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21जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

21जून : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

भारत में सक्रिय मामले कम होकर 7,02,887 तक पहुंचे।

पिछले 24 घंटों में भारत में 53,256 नये मामले दर्ज हुये, जो 88 दिनों में सबसे कम हैं।

अब तक पूरे देश में कुल 2,88,44,199 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले 24 घंटों के दौरान 78,190 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले लगातार 39वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।

रिकवरी दर में इजाफा, वह 96.36 प्रतिशत पहुंची।

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 3.32  प्रतिशत है।

दैनिक पॉजिटिविटी दर 3.83 प्रतिशत है, जो लगातार 14वें दिन पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।

 

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 39.24 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 28 करोड़ डोज लगाई गई है। 

 ब्रे़किंग: प्रदेश में डेल्टा प्लस के वैरिएंट से हुई चार लोगों की मौत

ब्रे़किंग: प्रदेश में डेल्टा प्लस के वैरिएंट से हुई चार लोगों की मौत

शिवपुरी। कोरोना की दूसरी लहर के तहत अब भले ही दैनिक मामले बहुत कम आ रहे हों लेकिन कोरोना का खतरा अभी भी बना हुआ है। हाल ही में डेल्टा वैरिएंट का एक और म्यूटेशन सामने आया है। मध्यप्रदेश के शिवपुरी में डेल्टा प्लस के वैरिएंट की वजह से चार लोगों की मौत हो गई। 

इन लोगों के सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया, जिसके बाद इस बात का खुलासा हुआ। इसमें हैरानी की बात यह है कि इन चारों लोगों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी थी। अब इनके संपर्क में आए लोगों के सैंपल लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची है। 
हालांकि सभी लोगों के स्वस्थ्य होने की वजह से किसी का सैंपल नहीं लिया गया। 

बता दे कि भोपाल में भी 16 जून को 65 साल की एक महिला में डेल्टा प्लस वैरिएंट मिल चुका है। डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर एम्स के निदेशक गुलेरिया ने चिंता भी जताई है। सीएमएचओ डॉ. एएल शर्मा बताते हैं कि डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से अजाक थाने के हवलदार प्रेमनारायण द्विवेदी, पिछोर के शिक्षक सुरेंद्र शर्मा, सॉफ्टवेयर इंजीनियर शिक्षक विनय चतुर्वेदी और सूरजपाल की अचानक तबीयक बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि चार-पांच घंटे पहले ये मरीज सामान्य हालत में थे। उन्होंने बताया कि ये वैरिएंट इसलिए घातक है क्योंकि ये तीन दिन में ही गले से फेफड़ों तक पहुंच जाता है। जबकि सामान्य वायरस को गले से फेफड़ों तक पहुंचने में सात दिन का समय लगता है। इसके अलावा डेल्टा प्लस वैरिएंट संपर्क में आए लोगों को भी गंभीर बीमार करता है।

बता दें कि डेल्टा प्लस कोरोना का सबसे खतरनाक वैरिएंट है, इसे डेल्टा-2 के नाम से जाना जाता है। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा, ये चार वैरिएंट हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताए हैं। इनमें सबसे खतरनाक डेल्टा वैरिएंट है, जो भारत में ही म्यूटेंट हुआ है। इसे B.1.617 के नाम से भी जाना जाता है। मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जो वैरिएंट पाया गया, उसका नाम B.1.617.2 है। जांच के बाद इसे डेल्टा प्सल का नाम दिया गया है।
 
लगातार लैपटॉप या मोबाइल पर काम करते हैं तो आंखों को यूं दें आराम

लगातार लैपटॉप या मोबाइल पर काम करते हैं तो आंखों को यूं दें आराम

आंखें शरीर का सबसे कोमल हिस्सा होता है। ऐसे में इसका खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। कोरोना महामारी के चलते देश के कई राज्यों में लॉकडाउन लगा हुआ है। जिस वजह से लोग घर पर ही ऑफिस का काम कर रहे हैं। मगर, सारा दिन मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप में आंखें गढ़ाए रखने के चलते आंखों में थकावट, डार्क सर्कल्स और आंखों की रोशनी के कम होने की समस्या हो सकती है। इसलिए आज हम आपको इस समस्या को दूर करने के कुछ जरूरी टिप्स बताते हैं।
- एक कटोरी में ठंडा पानी और 1 चम्मच गुलाब जल मिलाएं। उस पानी में कॉटन डुबो कर 5-7 मिनट तक आंखों पर रखें। इस प्रक्रिया को दिन में 2-3 बार दोहराएं। इससे आंखों का भारीपन, दर्द व जलन दूर होने के साथ रोशनी बढऩे में भी मदद मिलेगी।
- आंखों पर ठंडे पानी के छींटा मारें। इसके लिए सबसे पहले मुंह में थोड़ा-सा पानी भरें। फिर आंखों पर पानी से छींटा मारें। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करने से कुछ ही दिनों में फर्क नजर आएगा। इससे आंखों में होने वाला दर्द, जलन व भारीपन दूर हो फ्रेश फील होगा।
- एक कटोरी में पुदीने के पत्ते डालकर रात भर भिगोएं। सुबह इस पानी में कॉटन डुबोएं और उसे आंखों पर थोड़ी देर के लिए रखें। इससे आंखों की थकान दूर होने के साथ भारीपन व जलन की परेशानी से भी राहत मिलेगी। साथ ही दिनभर तरोताजा महसूस होगा।
- दोनों हाथों को रगड़कर बंद आंखों पर रखें। इसके बाद आंखें खोलकर आई बाल्स को चारों दिशा्ओं में घुमाएं। फिर आंखें बंद करके गहरी सांस लें।
- जो चम्मच लेकर उन्हें ठंडे पानी में कुछ देर के लिए छोड़ दें। इन चम्मचों को उल्टा कर आंखों पर एक मिनट के लिए रखें। चम्मच से मिलने वाली ठंडक से आंखों की थकान दूर होगी।
- लगातार कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि का इस्तेमाल करने की जगह बीच-बीच में ब्रेक लें। हर 1 घंटे के बाद आंखों को थोड़ी देर के लिए बंद करें।

