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गले की खराश से हैं परेशान, तो इन घरेलू उपायों को आज ही आजमाएं

गले की खराश से हैं परेशान, तो इन घरेलू उपायों को आज ही आजमाएं

कोरोनावायरस के कारण आम सर्दी, खांसी ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
बदलते मौसम के साथ सर्दी खांसी, गले में खराश आम है, लेकिन कोरोना काल में इससे बच कर रहना ही सेहत के लिहाज से जरूरी है।
बदलते मौसम के साथ गले में खराश और गले में दर्द होने के कारण काफी परेशानी होती है। यदि आप गले की खराश से परेशान है, तो हम आपको इस लेख में कुछ घरेलू नुस्खें बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप गले की समस्या से राहत पा सकते हैं।
गले की खराश होने पर दिन में गुनगुने पानी का सेवन करें। हल्का गर्म पानी पीने से आपको गले के दर्द से भी राहत मिलेगी साथ ही गले की खराश भी ठीक हो जाएगी।

गले की खराश में हर्बल टी का सेवन करें। इसके सेवन से गले की खराश से बहुत राहत मिलती है। तुलसी, लौंग, काली मिर्च और अदरक वाली चाय का सेवन करने से खराश और गले से जुड़ी अन्य समस्या से राहत मिलती है।

गले में खराश से परेशान है, तो काली मिर्च का सेवन भी लाभदायक साबित होता है। आप काली मिर्च और मिश्री को भी चबाकर खा सकते हैं। ऐसा करने से आपके गले में खराश कम हो जाएगी। इसके अलावा आप काली मिर्च और शहद को मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते है।

गले में खराश से निजात पाने के लिए आप लहसुन की कली को चबाकर इसका सेवन करने से गले की खराश से राहत मिलती हैं।

गुनगुने पानी में चुटकीभर नमक मिलाकर गरारे करने से भी गले की खराश से राहत मिलती है। इसे नियमित करने से कुछ ही दिनों में गले के दर्द और खराश से आराम मिल जाएगा।

 

अगर आप भी खाना खाकर तुरंत सोने जाते हैं, तो इसके नुकसान भी जान लीजिए

अगर आप भी खाना खाकर तुरंत सोने जाते हैं, तो इसके नुकसान भी जान लीजिए

अधिकतर लोगों की आदत होती है, खाना खाने के बाद तुरंत सोने चले जाते है। व्यस्त दिनचर्या के वजह शरीर में थकान हो जानें की वजह से थोड़ी देर भी टहल पाना थोड़ा मुश्किल सा लगने लगता है. जिस वजह से डिनर करने के बाद सीधे रूख करते है बैड का लेकिन खाना खाने के तुरंत सोने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
आइए जानते हैं क्या नुकसान हो सकते हैं...

खाना खाकर तुरंत सोने से पेट की समस्या हो सकती हैं इससे खाना पच नहीं पाता है जिस कारण ऐसिडीटी, पेट दर्द, सीने में जलन जैसी दिक्कते शुरू हो जाती है। इसलिए खाना खाने के तुरंत बाद न सोए। कुछ देर टहलें फिर सोने जाएं।

तुरंत सोने के बाद खाना पच नहीं पाता जिस वजह से भारीपन सा महसूस होता है। और ऐसे में नींद न आने की समस्या पैदा हो सकती है। पेट की समस्या के कारण आपको अच्छी तरह से नींद न आएगी।
खाना खाकर सीधे सोने जानें कि वजह से खाना पच नहीं पाता जिस कारण उल्टी दस्त जैसी समस्या हो सकती है।

अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाती हैं तो खाने में मौजूद कैलोरीज को बर्न होने का वक्तन ही नहीं मिलता। ऐसे में आपका वजन भी बढ़ सकता है। इसी लिए कहा जाता है कि रात में सोने के 3 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए ताकि वह आसानी से पच सके और कैलोरीज बर्न हो सके।


 

Cycling करने से पहले इन बातों का रखें ख्याल वरना सेहत को होगा नुकसान

Cycling करने से पहले इन बातों का रखें ख्याल वरना सेहत को होगा नुकसान

कोरोना काल में खुद को फिट रखने के लिए अधिकतर लोग साइकिल चलाना पसंद कर रहे है और फिटनेस के लिए इसे अपनी रूटीन में शामिल कर रहे है। वैसे भी फिट और एक्टिव रहने के लिए साइकिल चलाना बेस्ट माना जाता है। यदि नियमित रूप से साइकिल चलाई जाएं तो इससे बॉडी की पूरी एक्सरसाइज होती है। और टोन्ड और परफेक्ट फिगर पा सकते है। लेकिन साइकिल चलाते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वरना सेहत से जुड़ी अन्य समस्या हो सकती हैं।
कुछ लोगों की आदत होती है, कि वे बार-बार पानी पीते है, ये बिलकुल अच्छी बात है लेकिन साइकिल चलाते समय अधिक मात्रा में पानी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि साइकिल चलाते वक्त अधिक मात्रा में पानी पीया जाएं तो इससे मतली की समस्या होने लगती है। वहीं ज्यादा पानी पीने से बार-बार पेशाब आएगी। जिससे पेट में दर्द भी हो सकता है।
इसलिए साइकिल चलाते वक्त पानी न पीएं।

साइकिल चलाना फिट रहने के लिए एक बेस्ट विकल्प है। इसलिए साइकिल चलाते वक्त फास्ट फूड या फिर जंक फूड से दूरी रखना ही बेहतर होता है, क्योंकि अनहेल्दी खाने से शरीर में फेट बढ़ता है। इससे आप सुस्त महसूस करेंगे।
साइकिल चलाने से पहले स्ट्रेचिंग न करें। वैसे आमतौर पर वर्कआउट से पहले स्टेचिंग की सलाह दी जाती है। लेकिन साइकिल चलाने से पहले स्ट्रेचिंग न करें। इससे मांसपेशियां कमजोर हो सकती है और उनमें खिंचाव आ सकता है। यदि आप स्टेचिंग करना चाहते है तो कम से कम
आधे घंटे पहले करें।

कई बार ऐसा होता है कि हम साइकिल राइड को मजेदार बनाने के लिए स्टंट करना शुरू कर देते हैं। इससे एक्सीडेंट होने की संभावना अधिक रहती है।

 

अब आधार कार्ड की तरह हर भारतीय को मिलेगी यूनिक हेल्थर आईडी, आपके स्वास्थ्य का होगा पूरा ब्योरा

अब आधार कार्ड की तरह हर भारतीय को मिलेगी यूनिक हेल्थर आईडी, आपके स्वास्थ्य का होगा पूरा ब्योरा

नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने देश के हर नागरिक के स्वाडस्य्तन का रिकॉर्ड रखने के लिए शुरू की गई योजना 'नेशनल डिजिटल हेल्थ‍ मिशन' के तहत आधार कार्ड की तरह विशेष डिजिटल हेल्थ् आईडी की सुविधा देने की घोषणा की है. मिशन के तहत अगर कोई भारतीय नागरिक अपनी हेल्थध आईडी बनवाना चाहता है तो उससे किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी. बता दें कि 15 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीएचएम को शुरू करने की घोषणा की थी. योजना के तहत देश में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों का डाटा एक हेल्थ कार्ड में इकट्ठा किया जाएगा. इससे आसानी से इलाज का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकेगा.

यूनिक हेल्था आईडी में मिलेंगी ये सभी सुविधाएं
हेल्थ आईडी में आपकी हर बीमारी का रिकॉर्ड रखा जाएगा. साथ ही आपने कितनी बार डॉक्टरों से परामर्श लिया और आपको इलाज के दौरान दी गई दवाइयों का रिकॉर्ड भी इस हेल्थय आईडी में रहेगा. पोर्टेबल होने के कारण यह हेल्थस आईडी मरीजों के साथ ही डॉक्ट रों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी. आपके हेल्थ आईडी कार्ड में आधार और मोबाइल नंबर का ब्योहरा भी होगा. हेल्थउ आईडी कार्ड का नंबर भी आधार नंबर की तरह हर व्याक्ति के लिए यूनिक होगा. एनडीएचएम में आपकी हेल्थ आईडी, डिजिटल डॉक्टर, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड, ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन शामिल होंगे. यही नहीं, राज्यक के लोगों के स्वास्थ्य डाटा के आधार पर सरकारें बेहतर स्वास्थ्य कार्यक्रम भी बना सकेंगे. मिशन के सीईओ इंदु भूषण ने कहा है कि एनडीएचएम कार्यक्रम से बेहतर आर्थिक नतीजे मिलेंगे.
- पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से कहा था कि एनडीएचएम देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाएगा.


