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खानपान संबंधी ये 7 गलत आदतें हो सकती हैं पेट फूलने या ब्लोंटिंग के लिए जिम्मे दार

खानपान संबंधी ये 7 गलत आदतें हो सकती हैं पेट फूलने या ब्लोंटिंग के लिए जिम्मे दार

पेट में फंसी हुई गैस आपको कितना परेशान कर सकती है, इसका अनुभव वही कर सकता है, जिसने इसका सामना किया होता है। कभी-कभी आप सोचती होंगी कि क्यों आखिर ये बार-बार हो जाती है। लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम के इन दिनों में तो और भी ज्यादा। हम खानपान संबंधी उन सात आदतों की ओर आपका ध्याोन दिलवाने जा रहे हैं, जो पेट फूलने या ब्लोटिंग के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

पेट फूलने या ब्लोूटिंग के लिए जिम्मेदार 7 कारण

1 लंबे समय तक भूखे रहना
लंबे समय तक भूखे रहना भी ब्लोाटिंग या पेट फूलने का कारण बन सकता है। काफी समय से भोजन न लेने के कारण पेट में बना अम्ल बहुत सक्रिय हो जाता है। जो हमारे पेट की दीवारों को क्षति पहुंचाता है और हमारा पेट फूलने लगता है। इसलिए जरूरी है कि हर तीन घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें।
2 शारीरिक निष्क्रियता
खाना खाने के साथ जरूरी होता है उसका पचना। अगर आप भोजन को पचाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं तो ये आपके पाचन तंत्र और अन्य अंगों के लिए अच्छा नहीं है। शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहने या एक ही जगह बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म घटता है। जिससे आपका वजन भी बढ़ता है और पाचन संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। इसलिए खाने के बाद वॉक करें।
3 गरिष्ठ और तेज मसाले का भोजन
अधिक तैलीय और मसाले युक्त भोजन आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह के भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स अधिक मात्रा में होती है, जिस कारण आपको गैस और पेट फूलने जैसी समस्या होती है। ऐसा आहार लेने से आपको लंबे समय तक तनाव और डिप्रेशन हो सकता है।
भोजन का सेवन करने पर आपके आमाशय यानी पेट में एक अम्ल बनता है, जो आपके भोजन को पचाने का काम करता है। ये अम्ल भोजन को छोटे-छोटे टुकड़े में तोड़ता है, जिससे हमारे पेट में गैस बनती है। इसके अलावा चना, चने की दाल, बीन्स, बेसन से बने फूड्स, मैदा, राजमा, छोले आदि के सेवन से भी पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो जाती है। इसलिए ज्यादा तैलीय और मसाले युक्त भोजन का सेवन न करें।
4 ओवरईटिंग
ओवरईटिंग से बचें क्योंकि ज्यादा आहार लेने के कारण आपका पेट ज्यादा भोजन पचा नहीं पाता है। जिससे आपको पेट फूलने या ब्लोटिंग जैसी समस्या होती है। इसलिए खाने के लिए एक छोटी प्लेट चुनें। इसके अलावा, खाते समय धीमे-धीमे खाएं इससे शरीर को भोजन पचाने में आसानी होती है।
5 डिब्बाबंद खाने से
पैकेज्ड फूड एक सुविधाजनक स्नैक है, जिसे आप आसानी से कभी भी खा सकती हैं। पर क्या आप जानती हैं कि ये आपके शरीर के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। डिब्बाबंद भोजन में सोडियम उच्च मात्रा में होता है। जो कुछ लोगों में पेट की सूजन पैदा करने लगता है। जिससे पेट फूलने जैसी समस्या बनी रहती है, जहां तक संभव हो घर का बना ताजा खाना खाएं।

6 सोडा या कार्बोनेटेड ड्रिंक
कार्बोनेटेड पेय, जैसे सोडा या स्पार्कलिंग पानी, सूजन का एक सामान्य कारण हो सकता है। सोडा आपके पेट में गैस बनाता है, जिससे सूजन, डकार और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। कोशिश करें कि कम से कम सोडा लें। आप इसकी जगह खीरा या नींबू पानी पी सकती हैं।

7 देर रात खाना
आयुर्वेद के मुताबिक सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक रात का भोजन कर लेना चाहिए। मगर मौजूदा लाइफस्टा इल में हमारे डिनर का टाइम बिल्कुतल बदल गया है। जबकि देर रात खाना खाना पाचन तंत्र पर असर डालता है। जिससे पेट में गैस और भारीपन की समस्या होती है। दरअसल जब भी आप रात में देर से खाना खाते हैं और उसके बाद सो जाते हैं तो वो खाना पचता नहीं है। ये बिना पचा हुआ खाना गैस, पेट दर्द और कब्ज का कारण बनता है। इसलिए कोशिश करें खाना सूर्यास्त के बाद ही खा लें।

पेट संबंधी अन्यस समस्याओं को भी जन्म देता है बार-बार पेट फूलना
• इससे पेट में पानी भर सकता है और पेट में ट्यूमर भी हो सकता है।
• सीलिएक रोग ये ग्लूटेन युक्त खाद्य के सेवन से पैदा होने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी समस्या, जिसमें छोटी आंत में सूजन या क्षति पैदा होती है।
• डंपिंग सिंड्रोम ये पेट से जुड़ी सर्जरी के कारण पैदा होने वाली समस्या है, जिसमें भोजन पेट के पहले भाग से तेजी से गुजरने लगता है। इसके कारण ओवेरियन (अंडाशय) कैंसर हो सकता है।
• गैस्ट्रोएसोफेगल रिफलक्स डिजीज इसमें पाचन संबंधी विकार जिसमें पेट में मौजूद एसिडिक जूस गले में आ जाता है।
• इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम ये आंतों से संबंधित विकार है जिसमें पेट में दर्द, ऐठन, गैस के साथ-साथ दस्त और कब्ज की समस्या भी देखी जा सकती है।
• लैक्टोज इंटॉलरेंस यानी दूध और अन्य सामग्रियों को पचाने में परेशानी होती है।
• छोटी आंत के बैक्टीरिया का अधिक बढ़ना, बहुत अधिक खाना और अधिक वजन बढ़ना।

लेडीज, सही पोषण युक्त आहार जहां आपको लंबे समय तक स्वस्थ रखता है, वहीं खानपान की ये गलत आदतें आपको पेट के गंभीर रोग भी दे सकती हैं। इसलिए इनसे बचें और हेल्दी रहें।


 