 

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर इतने हुए

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर इतने हुए

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत में 81 दिनों के बाद 60,000 से कम दैनिक नये मामले दर्ज किए गए। पिछले 24 घंटे में देश में 58,419 दैनिक नये मामले दर्ज सामने आए। भारत में कोविड-19 के दैनिक नये मामलों में लगातार कमी आ रही है।
लगातार 13वें दिन देश में कोविड-19 के नये मामलों की संख्या एक लाख से कम दर्ज की गयी। यह केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से किए जा रहे सतत प्रयासों का नतीजा है। 
भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या लगातार घट रही है। सक्रिय मामलों की संख्या गिरकर आज 7,29,243 हो गयी। पिछले 24 घंटे में सक्रिय मामलों की संख्या में कुल 30,776की कमी आयी है। यह अब देश के कुल कोविड पॉजिटिव मामलों का केवल 2.44 प्रतिशत है।

भारत में महामारी के शुरू होने के बाद से पहले ही कुल 2,87,66,009 लोगों में कोविड-19 संक्रमण ठीक हो चुका है और पिछले 24 घंटे में बीमारी से कुल 87,619 लोग उबरे हैं। बीमारी से उबरने की राष्ट्रीय दर भी बेहतर होकर 96.27 प्रतिशत हो गयी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में जांच की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि के साथ पिछले 24 घंटे में कुल 18,11,446 जांच हुईं। इसके साथ देश में अब तक हुई जांच की कुल संख्या 39.10 करोड़ से ज्यादा (39,10,19,083) है।

जहां एक तरफ पूरे देश में कोविड की जांच बढ़ गयी है, वहीं दूसरी तरफ साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट भी लगातार घट रहा है। साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट इस समय 3.43 प्रतिशत है जबकि दैनिक पॉजिटिविटी रेट आज 3.22 प्रतिशत हो गया। यह लगातार 13 दिनों से पांच प्रतिशत से कम बना हुआ है। अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह सात बजे तक 37,91,686 सत्रों में देश में कोविड-19 के टीके की कुल 27,66,93,572 करोड़ खुराक दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटे में टीके की 38,10,554 खुराक दी गयीं।

एक नज़र कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर, पढ़े पूरी खबर

एक नज़र कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर, पढ़े पूरी खबर

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशोंको टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांच, बीमारी का पता लगाने, उपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है। कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है। रणनीति के तहत, हर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50% खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशोंको कोविड टीके की 29.10करोड़ से अधिक खुराक (29,10,54,050) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 26,04,19,412 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़े के अनुसार) है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 3.06 करोड़ से ज्यादा (3,06,34,638) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की 24,53,080 से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को प्रदान कर दी जाएंगी। 

20 जून : कोविड-19 अपडेट

20 जून : कोविड-19 अपडेट

भारत सक्रिय मामले घट कर 7,29,243 पर आए

भारत ने 81 दिनों के बाद 60,000 से कम दैनिक मामले दर्ज कराये, पिछले 24 घंटों में 58,419 नए मामले दर्ज कराये

अभी तक देश भर में कुल 2,87,66,009 रिकवरी हो चुकी है

पिछले 24 घंटों में 87,619 रोगी रिकवर हुए

पिछले लगातार 38 दिनों से दैनिक नए मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही

रिकवरी दर बढ़ कर 96.27 प्रतिशत पहुंची

साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5 प्रतिशत से कम बनी हुई है, वर्तमान में यह 3.43 प्रतिशत है

दैनिक पॉजिटिविटी दर 3.22 प्रतिशत है, लगातार 13 दिनों से यह 5 प्रतिशत से कम है

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि, अभी तक कुल 39.10 करोड़ जांचें की जा चुकी हैं

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 27.66 करोड़ टीके लगाये जा चुके हैं

क्या दूध पीने से हो सकता है डायबिटीज? यहां जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

क्या दूध पीने से हो सकता है डायबिटीज? यहां जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

दूध प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है और दूध पोषक तत्वों के अनूठे संतुलन के साथ लगभग संपूर्ण भोजन है. दूध को बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में सहायक बताया गया है. दूध में कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फॉस्फोरस, विटामिन डी, पैंटोथेनिक एसिड, पोटेशियम, विटामिन ए और नियासिन सहित कई आवश्यक तत्व पाये जाते हैं.

