सेहतमंद शरीर हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है और स्वस्थ रहने के लिए सही दिनचर्या से लेकर खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. ज्यादातर लोग खुद पर ध्यान देना तब शुरू करते हैं, जब उन्हें अपनी किसी बीमारी का पता चलता है. बिना किसी बीमारी के भी शरीर के कुछ लक्षण ऐसे हैं जो ये बताते हैं कि आप अंदर से स्वस्थ नहीं हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में.
खराब स्किन-
आपकी स्किन भी आपके सेहत के बारे में बहुत कुछ बताती है. मुंहासे की समस्या को खराब लाइफस्टाइल, हाइजीन, नींद, पाचन और खान-पान से जुड़ा माना जाता है. इन लक्षणों की पहचान कर अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार करें.
आंखों का साफ न होना-
आंखों में चमक ना होना भी कई बातों की तरफ इशारा करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंखों के ऊतकों का सफेद होना स्वस्थ आंखों की निशानी है. अगर आपकी आंखे पीली रहती हैं तो ये गॉलब्लैडर, लिवर या पैंक्रियास की समस्या से जुड़ा हो सकता है. वहीं, आंखों का लाल होना भी खराब सेहत का संकेत देता है जैसे कि नींद ना पूरी होना या आंखों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना.
नाखून का रंग और बनावट-
नाखूनों के आकार, बनावट और रंग से भी सेहत के बारे में पता लगाया जा सकता है. नाखूनों का पीला होना बताता है कि आपके शरीर में सही ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो रहा है और फ्लूड की मात्रा ज्यादा नहीं बन रही है. हालांकि, कुछ मामलों में ये स्मोकिंग या खराब नेलपॉलिश की वजह से भी हो सकता है. अगर आपके नाखून सही तरीके से नहीं बढ़ते हैं तो आपमें न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है.
खर्राटे लेना-
जोर-जोर से खर्राटे लेना किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है. स्लीप एपनिया, मोटापा, दिल से जुड़ी बीमारी और स्ट्रोक जैसी हेल्थ कंडीशन की वजह से भी खर्राटे आते हैं. ज्यादातर लोग खर्राटों को आम लक्षण समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ये एक संकेत हैं कि आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हैं. अगर आप भी अक्सर खर्राटे लेते हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
पेट में गैस बनना-
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक स्वस्थ व्यक्ति औसतन प्रतिदिन 10 से 20 बार गैस पास करता है. अगर आपको इससे ज्यादा बार और लगातार गैस बनती है तो ये एक संकेत हो सकता है कि आप उतने स्वस्थ नहीं हैं जितना आप सोचते हैं. हालांकि, खाने-पीने की कुछ चीजें भी गैस बनाने का काम करती हैं लेकिन ये सेहत से भी जुड़ा हो सकता है. लैक्टोज इंटॉलरेंस, खराब पाचन और सीलिएक बीमारी में भी शरीर में बहुत ज्यादा गैस बनती है.
यूरीन का रंग-
आपके यूरीन का रंग भी बताता है कि आप कितने स्वस्थ हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक, यूरीन के रंग और स्मेल से कई बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. अगर आपके यूरीन का रंग बहुत गाढ़ा है और इससे गंध आती है तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
हमेशा थकान लगना-
नींद ना पूरी होने या बहुत ज्यादा काम करने से भी थकावट होती है. इसके अलावा डिहाइड्रेशन, आयरन की कमी, एक्सरसाइज ना करने और बहुत ज्यादा मीठा खाने से भी थकान होने लगती है. अगर आपको अक्सर थकान रहती है तो इन संकेतों पर गौर करना चाहिए.
ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
सेहत बनाने की जब बात चलती है तो सबसे पहले घी का नाम ही जेहन में उभरता है. घी के फायदे सभी जानते हैं. इसे सेहत का खजाना माना जाता है. हालांकि इसके कुछ नुकसान भी हैं जिन पर कम बात होती है. आज हम घी से होने वाले नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं.
- गर्भवती महिलाओं के लिए लेबर पेन से पहले तो घी फायदेमंद है लेकिन प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ये घातक हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के शुरू के कुछ महीनों में घी खाने से बचें।
- अगर आपको घी बहुत पसंद हैं तो सावधान हो जाएं. घी अधिक खाने से अपच और लूज-मोशन की समस्या हो सकती है.
- सर्दी या कफ की जब शिकायत हो तो घी से दूरी बना लेनी चाहिए. घी के सेवन से कफ बनने लगता है और यह समस्या बहुत बढ़ सकती है.
- घी को शहद के साथ खाने से बचना चाहिए. यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.
ऐसे जाने घी नकली है या असली
क्या कभी आपने सोचा है कि जो घी आप खा रहे हैं वह असली ही है. दरअसल खाने की चीजों में मिलावट आज एक बड़ी समस्या बन गई है. मिलावटी चीजें हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं. मिलावट वाला घी भी हमारे शरीर को के लिए नुकसानदायक है.
कई लोग घी घर में ही बनाते हैं लेकिन जो लोग घी बाजार से खरीदते हैं उन्हें यह जरूर जांचना चाहिए कि उनका घी असली है नकली.
ये हैं घी की शुद्धता को जांचने की कुछ आसान तरीके:-
- एक बर्तन में एक चम्मच घी डाले फिर इसमें एक चुटकीचीनी और थोड़ा सा हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालकर इन्हें अच्छे से मिला लें. इसके बाद अगर घी का रंग बदलकर लाल हुआ तो यानी ये नकली घी है.
- घी में 4-5 बूंदे आयोडीन की डालें और फिर दोनों चीजों को मिला लें. इसके बाद अगर घी नीले रंग का हुआ, तो मतलब इसमें आलू की मिलावट की गई है.
- अपने हाथों की उल्टी तरफ घी लगाएं और फिर दोनों हाथों को आपस में रगड़ लें. अगर घी के अंदर से दाने निकले तो ये नकली घी की पहचान है.
- पहले हाथों पर घी लगाएं और फिर 15 मिनट बाद उसे सूंघे, अगर आपको घी में खूशबू आना बंद हो जाए, तो यानी ये नकली घी है.
ये खबर रिसर्च के दावे पर है. just36News इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर लेवल के सेहतमंद प्रबंधन की जरूर होती है. सेहतमंद डाइट और जीवन शैली ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. सर्दी के मौसम में गर्म ड्रिंक्स और स्वादिष्ट भोजन में शामिल होने की संभावना ज्यादा रहती है. गैर सेहतमंद फूड्स के ज्यादा खाने से ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है. इसके अलावा, सर्दी के मौसम में आप बिस्तर के अंदर और शारीरिक गतिविधियों से दूर रहना पसंद करते हैं.
