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Budget 2026: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दूर किया कंफ्यूजन, बताया कब पेश होगा बजट

Budget 2026: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दूर किया कंफ्यूजन, बताया कब पेश होगा बजट

 बिजनेस डेस्कः केंद्रीय बजट 2026 को लेकर लोगों के बीच बनी असमंजस की स्थिति अब साफ हो गई है। 1 फरवरी को रविवार और संत रविदास जयंती होने के बावजूद बजट उसी दिन पेश किया जाएगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जानकारी दी है कि आम बजट 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। यह एक दुर्लभ अवसर होगा, जब बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा, क्योंकि आमतौर पर बजट कार्यदिवस में ही पेश किया जाता है।

सरकार की मंजूरी के बाद संसद का बजट सत्र 2026 दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। यह सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। पहले चरण में संसद की कार्यवाही 28 जनवरी से 13 फरवरी तक होगी, इसके बाद अवकाश रहेगा। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल को समाप्त होगा। बजट से पहले 30 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने की भी संभावना है।

इस बार का बजट कई मायनों में खास माना जा रहा है। वित्त मंत्री बजट के जरिए देश की आर्थिक दिशा, टैक्स स्ट्रक्चर, सरकारी योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और विकास से जुड़े अहम फैसलों को सामने रखेंगी। गौरतलब है कि 2017 से सरकार हर साल 1 फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश कर रही है। इससे पहले आम बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था लेकिन रविवार को बजट पेश होना अब तक कम ही देखने को मिला है।

बजट 2026 को लेकर शेयर बाजार, निवेशकों और उद्योग जगत की भी कड़ी नजर बनी हुई है। चूंकि बजट रविवार को पेश होगा, ऐसे में सोमवार को बाजार खुलते ही बजट का असर देखने को मिल सकता है और अगला कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है।आर्थिक जानकारों के मुताबिक, 2026-27 का बजट इसलिए भी अहम है क्योंकि यह वैश्विक तनाव, ट्रंप टैरिफ से जुड़ी आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच आएगा। ऐसे में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह बड़े आर्थिक सुधारों के जरिए विकास को गति देगी और “विकसित भारत” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

Post Office MIS स्कीम में जानिए कैसे मिलते हैं 5,550 रुपये हर महीने, केवल इतना करना होगा निवेश

Post Office MIS स्कीम में जानिए कैसे मिलते हैं 5,550 रुपये हर महीने, केवल इतना करना होगा निवेश

 नेशनल डेस्क:  पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही की शुरुआत 1 जनवरी 2025 से हो चुकी है और इस दौरान पोस्ट ऑफिस की सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को पहले जैसा ही रखा गया है। यानी निवेशकों को अब भी वही आकर्षक रिटर्न मिलता रहेगा, जिसने इन योजनाओं को देशभर में बेहद लोकप्रिय बना रखा है।

पोस्ट ऑफिस आम लोगों के लिए कई सुरक्षित निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है, जिनमें से एक बेहद भरोसेमंद योजना है मंथली इनकम स्कीम (MIS)। यह स्कीम खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है, जो एकमुश्त निवेश करके हर महीने तय आय चाहते हैं।

हर महीने पक्की कमाई का मौका

पोस्ट ऑफिस की MIS योजना में फिलहाल निवेशकों को 7.4 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। इस स्कीम की खास बात यह है कि ब्याज का भुगतान साल के अंत में नहीं, बल्कि हर महीने किया जाता है। यानी निवेश के बाद आपको नियमित आमदनी मिलती रहती है।

इस योजना में खाता खोलने के लिए कम से कम 1,000 रुपये का निवेश जरूरी है। वहीं, यदि आप सिंगल अकाउंट खोलते हैं तो इसमें अधिकतम 9 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। जॉइंट अकाउंट की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें अधिकतम 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है। जॉइंट खाते में तीन लोगों को शामिल करने की अनुमति होती है।

एक बार निवेश, पांच साल तक फायदा

MIS Scheme में निवेश की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसमें बार-बार पैसे डालने की जरूरत नहीं होती। आपको केवल एक बार एकमुश्त राशि जमा करनी होती है, जिसके बाद पूरे 5 साल तक हर महीने ब्याज की रकम आपके खाते में आती रहती है। स्कीम की अवधि पूरी होने पर, यानी मैच्योरिटी पर, आपको आपका पूरा निवेश वापस मिल जाता है।

अगर कोई निवेशक इस योजना में अधिकतम 9 लाख रुपये जमा करता है, तो उसे हर महीने करीब 5,550 रुपये ब्याज के रूप में मिलते हैं। यह रकम सीधे पोस्ट ऑफिस के बचत खाते में ट्रांसफर होती है, जिससे पैसे निकालना आसान हो जाता है।

खाता होना है जरूरी

MIS में निवेश करने के लिए पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट होना अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति का पहले से खाता नहीं है, तो उसे पहले बचत खाता खुलवाना होगा। इसके बाद ही मंथली इनकम स्कीम में निवेश किया जा सकता है, क्योंकि मासिक ब्याज की राशि इसी खाते में भेजी जाती है।

कन्फ्यूजन खत्म: 1 फरवरी रविवार को पेश होगा बजट, निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास

कन्फ्यूजन खत्म: 1 फरवरी रविवार को पेश होगा बजट, निर्मला सीतारमण रचेंगी इतिहास

 बिजनेस डेस्कः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026, रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह पहली बार होगा जब देश का आम बजट रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स (CCPA) ने संसद के बजट सत्र की तारीखों को मंजूरी दे दी है।

सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति के संसद के संयुक्त सत्र को संबोधन के साथ होगी। इसके अगले दिन यानी 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया जाएगा। बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल के बीच आयोजित किया जाएगा।

निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इसके साथ ही वह स्वतंत्र भारत की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी, जिन्होंने लगातार नौ बजट पेश किए हों। यह देश का आज़ादी के बाद 88वां बजट होगा।

सरकार वर्ष 2017 से 1 फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश करने की परंपरा का पालन कर रही है। इससे पहले बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था। यह बदलाव पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के कार्यकाल में किया गया था, ताकि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले बजट प्रस्तावों को लागू किया जा सके।