वैज्ञनिकों ने तर्क को नकारा
कुछ लोगों को दूध में पाए जाने वाले लैक्टोज को पचाने में कठिनाई हो सकती है. सामान्य तौर पर मनुष्यों ने वर्षों से शरीर में लैक्टोज को पचाने की क्षमता विकसित की है, जिससे की दूध का सेवन जीवन भर किया जा सकता है. लैक्टोज मस्तिष्क के विकास में मदद करता है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नियमित रूप से दूध पीने के कारण डायबिटीज की बिमारी हो सकती है. फिलहाल वैज्ञानिक प्रमाण इसके विपरीत हैं. वैज्ञानिकों का तर्क है कि वास्तव में दूध मधुमेह के लिए फायदेमंद होता है.

कुछ स्कैंडिनेवियाई देशों में रिपोर्ट हुए मामले

एक पुराना सिद्धांत है जिसे केवल कुछ स्कैंडिनेवियाई देशों में रिपोर्ट किया गया है. जिसमें कहा गया है कि गाय का दूध टाइप 1 मधुमेह से जुड़ा हुआ है. हालांकि बाद में हुए कई अध्ययनों ने इस सिद्धांत को खारिज कर दिया. बताया जाता है कि पश्चिमी देशों में नवजात शिशु को जन्म के समय से लेकर 6 महीने तक मां का स्तनपान नहीं कराया जाता. जिससे उनकी इम्यूनिटी ज्यादा विकसित नहीं हो पाती और भविष्य में रोगों से लड़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
चेन्नई शहरी ग्रामीण महामारी विज्ञान अध्ययन (CURES) ने डेयरी और दूध को सुरक्षात्मक बताते हुए एक रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दूध का मधुमेह के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव है. यह अध्ययन पांच महाद्वीपों के 21 देशों में 150,000 व्यक्तियों पर किए गए. जिसमें भारत के पांच हिस्से भी शामिल थे. इस रिपोरेट में बताया गया है कि दूध से डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशन जैसी बिमारी के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

 

छतीसगढ़- 18 से 44 वर्ष के लोगो के लिए 2 लाख से अधिक कोविड वैक्सीन उपलब्ध

छतीसगढ़- 18 से 44 वर्ष के लोगो के लिए 2 लाख से अधिक कोविड वैक्सीन उपलब्ध

रायपुर: छतीसगढ़ को जनवरी 2021 से लेकर अब तक 23 खेपों में 75 लाख 92 हजार 780 डोज कोविशिल्ड वैक्सीन की प्राप्त हुई है, वहीं जनवरी से अब तक 10 खेपों में 07 लाख 35 हजार 290 डोज कोवैक्सीन प्राप्त हुई है। इस प्रकार दोनों वैक्सीन के कुल 83 लाख 28 हजार 70 डोजेज प्राप्त हुई है।


18-44 वर्ष आयु समूह के लिये अब तक 13 लाख 49 हज़ार 740 डोज़ प्राप्त हुई है, जिसमें 1.5 लाख कोवैक्सीन डोज़ 1 मई 2021 को, 3.5 लाख डोज़ कोविशील्ड वैक्सीन 8 मई 2021 को, 2 लाख 97 हज़ार 110 डोज कोविशील्ड वैक्सीन 15 मई 2021 को, 1 लाख 41 हज़ार 420 डोज कोविशील्ड वैक्सीन 5 जून 2021 को, 33 हज़ार 80 डोज़ कोवैक्सिन वैक्सीन 10 जून 2021 को, 77 हज़ार 930 डोज कोविशिल्ड वैक्सीन 11 जून 2021 को, 01 लाख डोज कोविशिल्ड वैक्सीन 12 जून 2021 को, 01 लाख 01 हज़ार 880 डोज कोविशिल्ड वैक्सीन 15 जून 2021 को एवं 98 हज़ार 320 डोज कोविशिल्ड वैक्सीन 18 जून 2021 को प्राप्त हुई है।

 

18 -44 वर्ष आयुवर्ग में अब तक करीब 10 लाख 97 हज़ार 992 लाभार्थियों को प्रथम डोज एवं 28 हज़ार 336 लाभार्थियों को द्वितीय डोज (कोवैक्सीन एवं कोविशील्ड वैक्सीन) लगाई जा चुकी है ।

कोरोना का एक नया वैरिएंट आया सामने 29 देश आये चपेट में, इसके आगे एंटीबॉडी भी होगी बेअसर

कोरोना का एक नया वैरिएंट आया सामने 29 देश आये चपेट में, इसके आगे एंटीबॉडी भी होगी बेअसर

कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से निपटने के दुनिया के प्रयासों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया कि 29 देशों में कोरोना का एक और नया वेरिएंट पाया गया है। 'लैम्ब्डा' नाम के इस वेरिएंट के बारे में माना जा रहा है कि यह दक्षिण अमेरिका में पहली बार पाया गया था। डब्ल्यूएचओ ने वीकली अपडेट में कहा कि पहली बार पेरू में पाया गया, लैम्ब्डा वेरिएंट दक्षिण अमेरिका में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार था।
WHO ने चिंता जताई है कि संक्रमण का यह वैरिएंट कहीं दुनिया भर में ना फैल जाए। हाल ही में डेल्टा वेरिएंट ने भी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। ब्रिटेन ने दावा किया है कि उसके देश में 11 दिन में मामले दोगुने हो गए और इसका जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट को माना जा रहा है।
कुल 29 देश चपेट में
अधिकारियों ने बताया कि पेरू में लैम्ब्डा वेरिएंट का ज्यादा असर पाया गया। पेरू में अप्रैल 2021 से लेकर अब तक 81 फीसदी कोरोना मामले इसी वेरिएंट से जुड़े हुए हैं। उधर चिली में पिछले 60 दिनों में सबमिट किए गए मामलों में से 32 प्रतिशत मामलों यह वेरिएंट पाया गया है। अर्जेंटीना और इक्वाडोर जैसे अन्य देशों में भी इस वेरिएंट के कई मामले दर्ज किए गए हैं। इन्हें मिलाकर कुल 29 देशों में इस वैरिएंट के मामले मिले हैं।
एंटीबॉडी भी होगी बेअसर
लैम्ब्डा वेरिएंट म्यूटेट होता है जो संक्रमण क्षमता को बढ़ा सकता है। साथ ही संक्रमण के इस स्वरूप के सामने एंटीबॉडी भी असर नहीं करेगा। संगठन ने कहा कि लैम्ब्डा वेरिएंट को बेहतर ढंग से समझने के लिए और अधिक स्टडी की जरूरत है। बता दें वायरस के किसी भी स्वरूप को चिंताजनक तब बताया जाता है जब वैज्ञानिक मानते हैं कि वह अधिक संक्रामक है तथा गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। वेरिएंट की पहचान करने वाली जांच, उपचार और टीके भी इसके खिलाफ कम प्रभावी हो सकते है।
 

18 मई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

18 मई : कोविड-19 पर ताज़ा जानकारी

भारत में सक्रिय मामलों कम होकर 7,98,656 तक पहुंचे, जो 73 दिनों बाद आठ लाख से कम हो गये हैं।

पिछले 24 घंटों में भारत में 62,480 नये मामले दर्ज हुये।

अब तक पूरे देश में कुल 2,85,80,647 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले 24 घंटों के दौरान 88,977 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले लगातार 36वें दिन दैनिक नये मामलों की तुलना में दैनिक रिकवरी अधिक रही।

रिकवरी दर बढ़कर 96.03 प्रतिशत पहुंची।

साप्ताहिक पॉजीटिविटी दर पांच प्रतिशत से नीचे कायम। वर्तमान में यह 3.80 प्रतिशत है।

दैनिक पॉजिटिविटी दर 3.24 प्रतिशत है, जो लगातार 11वें दिन पांच प्रतिशत से कम पर कायम है।

 

जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ, अभी तक कुल 38.71 करोड़ से अधिक जांचें की जा चुकी हैं।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक वैक्सीन की 26.89 करोड़ डोज लगाई गई है। 

अभी तक इतने ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने पूरे देश में ऑक्सीजन की डिलीवरी पूरी की...

अभी तक इतने ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने पूरे देश में ऑक्सीजन की डिलीवरी पूरी की...

भारतीय रेल सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश की सेवा में 32000 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अभी तक भारतीय रेल से देश के विभिन्न राज्यों में 1834 से अधिक टैंकरों में लगभग 32095 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन(एलएमओ) पहुंचाई गई है। ज्ञात हो कि 444 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने अपनी यात्रा पूरी कर विभिन्न राज्यों को सहायता पहुंचाई है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश के दक्षिणी राज्यों में 17700 एमटी से ज्यादा तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।  ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा देश के दक्षिणी राज्यों तेलंगाना, आंध्र प्रदेश,कर्नाटक और तमिलनाडु को क्रमशः 3200, 4000 और 4200 और 5600 एमटी से अधिक एलएमओ पहुंचाई गई है। इस विज्ञप्ति के जारी होने तक 3 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ी14 टैंकरों में 258एमटी से अधिक एलएमओ लेकर चल रही हैं।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 55 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करने के साथ अपना काम प्रारंभ किया था।

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड,कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश,आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश,झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

इस विज्ञप्ति के जारी होने तक महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797, मध्य प्रदेश में 656एमटी,दिल्ली में 5722एमटी, हरियाणा में 2354एमटी, राजस्थान में 98 एमटी, कर्नाटक में 4227 एमटी, उत्तराखंड में 320एमटी, तमिलनाडु में 5674एमटी, आंध्र प्रदेश में 4037एमटी, पंजाब में 225एमटी, केरल में 513एमटी, तेलंगाना में 3255एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 560 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों में लगभग 39 नगरों /शहरों में एलएमओ पहुंचाई है। इन शहरों में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची शामिल हैं।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान,तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्राथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि तेज संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें।

यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए।

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही गतिशील कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी। 

कोरोना की तीसरी लहर के दौरान बच्चों में व्यस्कों के मुकाबले कम खतरे की संभावना,  डब्ल्यूएचओ और एम्स के नए अध्ययन में दावा

कोरोना की तीसरी लहर के दौरान बच्चों में व्यस्कों के मुकाबले कम खतरे की संभावना, डब्ल्यूएचओ और एम्स के नए अध्ययन में दावा

नई दिल्ली। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान बच्चों में व्यस्कों के मुकाबले कम खतरा होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के ताजा सीरोप्रेवेलेंस सर्वे में इस बात का दावा किया है। बता दें कि कोरोना के खतरनाक वैरिएंट को देखते हुए तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। हालांकि डब्ल्यूएचओ और एम्स का नया अध्ययन थोड़ा राहत देने वाला है।