ये सभी फैक्टर ठंडे तापमान के दौरान डायबिटीज के प्रबंधन को ज्यादा मुश्किल बना देते हैं. वक्त रहते एहतियात आपकी पेचीदगियों को दूर करने में मदद कर सकता है और सेहतमंद ब्लड शुगर लेवल बनाए रखता है. इस सर्दी के मौसम में आसान एहतियात का पालन करें और प्रभावी तरीके से डायबिटीज को नियंत्रित करें. आपको आसानी के लिए चंद टिप्स का जानना कारगर होगा.
व्यायाम को न छोड़ें
शारीरिक व्यायाम ब्लड शुगर लेवल के सेहतमंद नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. आपको व्यायाम पर बहुत ज्यादा समय खर्च करने की जरूरत नहीं है. जोरदार व्यायाम अचानक ब्लड शुगर में गिरावट का कारण बन सकता है. इससे बचने के लिए आप धीमी शुरुआत कर सकते हैं और सेहतमंद ब्लड शुगर के लिए डॉक्टर से नियमित मुलाकात करें.
तनाव का प्रबंध करें
घर में रहते हुए काम, शारीरिक गतिविधि की कमी, संक्रमण का खौफ और अंदर ठहरना तनाव में योगदान कर सकते हैं. तनाव के उच्च स्तर से भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है. इसलिए डायबिटीज को प्रभावी तरीके से निंयत्रित करने के लिए तनाव प्रबंधन रणनीतियों को अपनाएं.
नियमित ब्लड शुगर लेवल चेक करें
अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो आपको नियमित अपना ब्लड शुगर लेवल चेक कराते रहना चाहिए. इससे आपको प्रमुख उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिलेगी और समय रहते काबू कर पाएंगे. अगर ब्लड शुगर लेवल में कोई बड़ा बदलाव दिख रहा है, तो डॉक्टर से मुलाकात कर मदद लें.
गर्म रहें और पैरों को सेहतमंद रखें
कपड़ों के ज्यादा परत, गर्म खाना जैसे सूप का इस्तेमाल कर खुद को गर्म रखें. इसके अलावा, अपने पैरों की देखभाल करें क्योंकि डायबिटीज पैर की पेचीदगी के खतरे को बढ़ाती है. इसलिए उसे साफ और नम बनाए रखें. बेकाबू ब्लड शुगर लेवल से कई स्वास्थ्य समस्याएं जुड़ी हुई हैं. ये उसी तरह आपके अंगों को प्रभावित कर सकता है. पुरानी स्थिति के निरंतर प्रबंधन से डायबिटीज के रोगियों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है.
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हार्ट अटैक अचानक कभी भी आ सकता है, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं। अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं। अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके-
सीने में असहजता –
यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शिकार बना सकती है। खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना। इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें।
थकान –
बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है।
सूजन –
जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, तो शिराएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है। इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है।
सर्दी का बना रहना –
लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधित लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है। जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है।
चक्कर आना -
जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है। ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।
सांस लेने में कठिनाई -
इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है। जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
नोट: इन 6 लक्षणों में से किसी लक्षण के सामने आने या महसूस होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं या फिर यथासंभव सलाह लें ...
अगर आप सोते समय मुंह से निकलने वाली लार से परेशान है, तो हम आप इस लेख में कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं... तो आइए जानते हैं कैसे आप आसानी से इस समस्या से निपट सकते हैं।
लार की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आंवला का पाउडर का उपयोग आपकी इस समस्या से राहत दिला सकता है। जी हां अगर आप खाना खाने के बाद गुनगुने पानी में आंवला का पाउडर मिलाकर इसका सेवन करते है, तो कुछ ही दिनों में लार की समस्या दूर हो जाएंगी।
फिटकरी के बारे में तो आप जानते ही होंगे अधिकतर घरों में फिटकरी मौजूद भी होती है। चलिए अब जानते हैं कि आपको फिटकरी का इस्तेमाल करना कैसे हैं? आपको बस पानी में फिटकरी को अच्छे से मिलाकर दिन में एक से दो बार इसका कुल्ला करना है। ऐसा करने से लार की समस्या से आपको राहत मिलेंगी।
मुंह की लार से राहत पाने के लिए दालचीनी का उपयोग भी काफी फायदेमंद होता है। आपको बस दालचीनी की चाय बनाना है। और इसमें आधा चम्मच शहद मिलाना है। अब इसका नियमित रूप से सेवन करें। धीरे-धीरे लार की समस्या अपने आप ही गायब हो जाएंगी।
लार की परेशानी से राहत पाने के लिए तुलसी का पत्ता भी काफी कारगर उपायों में से एक हैं। इसके लिए आप दिन में दो से तीन बार तुलसी के पत्ते का सेवन करें। इससे बहुत जल्द आपको लार से छुटकारा मिलेगा।
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ग्रीन टी का पीना निश्चित रूप से सेहतमंद है. कुछ लोगों का तो यहां तक दावा है कि कि इसके नियमित सेवन से वजन कम होने में मदद मिल सकती है. ग्रीन टी दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय ड्रिंक्स में से एक है. इसलिए सबसे ज्यादा उस पर रिसर्च भी हो रहा है. इससे पहले उसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य को होनेवाले फायदों पर रिसर्च किया गया है. शोधकर्ताओं ने जानने की कोशिश की है कि कैसे ग्रीन टी का नियमित सेवन दिमाग, दिल और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए मुफीद हो सकता है. ग्रीन टी की अप्रत्याशित लोकप्रियता के पीछे कुछ कारण हैं.
ग्रीन टी से स्वास्थ्य को मिलनेवाले फायदे
1. ब्लड शुगर नियंत्रण- ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट का एक किस्म कैटेचिन पाया जाता है. ये ब्लड शुगर लेवल को कम करनेवाला पाया गया है. ग्रीन टी का इस्तेमाल पाचन एंजाइमों को रोकता है जिससे रक्त प्रवाह में शुगर का स्राव धीमा हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों को ग्रीन टी पीना सुरक्षित है लेकिन इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.
ये बात सही है कि ग्रीन टी कैफीन मुक्त नहीं है और इसके इस्तेमाल से आपको ज्यादा सतर्क होने का एहसाल मिल सकता है. रात या शाम के मुकाबले ग्रीन टी को दिन में पीना बेहतर है. कैफीन के रोजाना डोज के लिए कॉफी की तुलना में ये बेहतर विकल्प हो सकता है.
2. ग्रीन टी मूड को ठीक कर सकता है- फाइटोमेडिसीन में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन टी के सेवन का संबंध कम चिंतित महसूस करने से जुड़ा है. ग्रीन टी में एल थेनाइन की मौजूदगी की पहचान मूड ठीक करने वाले एक यौगिक की होती है.
3. ये आपके दिमाग के लिए ठीक है- ग्रीन टी में कैटेचिन एंटी ऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल का एक किस्म है जो आपके दिमागी सेहत के लिए मुफीद हो सकता है. ये फ्री रेडिकल्स के चलते क्षति से शरीर को सुरक्षा मुहैया कराता है. ग्रीन टी पर 21 अलग रिसर्च से खुलासा हुआ कि ग्रीन टी के पीने से याद्दाश्त और ध्यान में सुधार हो सकता है.