- एनडीएचएम के तहत एक लाख से अधिक यूनिक हेल्थर आईडी बनाए गए हैं. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत छह राज्यों में हो चुकी है.

- एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल हेल्थ. मिशन से देश की जीडीपी में बढ़ोतरी होगी. अगले 10 साल के भीतर जीडीपी में 250 अरब डॉलर जुड़ेंगे.

- केंद्र ने भरोसा दिलाया है कि सेफ्टी को ध्यांन में रखते हुए डिजिटल हेल्थढ रिकॉर्ड को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा.

- केंद्र के मुताबिक, योजना से मरीज को अच्छी सुविधाएं मिलेंगी और डॉक्टरों को सही इलाज करने में मदद मिलेगी.
 

सांस फूलने की समस्या से हैं परेशान? तो जानिए जरूरी बातें

सांस फूलने की समस्या से हैं परेशान? तो जानिए जरूरी बातें

आपने आस-पास, परिवार या रिश्तेदार में किसी न किसी को सांस फूलने की समस्या का सामना करते जरूर देखा होगा। सांस फूलना यानी उसे लेने में दिक्कत होना, ये समस्या नीचे बताए गए कारणों में से किसी वजह से हो सकती है। आइए, जानें –
1 जिन महिलाओं को पीरियड्स में अधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होती हैं व जो लोग खून की कमी से पीड़ित हो, यानी कि जिन्हें अनीमिया की शिकायक हो, तो ये सांस फूलने एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।

2 अक्सर मोटे लोगों को यह शिकायत करते सुना गया है कि जरा सी सीढ़ी चढ़ने पर उनकी सांस फूलने लगती है। इसलिए मोटापे को कंट्रोल करके भी इस सांस फूलने की परेशानी से बचा जा सकता है।

3 श्वास नली व उस की शाखाओं में सूजन भी सांस फूलने की परेशानी का एक कारण है।
4 फेफड़ों संबंधी किसी तरह की समस्या होने पर भी सांस फूलने की परेशानी हो सकती है। कई बार फेफड़ों की बाहरी ऑक्सीजन सोखने की क्षमता कम हो जाती है और जरा सा चलने पर सांस फूलने लगती है।

5 दिल संबंधित समस्या होना भी सांस फूलने के कारणों में से एक है।

सांस फूलने की परेशानी से बचने के लिए इन बातों को अपनाएं -

1 कोशिश करें कि नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिनती कम उम्र में व्यायाम को अपना लेंगे, उतना ही अच्छा होगा।
2 कुछ देर धूप जरूर लें, और धूल-धक्कड़ से दूर रहें।

3 मोटापा किसी भी हालत में न पनपने दें।

4 रोज तकरीबन 350 ग्राम सलाद व 350 ग्राम फलों का सेवन करें। प्रोटीन भरपूर मात्रा में लें। पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें. किसी तरह के धूम्रपान व तंबाकू के सेवन से बचें और शराब न पीएं।

नोट : सांस फूलने की परेशानी में अपनी ओर से एहतियात बरतने के अलावा, डॉक्टर से परामर्श करना कतई न भूलें।

 

अपनी इम्यूनिटी को करें बूस्ट, इन 3 तरीकों से खाएं गिलोय

अपनी इम्यूनिटी को करें बूस्ट, इन 3 तरीकों से खाएं गिलोय

Health Tips: कोरोना काल संकट में जिस चीज़ पर सबसे ज़्यादा ध्यान लोगों का केंद्रित है वो है खुद को हेल्दी रखना और अपनी इम्यूनिटी को बढ़ाना. जिसके चलते मॉडर्न तरीकों से लेकर घरेलु नुस्खों को अपनाने तक लोगों ने अपनी जान झोंक दी है. लेकिन इन सब उपायों के बीच कोरोनावायरस महामारी के दौरान इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जिस एक जड़ी बूटी ने सभी का ध्यान खींचा, वो है गिलोय. गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका आयुर्वेदिक इलाजों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है और इसे अक्सर अमरता की जड़ कहा जाता है. गिलोय कई बीमारियों को शरीर में विकसित होने से रोकने में भी सक्षम है. काढ़े के अलावा आप गिलोय को कई अन्य तरीकों से भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं और इसका फायदा उठा सकते हैं. तो आइये जानते हैं गिलोय खाने के वो तीन असरदार तरीके.


कब्ज और गैस में बेजोड़ है गिलोय की चटनी
गिलोय पाचन में सुधार करने में सहायक होता है. ये कब्ज़, सूजन, अम्लता और गैस को कम करता है. गिलोय कमज़ोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए अमृत सामान है. अगर आपको नियमित रूप से गैस की परेशानी रहती है या आप डायबिटीज के मरीज़ हैं तो आपको गिलोय का सेवन ज़रूरत करना चाहिए. आप गिलोय को खट्टी-मिठी चटनी के रूप में भी खा सकते हैं. इसे बनाने में ज़्यादा मेहनत नहीं लगती है. इसके लिए आप


-3 से 5 टमाटर और गिलोय की 2 पत्तियां लेकर एक साथ पीस लें
-कढ़ाई में हल्का तेल डालें और गर्म होने दें
-गर्म तेल में कढ़ी पत्ता, दालचीनी और राई के कुछ दानें डाल लें
-फिर टमाटर और गिलोय का पिसा हुआ पेस्ट डालें
-हल्का सा लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गुड़ और नमक डालें
- आखिर में पानी डालकर उबलने दें
-गाढ़ा हो जाने पर गैस बंद कर दें और हो गई तैयार आपकी गिलोय की चटनी


कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में कारगर दही में गिलोय पाउडर
गिलोय विषाक्त पदार्थों को हटाकर रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है. इसके अलावा ये अन्य रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से भी लड़ता है. यह कमज़ोर लिवर वाले लोगों के लिए भी विशेष रूप से सहायक है और पैंक्रियाज़ से जुड़े रोगों का भी मुकाबला कर सकता है. वहीं ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए गिलोय बहुत ही फायदेमंद है. दरअसल ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है जिसमें गिलोय बेहत ज्कार्गर साबित होती है. आप गिलोय को दोपहर या रात के खाने में दही में मिलाकर भी खा सकते हैं. इसके लिए आप


-एक कटोरी दही में गिलोय के जड़ों को कूट कर मिला लें
-फिर इसमें काला नमक मिला लें और खाने के बाद इस दही का सेवन करें


गिलोय टॉनिक कर देता है तनाव की छुट्टी
गिलोय मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और आपकी स्मृति को बढ़ाता है. साथ ही, ये आपके मन को शांत करता है और अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलकर एक अद्भुत स्वास्थ्य टॉनिक बनाता है. गिलोय का ये टॉनिक अच्छी नींद में सहायक है. इस टॉनिक को बनाना बेहद ही आसान है. इसके लिए आप


-8 से 10 गिलोय के पत्ते, 2 बड़े चम्मच गुलाब जल और 2 टी स्पून शहद लें
-गिलोय के पत्तों को दरदरा पीसकर बारीख पेस्ट बनाएं और इसमें शहद और गुलाब जल मिलाएं
-अब हर दिन सोने से पहले इसका एक चम्मच सेवन करें और गुनगुना पानी पी लें


इस तरह गिलोय का इस्तेमाल करना आपके शरीर को कई बीमारियों से बचाए रखता है. ये तीनों चीजें, न सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि ये आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी हैं. तो अगर आपने गिलोय से बनी इन चीजों को अब तक ट्राय नहीं किया है, तो एक बार इन्हें जरूर ट्राई करें. 

ये 4 डिटॉक्स ड्रिंक्स कर देंगी आपके शरीर से चर्बी को छूमंतर

ये 4 डिटॉक्स ड्रिंक्स कर देंगी आपके शरीर से चर्बी को छूमंतर

वज़न घटाने के लक्ष्य को अपनाए बहुत से लोग रोज़ सुबह उठकर अनेक तरह की एक्टिविटीज़ को अंजाम देते हैं. इतना कुछ करते हैं अपने वज़न को घटाने के लिए लेकिन फिर भी सफलता हाथ नहीं लगती. अक्सर लोगों को ब्लोटिंग, रूखी त्वचा, और अपने अंदर कम ऊर्जा महसूस होती है जो शरीर में विषाक्त पदार्थों के निर्माण का संकेत है. अगर आप भी इसी तरह की परेशानी से गुज़र रहे हैं तो ऐसे में आपको डिटॉक्स ड्रिंक का इस्तेमाल करना चाहिए. तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे डिटॉक्स ड्रिंक के बारे में जिसे आप सुबह उठते ही पी सकते हैं.