निमोनिया पीड़ित बच्चों के लिए वरदान है पीसीवी वैक्सीन : डॉ.मीरा बघेल

निमोनिया पीड़ित बच्चों के लिए वरदान है पीसीवी वैक्सीन : डॉ.मीरा बघेल

रायपुर । प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों समेत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मंगलवार से बच्चों को निमोनिया सहित 13 जानलेवा इंफेक्शन से बचाने के लियें पीवीसी यानी न्यूमोकोकल कंज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) कार्यक्रम पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा और इसकी शुरुआत रायपुर जिले में भी की गई है। पीसीवी टीकाकरण कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने किया। न्यूमोकोकल कंज्यूगेट टीकाकरण निमोनिया पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत पहले पांच राज्यों में की गई थी। अब इसे यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम में शामिल कर देश भर में चलाया जा रहा है।
वर्चुअल उद्घाटन में डॉ.आलोक शुक्ला पीएस,डॉ.प्रियंका शुक्ला एमडी (एनएचएम) और राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अमर सिंह ठाकुर उपस्थित रहे । वर्चुअल उद्घाटन के तहत राज्य के समस्त ज़िलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी उपस्थित थे । इसी कड़ी में जिला रायपुर के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खो-खो पारा से न्यूमोकोकल कंज्यूगेट वैक्सीन की शुरुआत की गई इस अवसर पर डॉ. मीरा बघेल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर, डॉ आशीष वर्मा जिला टीकाकरण अधिकारी, डब्ल्यूएचओ से सर्विलेंस मेडिकल ऑफिसर डॉ.नितिन पाटील, ब्रह्मानंद शुक्ला डब्ल्यूएचओ (आरआरटी) कंसलटेंट, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खो-खो पारा के डॉ.पंकज नागरची, डॉ. पी.लाल, डॉ. राहुल अग्रवाल, एनएचएम से अंशुल थुदगर एवं स्वतंत्र रहंगडाले शहरी कार्यक्रम प्रबंधक, निशामणी साहू डिस्ट्रिक्ट डाटा मैनेजर, कोल्ड चैन हैंडलर दुर्गा साहू,मीडिया प्रभारी गजेंद्र डोंगरे उपस्थित रहे ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने बताया: ”बच्चों को निमोनिया से भी सुरक्षित रखने का प्रयास जिले में तेजी से शुरू हो गया है। इसी कड़ी में निमोनिया से बचाव के लिए जिले में टीका के लियें पात्र समस्त बच्चों का पीसीवी टीकाकरण किया जाएगा। इस वैक्सीन का डोज जिले के समस्त शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों में निशुल्क दिया जाऐगा। निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन क्रमशः छह और 14 सप्ताह उम्र के बच्चों को दिया जाऐगा। इसके अलावा 9 माह उम्र के बच्चों को बूस्टर डोज दिया जाऐगा।“
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्मा कहते है `पीसीवी वैक्सीन का टीकाकरण बच्चों को न्यूमोकोकल निमोनिया से बचाने और विटामिन-ए बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए और आंखों की रोशनी तेज करने के लिए दिया जाता है। न्यूमोकोकल बैक्टेरिया से होने वाले निमोनिया और अन्य बीमारियां जैसे दिमागी बुखार से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है। इसका विस्तार कोविड-19 के कठिन दौर में किया जा रहा है। जो बच्चों को सुरक्षित रखने में सहायक होगी। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण निमोनिया है। पीसीवी वैक्सीन इस बीमारी से होने वाली मृत्यु दर को कम करेगी।’
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. आशीष वर्मा ने बताया: “जीवन रक्षक टीका बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ ही निमोनिया के कारण होने वाले अस्पतालऔर दवाओं के खर्चों को भी कम करेगा। ज़िले में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खो-खो पारा रायपुर पर सीएमएचओं डॉ.मीरा बघेल की उपस्थिति में पीसीवी वैक्सीन के टीके का शुभारंभ किया गया । इस अवसर पर उन्होंने कहा `न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर,कान का इन्फेक्शन व साइनुसाइटिस से बचाव के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन (पीसीवी वैक्सीन ) पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है। निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर,कान का इन्फेक्शन और साइनुसाइटिस की वजह से देश में हर वर्ष लगभग 15 फीसदी बच्चों की मौत हो जाती है, लेकिन पीसीवी टीकाकरण के माध्यम से बच्चों की निमोनिया से होने वाली इस मृत्यु दर पर अब काफी हद तक कम किया जा सकता है। अब पीसीवी टीकाकरण को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम में शामिल किया जा चुका है।`
पीसीवी टीका प्रदेश भर के पात्र बच्चों को निशुल्क लगाया जाएगा। एक वर्ष में जिले के लगभग 60,000 पात्र बच्चों के पीसीवी टीकाकरण का लक्ष्य में रखा गया है। हर सप्ताह मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित किए जाने वाले नियमित टीकाकरण सत्र में जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में पात्र बच्चों का पीसीवी टीकाकरण निशुल्क किया जाएगा।
 

 सबसे पहले भारत में लॉन्‍च होगा नोवावैक्‍स का टीका!, 90 फीसदी से ज्‍यादा असरदार, स्‍टोरेज में आसान

सबसे पहले भारत में लॉन्‍च होगा नोवावैक्‍स का टीका!, 90 फीसदी से ज्‍यादा असरदार, स्‍टोरेज में आसान

नई दिल्ली। काेरोना के खिलाफ जारी जंग में भारत के हाथ मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। देश काे बहुत जल्द एक और वैक्सीन मिलने जा रही है, जिसमें नाम है नोवावैक्स । माना जा रहा है नोवावैक्स  अमेरिका से पहले भारत में लॉन्ची कर दी जाएगी। देश में अभी तीन वैक्सीन उपलब्ध हैं, जिसमें दो मेड इन इंडिया कोविशील्ड और कोवैक्सीन है और तीसरी रूस की स्पुतनिक-V है।

20 करोड़ डोज उपलब्ध होेने की उम्मीद
कोरोना वैक्सीरन का उत्पानदन कर रही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) नोवावैक्सू की मैनुफैक्चकरिंग पार्टनर होगी। भारत आने पर इसका नाम `कोवावैक्सं` होगा। फिलहाल SII इस वैक्सीकन का 18 साल से ज्या दा उम्र के लोगों पर ट्रायल कर रही है। ऐसे में उम्मीद है कि नोवावैक्सक की वैक्सीनन को सबसे पहले भारत में इमर्जेंसी अप्रूवल मिल सकता है। भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर से दिसंबर महीने तक नोवावैक्स के 20 करोड़ डोज उपलब्ध हो सकते हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है।

कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी नोवावैक्स
वहीं नोवावैक्स ने दावा किया है कि उसका टीका कोविड-19 के खिलाफ अत्याधिक प्रभावी है और यह वायरस के सभी स्वरूपों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। कंपनी ने कहा कि टीका कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी असरदार है और शुरुआती आंकड़ें बताते हैं कि यह सुरक्षित है। हालांकि अमेरिका में कोविड-19 रोधी टीकों की मांग में कमी आई है, लेकिन दुनिया भर में अधिक टीकों की जरूरत बनी हुई है।

एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का होगा उत्पादन
नोवावैक्स टीके को रखना और ले जाने आसान है और उम्मीद की जा रही है कि यह विकासशील देशों में टीके की आपूर्ति को बढ़ाने में अहम किरदार निभाएगा। कंपनी ने कहा कि उसकी योजना सितंबर अंत तक अमेरिका, यूरोप और अन्य जगहों पर टीके के इस्तेमाल के लिए मंजूरी लेने की है और तबतक वह एक महीने में 10 करोड़ खुराकों का उत्पादन करने में सक्षम होगी।
 
नए प्रकार का मास्क तैयार,जो वायरस के संपर्क में आने पर करता है... जानिए थिंकर टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित इस मास्क के बारे में

नए प्रकार का मास्क तैयार,जो वायरस के संपर्क में आने पर करता है... जानिए थिंकर टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित इस मास्क के बारे में

3डी प्रिंटिंग और फार्मास्यूटिकल्स के एकीकरण से एक नए प्रकार का मास्क तैयार हुआ है जो संपर्क में आने पर वायरस पर हमला करता है। पुणे स्थित स्टार्ट-अप फर्म थिंकर टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित, ये मास्क एंटी-वायरल एजेंटों से लेप किए हुए होते हैं जिन्हें आमतौर पर “वायरुसाइड्स” के रूप में जाना जाता है।यह विषाणुनाशक मास्क परियोजना कोविड-19 के खिलाफ सरकार की लड़ाई के रूप में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक वैधानिक निकाय, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा व्यावसायीकरण के लिए चुनी गई शुरुआती परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना को मई 2020 में कोविड-19 से लड़ने के लिए नवोन्मेषी समाधानों की खोज के रूप में बोर्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इसके बाद, मास्क विकसित करने के लिए 8 जुलाई, 2020 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। वर्ष 2016 में बनी इस फर्म का दावा है कि ये लागत प्रभावी मास्क सामान्य N95, 3-प्लाई और कपड़े के मास्कों की तुलना में कोविड-19 के प्रसार को रोकने में अधिक प्रभावी हैं।
उच्च गुणवत्ता वाले अधिक प्रभावी मास्क की आवश्यकता की पूर्ति

थिंकर टेक्नोलॉजीज इंडिया नए फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन और विभिन्न दवाओं के ड्रग-लोडेड फिलामेंट्स की खोज के लिए फ्यूज्ड डिपोजिशन मॉडलिंग (एफडीएम) 3 डी-प्रिंटर के विकास पर काम करती है। इसके संस्थापक निदेशक डॉ. शीतलकुमार ज़म्बद बताते हैं: “हमने महामारी के शुरुआती दिनों में ही समस्या और उसके संभावित समाधानों के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। हमने महसूस किया कि संक्रमण को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में फेस मास्क का उपयोग लगभग विश्वव्यापी हो जाएगा। लेकिन हमने महसूस किया कि ज्यादातर मास्क जो तब उपलब्ध थे और आम लोगों की पहुंच में थे, वे घर के बने थे और अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले थे। उच्च गुणवत्ता वाले मास्क की आवश्यकता है यही मान कर हमने संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए एक बेहतर दृष्टिकोण के रूप में लागत प्रभावी और अधिक कुशल विषाणुनाशक लेप वाले मास्क को विकसित करने यथा उसके और व्यावसायिक विपणन करने के लिए एक परियोजना शुरू करना तय किया।

विकास यात्रा

इसी उद्देश्य के साथ, थिंकर टेक्नोलॉजीज ने विषाणुनाशक कोटिंग फॉर्मूलेशन विकसित करने पर काम करना शुरू किया। इसे नेरुल स्थित मर्क लाइफ साइंसेज के सहयोग से विकसित किया गया जिसकी अनुसंधान सुविधा का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया गया। कोटिंग फॉर्मूलेशन का उपयोग कपड़े की परत पर दवा का लेप करने के लिए किया गया और 3डी प्रिंटिंग सिद्धांत को कोटिंग की एकरूपता प्राप्त करने के लिए काम में लिया गया। लेप की हुई परत को फिर से काम में लिए जा सकने वाले फिल्टर के साथ N-95 मास्क, 3-प्लाई मास्क, साधारण कपड़े के मास्क, 3डीप्रिंटेड या अन्य प्लास्टिक कवर मास्क में एक अतिरिक्त परत के रूप में शामिल किया जा सकता है। इस प्रकार ये मास्क फिल्टर तंत्र द्वारा प्राप्त सुरक्षा से आगे जाकर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। कोटिंग के परीक्षण में पाया गया है कि यह सार्स-कोव-2 वायरस को निष्क्रिय कर देता है। मास्क पर कोटिंग के लिए प्रयुक्त सामग्री सोडियम ओलेफिन सल्फोनेट आधारित मिश्रण है। यह हाइड्रोफिलिक और हाइड्रोफोबिक गुणों वाला साबुन बनाने वाला एजेंट है। छाए हुए विषाणुओं के संपर्क में आने पर यह विषाणु की बाहरी झिल्ली को तोड़ देता है। इसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री कमरे के तापमान पर स्थिर होती है और सौंदर्य प्रसाधनों में व्यापक रूप से उपयोग में लाई जाती है। मास्क में फिर से प्रयोग में लाये जा सकने वाले फिल्टर भी 3डी प्रिंटिंग का उपयोग करके विकसित किए गए हैं। इसके अलावा डॉ ज़ंबद का कहना है कि मास्क में बैक्टीरिया को फिल्टर कर देने की क्षमता 95% से अधिक पाई गई है। "इस परियोजना मेंपहली बारहमने प्लास्टिक-मोल्डेड या 3 डी-प्रिंटेड मास्क कवर के लिए सटीक रूप से फिट होने के लिए बहुपरत वाले क्लॉथ फिल्टर बनाने के लिए 3 डी-प्रिंटर का उपयोग किया"। थिंकर टेक्नोलॉजीज इंडिया प्रा. लिमिटेड ने इस उत्पाद के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। डॉ ज़ंबद बताते हैं कि इसका वाणिज्यिक पैमाने पर उत्पादन भी शुरू हो गया है। इस बीच एक एनजीओ ने नंदुरबार, नासिक और बेंगलुरु के चार सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के उपयोग के लिए और बेंगलुरु में एक लड़कियों के स्कूल और कॉलेज में ऐसे 6,000 वायरुसाइड मास्क का वितरण किया हैं।

पिछले 24 घंटे में 70,421 नये मामले दर्ज किए गए, यह संख्या 74 दिनों के बाद सबसे कम, पढ़े पूरी खबर

पिछले 24 घंटे में 70,421 नये मामले दर्ज किए गए, यह संख्या 74 दिनों के बाद सबसे कम, पढ़े पूरी खबर