नए सीरो सर्वे के मुताबिक सार्स कोव-2 ‘सीरो पॉजिटिविटी’ दर बच्चों में वयस्कों की तुलना में ज्यादा है और इसलिए ऐसी संभावना नहीं है कि भविष्य में कोविड-19 का मौजूदा स्वरूप दो साल और इससे अधिक उम्र के बच्चों को तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावित करेगा। ‘सीरो-पॉजिटिविटी’ रक्त में एक विशेष प्रकार की एंटीबॉडी की मौजूदगी है।

पांच राज्यों से लिए गए 10,000 सैंपल
देश में कोविड-19 की तीसरी लहर में बच्चों और किशोरों के सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच अध्ययन के नतीजे आए हैं। अध्ययन के अंतरिम नतीजे मेडआरक्सीव में जारी किए गए हैं जो एक प्रकाशन पूर्व सर्वर है। ये नतीजे 4,509 भागीदारों के मध्यावधि विश्लेषण पर आधारित हैं। इनमें दो से 17 साल के आयु समूह के 700 बच्चों को जबकि 18 या इससे अधिक आयु समूह के 3,809 व्यक्तियों को शामिल किया गया। ये लोग पांच राज्यों से लिए गए थे।

आंकड़े जुटाने की अवधि 15 मार्च से 15 जून के बीच की थी। इन्हें पांच स्थानों से लिया गया, जिनमें दिल्ली शहरी पुनर्वास कॉलोनी, दिल्ली ग्रामीण (दिल्ली-एनसीआर के तहत फरीदाबाद जिले के गांव), भुवनेश्वर ग्रामीण क्षेत्र, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र और अगरतला ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं।

एम्स और डब्ल्यूएचओ ने मिलकर किया अध्ययन
ये नतीजे बहु-केंद्रित, आबादी आधारित, उम्र आधारित सीरो मौजूदगी अध्ययन का हिस्सा है, जिसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया और डिपार्टमेंट फॉर सेंटर ऑफ मेडिसीन के प्रोफेसर पुनीत मिश्रा, शशि कांत और संजय के राय सहित अन्य विशेषज्ञों द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन यूनिटी अध्ययनों के तहत किया जा रहा है।

यह अध्ययन पांच चयनित राज्यों में कुल 10,000 की प्रस्तावित आबादी के बीच किया जा रहा है। नतीजों में कहा गया है, ‘‘सीरो मौजूदगी 18 साल से कम उम्र के आयु समूह में 55.7 फीसदी और 18 साल से अधिक उम्र के आयु समूह में 63.5 प्रतिशत है। वयस्कों और बच्चों के बीच मौजूदगी में सांख्यिकी रूप से कोई मायने रखने वाला कोई अंतर नहीं है।

अध्ययन के नतीजे के मुताबिक शहरी स्थानों (दिल्ली में) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में सीरो पॉजिटिविटी दर कम पाई गई। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों में वयस्कों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सीरो पॉजिटिविटी पाई गई।
 
आइए एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर

आइए एक नज़र डालते हैं आज के कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी नवीनतम जानकारी पर

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराकर उनकी मदद कर रही है। भारत सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को टीकों की सीधी खरीद की सुविधा भी प्रदान कर रही है। जांच, बीमारी का पता लगाने, उपचार और कोविड उपयुक्त व्यवहार के साथ-साथ महामारी की रोकथाम और प्रबंधन के लिए टीकाकरण भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न स्तंभ है।

कोविड-19 टीकाकरण की तीसरे चरण की उदारीकृत और त्वरित रणनीति का कार्यान्वयन एक मई 2021 से शुरू हो गया है।

रणनीति के तहत, हर महीने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) द्वारा मंजूरी प्राप्त किसी भी निर्माता के टीकों की 50% खुराक भारत सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। भारत सरकार ये खुराक राज्य सरकारों को पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसा कि पहले किया जा रहा था।

भारत सरकार ने अब तक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड टीके की 27.28 करोड़ से अधिक खुराक (27,28,31,900) मुफ्त श्रेणी और राज्यों द्वारा सीधी खरीद की श्रेणी के माध्यम से प्रदान की है। इसमें से कुल खपत (अपव्यय सहित) 25,10,03,417 खुराक (आज सुबह आठ बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 2.18 करोड़ से ज्यादा (2,18,28,483) खुराक उपलब्ध हैं जिन्हें दिया जाना बाकी है।

इसके अलावा टीके की 56,70,350 से ज्यादा खुराक प्रक्रियारत हैं और अगले तीन दिनों में राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों को प्रदान कर दी जाएंगी। 

17 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

17 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 8,26,740 हुए; 71 दिनों के बाद सबसे कम

पिछले 24 घंटे में 67,208 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए

देश में अब तक कुल 2,84,91,670 लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में 1,03,570 लोग कोविड-19 से उबरे

लगातार 35वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 95.93 प्रतिशत हुआ 

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट पांच प्रतिशत से कम बना हुआ है, इस समय 3.99 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 3.48 प्रतिशत, लगातार 10वें दिन पांच प्रतिशत से कम

 

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 38.52 करोड़ जांच की गयी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक टीके की 26.55 करोड़ खुराक दी गयीं 