हालांकि, सप्ताहांत पर बजट पेश करना पूरी तरह नया नहीं है। वर्ष 2025 का बजट निर्मला सीतारमण ने शनिवार को पेश किया था, जबकि अरुण जेटली ने 2015 और 2016 में 28 फरवरी को शनिवार के दिन बजट पेश किया था।

इतिहास के करीब निर्मला सीतारमण

नौ लगातार बजट पेश करने के साथ निर्मला सीतारमण भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले वित्त मंत्रियों में शामिल हो जाएंगी। वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के करीब पहुंचेंगी, जिन्होंने दो कार्यकाल में कुल 10 बजट पेश किए थे।

अन्य पूर्व वित्त मंत्रियों में पी. चिदंबरम ने नौ और प्रणब मुखर्जी ने आठ बजट पेश किए थे। निर्मला सीतारमण 2019 में देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनी थीं और 2024 में मोदी सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भी उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली।

बजट की तैयारियां जोरों पर

बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी, जिसमें सरकार की नीतियों और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा रखी जाएगी। इसके बाद पेश होने वाला आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और आगे की संभावनाओं का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करेगा।

Gold Price Today : सोने का भाव ग‍िरा, आज क‍ितना सस्‍ता हो गया सोना चांदी, देखें यहां

Gold Price Today : सोने का भाव ग‍िरा, आज क‍ितना सस्‍ता हो गया सोना चांदी, देखें यहां

 आज बुधवार 7 जनवरी 2026 को सर्राफा बाजार और वायदा बाजार (MCX) में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है. पिछले कुछ दिनों की रिकॉर्ड तेजी के बाद आज निवेशकों के मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण कीमतों में गिरावट आई है. अभी 10:15 बजे MCX पर फरवरी कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले सोने के भाव में 794 रुपये की ग‍िरावट देखी जा रही है. इसके बाद 24 कैरट सोने का भाव 138289 रुपये प्रत‍ि 10 ग्राम हो गया है. वहीं चांदी की कीमत में भी आज भारी ग‍िरावट देखी गई. चांदी की कीमत में 3,697 रुपये की अभी ग‍िरावट देखी जा रही है, ज‍िसके बाद प्रत‍ि क‍िलोग्राम चांदी का भाव 255114 रुपये के स्‍तर पर आ गया है.

कई द‍िनों से तेजी में था सोना

पिछले सेशन में, बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ी हुई ग्लोबल अनिश्चितता के बीच सेफ-हेवन डिमांड के कारण दोनों मेटल्स में तेजी आई थी. निवेशकों का सेंटिमेंट डिफेंसिव होने के कारण, बुलियन को मार्केट की अस्थिरता के खिलाफ हेज के तौर पर सपोर्ट मिल रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में, स्पॉट गोल्ड पिछले सेशन में लगभग 3% की तेजी के बाद 0.6% गिरकर $4,469.04 प्रति औंस हो गया. अब सभी की नजरें फेडरल रिजर्व की इंटरेस्ट रेट की दिशा के बारे में संकेतों के लिए आने वाले US पेरोल डेटा पर हैं.

तनाव को बढ़ाते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको को अवैध ड्रग शिपमेंट के बारे में कड़ी चेतावनी दी, जिससे बाजार में बेचैनी और बढ़ गई. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, स्विस अधिकारियों ने कथित तौर पर उनकी संपत्ति फ्रीज करने का आदेश दिया, एक ऐसा कदम जिसके बारे में विश्लेषकों का मानना ​​है कि इससे सोने और चांदी में सेफ-हेवन फ्लो बढ़ सकता है.

क्‍यों ग‍िरा आज सोने चांदी का भाव

  1. रिकॉर्ड स्तर पर मुनाफावसूली (Profit Booking)
    पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी की कीमतें  अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (Record Highs) पर ट्रेड कर रही थीं. जब कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तो निवेशक और बड़े फंड हाउस अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर देते हैं. आज बाजार में इसी सेलिंग प्रेशर की वजह से कीमतें नीचे आईं.
  2. अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना (Dollar Index)
    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में मजबूती आई है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों (जैसे भारत) के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है. इससे वैश्विक मांग में कमी आती है, जिसका असर कीमतों पर पड़ता है.
  3. आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरें (Fed Policy)
    अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें थोड़ी कम हुई हैं. अगर ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सोने (जो ब्याज नहीं देता) के बजाय ट्रेजरी बॉन्ड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाना बेहतर समझते हैं. हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सोने की इस तेजी पर ‘ब्रेक’ लगाने का काम किया है.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव, देखें प्रमुख शहरों में आज का ताजा रेट

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव, देखें प्रमुख शहरों में आज का ताजा रेट

  Petrol Diesel Price 7 Jan: हर दिन की तरह आज 7 जनवरी 2026, शनिवार को सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर के लिए सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी किए हैं। भारत में ईंधन की कीमतें रोजाना तय की जाती हैं, और ये बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के रेट, रुपये-डॉलर की विनिमय दर, टैक्स और डीलर मार्जिन जैसे कारकों पर निर्भर करते हैं।

कीमतों में ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या सब्जी बेचने वाला व्यापारी। ऐसे में हर दिन कीमतों की जानकारी रखना जरुरी है। तो आइए जानते हैं, देश भर में आज क्या है पेट्रोल-डीजल की कीमत।

शहर कीमत (₹)
नई दिल्ली 94.77
कोलकाता 105.41
मुंबई 103.54
चेन्नई 100.93
गुड़गाँव 95.65
नोएडा 95.16
बेंगलोर 102.96
भुवनेश्वर 101.35
चंडीगढ़ 94.30
हैदराबाद 107.46
जयपुर 104.36

CNG Rate Today: क्या है आज CNG की कीमत?

शहर कीमत
नई दिल्ली 77.09
मुंबई 77.00
चेन्नई 91.50
बैंगलोर 88.95
हैदराबाद 96.00
मथुरा 93.35
मेरठ 86.05

Petrol Diesel Rate: कैसे तय होती हैं कीमतें?