4. दिल की सेहत के लिए अच्छा है- कैटेचिन के साथ ग्रीन टी में फ्लॉओनॉल होता है. ये भी एंटी ऑक्सीडेंट का एक किस्म है जो खराब कोलेस्ट्रोल को कम कर सकता है. इसके बदले आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है.
इन तमाम फायदों को देखकर कहा जा सकता है ग्रीन का सेवन सिर्फ मध्यम मात्रा में किया जाना चाहिए. आप सुनिश्चित करें कि ऑर्गेनिक और ग्रीन टी की प्राकृतिक शक्ल आपके हाथ में हो क्योंकि बाजार में इसकी कई किस्में पाई जाती हैं.
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अगर आप मुंह से दुर्गंध आने की समस्या से परेशान है, तो आप कुछ आसान से उपाय आजमाकर इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं, जी हां मुंह से दुर्गंध आने की वजह से कई बार शर्मिदगी भी होती है। और लोग आपसे दूर भगने लगते है, अगर आप भी इन समस्या से निजात पाना चाहते हैं, तो हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे है जिनका सेवन कर आप इन समस्या से राहत पा सकते है।
दही के सेवन से आप मुंह से दुर्गंध की समस्या से निजात पा सकते है। सादा दही खाने से मुंह में अच्छे जीवाणु जन्म लेते हैं, जिससे की बुरे जीवाणुओं की संख्या कम हो जाती है। कम से कम एक सप्ताह तक आप यदि आप सादे दही का सेवन करते है तो मुंह से दुर्गंध अपने आप धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
दालचीनी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसमें रोगाणुरोधी तत्व मौजूद होते है। दालचीनी के सेवन से मुंह से आने वाली बदबू को कम कर देता है। इसके साथ ही दालचीनी के सेवन से दांत स्वस्थ भी रहते हैं।
अगर आप अदरक का नियमित सेवन करते है, तो मुंह से दुर्गंध की समस्या से जल्द छुटकारा मिल सकता है। अदरक के सेवन से पाचन तंत्र भी अच्छी रहता है।
मुंह के दुर्गध से छुटकारा पाने के लिए सौंफ का नियमित सेवन करें। खाना खाने के बाद नियमित रूप से सौंफ खाने से मुंह की दुर्गंध से राहत मिलती है। इसके नियमित सेवन से मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाती है।
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चमकते और सुंदर बालों की चाहत रखते है तो घर में रखी चायपत्ती आपकी ये इच्छा पूरी कर सकती है। चायपत्ती का पानी बालों में लगाने से आपको शाइन करते हुए बाल तो मिलेंगे ही साथ ही आज के युवा वर्ग की सबसे बड़ी समस्या 'सफेद बालों की समस्या' से भी निजात मिलेगा।
आइए जानें कैसे-
1. थोड़े पानी में 6 चम्मच चायपत्ती को मिलाए और अच्छी तरह से उबालें। लगभग 30 मिनट तक उबालें।
2. जब यह चायपत्ती का पानी ठंडा हो जाए तब इसे छान लें।
3. अब इस पानी को आप अपने बालों में लगाएं, आप इस पानी में चाहे तो कॉफी भी मिला सकती हैं।
4. ऐसा करने पर आपको सफेद बालों की समस्या से निजात तो मिलेगा ही, साथ ही कई और फायदे भी होंगे जैसे बालों का झड़ना कम होगा, बालों की ग्रोथ अच्छी होगी और बालों का रूखापन कम होगा।
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शिमला मिर्च का इस्तेमाल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में किया जाता है. शिमला मिर्च लाल, पीले और हरे जैसे विभिन्न रंगों में उपलब्ध हैं. यह विटामिन से भरपूर होते हैं और कई बीमारियों का एक प्रभावी इलाज हैं. विभिन्न औषधीय गुणों के साथ शिमला मिर्च कुछ स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए भी एक बढ़िया घटक है. ये अपने कई स्वास्थ्य लाभों के लिये जानी जाती है. यह विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों से समृद्ध है. यहां शिमला मिर्च खाने के कुछ स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया गया है, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए.
आंखें और त्वचा के लिए अच्छा
शिमला मिर्च का सेवन त्वचा को साफ रखने में मदद करता है. ये फुंसियों को रोकता है. इसमें विटामिन ए होता है, जो आंखों के लिए अच्छा होता है और आंखों की बीमारियों को रोकने में मदद करता है.
दिल के स्वास्थ्य के लिये लाभदायक
लाल शिमला मिर्च में मौजूद लाइकोपीन एक फाइटोन्यूट्रिएंट आपके दिल को स्वस्थ रखता है. ये वनस्पति फोलेट और विटामिन बी 6 का एक समृद्ध स्रोत है. जो होमोसिस्टीन के स्तर को कम करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है.
पाचन में सुधार करता है
अगर आप वजन करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको शिमला मिर्च की तरफ रुख करना चाहिए. शिमला मिर्च खाने से आपको फैट बर्न करने और वजन कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे आपके पाचन में भी सुधार होगा.
बालों की ग्रोथ में मददगार
शिमला मिर्च बालों की ग्रोथ में बेहद मददगार है. यह बालों को झड़ने से रोकता है और आपको घने बालों को बनाए रखने में मदद करता है.
कैंसर के खतरे को कम करता है
शिमला मिर्च कैंसर के खतरे को कम करती है क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. शिमला मिर्च में मौजूद एंजाइम एसोफैगल और गैस्ट्रिक कैंसर की रोकथाम में भी मदद करते हैं.
इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
लाल शिमला मिर्च में विटामिन सी की मात्रा काफी अधिक होती है. ये इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है.
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समारोह में या घर पर स्वादिष्ट, चटपटा या जायकेदार खाना किसे अच्छा नहीं लगता. लेकिन अगर ज्यादा खा लिया जाए, तो उत्सव का जोश ठंडा पड़ जाता है. आपको कब्ज, गैस, ऐंठन या ब्लोटिंग की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. कब्ज, ब्लोटिंग और गैस पाचन संबंधी समस्याएं हैं और ये पेट से जुड़ी हैं.
समस्याओं के दूर करने में मसाले और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल मददगार हो सकता है. सेहतमंद आंत को बढ़ाने के लिए आप उसे अपनी डाइट में शामिल करें. उससे आपकी परेशानियों में कुछ कमी होने में मदद मिलेगी.
तीन मसाले और तीन जड़ी-बूटियों के पाचन लाभ जबरदस्त हैं. उसे आप अपनी रोजाना की जिंदगी में मेन्यू का हिस्सा बना सकते हैं. अगर आप अपरिचित सामग्रियों जैसे सिंहपर्णी की जड़ से भयभीत हैं, तो चाय बनाने के लिए उसका इस्तेमाल करें. आप गर्म पानी में चाय के साथ शामिल कर जरूरत महसूस होने पर पी सकते हैं. अदरक और हल्दी थोड़ा ज्यादा मशहूर हैं. उसका इस्तेमाल चिकन सूप में भी होता है.
