BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |
जानिये किस मठ में  साल में सिर्फ एक ही दिन खुलता है द्वार

जानिये किस मठ में साल में सिर्फ एक ही दिन खुलता है द्वार

 

 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती - ब्राह्मण पारा क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंकाली मठ की स्‍थापना, माँ कंकाली मंदिर से लगभग 400 वर्ष पूर्व का है ।
13 वीं शताब्‍दी में दक्षिण भारत से यात्रा पर आये नागा साधुओं द्धारा तांत्रिक साधना के लिए शमशान घाट पर इस मठ की स्‍थापना किये थे. तब उस समय यह पूरा क्षेत्र सुनसान, घनी झाडियों से युक्‍त बीहड जैसा स्‍थल था। वर्तमान कंकाली तालाब का अस्तित्‍व बहुत छोटा सा शमशान के मध्‍य में तथा दाह – संस्‍कार के पश्‍चात अस्थि को विसर्जित करने के प्रयोग किया जाता था । अस्थिकंकाल को विसर्जित करने के लिए प्रयोग होने के कारण ही इस तालाब को कंकाली तालाब कहा जाता है । इस तालाब के मध्‍य चार स्‍तंभो पर एक चबुतरा बनाकर उसमें शमशान वासी भगवान भूत भावन की स्‍थापना की गई थी । इस स्‍थल को उपयुक्‍त समझकर उन नागा साधुओं के दल के कुछ सदस्‍यों ने वर्तमान कंकाली मठ के पास ( कुछ नागा साधुओ ने ब्रम्‍हपुरी के दत्‍तात्रेय मंदिर व बिरंची नारायण मंदिर में भी) अपनी साधना के लिए उपयुक्‍त मानकर अस्‍थायी निवास बनाये तथा साधना के लिए देवी की स्‍थापना किये। उन नागा साधुओं की जीवित समाधियां अभी भी इस मठ में विद्यमान है जिनके ऊपर एक – एक शिवलिंग स्‍थापित है ।
लगभग 400 वर्ष बाद 17 वीं शताब्‍दी में कृपालु गिरि इस कंकाली मठ के प्रथम महन्‍त हुए बाद में इनके शिष्‍य भभुता गिरि एवं उनके बाद उनके शिष्‍य शंकर गिरि महन्‍त बने, ये तीनों महंत निहंग सन्‍यासी थे लेकिन समय काल परिवर्तन के साथ महंत शंकर गिरि ने निहंग प्रथा को समाप्‍त कर अपने शिष्‍य सोमार गिरि का विवाह कर गृहस्‍थ महन्‍त परम्‍परा का श्री गणेश किया । प्रथम गृहस्‍थ महन्‍त श्री सोमार गिरि को कोइ संतान नहीं हुए तब उन्‍होंने अपने शिष्‍य शम्‍भु गिरि को महन्‍त बनाया । शम्‍भु गिरि के प्रपौत्र श्री रामेश्‍वर गिरि के पुत्रद्वय गजेन्‍द्र गिरी गोस्‍वामी व हरभुषण गिरि गोस्‍वामी वर्तमतान में इस कंकाली मठ के महन्‍त व सर्वराकर है।
कंकाली मठ के प्रथम निहंग महन्‍त कृपालु गिरि को माता जी ने स्‍वप्‍न में दर्शन देकर कहा कि मुझे इस मठ से हटाकर तालाब के किनारे टीले के ऊपर स्‍थापित करो । देवी की आज्ञा को शिरोधार्य कर महन्‍त जी ने वर्तमान प्रसिद्ध कंकाली देवी मंदिर का निर्माण कर हरियाणा से मंगाई हुइ अष्‍टभुजी श्रीविग्रह को प्रतिष्ठित किया । मंदिर के निर्माण व प्राण – प्रतिष्ठिा के बाद महन्‍त कृपालु गिरि को कंकाली देवी ने साक्षात कन्‍या के रुप में दर्शन दिया लेकिन महन्‍त जी उसको पहचान नहीं पाये और उनका उपहास कर दिये, जिससे वे कन्‍या रुपी देवी एकदम अदृश्‍य हो गयी तब महन्‍त जी को अपनी गलती का एहसास हुआ इसी पश्‍चाताप के ज्‍वाला में जलते हुए महन्‍त कृपालु गिरि वर्तमान कंकाली मंदिर के बाजु में ही जीवित समाधी ले लिये, जो अभी भी विद्यमान है ।
प्राचीन प्रतिष्ठित श्रीविग्रह कंकाली मठ में ही प्रतिष्ठित है. जिसे दक्षिण भारत के तीर्थ – यात्रा नागा साधुओं ने प्रतिष्ठित किया था । यह मठ पुरे वर्ष में एक ही दिन विजया दशमी (दशहरा) के दिन खुलता है । प्रात: काल से लेकर पूरे दिन भर रात्रि 12 बजे तक पूजा – पाठ दर्शन होता है । मध्‍य रात्रि के पश्‍चात पुन: वर्ष भर के लिए बंद कर दिया जाता है ।
कंकाली देवी के स्‍थापना के समय से ही यहाँ बकरों की बलि दी जाती थी। जिसे सन 1976 में तात्‍कालिक महन्‍त जी के द्वारा बलि प्रथा को बंद कर श्री फल (नारियल) फोडने की शुरुआत की गई । सन 1965 तथा 1998 में इस प्राचीन कंकाली तालाब की सफाई के दौरान तालाब के दक्षिण – पूर्व कोने में 4 फीट चौडी व आठ फीट उंचा सुरंग द्वार निकला था कुछ समय पश्‍चात इसी सुरंग का दुसरा हिस्‍सा बुढेश्‍वर मंदिर के सामने एक बडे नाले के पुलिया निर्माण के समय भी देखा गया था । कंकाली तालाब में उस समय इतना अधिक मृतक अस्थि कंकाल का विसर्जन किया गया कि हडडी के फास्‍फोरस का अंश घुलते रहने के कारण इस तालाब के पानी में स्‍नान करने पर चर्मरोग को दुर करने का प्रभाव आ गया। ऐसा विश्‍वास अभी भी श्रद्धालु लोगों के मन में है । इसलिए दूर – दूर से चर्मरोगी इस तालाब में स्‍नान कर तथा मां कंकाली देवी की कृपा से स्‍वस्‍थ हो जाते है ।