भारत में पेट्रोल और डीजल की दरें तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा हर दिन तय की जाती हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, विदेशी मुद्रा विनिमय दर, केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कर, और डीलर के मुनाफे को ध्यान में रखकर कीमतें निर्धारित करती हैं। हर राज्य का टैक्स ढांचा अलग होता है, इसलिए एक ही दिन में देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के दामों में थोड़ा फर्क देखने को मिलता है।

रोजगार संकट से निपटने के लिए उद्योग जगत की बड़ी पहल, 10 करोड़ जॉब्स का प्लान

रोजगार संकट से निपटने के लिए उद्योग जगत की बड़ी पहल, 10 करोड़ जॉब्स का प्लान

 बिजनेस डेस्कः देश में रोजगार की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए उद्योग जगत के दिग्गजों ने सोमवार को ‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ नाम से एक बड़ी राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की। इस मिशन का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में भारत में 10 करोड़ नए रोजगार अवसर पैदा करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब देश तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद पर्याप्त रोजगार सृजन की समस्या से जूझ रहा है।

इस पहल की घोषणा सॉफ्टवेयर उद्योग संगठन नैसकॉम के सह-संस्थापक हरीश मेहता, वैश्विक उद्यमी नेटवर्क द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (TIE) के संस्थापक ए. जे. पटेल और सेंटर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक पॉलिसी (CIPP) के संस्थापक यतीश राजावत ने संयुक्त रूप से की।

संस्थापकों के मुताबिक, भारत में कार्यशील आयु की आबादी हर साल लगभग 1.2 करोड़ की दर से बढ़ रही है, जबकि विनिर्माण जैसे पारंपरिक रोजगार क्षेत्र अपेक्षित गति से विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में देश को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा फायदा उठाने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नई नौकरियां सृजित करने की जरूरत है।

हालांकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन रोजगार की रफ्तार उत्पादन और आर्थिक विस्तार के मुकाबले पीछे रही है। स्वचालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से कई क्षेत्रों में शुरुआती स्तर की नौकरियां कम हो रही हैं, जिससे यह आशंका गहराने लगी है कि आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन के बीच दूरी बढ़ सकती है।

‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ मिशन के तहत उद्यमिता, कौशल विकास और श्रम-प्रधान उद्योगों को भारत की रोजगार नीति के केंद्र में रखा गया है। इस पहल का उद्देश्य रोजगार सृजन को आर्थिक प्रगति का प्रमुख पैमाना बनाना है, ताकि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित की जा सके।

हरीश मेहता ने कहा कि यह पहल उद्यमियों, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्योगों (MSME) और नियोक्ताओं को सशक्त बनाने का एक संगठित प्रयास है, जिसमें कौशल, उद्यम, डेटा और नीति के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा।

वहीं ए. जे. पटेल ने कहा कि स्टार्टअप और छोटे उद्योग, जो भारत के जीडीपी में करीब 30 प्रतिशत योगदान देते हैं और सबसे बड़े नियोक्ता हैं, उनका विस्तार बड़े शहरों से आगे होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर देश को हर साल 80–90 लाख नौकरियां पैदा करनी हैं, तो उद्यमिता के रास्ते में मौजूद ढांचागत बाधाओं को दूर करना होगा, ताकि यह आम लोगों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन सके।

FASTag New Rule: FASTag यूजर्स के लिए राहत, NHAI ने खत्म किया यह नियम

FASTag New Rule: FASTag यूजर्स के लिए राहत, NHAI ने खत्म किया यह नियम

 नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने घोषणा की है कि अब कार, जीप और वैन जैसी चार-पहिया गाड़ियों के लिए नए फास्टैग जारी करने में “नो योर व्हीकल” (KYV) प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह बदलाव 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। इसका मतलब है कि हाईवे पर फास्टैग का इस्तेमाल अब और आसान हो जाएगा और एक्टिवेशन के बाद होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी।

KYV क्या है?

KYV एक जांच प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि फास्टैग सही वाहन और उसके असली मालिक से जुड़ा हो। यह डुप्लीकेट टैग, गलत लिंकिंग या अन्य गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए होती है। प्रक्रिया वाहन डेटाबेस पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन विवरण की जांच करके की जाती है और यह देखा जाता है कि पहले से कोई एक्टिव फास्टैग तो नहीं है या वाहन ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है।

नए नियमों के तहत क्या बदलेगा?

पहले फास्टैग एक्टिव होने के बाद भी कभी-कभी KYV की जांच करनी पड़ती थी, जिससे यूजर्स को डॉक्यूमेंट्स जमा करने पड़ते थे। अब पोस्ट-एक्टिवेशन KYV पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

पुराने फास्टैग वाले क्या करेंगे?

पुराने फास्टैग वाले वाहन भी रूटीन KYV से मुक्त होंगे। केवल खास मामलों में जांच की जाएगी, जैसे कि फास्टैग ढीला होना, गलत जारी होना या शिकायत मिलने पर।

सुरक्षा और जिम्मेदारी

NHAI ने तय किया है कि अब बैंक फास्टैग एक्टिव तभी कर सकेंगे जब वाहन पोर्टल पर गाड़ी की पूरी जानकारी जांच ली गई हो। दुर्लभ मामलों में यदि वाहन पोर्टल पर डेटा उपलब्ध नहीं है, तो बैंक को RC देखकर जांच करनी होगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी। यह नियम ऑनलाइन खरीदे जाने वाले फास्टैग पर भी लागू होंगे।

बदलाव की वजह

लाखों सड़क यूजर्स को फास्टैग एक्टिवेशन के बाद KYV जांच के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था, भले ही उनके पास सभी वैध डॉक्यूमेंट मौजूद हों। इस समस्या को दूर करने के लिए NHAI ने प्रक्रिया सरल और तकनीक पर आधारित बनाने का कदम उठाया है। अब बैंक पूरी जांच पहले ही कर लेंगी, जिससे सिस्टम पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनेगा। 

500 Rupee Notes: मार्च में बंद हो जाएंगे 500 के नोट, जानें क्या है सोशल मीडिया पर फैले दावे की सच्चाई?

500 Rupee Notes: मार्च में बंद हो जाएंगे 500 के नोट, जानें क्या है सोशल मीडिया पर फैले दावे की सच्चाई?

बिजनेस डेस्कः हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मार्च 2026 तक ₹500 के नोट हटा देगा। इस दावे को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पूरी तरह गलत बताया है। आरबीआई ने कहा है कि ₹500 के नोट पूरी तरह वैध हैं और उनका इस्तेमाल बैंकिंग लेन-देन, एटीएम और अन्य भुगतान माध्यमों में जारी रहेगा। सरकार या RBI ने इस नोट के हटाने या रिटायर करने से जुड़ी कोई योजना नहीं बनाई है। पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) ने इस खबर को स्पष्ट रूप से झूठा बताया है और कहा कि इसका कोई आधिकारिक आधार नहीं है।