हल्दी
आंत्र की नियमितता और गतिशीलता को बढ़ाती है
कब्ज को रोकती है
अदरक
जी मिचलाने में राहत पहुंचाता है
पाचन तंत्र में गतिशलीलता को सुधारने के लिए अदरक पित्त और लार उत्पादन बढ़ाता है
बेचैनी को कम करने के लिए पाचन क्षेत्र में मांसपेशियों को ढीला करता है
इलायची
पाचन को उत्तेजित करता है
आंत के खराब बैक्टीरिया और संभावित अल्सर को रोकने में मदद करता है
पाचन और मेटाबोलिज्म को ज्यादा तेज कर सकता है
सिंहपर्णी की जड़
पाचन एंजाइमों को बढ़ाता है
पाचन क्षेत्र को शांत करता है
लीवर को डिटॉक्सीफाई करता है
ब्लोटिंग को कम करता है
पुदीना
पाचन की गड़बड़ी के लक्षणों को राहत देने में मदद करता है
गैस और ब्लोटिंग को घटाता है
कैमोमाइल
पाचन क्षेत्र को ढीला करने में मदद करता है
ऐंठन को रोकता है
आसान पाचन गतिशीलता को बढ़ावा देता है
फेफड़ों के स्वस्थ रहने के लिए हेल्दी डाइट जरूरी है. सिगरेट के धुएं और पर्यावरण के विषाक्त पदार्थों के संपर्क के साथ-साथ एक खराब डाइट से भी फेफड़े कमजोर हो सकते हैं.
फेफड़े ऑक्सीजन को फिल्टर करने का काम करते हैं. हमेशा हेल्दी रहने के लिए फेफड़ों का बिना रुकावट के काम करना जरूरी है. फेफड़ों को सही रखने के लिए सभी पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए. आज हम आपको बता रहे हैं कि फेफड़ों को स्वस्थ रखने किन चीजों से दूरी बना लेनी चाहिए.
प्रोसेस्ड मीट
शधकर्ताओं का मानना है कि प्रोसेस्ड मीट को संसाधित करने और संरक्षित करने में उपयोग किए जाने वाले नाइट्राइट फेफड़ों में सूजन और तनाव पैदा कर सकते हैं. बेकन, हैम, डेली मांस, और सॉसेज सभी प्रसंस्कृत मांस की श्रेणी में आते हैं.
बहुत ज्यादा शराब
आपके लीवर के लिए और आपके फेफड़ों के लिए शराब पीना बहुत बुरा है. शराब में सल्फेट्स अस्थमा के लक्षणों को खराब कर सकते हैं, और इथेनॉल आपके फेफड़ों की कोशिकाओं को प्रभावित करता है. बहुत अधिक पीने से निमोनिया और फेफड़ों की अन्य समस्याएं होने की अधिक संभावना है.
बहुत ज्यादा नमक
नमक का ज्यादा सेवन फेफड़ों की समस्याओं को बड़ा सकता है. जो लोग बहुत अधिक नमक खाते हैं, उनमें दीर्घकालिक ब्रोंकाइटिस होने की संभावना अधिक हो सकती है और एक उच्च-सोडियम आहार अस्थमा के लक्षणों को खराब कर सकता है.
सुगन्धित पेय
फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए मीठे शीतल पेय से बचने की कोशिश करें. स्वीट सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने वालों में फेफड़ों की समस्याएं होने की संभावना अधिक हो सकती है. इससे बच्चों में भी अस्थमा होने की संभावना अधिक हो सकती हैं. अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो भी बिना सोचे-समझे सॉफ्ट ड्रिंक पीना आपके फेफड़ों के लिए खराब हो सकते हैं.
अधिकतर लोग खाना खाने के बाद पेट की समस्या से परेशान रहते हैं जैसे गैस, कब्ज या पेट का खराब होना। इसका सीधा संबध होता है आपके पाचन तंत्र से। यदि आपको पेट की समस्या बार-बार परेशान करती है, तो आपका पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है। यदि आप इस परेशानी से निजात पाना चाहते है, तो आपको पाचन तंत्र को दुरूस्त रखना पड़ेगा। आइए जानते हैं कैसे आप अपने पाचन तंत्र को मजबूत बना सकते है
कुछ लोगों की आदत होती है, की वे जल्दबाजी के चलते खाना बहुत जल्दी-जल्दी खाते है। इस वजह से भोजन को अच्छी तरह से चबाते ही नहीं हैं, इससे खाना आसानी से पचता नहीं है। इसलिए बेहतर है कि खाने को चबा-चबाकर खाएं। इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है
गुनगुना पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालता है। इसलिए खाना खाने के बाद अपने पाचन शक्ति को मजबूत रखने के लिए गुनगुना पानी जरूर पीएं।
विटामिन-सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से आपकी पाचन शक्ति मजबूत होती है। इसलिए अपनी डाइट में
विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे-
संतरा, कीवी और स्ट्राबेरी, नींबू आदि को शामिल करें।
कुछ लोग खाना खाते समय ढेर सारा खाना लेकर बैठ जाते हैं, जबकि ऐसा करना उचित नहीं है। इसका सीधा असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता हैं। इससे खाना पचाने में दिक्कत हो सकती है, साथ ही पेट संबंधित कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। इसलिए थोड़ा-थोड़ा खाना ही आपको खाना चाहिए।
सर्दियों में लोग अक्सर ड्राई फ्रूट्स खाना पसंद करते हैं. क्योंकि ये फाइबर और प्रोटीन के बेहतरीन सोर्सेज में से एक माने जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने का काम करते हैं. लेकिन इन ड्राई फ्रूट्स की खूबियाँ यहीं ख़त्म नहीं होती, ये सूखे मेवे डायबिटीज, दिल से जुड़ी बीमारी और कब्ज जैसे परेशानी के लिए किसी रामबाण उपाय से कम नहीं. और तो और, मिनरल्स, पोटैशियम और मैग्निशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट्स वज़न घटाने में भी मददगार होते हैं. इसके अलावा, ड्राई फ्रूट्स में मौजूद वसा, ओमेगा 3, विटामिन ई, सेलेनियम और प्रोटीन जैसे तत्व बॉडी को एनर्जी देने के साथ साथ त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. ऐसे में रोजाना एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट्स खाना आपकी सेहत को बूस्ट कर सकता है. इसलिए हम आपके लिए लाए हैं उन 10 न्यूट्रीशस मेवों की जानकारी जिन्हें रोज़ नियमित रूप से खाकर आप खुद को हेल्दी रखते हुए बीमारियों के खतरे से बचा सकते हैं.