 

उपरोक्त संकलन तथा रायपुर के समस्त प्राचीन मंदिरों का इतिहास , माँ महामाया देवी मंदिर से प्रकाशित पुस्तक "" रायपुर का वैभव "" में वर्णित है।

किसानों का कर्ज माफ कर सरकार ने उनकी चिंता दूर की: खाद्य मंत्री

किसानों का कर्ज माफ कर सरकार ने उनकी चिंता दूर की: खाद्य मंत्री

 नगर के जिला सहकारी बैंक शाखा ने नेवरा कृषि उपज मंडी प्रांगण में सोमवार को कृषक ऋण माफी तिहार का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्य खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने किसानों को संबोधित करते कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा शपथ ग्रहण करने के बाद सर्वप्रथम किसानों के अल्पकालीन कृषि ऋण माफी का निर्णय लिया गया। इसके तहत 11 हजार करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। किसानों का कर्ज माफ कर सरकार ने किसानों की चिंता दूर की है। किसानों से 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदी के साथ-साथ 300 प्रति क्विंटल बोनस प्रदान किया गया। किसान राज्य के खुशहाली का प्रतीक होते हैं। किसान समृद्ध होंगे तो राज्य समृद्ध होगा। 

अध्यक्षता करते हुए राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा ने कहा कि छग शासन ने लोकहित में बड़े पैमाने पर पूरे प्रदेश के सभी किसानों का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ किया है, जिससे किसानों में खुशी का माहौल है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने किसानों को ऋण माफी का प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। 

कार्यक्रम में पूर्व विधायक जनकराम वर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष नारायण कुर्रे, सहकारी बैंक मैनेजर राकेश ठाकुर, वरिष्ठ नेता प्रदीप अग्रवाल, ओम गोयल, नगरपालिका उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण वर्मा, नेता प्रतिपक्ष विजय सोनू मारखंडे, गौरी शंकर सैनी, शंकर शर्मा, डीगू वर्मा, गुड्डू सिरमौर, नवीन अग्रवाल, श्रीनिवास राव, पार्षद मनोहर गृहणी, देवदास टंडन, दिनेश साहू, दशरथ डहरिया, भीम सेन भेजवानी, एनएसयूआई प्रदेश सचिव राजुल तेजवानी, सौरभ सिरमौर, सभी सोसाइट के अध्यक्ष अौर कार्यकर्ता उपस्थित रहे। 