वज़न घटाने में सहायक

गुनगुना पानी पीना आपके दिन की शुरुआत करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है. ये सिर्फ आपके शरीर को हाइड्रेट करने में मदद नहीं करता, बल्कि यह सुस्ती को भी खत्म करता है और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है. इस तरह ये वज़न घटाने का भी एक शानदार तरीका है. वहीं अगर आप अपने गर्म पानी में कुछ चीजों को मिला लें, तो ये टॉनिक में बदल जाएगा, जो आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ाएगा और आपको डिटॉक्स करने में मददगार साबित होगा. तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे डिटॉक्स ड्रिंक के बारे में जिसे आप सुबह उठते ही पी सकते हैं.

शहद का पानी

अगर आपकी स्किन ड्राई है और आप पेट से जुड़ी समस्याओं से भी परेशान हैं तो आपको हर दिन सुबह गर्म पानी में शहद मिलाकर पीना चाहिए. शहद न केवल मिठास और स्वाद की सही मात्रा जोड़ता है, बल्कि यह टीशूज़ के रिक्रिएशन में भी मदद करता है और कुछ ही समय में आपके शरीर को सक्रिय कर देता है. यही कारण है कि कसरत से पहले शहद के साथ गर्म पानी पीने की सलाह दी जाती है. साथ ही, यह एक हाइड्रेटिंग एजेंट भी है, जो आपको चमकती त्वचा प्रदान करती है.


काला नमक का पानी
काला नमक शरीर के लिए कई मायनों में फायदेमंद है. इसमें कुछ ऐसे एंजाइम होते हैं, जो फैट बर्नर की तरह काम करते हैं. काला नमक का पानी आपका पेट साफ कर देता है और आपके मेटाबोलिज्म को भी तेज बना देता है. वहीं अगर आप इस पानी में नींबू का रस मिला दें, तो ये आपके इंसुलिन के स्तर को भी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे आपका ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है. इसका मतलब यह भी है कि आपका भोजन ठीक से पचता है और जारी की गई ऊर्जा शरीर में प्रत्येक कोशिका को वितरित हो जाती है, जिससे फैट का संचय नहीं होता है.


काली मिर्च से बनाएं डिटॉक्स ड्रिंक
काली मिर्च एक रसोई में इस्तेमाल होने वाली बेहद ही सामान्य सी चीज़ है. जब आप इसका सेवन करते हैं, तो यह आपके शरीर में गर्मी पैदा करता है. यह ऊष्मीय प्रभाव आपके अंगों को जगाता है, और साथ ही, आपके मेटाबोलिज्म को भी बढ़ावा देता है. काली मिर्च विटामिन ए, के, सी और कैल्शियम, पोटेशियम और सोडियम जैसे खनिजों का भंडार है. अगर आप त्वचा की परेशानियों से पीड़ित हैं तो काली मिर्च आपके लिए फायदेमंद है.


दालचीनी का पानी

ब्लोटिंग सबसे आम मुद्दों में से एक है, जो लगभग हर किसी की परेशानी का कारण बनी हुई है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए दालचीनी पाउडर को गर्म पानी में मिला कर पियें. ये आपके शरीर में सूजन को दूर करने में मदद करेगा. पत्रिका ‘लिपिड्स इन हेल्थ एंड डिजीज’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दालचीनी के 16 सप्ताह के मौखिक सेवन से मेटाबोलिज्म को बढ़ावा मिलता है और ये शरीर के एक्सट्रा फैट को बर्न करने में भी मदद करता है.

इन सब ड्रिंक्स के अलावा अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो ककड़ी, पालक, सेब, जामुन जैसी सब्जियों का रस निकालें और उनमें काला नमक और हींग मिला कर पी लें. यह वज़न घटाने के लिए जादू की तरह काम करता है, और एक ही समय में आपके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है.
 

मुंहासे की वजह से स्किन को न होने दें खराब, गाजर के जूस का ऐसे करें इस्तेमाल

मुंहासे की वजह से स्किन को न होने दें खराब, गाजर के जूस का ऐसे करें इस्तेमाल

चेहरे पर मुंहासे हमें गंभीर रूप से परेशान कर सकते हैं। हमें एहसास भी नहीं होता है और यह धीरे-धीरे हमारे चेहरे को पूरा बर्बाद कर देते हैं। इनकी वजह से कई लोगों के अंदर का कॉन्फिडेंस कम होने लगता है। हम में से बहुत से लोग मुंहासों को छिपाने के लिए मेकअप का सहारा लेते हैं। हालांकि, यह सिर्फ स्थिति को बदतर बनाता है। मेकअप से स्किन पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे मुंहासे और ज्यादा फैलने लगते हैं। इससे पहले की बहुत देर हो जाए आपको इसका उपचार करना चाहिए।


आज हम आपको गाजर के जूस से मुंहासों का इलाज करना बताएंगे, जिससे कुछ ही दिनों में आपकी स्किन फिर से चमकदार और बेदाग नजर आने लगेगी। यदि आप सोच रही हैं कि गाजर का रस मुंहासे दूर करने में कैसे मदद करता है और इसका उपयोग कैसे करना है, तो आइए जानते हैं...


मुंहासों के लिए गाजर के रस का फायदा
गाजर का रस विटामिन-ए और सी का एक समृद्ध स्रोत है। विटामिन-ए एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंटहै, जो स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है और आपके चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक लाता है। यह आपकी त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाता है और त्वचा की उम्र बढऩे की प्रक्रिया को धीमा करता है। लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण बात, यह त्वचा को ठीक करने और मुंहासे को साफ करने में मदद करता है। गाजर के रस में मौजूद विटामिन सी त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है। कोलेजन त्वचा की लोच में सुधार करने में मदद करता है, जिससे आपकी त्वचा नरम और चिकनी होती है।


गाजर के रस का मास्क
आप अपनी त्वचा को निखारने और मुहांसों को साफ करने के लिए सीधे अपने चेहरे पर गाजर के रस का उपयोग कर सकती हैं।
चेहरे पर लगाने का तरीका
*आपको 2 बड़े चम्मच ताजे गाजर के रस की आवश्यकता होगी।
*इसे रूई की मददे से अपने साफ चेहरे पर लगाएं।
*जब यह सूख जाए तब चेहरे को धो लें।
*अच्छा रिजल्ट पाने के लिए इसे रोज लगाएं।


गाजर का रस और समुद्री नमक
समुद्री नमक में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और आपकी त्वचा को साफ रखते हैं। यह त्वचा में तेल के उत्पादन को संतुलित करने में मदद करता है और इस तरह मुंहासे का सफाया करता है।
चेहरे पर लगाने का तरीका
*1 टीस्पून गाजर के रस में 1 टीस्पून समुद्री नमक मिलाएं।
*एक कॉटन पैड के उपयोग से इसे चेहरे पर लगाएं।
*जब यह सूख जाए तब चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।


गाजर का रस और जैतून का तेल
जैतून के तेल में आवश्यक फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो स्किन में जान डालने का काम करते हैं। यह तेल स्किन के पोर्स को बंद किए बिना गहराई से मॉइस्चराइज करता है और त्वचा को पोषण देता है।
चेहरे पर लगाने का तरीका
*2 टेबलस्पून गाजर के रस में 1 टीस्पून जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
*इसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। बाद में इसे अच्छी तरह से धो लें।
*ऐसा सप्ताह में दो बार करें।


गाजर का रस और मुल्तानी मिट्टी
ऑयली स्किन वालों को मुंहासों की सबसे ज्यादा समस्या होती है। मुल्तानी मिट्टी चेहरे से अतिरिक्त तेल को सोखने का काम करती है। यह न केवल आपकी त्वचा से तेल और गंदगी को अवशोषित करती है, बल्कि ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और झाइयों को मिटाती है।
चेहरे पर लगाने का तरीका
*गाजर का रस निकालें और इसे कटोरे में इक_ा करें।
*एक चिकना पेस्ट बनाने के लिए इसमें पर्याप्त मुल्तानी मिट्टी मिलाएं।
*पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। इसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें।
*गुनगुने पानी का उपयोग करके इसे अच्छी तरह से धो लें।
*बेहतर परिणाम के लिए सप्ताह में एक बार इस उपाय को अपनाएं।
 

क्या आपको पता है ग्रीन-टी पीने का सही समय, नही तो जानिये ताकि आप ले सकें इसका पूरा लाभ

क्या आपको पता है ग्रीन-टी पीने का सही समय, नही तो जानिये ताकि आप ले सकें इसका पूरा लाभ

सिर्फ अपने देश ही नहीं अगर दुनिया के रूटीन पर नजर डालें तो ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत किसी ना किसी गर्म पेय के साथ करते हैं। इनमें भी चाय का नंबर सबसे पहला है। फिर यह चाय अलग-अलग फ्लेवर और कलर में हो सकती है। बदलते वक्त में ग्रीन-टी ज्यादातर लोगों की पसंदीदा मॉर्निंग-टी है। यहां जानें, ग्रीन-टी पीने का सही समय और तरीका...