1.बादाम
बादाम वेट लॉस के लिए सबसे अच्छा ड्राई फ्रूट है. ये मेटाबोलिज्म रेट को बढ़ावा देने, खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल से लड़ने और खराब लिपिड में कटौती करने का काम करता है. जो वज़न घटाने वाले लोगों के लिए फायदेमंद है. साथ ही, बादाम प्रोटीन, क्रोम सेप्टेट फैट यानी मोनो-संतृप्त वसा और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होने के कारण भूख को कंट्रोल करता है और वेट लॉस के प्रोसेस में मदद करता है. बादाम में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है. 100 ग्राम बादाम में केवल 576 किलो कैलोरी होती है.
2. किशमिश
अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो आपको किशमिश खाने से बचना चाहिए. पर अगर वजन घटाना चाह रहे हैं, तो किशमिश खाना फायदेमंद है. किशमिश में आयोडीन की काफी मात्रा होती है. 100 ग्राम किशमिश में, केवल 0.5 ग्राम फैट और 299 किलो कैलोरी होती है.
3. अखरोट
अखरोट कई पोषक तत्वों की भरमार है. 100 ग्राम अखरोट में 38.08 ग्राम आमेगा 6 पाया जाता है. जो शरीर के फैट को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, अखरोट में विटामिन बी, बिटामिन सी, बिटामिन के, विटामिन बी2 आदि तत्व पाए जाते हैं. ये इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं और सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. अखरोट की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को नैचुरली गर्मी मिलती है.
4.पिस्ता
पिस्ता में भरपुर मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं जो, ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. इसके एंटीऑक्सिडेंट शरीर के एक्स्ट्रा फैट से लड़ने और आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देने में भी कारगार हैं. इसके अलावा, ये हाई फाइबर से भरपूर है, जो आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करवाता है और डाइजेशन को बेहतर बनाता है.
5.खजूर
स्वाद में भरपूर और वजन घटाने में माहिर है खजूर. ऐसा इसलिए क्योंकि खजूर में हाई फाइबर कंटेंट होते हैं, जो आपको भरा हुआ महसूस करवा के भूख को दबाने में मदद करते हैं. खजूर आपके शरीर में विटामिन बी 5 की कमी को दूर करता है. बता दें कि, विटामिन बी 5 आपकी सहनशक्ति को बढ़ाने के लिए जाना जाता है.
6.काजू
काजू मैग्नीशियम से भरपूर होता है जो वज़न घटाने में बहुत कारगर है. ऐसा इसलिए क्योंकि मैग्नीशियम शरीर में फैट और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म को रेगुलेटेड करने में मदद करता है. जिससे वेट लॉस प्रोसेस में तेज़ी आती है.
7.खुबानी
खुबानी, खाने के कम से कम 5 घंटे बाद तक आपको भूख लगने से रोक सकती है. इसके अलावा, ये आपके शरीर को मैग्नीशियम तत्व से भरती है जो फैट के मेटाबोलिज्म को कंट्रोल करता है. खुबानी में थोड़ा मीठा स्वाद होता है और आप इन्हें पकाते समय कुछ खास मिठाइयों में मिला सकते हैं. लेकिन डायबिटीज के पेशेंट को इसे खाने से बचना चाहिए.
8.अंजीर
अंजीर खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम मज़बूत होता है और आपको कब्ज की समस्या से छुटकारा भी मिल सकता है. इसलिए रोजाना शहद के साथ सिर्फ दो-तीन अंजीर ज़रूर खाएं.
9.चिरौंजी
चिरौंजी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. जो शरीर की कमजोरी को दूर और इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करता है. साथ ही, सर्दी-जुकाम में इसका सेवन बेहद ही फायदेमंद माना जाता है.
10.प्रूनस
प्रूनस को आमतौर पर सूखे प्लम भी कहा जाता है. ये हाई फाइबर से भरपूर होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इसे खाने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और बॉडी डिटॉक्स हो जाती है. इसके अलावा, ये वज़न घटाने में भी कारगर होते हैं.
वजन में बढ़ोतरी करना बहुत ही आसान है मगर बढ़े हुए वजन में कमी लाना और उसे सेहतमंद तरीके से संतुलित रखना एक कठिन काम है. उसको हासिल करने के लिए अगर फलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाए तो चंद दिनों में अपेक्षित नतीजे मिल सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि वजन संतुलित रखने या बढ़े हुए भार को कम करने के लिए रोजाना अपने फूड में ज्यादा से ज्यादा फाइबर, मिनरल और विटामिन शामिल करना चाहिए.
उनकी सलाह है कि कार्बोहाइड्रेट्स, जंक फूड से बचते हुए दिन में 30 मिनट का व्यायाम या चहलकदमी लाजिमी करना चाहिए. उनका कहना है कि फलों में कैलोरी कम और विटामिन, मिनरल और फाइबर ज्यादा पाया जाता है.
फल आपकी सेहत के लिए जरूरी भी हैं और वजन में तेजी से कमी लाने में अहम भूमिका भी निभाते हैं. फलों की डाइट को अपनाने से शरीर को वांछित हर तरह के पोषण हासिल होते हैं और डाइटिंग के कारण होनेवाली कमजोरी भी नहीं होती.
नींबू
नीबूं का संबंध तीखे फलों के परिवार से है. उसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. नींबू मेटाबोलिज्म तेज करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और फैट को भी पिघलाता है. मोटापे के शिकार लोगों को रोजाना एक नींबू इस्तेमाल करना चाहिए. नींबू को सलाद या सालन पर निचोड़कर या नींबू पानी बनाकर सेवन किया जा सकता है. नींबू पानी में ज्यादा नमक और चीनी को न मिलाएं. गुनगुने पानी में नींबू का साथ मिल जाने से फायदा और बढ़ जाता है.
ग्रेप फ्रूट
ग्रेप फ्रूट जैसे संतरा केमिकल गुणों के चलते मोटापे पर काबू पाने के लिए शानदार फल है. विटामिन सी से भरपूर उस फल से इंसुलिन की सतह संतुलित रहने में मदद मिलती है. जिसके नतीजे में शरीर के फैट जमने की प्रक्रिया में कमी आती है और शारीरिक वजन भी कम होता है. संतरे में बहुत कम कैलोरी पाया जाता है जबकि उसमें मौजूद फाइबर से पेट को भरने में मदद मिलती है और देर तक भूख का एहसास नहीं होता.
सेब, नाशपाती
सेब और नाशपाती दोनों में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है. छिलकों के साथ दोनों फलों को खाने से अतिरिक्त फाइबर मिलता है. ये पेट को ज्यादा देर तक भरा रखने में मदद पहुंचाता है. उनके जूस की बजाए फल को खाना शरीर में अतिरिक्त फैट को जमने नहीं देता है.
शकरकंद
सर्दियों में शकरकंद बहुतायत के साथ पाया जाता है. शकरकंद एक स्वादिष्ट फल है. उसे उबाल कर या भून कर दोनों तरीके से खाया जाता है. उसमें भी भरपूर फाइबर और कैलोरी कम पाई जाती है. उसके अलावा, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन, विटामिन सी हासिल होता है. ये सब मोटापा से निजात दिलाने में मदद करते हैं.
