। आम तौर पर इसके लक्षण उन लोगों में दिखते हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
डॉक्टरों ने कहा कि इन पांचों मामलों में सभी मरीजों की कोविड के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई थी जिससे उनमें सीएमवी के लक्षण दिखे।
बयान में बताया गया है कि दो मरीजों को काफी रक्तस्राव हुआ और इनमें से एक मरीज की आपात जीवन रक्षक सर्जरी करनी पड़ी जबकि दूसरे की अधिक रक्तस्राव और कोविड-19 के कारण छाती के गंभीर रोग की वजह से मौत हो गई। अरोड़ा ने बताया कि अन्य तीन मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
जब भारत के ज्यादातर हिस्सों में लॉकडाउन खोलकर जीवन पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है, तीसरी लहर को लेकर हो रहे दावे चिंता बढ़ा रहे हैं। बहुत से लोगों ने तो मास्क लगाना और कोरोना नियमों को मानना भी बंद कर दिया है।
भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रोजाना होनेवाले संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है। अब भारत में रोज 50 हजार से भी कम कोरोना मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन इस बीच लोगों को कोरोना की तीसरी लहर का डर सता रहा है। खासकर डेल्टा प्लस वेरियंट के ज्यादा घातक होने और तेजी से लोगों को संक्रमित करने की रिपोर्ट से लोग डरे हुए हैं। तीसरी लहर को लेकर रोज आने वाले नए दावे भी चिंता बढ़ा रहे हैं। अब ज्यादातर भारतीय राज्यों में लॉकडाउन भी खोला जा रहा है और जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है। और लोगों ने मामले घटने के साथ ही एक बार फिर से सामाजिक दूरी का पालन करना और मास्क लगाना बंद कर दिया है।
पिछले हफ्ते लोगों के इस व्यवहार पर चिंता जताते हुए एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा, 'जब तक जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को टीका न लग जाए, तब तक कड़ाई से कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना चाहिए।' ऐसा न होने पर उन्होंने अगले 6 से 8 हफ्तों में कोरोनावायरस की तीसरी देशव्यापी लहर आने का डर भी जताया। भारत में तीसरी लहर को लेकर हर हफ्ते नए दावे किए जा रहे हैं लेकिन यह कब आएगी, कितनी खतरनाक होगी और इसकी वजह क्या होगी, यह दावे से नहीं कहा जा सकता।
कैसे लगाया गया अगली लहर का अनुमान?
आंध्र प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए बनाई गई सरकारी टीम में शामिल एक वायरोलॉजिस्ट ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, 'भारत में कोरोनावायरस की तीसरी लहर को लेकर सामने आई अब तक की सारी जानकारी एक अनुमान भर है, जिसका अंदाजा गणितीय मॉडल के जरिए लगाया गया है।' वैक्सीन और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया ने अगली लहर का अनुमान लगाने की तकनीक बताई।
उनके मुताबिक, 'अगली लहर का अनुमान तीन बातों के आधार पर लगाया जाता है। पहली यह कि जिन्हें संक्रमण हो चुका है या वैक्सीन लग चुकी है, उनकी वायरस प्रतिरोधक क्षमता कितने दिनों में कम होगी और उन्हें फिर संक्रमण होने का डर होगा? दूसरी, वायरस के जो नए खतरनाक वेरियंट फैल रहे हैं, क्या वे पहले से मौजूद प्रतिरोधक क्षमता के बावजूद भी लोगों को संक्रमित करेंगे? और तीसरा, लॉकडाउन में जो छूट दी गई है और लोग जैसी लापरवाही कर रहे हैं, क्या इससे संक्रमण के नए अवसर पैदा होंगे?'