मार्केट में उपलब्ध ग्रीन-टी के प्रकार
-बाजार में मिलनेवाली ग्रीन-टी कई अलग-अलग पैकिंग्स और फॉर्म्स में मिलती है। आप इन्हें अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से खरीदते हैं। लेकिन इस बारे में कम ही लोग जानते हैं कि ग्रीन-टी की सिर्फ पैकेजिंग अलग-अलग तरह से नहीं होती है। बल्कि ग्रीन-टी भी एक से अधिक प्रकार की होती है।


-पूरी दुनिया में जिस ग्रीन-टी का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, उसका टेक्निकल नाम सेन्चा है। इसे तैयार करते समय वही सामान्य प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो अपने देश में आसाम और दार्जिलिंग में चाय तैयार करने के लिए अपनाते हैं।
-चाय की पत्तियों को सुखाने के लिए धूप और भाप का उपयोग किया जाता है। जरूरी प्रक्रियाओं के बाद 5 अलग-अलग तरह की पैकेजिंग के साथ इसे मार्केट में उपलब्ध कराया जाता है। इनमें, स्वीटनर ग्रीन-टी, टी-बैग, ग्रीन लीफ, ग्रीन-टी पाउडर और ग्रीन-टी सप्लिमेंट्स के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।


ग्रीन-टी पीने का सही समय

-अगर आपको लगता है कि दिन की शुरुआत ग्रीन-टी के साथ करना लाभकारी होता है तो आप पूरी तरह सही नहीं हैं। आयुर्वेद के अनुसार, ग्रीन-टी आपके लिए सुबह की पहली ड्रिंक या नाश्ते का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।

-बल्कि नाश्ता करने के एक घंटे बाद या लंच के कम से कम 1 घंटे बाद आप ग्रीन-टी का सेवन करें। यह आपके शरीर में जमा हुए फैट को तोडऩे का काम करेगी। साथ ही पाचनतंत्र को गति देने का काम भी करेगी।

-अन्य चाय की तरह ग्रीन-टी में भी कैफीन होता है, जो आपके शरीर को ऐक्टिव रखने में सहायता करता है। जब भी एक्सर्साइज करनी हो या वॉक पर जाना हो, उससे आधा घंटा पहले ग्रीन-टी का सेवन करने से आपको अधिक लाभ होगा।

 

हाउस वाइफ बिना एक्सारसाइज किए घटा सकती हैं अपना वजन, अपनाने होंगे ये तरीके

हाउस वाइफ बिना एक्सारसाइज किए घटा सकती हैं अपना वजन, अपनाने होंगे ये तरीके

मोटापा किसी भी आदमी को पसंद नहीं होता. महिलाओं को मोटा होना तो बिल्कुल भी पसंद नहीं होता क्योंकि इससे उनकी खूबसूरती और फिगर दोनों ही खराब होता है. यही कारण है कि महिलाएं वेट कम करने के लिए जिम में जाकर खूब पसीना बहाती हैं. लेकिन पांच महीने से देश में लॉकडाउन है. ऐसे में कोई जिम नहीं खुल रहे हैं. इसके कारण महिलाएं घर से नहीं निकल पाती हैं. घर में रहकर महिलाओं का वजन भी काफी बढ़ गया है. घरेलू काम करने वाली महिलाएं तो इन दिनों घर के काम में ही व्यस्त रहती हैं. घर में उनका वजन बहुत बढ़ गया है. घरेलू काम के चलते उनको एक्सरसाइज का समय नहीं मिलता. ऐसे में आज हम घरेलू महिलाओं को वजन कम करने के कुछ तरीके बता रहे हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं...
ब्रिस्क वॉक
वॉक करने से अच्छी एक्सरसाइज कोई नहीं हो सकती. वॉक करने से पूरी बॉडी की एक्सरसाइज हो जाती है. इसलिए जितनी हो सके वॉक करना चाहिए. वॉक करने के लिए आप एक समय को निर्धारित कर लें. एक निश्चित समय तक आप रोज चहलकदमी करें. इससे आपके शरीर में ऊर्जा आएगी. कुछ दिनों के बाद ही आपको महसूस होगा कि आपकी हेल्थ में बड़ा सुधार हुआ है. इस काम के लिए आपको बहुत संघर्ष नहीं करना पड़ेगा. इसके लिए आपको थोड़ी सी इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.
स्किपिंग करें
बचपन में हम घंटों इस एक्टिविटी को करते हैं. आज खुद को फिट रखने के लिए इस एक्टिविटी को अपने रुटीन में शामिल करना चाहिए. हाइस वाइफ को खुद को फिट रखने के लिए इस एक्सरसाइज को करना चाहिए. रोजाना सिर्फ 10 मिनट स्किपिंग करके आप अपना वजन तेजी से कम कर सकती हैं. यह फुल-बॉडी वर्कआउट आपकी हड्डियों और मसल्स को हेल्दी रखने में मदद करता है. इसे आप किसी भी उम्र में कर सकती हैं.
डांस करें
डांस करना लोगों की पसंद होती है. यह एक ऐसा शौक है, जिसके साथ आप खुद को फिट रख सकते हैं और नया गुण भी सीख सकते हैं. साथ ही ऐसा रोजाना कुछ देर करने से आप अपना वजन कम कर सकती हैं. अगर आप म्यूजिक लवर हैं और धुनों पर पैर थिरकाना आपको पसंद है तो यह खुद को फिट रखने के लिए ये सबसे अच्छी एक्सरसाइज है. अगर आपको अकेले डांस करना पसंद नहीं है तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ डांस कर सकती हैं.
बिस्तर में योग करें
अगर आप घर के बाहर नहीं जा सकती हैं तो घर में बिस्तर पर ही योग कर सकती हैं. इसके लिए बिस्तर पर खुद को स्ट्रेच करें और योग करें. आप बिस्तर पर थोड़ी सी प्लैंक एक्सरसाइज करने की कोशिश कर सकती हैं. ऐसा करने से गिरने की चिंता भी नहीं होती है. अपने दिन की शुरुआत करने से पहले ये एक्टिविटी सुबह जल्दी की जा सकती है.