तरबूज
तरबूज में पोटैशियम की मात्रा में काफी ज्यादा होती है. आम तौर से व्यस्क शख्स के शारीरिक वजन का 50-60 फीसद हिस्सा पानी पर आधारित होता है. उससे ज्यादा मात्रा होने को पानी का वजन कहा जाता है. ये पेट फूलने और सूजन का कारण बन कर लोगों को ज्यादा मोटा दिखाता है. एक शोध में बताया गया है कि तरबूज का शरबत पीने से शरीर का फैट घुलता है और कोलेस्ट्रोल की सतह में भी कमी आती है.
पपीता
पपीता मोटापे से छुटकारा के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. फाइबर से भरपूर होने के चलते पपीता खाने की आदत पेट को ज्यादा देर तक भरे रखती है. इसके अलावा असमय खाने की इच्छा से भी निजात मिलती है. पपीते में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर के वजन में कमी लाते हैं जो तोंद पर जमी चर्बी को घुलाने की राह में सबसे बड़ी बाधा है. ये फल पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाने में मुफीद है.
नई दिल्ली, विश्वभर में एड्स के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 01 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day)) मनाया जाता है. एड्स एक लाइलाज बीमारी है. इसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है. बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है. यह बीमारी, ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (HIV) वायरस के संक्रमण से होती है.
एचआईवी एक वायरस है. यह वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर अटैक करके टी सेल्स को खत्म करता है. इससे व्यक्ति का शरीर नॉर्मल बीमारियों से भी लड़ने में सक्षम नहीं रह पाता है. समय पर एचआईवी का इलाज नहीं होने से इसका इंफेक्शन बढ़ता है और एड्स का कारण बन जाता है.
एचआईवी और एड्स में क्या फर्क है
एचआईवी एक वायरस है. यह सीधे इम्यून सिस्टम की टी सेल्स पर अटैक करता है जबकि एड्स ( Acquired Immunodeficiency Syndrome) एक मेडिकल सिंड्रोम है. एचआईवी इंफेक्शन होने के बाद सिंड्रोम बनता है. एचआईवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, लेकिन एड्स नहीं फैलता है.
ऐसे फैल सकता है एचआईवी
एचआईवी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कई तरह से फैल सकता है. यह संक्रमित खून चढ़ाने, संक्रमित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से हो सकता है. इसके साथ ही गर्भस्थ महिला से उसके होने वाले बच्चों और शिशु को स्तनपान से भी यह इंफेक्शन हो सकता है.
एचआईवी से ऐसे बचें
एचआईवी से बचने के लिये जागरूकता जरूरी है. नई सीरिंज से ही इंजेक्शन लगवाएं, सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. खून चढ़वाने से पहले संक्रमण की जांच करा लें. इसके साथ ही हमेशा नई ब्लेड से ही शेविंग कराएं.
एचआईवी को लेकर भ्रांति
एचआईवी फैलने को लेकर लोगों में कई गलत धाराणाएं हैं. मच्छर के काटने ,एचआईवी संक्रमित से हाथ मिलाने, साथ खाना खाने, बात करने और एक शौचालय के कई लोगों के इस्तेमाल करने से एचआईवी नहीं फैलता हैं.
1988 से बनया जा रहा एड्स डे
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम में काम करने वाले थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू ने विश्व एड्स दिवस की कल्पना 1987 में की थी. इसके बाद वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया. इसके साथ ही हर साल 'एड्स डे' की थीम रखी जाती है. 2020 के 'एड्स डे' की थीम 'एचआईवी/एड्स महामारी समाप्त करना: लचीलापन और प्रभाव' रखी गई है.
अमरूद का नाम लेते ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. शायद ही ऐसा कोई हो, जिसे अमरूद पसंद न हो. खट्टे-मीठे अमरूद न सिर्फ स्वाद में अच्छे लगते हैं बल्कि आयुर्वेद में अमरूद के बीजों को गुणकारी बताया गया है. अमरूद में भरपूर विटामिन सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन होता है. आइए जानते हैं कि अमरूद के फायदों के बारे में.
पेट दर्द से दिलाए मुक्ति
पेट दर्द की समस्या गलत खानपान के वजह से होती है. यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि खान-पान में अनियमितता के चलते पेट दर्द की समस्या आम है. इसे ठीक करने के लिए नमक के साथ पके हुए अमरूद का सेवन करना चाहिए, इससे पेट दर्द ठीक हो सकता है. इसके अलावा अमरूद के बीज पेट साफ करने में भी मदद करते हैं.
कब्ज की समस्या दूर करता है अमरूद
जिन्हें ज्यादातर कब्ज की समस्या बनी रहती है, उन्हें नाश्ते में रोज अमरूद का सेवन करना चाहिए. कब्ज की समस्या अधिक होने पर सुबह और शाम दोनों समय अमरूद खाना फायदेमंद हो सकता है.
पेचिश रोग में लाभकारी
बच्चों में पेचिश होने पर अमरूद की 15 ग्राम जड़ को एक गिलास पानी में तब तक उबालें, जब तक यह आधा न हो जाए. इसके बाद इसे बच्चों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में 2-3 बार पिलाते रहें, इससे उन्हें फायदा हो सकता है. इसके अतिरिक्त हैजा होने पर भी अमरूद की छाल और इसके पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से राहत पाई जा सकती है.
हिमोग्लोबिन बढ़ाता है अमरूद
अमरूद में आयरन और विटामिन सी दोनों ही भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. चूंकि आयरन हिमोग्लोबिन बढ़ाने और विटामिन सी आयरन को शरीर में अवशोषित करने कार्य करता है, इसलिए हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए यह दोनों ही तत्व जरूरी हैं. यही वजह है कि एनीमिया से ग्रसित व्यक्ति को अमरूद का सेवन जरूर करना चाहिए.
गैस एसिडिटी दूर करने की कारगर औषधि
अमरूद के बीज एसिडिटी कम करने में काफी कारगर होते हैं. इसके लिए अमरूद के बीज निकालकर इसमें गुलाब जल और मिश्री मिलाकर सेवन करें, इससे एसिडिटी में फायदा होता है.
खूनी बवासीर में फायदेमंद है अमरूद की छाल
खूनी बवासीर में अमरूद की छाल काफी फायदेमंद होती है। 5-10 ग्राम अमरूद की छाल का चूर्ण का काढ़ा बनाकर सेवन करने से बवासीर ठीक हो सकता है. बवासीर के मरीजों को यह काढ़ा लगातार कम से कम 1 माह तक पीना चाहिए.
बुखार कम करने में सहायक है अमरूद के पत्ते
यदि बुखार तेज है, तो अमरूद का औषधीय प्रयोग लाभकारी होता है. अमरूद के पत्तों को पीसकर इसका रस निकालकर बुखार से पीडि़त व्यक्ति को पिलाने से बुखार कम होता है.