भारत में दैनिक नये मामलों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटे में देश में 70,421 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए। लगातार सातवें दिन देश में कोविड-19 के नये मामलों की संख्या एक लाख से कम दर्ज की गयी। यह केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से किए जा रहे सतत प्रयासों का नतीजा है। भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या लगातार घट रही है। सक्रिय मामलों की संख्या गिरकर आज 9,73,158 हो गयी। सक्रिय मामलों की संख्या 66 दिनों के बाद 10 लाख से कम हुई है। पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों की संख्या में कुल 53,001 की कमी आयी है। यह अब देश के कुल कोविड पॉजिटिव मामलों का केवल 3.30 प्रतिशत है। साथ ही ज्यादा लोगों के कोविड-19 संक्रमण से स्वस्थ होने के साथ लगातार 32वें दिन बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की दैनिक संख्या कोविड-19 के दैनिक नए मामलों से ज्यादा है। पिछले 24 घंटे में बीमारी से 1,19,501 लोग स्वस्थ हुए हैं।
पिछले 24 घंटे में दैनिक नये मामलों की तुलना में बीमारी से करीब 50,000 (49,080) ज्यादा लोग स्वस्थ हुए हैं। भारत में महामारी के शुरू होने के बाद से पहले ही कुल 2,81,62,947 लोगों में कोविड-19 ठीक हो चुका है और पिछले 24 घंटे में बीमारी से कुल 1,19,501 लोग स्वस्थ हुए हैं। बीमारी से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर भी बेहतर होकर 95.43 प्रतिशत हो गयी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में पिछले 24 घंटे में कुल 14,92,152 जांच हुई जिसके साथ अब तक हुए जांच की कुल संख्या करीब 38 करोड़ (37,96,24,626) है। जहां एक तरफ पूरे देश में कोविड की जांच बढ़ गयी है, वहीं दूसरी तरफ साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट भी लगातार घट रहा है। साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 4.54 प्रतिशत है जबकि दैनिक पॉजिटिविटी रेट आज 4.72 प्रतिशत हो गया। यह लगातार 21 दिनों से 10 प्रतिशत से कम बना हुआ है। अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह सात बजे तक 35,32,375 सत्रों में देश में कोविड-19 के टीके की कुल 25,48,49,301 खुराक दी जा चुकी हैं।

एक नज़र आज के :  कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

एक नज़र आज के : कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशोंको टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांचबीमारी का पता लगानेउपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहतहर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50% खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले से किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशोंको कोविड टीके की 26.68 करोड़ से अधिक खुराक (26,68,36,620) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 25,27,66,396 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

 

 

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.40 करोड़ से ज्यादा (1,40,70,224) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की96,490से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशोंको प्रदान कर दी जाएंगी। 

14 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

14 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 9,73,158 हुए

सक्रिय मामलों की संख्या 66 दिनों के बाद 10 लाख से कम हुई

पिछले 24 घंटे में 70,421 नये मामले दर्ज किए गएयह संख्या 74 दिनों के बाद सबसे कम

देश में अब तक कुल 2,81,62,947 लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में 1,19,501 लोग कोविड-19 से उबरे

लगातार 32वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 95.43 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट गिरकर पांच प्रतिशत से कम हुआइस समय 4.54 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.72 प्रतिशतलगातार 21वें दिन 10 प्रतिशत से कम

 

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि– अब तक कुल 37.96 करोड़ जांच की गयी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 25.48 करोड़ खुराक दी गयीं 

कोरोना से बचाएगा खास अलार्म, 15 मिनट में होगी संक्रमित व्यक्ति की पहचान

कोरोना से बचाएगा खास अलार्म, 15 मिनट में होगी संक्रमित व्यक्ति की पहचान

कोरोनावायरस महामारी के बीच वैज्ञानिक नई-नई खोज में लगे हुए हैं। इस बीच ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसा सीलिंग-माउंटेड कोविड 'अलार्म' बनाया है, जो किसी कमरे में मौजूद कोरोना संक्रमित व्यक्ति का पता सिर्फ 15 मिनट में लगा सकता है।
द संडे टाइम्स की एक खबर के मुताबिक कोरोना संक्रमितों की जानकारी देने वाले इस अत्यधिक सटीक उपकरण को आने वाले समय में विमान के कैबिनों, कक्षाओं में उपयोग किया जाएगा।


14 जून: World Blood Donation Day, जानिए महत्व एवं 13 रोचक बातें

14 जून: World Blood Donation Day, जानिए महत्व एवं 13 रोचक बातें

हर साल 14 जून को विश्व रक्त दान दिवस मनाया जाता है। कई लोग स्वस्थ होते हुए भी रक्त दान करने से डरते हैं, क्योंकि उनके मन में इससे जुड़ीं कई भ्रांतियां होती हैं। खून के अभाव में कई लोगों को जान चली जाती है। ऐसा किसी के भी साथ न हो, इसीलिए 14 जून को रक्त दान दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य रक्त दान को प्रोत्साहन देना एवं उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। रक्त दान को महादान भी कहा जाता है। अत: हमें इस दिन रक्त दान करके लोगों की जिंदगी बचाने का संकल्प लेना चाहिए।

आइए हम आपको बता रहे हैं रक्त दान यानी ब्लड डोनेशन से जुड़े 13 रोचक तथ्य-

1. रक्त दान करते हुए डोनर के शरीर से केवल 1 यूनिट रक्त ही लिया जाता है।

2. एक औसत व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिट यानी (5-6 लीटर) रक्त होता है।

3. कई बार केवल एक कार एक्सीडेंट (दुर्घटना) में ही, चोटील व्यक्ति को 100 यूनिट तक के रक्त की जरूरत पड़ जाती है।

4. एक बार रक्त दान से आप 3 लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।

5. भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप 'O नेगेटिव' है।

6. 'O नेगेटिव' ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर कहलाता है, इसे किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को दिया जा सकता है।

7. इमरजेंसी के समय जैसे जब किसी नवजात बालक या अन्य को खून की आवश्यकता हो और उसका ब्लड ग्रुप ना पता हो, तब उसे 'O नेगेटिव' ब्लड दिया जा सकता है।

8. ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया काफी सरल होती है और रक्त दाता को आमतौर पर इसमें कोई तकलीफ नहीं होती हैं।

9. कोई व्यक्ति 18 से 60 वर्ष की आयु तक रक्त दान कर सकता हैं।

10. रक्त दाता का वजन, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर, बॉडी टेम्परेचर आदि चीजों के सामान्य पाए जाने पर ही डॉक्टर्स या ब्लड डोनेशन टीम के सदस्य आपका ब्लड लेते हैं।

11. अगर कभी रक्त दान के बाद आपको चक्कर आना, पसीना आना, वजन कम होना या किसी भी अन्य प्रकार की समस्या लंबे समय तक बनी हुई हो तो आप रक्त दान ना करें।

12. पुरुष 3 महीने और महिलाएं 4 महीने के अंतराल में नियमित रक्त दान कर सकती हैं।

13. हर कोई रक्त दान नहीं कर सकता। यदि आप स्वस्थ हैं, आपको किसी प्रकार का बुखार या बीमारी नहीं हैं, तो ही आप रक्त दान कर सकते हैं।

