राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सभी डीएम और सीएमओ को नकली कोविडशील्ड टीकों की पहचान के लिए अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में नकली कोविडशील्ड टीके की पहचान होने के बाद जारी किया गया है।
अलर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैक्सीन निर्माता कम्पनी की ओर से परीक्षण के बाद वैक्सीन नकली होने और निर्माता कम्पनी द्वारा आपूर्ति न किये जाने की पुष्टि की गई है। इस बारे में केन्द्र सरकार की ओर से 25 अगस्त को एक पत्र भी जारी किया गया था।
प्रदेश के सभी डीएम और सीएमओ को सलाह दी गई है कि नकली टीकों से बचाव के लिए सप्लाई चेन की निगरानी बढ़ाई जाए और कोविड टीकों के उपयोग से पहले गुणवत्ता की स्थिति को सावधानीपूर्वक प्रमाणित कर लिया जाए। खासतौर पर निजी कोविड टीकाकरण केन्द्रों द्वारा आयोजित सत्रों पर निगरानी रखी जाए और ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना मिलने पर सक्षम स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जहां कहीं भी कोविड टीकाकरण सत्र पर नकली टीकों से सम्बंधित गतिविधियां पायी जाती हैं तो उसकी तत्काल जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका और कई अन्य देशों में कोरानावायरस (Coronavirus) का एक नया स्वरूप मिला है, जो अधिक संक्रामक हो सकता है। साथ ही कोविड रोधी टीके (Vaccine) से मिलने वाली सुरक्षा को चकमा दे सकता है।
दक्षिण अफ्रीका स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज एवं क्वाजुलु नैटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लैटफॉर्म के वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोनावायरस के नए स्वरूप सी.1.2 का, सबसे पहले देश में इस साल मई में पता चला था।
उन्होंने कहा कि तब से लेकर गत 13 अगस्त तक यह स्वरूप चीन, कांगो, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड में मिल चुका है।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका में कोविड-19 की पहली लहर के दौरान सामने आए वायरस के वेरिएंट में से एक सी.1 की तुलना में सी.1.2 अधिक म्यूटेंट हुआ है जिसे ‘रुचि के स्वरूप’ की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि सी.1.2 में अन्य स्वरूपों-
‘वेरिएंट्स ऑफ कंसर्न’ और ‘वेरिएंट्स ऑफ इंटरेस्ट’ की तुलना में अधिक उत्परिवर्तन देखने को मिला है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि सी.1.2 अधिक संक्रामक हो सकता है तथा यह कोविड रोधी टीके से मिलने वाली सुरक्षा को चकमा दे सकता है।
यौन स्वास्थ्य को सही रखने के लिए एक्सपर्ट्स ने कई टिप्स बता रखे हैं. जिन्हें अपनाने से ना सिर्फ आपका अनुभव बेहतरीन बनता है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी फायदा पहुंचता है. इन टिप्स को अपनाने के बाद आप कई यौन समस्याओं (Sexual Problems) से दूर रहते हैं और यौन सुख प्राप्त कर पाते हैं. आइए यौन संबंध (शारीरिक संबंध) बनाने से पहले ध्यान रखने वाले सेफ्टी टिप्स के बारे में जान लेते हैं.
यौन संबंध बनाने से पहले जरूर करें ये 5 काम
आइए जानते हैं कि सेक्शुअल हेल्थ को सही रखने के लिए आपको फिजिकल रिलेशन (यौन संबंध) बनाने से पहले किन कामों को करना चाहिए.
मूड है जरूरी
आपको यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन यौन स्वास्थ्य को सही रखने के लिए आपको फिजिकल रिलेशन से पहले फीमेल पार्टनर के मूड का ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि, जब महिला उत्तेजना महसूस करती है, तो उनका जननांग नैचुरल ल्यूब्रीकेशन का उत्पादन करता है. ल्यूब्रीकेशन में कमी के कारण वजायनल टीअरिंग, कट या सूजन जैसी यौन चोटें लग सकती है.
प्राइवेट पार्ट की हाइजीन
यौन संबंध बनाने से पहले मेल और फीमेल पार्टनर दोनों को प्राइवेट पार्ट की हाइजीन का खास ख्याल रखना चाहिए. क्योंकि, शरीर के इस हिस्से में कई नुकसानदायक फंगस व बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं. जो शारीरिक संबंध बनाने के दौरान आपके हाथों से मुंह, कान, नाक आदि जगह पहुंचकर आपको बीमार कर सकते हैं.
अंडरगार्मेंट्स बदलें
अक्सर लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यौन संबंध बनाने से पहले यह काम करना भी बहुत जरूरी है. क्योंकि, दिनभर आपके शरीर से पसीना निकलता है, जिसके कारण आपके अंडरगार्मेंट्स गंदे हो जाते हैं. यौन संबंध के दौरान यह पसीना यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन व अन्य संक्रमणों का कारण बन सकता है.
गहरी व लंबी सांस लें
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यौन संबंध से मिलने वाला सुख आपके मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. अगर आप ज्यादा तनाव व चिंता में होंगे, तो यौन संबंध बनाने में असफल भी हो सकते हैं. इसलिए फिजिकल रिलेशन बनाने से पहले आपको कुछ देर गहरी व लंबी सांस लेनी चाहिए. जिससे आपका दिमाग और शरीर दोनों रिलैक्स हो जाएं.
