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सप्ताह के सातों दिन 7 अलग फ्लेवर में पिएं दूध, सेहत रहेगी ठीक

सप्ताह के सातों दिन 7 अलग फ्लेवर में पिएं दूध, सेहत रहेगी ठीक

सेहत के मामले में अपनी लाइफ को सेट करना है तो हर दिन दूध का सेवन जरूरी है। लेकिन एक ही चीज को एक ही रूप में हर रोज सेवन करते रहने से मन ऊब जाता है। आज हम आपके लिए इसी उलझन का समाधान लेकर आए हैं। आपको सिर्फ इतना करना है कि हर दिन अपने लिए एक अलग फ्लेवर में दूध को तैयार करना है। यहां जानें सात दिन के लिए सात अलग फ्लेवर्स के बारे में...


नाश्ते में या सोने से पहले कभी भी लीजिए
-आप चाहें तो आज से या फिर कल से मिल्क रुटीन की शुरुआत कर सकते हैं। यहां बताई गई सात अलग-अलग चीजों को अपने घर की रसोई में स्टोर करके रखना है। ताकि हर दिन एक नए फ्लेवर में टेस्टी और हेल्दी दूध तैयार किया जा सकें। यदि सुबह के समय आपके पास दूध पीने का समय नहीं होता है तो आप रात को सोने से पहले इन फ्लेवर्ड मिल्क का स्वाद ले सकते हैं। इससे आपको नींद भी अच्छी आएगी...


शुरुआत करते हैं मखाना से
-सबसे पहले मखाना मिल्क की बात करते हैं। मखाना मिल्क तैयार करने के लिए आपको अपनी जरूरत के हिसाब से दूध लेना है और फिर उसमें एक मुट्टी मखाना डालकर 1 मिनट के लिए मिक्सी में फेट लें।


-अब इस दूख और मखाने के मिश्रण में अपने स्वाद के अनुसार शुगर मिलाएं। लीजिए तैयार है आपका मखाना मिल्क। हां, पोषण के बारे में भी जान लीजिए...मखाना कुछ मात्रा में विटमिन-डी और भरपूर मात्रा में आयरन का सोर्स होता है। वहीं दूध कैल्शियम से भरपूर होता है।
-दूध और विटमिन-डी हड्डियों को मजबूती देता है तो आयरन शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ाता है। यानी दूध और मखाना दोनों के मेल से हमारा शरीर मजबूत बनता है।


केसर युक्त दूध
-केसर युक्त दूध तैयार करने के लिए भी आपको इलायची का दूध तैयार करने की विधि अपनानी है। एक गिलास दूध तैयार करने के लिए एक गिलास से अधिक दूध छोटे बर्तन में डालकर पकने के लिए रखें और इसे धीमी आंच पर पकाएं।
-दूध पकने रखते समय ही इसमें केसर की एक स्ट्रेन (एक पत्ती) डाल दें। जब दूध एक गिलास रह जाए तो इसमें शुगर मिलाकर दो से तीन मिनट के लिए इसे ढंककर रखे दें। इसके बाद आप आराम से इस दूध को खूबसूरत गिलास में सर्व करके इंजॉय कर सकते हैं।

हरी इलायची
-हरी इलायची युक्त एक गिलास दूध तैयार करने के लिए आपको सवा गिलास दूध चाहिए होगा। इस दूध को धीमी आंच पर गर्म होने के लिए रखें और इसमें एक हरी इलायची को पीसकर डाल दें।


-जब दूध पकते-पकते एक गिलास रह जाए तब इस दूध को उतारकर छान लें और इसमें अपने स्वाद के हिसाब से मीठा मिला लें। आपके लिए हेल्दी-टेस्टी और मदहोश करनेवाली सुंगध के साथ इलायची का दूध तैयार है।

शहद और दूध
-अपने देश की बात छोडि़ए पूरी दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे शहद का स्वाद पसंद ना हो। शहद विटमिन्स, मिनरल्स और प्राकृतिक शुगर प्राप्त करने का एक शानदार विकल्प है।
-शहद मिला दूध तैयार करने के लिए आप या तो सामान्य तापमान पर रखे दूध में शहद मिला लें। या फिर दूध को हल्का-सा गुनगुना कर लें और इसके बाद दूध में शहद मिलाएं। आपके लिए हनी-मिल्क तैयार है।


-ध्यान रखें कि बहुत तेज गर्म दूध में शहद नहीं मिलाते हैं। ऐसा करने से शहद के गुणों पर विपरीत असर होता है। इसके साथ ही फ्रिज में रखे दूध में शहद नहीं मिलाते। क्योंकि इतने ठंडे दूध में शहद ठीक से घुल नहीं पाता है।

ड्राईफ्रूट्स मिल्क
-काजू, बादाम, छुआरा इन तीनों चीजों को एक साथ मिक्सी में डालें। बेहतर होगा कि छुआरा आप रात को पानी में भिगोकर रखें और फिर सुबह ड्राईफ्रूट्स मिल्क तैयार करने में उनका उपयोग करें। नहीं तो आपक उनका बीज निकालकर भी उन्हें काजू और बादाम के साथ दूध में पीस सकते हैं।
-आपको एक मुट्ठी काजू-बादाम और मखाना मिश्रण लेना है। इसमें एक गिलास दूध डालकर अच्छी तरह मिक्सी में मिक्स कर लें। तैयार दूध में अपने स्वाद के अनुसार मीठा मिलाएं और सेहतभरे दूध का आनंद लें। आप चाहें तो इसकी नैचरल मिठास को इंजॉय करने के लिए बिना शुगर मिलाए भी उपयोग कर सकते हैं।
-ध्यान रखें कि ड्राईफ्रूट्स मिल्क तैयार करते समय उसमें किशमिश, मुनक्का और पिस्ता जैसे ड्राईफ्रूट्स का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि किशमिश और मुनक्का में कुछ खट्टापन होता है, जो दूध का विरोधी गुण हैं। साथ ही पिस्ता तैयार करने में नमक का उपयोग किया जाता है, जो दूध के साथ सेवन करने पर नुकसान करता है।


हल्दी और दूध
-हल्दी वाला दूध यानी गोल्डन मिल्क। इस दूध को तैयार करने के लिए और इस दूध की खूबियों को बताने के लिए नए सिरे से बात करने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि कोरोना के टाइम में इस दूध और इसकी खूबियों के बारे में इतनी बातें हम आपके साथ कर चुके हैं कि अब आप सब कुछ जान चुके हैं।
-आपको एक छोटी-सी लेकिन महत्वपूर्ण बात याद दिलानी है और वह यह है कि यदि नियमित रूप से आप हल्दी मिले दूध का सेवन करते हैं तो एक गिलास दूध में एक-चौथाई (1/4)चम्मच से अधिक हल्दी का उपयोग ना करें। साथ ही हल्दी का दूध तैयार करते समय दूध को गर्म जरूर करें और घूंट-घूंट करके गर्म दूध का ही सेव करें।


प्लेन दूध और गुड़
-दूध पीने का यह सदियों पुराना तरीका है। क्योंकि संभवत: गुड़ ही इंसान द्वारा तैयार की जानेवाली सबसे पहले मिठाई है। गर्म दूध के साथ गुड़ का सेवन करना एक अलग तरह की संतुष्टि देता है। गुड़ और दूध दोनों के गुण मिलकर हमारी सेहत को मजबूत बनाए रखने के काम करते हैं।