आजकल टीवी देखकर भोजन करना एक आम आदत है। अगर भोजन करते समय आपकी भी टीवी देखने की आदत है तो संभल जाइए क्योंकि इससे सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचता है। हम सभी दिन की उस घड़ी का इंतजार करते हैं, जब हम आराम से रिलैक्स कर सकें और शांति से अपना खाना टीवी के सामने खा सकें। लेकिन ऐसा करते समय, हम आम तौर पर अपनी भूख का ट्रैक खो देते हैं और जरूरत से ज्यादा खा जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ता है।
जब हमें बाद में इसका एहसास होता है, तो हम पश्चाताप करने लगते हैं। अगर आपको अपना वेट लॉस करना है, तो इस अनहेल्दी पैटर्न को ब्रेक करना होगा जो शायद कई लोगों के लिए आसान न हो। इस समस्या को दूर करने के लिए, यहां कुछ चीजें हैं जो आप कर सकते हैं।
लोग टीवी के सामने भोजन क्यों करते हैं
खाना खाते समय यह बेहद जरूरी है कि आप अपने ध्यान को यहां वहां न भटकाएं। जिस तरह से आप अन्य काम को ध्यानपूर्वक करते हैं, ठीक उसी तरह से भोजन को भी उतने ही ध्यान से खाएं और उसके हर एक निवाले का आनंद लें। खाते वक्त टीवी देखने से आपका ध्यान भटकता है और आप या तो जल्दी-जल्दी खाते हैं या फिर ज्यादा खा लेते हैं। अपने भोजन का स्वाद लेना, आपको अपने भोजन के सेवन को नियंत्रित करने में मदद करता है। आपका पेट मस्तिष्क को एक संकेत भेजता है कि यह भरा हुआ है और अब आपको रुकने की आवश्यकता है।
-टीवी देखने में लोग इतने मगन हो जाते हैं कि उन्हें ये पता ही नहीं चलता कि उन्होंने कितना खा लिया। ऐसे में कई बार लोग ज्यादा खा जाते हैं जिस वजह उन्हें पेट दर्द की शिकायत रहती है।
-अगर आप अपना वजन कम करना चाह रहे हैं, तो हमारा सुझाव है कि इस बुरी आदत को तुरंत छोड़ दें। डायनिंग टेबल पर जाएं और अपने भोजन को जितनी अधिक शांति में खा सके खाएं। किसी भी भोजन को खाने में सिर्फ 15 मिनट लगते हैं और हम यकीन मानते हैं कि आप उतना समय खुद को हेल्दी रखने के लिए निकाल ही सकते हैं।
-टीवी का रिमोट पकडऩे से पहले अच्छा होगा कि आप अपना भोजन समाप्त कर लें। अगर आपको ऐसा करना मुश्किल लगता है, तो आप इन ट्रिक्स को आजमा सकते हैं
-अगर आप पॉपकॉर्न या वेफर्स के एक बड़े कटोरे के साथ बैठते हैं, तो आप निश्चित रूप से उसे पूरा खत्म कर देंगे। एक छोटा कटोरा चुनें और उसमें अपना हिस्सा लें। केवल इतना ही खाएं और उसे फिर से भरने की कोशिश न करें।
-टेलीविजन देखने के दौरान स्नैकिंग के अलावा किसी और काम में व्यस्त रहें। आप चाहें तो अपने नाखूनों को पेंट कर सकती हैं या पैरों की मालिश कर सकती हैं। जब आपके हाथ अलग-अलग काम में लगेंगे, तो आप कम अनहेल्दी चीजें खाएंगी।
जब भी आपका अनहेल्दी खाने का मन करे, तो उससे पहले एक गिलास पानी पी लें। इससे आपकी भूख शांत होगी।
सर्दियों के मौसम में अक्सर लोगों को खुजली की समस्या होने लगती है और ये इस वजह से होती है क्योंकि स्किन ड्राय हो जाती है तो कई बार ऊनी कपड़े की वजह से भी इस तरह की समस्या लोगों में देखने को मिलती है। तापमान की कमी के कारण हमारी स्किन अधिक रूखी हो जाती है, जिसके कारण कई बार एक्जिमा तक की समस्या का सामना करना पड़ता है। स्किन में मॉश्चराइज रखने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं। इस दौरान केवल आपको क्रीम या बाकि चीजों का ही इस्तेमाल नहीं करना है बल्कि आपको इस दौरान अपनी डाइट का भी इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आपकी सेहत सही रहे और आपको इस तरह की समस्या ना हो। इसलिए इस दौरान आपको पानी खूब पीना चाहिए औऱ साथ ही अगर आफ इन चीजों का सेवन करते हैं तो इससे आपको बहुत फायदे होंगे। तो चलिए जानते हैं आपको किन चीजों का खास ध्यान रखना है।
गन्ना
सर्दियों के मौसम में गन्ने का जूस आपको जरुर पीना चाहिए ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए साथ ही ये एक्जिमा के साथ हर स्किन संबंधी समस्याओं से भी आपका बचाव करते हैं। इसलिए इसका जूस आप सप्ताह में 3 से 4 बार जरुर पिए इससे आपको बहुत राहत मिलेगी।
मूली
सर्दियों के मौसम में मूली खाना बहुत फायदेमंद माना दाता है और आप अपने खाने में इसे जरुर शामिल करें, इसके साथ ही हो सके तो आप सुबह पेट इसका सेवन जरुर करें।
सेब
सुबह एक सेब खाना सेहत के लिए कितना फायदेमंद है ये तो आप जानते ही है, ऐसे में आपको स्किन की समस्याओं से दूर रहना है तो इसका सेवन करते रहें, ताकि आप स्वस्थ रहें।
व्हीट ग्रास का जूस
गेंहू की घास का जूस सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इसका सेवन करके आप कई बड़ी से बड़ी बीमारियों से निजात पा सकते हैं। सर्दियों के मौसम में खुजली के साथ अन्य स्किन संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए सुबह थोड़ा व्हीट ग्रास जूस जरूर पिएं।
ठंड या जाड़े के मौसम में अक्सर लोग वजन बढ़ जाने की शिकायत करते हैं. वैसे यह सच भी है कि सर्दियों में वजन सबसे ज्यादा बढ़ता है. दरअसल इस मौसम में ठंड के कारण हर कोई गर्मा-गर्म खाना पसंद करता है. इस दौरान ऑयली चीजें भी बहुत ज्यादा खाई जाती है. रजाई के अंदर बैठकर गर्म चाय की प्याली के साथ गर्मागर्म पकौड़े हों या भजिया या फिर गाजर का हलवा या कोई भी तला भुना खाना, कुछ ज्यादा ही स्वादिष्ट लगता है. आम दिनों की अपेक्षा सर्दियों में खाया गया खाना शरीर को भी ज्यादा ही लगता है. यही वजह है कि लोगों का वजन सर्दियों में बढ़ जाता है. हालांकि जाड़े में वजन बढ़ने के कई और कारण भी हैं.