 

वजन को तेजी से घटाए भिंडी की सब्जी, इन 9 बीमारियों के लिए भी है रामबाण

वजन को तेजी से घटाए भिंडी की सब्जी, इन 9 बीमारियों के लिए भी है रामबाण

भिंडी एक ऐसी सब्जी है, जो शायद ही किसी को ना पसंद हो। भारत के एशियाई देशों में सबसे अधिक भिंडी खाई जाती है। भारतीय घरों में भिंडी कई तरीकों से तैयार की जाती है। कुछ लोग चिपचिपाहट के कारण भिंडी खाना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह भिंडी सेहत की दृष्टि से काफी फायदेमंद हो सकती है।
भिंडी में क्षारीय गुण होता है। इसमें मौजूद जिलेटिन अपच और एसीडिटी की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। यह फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट तत्वों से भरपूर होता है। हरी भिंडी में फोलिक एसिड, विटामिन ए (vitamin A), विटामिन बी (vitamin B), विटामिन सी, विटामिन के (vitamin K), पोटेशियम, कैल्शियम, एंटीऑक्सिडेंट और कुछ महत्वपूर्ण फाइटोन्यूट्रिएंट पाए जाते हैं। यह फाइबर का काफी अच्छा स्त्रोत होता है, जो ना सिर्फ पाचन में सुधार करता है, बल्कि इसके सेवन से लंबे समय पर हमारा पेट भरा रहता है। आइए जानते हैं भिंडी खाने के क्या फायदे होते हैं।
हड्डियां बनाए मजबूत
भिंडी में काफी ज्यादा चिपचिपाहट होती है, जो हड्डियों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होती है। इसमें विटामिन के पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है।
इम्यून सिस्टम
भिंडी विटामिन सी से भरपूर होता है। इसके साथ ही इसमें एंटी-आक्सीडेंट भरपूर रूप से होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में काफी सहायक होते हैं। यह शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। भिंडी को भोजन में शामिल करने से खांसी-जुकाम, ठंड जैसी समस्याएं नहीं होती हैं।
कैंसर
आपकी थाली में रखी भिंडी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से आपको बचा सकती है। आमतौर पर कोलन कैंसर से शिकार व्यक्ति के लिए भिंडी बहुत ही फायदेमंद होती है। यह आंतों में विषैले गैस को बाहर निकालने में आपकी मदद करती है। इससे आपके आंत स्वस्थ रहेंगे।
हृदय
दिल के लिए भी भिंडी बहुत ही फायदेमंद होती है। भिंडी में मौजूद पैक्टिन कोलेस्ट्रॉल को कम करने में आपकी मदद करता है। इसके साख ही इसमें पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर, ब्लड में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है। इससे हृदय रोग का खतरा कम होता है।
एनीमिया
एनीमिया से ग्रसित लोगों के लिए भी भिंडी काफी लाभदायक होती है। इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन का निर्माण करने में आपकी सहायता करता है। भिंडी में मौजूद विटामिन- के, रक्तस्त्राव को रोकने का काम करता है।
पाचन तंत्र
भिंडी फाइबर से भरपूर होती है। इसका लसलसा फाइबर पाचन तंत्र के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। भिंडी से कब्ज, पेट फूलना, दर्द और गैस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
आंखों की रोशनी
आंखों की रोशनी के लिए भी भिंडी काफी फायदेमंद है। यह बीटा कैरोटीन, विटामिन-ए और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो सेल्युलर चयापचय से उपजे मुक्त कणों को नष्ट करने में हमारी सहायता करते हैं। यह कण नेत्रहीनता के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा भिंडी के सेवन से मोतियाबिंद से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
वेट कंट्रोल
भिंडी में लो कैलोरी होने के कारण ये वेट को कंट्रोल करने में अहम् भूमिका निभाता है। 100 ग्राम भिंडी में मात्र 33 कैलोरी होता है। अगर आप वजन को कम करने का प्लान कर रहे हैं, तो डाइट में भिंडी को जरूर शामिल करें।
एन्टी-डाइबीटिक गुण
कई अध्ययनों से यह पता चला है कि सब्ज़ियों में एक प्रकार का एन्जाइम होता है जो कार्बोहाइड्रेट को मेटाबॉलाइज करने, इन्सुलिन लेवल के उत्पादन को बढ़ाने, अग्न्याशय (pancreas) में बीटा सेल्स को बेहतर बनाने में जो इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायता करता है।
 

तनाव को दूर करने के लिए हर दिन 10 मिनट करें शवासन, शरीर दर्द से भी मिलेगा छुटकारा

तनाव को दूर करने के लिए हर दिन 10 मिनट करें शवासन, शरीर दर्द से भी मिलेगा छुटकारा

कोरोना महामारी के दौरान तनाव आम लोगों के जीवन के दुभर कर रहा है. इसके अलावा घर में काम करें या ऑफिस में दोनों जगह थकावट की समस्या आम होती है. आज की भागमभाग जिंदगी में कई बार काम करने वालों की नींद भी पूरी नहीं होती है. अगर आप डेस्क जॉब में भी हैं तो थकावट के साथ शरीर दर्द की शिकायत हो सकती हैं. तनाव और थकान से बचने के लिए आप योग का सहारा ले सकते हैं. अगर आप हर दिन सिर्फ 10 मिनट शवासन करते हैं तो इससे बहुत राहत मिलेगी.


शवासन करने का सही तरीका

1. योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. अगर आप इसे समूह में कर रहे हैं तो आसपास के लोगों से दूरी बनाए रखें.

2. शवासन में तकिया या किसी आरामदायक चीज का सहारा ना लें.

3. आखें बंद कर लें. दोनों टांगों को अलग-अलग कर लें.

4. पूरी तरह रिलैक्स होने के बाद यह ध्यान रखें कि आपके पैरों के दोनों अंगूठे साइड की तरफ झुके हुए हों.

5. आपका हाथ शरीर के साथ कुछ दूरी पर हो, हथेलियों को ऊपर की ओर खुला रखें.

6. दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम 1 फुट की दूरी रखें.


7. सांस लेने की गति धीमी​ लेकिन गहरी रखें. पूरा ध्यान अब अपनी सांसों पर रखें.

ध्यान रहे कि शवासन करते हुए आपको सोना नहीं है.

 

शवासन करने के फायदे

शवासन आपके मन को शांत करने के साथ ही शरीर के थकान को मिटा देता है. हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटिज, तनाव और दिल की बीमारी वगैरह में भी इस योगासन से लाभ होता है. शवासन शरीर को न सिर्फ रिलैक्स करता है बल्कि मेडिटेशन की स्थिति में भी ले जाता है. इसे करने से याददाश्त, एकाग्रशक्ति भी बढ़ती है. अगर आप बेहद थके हुए हैं तो शवासन ऊर्जा हासिल करने का सबसे सुरक्षित और तेज तरीका है. 

क्या आप भी खाना जल्दी-जल्दी खाते हैं? जान लें बिना चबाए खाना निगलने के ये बड़े नुकसान

क्या आप भी खाना जल्दी-जल्दी खाते हैं? जान लें बिना चबाए खाना निगलने के ये बड़े नुकसान

कई लोग खाना खाने बैठते हैं तो इतना जल्दी पूरा भोजन खत्म कर देते हैं कि देखकर ही आश्चर्य होता है. कई लोगों में तेजी से खाने की आदत होती है और वे इस बात पर गर्व करते हुए भी दिखाई देते हैं, लेकिन तेजी से खाना किसी भी मायने में सही नहीं है. वैज्ञानिक रूप से, तेजी से खाने से व्यक्ति के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं और निश्चित रूप से इसे रोकने की जरूरत होती है. ज्यादा तेजी से खाने का मतलब यह हो सकता है कि पांच मिनट से भी कम समय में नाश्ता या दोपहर का भोजन खत्म कर देते हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एक शोध में कहा गया है कि ज्यादा तेजी से खाने का मतलब है कि मोटापा ग्रस्त होने या मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम विकसित होने की आशंका अधिक है. ये दोनों दिल की बीमारी, मधुमेह और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं.


तेजी से खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. जब भोजन को चबाने के बजाय निगल लेते हैं या इसे आसानी से पचने वाले टुकड़ों में तोडऩे के लिए पर्याप्त रूप से चबाते नहीं हैं तो एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी कई पाचन समस्याओं को आमंत्रित करते हैं.


तेजी से खाने से वजन बढ़ता है. पाचन प्रक्रिया मुंह में शुरू होती है और तेजी से खाना खाने से लार द्वारा भोजन को सरल शर्करा में तोडऩे के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है. इससे भोजन तोडऩे के लिए पेट को अधिक एसिड रिलीज करना पड़ता है. बढ़ा हुआ एसिड भूख महसूस करवा सकता है और बदले में ज्यादा खाना खा जाते हैं. यह समय के साथ मेटाबॉलिज्म को भी धीमा कर सकता है और इससे वजन बढ़ सकता है.


खास बात यह है कि मस्तिष्क को पेट भर जाने का संकेत पाने और तृप्त महसूस करने में लगभग 20 मिनट लगते हैं. भोजन को धीरे-धीरे चबाने से शरीर को यह महसूस करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है कि खाना बंद करने की आवश्यकता है. यह एक और तरीका है, जिससे भूख से अधिक खाने से बच सकते हैं और वजन को नियंत्रित रख सकते हैं.