इन 7 चीजों में होती है बहुत ज्यादा शुगर, डायबिटीज मरीज रहें दूर

इन 7 चीजों में होती है बहुत ज्यादा शुगर, डायबिटीज मरीज रहें दूर

भारत भारत में शुगर के मरीज सबसे अधिक है। देश शुगर के मामलों में टॉप देशों में शुमार है। उन्हें अपने खानपान का खासतौर पर ध्यान रखना जरूरी होता है। शुगर आने पर आपको कई प्रकार के फल और अन्य चीजों के सेवन से बचना चाहिए जिनमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। ऐसा इसलिए शुगर होने पर मोटापा, दिल की बीमारी, कैंसर सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कहा जा सकता है आपको अपनी लाइफस्टाइल में भी बदलाव करना पड़ता है। शुगर बढ़ने पर आपको शुगर इंटेक वाले फल और चीजों से बचना चाहिए। अक्सर हम मीठे फलों का भी सेवन करने लग जाते हैं यह सोचकर की वह तो नेचरल है। लेकिन ऐसा नहीं है उसका भी असर जरूर होता है।
तो जानते हैं 7 ऐसे कौन से फल और चीजें हैं जिससे शुगर की मात्रा अधिक होती है -
1.सफेद चावल- चावल का सेवन बहुत कम और रोज करने से बचना है। शुगर के मरीजों को इसका सेवन सप्ताह में एक बार से ज्यादा नहीं करना चाहिए। इनमें कब्र्स की मात्रा बहुत अधिक होती है। और कब्र्स हमारे शरीर में शुगर बनाते हैं। कई बार चावल खाने या उसके अधिक सेवन से शुगर की मात्रा इतनी अधिक बढ़ जाती है कि इंसुलिन भी कंट्रोल नहीं कर पाता है।
2.ज्यूस- फल मीठे होते हैं उन्हें खाने से हमें एनर्जी मिलती है। लेकिन आप शुगर के मरीज है तो आपको ज्यूस नहीं लेना चाहिए। इसमें मौजूद विटामिन और खनिज अधिक मात्रा में होते हैं और फाइबर की मात्रा कम होती है। वहीं अगर देखा जाए तो एक गिलास ज्यूस में डेढ़ फल लग जाते हैं। इसलिए ज्यूस का सेवन नहीं करना चाहिए। इस जगह पर रॉ फलों का ही सेवन करें।

3.फ्लेवर्ड कॉफी- यह बहुत अच्छी लगती है लेकिन इसमें चीनी की मात्रा अधिक होती है। जिसके सेवन से आपका शुगर इनटेक बढ़ सकता है। ऐसे में आपके लिए एक और परेशानी का सबब बन सकता है। इसलिए इस तरह की कॉफी नहीं पीएं जिसमें शुगर अधिक हो।
4.केचप- जंक फूड और अन्य फूड में खाने का स्वाद बढ़़ाता है लेकिन केचप का सेवन शुगर मरीजों के लिए घातक है। जी हां, इसके एक चम्मच केचप में एक चम्मच चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए केचप का सेवन नहीं के बराबर करना चाहिए।

5.फ्लेवर्ड दही- दही सेहत के लिहाज से बहुत अधिक अच्छा होता है। कम वसा वाले दही में स्वाद नहीं होने पर उनमें बहुत सारी शक्कर घोल दी जाती हैं। लेकिन आपको ऐसे दही का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही कम वसा वाले दही में फुल फैट दही के समान लाभ बहुत अधिक नहीं होते हैं।
6.बारबेक्यू सॉस- यह बहुत स्वादिष्ट होता है। लेकिन बहुत अधिक चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका सेवन करने से पहले स्टीकर पर जरूर चेक कर लें इसमे कितनी शक्कर है। उस अनुसार आप इसका सेवन करें।

7.क्रीम डेयरी प्रोडक्ट्स- फुल क्रीम, आइसक्रीम, चीज में फैट कई गुना अधिक होता है। शुगर के मरीज होने के नाते लो फैट पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
 

भारत में कोरोना का एक नया वेरिएंट मिला, हो सकता है ख़तरनाक

भारत में कोरोना का एक नया वेरिएंट मिला, हो सकता है ख़तरनाक

भारत ने मंगलवार को औपचारिक रूप से स्वीकार किया कि AY.1 कोरोना वायरस का एक वेरिएंट मौजूद है जो कि डेल्टा वेरिएंट के क़रीब है. AY.1 या B.1.617.2.1 का एक म्यूटेशन है, जिसे K417N कहा जा रहा है. इसे काफ़ी संक्रामक बताया जा रहा है और बीटा वेरिएंट से जुड़ा है. पहली बार इसकी पहचान दक्षिण अफ़्रीका में हुई थी. मंगलवार को कोविड-19 टीकाकरण पर बने राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह के प्रमुख वीके पॉल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''पहली बार इसकी पहचान मार्च महीने में यूरोप में हुई थी लेकिन दो दिन पहले ही यह लोगों में पाया गया है. हाँ, नया कोरोना का नया वैरिएंट पाया गया है. लेकिन अभी चिंता की कोई बात नहीं है. हमें इसके बारे में अभी बहुत कुछ पता नहीं है. हम इसे लेकर अध्ययन कर रहे हैं. भारत में इसके संक्रमण को लेकर भी अध्ययन किया जा रहा है.'' सोमवार को अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू में एक रिपोर्ट छपी थी कि भारत की पाँच प्रयोगशालाओं की ओर से नए वेरिएंट का डेटा मई और जून में GISAID को सौंपा गया था. GISAID एक वैश्विक संस्था है. ब्रिटेन के निकाय पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा है कि GISAID में भारत से 63 जीनोम सात जून तक आए हैं. इनमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में AY.1 वेरिएंट के सबूत मिले हैं. डॉ पॉल ने कहा, ''म्यूटेशन एक जैविक तथ्य है. हमें बचाव के तरीक़े अपनाने हैं. हमें इसे फैलने का अवसर मिलने से रोकना होगा.'' डॉ पॉल ने कहा कि भारत में सोमवार को नोवावैक्स वैक्सीन आ गई. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि नोवावैक्स वैक्सीन का उत्पादन भारत में बड़े पैमाने पर होगा. डॉ पॉल ने कहा, ''हम जानते हैं कि नोवावैक्स बिल्कुल सुरक्षितहै और इसकी एफिकेसी दर भी काफ़ी उच्च स्तर की है. हमें गर्व होना चाहिए कि भारत में अब एक और वैक्सीन मोजूद है.'' नोवावैक्स अमेरिकी कंपनी है और वो भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर NVX-CoV2373वैक्सीन बना रही है. 