 

क्या आप भी कुछ सीढिय़ां चढ़कर ही हांफने लगते हैं तो जरूर करें यह काम

क्या आप भी कुछ सीढिय़ां चढ़कर ही हांफने लगते हैं तो जरूर करें यह काम

हम सभी के साथ ऐसा कभी ना कभी जरूर होता है, जब दूसरे फ्लोर तक सीढिय़ों से जाने के बाद ही हमारे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं और हमारी सांस फूलने लगती है। इस तरह की समस्या से आमतौर पर महिला और पुरुष दोनों ही गुजरते हैं लेकिन महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है...
सीढिय़ां चढऩे पर क्यों हांफने लगते हैं?
-सीढिय़ां चढ़ते समय थकान होना बहुत सामान्य घटना है अगर आपको तीसरे या चौथे फ्लोर पर जाने के बाद इस तरह की समस्या का अनुभव हो। लेकिन यह भी बहुत ही सीमित मात्रा में होना चाहिए। क्योंकि चौथे फ्लोर तक जाना या पांचवे फ्लोर तक जाना और बहुत अधिक थकान का अनुभव ना करना, एक स्वस्थ शरीर की निशानी है।


-फिटनेस की बात करें तब भी सीढिय़ां चढऩे और उतरने से हमारे शरीर की कैलरी खर्च होती हैं और फैट पिघलता है। इस कारण हमें अधिक ऊर्जा लगानी होती है और हमें थकान का अनुभव होता है। लेकिन अगर दो फ्लोर चढ़कर ही आपको थकान होने लगती है तो यह अच्छे संकेत नहीं हैं। यह आपके शरीर में छिपी कमजोरी को दिखाती है।


सांस लेने में दिक्कत होना
-कोई बहुत मेहनत का काम करने के बाद सांस फूलना एक सामान्य घटना है लेकिन अगर दो फ्लोर चढ़कर ही आपको सांस लेने में दिक्कत होने लगती है तो इसका अर्थ है कि आपका हृदय पूरी तरह स्वस्थ नहीं है। इसलिए अपने कमजोर होते हृदय को बीमार होने से बचाने के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखें।


-क्योंकि यह स्थिति शरीर में चुपके से पनप रही बीमारियों का प्रारंभिक संकेत हो सकती है। कई बार यह समस्या इसीलिए भी होती है कि हम बहुत अधिक आलस्य युक्त जीवन (लेजी लाइफस्टाइल) जी रहे हैं। इस कारण भी दो सीढिय़ां चढ़ते ही सांस फूलने की दिक्कत होती है।
आपको जो करना है...


-कुछ लोगों को सीढिय़ां चढऩे के बाद सिर भारी होना, सिर घूमना या आंखों के आगे धुंध आना जैसी समस्याएं होती हैं। अगर आपके साथ भी इस तरह की समस्या हो रही है तो आपको डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि यह स्थिति शरीर में किसी गंभीर बीमारी का संकेत है।
-साथ ही अपनी डायट का पूरा ध्यान रखें। इस बात का पता लगाएं कि क्या आपके भोजन से आपको पूरा पोषण मिल रहा है? क्योंकि जब शरीर को पूरा पोषण नहीं मिलता है तब शरीर में कमजोरी रहती है और कई रोग पनपने लगते हैं, जिनके कारण सांस फूलना और थकान जैसी समस्या होती है।


-आपको इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि लॉकडाउन या कोरोना के कारण आपकी शारीरिक गतिविधियां कम ना हों। आप घर की इन सीढिय़ों पर हर दिन चक्कर लगाकर भी खुद को ऐक्टिव रख सकते हैं। योग कर सकते हैं, घर के आंगन या छत पर वॉक कर सकते हैं।

 

बारिश में खाएं अदरक और शहद की चटनी, स्वाद के साथ बढ़ाएं अपनी इम्यूनिटी

बारिश में खाएं अदरक और शहद की चटनी, स्वाद के साथ बढ़ाएं अपनी इम्यूनिटी

बारिश का मौसम आते ही चिलचिलाती गर्मी से तो राहत मिल जाती है लेकिन इस मौसम में सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. मानसून में वायरल, डेंगू, टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियां सबसे ज्यादा होती हैं. इनमें से ज्यादातर बीमारियां पानी की वजह से होती हैं. इस मौसम में गले में इनफेक्शन होना भी आम बात है. इसलिए बारिश के मौसम में बचाव सबसे जरूरी है. हालांकि मानसून आते ही हमारा मन तरह तरह के स्वादिष्ट भोजन खाने के लिए करता है. तला भुना इस मौसम में सबसे ज्यादा अच्छा लगता है.


गर्मागरम समौसे और चाय या चाय के साथ गर्म गर्म पकौड़े बारिश में सभी को पसंद होते हैं. लेकिन क्या आपको पता है ये तला भुना, ज्यादा मसालेदार या ज्यादा भारी खाना हमें इस मौसम में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. वहीं बारिश में भीगने का मन हर किसी का रहता है. बच्चों को तो बारिश में भीगने का बस बहाना चाहिए. जिसके बाद सर्दी, जुकाम की समस्या सबसे पहले होती है. बारिश के मौसम में हमारा इम्यून सिस्टम काफी वीक हो जाता है जिसकी वजह इस तरह के खाने को पचाने में परेशानी होती है. शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से हम जल्दी बीमार भी पड़ते हैं. इसलिए मानसून में आपको अपने खाने पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप खुद को मजबूत बना सकते हैं. कैसे अदरक और शहदी की चटनी से आप अपनी इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं. जानिए इसे बनाने का तरीका.


अदरक शहद की चटनी से बढ़ाएं इम्यूनिटी
आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अदरक और शहद की चटनी फायदेमंद मानी जाती है. इस चटनी को खाने से आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है. बारिश में अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है. इससे आपका पाचनतंत्र सही से काम करता है और आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं.

 

चटनी बनाने का तरीका
करीब 2 इंच कसा हुआ अदरक का टुकड़ा लें. अब इसमें 2 चम्मच नींबू का रस मीठा करने के लिए थोड़ा शहद या गुड़ मिला दें. अब इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए एक चुटकी नमक और एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं. इस चटनी को आप तुरंत खा सकते हैं या फिर इस फ्रिज में एक एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करे लें.

चटनी को कैसे खाएं?
हर रोज एक चम्मच चटनी लें और इसे थोड़े से पानी में मिलाएं. आप इसे दिन में 3-4 बार खा सकते हैं. इस चटनी से आपका इम्यून स्वास्थ्य अच्छा होगा. अगर आपको चटनी का स्वाद पसंद नहीं आए तो आप इसकी जगह अदरक और नींबू की चाय भी पी सकते हैं ये चाय भी उतनी ही फायदेमंद है.

 

क्या है गिलोय का काढ़ा बनाने का सही तरीका, जानिए कितनी मात्रा में पीना चाहिए?

क्या है गिलोय का काढ़ा बनाने का सही तरीका, जानिए कितनी मात्रा में पीना चाहिए?

बदलते मौसम में हमारी इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. ऐसे में लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं. वहीं दूसरी ओर कोरोना महामारी ने भी लोगों को डरा रखा है. ऐसे में हर कोई संक्रमण से बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. सरकार की ओर से भी लोगों से स्वस्थ रहने की अपील की जा रही है. ताकि कोविड-19 के प्रकोप से बचा जा सके.


भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की ओर से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं. जिसमें से एक है गिलोय का काढ़ा. वैसे तो हर कोई अपने अपने तरीके से गिलोय का काढ़ा बनाता है, लेकिन इसे बनाने का सही तरीका बहुत कम लोगों को पता है. आज हम आपको गिलोय का काढ़ा बनाने का सही तरीका बताएंगे. गिलोय का काढ़ा कैसे बनाएं और इसे बनाते वक्त कौन सी औषधियों का इस्तेमाल करें. साथ ही आपको बताएंगे कि आपको एक दिन में कितना काढ़ा पीना चाहिए.

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कितना फायदेमंद है गिलोय?
गिलोय काफी सस्ती आयुर्वेदिक औषधि है और ये हर किसी की पहुंच में है. गिलोय को गुडूची या अमृता के नाम से भी जाना जाता है. आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज में गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है. गिलोग का रस और काढ़ा डेंगू, चिकनगुनिया, बुखार जैसी गंभीर बीमारियों में दिया जाता है. इसके अलावा बदलते मौसम में गिलोय कई तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी बचाता है. कोरोना वायरस से बचाव करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल किया जा रहा है. आप गिलोय की काढ़ा या गोली भी खा सकते हैं. कुछ लोग नियमित रुप से गिलोय का जूस भी पीते हैं.


गिलोय का काढ़ा बनाने के लिए सामग्री
दो कप पानी
गिलाय के एक-एक इंच के 5 टुकड़े
एक चम्मच हल्दी
2 इंच अदरक का टुकड़ा
6-7 तुलसी के पत्ते
स्वादानुसार गुड़


बनाने का तरीका
1 सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी को मीडियम आंच पर उबलने के लिए रख दें.
2 अब इसमें बाकी सभी सामग्री को डालें और गिलोय भी डाल दें. अब धीमी आंच पर इसे पकने दें.
3 जब पानी आधा रह जाए और सभी चीजें अच्छे से पक जाएं तो गैस बंद कर दें.
4 किसी कपड़े या छन्नी से इसे छानकर कप में डालें और चाय की तरह पीएं.

कितनी मात्रा में पीएं गिलोय का काढ़ा?
गिलोय का काढ़ा आपको प्रतिदिन एक कप से ज्यादा नहीं पीना चाहिए. एक कप से ज्यादा मात्रा में काढ़ा पीने से आपको नुकसान भी हो सकते हैं. वहीं अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको डॉक्टर की परामर्श के बाद ही इसे पीना चाहिए. गर्भवती महिलाएं, नवजात बच्चों को काढ़ा देने से पहले भी चिकित्सक की सलाह लें. ऐसे लोगों को ये काढ़ा पीने से लो ब्लड प्रेशर और ऑटो इम्यून बीमारियों का खतरा हो सकता है.


गिलोय का काढ़ा पीने के फायदे?

1 गिलोय का काढ़ा पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसमें मौजूद अदरक और हल्दी मिलकर इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं.
2 रोजाना गिलोय का काढ़ा पीने से शरीर कई तरह के संक्रमण और संक्रामक तत्वों से बच सकता है.
3 डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर भी गिलोय का सेवन किया जाता है जिससे काफी तेजी प्लेटलेट्स बढ़ती हैं.
4 गठिया रोग में भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है.
5 ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए भी फायदेमंद है गिलोय. आयुर्वेद में डायबिटीज के मरीजों को गिलोय खाने की सलाह दी जाती है.

 

मास्क के इस्तेमाल के दौरान इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है

मास्क के इस्तेमाल के दौरान इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है

कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और हाथों को साफ रखने की सलाह दी जा रही है। इन सभी का अधिकतर लोग पालन भी कर रहे हैं। लेकिन जब आप मास्क का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जैसे मास्क का उपयोग कैसे करना है और कैसे नहीं?
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मास्क के इस्तेमाल के दौरान किन बातों का आपको ध्यान रखना चाहिए...
- जब आप अकेले हों तो इसे उतार दें और पूरे समय इसे पहनकर न बैठें।
- कार में भी चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल करने से बचें। आप यदि अकेले हैं तो आपको मास्क की जरूरत नहीं है।
- एसी में मास्क पहनने से बचें।
- मास्क का इस्तेमाल घर में करने की जरूरत नहीं होती।
- जब आप किसी भीड़ वाली जगह पर हैं, तब इसका उपयोग करें।
- अपने आपको सबसे अधिक बार अलग करते हुए इसका उपयोग कम करें।
- अपने साथ 2 मास्क रखें और हमेशा हर 4-5 घंटे में बदलाव करें और अधिक समय तक लगातार मास्क का इस्तेमाल न करें।
 

भरपूर नींद लेने से अच्छी सेहत के साथ बढ़ती है आपकी खूबसूरती

भरपूर नींद लेने से अच्छी सेहत के साथ बढ़ती है आपकी खूबसूरती

रात में अच्छी और गहरी नींद लेने के लिए डॉक्टर भी सलाह देते हैं. अगर आप रात में पूरे आठ घंटे नींद लेते हैं, तो सुबह तरोताजा महसूस करेंगे. अच्छी नींद लेने से कई तरह की बीमारियां आपसे दूर हो जाती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि भरपूर नींद ना लेने के कारण थकान, सिर दर्द और आखं के आसपास काले धब्बे पडऩे लगते हैं.


डॉक्टरों का कहना है कि भरपूर नींद लेने के कई फायदे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अगर आप स्किन से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि आदमी को एक दिन में छह से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए. इससे कम सोने पर चेहरे पर झुर्रियां पड़ सकती हैं. कम नींद लेने से त्वचा शुष्क हो जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि सोते वक्त शरीर में खून का बहाव तेज होता है, इससे त्वचा में चमक आती है.


भरपूर नींद त्वचा संबंधी समस्या का हल

आधी अधूरी नींद लेने पर रंग-रूप की दमक (कमप्लेक्शन) फीकी-फीकी लगने लगेगी और त्वचा बेजान दिखाई देगी. विशेषज्ञ भरपूर नींद का राज खूबसूरती से जोड़ते हैं. उनका कहना है कि नींद न पूरी होने से आंखों के आसपास हल्का निशान पड़ जाता है. ये हल्के निशान चेहरे की खूबसूरती को प्रभावित करने लगते हैं. हालांकि नींद की कमी काले निशान पडऩे की बुनियादी वजह में शामिल नहीं है. मगर किसी के काले धब्बे हों तो नींद की कमी निशान को खराब करने में भूमिका जरूर निभाती है.


आंखों की सूजन, निशान को करती है दूर
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के त्वचा विशेषज्ञ प्रोफेसर डोरस डे के मुताबिक अगर आप मुनासिब नींद लेते हैं तो आपकी आंखें सूजी हुई नहीं रहेंगीं. इसके लिए रात को बिस्तर पर जाने से पहले ठीक से पानी पीकर सोएं. तकिए पर सिर रखकर सोने से आपकी आखों की सूजन रहेगी. उनका कहना है कि भरपूर नींद और आराम आखों के आसपास के निशान को कम करता है.


अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
- नियमित व्यायाम करें और सोने के तीन घंटे पहले ज्यादा थकाने वाला व्यायाम न करें.
- अपनी दिनचर्या में सोने के लिए एक समय निर्धारित करें और सप्ताहांत के दौरान भी उसे अमल में लाएं.
- यदि आप दिन में झपकी लेते हैं तो कोशिश करें कि यह 20 से 30 मिनट की हो.
- यदि सोने के समय आपको कोई विचार परेशान कर रहा है तो उसे कागज पर लिख लें और सुबह तक उसे भूलने की कोशिश करें.
- दिन में तीन बजे के बाद कैफीनयुक्त पदार्थों का सेवन न करें.
- सोने के पहले गरिष्ठ भोजन न करें और न ही भूखे पेट सोएं. कार्बोहाइड्रेट से भरपूर हल्का-फुल्का नाश्ता ले सकते हैं.
- यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ दें. निकोटिन का सेवन भी नींद में बाधक है. अल्कोहल लेने से नींद खराब हो सकती है.

 

इन रोगों के लिए औषधि का काम करता है प्याज का रस, जानिए लाभ

इन रोगों के लिए औषधि का काम करता है प्याज का रस, जानिए लाभ

प्याज को लगभग हर सब्जी में डाला जाता है। इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खूब खाया जाता है। प्याज हरा और सूखा दोनों प्रकार का प्रयोग में लाया जाता है। यकीनन प्याज के प्रयोग से भोजन का स्वाद बढ़ जाता है परंतु यह केवल भोजन को स्वादिष्ट ही नहीं बनाता अपितु इसमें अनेक ऐसे तत्व होते है, जिनसे शरीर को पोषण मिलता है साथ ही यह अनेक रोगों के लिए औषधि का काम भी करता है। यह भोजन पचाने में सहायता करता है तथा शरीर का बल बढ़ाता है। प्याज अच्छा रक्त विकार नाशक भी है।


* रक्त विकास को दूर करने के लिए 50 ग्राम प्याज के रस में 10 ग्राम मिश्री तथा 1 ग्राम भूना हुआ सफेद जीरा मिला लें।

* कब्ज के इलाज के लिए भोजन के साथ प्रतिदिन एक कच्चा प्याज जरूर खाएँ। यदि अजीर्ण की शिकायत हो तो प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उसमें एक नीबू निचोड़ लें या सिरका डाल लें तथा भोजन के साथ इसका सेवन करें।

* बच्चों को बदहजमी होने पर उन्हें प्याज के जूस की तीन-चार बूँदें चटाने से लाभ होता है। अतिसार के पतले दस्तों के इलाज के लिए एक प्याज पीसकर रोगी की नाभि पर लेप करें या इसे किसी कपड़े पर फैलाकर नाभि पर बाँध दें।


* हैजे में उल्टी-दस्त हो रहे हों तो घंटे-घंटे बाद रोगी को प्याज के जूस में जरा सा नमक डालकर पिलाने से आराम मिलता है। प्रत्येक 15-15 मिनट बाद 10 बूँद प्याज का रस या 10-10 मिनट बाद प्याज और पुदीने के रस का एक-एक चम्मच पिलाने से भी हैजे से राहत मिलती है।

* हैजा हो गया हो तो सावधानी के तौर पर एक प्याला सोडा पानी में एक प्याला प्याज का जूस, एक नीबू का रस, जरा सा नमक, जरा-सी काली मिर्च और थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर पी लें, इससे हाजमा दुरुस्त हो जाएगा तथा हैजे का आक्रमण नहीं होगा।

बारह ग्राम प्याज के टुकड़े एक किलोग्राम पानी में डालकर काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार नियमित रूप से पिलाने से पेशाब संबंधी कष्ट दूर हो जाते हैं। इससे पेशाब खुलकर तथा बिना कष्ट आने लगता है।

* खाँसी, साँस, गले तथा फेफड़े के रोगों के लिए व टांसिल के लिए प्याज को कुचलकर नसवार लेना फायदेमंद होता है। जुकाम में भी प्याज की एक गाँठ का सेवन लाभदायक होता है।

* पीलिया के निदान में भी प्याज सहायक होता है। इसके लिए आँवले के आकार के आधा किलो प्याजों को बीच में से चीर कर सिरके में डाल दीजिए। जरा सा नमक और कालीमिर्च भी डाल दीजिए। प्रतिदिन सुबह-शाम एक प्याज खाने से पीलिया दूर होगा।


* प्याज को बारीक पीसकर पैरों के तलुओं में लेप लगाने से लू के कारण होने वाले सिरदर्द में राहत मिलती है।

* कान बहता हो, उसमें दर्द या सूजन हो तो प्याज तथा अलसी के रस को पकाकर दो-दो बूँदें कई बार कान में डालने से आराम मिलता है। यदि कोई अंग आग से जल गया हो तो तुरंत प्याज कूटकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए।


 

कोरोना काल में अपने खाने में जरूर शामिल करें शिमला मिर्च, जानिए इसके फायदे

कोरोना काल में अपने खाने में जरूर शामिल करें शिमला मिर्च, जानिए इसके फायदे

कोरोना वायरस से पूरी दुन्यिा बुरी तरह से प्रभावित है। इस वायरस ने लाखों लोगों की जान ले ली है। विशेषज्ञों की मानें तो इस वायरस की वजह से सबसे ज्यादा हमारी इम्यूनिटी पर इफेक्ट पड़ता है। इसलिए हमें ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जिससे इम्यूनिटी पावर मजबूत होती है। हमारे आस-पास कई ऐसे फूड्स हैं, जो हमारे शरीर में इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है। शिमला मिर्च उन्हीं सब्जियों में से एक है, जिससे इम्यूनिटी बूस्ट होती है। आज हम आपको इसके फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं शिमला मिर्च खाने के फायदे....


- इम्यूनिटी सिस्टम को बूस्ट करने के लिए शिमला मिर्च काफी मददगार होता है। इसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है। विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने के साथ-साथ हमारे मस्तिष्क को भी फायदा पहुंचाता है। इसके साथ ही शिमला मिर्च के सेवन से तनाव और अस्थमा जैसी बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है।


- अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो अपने डायट में शिमला मिर्च को जरूर शामिल करें। शिमला मिर्च में कैलोरी बहुत ही कम होता है। इसके कारण शिमला मिर्च का सेवन करने से काफी हद तक वजन कम होता है। इसके साथ-साथ शिमला मिर्च से मेटाबॉलिज्म काफी अच्छा होता है। मेटाबॉलिज्म बेहतर होने से हमारा वजन काफी तेजी से घटता है।


- शिमला मिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, अल्कालॉइड्स, फलेवानाइॅड्स और टैनिन्स जैसे तत्व प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें मौजूद अल्कालॉइड्स एंटी-इंफलेमेटरी और एनलजेस्टिक हमारे शरीर के लिए एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है।


- शिमल मिर्च में फलेवॉनाइड्स तत्व पाया जाता है, जो कई तरह के दिल की समस्याओं को हमसे दूर रखती है। शिमला मिर्च के सेवन से पूरे शरीर में ऑक्सीजन का सप्लाय काफी अच्छा होता है। इस वजह से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। अगर आपको दिल से संबंधित कोई समस्या है, जो इस सब्जी को जरूर अपने डायट में शामिल करें।
 