जल्दी-जल्दी खाना खाने से इंसुलिन प्रतिरोध और मधुमेह हो सकता है. फास्ट फूड खाने से होने वाले मोटापे का एक और नकारात्मक पहलू यह है कि इससे मधुमेह या इंसुलिन प्रतिरोध की आशंका बढ़ जाती है.

ये है खाने का सही तरीका
भोजन करना बेहद ही आसान लगता है, लेकिन इससे जुड़ी कुछ छोटी-छोटी गलतियां बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं. खाना खाते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. खाने से पहले इस बात का ख्याल रखें कि बाइट साइज यानी निवाले का आकार सही हो. खाने के छोटे-छोटे निवाले लें. इससे लार के एंजाइम्स सही तरह से भोजन में नहीं मिल पाते हैं, जिससे खाना सही तरह से नहीं पच पाता है.
खाना खाते समय दिमाग शांत रखें और खाने पर ही ध्यान दें. जल्दबाजी करने से कण श्वास नली में फंस सकता है. भोजन को निगलने से पहले लगभग 15-20
बार निवाले को चबाते रहें, ताकि भोजन छोटे टुकड़ों में टूट जाए.


खाने से पहले दो से तीन घूंट पानी पीने से मुंह और फूड पाइप चिकना हो सकता है और भोजन को तेजी से और अधिक कुशलता से पेस्ट करने में लार की मदद करता है. खाने के बाद या उसके दौरान पानी पीने से बचना चाहिए. विशेषज्ञ ब्लोटिंग को रोकने और पाचन सुधारने के लिए दो गिलास पानी पीने से पहले एक घंटे तक इंतजार करने की सलाह देते हैं.

 

गरारे करते समय इन 5 बातों का जरूर रखें ख्याल

गरारे करते समय इन 5 बातों का जरूर रखें ख्याल

मौसम बदलने पर गले में खराश या आवाज बैठ जाने की शिकायत सुनने में आती है। गला खराब यानि गले में दर्द होना या खुजली जैसा होना, गले में कफ जम जाना और गले की आवाज बदल जाना।
गला खराब होने पर नमक के गरारे से काफी मदद मिलती है। नमक का सांद्र घोल गले की परत पर चढ़ाई किए हुए कई रोगाणुओं के लिए काफी खतरनाक है। इसके प्रभाव से रोगाणु मर भी जाते हैं।

कफ जमा हो तो यह गाढ़े कफ को पतला कर काफी मात्रा में ठोस पदार्थों को गले से बाहर निकालने में मदद करता है, इसलिए नमक के घोल से गरारे करने को कहा जाता है। लेकिन गरारे करते वक्त इन बातों का ध्यान रखना चाहिए –

1 सहन कर सकने योग्य एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच नमक डालकर इस पानी से गरारे करना चाहिए।

2 फिटकरी का एक बारीक सा टुकड़ा भी इस पानी में डालकर गरारे करने पर आराम मिलता है।

3 नमक के साथ या तो खाने का सोडा दो चुटकी मिलाकर गरारे करने से भी आराम मिलता है।

4 नमक के साथ गरम पानी में हल्दी का प्रयोग करना भी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण मौजू होते हैं

5 लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि या तो फिटकरी डालें या खाने का सोडा मिलाएं यानी नमक के साथ कोई एक चीज को प्रयोग करें।


 

साइटिका के दर्द से राहत दिलाएंगे ये योगासन, फैट भी होगा कम

साइटिका के दर्द से राहत दिलाएंगे ये योगासन, फैट भी होगा कम

आजकल हमारी बदलती जीवनशैली में कई तरह की शारीरिक परेशानियां घेरने लगी हैं. साइटिका का दर्द भी इनमें से एक है. सायटिका में पैर में असहनीय दर्द होता है. इसमें मरीज को चलने में भी परेशानी होती है. दरअसल, साइटिका एक नर्व है. जब इसमें सूजन या खिंचाव होता है, तो दर्द शुरू हो जाता है. इसी को सायटिका का दर्द कहा जाता है. इस दर्द को दूर करने के लिए कई तरह के योग आसन बताए गए हैं. इनकी मदद से साइटिका के दर्द को दूर किया जा सकता है.


भुजंगासन:
इस आसन को कोबरा पोज भी कहा जाता है. यह आसन साइटिका के दर्द को दूर करने के अलावा पेट की चर्बी को भी कम करता है. इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं. अपने दोनों पैरों के बीच दूरी कम रखें और गहरी सांस लेते हुए अपने ऊपरी शरीर को ऊपर की ओर उठाएं. आपकी कोहनी इस दौरान शरीर के साथ सीधी रेखा में होनी चाहिए. पैरों को इस तरह स्ट्रेच करें कि आपको अधिक खिंचाव महसूस न हो. इसके अलावा अपने सिर को जितना हो सके ऊपर की तरफ उठाएं. इसे 3 से 4 बार करें.


अपानासन योग:
इस आसन की शुरुआत करने के लिए समतल जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं. इसके बाद अपने दोनों पैरों को घुटनो से मोड़ लें. फिर धीरे से सांस छोड़ते हुए दोनों घुटनो को छाती की ओर लाने का प्रयास करें. इसके बाद अपने दोनों हाथो से घुटनो को पकड़ लें. मगर ध्यान रखें कि आपके कंधे जमीन पर ही टिके हुए हों. कुछ देर इसी स्थिति में रहें. फिर गहरी सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं.


अधोमुख श्वान आसन:
इस आसन को करने के लिए पहले दोनों हाथ और घुटनों के बल जमीन पर लेट जाएं. इसके बाद सांस खींचते हुए अपने पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं और टेबल जैसी आकृति बनाएं. अब शरीर के पिछले हिस्से को ऊपर की ओर उठाइए. इसके साथ-साथ अपने दोनों घुटनों और हाथों को भी सीधा कर लें. इस आसन के अभ्यास के दौरान कंधे और हाथ एक सीध में रहने चाहिए. पैर हिप्स की सीध में रखें. ध्यान रखें कि आपके दोनों हाथ की हाथेलियां फैली हुई हों. अब कुछ देर तक इसी अवस्था में रहें.


सुप्त पादांगुष्ठासन:
यह आसन साइटिका की समस्या में बहुत आराम देता है. इसे करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को फैला कर लेट जाएं. अब अपने एक पैर को उठाएं. इसके बाद एक ऐसा कपड़ा लें, जो लंबाई में काफी बड़ा हो. इसके बाद इस कपड़े को अपने पैर के पंजे में डाल कर हाथो में अच्छे से पकड़ लें. अपने पैर को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें. अब अपने घुटने को बिना मोड़े ही पैर को अपने सिर की ओर लाने का प्रयास करें. कुछ देर तक इसी अवस्था में रहें.

 

बालको मेडिकल सेंटर में हो रहा है दुर्लभ किस्म के कैंसर का उपचार, जानिए क्या है तकनीक, किन्हें मिल सकता है लाभ

बालको मेडिकल सेंटर में हो रहा है दुर्लभ किस्म के कैंसर का उपचार, जानिए क्या है तकनीक, किन्हें मिल सकता है लाभ

रायपुर, बालको मेडिकल सेंटर में सीआरएस + हाईपैक के जरिए दुर्लभ किस्म के कैंसर का उपचार किया जा रहा है. यह पेट में फैले विकसित कैंसर वाले कुछ रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है. नसों के जरिए की जाने वाली पारंपरिक कीमोथेरेपी के विपरीत हाइपरथर्मिक इंट्रा-पेरिटोनियल कीमोथेरेपी (हाईपैक) के जरिए पेट के कैंसर कोशिकाओं को सीधे उच्च मात्रा की कीमोथेरेपी प्रदान की जाती है.


हाल ही में बालको मेडिकल सेंटर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने एक नहीं बल्कि दो हाईपैक प्रक्रियाओं को सफ़लतापूर्वक किया. एक मध्यम आयु वर्ग की महिला रोगी, इसमें एक मरीज स्यूडोमिक्सोमा पेरिटोनी से पीड़ित थी, वहीं दूसरी महिला अंडाशय के कैंसर की मरीज थी. दोनों मरीज इस जटिल सर्जरी के सफलतापूर्वक होने के बाद ठीक हो रहे हैं.
हाईपैक प्रक्रिया साइटोरेडेक्टिव सर्जरी (सीआरएस) कैंसर सर्जरी के साथ की जाती है, जिसके दौरान एक सर्जन पेट के अंदर से सभी दिखाई देने वाले कैंसर को हटा देता है। गर्म, जीवाणुरहित कीमोथेरेपी (41-43 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ) पेट में शेष कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए लगभग ढेड़ घंटे तक पहुंचाया जाता है. भिन्न कैंसरों के लिए भिन्न कीमोथेरेपी एजेंट्स का उपयोग होता है.