 

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांच, बीमारी का पता लगाने, उपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहत, हर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50% खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले से किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 26 करोड़ से अधिक खुराक (26,64,84,350) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 25,12,66,637 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.53 करोड़ से ज्यादा (1,53,79,233) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की चार लाख से ज्यादा (4,48,760) से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को प्रदान कर दी जाएंगी। 

13 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

13 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 10,26,159 हुए

पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों में 54,531 की कमी आयी

पिछले 24 घंटे में 80,834 नये मामले दर्ज किए गए, यह संख्या 71 दिनों के बाद सबसे कम

देश में अब तक कुल 2,80,43,446 लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में 1,32,062 लोग कोविड-19 से उबरे

लगातार 31वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 95.26 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट गिरकर पांच प्रतिशत से कम हुआ, इस समय 4.74 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.25 प्रतिशत, लगातार 20वें दिन 10 प्रतिशत से कम

 

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 37.81 करोड़ जांच की गयी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 25.31 करोड़ खुराक दी गयीं 

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निशुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांच,बीमारी का पता लगानेउपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहत,हर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50 प्रतिशत खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 25.87 करोड़ से अधिक खुराक (25,87,41,810) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है।

इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 24,76,58,855 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

 

 

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.12 करोड़ से ज्यादा (1,12,41,187) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की 10 लाख से ज्यादा (10,81,300) से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्रदान कर दी जाएंगी। 

12 जून :  कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

12 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 11 लाख से कम (10,80,690) हुए, ऐसा 63 दिनों के बाद हुआ।

पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों में 40,981 की कमी आयी

पिछले 24 घंटे में 84,332 नये मामले दर्ज किए गए, यह संख्या 70 दिनों के बाद सबसे कम

देश में अब तक कुल 2,79,11,384 लोग कोविड-19 से स्वस्थ हुए

पिछले 24 घंटे में 1,21,311 लोग कोविड-19 से स्वस्थ हुए

लगातार 30वें दिन बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 95.07 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट और गिरकर पांच प्रतिशत से कम हुआ, इस समय 4.94 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.39 प्रतिशत, लगातार 19वें दिन 10 प्रतिशत से कम

 

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 37.62 करोड़ जांच की गयी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 24.96 करोड़ खुराक दी गयीं 

कोरोना के इस युग मे बच्चे करे ये 4 योगासन, रहेंगे चुस्त और सेहतमंद

कोरोना के इस युग मे बच्चे करे ये 4 योगासन, रहेंगे चुस्त और सेहतमंद

 पिछले साल से हम सब कोरोना संक्रमण के भयावह साए में जी रहे हैं, संक्रमण की लहर में आपके बच्‍चो को सेहतमंद बनाए रखने के लिए उनकी सेहत का पूरा ख्‍याल रखें| जहां पैरेंट्स अपने बच्‍चों की डाइट पर खास ध्यान देते हैं, वहीं उनकी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उनके दिन की शुरुआत योग से हो| आज कल वैसे भी ज्‍यादातर बच्‍चे अपने घरों में ही हैं, ऐसे में उनकी अच्‍छी सेहत के लिए फिजिकल एक्टिविटी और भी जरूरी है| योग करने से बच्‍चे सेहतमंद (Healthy) होने के साथ फुर्तीले भी बने रहेंगे| इसलिए अपने बच्‍चों के डेली रुटीन में योगा को शामिल करें, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाए रखा जा सके. आइए जानें बच्‍चों के लिए कुछ खास योगासन-

प्रणाम आसन
बच्‍चों के लिए यह आसन बहुत आसान है, इस आसन को करने से तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है| इसलिए इसे अपने बच्‍चों के रूटीन में जरूर शामिल करें, प्रणाम आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हथेलियो को आपस मे मिलाकर उंगलियों के ऊपर उंगली रख के हाथो को आपस मे दबाएं. इसके बाद अपनी आंखें बंद करें. अब अपने हाथ प्रणाम की मुद्रा में करके हाथो को अपनी छाती से लगाएं. इसके बाद अपने दोनों हाथों की कोहनियों को ताने रखें और धीरे से अपने सिर की ओर ले जाएं. इसे नियमित तौर पर करें|

पर्वतासन
पर्वतासन करने के लिए सबसे पहले बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को एक-दूसरे के साथ मिला लें यानी इंटरलॉक कर लें. अब अपनी हथेलियों को पलट लें और इन्‍हें अपने सिर की सीध में रखे रहें और हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं. अब गहरी सांस लें. इस स्थिति में दो मिनट तक रहें. फिर सांस छोड़ते हुए अपने हाथों को नीचे की ओर ले आएं|

वृक्षासन
इस आसन को करना बेहद आसान है. इसके लिए सीधे खड़े हो जाएं. अब अपने दोनों हाथों को जांघों के पास ले आएं और धीरे-धीरे अपने दाएं घुटने को मोड़ते हुए उसे अपनी बाईं जांघ पर रखें. अब धीरे से सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अपने दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा बनाएं और गहरी सांसें भीतर की ओर खींचते रहें. अब सांसें छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें और धीरे से हाथों को नीचे की ओर ले आएं. आप अपने अंदर स्‍फूर्ति पाएंगे|

दंडासन
दंडासन के लिए पेट के बल लेट जाएं. फिर दोनों पैरों को मिला लें, इसके बाद अपने दोनों हाथों के बीच थोड़ी दूरी रखें और अपनी छाती के बिल्कुल सीध में हाथ को कोहनियों से मोड़ कर रखें. इसके बाद धीरे-धीरे सांस अंदर की ओर खींचें और अपने पैरों के पंजों पर शरीर का भार डालते हुए दोनों हाथों के सहारे शरीर को तब तक ऊपर उठाएं जब तक दोनों हाथ बिल्कुल सीधे न हो जाएं, अब सांस छोड़ें और शरीर को नीचे जमीन से थोड़ा ऊपर उठा कर रखें| फिर सांस लेकर शरीर को ऊपर की ओर ले जाएं, इस तरह निरंतर अभ्‍यास से बेहतर महसूस करेंगे|