Home Isolation में रखें इन बातों का ख्याल, जानिए जरूरी बातें

Home Isolation में रखें इन बातों का ख्याल, जानिए जरूरी बातें

कोरोना वायरस की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है लेकिन इस संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम खुद जागरूक रहें और समझदारी के साथ इस वायरस से लड़ें और जीत भी हासिल करें। ऐसे कई लोग हैं, जो पूरी हिम्मत के साथ इस वायरस से मुकाबला कर रहे हैं और उसे मात भी दे रहे हैं, वहीं लगातार इस कोविड-19 से छुटकारा पाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें लॉकडाउन का पालन करना सबसे ज्यादा जरूरी है। वहीं इस कुछ लोग होम आइसोलेशन में भी हैं। लेकिन इस दौरान हमें कुछ बातों का विशेषतौर पर ध्यान रखने की जरूरत है। तो आइए जानते हैं कुछ खास बातें।


होम आइसोलेशन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

अगर कोई व्यक्ति होम आइसोलेशन में है तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि घर के बुजुर्गों और बच्चों के संपर्क में बिलकुल भी न आएं, क्योंकि आपके परिवार की सुरक्षा आपके हाथों में है। इसलिए इस बात का अवश्य ध्यान रखें।

होम आइसोलेशन में मरीज का कमरा अलग होना जरूरी है। उसका सोने का बिस्तर व खाने की प्लेट इन सबको अलग रखें।
यदि कोई व्यक्ति मरीज या मरीज के कमरे के संपर्क में आता है तो उसे अच्छी तरह से अपने हाथों को धोना चाहिए।

मरीज के कमरे में जाएं तो ट्रिपल लेयर वाला मेडिकल मास्क पहनना होगा।

जब भी मरीज के बर्तन को साफ करें तो ग्लव्स पहनकर ही उन्हें साफ करें। इस दौरान बर्तन को साबुन या डिटर्जेंट से अच्छी तरह साफ करें और इसके बाद ग्लव्स उतारकर अपने हाथों को भी अच्छी तरह साबुन से धोएं।


देखभाल करने वाला व्यक्ति अपनी हेल्थ को खुद मॉनिटर करे। रोज शरीर के तापमान की जांच करे।

अब सबसे जरूरी बात कि जो व्यक्ति होम आइसोलेशन में है, उसे इस बात का जरूर एहसास करवाए कि वह बहुत जल्द ठीक हो जाएगा। उसे नकारात्मकता से दूर रखें और यह बात जरूर बताएं कि जो सावधानियां रखी जा रही हैं, वे अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर रखी जा रही हैं जिससे कि उन पर नकारात्मकता हावी न हो पाए।


 

अगर आपको भी छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? तो जरूर रखें इन बातों का ध्यान

अगर आपको भी छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? तो जरूर रखें इन बातों का ध्यान

हमारी लाइफ में हमेशा अच्छा ही हो, ऐसा नहीं है. कभी दिन खुशियों में बीतेंगे तो कभी किसी बात पर तनाव होगा, गुस्सा आएगा. मगर अक्सर कुछ लोगों को छोटी से छोटी बात पर गुस्सा आता है और वे इसकी वजह से कई बार नुकसान भी उठाते हैं. जैसे कि आपकी सुबह की ट्रेन में देरी हो रही हो या जब दफ्तर में आपका दिन अच्छा न गुजर रहा हो तब आपको गुस्सा आता है और आप खुद को बेहद तनाव में महसूस करते हैं. अगर आपको भी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है, तो यह न सिर्फ आपकी सेहत, बल्कि आपके काम, संबंधों के लिए भी सही नहीं है. आज हम आपको अपना गुस्सा शांत करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं.


जब आप गुस्से में होते हैं, तो उन जगहों के बारे में सोचने की कोशिश करें, जहां आप खुद को खुश और शांत महसूस करते हैं. फिर एक गहरी सांसें लें और अपने मन ही मन में किसी खास शब्द या वाक्य को दोहराएं. इससे आपका ध्यान उस बात से हटेगा जिस पर गुस्सा आया हो और आप अपने गुस्से पर काबू कर पाएंगे.


गुस्सा अक्सर तब तक शांत नहीं होता, जब तक कि उसकी प्रतिक्रिया न दी जाए. ऐसे में आप अपना गुस्सा अपने शौक पर निकाल सकते हैं. जी, हां. इसका मतलब सिर्फ यही है कि अगर आप डांस में रुचि रखते हैं या फिर आपको दौडऩा पसंद है या फिर कुछ और आपका शौक है. तो अपने शौक में रम जाइए और तनावमुक्त हो जाइए. यह माहौल को बेहतर बनाने का अच्छा तरीका है.


अगर आपका दिन तनाव से भरा हुआ है और आप किसी बात पर गुस्सा दबाए बैठे हैं, तो इसे बाहर कड़े शब्दों में बाहर निकालने की बजाय अपना ध्यान किसी दूसरी बात पर लगाएं. जैसे कि जब आप अपने अंदर गुस्से के तूफान को उठता हुआ महसूस करते हैं, तो अपना ध्यान अपने परिवार या दोस्तों के साथ गुजारी हुई उन यादों पर लगाएं, जो आपके लिए अहमियत रखती हैं और जो आपको खुशी देती हैं.


अगर किसी एक जगह पर रहते हुए आपको बोरियत महसूस हो रही है और आप वहां खुद को तनाव में महसूस कर रहे हैं, आपको गुस्सा आ रहा है, तो आप अपने परिवेश को बदलने की कोशिश करें. क्या आपको अपने काम की जगह या जिम जैसी जगहों पर किसी खास इंसान की वजह से गुस्सा आता है या किसी निश्चित स्थान पर आपका गुस्सा फूटता है, तो खुद से ये सवाल पूछें कि क्या मुझे यहां के लोग पसंद नहीं हैं? क्या मुझे यहां रहना, आना पसंद नहीं है? अगर इसका जवाब यह है कि ऐसा नहीं है, तो आपको जरूरत है कुछ बदलाव की. यानी आपको नई जगह खोजने की जरूरत हे, जहां आप खुद को कम उत्तेजित महसूस करें.


गुस्से को काबू में करना कुछ लोगों के लिए एक वास्तविक मुद्दा हो सकता है. अगर आप नियमित रूप से ऐसा महसूस करते हैं कि आप अपने स्वभाव पर नियंत्रण नहीं रख सकते हैं और आप मानते हैं कि यह आपके जीवन का एक बड़ा हिस्सा बन गया है, जिसे आप काबू में नहीं कर पा रहे हैं, तो इसके लिए किसी पेशेवर की मदद लें, ताकि आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पा सकें.
 

सावधान इम्युनिटी के लिए विटमिन्स की ओवरडोज से  हो सकती हैं घातक बीमारियां

सावधान इम्युनिटी के लिए विटमिन्स की ओवरडोज से हो सकती हैं घातक बीमारियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के माध्यम से हम लगातार आपको इस बात की जानकारी दे रहे हैं कि विटमिन-ए, विटमिन-सी और विटमिन-डी अगर आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा में हैं तो इस बात की संभावना बहुत कम होती है कि कोरोना वायरस आपके शरीर पर हावी हो पाए। लेकिन विटमिन्स के सेवन का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि आप पूरी जानकारी जुटाए बिना अपने मन से इनका सेवन शुरू कर दें ...


बीमार कर रहा है विटमिन्स का अधिक सेवन
विटमिन्स आपकी इम्युनिटी को बनाए रखने का काम करती हैं। लेकिन दिल्ली सहित देश के अलग-अलग डॉक्टर्स के पास इस समय जो पेशंट्स आ आ रहे हैं, उनमें ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है, जो अधिक मात्रा में विटमिन्स के सेवन के कारण सेहत संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं...