तीसरी लहर नहीं होगी खतरनाक
आंध्र प्रदेश की वायरोलॉजिस्ट ने कहा, 'डेल्टा प्लस जैसे कोरोना वेरियंट निस्संदेह ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं और उन्हें भी संक्रमित कर सकते हैं, जिन्हें पहले संक्रमण हो चुका है या वैक्सीन लग चुकी है लेकिन ऐसा हुआ भी तो संक्रमित होने वालों की संख्या बहुत कम रहने का अनुमान है।' हालांकि उन्होंने वैक्सीन न लगवाने वाले लोगों, 18 साल से कम के बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं के नए वेरियंट से संक्रमित होने का डर भी जताया। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)ने भी इस बात पर अपनी स्टडी में मुहर लगाई है।
'भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना' नाम की इस स्टडी को 'इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च' में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक भारत में कोरोना की एक बड़ी तीसरी लहर आ सकती है लेकिन यह दूसरी लहर जितनी खतरनाक नहीं होगी। इस स्टडी में कहा गया है कि कम होती प्रतिरोधक क्षमता या बदला हुआ वेरियंट एक घातक तीसरी कोरोना लहर लाने में नाकाम रहेगा, जब तक पहले वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों की प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह खत्म न हो जाए।
राज्यों में आ सकती है नई लहर
सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया कहते हैं, 'तीसरी लहर से पूरी तरह से इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन इसके नवंबर से पहले आने के आसार नहीं हैं। डेल्टा प्लस जैसे वेरियंट से भी घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि भले ही यह तेज फैलता हो लेकिन यह पहले ही भारत को प्रभावित कर चुके डेल्टा वेरियंट का ही म्यूटेशन है। यानी डेल्टा वेरियंट के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को इसके खिलाफ भी काम करना चाहिए।' वे कहते हैं, 'राष्ट्रीय स्तर पर आने वाली लहरों को लेकर बहुत बात होती है लेकिन यह एक मात्र चिंता की बात नहीं होती। राज्यों के स्तर पर भी कोरोना संक्रमण की लहरें आती हैं। जैसे भारत में जब देशव्यापी दूसरी लहर चल रही थी, दिल्ली में कोरोना संक्रमण की चौथी लहर थी। इसलिए ऐसा हो सकता है कि किसी राज्य में कम वैक्सीनेशन आदि के चलते मामले फिर बढ़ जाएं।'
वैसे बात डेल्टा प्लस वेरियंट की बात करें तो आंध्र प्रदेश में इसका अब तक सिर्फ एक मामला सामने आया है और इससे संक्रमित व्यक्ति में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं। साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों की जांच करने पर सभी निगेटिव पाए गए हैं। जबकि ICMR अपनी स्टडी में कहता है कि संक्रमण की R वैल्यू 4।5 से ज्यादा होने पर ही कोई वायरस इतनी तेजी से फैल सकेगा कि किसी तीसरी लहर का डर रहे। यानी जब एक संक्रमित इंसान हर बार कम से कम 4।5 लोगों को संक्रमित करेगा तभी अन्य लहर का खतरा बनेगा। ऐसे में रिसर्चर यही मान रहे हैं कि अगर वैक्सीनेशन तेजी से होता रहा तो भारत को भविष्य में आने वाली कोरोना लहर से काफी हद तक सुरक्षा मिल जाएगी।
सोर्स:-वेब दुनिया
वॉकिंग फिजिकल एक्टिविटी में सबसे कम आंकने वाली एक्सरसाइज में से एक है. ज्यादातर लोग पैदल चलने को एक्सरसाइज नहीं मानते हैं. जबकि चलना एक फिजिकल एक्टिविटी है जिसके कई फायदे हैं. ये मांसपेशियों, जोड़ों और हड्डियों को मजबूत करने से लेकर मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है. हेल्दी और फिट रहने के लिए नियमित रूप से आधा घंटा चलना चाहिए. इसके लिए आपको कोई उपकरण की जरूरत नहीं है. आइए जानते हैं चलने के अनगिनत फायदों के बारे में.
कार्डियो फिटनेस बढ़ाता है
पैदल चलना आपके दिल को मजबूत रखने में मदद करता है और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है. इसके लिए आपको हफ्ते में 5 दिन कम से कम 30 मिनट चलना जरूरी है. आपको रेगुलर इस प्रकिया को करने की जरूरत है.
कैलोरी बर्न करने में मदद करता है
कौन कहता है कि आप सिर्फ हैवी वर्कआउट और एक्सराइज करके कैलोरी बर्न कर सकते हैं. आप आसानी से चलकर वजन घटा सकते हैं. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना वजन घटाना चाहते हैं और कितने समय में किस स्पीड से वॉक कर रहे हैं.