सोशल मीडिया अफवाहों से निवेशक और आम लोग भ्रमित

सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के कारण कई लोग भ्रमित हो गए थे। कुछ यूजर्स ने बताया कि उन्होंने एटीएम से ₹500 नोट निकालना बंद कर दिया, जबकि कुछ लोग नकद बचत को लेकर चिंतित हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी अफवाहों से वित्तीय व्यवहार पर अस्थायी असर पड़ सकता है, इसलिए हमेशा सरकारी और आधिकारिक चैनल से ही जानकारी लेनी चाहिए।

PunjabKesari

PIB Fact Check ने किया जोरदार खंडन

पीआईबी फैक्ट चेक ने साफ किया कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने बताया कि नोटों की वैधता और इस्तेमाल पर कोई बदलाव नहीं हुआ है। PIB ने आम जनता से अपील की कि ऐसे अफवाहों पर विश्वास न करें और भरोसेमंद स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है वास्तविक स्थिति?

  • ₹500 नोट भारत में वैध मुद्रा हैं।
  • RBI समय-समय पर नोटों के रीसाइक्लिंग और जारी करने की समीक्षा करता है।
  • वर्तमान में ₹500 नोट पर कोई रिटायरमेंट या नोटबंदी की योजना नहीं है।
  • आम लोगों को अपने वित्तीय व्यवहार में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।
सोना हुआ सस्ता या महंगा? गहने बनवाने से पहले यहाँ देखें 18k, 22k और 24k का लेटेस्ट भाव

सोना हुआ सस्ता या महंगा? गहने बनवाने से पहले यहाँ देखें 18k, 22k और 24k का लेटेस्ट भाव

 नई दिल्ली: आज 2 जनवरी, शुक्रवार के दिन सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए ₹1,35,070 है. वहीं, चांदी की बात करें तो इसकी कीमत प्रति किलो ₹2,37,900 है. यह जानकारी निवेशकों और गहनों के खरीदारों दोनों के लिए अहम है, क्योंकि कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर बाजार और शादी-ब्याह के सीजन पर पड़ सकता है. बहुत से लोग अब गहने खरीदने की योजना को कुछ समय के लिए टालने पर विचार कर रहे हैं, उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतों में कुछ कमी आए.

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ने और रुपये की कीमत में गिरावट के कारण भारत में सोने और चांदी की कीमतें ऊंची हो रही हैं. अगर आप गहने खरीदने का सोच रहे हैं, तो बाजार के रेट पर ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि कीमतें किसी भी समय और भी बढ़ सकती हैं.

आज क्या है आपके शहर में सोने का रेट:

शहर 24 कैरेट का रेट 22 कैरेट का रेट 18 कैरेट का रेट
चेन्नई ₹13,613 ₹12,439 ₹10,374
मुंबई ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
दिल्ली ₹13,522 ₹12,396 ₹10,145
कोलकाता ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
बैंगलोर ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
हैदराबाद ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
केरल ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
पुणे ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
वडोदरा ₹13,512 ₹12,386 ₹10,135
अहमदाबाद ₹13,512 ₹12,386 ₹10,135
जयपुर ₹13,522 ₹12,396 ₹10,145
लखनऊ ₹13,522 ₹12,396 ₹10,145
कोयंबटूर ₹13,613 ₹12,439 ₹10,374
मदुरै ₹13,613 ₹12,439 ₹10,374
विजयवाड़ा ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
पटना ₹13,512 ₹12,386 ₹10,135
नागपुर ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130
चंडीगढ़ ₹13,522 ₹12,396 ₹10,145
सूरत ₹13,512 ₹12,386 ₹10,135
भुवनेश्वर ₹13,507 ₹12,381 ₹10,130

आज क्या है आपके शहर में सिल्वर का रेट:

शहर 10 ग्राम 100 ग्राम 1 किलो
चेन्नई ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
मुंबई ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
दिल्ली ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
कोलकाता ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
बैंगलोर ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
हैदराबाद ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
केरल ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
पुणे ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
वडोदरा ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
अहमदाबाद ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
जयपुर ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
लखनऊ ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
कोयंबटूर ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
मदुरै ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
विजयवाड़ा ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
पटना ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
नागपुर ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
चंडीगढ़ ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
सूरत ₹2,379 ₹23,790 ₹2,37,900
भुवनेश्वर ₹2,559 ₹25,590 ₹2,55,900
Petrol-Diesel Price 2 Jan 2026: आज सुबह बदल गए पेट्रोल-डीजल के दाम, अपनी जेब का हाल यहाँ करें चेक

Petrol-Diesel Price 2 Jan 2026: आज सुबह बदल गए पेट्रोल-डीजल के दाम, अपनी जेब का हाल यहाँ करें चेक

 नई दिल्ली: आज 2 जनवरी, शुक्रवार है. आज के पेट्रोल-डीजल के रेट जारी हो चुके हैं. बता दें कि तेल कंपनियां हर रोज सुबह 6 बजे तेल कंपनियां दाम लाइव करती हैं. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹87.67 प्रति लीटर है. अगर आप टंकी फुल कराने जा रहे हैं तो यहां आप अपने शहर के लेटेस्ट रेट चेक कर सकते हैं.

कौन तय करता है पेट्रोल-डीजल के रेट: भारत में फ्यूल की कीमतें सेंट्रल अथॉरिटी द्वारा निर्धारित की जाती हैं और देश की कई फैक्टर्स और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, किसी कीमत की अनुमति दी जाती है. इसका पालन डीजल रिटेलर्स और यूजर्स को सख्ती से पालन करना होता है. ऐसे कई कारक हैं जो या तो फ्यूल की कीमतों को नीचे लाते हैं या फिर उन्हें बढ़ाते हैं.