लाभ से अधिक हानि की आशंका
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लोग बड़ी मात्रा में विटमिन्स का सेवन कर रहे हैं। आइए, यहां जानते हैं कि विटमिन्स का अधिक सेवन करने पर प्रारंभिक स्तर पर शरीर में किस तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं और अगर लंबे समय तक अधिक मात्रा में इनका सेवन किया जाए तो किस विटमिन के अधिक खाने से कौन-सी बीमारी हो सकती है...

विटमिन्स की अधिक खरीदारी है भारी
हमने हेल्थ एक्सपर्ट्स से यह समझने की कोशिश की कि आखिर अधिक मात्रा में विटमिन्स के सेवन से किस तरह की समस्याएं होती हैं। क्योंकि आजकल लोग विटमिन-ए, विटमिन-सी और विटमिन-डी का भरपूर मात्रा में सेवन कर रहे हैं। शहर के अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स पर इन विटमिन की गोलियां खरीदनेवालों की बड़ी संख्या पहुंच रही है।

बढ़ रही हैं इस तरह की समस्याएं
-विटमिन्स के अधिक उपयोग को लेकर हमने ना केवल अलग-अलग डॉक्टर्स से बात की बल्कि अलग-अलग पेथी से जुड़े डॉक्टर्स से यह भी जाना कि उनके पास इस समय जो मरीज आ रहे हैं, उनमें इन विटमिन्स के अधिक सेवन के कारण किस तरह की समस्याएं देखने को मिल रही हैं? इस बारे में होम्योपेथी के डॉक्टर चरनजीत सिंह का कहना है कि पेट में जलन, गले में रूखापन और थकान की समस्या से ग्रसित लोग अधिक आ रहे हैं। इनकी शिकायत होती है कि हम तो हेल्दी खाना खा रहे हैं, विटमिन्स का सेवन कर रहे फिर थकान क्यों रहती है?

-तब इनकी दिनचर्या के बारे में पता कर इनकी डायट और विटमिन्स की डोज से जुड़ी जानकारी लेने के बाद हम इन्हें विटमिन्स की सही मात्रा के बारे में बताते हैं और तुरंत राहत के लिए कुछ जरूरी दवाएं देते हैं। वैसे विटमिन्स की प्राप्ति के लिए जो लोग अधिक मात्रा में अलग-अलग सप्लिमेंट्स का उपयोग कर रहे हैं, जब वे ऐसा करना छोड़ देते हैं तो दो-तीन दिन बाद ही उनकी स्थिति में सुधार होने लगता है।
विटमिन-ए की अधिकता से होता है यह नुक्सान

-आयुर्वेदाचार्य वैद्य सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि विटमिन-ए आंखों की सेहत और रेटिना को हेल्दी बनाए रखने में बहुत सहायक होता है। यह हमारी आंखों की नर्व्स में फैट को जमा नहीं होने देता और कोशिकाओं को लंबे समय तक स्वस्थ रखता है। इससे हमारी आंखों की रोशनी बनी रहती है।

-लेकिन यह विटमिन ऐंटिऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है। आप इसकी प्राप्ति खाद्य पदार्थों द्वारा करेंगे, तब तो यह शरीर को इस तरह की हानि नहीं पहुंचाता है लेकिन यदि सप्लिमेंट्स के माध्यम से आप विटमिन-ए की ओवरडोज लंबे समय तक लेते रहते हैं तो आंखों को स्वस्थ रखनेवाला यह तत्व आंखों को नुकसान पहुंचा देता है।
विटमिन-सी की अधिकता से होनेवाली दिक्कत
अभी ज्यादातर लोग विटमिन-सी की प्राप्ति के लिए खट्टे फलों का सेवन किया करते थे। लेकिन अब बड़ी मात्रा में इसकी टैबलेट्स ले रहे हैं। यह बात सही है कि यह विटमिन हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

-इम्यून सेल्स और खासतौर पर वाइट ब्लड सेल्स काउंट बढ़ाने में विटमिन-सी सहायक है। लेकिन गोलियों के माध्यम से अधिक मात्रा में लंबे समय तक इसका सेवन पेट में दर्द बने रहना, उल्टी, दस्त होना जैसी समस्याओं का कारण बन जाता है। अगर स्थिति अधिक गंभीर हो तो गुर्दे की पथरी भी हो सकती है।

विटमिन-डी की अधिकता से समस्या
आमतौर पर इस तरह के केस कम देखने को मिलते हैं, जिनमें मरीज को कोई दिक्कत विटमिन-डी की अधिकता के कारण हुई हो। क्योंकि आमतौर पर पूरी दुनिया के लोगों में इस विटमिन की कमी ही पाई जाती है। खासतौर पर हमारे देश की महिलाओं और सिटिंग जॉब करनेवाले उन लोगों में जो सनलाइट में बिल्कुल नहीं रहते हैं।

-लेकिन फिर भी अगर कोई व्यक्ति सप्लिमेंट्स के जरिए विटमिन-डी का अधिक मात्रा में सेवन करता रहता है तो उसे मांसपेशियों में अकडऩ, दर्द या किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यह बात बहुत जरूरी है कि आप विटमिन्स का सेवन भी अपने चिकित्सक की देखरेख में करें। ताकि सही डोज से आपको केवल लाभ हो।

स्किन की सुंदरता के लिए ई का सेवन
-कुछ साल पहले अमेरिकन हार्ट असोसिएशन द्वारा विटमिन-ई के शरीर पर प्रभाव से जुड़ी एक स्टडी में यह बात सामने आई थी कि यदि विटमिन-ई का अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो 3 से 4 साल के अंदर इसका बुरा असर आंखों की रोशनी पर दिखाई पड़ता है।
 

वजन घटाने डायटिंग की जरूरत नहीं, बस ये खाकर ही वजन करें कंट्रोल

वजन घटाने डायटिंग की जरूरत नहीं, बस ये खाकर ही वजन करें कंट्रोल

टमाटर एक ऐसी सब्जी है जो हर घर का अहम हिस्सा है। यह स्वाद और पोषण दोनों से ही भरी हुई है। इसमें पोटैशियम, विटामिन सी, लाइकोपीन आदि भारी मात्रा में पाए जाते हैं, जो आपकी स्किन के कलर को साफ दमकाने का काम करते हैं। टमाटर में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमं हैं।


यही नहीं अगर इस लॉकडाउन के दौरान आपका वजन बढ़ गया है और बाहर निकलकर व्यायाम करना आपके लिए मुमकिन नहीं है, तो उसमें भी टमाटर आपकी मदद करेगा। आप टमाटर के जूस को या सलाद आदि में प्रयोग कर अपने वजन को घटा सकते हैं। यहां जानें इसे डेली डाइट में शामिल कर वजन को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।


कैलोरी में कम


टमाटर पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें मिनरल्स, विटामिन, प्रोटीन और फाइबर भारी मात्रा में पाए जाते हैं। एक मध्यम आकार (123 ग्राम) टमाटर में लगभग 24 कैलोरी होती है, जबकि एक बड़े टमाटर (182 ग्राम) में 33 कैलोरी होती है।