एनर्जी बूस्ट करता है
पूरा दिन घर में लेटने और बैठे रहने से स्टैमिना कमजोर हो जाता है. आपको इसके लिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि कुछ देर चलने से आप एनर्जी को बूस्ट कर सकते हैं. दरअसल चलने की वजह से से शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है जिससे नॉरपेनेफ्रिन और एपिनेफ्रीन जैसे हार्मोन का लेवल बढ़ता है.
मसल्स और ज्वाइंट्स को मजबूत करता है
वॉक करने की वजह से शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करके पैरों को टोंड रखने में मदद कर सकते हैं. ये घुटने, कूल्हों के मासंपेशियों को मजबूत करने के साथ- साथ जोड़ों को भी मजबूत करने का काम करता है. आप समतल स्तह पर चलने की बजाय थोड़े उच्चे क्षेत्र में वॉक करें. इससे आपकी मांसपेशियां अधिक मजबूत होगी.
ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है
हमें हमेशा ये सलाह दी जाती है कि भोजन करने के बाद सीधा लेटना नहीं चाहिए. आप इसकी बजाय थोड़ा टहलें. खाना खाने के बाद चलने से शरीर में शुगर लेवल कम होता है. ये एक अच्छी एक्सरसाइज है जिसे आपको डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं.
चिंता से दूर रहें
शोध में पता चला कि 10 मिनट की वॉकिंग 45 मिनट की कसरत जितनी अच्छी होती है. प्रकृति आपके दिमाद को शांत रखने में मदद करती है, साथ ही स्ट्रेस और तनाव को भी कम करते हैं.
गोवा भारत का पहला रेबीज मुक्त राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (Pramod Sawant) के अनुसार, राज्य में पिछले तीन वर्षों में एक भी रेबीज का मामला सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री ने प्रकाश डाला कि गोवा ने कुत्तों में रेबीज के खिलाफ 5,40,593 टीकाकरण हासिल किया है। राज्य ने लगभग एक लाख लोगों को कुत्ते के काटने की रोकथाम के बारे में शिक्षित किया है और 24 घंटे रेबीज निगरानी स्थापित की है जिसमें कुत्ते के काटने वाले पीड़ितों के लिए एक आपातकालीन हॉटलाइन और त्वरित प्रतिक्रिया टीम शामिल है। रेबीज को नियंत्रित करने का कार्य मिशन रेबीज (Mission Rabies) परियोजना द्वारा किया जा रहा था।
मिशन रेबीज (Mission Rabies)
यह एक चैरिटी है, जिसे शुरू में वर्ल्डवाइड वेटरनरी सर्विस (WVS) द्वारा एक पहल के रूप में स्थापित किया गया था। यह यूनाइटेड किंगडम स्थित एक चैरिटी समूह है जो जानवरों की सहायता करता है। मिशन रेबीज ‘वन हेल्थ अप्रोच’ के साथ काम करता है जो कुत्ते के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी को खत्म करने के लिए अनुसंधान द्वारा संचालित है। इसे सितंबर 2013 में भारत में रेबीज के खिलाफ 50,000 कुत्तों का टीकाकरण करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। रेबीज के कारणसालाना 59,000 लोगों की मौत हो जाती है। मिशन रेबीज टीमों ने 2013 से 9,68,287 कुत्तों का टीकाकरण किया है। इस संगठन ने तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गोवा, झारखंड, राजस्थान और असम राज्यों में काम किया है।
रेबीज (Rabies)
WHO के अनुसार, रेबीज एक वैक्सीन-रोकथाम योग्य वायरल बीमारी है जो लगभग 150 देशों और क्षेत्रों में मौजूद है। मनुष्यों में रेबीज संक्रमण के 99% योगदान के लिए कुत्ते जिम्मेदार हैं। एशिया और अफ्रीका क्षेत्रों में, कुत्ते के काटने के बाद स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता के बारे में कम जागरूकता प्रति वर्ष लगभग 55000 लोगों की जान लेती है। भारत रेबीज के लिए स्थानिकमारी वाला देश है, जहां दुनिया की 36% मौतों का बोझ है।