क्या हैं आपके शहर के पेट्रोल के रेट:

शहर कीमत बदलाव
नई दिल्ली ₹94.77 0
कोलकाता ₹105.41 0
मुंबई ₹103.54 0
चेन्नई ₹101.23 0.33
गुड़गांव ₹95.51 0.15
नोएडा ₹94.74 -0.38
बैंगलोर ₹102.92 -0.14
भुवनेश्वर ₹101.35 0.32
चंडीगढ़ ₹94.30 0
हैदराबाद ₹107.50 0
जयपुर ₹104.72 0.34
लखनऊ ₹94.84 0.15
पटना ₹105.53 -0.05
तिरुवनंतपुरम ₹107.48 0.08

क्या हैं आपके शहर के डीजल के रेट:

शहर कीमत बदलाव
नई दिल्ली ₹87.67 0
कोलकाता ₹92.02 0
मुंबई ₹90.03 0
चेन्नई ₹92.81 0.32
गुड़गांव ₹87.97 0.15
नोएडा ₹87.81 -0.48
बैंगलोर ₹90.99 -0.1
भुवनेश्वर ₹92.92 0.32
चंडीगढ़ ₹82.45 0
हैदराबाद ₹95.70 0
जयपुर ₹90.21 0.31
लखनऊ ₹87.98 0.17
पटना ₹91.77 -0.05
तिरुवनंतपुरम ₹96.48 0.2
New Rules 2026: 1 जनवरी से महंगी गैस, कार और हवाई टिकट, लेकिन कुछ चीजें हुई सस्ती, जानें पूरी जानकारी

New Rules 2026: 1 जनवरी से महंगी गैस, कार और हवाई टिकट, लेकिन कुछ चीजें हुई सस्ती, जानें पूरी जानकारी

  नए साल की शुरुआत से ही आम आदमी की जिंदगी में कुछ अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले ये बदलाव सीधे तौर पर हमारे रोजमर्रा के खर्च, यात्रा और वित्तीय फैसलों को प्रभावित करेंगे। इस महीने कुल छह बड़े फैसले होने जा रहे हैं, जिनका असर आम नागरिक की जेब, खरीदारी और यात्रा पर पड़ेगा। सबसे पहले, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 111 रुपए तक बढ़ गए हैं, जिससे रेस्टोरेंट और होटलों के लिए लागत बढ़ जाएगी। इसके अलावा, कारों की कीमतों में 2-3% तक बढ़ोतरी समेत कई बड़े बदलाव हुए।

भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बना, जापान को छोड़ा पीछे, नए साल से एक दिन पहले आई बड़ी खुशखबरी

भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बना, जापान को छोड़ा पीछे, नए साल से एक दिन पहले आई बड़ी खुशखबरी

 India Becomes World Fourth Largest Economy: नए साल की शुरुआत से एक दिन पहले भारत की अर्थव्यवस्था (India Economy) को लेकर बड़ी खुशखबरी आई है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। सरकार की वार्षिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधार पर भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल किया है। मोदी सरकार ने कहा है कि भारत 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। साथ ही 2030 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा की जाएगी। जिसके आधिकारिक आंकड़े 2026 की पहली छमाही में जारी होने की उम्मीद है।

 

सरकार ने कहा कि 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की रियल जीडीपी 8.2 प्रतिशत बढ़ी है। ये पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत और पिछले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में 7.4 प्रतिशत थी। 2025 में सुधारों की जानकारी देने वाली एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। ये अगले 2.5 से 3 सालों में जर्मनी को तीसरे स्थान से हटाने के लिए तैयार है। इसका अनुमानित जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगा।

सरकार ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, संस्थागत सुधार, संतुलित मौद्रिक नीति और कीमतों में स्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अनुकूल ‘गोल्डीलॉक्स’ स्थिति तैयार की है, जहां विकास और महंगाई के बीच संतुलन बना हुआ है। इसी वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थान यह अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूती के साथ उभरेगी और वैश्विक आर्थिक मंच पर इसकी भूमिका और भी सशक्त होगी।

New year, new rules: 1 जनवरी से बदल जाएगा बहुत कुछ, जानें आपके पैसे, खर्च और बचत पर असर

New year, new rules: 1 जनवरी से बदल जाएगा बहुत कुछ, जानें आपके पैसे, खर्च और बचत पर असर

 बिजनेस डेस्कः जैसे ही 2026 का पहला दिन आएगा, देश में कई नियम बदलने वाले हैं, जो सीधे आपके वित्तीय फैसलों और खर्च पर असर डालेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि आप समय रहते नई व्यवस्था को समझकर अपनी योजना बनाएं।

8वां वेतन आयोग लागू होने वाला

31 दिसंबर 2025 को 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की संभावना है। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों की सैलरी में बदलाव और नए ऐलान हो सकते हैं।

लोन और ब्याज दरों में राहत

हाल ही में RBI ने रेपो रेट में 0.25% कटौती की है। इसके चलते जनवरी 2026 से कई बैंकों के लोन, विशेषकर होम लोन, की ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। इससे हर महीने EMI में राहत मिलने की उम्मीद है।

क्रेडिट स्कोर अपडेट का नया नियम

अब आपका क्रेडिट स्कोर हर 14 दिन में अपडेट होगा। RBI ने बैंकों और NBFCs को निर्देश दिया है कि वे महीने में कम से कम दो बार क्रेडिट जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेजें।

LPG और ATF की नई कीमतें

1 जनवरी से एलपीजी और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो सकती हैं। इसके अलावा हवाई ईंधन (ATF) की कीमत में बदलाव से एयर टिकट की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

PAN और राशन कार्ड से जुड़ी अहम तिथियां

अगर आपने अभी तक PAN को आधार से लिंक नहीं किया है, तो 1 जनवरी से बैंकिंग, सरकारी सेवाएं और कई ट्रांजैक्शन रुक सकते हैं। वहीं, 31 दिसंबर 2025 तक राशन कार्ड की e-KYC पूरी नहीं करने वाले लोगों को 1 जनवरी 2026 से राशन उपलब्ध नहीं होगा।

चांदी की लंबी छलांग, तोड़े सारे रिकॉर्ड, एक्सपर्ट का दावा- 2026 में भी नहीं रुकेगी रफ्तार

चांदी की लंबी छलांग, तोड़े सारे रिकॉर्ड, एक्सपर्ट का दावा- 2026 में भी नहीं रुकेगी रफ्तार

 बिजनेस डेस्कः सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के बाजार में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। दोनों की कीमतों में भी जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में राजधानी दिल्ली में चांदी के भाव में एक ही दिन में 9,350 रुपए प्रति किलोग्राम की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद चांदी 2,36,350 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