 कोविशील्ड के दो डोज के बीच के अंतर में फिर बदलाव, जानिए क्या है नई गाइडलाइन

कोविशील्ड के दो डोज के बीच के अंतर में फिर बदलाव, जानिए क्या है नई गाइडलाइन

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बार फिर कोविशील्ड के पहले और दूसरे डोज के बीच का अंतर कम कर दिया है। दूसरे डोज का गैप दो बार बढ़ाया गया, लेकिन इस बार यह गैप घटाया गया है। ये सिर्फ उनके लिए है, जो विदेश यात्रा पर जा रहे है। नई गाइडलाइन के बाद अब कुछ श्रेणियों के लिए 84 दिन का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अब 28 दिन के बाद भी कोविशील्ड का दूसरा डोज लगाया जा सकता है। हालांकि, कोवैक्सीन के लिए दो डोज के बीच का अंतर अभी भी 28 दिन ही है। उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या कहती है नई गाइडलाइन?
स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन उनके लिए है, जिनको कोविशील्ड का पहला डोज लग चुका है और उन्हें विदेश यात्रा पर जाना है। यह विदेश यात्रा पढ़ाई, रोजगार और ओलंपिक टीम के लिए हो सकती है। ऐसे लोगों को कोविशील्ड के दूसरे डोज के लिए 84 दिन का इंतजार नहीं करना होगा। वह इससे पहले भी दूसरी डोज भी लगवाया जा सकता है। 

इससे पहले पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि उन लोगों को कोविशील्ड की पहली खुराक के 28 दिन के अंतराल के बाद दूसरी खुराक दी जाएगी, जिनके लिए विशेष कारणों से विदेश जाना जरूरी है। सिद्धू ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा नामित योग्य प्राधिकारी 84 दिन के तय अंतराल से पूर्व दूसरी खुराक देने के लिए अनुमति देने से पहले जांच करेंगे।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 दिन पहले पहली खुराक ले चुके ऐसे लोगों को टीके मुहैया कराने की सिफारिश की है। सिद्धू ने एक बयान में कहा कि इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि अधिकतर लाभार्थियों का टीकाकरण किया जा सके।
आइये जानते है, ब्लैक और वाइट फंगस के लक्षण और इलाज से जुड़ी ये बाते

आइये जानते है, ब्लैक और वाइट फंगस के लक्षण और इलाज से जुड़ी ये बाते

 हमारा देश पिछले एक साल से कोरोना से लड़ रहा रहा है इसी बीच फंगस नाम की बीमारी आम लोगो की मुश्किलें इतनी बढ़ा दी है की  हम सभी लोग इससे डरे हुए है,  इस फंगस के बारे में हमारे मन में कई सवाल उठते हैं, इनमें से कुछ के उत्तर हम नीचे दे रहे हैं|


ब्लैक फंगस और वाइट फंगस क्या है?

म्यूकोरमायकोसिस या ब्लैक फंगस का संक्रमण एक फंगस से होता है जो संक्रमित कोशिका समूहों में काले रंग का धब्बा बनाता है. कैंडिडा या वाइट फंगस संक्रमण एक ऐसे फंगस से होता है जो संक्रमित कोशिका समूहों में उजला धब्बा बनाता है|


यह संक्रमण कैसे फैलता है?

यह संक्रमण हवा में मौजूद फंगस के बीजाणुओं के सांस के द्वारा या अंतर्ग्रहण से शरीर के अंदर पहुंचने से होता है. कई बार यह शरीर के त्वचा पर हुए घाव या किसी मानसिक आघात के कारण भी शरीर में पहुंचता है|


यह कहां से आता है?

अन्य माइक्रोब्ज़ जैसे बैक्टीरीया या वायरस की तरह फंगस भी वातावरण में मौजूद होता है. यह आमतौर पर ज़मीन, हवा और मनुष्य के नाक और उसके बलगम में मौजूद होता है|


क्या यह हवा से फैलता है?

हां, चूंकी उसके बीजाणु हवा में मौजूद होते हैं इसलिए इसको फैलने से रोकना असंभव-सा है|


क्या फंगस लोगों से लोगों में फैलता है?

नहीं, फंगस से होनेवाला संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं होता|


क्या यह संक्रमण हम सभी को हो सकता है?

नहीं, चूंकी माइक्रोब्ज़ जैसे बैक्टीरीया, वायरस या फंगस हवा में मौजूद होते हैं, इसलिए इन्हें हम अपने शरीर में जाने से नहीं रोक सकते. पर हर व्यक्ति इससे संक्रमित नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितना ज़्यादा सुरक्षित हैं, मतलब हमरा इम्यून सिस्टम कितना ज़्यादा मज़बूत है कि वह फंगस को हमारे शरीर में फैलने से रोक सके. स्वस्थ शरीर माइक्रोब्ज़ के शरीर में पहुंचते ही उससे लड़ाई शुरू कर देता है और उसको शरीर में आगे नहीं बढ़ने देता. इस तरह अगर किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम मज़बूत है तो उसे यह संक्रमण नहीं होगा|


किसको हो सकता है संक्रमण?

जिस व्यक्ति के शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर है उसको संक्रमण का खतरा है. ऐसे लोग जो 60 साल के ऊपर के हैं, या जिनको डायबिटीज़ की गंभीर शिकायत है जो कि नियंत्रण में नहीं आ रहा, गुर्दे की बीमारी है, लीवर की बीमारी है, COPD, दमा, टीबी है या जो लोग इम्यून सिस्टम को दबाने की थेरेपी जैसे स्टेरॉयड ले रहे हैं, जिनको कैंसर जैसी बीमारी है, या जिनको अंग प्रत्यारोपण हुआ है, जो काफी समय से एंटीबायोटिक ले रहे हैं, काफी समय से अस्पताल में हैं, शरीर में पोषण की कमी है, तम्बाकू का सेवन करते हैं, बीड़ी-सिगरेट पीते हैं या शराब पीते हैं, ऐसे लोग इससे संक्रमित हो सकते हैं|


क्या कोविड से ग्रस्त हर मरीज ब्लैक एंड वाइट फंगस से संक्रमित हो सकता है?

नहीं, ब्लैक एंड वाइट फंगस एक बहुत ही दुर्लभ संक्रमण है और कोविड से ग्रस्त सभी मरीज़ों को यह नहीं होता|


कोविड मरीज़ों में यह संक्रमण तेज़ी से क्यों फैल रहा है?

-कोविड के कारण लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है इसलिए बैक्टीरीया और फंगस को उनके शरीर में पहुंचने का मौका मिल जाता है. कोविड के इलाज में स्टेरॉयड जैसी दवाओं के प्रयोग के कारण शरीर में लिंफोसाइट्स की संख्या कम हो जाती है जो कि एक तरह की उजली रक्त कोशिका होती है जो बैक्टीरीया, वायरस और फंगस के खिलफ हमारे शरीर की रक्षा करती है. ये दवाएं मरीज़ के इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाती हैं जिसकी वजह से उनकी जान बच जाती है. लिंफोसाइट्स की संख्या में कमी आने से कोविड से ग्रस्त मरीज़ों में मौका देखकर फंगल संक्रमण बढ़ जाता है. जिस मरीज का इम्यून सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है उसको म्यूकोरमयकोसिस और कैंडिडा दोनों ही संक्रमण हो सकता है|


-एंटीबायोटिक दवाएं जिनका प्रयोग बैक्टीरीया के द्वितीयक संक्रमण को रोकने के लिए होता है, यह उस लाभदायक बैक्टीरीया के विकास को भी रोक देता है जो फंगस से हमारे शरीर को बचा सकता है|


-ज़िंक का ज़रूरत से अधिक प्रयोग भी इसका कारण हो सकता है क्योंकि यह फंगल संक्रमण को बढ़ाने का काम करता है|


-शरीर में औद्योगिक ऑक्सिजन का लंबे समय तक प्रयोग भी इसका कारण हो सकता है|


-भाप के प्रयोग से मुंह और नाक में फंगस के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है|


क्या इन दवाओं को रोक देना चाहिए?