बालको मेडिकल सेंटर के चिकित्सा सेवाएं प्रमुख डॉ. जयेश शर्मा कहते हैं कि हाईपैक एक जटिल प्रक्रिया है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम उन रोगियों की पहचान करें जो इससे सबसे अधिक लाभान्वित होंगे. कुछ प्रकार के कैंसर में हाईपैक के साथ सफलता और संभावित इलाज सबसे अच्छा है. बालको मेडिकल सेंटर के ऑन्कोसर्जन डॉ. अश्वनी सचदेवा बताते हैं कि कीमोथेरेपी को गर्म करना इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाता है. क्योंकि जब यह गर्म होता है, तो कीमोथेरेपी ऊतक में अधिक गहराई से प्रवेश करती है, और अधिक से अधिक कैंसर कोशिकाओं को मार सकती है.


सेंटर के ऑन्कोसर्जन डॉ. सुनील कौशिक कोमांडुरी बताते हैं कि अपेंडिक्स और बृहदान्त्र के उन्नत मेटास्टेटिक कैंसर, उन्नत डिम्बग्रंथि के कैंसर, और पेरिटोनियल मिसोथिलिओमा वाले लोगों में हाईपैक से जीवन काल में काफी वृद्धि कर सकता है. हाईपैक के साथ, इस प्रकार के कैंसर को पूरी तरह से ठीक करने और जीवन काल में वृद्धि करना संभव है.


डॉक्टरों ने बताया कि इस प्रकार की जटिल प्रक्रियाएँ, जो पहले मेट्रो शहरों तक सीमित थीं, अब बालको मेडिकल सेंटर में कैंसर रोगियों के लाभ के लिए उपलब्ध कराई गई हैं. केवल उन्नत कैंसर केंद्रों में हाईपैक जैसे उन्नत ऑपरेशन संभव हैं, जहां निदान, उपचार, महत्वपूर्ण देखभाल, संक्रमण नियंत्रण प्रथाओं और रोगियों की पोषण-संबंधी जरूरतों के हर पहलू को एक ही छत के नीचे ध्यान दिया जाता है.

 

डायबिटीज के मरीज खाएं मूंगफली, जानिए फायदा

डायबिटीज के मरीज खाएं मूंगफली, जानिए फायदा

लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों में सबसे ज्यादा खतरनाक डायबिटीज है. ये बीमारी तेजी से देश में फैल रही है और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. डायबिटीज अकेली बीमारी नहीं है, इसके साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और हार्ट संबंधी बीमारियां भी होने लगती है.. डायबिटीज इसलिए भी खतरनाक है कि इसे दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन खत्म नहीं. डायबिटीज होने पर दवाओं के साथ लाइफस्टाइल और खासकर फूड हैबिट्स में बहुत बदलाव करने पड़ते हैं तभी शुगर कंट्रोल में रहता है. मूंगफली भी एक ऐसा खाना है जिसे लेकर डायबिटिक लोग शंका में रहते हैं कि इसे खाये या ना खायें. लेटेस्ट रिसर्च के मुताबिक अगर मूंगफली को सही तरीके से खाया जाये तो ये फायदा करती है.


मूंगफली के फायदे
मूंगफली में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जो डायबिटिक लोगों के लिये अच्छा है. मूंगफली में फाइबर, प्रोटीन और अल्फा लिपोइक एसिड भरपूर होता है जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. मूंगफली टाइप-2 डायबिटीज में फायदा करने वाला खाना है. इसके सेवन से दिल की बीमारियां होने का खतरा भी कम होता है. डायबिटीज के मरीज मूंगफली की कोई डिश अपने खाने में जरूर शामिल करें. हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि वो डिश ऑइली या मीठी ना हो वरना उल्टा असर भी पड़ सकता है. हम आपको बताने जा रहे हैं 4 ऐसी डिश जो हेल्दी होने के साथ साथ काफी टेस्टी हैं और इनको बनाना भी है बेहद आसान.

मूंगफली की चाट-  अगर मूंगफली को अपने खाने में शामिल करना चाहते हैं इसकी चाट बनाकर खायी जा सकती है. भुने हुए मूंगफली के दानों में अपने स्वादानुसार प्याज, टमाटर, हरी मिर्च नींबू और नमक डालकर ये चाट बनाये. स्वाद बदलने के लिए इस चाट में रोस्टेड चने भी मिला सकते है. ये चाट डायबिटीज और बिना डायबिटीज वालों के लिए बेहद हेल्दी और टेस्टी खाना है जिसे नाश्ते या शाम को स्नैक्स के तौर पर खा सकते हैं.


मूंगफली की चटनी- चटनी तो भारतीय खाने में और स्वाद बढ़ाने वाला आयटम है. लोग धनिया, पुदीने, टमाटर की चटनी तो बनाते ही है लेकिन साउथ इंडियन खाने के साथ कई बार मूंगफली की चटनी भी बनती है. इस चटनी को भीगी हुई या रोस्टेड मूंगफली के साथ बनाते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़े तिल भी डाल सकते हैं. ये चटनी खाने का मजा बढ़ा देती है और काफी हेल्दी भी है.

 

मूंगफली वाला पोहा-  वैसे तो पोहा महाराष्ट्र की डिश है लेकिन अब ये पूरे इंडिया में स्नैक्स और खासतौर पर ब्रेकफास्ट में खाये जाने वाली डिश बन चुका है. पोहा खाने में टेस्टी होता है और हल्का भी इसलिए डायबिटिक लोग भी इसे खा सकते हैं. पोहे में भुनी हुआ मूंगफली से इसका स्वाद और बढ़ जाता है. इसके अलावा पोहे की ड्राई नमकीन भी बना सकते हैं और उसमें भी मूंगफली डाली जा सकती है. ये नमकीन भी रोस्टेड होने की वजह से हल्की होती है

पीनट बटर खायें- विदेशों में तो पीनट बटर यानी मूंगफली का मक्खन काफी पॉपुलर है और अब ये अपने देश में भी खूब पॉपुलर हो रहा है. पीनट बटर खाने में काफी टेस्टी होता है और जिनको पीनट का टेस्ट पसंद है वो लोग पीनट बटर खा सकते हैं. पीनट बटर सैंडविच में इस्तेमाल कर सकते हैं या सिंपली मल्टीग्रेन ब्रेड या रोटी पर लगाकर खा सकते है. इस बटर में स्वीटनेस होती है इसलिए स्मूदी में भी इसका टेस्ट अच्छा लगता है. 

सर्दी-जुकाम से परेशान है तो इन उपायों से मिलेगी फौरन राहत

सर्दी-जुकाम से परेशान है तो इन उपायों से मिलेगी फौरन राहत

मौसम के बदलते ही सर्दी और जुकाम का होना आम बात है। लेकिन आप थोड़ा सावधानी बरतकर सर्दी और जुकाम की समस्या से निजात पा सकते हैं। सर्दी और जुकाम के साथ ही खांसी की समस्या होने लगी है। अगर सुबह उठते ही आपका गला बैठा रहता है और छींक के साथ ही सिर में भारीपन भी रहता है तो आप इस मौसम में छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर इस समस्या को खुद ही दूर कर सकते हैं।
सर्दी-खांसी और जुकाम की समस्या संक्रमण की वजह से होती है। अगर आपके आसपास किसी को सर्दी और जुकाम हो रहा है तो यह आपको भी हो सकता है। इसके अलावा इस मौसम में एलर्जी भी सर्दी और जुकाम की वजह बनती है। अगर ठीक वक्त पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह वायरल का रूप भी ले सकता है।
दरअसल सिरदर्द, आंखों से पानी बहना, बदन टूटना वायरल के लक्षण हैं। ये लक्षण सर्दी, खांसी और जुकाम के साथ ही शुरू होती हैं। ऐसे में इस समस्या के बचाव के लिए हल्का खाना खाएं और डाइट में हरी सब्जियां और ताजे फल ज्यादा लें।
आप घर में ही काढ़ा बनाकर सर्दी और जुकाम की समस्या में राहत पा सकते हैं। इसके अलावा ब्लैक टी भी इस समस्या में फायदेमंद होती है। दरअसल मौसम के करवट लेते ही हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और हमें वायरल होने लगता है। ऐसे में अगर आपका नाक बंद हो गया हो या गले में तेज खराश हो रही है तो आप गर्म पानी से गरारे करें और स्टीम लें। आप सर्दी, खांसी और जुकाम से बचने के लिए रात में हल्दी दूध पिएं।
सर्दी और जुकाम की समस्या से बचने के लिए हरी सब्जियां ज्यादा खाएं। नींद भरपूर लें और हल्का खाना खाएं। आप शहद का सेवन करें। ग्रीन टी भी इस मौसम में लाभकारी होती है। ठंडे पानी की जगह गर्म पानी पिएं और मसाला चाय का सेवन करें। अदरक के सेवन से भी सर्दी और जुकाम में राहत मिलती है।