ऐसा खाना ना खाएं
ध्यान रखें कि यौन संबंध से पहले आपके द्वारा लिया गया आहार भी आपके अंतरंग पलों पर असर डालता है. आप संबंध बनाने से पहले ऐसा कुछ भी ना खाएं, जिससे सांस की बदबू, गैस, पेट फूलना आदि समस्याएं हो सकती है. वरना फिजिकल रिलेशन बनाते हुए आपके पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है.
यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.
Men’s Superfood: पुरुषों को अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए कुछ खास पोषक तत्वों की जरूरत होती है. पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर, हार्ट, हाई कोलेस्ट्रॉल, शुगर, ब्लड प्रेशर और सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होती हैं. ऐसे में बीमारियों से बचने के लिए और खुद को फिट रखने के लिए आपको अपनी डाइट में कुछ सुपरफूड जरूर शामिल करने चाहिए. पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए ऐसा आहार जरूरी है जिससे उनकी मांसपेशियां मजबूत बन सकें और वो ऊर्जावान महसूस कर सकें. आपको अपने आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लीन मीट और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद जरूर शामिल करने चाहिए. हम आपको आज ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं जो पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद हैं.
1- दूध और दही- सुपरफूड्स की लिस्ट में दूध-दही सबसे अहम हैं. महिला, परुष और बच्चों सभी की हेल्थ के लिए डेयरी उत्पाद बहुत फायदेमंद होते हैं. पुरुषों की हेल्थ के लिए भी दूध और दही को प्रोटीन, कैल्शियम और ल्यूटिन का अच्छा स्त्रोत माना गया है. मसल्स बनाने वालों के लिए दूध में भरपूर अमीनो एसिड पाया जाता है. दही में प्रोटीन, पोटेशियम और गुड बैक्टीरिया होते हैं जिससे आंत और पेट स्वस्थ रहते हैं.
2- फैटी फिश- पुरुषों को दिल का ख्याल रखने के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए. इसके लिए सैल्मन, हेरिंग, सार्डिन और हलिबेट फैटी फिश काफी अच्छा स्त्रोत हैं. फिश से ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व शरीर को मिलते हैं. जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है.
3- चॉकलेट- शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने के लिए आप चॉकलेट का सेवन कर सकते हैं. खासतौर से डार्क चॉकलेट में फ्लेवनॉल काफी पाया जाता है जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल घटाने और ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रखने में मदद मिलती है. डार्क चॉकलेट खाने से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है. सेक्स संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी डार्क चॉकलेट फायदेमंद है.
4- सोया फूड्स- कई रिसर्च में ये सामने आया है कि सोया फूड्स पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद हैं. इससे पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर से बचाव किया जा सकता है. सोया फूड से एस्ट्रोजन हार्मोन भी बढ़ते हैं. इसलिए पुरुषों को अपने आहार में सोयाबीन, टोफू, सोया दूध और मीसो सूप जरूर शामिल करना चाहिए.
5- अंडे- अंडे सभी के लिए बहुत फायदेमंद हैं. अंडे को सुपरफूड की लिस्ट में सबसे ऊपर माना जाता है. अंडे में भरपूर प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी, विटामिन डी और ल्यूटिन होता है. आपको रोज एक अंडा अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए. अंडे की जर्दी में 185 mg कोलेस्ट्रॉल होता है जो हेल्दी शरीर के लिए 1 दिन की जरूरत है.
6- नारंगी सब्जियां- खाने में नारंगी सब्जियां बहुत फायदेमंद होती हैं. इनसे आंखें मजबूत बनती हैं. नारंगी फल सब्जियों में बीटा-कैरोटीन, ल्यूटिन और विटामिन C काफी मात्रा में होते हैं. रिसर्च में पता चला है कि नारंगी सब्जियों में काफी पोषक तत्व होते हैं जिससे प्रोस्टेट का खतरा कम होता है. आपको अपने भोजन में गाजर, कद्दू, शकरकंद और लाल शिमला मिर्च जैसी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए.
7- हरी पत्तेदार सब्जियां- पुरुषों को अपने स्वास्थ्य के लिए डाइट में हरी सब्जियां जरूर शामिल करनी चाहिए. आप खाने में कोलार्ड साग, और केल जैसी हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए. इससे आंखे स्वस्थ रहती हैं और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी कम होता है. हरी सब्जियों में ल्यूटिन और जेक्सैंथिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये दोनों न्यूट्रिएंट्स मोतियाबिंद और आंखों से जुड़ी दूसरी बीमारियों से बचाते हैं.
8- एवोकाडो- पुरुषों को हेल्दी फैट के लिए डाइट में एवोकाडो भी शामिल करना चाहिए. इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है. स्वस्थ रहने के लिए आपको डाइट में सैचुरेटेड या ट्रांस फैट की बजाय मोनोअनसैचुरेटेड फैट शामिल करना चाहिए. आप खाने में ऑलिव ऑयल और नट्स भी शामिल करें.
9- नट्स और सीड्स- पुरुषों को अपनी डाइट में सीड्स और नट्स भी शामिल करने चाहिए. इनमें काफी मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और जरूरी हेल्दी फैट होता है. अखरोट और बादाम शरीर से LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. ड्राई फ्रूट्स से शरीर में ब्लड के थक्के जमने की समस्या भी कम हो जाती है. इससे प्रोस्टेट और कोलन के कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है.