फाइबर में उच्च


टमाटर फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें घुलनशील और अघुलनशील फाइबर शामिल होते हैं। टमाटर में घुलनशील फाइबर आपको लंबे समय तक पेट भरा रखने का एहसास करवाते हैं। इससे कैलोरी सेवन को कम करने में मदद मिलती है। टमाटर में अघुलनशील फाइबर शरीर के वजन को नियंत्रित करता है और पाचन तंत्र को कब्ज से मुक्त रखता है।


लो कार्बोहाइड्रेट


टमाटर में कार्बोहाइड्रेट कम होता हैं, जो वजन घटाने में काफी मदद कर सकता है। एक बड़े टमाटर में 7 ग्राम कार्ब होता है। वजन कम करने के लिए, एक या दो टमाटर को अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकते हैं।


पाचन के लिए अच्छा है


अपच या कब्ज की परेशानी आपको मोटापे का शिकार बना सकती है। अच्छी पाचन क्रिया से शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक होता है। यही नहीं, इससे वेट लॉस जर्नी को तेजी मिलती है।


इस तरह कीजिए टमाटर को भोजन में शामिल


*सैंडविच या रैप्स के बीच टमाटर की स्लाइस शामिल करें।
*ताजे सलाद को बेबी टमौटो या कटे हुए टमाटर के साथ गार्निश करें।
*उबले अंडे और आमलेट में कच्चे कटे टमाटर डालें।
*उन्हें अपने कॉटेज पनीर, पिज्जा, पास्ता, और कबाब में मिलाएं।
*टमाटर का रस या टमाटर की स्मूदी बनाएं।
*दोपहर या रात के खाने के लिए एक कप टमाटर का सूप लें।


 

अच्छी नींद पाने के आसान उपाय, सही पोजिशन में सोने से आयेगी सुकून भरी नींद

अच्छी नींद पाने के आसान उपाय, सही पोजिशन में सोने से आयेगी सुकून भरी नींद

अच्छी नींद स्वस्थ शरीर की निशानी है. ज्यादातर लोग रात में 6-8 घंटे की नींद लेते हैं लेकिन कुछ लोगों को गहरी नींद नहीं आती .खराब नींद की वजह से सुबह उठने के बाद फ्रेश और खुश महसूस नहीं करते हैं. अगर नींद की क्वालिटी अच्छी नहीं है या रातभर करवट बदलते रहते हैं तो आगे चलकर गंभीर समस्या हो सकती है. लंबे टाइम तक नींद की कमी और अच्छी नींद न लेने से आपको कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं. साउंड स्लीप के लिए जरूरी है कि आप सही पोजिशन में सोयें. वैसे तो रात में सभी लोग कई बार करवट बदलते हैं लेकिन फिर भी जरूरी है कि आप सही पोजिशन में सोने की कोशिश करें. आज हम आपको बतायेंगे तीन स्लीपिंग पोजिशन और उनके फायदे-नुकसान


करवट से सोना सबसे अच्छा
सोने के लिए सबसे अच्छी पोजिशन लेफ्ट करवट से सोना है. ये पोजीशन आपके हार्ट के लिए भी बेहतर है और इससे आपके शरीर में दर्द होने की संभावना भी बहुत कम होती है. प्रेगनेंट लेडीज को भी बाईं करवट से सोने की सलाह दी जाती है और ये पोजिशन मां और बच्चे दोनों के लिए हेल्दी मानी जाती है. वैसे ज्यादातर लोग रातभर लेफ्ट और राइट दोनों करवट लेकर सोते हैं लेकिन लेफ्ट साइड से सोने में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है. करवट लेकर सोने से सोने में खर्राटे भी कम आते है. इसलिए करवट लेकर सोना अच्छी नींद के लिए बेहतर माना जाता है.


सीधे पीठ के बल सोना
पीठ के बल सोने में ज्यादा आराम नहीं रहता है इसीलिए बहुत कम लोग पीठ के बल सोते हैं. हालांकि रात में सोने में कई बार लोग पीठ के बल भी सो जाते हैं. पीठ के बल सोने में रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिलता है इसलिए इस पोजीशन में सोने से आपको गले का दर्द नहीं होता, पाचन अच्छा रहता है. साथ ही मोटे पेट वाले इस पोजिशन में कंफर्टेबल फील करते हैं लेकिन इस पोजीशन में सोने वालों की नींद ज्यादा खुलती है और खर्राटों की समस्या भी रहती है.


उल्टा होकर पेट के बल सोना
पेट के बल सोने को बेबी पोज भी कहते हैं लेकिन ये पोशिजन छोटे बच्चों के लिए ठीक है. बड़े लोगों को इस तरह सोने में आराम नहीं पड़ता. हालांकि जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है, उन्हें इस पोजीशन में सोने से थोड़ा लाभ मिल सकता है. इसके अलावा अगर किसी खास दिन आपके सीने में थोड़ी जलन है, तो भी आपके लिए इस पोजीशन में सोना बेहतर है. बाकी हेल्दी लोगों के लिए इस पोजिशन में सोना मुश्किल है क्योंकि इससे पेट पर दबाव पड़ता है.


अच्छी नींद के लिए जरूरी बातें
सोने की पोजिशन अच्छी नींद के लिए बेहद जरूरी है इसलिए सोने में जो पोजिशन आपको आरामदायक लगे उस पोजिशन में सोना बेहतर है. इसके अलावा अच्छी और सुकून भरी नींद के लिए आपके शरीर का थकना भी बहुत जरूरी है इसलिए अगर आप शारीरिक मेहनत कम करते हैं, तो शाम के समय थोड़ी एक्सरसाइज करें, पैदल चलें, डांस करें या स्विमिंग करें इससे आपको अच्छी नींद आएगी. साथ ही सही तकिया और सही गद्दे भी आपकी सुकूनभरी नींद के लिए जरूरी है. अगर साउंड स्लीप चाहिये तो योगा, मेडिटेशन और सही वक्त पर सोना और जागना भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

 

बरसात के मौसम में घर को रखें कीड़ेमुक्त, जानिए खास टिप्स

बरसात के मौसम में घर को रखें कीड़ेमुक्त, जानिए खास टिप्स

बारिश का मौसम जहां प्रकृति की खूबसूरती को दर्शाता, वहीं इस मौसम में घर में कीड़े-मकोड़ों की एंट्री भी होना शुरू होती है। कीड़े जैसे चींटी, कॉकरोच, मक्खी, छिपकली आदि। इस वजह से ये कई बीमारियों का कारण भी बनते हैं। घर में कीड़े होने का सबसे बड़ा कारण होता है घर की ठीक तरीके से सफाई न होना। ऐसे में कीड़े-मकोड़े कई बीमारियों को दावत भी देते हैं।


आखिर कैसे बरसात के मौसम में घर को कीड़ों से दूर रखा जा सकता है, आइए जानें कुछ खास टिप्स।

सबसे पहले घर की ठीक तरीके से सफाई करें। यदि आप रोज ऐसा करते हैं, तो कीड़ों का होना कई हद तक कम हो जाएगा।

घर में मक्खी और चींटियों से बचने के लिए रोज फर्श पर फिनाइल और फिटकरी का पावडर मिलाकर नियमित पोंछा लगाने से धीरे-धीरे ये घर से गायब होना शुरू हो जाएंगे।