नहीं, ये दवाएं कोविड से जान बचाने के लिए जरूरी हैं|


इन दवाओं को लेते हुए फंगस के संक्रमण को कैसे रोक सकते हैं?

दवाएं सिर्फ आरएमपी डॉक्टर की सलाह और कड़ी निगरानी में ही लेनी चाहिए. आरएमपी डॉक्टर इस बात को जानता है कि मरीज को कौन सी दवा कब और कितनी मात्रा में देनी चाहिए और कितनी बार देनी चाहिए. अगर मरीज़ खुद इन दवाओं को लेता है या किसी की सलाह से और अगर इसका दुरुपयोग होता है तो वह मरीज़ संक्रमित हो सकता है और उसे दूसरी मुश्किलें भी हो सकती हैं|


क्या काढ़ा जैसी कोई प्राकृतिक वस्तुएं भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं?

कोई भी वस्तु अगर ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में ली जाती है तो उससे नुकसान होता है. काढ़ा में भी बैक्टीरीया को मारने और स्टेरॉयड गुणों वाली वस्तुएं मिली होती हैं. इसलिए अंग्रेज़ी दवाओं के साथ ये भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसी कई प्राकृतिक वस्तुओं में जिंक और आयरन की बहुतायत होती है जो फंगस के विकास को बढ़ाते हैं|


क्या कोविड के बिना भी यह संक्रमण हो सकता है?

हां. यह संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है जिसके शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर है भले ही उसे कोविड हुआ हो या नहीं|


क्या ब्लैक फंगस संक्रमण जानलेवा है?

हां, म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस एक विरल लेकिन जानलेवा बीमारी है|


ब्लैक फंगस की बीमारी के क्या लक्षण हैं?

इसने शरीर के किस क्षेत्र को प्रभावित किया है इस आधार पर इसके निशान और लक्षण अलग अलग होते हैं|


राइनो ओर्बिटल सेरिब्रल म्यूकोरमाइकोसिस (Rhino orbital cerebral Mucormycosis)

यह संक्रमण उस समय होता है जब व्यक्ति फंगस के जीवाणुओं को सांस के माध्यम से शरीर के अंदर कर लेता है. यह नाक, आंख के घेरे/आंख के गड्ढे, ओरल कैविटी और यहां तक कि दिमाग को भी संक्रमित कर देता है. संक्रमण के कारण सिर दर्द, नाक का जाम होना, नाक बहना (हरे रंग का कफ आना), साइनस में दर्द, नाक से खून निकलना, चहरे पर सूजन, चहरे पर कुछ भी महसूस नहीं होना और त्वचा का रंग बदलना शामिल है|


पल्मनेरी म्यूकोरमाइकोसिस (Pulmonary Mucormycosis)

यह तब होता है जब इस फंगस के जीवाणुओं को सांस के सहारे अंदर ले लिया गया है और वह श्वसन प्रणाली में पहुंच गया है. यह फेफड़े को संक्रमित करता है. इसके कारण बुखार आ सकता है, छाती में दर्द हो सकता है, कफ हो सकता है और कफ में खून निकल सकता है. यह फ़ंगस आंत, त्वचा और दूसरे अंगों को भी संक्रमित कर सकता है. पर इनमें सबसे ज़्यादा आम है राइनो सेरेब्रल म्यूकोरमाइकोसिस|


ब्लैक फंगस संक्रमण हो गया है, यह कैसे पता चलता है?

क्लीनिकल लक्षणों से इसके बारे में संदेह पैदा होता है और बाद में एमआरआई (MRI) जैसी जांच भी की जाती है. इस संक्रमण की पुख़्ता जानकारी के लिए मरीज़ की बायोप्सी करनी होती है. इसमें मरीज़ के शरीर से टिशू का एक हिस्सा काटा जाता है और इसको माइक्रोस्कोप में देखा जाता है ताकि ब्लैक फंगस का इसमें पता लगाया जा सके|


क्या इसका इलाज है?

हां, अगर इसका पता जल्दी चल जाए तो इसका इलाज है और अमफोटेरिसिन और पोसैकोनाजोल जैसी एंटी-फंगल दवा का प्रयोग किया जाता है. कुछ मरीज़ों में सर्जरी करने की भी नौबत आती है जिसके प्रभावित क्षेत्र को निकाल दिया जाता है|


क्या वाइट फंगस का संक्रमण जानलेवा है?

नहीं, कैंडीडीएसिस या वाइट फंगस जानलेवा नहीं है|


क्या वाइट फंगस के संक्रमण का इलाज है?

हाँ, कैंडीडीएसिस या वाइट फगस का इलाज है और इसके लिए उपलब्ध दवाएं महंगी भी नहीं होतीं|


इससे अपना बचाव कैसे करें?

-साफ मास्क पहनें. यह इससे सबसे ज़्यादा प्रभावी बचाव है क्योंकि इससे आप फंगस को अपने शरीर में नाक और मुंह के रास्ते जाने से रोक पाएंगे. अपने मास्क को बार-बार साफ करें और उन्हें बदलें|

-अपने घाव, चमड़े के कट जाने या छिल जाने की जगह को तत्काल पानी से साफ करें|

-कोविड का इलाज किसी RMP डॉक्टर से ही लें. खुद कोई दवा न लें. नीम हकीम के चक्कर में न पड़ें. लंबे समय तक भाप न लें और न ही लंबे समय तक काढ़ा पीए|

लगातार 27वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा,  रिकवरी रेट बढ़कर इतने प्रतिशत

लगातार 27वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा, रिकवरी रेट बढ़कर इतने प्रतिशत

भारत में दैनिक नये मामलों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटे में देश में 92,596 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए। लगातार दूसरे दिन देश में कोविड-19 के नये मामलों की संख्या एक लाख से कम दर्ज की गयी। यह केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों के सहयोग से किए जा रहे प्रयासों का नतीजा है। भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या लगातार घट रही है। सक्रिय मामलों की संख्या गिरकर आज 12,31,415 हो गयी। लगातार नौवें दिन यह संख्या 20 लाख से कम है।
पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों की संख्या में कुल 72,287 की कमी आयी है। यह अब देश के कुल कोविड पॉजिटिव मामलों का केवल 4.23 प्रतिशत है। साथ ही लगातार 27वें दिन भारत में बीमारी से उबरने वाले लोगों की दैनिक संख्या कोविड-19 के दैनिक नए मामलों से ज्यादा हैं। पिछले 24 घंटे में बीमारी से 1,62,664 लोग उबरे हैं।