10- पालक- आप खाने में पालक जरूर शामिल करें. पालक सभी के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. पालक में बहुत ज़्यादा मात्रा में मैग्नीशियम होता है. जिससे शरीर में रक्त वाहिकाओं को ये पतला करने का काम करता है. शरीर में अच्छे ब्लड फ्लो के लिए पालक बहुत जरूरी है. पालक फोलेट और पुरुषों की हेल्थ के लिए जरूरी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. टेस्टोस्टेरोन बूस्ट करने के लिए पालक में मैग्नीशियम काफी होता है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की just36news पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
इस बात में कोई दो राय नही हैं कि स्ट्रेचिंग करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन स्ट्रेचिंग का लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरह से किया जाए। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि लोग स्ट्रेचिंग के दौरान अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते है जिससे उनकी सेहत को लाभ की जगह नुकसान हो जाता है। चलिए फिर स्ट्रेचिंग से जुड़ी ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में जानते हैं।
स्ट्रेचिंग का तरीका सही न होना
किसी भी चीज की आधी-अधूरी जानकारी नुकसानदायक हो सकती है और यही बात स्ट्रेचिंग पर लागू होती है। दरअसल, कई लोगों को स्ट्रेचिंग की पूरी जानकारी नहीं होती और वे गलत स्ट्रेचिंग करते हैं जिससे उन्हें चोट लगने की भी संभावना हो सकती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आपको जिस स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, उसे किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करना सुनिश्चित करें ताकि आपको कोई चोट न लगे।
स्ट्रेचिंग के समय पर ध्यान न देना
अगर आपने स्ट्रेचिंग का समय निर्धारित नहीं किया है तो यह आपकी सबसे बड़ी गलती है। स्ट्रेचिंग से अधिकतम लाभ पाने के लिए इसका समय निर्धारित करने की जरूरत है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अगर जल्दबाजी में स्ट्रेचिंग की जाए तो इससे शरीर में झटका आने या फिर इंजरी होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, अत्याधिक स्ट्रेचिंग करने से भी बचें क्योंकि इससे मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है।
वार्मअप न करना
वार्मअप देखने में भले ही एक छोटी चीज लगती हो, लेकिन किसी भी तरह की एक्सरसाइज या फिर योगासनों के अभ्यास से पहले इसे करना बेहद जरूरी माना जाता है। खासतौर पर स्ट्रेचिंग से पहले क्योंकि कोल्ड मसल्स के साथ कभी भी स्ट्रेचिंग नहीं करनी चाहिए। इसलिए बेहतर होगा कि आप लाइट एक्टिविटी या वार्मअप करने के बाद स्ट्रेचिंग करें। आप चाहें तो वार्मअप के तौर पर कुछ मिनट जॉगिंग या साइकलिंग आदि कर सकते हैं।
इंजर्ड मसल्स के साथ स्ट्रेचिंग करना
स्ट्रेचिंग करते समय आप थोड़ा असहज महसूस कर सकते हैं, लेकिन अगर आपको पहले से दर्द हो रहा है या फिर स्ट्रेचिंग के दौरान दर्द महसूस हो रहा है तो समझ जाइए कि आप कुछ तो गलत कर रहे हैं। दरअसल, अगर आपकी मसल्स में पहले से ही किसी तरह की चोट लगी हुई है और आप तब भी स्ट्रेचिंग कर रहे हैं तो इससे आपकी समस्या और भी अधिक बढ़ सकती है।
रायगढ़। मौसम में हो रहे बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसमें सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। जिले के शासकीय व निजी अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर से पीड़ित लोगों व बच्चों की भीड़ काफी बढ़ गई है। 6 माह से 15 वर्ष तक के बच्चे वायरल फीवर और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। कोरोनाकाल में बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी पालकों पर कहीं ज्यादा बढ़ गई है जिसके लिए पालक सचेत हैं पर बदलते मौसम के कारण जो बीमारी संभव है उससे बचने के लिए पालकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अति संवेदनशील होना अब आवश्यक हो गया है।
इस मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बीमारियां होती है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के खतरे और संभावित तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए खास ध्यान देना जरूरी है। शहर के शासकीय व निजी अस्पतालों में 50 से अधिक बच्चे भर्ती हैं। बच्चों को कोरोना टेस्ट भी किया गया। राहत की बात है कि किसी बच्चे की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ताराचंद पटेल ने बताया,`उल्टी-दस्त, सर्दी-खांसी, बुखार, निमोनिया से ग्रस्त बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। टाइफाइड के भी एक-दो मामले सामने आए हैं। मौसम में बदलाव व स्वच्छता का स्तर बिगडऩे से बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं`।
प्रतिरोधक क्षमता जरूरी
डॉ. ताराचंद पटेल का कहना है, `बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। ऐसे में सर्दी-खांसी, जुकाम और बुखार जकड़ लेता है। छोटे बच्चों में यदि ऐसी बीमारी होती है तो उसे अनदेखी करने की बजाए तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। ऐसे में लापरवाही घातक हो सकती है। ज्यादा दिनों तक सर्दी रहने पर बच्चों में निमोनिया की शिकायत हो जाती है। डायरिया पीडि़त बच्चों को एक-दो दिन भर्ती रखने की जरूरत पड़ सकती है। परिजनों से पूरी हिस्ट्री ली जाती है। थोड़ा सा भी संदेह होने पर कोरोना जांच कराई जाती है`।
एमडी मेडिसीन डॉ. रूपेंद्र पटेल ने कहा, “बदलते मौसम से बच्चों के स्वास्थ्य पर ज्यादा असर पड़ रहा है। 3 से 5 दिनों में वायरल फीवर ठीक हो जाता है। इससे ज्यादा दिन सर्दी-खांसी व बुखार होने पर कोरोना टेस्ट कराना जरूरी है।“
ऐसे करें बचाव
00 ठंडा पानी पीने से बचे, जहां तक संभव हो पानी उबालकर पिलाएं।
00 बच्चों को गर्म व पौष्टिक भोजन दें। कटे फल व देर तक असुरक्षित तरीके से रखी गई वस्तुएं खाने को न दें।
00 बच्चों को निमोनिया, फ्लू, खसरा की वैक्सीन समय पर लगवाएं।
00 ज्यादा दिन तक सर्दी-बुखार होने पर कोविड टेस्ट जरूर कराएं।
बीयर जौ और अंगूर को सड़ा कर तैयार की जाती है. आमतौर पर लोग इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. लेकिन शोध बताते हैं कि अगर बीयर को सीमित मात्रा में लिया जाए तो इसके काफी फायदे हो सकते हैं. आवश्यकता से अधिक लेने पर ये नुकसान करती है. जानिए इसके 5 फायदे.