ज्यादा सोना
सर्दी के मौसम में लोग आम दिनों की तुलना में ज्यादा देर तक बिस्तर पर सोते रहते हैं. इसका सीधा असर हमारी बॉडी पर पड़ता है. दरअसल जितना हम सोएंगें उतनी ही हमारी बॉडी आलसी होगी. यानी 8 घंटे से ज्यादा सोने की वजह से हम वेट गेन कर लेते हैं. इसके अलावा सर्दियों के मौसम में हमारा शरीर काम भी ज्यादा नहीं करता है, इस कारण पसीना कम आता है और वजन बढ़ता है.
ज्यादा मसालेदार भोजन करना
सर्दी के मौसम में ठंड से बचने के लिए लोग अक्सर मसालेदार भोजन खाना शुरू कर देते हैं. लेकिन ज्यादा मसालेदार और तलाभुना खाना खाने से वजन बढ़ने लगता है.
सर्दियों में मीठे के सेवन से बढ़ता है वजन
सर्दियों में लोग डाइटिंग वगैरह सब भुलाकर शुगर और कैलोरी से भरी चीजों का सेवन करने लगते हैं. इस दौरान गाजर का हलवा, मूंगदाल का हलवा, गुड से बनी गज्जक, जलेबी, गुलाब जामुन जैसी मिष्ठान काफी स्वादिष्ट लगते हैं. लेकिन इन चीजों में काफी कैलोरी होती है इस कारण सर्दियों में वजन बढ़ जाता है.
एक्सरसाइज न करना
सर्दियों के मौसम में लोग व्यायाम करने से भी कतराने लगते हैं. ठंड की वजह से लोग घर से बाहर निकलने की बजाय रजाई में दुबके रहना ज्यादा पसंद करते हैं. जिसका खामियाजा शरीर को बढ़े हुए वजन के तौर पर भुगतना पड़ता है.
सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर से बढता है वजन
कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि सर्दियो के सीजन में सूरज की रोशनी और धूप कम होने से लोगों में थोड़ा अवसाद नजर आता है. इस अवसाद को ही सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर भी कहा जाता है. दरअसल सूरज की रोशनी की कमी का संबंध हॉर्मोंस से होता है जो हमारे मूड को नियंत्रित करता है. अवसाद की वजह से हमारी शारीरिक एक्टिविटी कम हो जाती है नतीजतन वजन बढ़ने लगता है.
इस तरह किया जा सकता है सर्दियों में वजन कंट्रोल
1-सर्दियों में प्रोटीन ब्रेकफास्ट का ही सेवन करें
2- सर्दियों में बाहर नहीं निकलता चाहते हैं तो घर पर ही हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें.
3- ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें जो पोषक तत्वों से भरपूर हों.
4- वजन कंट्रोल करना चाहते हैं तो अपनी डायट में फल और सब्जियों को शामिल करना कभी न भूलें.
5- ऐल्कॉहॉल, कार्बोहाईड्रेट और हाई शुगर फूड्स से परहेज ही करें.
6- पर्याप्त नींद लें.
7- सर्दियों में लोग पानी पीना कम कर देते हैं लेकिन इस मौसम में भी ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है और कैलोरी भी बर्न होती है.
फल हमारे शरीर को कई फायदे पहुंचाते हैं उनमें संतरा भी शामिल हैं. संतरे में बिटामिन सी पाया जाता है.इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए संतरा काफी असरदार माना जाता है. ऐसे ही संतरे खाने से होने वाले फायदों के बारे में हम आपको बता रहे हैं.
एंटी ऑक्सीडेंट्स
संतरे स्वास्थ्य वर्धक एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. ये एंटी ऑक्सीडेंट्स सेहत को कई तरह से फायदे पहुंचाते हैं. संतरे में मौजूद एस्कॉर्बिक एसिड और बीटा कैरोटीन शरीर में कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद कर सकते हैं. संतरा शरीर से फ्री रेडिकल्स से छुटकारा दिलाने में भी मदद कर सकता है.
ब्लड प्रेशर को रखता है कंट्रोल
संतरे के रोजाना सेवन से आपको बीपी की समस्या होने की आशंका काफी कम हो सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट भी हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों को संतरे का सेवन करने की सलाह देते हैं.
इम्यूनिटी को बनाता है मजबूत
ठंड के मौसम में आम सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायत रहती है. इसके साथ ही कमजोर इम्यून सिस्टम कई संक्रमणों का भी कारण बनता है. संतरे में मौजूद विटामिन सी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है.
कम कैलोरी
संतरे को स्नैक्स वाले फ्रूट्स में शामिल कर अपने कैलोरी इंटेक को कम किया जा सकता है. इससे वजन को कंट्रोल में रखने में काफी मदद मिल सकती है. सुबह ब्रेकफास्ट में एक गिलास संतरे का जूस फायदेमंद हो सकता है.
स्किन के दाग धब्बे करता है दूर
संतरे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और विटामिन सी आपकी स्किन की हेल्थ के लिए काफी बेहतर माना जाता है. यह आपकी स्किन को होने वाले नुकसान की भी काफी हद तक भरपाई कर सकता है. इसकी मदद से आपकी त्वचा पर मौजूद निशान भी काफी कम हो सकते हैं.
किडनी की पथरी में फायदेमंद
किडनी स्टोन की समस्या होने पर रोजाना संतरे और इसके जूस का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है. संतरे का रस किडनी की पथरी को बाहर निकालने में मददगार माना जाता है. यह शरीर को हाइड्रेट कर किडनी स्टोन की समस्या से राहत दिलाने का एक कारगर घरेलू नुस्खा साबित हो सकता है.
गाठिया में फायदेमंद
संतरा शरीर से यूरिक एसिड को कम कर गठिया के मरीजों को आराम दिला सकता है. यह गठिया में शरीर की सूजन को कम करने में भी मददगार माना जाता है.
पेट की समस्याएं
संतरे के रस को गर्म करके उसमें काली मिर्च और सूंड का रस मिला लें. पेट में गैस, अपच, कब्ज, बदहजमी, सूजन, इंफेक्शन और बदहजमी को दूर करने के लिए इस मिश्रण का सेवन का सेवन काफी लाभकारी हो सकता है.
ये लोग करें संतरे से परहेज
छोटे बच्चों को ज्यादा संतरा खिलाने से उनको पेट दर्द की समस्या हो सकती है.
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्ट फीड कराने वाली महिलाओं को भी कम मात्रा में ही संतरा खाना चाहिए.
हार्ट के मरीजों को संतरे का सेवन कम करना चाहिए.
जिनकी पाचन शक्ति कमजोर है उन्हें संतरा खाने से परहेज करना चाहिए. संतरे में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को प्रभावित कर सकता है.






