पिछले 24 घंटे में दैनिक नये मामलों की तुलना में बीमारी से 70,068 ज्यादा लोग उबरे हैं। भारत में महामारी के शुरू होने के बाद से पहले ही कुल 2,75,04,126 लोगों में कोविड-19 ठीक हो चुका है और पिछले 24 घंटे में बीमारी से कुल 1,62,664 लोग उबरे हैं। बीमारी से उबरने की राष्ट्रीय दर भी बेहतर होकर 94.55 प्रतिशत हो गयी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में पिछले 24 घंटे में कुल 19,85,967 जांच हुई जिसके साथ अब तक हुए जांच की कुल संख्या 37करोड़ से ज्यादा (37,01,93,563) है।

जहां एक तरफ पूरे देश में कोविड की जांच बढ़ गयी है, वहीं दूसरी तरफ साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट भी लगातार घट रहा है। साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 5.66 प्रतिशत है जबकि दैनिक पॉजिटिविटी रेट घटकर आज 4.66 प्रतिशत हो गया। यह लगातार 16 दिनों से 10 प्रतिशत से कम बना हुआ है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत आज देश में कोविड-19 के टीके की दी जा चुकी खुराक की कुल संख्या 23.90 करोड़ से ज्यादा गयी। पिछले 24 घंटे में टीके की 27,76,096 खुराक दी गयीं।

अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह सात बजे तक 33,44,533 सत्रों में कोविड-19 के टीके की कुल 23,90,58,360 खुराक दी जा चुकी हैं।

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों को निशुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांच, बीमारी का पता लगाने, उपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहत, हर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50% खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को कोविड टीके की 25 करोड़ से अधिक खुराक (25,06,41,440) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 23,74,21,808 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.33 करोड़ से ज्यादा (1,33,68,727) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की तीन लाख से ज्यादा (3,81,750) से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को प्रदान कर दी जाएंगी। 

9 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

9 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 13 लाख से कम (12,31,415) हुए, ऐसा 57 दिनों के बाद हुआ

पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों में 72,287 की कमी आयी

लगातार दूसरे दिन नये मामलों की संख्या एक लाख से कम

पिछले 24 घंटे में 92,596 नये मामले दर्ज किए गए

देश में अब तक कुल 2,75,04,126 लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में 1,62,664 लोग कोविड-19 से उबरे

लगातार 27वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 94.55 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 5.66 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.66 प्रतिशत, लगातार 16वें दिन 10 प्रतिशत से कम

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 37.01 करोड़ जांच की गयी

 

 

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक लोगों को टीके की 23.9 करोड़ खुराक दी गयीं

 

 इम्यूनिटी, ब्लड प्रेशर , शुगर कंट्रोल करता है  कद्दू का बीज, जानिए इसके फायदे

इम्यूनिटी, ब्लड प्रेशर , शुगर कंट्रोल करता है कद्दू का बीज, जानिए इसके फायदे

 कद्दू के बीज के फायदे कद्दू का बीज (Pumpkin Seeds) जितना छोटा दिखता है , उतना ही इसका न्‍यूट्रिशनल वैल्‍यू (Nutritional Value) ज्‍यादा होता है| अगर आप इसे रोजाना ब्रेकफास्‍ट में एक चम्‍मच भी लेते हैं तो यह आपके शरीर की जिंक, मैग्‍नेशियम और हेल्‍दी फैट की आपूर्ति को पूरा कर सकता है| मिनरल्स, विटामिन, हाई फाइबर से भरपूर यह बीज ड्राई फ्रूट की कैटैगरी में आता है और आमतौर पर हम इसका प्रयोग मिठाइयों या व्‍यंजनों को बनाने में करते हैं लेकिन बता दें कि यह सेहत (Health) के लिए किसी मेडिसीन से कम नहीं, हेल्थलाइन 

की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें भरपूर मात्रा में फॉस्‍फोरस, मैग्‍नेशियम, आयरन, जिंक, कॉपर, विटामिन के, प्रोटीन, फाइबर, फैटी एसिड, पोटैशियम, विटामिन बी2 और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमें कई बीमारियों से बचाता है| चलिये जानते हैं इसके फायदे,

 

1.ब्लड प्रेशर करता है कंट्रोल

पंपकिन सीड में मौजूद मैंगनीज, कॉपर, ज़िंक और फॉस्फोरस आदि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद कई मिनरल्स खून में नमक की मात्रा को सामान्य करते हैं जिससे ब्‍लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है, इसके अलावा यह ब्‍लड स्‍ट्रीम्‍स में शुगर को अवशोषित करता है| जिससे ब्‍लड शुगर कंट्रोल होता है|

 

2.वजन को रखता है कंट्रोल

पंपकिन सीड में हाई फाइबर होता है जो आपके पेट को भरा भरा रखता है. जिस वजह से हमें खाने को दखकर क्रेविंग नहीं होती और हम कम खाते हैं,  कम खाने से वजन भी तेजी से कम हो सकता है|

3.बढ़ाता है मेटाबॉलिज्म

पंपकिन सीड शरीर में मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है. इसे डायजेस्‍ट करने में समय लगता है और पेट देर तक भरा रहता है.  इसके सेवन से डायजेशन संबं‍धी समस्‍याएं भी दूर होती है|

 

4.बढ़ाता है इम्यूनिटी

इसमें भरपूर मात्रा में जिंक पाया जाता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को इंप्रूव करता है. इसके सेवन से हमारा शरीर सर्दी, खांसी, जुकाम और तमाम तरह के वायरल इंफेक्‍शन से हमें बचा रहता है|

5.शुगर को रखता है कंट्रोल

पंपकिन सीड में इंसुलिन की मात्रा को संतुलित करने की भी क्षमता होती है.  इसके अलावा यह ब्‍लड स्‍ट्रीम्‍स में शुगर को अवशोषित करता है जिससे ब्‍लड शुगर कंट्रोल होता है. यह डाइजेशन प्रोसेस को धीरे कर देता है जिससे खून में शुगर की मात्रा कम हो जाती है.  यही नहीं, इससे पैंक्रियाज को सही मात्रा में इंसुलिन निर्माण के लिए भरपूर समय मिल जाता है. ब्लड ग्लूकोज लेवल भी इससे नॉर्मल हो जाता है|

6.एंटीऑक्‍सीडेंट भरपूर

इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल से हमारी त्‍वचा को बचाते हैं. यह किसी भी तरह के इनफ्लामेशन को भी हील करता है और एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है|

7.हार्ट को रखता है हेल्‍दी

इसके सेवन से बैड कोलेस्‍ट्रॉल कम होता है और हाई ब्‍लड प्रेशर को यह नियंत्रित करता है जिससे हार्ट हेल्‍दी रहता है और किसी भी तरह के डिजीज से दूर रहता है|