तनाव दूर करती :
अल्कोहल को सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है. लेकिन बीयर को लेकर तमाम शोध बताते हैं कि यदि सीमित मात्रा में बीयर ली जाए तो ये कई तरह से सेहत को लाभ पहुंचा सकती है. तनाव, घबराहट और थकान आजकल लोगों में काफी कॉमन हो गई है. कुछ शोध बताते हैं कि बीयर के सेवन से तनाव, घबारहट, और थकान की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. लेकिन इसे 350 मिली ग्राम से ज्यादा नहीं पीना चाहिए.
किडनी स्टोन में फायदेमंद :
तमाम लोगों का मानना है कि यदि किडनी स्टोन हो जाए तो बीयर पीने से स्टोन टूटकर यूरिन के जरिए बाहर आ जाता है. इसलिए कई लोग किडनी स्टोन के समय बीयर पीने की सलाह देते हैं. हालांकि इसके बारे में एक बार विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है.
स्किन के लिए अच्छी :
स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाने के लिए लोग न जाने कितना पैसा खर्च कर देते हैं. लेकिन बीयर पीने मात्र से आपकी स्किन पर काफी असर पड़ जाता है. दरअसल बीयर में हॉप्स और खमीर होता है जो त्वचा को स्वस्थ तो रखने के साथ शरीर पर मौजूद जख्म को भी तेजी से भरता है.
अल्जाइमर में फायदेमंद :
अल्जाइमर की समस्या होने से व्यक्ति की याद्दाश्त कमजोर होने लगती है और वो भूलने लगता है. माना जाता है कि सीमित मात्रा में बीयर पीकर इस समस्या को दूर किया जा सकता है. बीयर में मौजूद सिलकॉन और हॉप्स जैसे तत्व अल्जाइमर की रोकथाम करने में मददगार माने जाते हैं.
अल्सर में देती आराम :
कुछ शोध बताते हैं कि 75 मिग्रा. बीयर लेने से अल्सर की समस्या में काफी आराम होता है और इससे एच पायलोरी इंफेक्शन का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. लेकिन बीयर को सिर्फ सीमित मात्रा में ही लें क्योंकि इसके काफी नुकसान भी हैं.
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की Just36News पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
बिजी लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान की वजह से ज्यादातर लोग बढ़ते वजन की समस्या से परेशान है. हर कोई बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है. कई लोग सख्त डाइट करते हैं. कुछ जिम में घंटों वर्कआउट करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं लाइफस्टाइल में बदलाव कर बढ़े हुए वजन को कम कर सकते हैं. जी, हां बढ़े हुए वजन को कम करने के लिए आप अपनी लाइस्टाइल में करें ये बदलाव. इन बदलावों को करने से आपके पेट में जमा चर्बी तेजी से कम होगी.
आइए जानते हैं इन टिप्स और ट्रिक्स के बारे में.
गर्म पानी पिएं
अगर आपका मेटाबॉलिज्म रात के समय में धीमा हो जाता है तो सुबह के समय में सही शुरुआत करें. इसके लिए आप सुबह में एक से दो गिलास गर्म पानी पिएं. गर्म पानी आपके पाचन के साथ टॉक्सिक पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है. दरअसल गर्म पानी शरीर के फैट सेल्स को बर्न करने में मदद करता है. इसके साथ पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसके अलावा भूख को भी शांत रखता है. खाना खाने से 30 मिनट पहले गर्म पानी पिएं ताकि कैलोरी इनटेक को नियंत्रित करता है.
सुबह धूप लें
एक स्टडी के अनुसार, सूरज की किरणे वजन घटाने में मदद करती हैं. ये स्टडी साइटफिक रिपोर्ट नाम के जर्नल में छपी थी. इस स्टडी के मुताबिक धूप लेने से शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ती है, विटामिन डी हड्डियों मजबूत करने के लिए मदद करता है.