अगर पिछले एक हफ्ते की बात करें तो 19 दिसंबर को चांदी करीब 2,04,100 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी, जो अब 2,36,350 रुपए के पार निकल चुकी है यानी महज सात दिनों में चांदी ने निवेशकों को चौंकाने वाली तेजी दिखाई है।

विदेशी बाजारों से मिल रहा मजबूत सपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। स्पॉट सिल्वर पहली बार 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 3.72 डॉलर यानी करीब 5.18 फीसदी बढ़कर 75.63 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई।

औद्योगिक मांग बनी तेजी की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी की कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह औद्योगिक मांग में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। फैक्ट्रियों, टेक्नोलॉजी सेक्टर और उभरते उद्योगों में चांदी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा सीमित उत्पादन और मजबूत वैश्विक मांग ने भी कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

सॉलिड-स्टेट बैटरी जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में चांदी एक अहम घटक बनती जा रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सोलर एनर्जी और अन्य ग्रीन एनर्जी सेक्टर में इसके बढ़ते इस्तेमाल से मांग को मजबूत समर्थन मिल रहा है।

आपूर्ति-डिमांड गैप से और बढ़ सकती है कीमत

बाजार जानकारों का कहना है कि दुनिया में फिलहाल करीब 850 मिलियन औंस चांदी का उत्पादन हो रहा है, जबकि मांग लगभग 1.16 बिलियन औंस तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव से चांदी के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे आने वाले समय में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।

कहां पहुंच सकती है चांदी की कीमतें

चांदी के उछाल को देखते हुए कई एक्सपर्ट साल 2026 में 100 डॉलर का स्तर पार करने का अनुमान लगा रहे हैं। वहीं एक अनुमान में 200 डॉलर तक की भी बात कही गई है। रिच डैड पूअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोस्की का अनुमान है कि 2026 में डॉलर अपनी वैल्यू गंवाएगा वहीं मेटल की चमक बढ़ेगी और चांदी 200 डॉलर का स्तर पार कर लेगा।

Private Employees के लिए बड़ी खबर: क्या अब 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी? जानें

Private Employees के लिए बड़ी खबर: क्या अब 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी? जानें

 New Labour Codes: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) ने देश के करोड़ों प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी (Gratuity) के नियमों में है जो अब तक कर्मचारियों के लिए एक लंबी प्रतीक्षा का विषय रहा है। हालांकि कागजों पर बदलाव के बावजूद जमीन पर अभी भी पुराने नियम ही चल रहे हैं।

ग्रेच्युटी का नया नियम: 5 साल बनाम 1 साल

वर्तमान में लागू ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के अनुसार किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल की सेवा पूरी करना अनिवार्य है। नए लेबर कोड्स के तहत फिक्स्ड टर्म (अनुबंध आधारित) कर्मचारियों के लिए इस समय सीमा को घटाकर महज 1 साल करने का प्रावधान है। केंद्र सरकार का लक्ष्य सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) के दायरे को बढ़ाना है ताकि छोटी अवधि तक काम करने वाले युवाओं को भी वित्तीय लाभ मिल सके।

नियम लागू होने में देरी क्यों?

लाखों कर्मचारी पूछ रहे हैं कि जब कानून बन गया है तो कंपनियां लाभ क्यों नहीं दे रहीं? इसकी मुख्य वजह भारत का संवैधानिक ढांचा है:

    1. कानूनी बाध्यता की कमी: जब तक राज्य सरकारें अपने नए लेबर नियमों को आधिकारिक तौर पर जारी नहीं करतीं तब तक कंपनियां नए कोड्स को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं।

      समवर्ती सूची (Concurrent List): लेबर कानून समवर्ती सूची में आते हैं। इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य दोनों को इस पर कानून बनाने का अधिकार है। केंद्र ने कोड्स पारित कर दिए हैं लेकिन इन्हें लागू करने के लिए हर राज्य सरकार को अपने नियम अलग से नोटिफाई (अधिसूचित) करने होंगे।

    कंपनियां क्यों कतरा रही हैं?

    ज्यादातर कंपनियां अभी भी पुराने 5 साल वाले नियम को ही फॉलो कर रही हैं। इसके पीछे उनके अपने तर्क हैं:

    • ऑडिट और जांच का डर: स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बिना नियम बदलने पर कंपनियों को भविष्य में ऑडिट या कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

    • लागत में वृद्धि: 1 साल में ग्रेच्युटी देने से कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा जिससे वे फिलहाल बचना चाहती हैं।

    राज्यों की सुस्ती के पीछे का कारण

    राज्य सरकारें इस मामले में बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। इसके पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक कारण हैं:

    • ट्रेड यूनियनों का विरोध: कई श्रमिक संगठन कुछ प्रावधानों को लेकर असहमत हैं।

    • MSME सेक्टर की चिंता: छोटे उद्योगों का मानना है कि नए नियम उनकी लागत बढ़ा देंगे जिससे व्यापार करना मुश्किल होगा।

    • चर्चा का दौर: हालांकि कुछ राज्यों ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है लेकिन अधिकांश राज्यों में अभी भी हितधारकों (Stakeholders) के साथ बातचीत चल रही है।

     
₹20 करोड़ के फ्रॉड में निवेशकों को ₹2000 करोड़ का नुकसान, 2 साल तक नहीं लगी कंपनी को भनक

₹20 करोड़ के फ्रॉड में निवेशकों को ₹2000 करोड़ का नुकसान, 2 साल तक नहीं लगी कंपनी को भनक

 बिजनेस डेस्कः कजारिया सेरामिक्स (Kajaria Ceramics) की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी में ₹20 करोड़ का फ्रॉड 19 दिसंबर 2025 को सामने आया। कंपनी ने इसे एक्सचेंज फाइलिंग में उजागर किया। यह मामला पिछले दो सालों में हुआ और इसकी पहचान कंपनी के इंटरनल सिस्टम्स रिव्यू Operation Mathan के दौरान हुई।

फ्रॉड कजारिया बाथवेयर प्राइवेट लिमिटेड (KBPL) की सब्सिडियरी Kerovit Global Private Limited में हुआ, जिसमें CFO दिलीप कुमार मालिवाल कथित तौर पर फर्जी वेंडर के जरिए कैपेक्स और CWIP दिखाकर फंड सायफनिंग में शामिल पाए गए।