भारत में 70 दिनों बाद कोविड के सक्रिय मामले आई...

भारत में 70 दिनों बाद कोविड के सक्रिय मामले आई...

भारत में लगातार दैनिक नये मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। देश भर में पिछले 24 घंटों के दौरान 62,224 दैनिक नये मामले दर्ज किये गये। आज नौवें दिन लगातार नये मामले रोजाना के हिसाब से एक लाख के नीचे रहे। यह केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के समवेत प्रयासों का नतीजा है।
भारत में सक्रिय मामलों में लगातार गिरावट भी देखी जा रही है। देश में आज सक्रिय मामलों की संख्‍या 8,65,432 रही। 70 दिनों बाद कोविड मामले नौ लाख से नीचे पहुंचे हैं।
पिछले 24 घंटों के दौरान सक्रिय मामलों में कुल 47,946 की कमी देखी गई। देश के कुल पॉजिटिव मामलों में सक्रिय मामले अब महज 2.92 प्रतिशत हैं। कोविड-19 से ज्यादा से ज्यादा लोग उबर रहे हैं, जिसके आधार पर लगातार 34वें दिननये मामलों की तुलना में रोजाना स्वस्थ होने वाले लोगों की तादादज्यादा बनी रही। पिछले 24 घंटों के दौरान 1,07,628 मरीज स्वस्थ हुये।

पिछले 24 घंटों में दैनिक नये मामलों के मुकाबले 45 हजार (45,404) से अधिक रिकवरी दर्ज की गई। महामारी की शुरुआत से संक्रमित होने वाले लोगों में से कोविड-19 से 2,83,88,100 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। पिछले 24 घंटों में 1,07,628 लोग स्वस्थ हुये। इस तरह रिकवरी दर 95.80 प्रतिशत बैठती है, जिसमें बढ़ोतरी का रुझान देखा जा रहा है। देश में जांच क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा किया गया है, जिसके आधार पर देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कुल 19,30,987 जांचें की गईं। अब तक भारत में कुल मिलाकर 38.33 करोड़ (38,33,06,971) से अधिक जांचें हो चुकी हैं।

एक तरफ देश में जांच क्षमता बढ़ाई गई, तो दूसरी तरफ साप्ताहिक पॉजिटिव दर में लगातार कमी भी देखी गई। मौजूदा समय में साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 4.17 प्रतिशत है, जबकि दैनिक पॉजिटिविटी दर आज 3.22 प्रतिशत रही। यह लगातार नौवें दिन पांच प्रतिशत से कम पर बरकरार रही।

भारत ने कल 26 करोड़ टीकाकरण कवरेज का आंकड़ा पार कर लिया। आज सात बजे सुबह तक मिली रिपोर्ट के अनुसार 36,17,099 सत्रों के जरिये वैक्सीन की कुल 26,19,72,014 खुराकें लगाई गईं। पिछले 24 घंटों में 28,00,458 खुराकें लगाई गईं।

एक नज़र आज के कोविड-19 टीकाकरण अपडेट पर

एक नज़र आज के कोविड-19 टीकाकरण अपडेट पर

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में, भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क कोविड टीके उपलब्ध कराने के जरिये उनकी सहायता करती रही है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा टीकों की प्रत्यक्ष खरीद को भी सुगम बनाती रही है। टीकाकरण टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट एवं कोविड से बचने के लिए सामाजिक व्‍यवहार के साथ-साथ महामारी के नियंत्रण तथा प्रबंधन के लिए भारत सरकार की व्यापक रणनीति का एक अंतरंग हिस्सा है। कोविड-19 टीकाकरण की उदार और त्वरित चरण-3 रणनीति का कार्यान्वयन 1 मई 2021 से आरंभ हुआ है। इस रणनीति के तहत, प्रत्येक महीने किसी भी विनिर्माता की सेंट्रल ड्रग लैबोरेट्ररी (सीडीएल) स्वीकृत टीकों के 50 प्रतिशत की खरीद भारत सरकार द्वारा की जाएगी। यह राज्य सरकारों को पूरी तरह नि:शुल्क रूप से इन टीकों को उपलब्ध कराना जारी रखेगी जैसाकि यह पहले से ही करती रही है। भारत सरकार ने अभी तक नि:शुल्क श्रेणी और प्रत्यक्ष राज्य खरीद श्रेणी के जरिये राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 27.28 करोड़ से अधिक (27,28,31,900) टीके उपलब्ध कराये हैं। इनमें से, अपव्यय सहित कुल उपभोग 25,45,45,692 टीकों (आज सुबह 8 बजे तक उपलब्ध डाटा के अनुसार) का हुआ है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी भी लगाये जाने के लिए 1,82 करोड़ से अधिक (1,82,86,208) कोविड टीके उपलब्ध हैं। 