नियमित रूप से वर्कआउट करें
हर रोज सुबह उठकर 20 से 25 मिनट के लिए वर्कआउट करें. इससे सिर्फ आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट नहीं होगा. बल्कि आपके दिन की शुरुआत भी अच्छी होगा. बेहतर मेटाबॉलिज्म वजन घटाने में तेजी से मदद करता है.
पौष्टिक आहार खाएं
केवल नियमित रूप से वर्कआउट करना, बल्कि वजन कम करने के लिए सही खाना बहुत जरूरी है. सीडीसी (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) के अनुसार, नियमित रूप से खाना वजन घटाने में मदद करता है. आप आपनी डाइट में हरी सब्जियां और फल शामिल करें. आप डाइट में फाइबर, मिनरल्स, विटामिन्स और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होनी चाहिए.
ठंडे पानी से नहाएं
ठंडे पानी से नहाना भले ही हर समय अच्छा नहीं लगें. लेकिन कुछ स्टडी में कहा गया है कि इससे शरीर में फ्रोजन एडीपोज टिशू एक्टिवेट होते हैं जिसकी वजह से व्हाइट फैटी टिशू बर्न होते है. कई स्टडी में दावा किया गया कि सुबह के समय में ठंडे पानी से नहाने से शरीर का फैट बर्न होता है और मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है.
Covid-19 Vaccine Alert: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि उसने भारत की प्राथमिक कोविड वैक्सीन, कोविशील्ड के नकली वर्जन की पहचान की है. बीबीसी की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.
डब्ल्यूएचओ के एक बयान में कहा गया है कि जुलाई और अगस्त के बीच भारत और अफ्रीका में अधिकारियों ने नकली खुराक को जब्त कर लिया है.
यह भी कहा गया है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने पुष्टि की है कि खुराक नकली थी. डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि नकली टीके वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं.
बता दें कि कोविशील्ड वैक्सीन, एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का भारतीय निर्मित वर्जन है. अब तक 48.6 करोड़ से अधिक खुराक के साथ भारत में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला टीका है.
सीरम ने एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों को लाखों कोविशील्ड टीकों की आपूर्ति की थी. विभिन्न सरकारों और गरीब देशों के लिए वैश्विक कोवैक्स योजना के साथ किए गए सौदों के हिस्से के रूप में यह आपूर्ति की गई थी.
भारत, जो कोरोना से दुनिया का दूसरा सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है, उसका लक्ष्य इस साल के अंत तक अपने सभी लोगों का टीकाकरण करना है.
जनवरी में अभियान की शुरुआत के बाद से लगभग 13 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है.
(india.com)
डायबिटीज के बाद अकसर मरीजों को अपने खानपान का ध्यान रखना जरूरी होता है। उन्हें मिठाईयों पर कंट्रोल करना होता है। जिन्हें मीठा बहुत पसंद होता है वह डायबिटीज का शिकार हो जाते हैं। बात दें कि शुगर अधिक बढ़ जाने पर कई सारी गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। जैसे - आंखों की रोशनी चले जाना, ब्रेन हेमरेज, ट्यूमर का खतरा, घाव हो जाने पर ठीक होने में अधिक वक्ते लगता है। तो आइए जानते हैं डायबिटीज मरीज किस प्रकार की मिठाई खा सकते हैं जो उनकी सेहत के लिए अच्छी हो –
1.ड्राई फ्रूट्स मिठाई –
भारत देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। इस वजह से अब मिठाइयों में भी वैरायटी बढ़ गई है और शुगर फ्री की मिठाइयां आसानी से बाजारों में उपलब्ध हो जाती है। शुगर के मरीज ड्राई फ्रूट्स की मिठाइयां आराम से खा सकते हैं।
2.खीर –
जी हां, घर पर बनी कम शक्कार की खीर खाना नुकसानदायक नहीं है। अगर शक्कर से बिल्कुल परहेज तो उसमें शुगर फ्री डाल सकते हैं। हालांकि यह भी निर्भर करता है कि आपको शुगर जरा भी खाना है या नहीं। ऐसे में आप डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
3.अंजीर बर्फी –
अंजीर सेहत के लिए अच्छी होती है। अंजीर के सेवन से मधुमेह का रिस्क कम होता है। बर्फी में रिफाइंड शुगर नहीं होने पर यह आराम से खा सकते हैं। वहीं इसमें काजू, बादाम, शहद, घी पिस्ता मुख्य, रूप से होता है। इसे बच्चे और बूढ़े भी खा सकते हैं।
4. पुचके –
नाम सुनने में बड़ा अजीब लग रहा होगा। लेकिन यह हेल्दी भी होते हैं। यह रवे से बने होते हैं। उन्हें घी में तलकर बनाया जाता है इसके बाद दूसरी ओर चाशनी में डालते हैं। आप उन्हें जितनी देर चाशनी में रखेंगे वह उतने मीठे हो जाएंगे। इसे शुगर मरीज सिर्फ चाशनी में डालकर निकाल लें। जिससे वह बहुत ज्यादा मीठे नहीं होंगे।
5.रसगुल्ले –
जी हां, रसगुल्ले शुगर के मरीज भी खा सकते हैं। यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लैक्टोरएसिड और केसीन से भरपूर होते हैं। पूरी तरह से इसका रस निकालकर इसे आराम से खाया जा सकता है। रस निकालने के बाद यह जरा भी मीठा नहीं लगता है।