जांच के बाद दिलीप को नौकरी से हटा दिया गया और 18 दिसंबर को दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज कराई गई। कंपनी ने अब तक ₹50 लाख की रिकवरी की है लेकिन पूरी रकम की वसूली मुश्किल बताई जा रही है। यह नुकसान FY26 में exceptional item के तौर पर दर्ज होगा।

फ्रॉड का असर तिमाही मुनाफे पर लगभग 15% और पूरे साल के मुनाफे पर 6.6% पड़ा। FY25 में कंपनी का प्रॉफिट ₹300 करोड़ था।

निवेशकों को ₹1,984 करोड़ का झटका

शेयर प्राइस में गिरावट देखी गई, 24 दिसंबर को NSE पर 4.06% गिरकर 974.40 रुपए पर बंद हुआ, जबकि 15 दिसंबर को यह ₹1,098.30 था। मार्केट कैप में लगभग ₹1,984 करोड़ की कमी आई यानी निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹1,984 करोड़ की कमी आई। 2025 में स्टॉक अब तक करीब 16% नीचे है।

ब्रोकरेज Emkay Global ने स्टॉक पर Buy रेटिंग बनाए रखी है और ₹1,550 का टारगेट दिया है। कंपनी ने कहा कि उसके फंडामेंटल मजबूत हैं और अन्य सब्सिडियरीज में कोई गड़बड़ी नहीं मिली। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने तक शेयर पर दबाव बना रह सकता है।

Union Bank, PNB, Canara समेत इन बड़े बैंकों ने दी ग्राहकों को राहत भरी खबर, कम होगी EMI

Union Bank, PNB, Canara समेत इन बड़े बैंकों ने दी ग्राहकों को राहत भरी खबर, कम होगी EMI

 बिजनेस डेस्कः घर या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। देश के कई प्रमुख बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों ने हाल ही में होम लोन और व्हीकल लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल में की गई रेपो रेट कटौती के बाद लिया गया है, जिससे ग्राहकों की ईएमआई में कमी आएगी।

LIC Housing Finance ने 22 दिसंबर 2025 से नए होम लोन पर ब्याज दर 7.15% से शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी के एमडी और सीईओ त्रिभुवन अधिकारी के मुताबिक, RBI द्वारा इस साल कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती से हाउसिंग सेक्टर को बड़ा सपोर्ट मिला है। उनका मानना है कि साल 2026 में इससे नए होम बायर्स का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में मांग मजबूत होगी।

Union Bank of India ने 23 दिसंबर से होम लोन की ब्याज दर में 0.30% और वाहन लोन में 0.40% की कटौती की है। यह राहत एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) के तहत स्प्रेड में बदलाव के जरिए दी गई है।

Canara Bank ने अपने रेपो लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट (RLLR) में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 8.25% से घटाकर 8% कर दिया है। यह नई दरें 12 दिसंबर 2025 से लागू हैं, जिससे मौजूदा लोनधारकों की ईएमआई या लोन अवधि में कमी आएगी।

Punjab National Bank (PNB) ने भी RLLR को 8.35% से घटाकर 8.10% कर दिया है। बैंक की नई दरें 6 दिसंबर 2025 से प्रभावी हैं।

Bank of Maharashtra ने होम लोन की दर 7.35% से घटाकर 7.10% और कार लोन की दर 7.70% से घटाकर 7.45% कर दी है। इसके साथ ही बैंक ने प्रोसेसिंग फीस भी पूरी तरह माफ कर दी है, जिससे ग्राहकों का शुरुआती खर्च कम होगा।

इसके अलावा Bank of India ने भी अपने RBLR में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 8.35% से घटाकर 8.10% कर दिया है। यह बदलाव 5 दिसंबर 2025 से लागू है।

विशेषज्ञों का कहना है कि RBI की रेपो रेट कट के बाद बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की गई यह कटौती ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित होगी। कम ईएमआई से न केवल लोगों पर वित्तीय बोझ घटेगा, बल्कि रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में मांग को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, लोन लेने से पहले ग्राहकों को बैंक की शर्तें और स्प्रेड जरूर जांचने की सलाह दी जा रही है।

 
महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत! 2026 में इतने प्रतिशत तक गिर सकती है दर, कम होगी आपके लोन की EMI

महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत! 2026 में इतने प्रतिशत तक गिर सकती है दर, कम होगी आपके लोन की EMI

 नेशनल डेस्क : जहां एक ओर पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती और संभावित मंदी के डर से जूझ रही है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था न केवल मजबूती से खड़ी दिखाई दे रही है, बल्कि आगे एक नई छलांग लगाने के लिए तैयार नजर आ रही है। हाल ही में जारी CareEdge की रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरो जोन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस समय अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे की विकास दर पर चल रही हैं, वहीं चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ रही है। ऐसे माहौल में भारत का मजबूत प्रदर्शन वैश्विक मंच पर उसे अलग पहचान दिला रहा है।

क्यों वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ रहा है भारत?
CareEdge की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और व्यापारिक जोखिमों के बावजूद भारत अपनी विकास गति बनाए रखने में सक्षम रहेगा। इसका सबसे बड़ा कारण घरेलू मांग और निवेश में लगातार हो रही बढ़ोतरी है।

दूसरी तिमाही के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का प्रदर्शन खासा मजबूत रहा है। रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी दरों में कटौती और बाजार में बढ़ती मांग ने औद्योगिक गतिविधियों को गति दी है। इससे रोजगार और उत्पादन दोनों को सहारा मिला है।

वैश्विक स्तर पर अगले पांच वर्षों में औसत विकास दर केवल 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि भारत अगले दो वित्त वर्षों में क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

महंगाई और ब्याज दरों से आम आदमी को राहत
आम लोगों के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर महंगाई के मोर्चे पर है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) घटकर औसतन 2.1 प्रतिशत रह सकती है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में स्थिरता और कमोडिटी बाजार में नरमी से महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वर्ष 2025 का अंत पिछले छह वर्षों की सबसे आक्रामक ब्याज दर कटौती के साथ किया है। बेंचमार्क ब्याज दरों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ईएमआई पर बोझ कम होने की संभावना है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी विकास को प्राथमिकता देने वाला रुख अपनाया है। जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ और अक्टूबर में खुदरा महंगाई के 0.25 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने से केंद्रीय बैंक को नीतिगत ढील देने का भरोसा मिला है।

डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कैसी है?
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है। बीते कुछ महीनों में व्यापार घाटा बढ़ने और निवेश प्रवाह में कमी के चलते रुपये पर दबाव देखा गया है। इसके अलावा अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में देरी ने भी बाजार की धारणा को कुछ हद तक प्रभावित किया है। इसके बावजूद RBI ने संतुलित रणनीति अपनाई है और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप करने के बजाय रुपये को धीरे-धीरे समायोजित होने दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) के आधार पर रुपया अभी भी अपनी वास्तविक कीमत से लगभग 3 प्रतिशत नीचे है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इसमें किसी बड़ी गिरावट का खतरा फिलहाल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती और डॉलर के कमजोर होने से रुपये को आगे समर्थन मिल सकता है। इसके साथ ही ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारत के शामिल होने से विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

Bank Holiday Alert in January: आ गई छुट्टियों की लिस्ट...जनवरी  में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक

Bank Holiday Alert in January: आ गई छुट्टियों की लिस्ट...जनवरी में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक

 बिजनेस डेस्कः साल 2026 की शुरुआत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की छुट्टियों की सूची जारी कर दी है। RBI के बैंक हॉलिडे कैलेंडर 2026 के मुताबिक, जनवरी महीने में अलग-अलग राज्यों में कुल 16 दिन बैंक बंद रहेंगे। हालांकि, ये छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। इनमें दूसरे और चौथे शनिवार के 2 दिन, 4 रविवार और 10 राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय अवकाश शामिल हैं।

RBI ने बैंक ग्राहकों को सलाह दी है कि जनवरी में किसी भी जरूरी बैंकिंग काम से पहले अपने राज्य या शहर की छुट्टियों की सूची जरूर जांच लें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।

जनवरी 2026 में नए साल, स्वामी विवेकानंद जयंती, मकर संक्रांति, बिहू, पोंगल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती और गणतंत्र दिवस जैसे त्योहारों और अवसरों के कारण कई राज्यों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। कुछ राज्यों में लगातार दो से तीन दिन तक बैंकिंग सेवाएं बाधित रह सकती हैं।

जनवरी 2026 की प्रमुख बैंक छुट्टियां इस प्रकार हैं....

  • 1 जनवरी: नववर्ष/गान-नगई के अवसर पर कई राज्यों में बैंक बंद
  • 2 जनवरी: नव वर्ष जयंती के चलते कुछ राज्यों में अवकाश
  • 3 जनवरी: हजरत अली जयंती (लखनऊ)
  • 4, 11, 18, 25 जनवरी: रविवार
  • 10 जनवरी: दूसरा शनिवार
  • 12 जनवरी: स्वामी विवेकानंद जयंती (कोलकाता)
  • 14–15 जनवरी: मकर संक्रांति, बिहू, पोंगल और उत्तरायण से जुड़े अवकाश
  • 16–17 जनवरी: तमिलनाडु में विशेष पर्वों के कारण अवकाश
  • 23 जनवरी: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती/बसंत पंचमी
  • 24 जनवरी: चौथा शनिवार
  • 26 जनवरी: गणतंत्र दिवस (देशभर में बैंक बंद)

ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल बैंकिंग सेवाओं जैसे UPI, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग का अधिक से अधिक उपयोग करें, क्योंकि इन सेवाओं पर छुट्टियों का असर नहीं पड़ता।

Reasons Gold-Silver rate Hike: लगातार दूसरे महंगा हुआ 10g सोने का भाव, 1kg चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

Reasons Gold-Silver rate Hike: लगातार दूसरे महंगा हुआ 10g सोने का भाव, 1kg चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

 बिजनेस डेस्कः सोने-चांदी की कीमतों में 23 दिसंबर को लगातार दूसरे दिन जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1551 रुपए उछल कर 1,38,295 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। जबकि चांदी की कीमत में 3077 रुपए की तेजी दर्ज की गई है, ये 2,15,949 रुपए प्रति किलो ग्राम पर है।

सोने ने आज 1,38,295 रुपए का हाई लेवल टच किया, इसका लो लेवल 1,37,826 रुपए था। चांदी का हाई लेवल 2,16,596 रुपए रहा और लो लेवल 2,14,498 रुपए था। 

चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण
 

1. इंडस्ट्रियल डिमांड में विस्फोट

सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब चांदी सिर्फ ज्वेलरी मेटल नहीं रही, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल रॉ-मटेरियल बन चुकी है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

2. ट्रंप टैरिफ का डर और सप्लाई संकट

अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता के चलते कंपनियां पहले से चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। इससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और कीमतों को तेज सपोर्ट मिला है।

3. मैन्युफैक्चरर्स की एडवांस खरीदारी

प्रोडक्शन में रुकावट के डर से मैन्युफैक्चरर्स भविष्य की जरूरतों के लिए पहले ही खरीदारी कर रहे हैं। इसी वजह से बाजार में मांग बनी हुई है और आने वाले महीनों में भी चांदी में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

क्यों उछला सोना? 
 

1. ब्याज दरों में कटौती और कमजोर डॉलर

2025 में अमेरिकी महंगाई 3% से नीचे आ गई, जिसके बाद फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कटौती शुरू की। इससे रियल यील्ड घटी और गोल्ड जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स ज्यादा आकर्षक बन गए। कमजोर डॉलर ने भी सोने को सपोर्ट दिया।

2. सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी

चीन, रूस, मिडिल ईस्ट और एशियाई देशों के सेंट्रल बैंकों ने डॉलर रिजर्व से दूरी बनाते हुए रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीदा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में ऑफिशियल सेक्टर की खरीदारी ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

3. जियोपॉलिटिकल और ट्रेड अनिश्चितता

US-चीन ट्रेड टकराव, रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट तनाव और नए टैरिफ्स जैसी अनिश्चितताओं ने सेफ-हेवन डिमांड को और मजबूत किया।

4. निवेश मांग में उछाल

ETFs, Sovereign Gold Bonds और फिजिकल गोल्ड में लगातार इनफ्लो देखने को मिला। कई बड़े फंड्स ने इक्विटी बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए गोल्ड को हेज के तौर पर पोर्टफोलियो में बढ़ाया।