तिल्दा-नेवरा. कृषि उपज मंडी में किसान को प्रमाण-पत्र देते खाद्य मंत्री। 

चौक पर युकां और एनएसयूआई ने फूलमाला से स्वागत 

कृषि उपज मंडी प्रांगण में तिहार में मंत्री और राज्यसभा सदस्य का युवा कांग्रेस बलौदाबाजार युवा कांग्रेस अध्यक्ष ओम ठाकुर और एनएसयूआई के नेतृत्व में दीनदयाल चौक पर फूल माला और फाटकों के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत करने वालों में युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव लक्ष्मीनारायण वर्मा, एनएसयूआई प्रदेश सचिव राहुल तेजवानी, पार्षद देवा टंडन, संतोष यादव, एनएसयूआई रायपुर जिला उपाध्यक्ष अनिल सिंह, निखिल मांडले, प्रमोद वर्मा, योगेंद्र पटेल, बलराम साहू, योगेंद्र साहू, धर्मेंद्र ठाकुर, अश्वनी, रमेश साहू, ओमकार पाल, हेमचंद वर्मा, गजू साहू, रजत कश्यप, राजकुमार यदु, उमाकांत वर्मा, राकेश जोशी, गुलाब यदु, भोलाराम, ओमप्रकाश, भूपेंद्र, टिकेश, सिद्धार्थ, सतीश, ओमप्रकाश मिर्झा और समस्त कार्यकर्ता उपस्थित रहे। 

नवनियुक्त राज्यपाल अनुसुईया उइके 29 जुलाई को लेंगी राज्यपाल पद की शपथ

नवनियुक्त राज्यपाल अनुसुईया उइके 29 जुलाई को लेंगी राज्यपाल पद की शपथ

 रायपुर. अनुसुईया उइके 29 जुलाई को छत्तीसगढ़ की राज्यपाल के तौर पर शपथ लेंगी. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज यहां बताया कि अनुसुईया उइके 29 जुलाई को शाम चार बजे राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के पद की शपथ लेंगी. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी. आर. रामचन्द्र मेनन शपथ दिलाएंगे.

 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष, नेताप्रतिपक्ष सहित मंत्रिमण्डल के सभी सदस्य, विधायकगण और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे. उइके, आनंदीबेन पटेल का स्थान लेंगी. अगस्त 2018 में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजीदास टंडन के निधन के बाद से पटेल राज्य की कार्यवाहक राज्यपाल हैं. अधिकारियों ने बताया कि उइके कल 27 जुलाई को शाम नियमित विमान से रायपुर पहुंचेंगी.
 
वह 29 जुलाई को सुबह शहीद वीर नारायण ंिसह स्मारक पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी. इसके बाद माना विमानतल रोड स्थित राजीव स्मृति वन के शहीद वाटिका पहुंचकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगी.
स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने अनुच्छेद 370 में बदलाव का किया विरोध, सोशल मीडिया में ट्रोल हुए,

स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने अनुच्छेद 370 में बदलाव का किया विरोध, सोशल मीडिया में ट्रोल हुए,

 रायपुर. जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के संबंध में केंद्र सरकार के निर्णय का जहां छत्तीसगढ़ की सरकार ने विरोध किया है वहीं राज्य के विपक्षी दलों ने स्वागत किया है। जम्मू-कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले का राज्य की कांग्रेस सरकार ने विरोध किया है। 

यहां की भूपेश बघेल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इस फैसले को संघीय ढांचे पर कुठाराघात कहा और इसे वापस लेने की मांग की। सिंहदेव ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 के संबंध में लिया गया निर्णय अत्यंत दूरगामी परिणाम वाला तथा देश की व्यवस्था को बुनियादी रूप से प्रभावित कर देने वाला निर्णय साबित हो सकता है। इस निर्णय में केंद्र सरकार ने संसद में बहुमत के माध्यम से संघीय व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। 

सिंहदेव ने कहा कि राजाओं के साथ संधि और तत्कालीन विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करके जम्मू-कश्मीर राज्य का गठन हुआ था। वर्तमान में वहां पर विधानसभा विद्यमान नहीं है, इसलिए विधानसभा की शक्तियां लोकसभा में और संसद में विद्यमान हो गई है, उन्होंने एक ऐसा निर्णय ले लिया है जिस निर्णय की पृष्ठभूमि में भविष्य में छत्तीसगढ़ को भी भंग किया जा सकता है। आप छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लागू कर दीजिए और निर्णय ले लीजिए कि छत्तीसगढ़ वापस मघ्य प्रदेश में शामिल हो गया है। यह हमारे पूर्वजों के द्वारा और संविधान के निर्माताओं के द्वारा जो संविधान बनाया था उसके उपर बहुत बड़ा कुठाराघात है और देश में भविष्य में आने वाले समय में ऐसी सरकार में रहने वाले लोगों से तथा ऐसी मानसिकता वाले लोगों से पूरे संघीय ढांचे के भविष्य को, उसके आधार को खतरा है।