तो इस तरह डायबिटीज मरीज मिठाइयों से परहेज कर चुनिंदा स्वादिष्ट मिठाई खा सकते हैं। लेकिन एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
वेलिंगटन: न्यूजीलैंड में शुक्रवार को कोरोना विषाणु के डेल्टा वेरिएंट के 11 नए मामले सामने आने के बाद आंकलैंड में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन सभी मरीजों को पूरी एहतियात बरतते हुए आइसोलशन केन्द्रों में भेजा जा रहा है और इन 11 नए मामलों में वैलिंगटन से तीन केस हैं। वैलिंगटन के जिन तीन लोगों में कोरोना का पता चला है ये हाल ही में आकलैंड गए थे।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरोना की तीव्रता का पता लगाने के लिए आकलैंड में सीवरेज के पानी की जांच की थी और इस पानी तथा गंदगी में कोरोना विषाणु पाए गए हैं जो इस बात का प्रतीक है कि यहां के लोगों के शरीर में यह विषाणु मौजूद है।
आकलैंड में इस विषाणु का पहला मामला सामने आने के बाद न्यूजीलैंड में चौथे स्तर का लॉकडाउन प्रभावी हो गया है और लगातार स्थिति की समीक्षा की जा रही है।इस स्तर के लॉकडाउन में कार्यालय तथा स्कूल बंद कर दिए जाते हैं और सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति वाले सुपर बाजार , मेडिकल स्टोर तथा सर्विस स्टेशन खुले रहते हैं।
कढाई पनीर हो या चिकन इन सबका मजा तो सिर्फ तंदूर की रोटी के साथ ही आता है. लेकिन सवाल है कि क्या ये आपकी सेहत के लिए भी उतनी अच्छी हैं जितनी स्वाद में होती. हम आपको बताएंगे कि क्या तदूर की रोटी आपकी सेहत के लिए अच्छी है या नहीं, चलिए जानते हैं –
कैसे बनती है तंदूर की रोटी, जाने
तंदूर की रोटी में 110 से 150 कैलोरीज होती है, जिसमें से कार्बोहायड्रेट और कैलोरीज का सबसे ज्यादा प्रतिशत होता है. वहीं बता दे तंदूर रोटियां मैदा से बनाई जाती हैं मैदे के लगातार सेवन से कई बीमारियां हो जाती हैं.
डायबिटीज का जोखिम
तंदूर की रोटी में मैदा होती है और मैदा आपके शरीर के शुगर के स्तर को बढ़ता है. दरअसल इसमें बहुत अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए अगर आप मैदा का बार-बार सेवन करते है तो डायबिटीज हो सकती है.
ह्रदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है
मैदा से बनी तंदूर की रोटी खाने से ह्रदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में कोशिस करे कि तंदूर की रोटी का सेवन कम से कम किया जाएं. वहीं अगर आप तंदूर की रोटी खाने के इतने ही शौकीन हैं तो रोटी बनाने के लिए मैदे के बजाए आटे का इस्तेमाल करें. इसके अलावा इसे बनाने के लिए आप ओवन का भी इस्तेमाल करें.
मौसम में बदलाव होते ही कई लोग वायरल फीवर यानि मौसमी बुखार की चपेट में आ जाते हैं। यह बुखार कई तरह के संक्रमण की वजह से होता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर अटैक करता है जिसकी वजह से शरीर में इंफेक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है। हालांकि कुछ चीजों का सेवन आपको इस समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताते हैं।
धनिये की चाय का करें सेवन
वायरल फीवर से राहत दिलाने में धनिये की चाय का सेवन काफी हद तक कारगर हो सकता है। धनिये के बीज एंटीबायोटिक्स के साथ-साथ कई विटामिन्स से समृद्ध होते हैं जो वायरल संक्रमण से लडऩे की शक्ति देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं। राहत के लिए एक गिलास पानी में एक बड़ी चम्मच धनिये के बीज डालकर इसे उबाल लें। अब इसे छानकर इसमें स्वादानुसार शहद मिलाएं और फिर इसका सेवन करें।
तुलसी का काढ़ा पीएं
तुलसी के पत्ते भी प्रभावी ढंग से वायरल फीवर से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। समस्या से राहत पाने के लिए आधी चम्मच लौंग के पाउडर को करीब 20 साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें और फिर छानकर इसका सेवन करें। वायरल फीवर होने पर इस काढ़े का हर दो या तीन घंटे पर सेवन करें। यकीनन इससे आपको काफी आराम मिलेगा।
लहसुन का करें सेवन
लहसुन एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है जो धीरे-धीरे वायरल फीवर को खत्म करने का काम करते हैं। इसके साथ ही ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने में भी मदद करते हैं। राहत के लिए एक कप पानी में लहसुन की बारीक कटे हुई दो-तीन कलियां डालें और कुछ मिनट तक पानी को उबलने दें। अब पानी को छान लें और हल्का ठंडा होने पर चाय की तरह पीएं।
हल्दी और सौंठ का पाउडर आएगा काम
हल्दी और सौंठ, दोनों में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो वायरल फीवर को जल्द दूर करने में मदद कर सकते हैं। समस्या से राहत पाने के लिए पहले एक कप गर्म पानी में एक चुटकी काली मिर्च, आधी छोटी चम्मच हल्दी का पाउडर, एक छोटी चम्मच सौंठ और थोड़ी सी चीनी मिलाएं और फिर इसे हल्का सा ठंडा करके पीएं। यकीनन वायरल फीवर से ग्रस्त व्यक्ति को इसके सेवन से काफी आराम मिलेगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की Just36News पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