16 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

16 जून : कोविड-19 से जुड़ी नवीनतम जानकारी

भारत में कोविड-19 के सक्रिय मामले और घटकर 8,65,432 हुए

सक्रिय मामलों की संख्या 70 दिनों के बाद नौ लाख से कम हुई

पिछले 24 घंटे में 66,224 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए

देश में अब तक कुल 2,83,88,100 लोग कोविड-19 से उबरे

पिछले 24 घंटे में 1,07,628 लोग कोविड-19 से उबरे

लगातार 34वें दिन बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या दैनिक नये मामलों की संख्या से ज्यादा

रिकवरी रेट बढ़कर 95.80 प्रतिशत हुआ

साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट गिरकर पांच प्रतिशत से कम हुआइस समय 4.17 प्रतिशत

दैनिक पॉजिटिविटी रेट 3.22 प्रतिशतलगातार नौवें दिन पांच प्रतिशत से कम

 

 

जांच की क्षमता में काफी वृद्धि – अब तक कुल 38.33 करोड़ जांच की गयी

राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक टीके की 26.19 करोड़ खुराक दी गयीं 

 ग्रीन फंगस : अब देश के इस राज्य में आया ग्रीन फंगस का पहला मामला

ग्रीन फंगस : अब देश के इस राज्य में आया ग्रीन फंगस का पहला मामला

मध्य प्रदेश के इंदौर में अब ग्रीन फंगस (Green Fungus )का मरीज सामने आया है और ये देश का पहला मामला है.दरअसल इंदौर में कोरोना की दूसरी लहर ने जमकर कहर मचाया था, जो अब बहुत हद तक शांत भी हो चुकी है. लेकिन अब इंदौर में बीमारियों के जंजाल में एक नए फंगल इंफेक्शन का मामला सामने आया है, जो देश का पहला मामला है. दरअसल, पोस्ट कोविड बीमारियों के लिहाज से अब तक ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के मामले सामने आए थे. लेकिन इंदौर में अब देश का पहला ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें मरीज 90 दिन के इलाज के बाद ग्रीन फंगस का शिकार हुआ है.

लंग्स में मिला ग्रीन फंगस
स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी डॉ. अपूर्वा तिवारी ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर रवि डोशी ने बताया कि 34 वर्षीय विशाल श्रीधर नामक युवक पिछले डेढ़ माह से अरविंदो हॉस्पिटल में अपना इलाज करा रहे थे, लेकिन उनके लंग्स का 90 प्रतिशत इन्वॉल्वमेंट खत्म नही हो रहा था जबकि उनका हर मुमकिन इलाज किया गया था. इसके अरविंदो हॉस्पिटल में उनके लंग्स की जांच कराई गई तो पता चला कि मरीज के लंग्स में ग्रीन कलर का एक फंगस मिला है. जिसे म्युकर नहीं कहा जा सकता है. इसलिये उसे म्यूकर मायकोसिस नही कहा जा सकता है.
 


 

उन्होंने बताया कि उसके हरे रंग के कारण उसे ग्रीन फंगस नाम दिया गया है. डॉ. अपूर्वा ने बताया कि ये देश मे पहला केस है जिसमें ग्रीन कलर का फंगस किसी इंसान के लंग्स में मिला है. वही उन्होंने बताया कि निजी चार्टर्ड प्लेन से विशाल श्रीधर नामक मरीज को मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल रैफर कर दिया गया है. वही डॉ.रवि डोशी लगातार मुम्बई के डॉक्टर्स के संपर्क रहकर मरीज की कंडीशन पर नजर बनाए हुए हैं.
 


यंग मरीज के अंदर मिला ग्रीन फंगस
 

दूसरी तरफ, मरीज का इलाज कर रहे अरविन्दो हॉस्पिटल के डॉ रवि डोशी ने बताया कि यह ग्रीन फंगस यंग मरीज़ के अंदर मिला है. यह उस व्यक्ति के सायनस में लंग्स में ओर ब्लड में मिला है. यह व्यक्ति पहले से कोविड मरीज थे जिससे उनके फेफड़े काफ़ी डेमेज थे. पिछले दो माह से कोविड का इलाज चल रहा था. डिस्चार्ज होने के बाद में यह फिर बीमारी सामने आई जांच की गई, उसके बाद एसपरजीलस की बात सामने आई.

 


डॉ रवि डोशी, अरविन्दो हॉस्पिटल टीवी चेस्ट विभाग प्रोफेसर ने बताया कि एसपरजिल्स के लक्षण की बात करें तो नाक में से खून आना, नाक बंद होने से सर्दी हो जाना, सरदर्द करना और बुखार आना ऐसे कई प्रकार के लक्षण है. उन्होंने कहा कि हमने अभी कई समय से कोविड-19 के इलाज के दौरान यह ऐसा पहला मामला है जहां जो कि ऐसे लक्षण सामने आए हैं. यह उतना ही घातक है जितना कोविड या म्यूकोमाइक्रोसिस. गौरतलब है कि इसस पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि फंगस को किसी भी रंग के नाम से नहीं पहचाना जाना चाहिए.