 

बालको मेडिकल सेंटर में राज्य का पहला चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज किया गया

बालको मेडिकल सेंटर में राज्य का पहला चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज किया गया

रायपुर | नया रायपुर का सबसे बड़ा एवं अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल, बालको मेडिकल सेंटर ने छत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज किया है। बालको मेडिकल सेंटर में 73 वर्ष के एक सज्जन में एक दुर्लभ रक्त कैंसर का पता चला, जिसे वाल्डेनस्टॉर्म मैक्रोग्लोबुलिनमिया कहा जाता है।

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वह बहुत उच्च इम्युनोग्लोबुलिन स्तर के साथ सिरदर्द, उच्च रक्तचाप के लक्षणों के साथ आया था, जिससे स्ट्रोक और अन्य जटिलताओं का बहुत अधिक जोखिम होता है। उन लक्षणों को कम करने के लिए, उनके प्लाज़्मा को चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज (टीपीई) नामक एक प्रक्रिया द्वारा बदलना आवश्यक था।

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बालको मेडिकल सेंटर में हेमटोलॉजिस्ट डॉ. दिब्येंदु डे और डॉ. नीलेश जैन, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ के अनुसार, “किसी के प्लाज़्मा को बदलना एक बहुत ही मुश्किल काम है, और एक बुजुर्ग मरीज में,जिनकी नसें नाज़ुक हो, उनमें ऐसी प्रक्रियाएँ करने में बहुत जोखिम हैं। हालांकि, बालको मेडिकल सेंटर की विशेषज्ञ टीम द्वारा बिना किसी जटिलता के इसे सफलतापूर्वक किया गया।“

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डॉ. दिब्येन्दु ने आगे कहा, “टीपीई को विभिन्न अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में इस्तेमाल किया गया है, जैसे जीबीएस और क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी डेम्येलीनेटिंग पॉलिन्यूरोपैथी, और गैर-न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में भी, जैसे मायस्थेनिया ग्रेविस (एमजी), हाइपर विस्कॉसिटी सिंड्रोम, थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा (टीटीपी), हीमोल्य्टिक यूरेमिक सिंड्रोम, आदि ।

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डॉ. नीलेश जैन ने प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा, “चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज एक उपचार है जो आपके रक्त से प्लाज़्मा को निकालता है।प्लाज़्मा निष्कासन शरीर से विभिन्न विषाक्त पदार्थों और इम्युनोग्लोबुलिन को बाहर निकालता है। प्लाज़्मा को हटा दिया जाता है और प्लाज़्मा विकल्प के साथ बदल दिया जाता है । टीपीई रक्त से प्लाज़्मा को अलग करने के लिए एफेरेसिस मशीन नामक एक विशेष उपकरण का उपयोग करता है, जबकि शरीर में रक्त के आवश्यक घटक शेष रहते हैं। उम्मीद है, यह प्रक्रिया रोगी को बिना किसी जटिलता के कैंसर का मुकाबला करने में मदद करेगी। चिकित्सीय प्लाज़्मा एक्सचेंज के अलावा, एफेरेसिस तकनीक का उपयोग ल्यूकेफैरेसिस और ग्रैनुलोसाइटैफेरिस प्रक्रियाओं में भीकिया गया है, जो पहली बार छत्तीसगढ़ में हमारे अस्पताल में ही किया गया था।”

वजन घटाने के लिए बेस्ट आहार होता है मखाना, जानें इसके सेवन का तरीका

वजन घटाने के लिए बेस्ट आहार होता है मखाना, जानें इसके सेवन का तरीका

किसी भी इंसान के लिए अपना वजन घटाना बहुत ही चुनौतियों से भरा होता है. इसके लिए आपको नियमित व्यायाम के साथ ही अपनी डाइट पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है. लेकिन ज्यादातर लोग इसको नियमित तौर पर नहीं अपना पाते हैं. आपके शरीर की चरेबी बढ़ने में आपकी जीवनशैली और खानपान का बहुत बड़ा योगदान होता है. आप हर रोज कैलोरी का सेवन कर रहे हैं आपके वजन को कम करना इस बात पर भी निर्भर करता है. आपके वजन को कम करने में नट्स जैसे कि मखाना एक बुहत ही अच्छा विकल्प माना जाता है, जो आपके वजन को घटाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है. इसमें कम कैलोरी पायी जाती है जो आपके पेट को देर तक भरा रखने में उपयोगी है, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप मखाना खाकर अपना वजन कम कर सकते हैं.


मखाने में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व


मखाने में कोलेस्ट्रॉल, फैट और सोडियम की कम मात्रा पायी जाती है. यह असामयिक भूख के लिए एक बहुत अच्छा स्नैक माना जाता है. इसलिए इसको एक हल्का फुल्का नाश्ता भी माना जाता है. इसके साथ ही यह आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हातो है. इसका आप कई तरह से सेवन कर सकते हैं. जानते हैं 100 ग्राम मखानों में पाए जाने वाले पोषक तत्‍वों के बारे में.


-वसा: 0.1 ग्राम पायी जाती है.
-फाइबर: 14.5 ग्राम पाया जाता है.
-कैलोरी: 347kcl पायी जाती है.
-प्रोटीन: 9.7 ग्राम पाया जाता है.
-वसा: 0.1 ग्राम पायी जाती है.
-प्रोटीन: 9.7 ग्राम पाया जाता है.
-कार्बोहाइड्रेट: 76.9 ग्राम पाया जाता है.


कैसे मखानों से वजन कम किया जा सकता है?


मखाना एक उत्तम स्नैक्स होते है जिनमें कैलोरी की भी कम मात्रा पायी जाती है. यह आपकी हर रोज की कैलोरी काउंट को कंट्रोल करने में मदद करता है, जो आपकी वजन कम करने की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण नियमों में से एक है. मखाने लंबे सेमय तक आपके पेट को भरा रखने में सहायक होते हैं, जिससे आपको जल्दी भूख नहीं लगती है. यह प्रोटीन और फाइबर की पर्याप्‍त मात्रा से भरपूर होते हैं. प्रोटीन के सेवन से आप ओवरईटिंग और अनहेल्दी क्रेविंग्स से बच सकते हैं. इसके अलावा इसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल की भी कम मात्रा पायी जाती है.


मखाना के अन्य स्वास्थ्य लाभ


-मखाना आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस की पर्याप्त मात्रा से भरे होते हैं. इसका नियमित सेवन आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है.


-मखाना में कैल्शियम भरपूर मात्रा होने की वजह से यह आपकी हड्डी और दांतों को हेल्दी बनाए रखने में मददगार होते हैं.


-मखानों में मौजूद कसैले के गुण के कारण यह गुर्दे की समस्याओं को कम करने और उसे हेल्दी रखने में सहायक होता है.


-मखानों में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं जो आपके शरीर में पुरानी सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में लाभकारी होते हैं.


-मखानों में कई एंजाइमों की मौजूदगी होने के कारण एंटी-एजिंग गुणों को भी रोकने में सहायता मिलती है.


-मखाने में मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो आपके दिल को हेल्दी बनाए रखने का काम करता है.


मखाने का सेवन करने का तरीका
मखाना एक ऐसा नट्स है जिसका सेवन आप चाहें कैसे भी कर सकते हैं. आप इन्‍हें भूनकर या एक चम्मच घी या नारियल तेल डालकर भी खा सकते हैं. साथ ही आप इनमें कुछ नमक और काली मिर्च मिलाकर भी खा सकते हैं. यह वास्तव में आपके लिए हेल्दी है, लेकिन इसके अधिक सेवन से बचें.