गुस्सा आना आम बात है क्योंकि यह एक भावनात्मक प्रवृत्ति है। हालांकि अगर आपको छोटी-छोटी बातों पर ही गुस्सा आने लगे तो इसे आम समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि इससे आपके व्यक्तित्व और सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर आपको यह समस्या है तो आप गुस्से को काबू में रखने के लिए योग का सहारा ले सकते हैं। आइए आज आपको कुछ ऐसे योगासनों के अभ्यास का तरीका बताते हैं जो गुस्से को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
अर्ध धनुरासन
सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए पीठ के पीछे ले जाएं और फिर इसकी एड़ी को बाएं हाथ से पकड़कर ऊपर उठाएं। इस दौरान अपने दाएं हाथ को जमीन पर रखें। अपनी क्षमतानुसार इस मुद्रा में बने रहें और धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें। फिर कुछ सेकेंड बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाएं। अब इसी प्रक्रिया को अपने दूसरे पैर से भी दोहराएं।
सर्वांगासन
सर्वांगासन का अभ्यास करने के लिए पहले योगा मैट पर पीठ के बल लेटकर दोनों हाथों को शरीर से सटाकर सीधा कर लें। अब सामान्य रूप से सांस लेते हुए पैरों, कूल्हों और कमर को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद हाथों से पीठ को सहारा देते हुए कोहनियों को जमीन से सटा लें। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे वापस अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
सुखासन
सुखासन के लिए पहले योगा मैट पर पैरों को सीधा करके बैठें। अब बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर की जांघ के नीचे रखें। इसके बाद दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर की जांघ के नीचे रखें। अब दोनों हाथों को ध्यान मुद्रा में घुटनों पर रखें और अपनी दोनों आंखों को बंद करें। इस दौरान अपने शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें। कुछ सेकेंड इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे आंखें खोलकर आसन को छोड़ दें।
बालासन
बालासन के अभ्यास के लिए पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें और फिर गहरी सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं। अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन से सटाएं। इस अवस्था में दोनों हाथ सामने, माथा जमीन से टिका हुआ और छाती जांघों पर रहेगी। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहकर सामान्य रूप से सांस लेते रहें और फिर सांस लेते हुए वापस वज्रासन की मुद्रा में आएं और सामान्य हो जाएं।
हम अक्सर विशेष अवसरों पर पूरी और पकोड़े खाना पसंद करते हैं. लेकिन सभी स्वादिष्ट और कुरकुरी तली हुई चीजों को फेंटने से खाद्य तेल की बर्बादी हो सकती है. इसलिए हम कभी-कभी खाना पकाने के लिए इसका दोबारा उपयोग करने के लिए भी ललचाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब इसे बार-बार इस्तेमाल करते हैं तो क्या होता है.
स्टडीज के अनुसार खाना पकाने के तेल को दोबारा गर्म करने से टॉक्सिक पदार्थ निकलते हैं और शरीर में फ्री रेडिकल्स भी बढ़ जाते हैं जिससे सूजन और विभिन्न क्रोनिक डिजीज होती हैं. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्ट ऑफ इंडिया( FSSAI) की गाइडलाइंस के मुताबिक तेल को फिर से गर्म करने से बचना चाहिए और यदि आपको तेल का दोबारा उपयोग करना है, तो ट्रांस-फैट के फॉर्मेशन बचने के लिए अधिकतम तीन बार ऐसा कर सकते हैं.
टॉक्सिक पदार्थ रिलीज होते हैं और दुर्गंध आती है
हाई टेम्परेचर पर गर्म किया गया तेल टॉक्सिक फ्यूम्ज रिलीज करता है. हर बार जब तेल गरम किया जाता है, तो उसके वसा अणु थोड़ा टूट जाते हैं. इससे यह अपने स्मॉक पॉइंट तक पहुंच जाता है और हर बार उपयोग किए जाने पर अधिक तेजी से दुर्गंध छोड़ता है. जब ऐसा होता है, तो अनहेल्दी पदार्थ हवा और पकाए जा रहे भोजन दोनों में रिलीज होते हैं.
कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ाता है
हाई टेम्परेचर पर तेल में मौजूद कुछ फैट्स, ट्रांस फैट्स में बदल जाते हैं. ट्रांस फैट हानिकारक फैट होते हैं जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं. जब तेल का दोबारा उपयोग किया जाता है तो ट्रांस फैट की मात्रा और भी अधिक हो जाती है.
ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका
खाद्य पदार्थों में निहित नमी, वायुमंडलीय ऑक्सीजन, उच्च तापमान हाइड्रोलिसिस, ऑक्सीकरण और पोलीमराइजेशन जैसी रिएक्शन प्रोड्यूस करते हैं, ये रिएक्शन उपयोग किए गए फ्राइंग ऑइन की रासायनिक संरचना को बदलती हैं और संशोधित करती हैं. फ्री फैटी एसिड और रेडिकल रिलीज करती हैं जो मोनोग्लिसराइड्स, डाइग्लिसराइड्स और ट्राइग्लिसराइड्स प्रोड्यूस करते हैं.
इन्हें टोटल पोलर कंपाउंड्स के अंडर वर्गीकृत किया गया है जो कुकिंग ऑयल के डिग्रेशन को मापने के लिए एक विश्वसनीय बेंचमार्क है. बार-बार तलने के बाद बनने वाले इन यौगिकों की टॉक्सिसिटी लिपिड डिपोजिशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, हाईपरटेंशन, एथेरोस्क्लेरोसिस आदि का कारण बन सकती है.
कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर अगल - अलग रिसर्च जारी है। कोविड के लक्षण भी एक समान नहीं है। कोरोना वायरस के शुरूआती लक्षण कॉमन कोल्डग की तरह थे। लेकिन कई बार लक्षण नजर नहीं आने पर कोविड रिपोर्ट फिर भी पॉजिटिव आई है। हाल ही में एक स्ट डी में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों के आंसुओं (Covid-19 by Tears)से भी हो सकता है। यह शोध अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज द्वारा किया गया है। इस दौरान करीब 120 लोगों पर नजर रखी गई है। हालांकि विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविड सांस के जरिए ही होता है।
120 मरीजों पर किए गए शोध में सामने आया कि 60 मरीजों के आंसुओं के जरिए वायरस शरीर के दूसरे हिस्सेग में भी पहुंचा है। लेकिन 60 मरीजों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसमें 37 फीसदी मरीजों में कोविड -19 संक्रमण पाया गया था और 63 फीसदी मरीजों में कोविड के गंभीर लक्षण थे।
हालांकि कोरोना वायरस का प्रकोप कम नहीं हुआ है। वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं द्वारा अगस्तक या सितंबर माह में तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है। वहीं देखा जाए तो जनता भी कोविड-19 के नियमों का उल्लंजघन करते नजर आ रही है। जनता बाजारों में बिना मास्कर और सोशल डिस्टेंीसिंग के घूम रहीहैं। यह हाल देखते हुए वैज्ञानिकों का दावा है कि तीसरी लहर जल्दीऔ भी आ सकती है। साथ ही उसे किसी भी प्रकार से टाला नहीं जा सकता।
वेट लॉस करना एक ऐसी चुनौती है जिसे पार करना इतना आसान नहीं है। डाइट, वर्कआउट और आपकी कई छोटी-छोटी आदतें वजन कम करने में काम आती है। जैसे बात करें अगर चाय की, तो चाय का भी वजन कम करने या बढ़ाने में अहम रोल है। आज हम आपको बता रहे हैं। ऐसी पांच चाय जिनके सेवन से बेली फैट तेजी से कम होता है।
पुएर चाय
यह चाय एक प्रकार की चाइनीज काली चाय है, जिसे फर्मेटेड किया गया है। भोजन के बाद अक्सर इसका आनंद लिया जाता है, और इसमें एक सुगंध होती है। पुएर चाय ब्लड शुगर और रक्त ट्राइग्लिसराइड्स को कम कर सकती है। इससे बेली फैट तेजी से कम होता है।
ग्रीन-टी
ग्रीन-टी वजन घटाने के लिए सबसे ज्यादा कारगर है और इसे कई स्वास्थ्य लाभों के साथ जोड़ा जाता है। यह वजन घटाने के साथ स्किन के लिए भी काफी इफेक्टिव चाय मानी जाती है। ग्रीन-टी में वजन और शरीर की चर्बी दोनों को कम करने के लिए की गजब की क्वालिटी होती है।
ब्लैक टी
काली चाय में दूसरी चाय से ज्यादा ऑक्सीकरण होता है, जैसे कि ग्रीन, सफेद या ऊलोंग चाय। ऑक्सीकरण एक रासायनिक प्रतिक्रिया है, जो तब होती है जब चाय की पत्तियां हवा के संपर्क में आती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ब्राउनिंग होती है जो काली चाय की विशेषता गहरे रंग का कारण बनती है। काली चाय के कई अलग-अलग प्रकार और मिश्रण उपलब्ध हैं, जिनमें अर्ल ग्रे और अंग्रेजी ब्रेकफास्ट जैसी लोकप्रिय किस्में शामिल हैं।
ऊलोंग चाय
ऊलोंग चाय एक ट्रेडिशनल चाइनीज चाय है, जिसे आंशिक रूप से ऑक्सीकरण किया गया है, इसे ऑक्सीकरण और रंग के मामले में ग्रीन-टी और काली चाय के बीच कहीं रखा गया है। यह अक्सर फल, सुगंधित सुगंध और एक अद्वितीय स्वाद के लिए जानी जाती है कई अध्ययनों से पता चला है कि ऊलोंग चाय फैट बर्न में मेटाबॉलिज्म के लिए बहुत अच्छी है।
हर्बल चाय
हर्बल चाय में गर्म पानी में जड़ी बूटियों, मसालों और फलों के एक्सट्रेंक शामिल होते हैं। वे ट्रेडिशनल चाय से भिन्न होते हैं क्योंकि उनमें आमतौर पर कैफीन नहीं होता है और कैमेलिया साइनेंसिस की पत्तियों से नहीं बनता है। हर्बल चाय किस्मों में रूइबोस चाय, अदरक की चाय, गुलाब की चाय और हिबिस्कस चाय शामिल हैं। हालांकि, हर्बल चाय की सामग्री और संरचना में काफी भिन्नता हो सकती है, लेकिन कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि हर्बल चाय वजन घटाने और वसा घटाने में मदद कर सकती है।


