आपने अधिकतर सुना होगा कि मोरपंख यदि घर में लगा है तो इससे कीड़े-मकोड़ों का आगमन कम हो जाता है। यह बात बिलकुल ठीक है। यदि आप इनसे मुक्ति पाना चाहते हैं तो घर में मोरपंख लगाएं। आप इसे घर के अंदर भी लगाएं और अपने एंट्री गेट पर भी लगाएं।
यदि आप घर में छिपकली से परेशान हैं तो अंडे के छिल्के को दीवार पर फंसाकर रख दें। इसे इस तरह लगाएं कि ये गिरे नहीं। इसे दीवार से चिपका दें। कुछ समय में ही छिपकली कम होने लगेगी।

किचन में मक्खी-मच्छर भगाने के लिए 1 चम्मच कॉफी पावडर को तवे पर जलाकर धूनी दें। डाइनिंग टेबल से मक्खियों को दूर करने के लिए मेज के बीचोबीच पुदीने की पत्तियों का ताजा गुच्छा रखें।

घर के बीच-बीच में कपूर का धुआं दें। इससे घर में खूशबू तो बने रहेगी ही, साथ ही मक्खी-मच्छर भी कम होंगे।
कीड़े-मकोड़ों को दूर भगाने के लिए कुछ उपयुक्त पौधे हैं, जैसे तुलसी, पुदीना व अजवाइन का पौधा अवश्य लगाएं। इससे घर में कीड़े-मकोड़े नहीं होंगे।

 

सेहत को इन 6 तरीकों से नुकसान पहुंचाता है हैंडसैनिटाइजर का अधिक उपयोग

सेहत को इन 6 तरीकों से नुकसान पहुंचाता है हैंडसैनिटाइजर का अधिक उपयोग

हालाकि भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि हैंडसैनिटाइजर का एक सीमा से अधिक उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे बचाव के लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि जब आप लोग घर में हो उस समय हैंडसैनिटाइजर के उपयोग की जगह साबुन से हाथ धुलें। आइए, यहां जानते हैं कि आखिर किन तरीकों से हैंडसैनिटाजर हमारे हाथों को नुकसान पहुंचाता है...

हानिकारक होता है यह केमिकल

-हैंडसैनिटाइजर को बनाने में जिन केमिकल्स का उपयोग किया जाता है, उनमें आमतौर पर बेंजाल्कोनियम क्लोराइड होता है। यह रसायन हाथ की त्वचा पर स्थित कीटाणुओं को लगभग पूरी तरह खत्म कर देता है। किसी भी तरह के बैक्टीरिया और इंफेक्शन फैलानेवाले पैथोजेन्स त्वचा पर ऐक्टिव नहीं रह पाते हैं।

-लेकिन जब इस रसायन को हाथ पर बहुत अधिक उपयोग किया जाने लगता है तो यह कुछ लोगों में एलर्जी, खुजली या जलन की वजह बन सकता है। ऐसा आमतौर पर उन लोगों के साथ होता है, जिनकी त्वचा बहुत अधिक संवेदनशील होती है।

त्वचा को नुकसान हो सकता है

-हैंडसैनिटाइजर को तैयार करते समय इसमें ट्राइक्लोसोन का उपयोग भी किया जाता है। यह एक ऐसा रसायन है, जो त्वचा द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। यानी हमारी त्वचा इस रसायन को सोख लेती है। इस कारण यह हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। यदि एक सीमित मात्रा से अधिक कोई भी बाहरी रसायन शरीर में जाएगा तो उसके साइड इफेक्ट्स निश्चित तौर पर होते हैं।

-बहुत अधिक हैंडसैनिटाइजर का उपयोग करने से हाथों में रुखापन बढऩे लगता है। बार-बार साबुन से हाथ धोने पर भी इस तरह की समस्या होती है। इस स्थिति से बचने के लिए बेहतर होता है कि आप हाथ पोछने के तुरंत बाद अपने हाथों पर एक बूंद सरसों तेल लगाकर मालिश कर लें।

-सरसों तेल अधिक मात्रा में ना लें नहीं तो यह चिपचिपाहट पैदा करेगा। यह तेल ऐंटिवायरल, ऐंटिबैक्टीरियल और ऐंटिइंफ्लामेट्री गुणों से भरपूर होता है। इसलिए त्वचा पर अन्य किसी मॉइश्चराइजर से अधिक उपयोगी है। खासतौर पर आज के समय में कोरोना की स्थिति को देखते हुए।

 

मूड पर खराब असर

-सैनिटाइजर का बहुत अधिक उपयोग करने के कुछ ऐसे नुकसान होते हैं, जिन पर हमारा जल्दी से ध्यान नहीं जाता है। मसलन सैनिटाइजर्स को खुशबूदार बनाने के लिए इनमें जिन रसायनों का उपयोग किया जाता है, कई बार वे रसायन स्ट्रेस और एंग्जाइटी को ट्रिगर करनेवाले होते हैं। ऐसा आमतौर पर उन लोगों के साथ होता है जो बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं।

पाचन पर बुरा असर

-हैंडसैनिटाजइजर्स को अच्छी सुंगध देने के लिए जिन रसायनों का उपयोग किया जाता है, उनमें फैथलेट्स भी शामिल है। यह एक ऐसा रसायन है, जिसके अधिक उपयोग का लिवर और किडनी पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है। इस कारण उन लोगों को अधिक दिक्कत होती है, जिन्हें पहले से ही पेट या पाचन से जुड़ी बीमारियां हों।

बच्चों के लिए भी सुरक्षित नहीं

 

-हैंडसैनिटाइज का बहुत अधिक उपयोग बच्चों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। ऊपर हमने जितनी भी बातें की हैं, इनमें से किसी भी तरह की समस्या होने पर आमतौर पर बच्चे माता-पिता को एक्सप्लेन नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है या क्या परेशानी हो रही है। वे सिर्फ चिड़चिड़े और बीमार हो जाते हैं। इसलिए बच्चों को भी साबुन से हाथ धुलवाना ही सही है।

  

 

हंसिए और बीमारियों को दूर भगाइए, वर्कआउट से कम नहीं हैं हंसने के फायदे

हंसिए और बीमारियों को दूर भगाइए, वर्कआउट से कम नहीं हैं हंसने के फायदे

जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है. कोर्टिसोल के साइड इफेक्ट्स को कम करने के लिए शरीर को एंडोर्फिन रिलीज करने के लिए तैयार करने की जरूरत होती है और खास बात यह है कि हंसकर आसानी से ऐसा किया जा सकता है. इसलिए हंसी सेहत के लिए बहुत जरूरी है.


हंसने से होती है आंतरिक कसरत
ज्यादा तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है. वहीं एंडोर्फिन प्राकृतिक दर्द निवारक है जो दर्द में सक्रिय होता है. इसकी जरूरत इसलिए होती है ताकि दर्द से बाहर निकल सके. इसके लिए सबसे पहला काम जो जरूरी है वो ये है कि खूब हंसें. हंसना एक वर्कआउट है. इससे आंतरिक कसरत होती है. खुलकर हंसने से डायाफ्राम, पेट, श्वसन प्रणाली और कंधों का अभ्यास होता है और हंसने के बाद मांसपेशियां और अधिक रिलैक्स्ड हो जाती हैं.


इम्यून सिस्टम में सुधार की वजह बनती है हंसी
हंसने से शरीर में अधिक मेलेटोनिन का उत्पादन होता है जो दिमाग द्वारा रिलीज हार्मोन है. इससे अच्छी नींद में मदद मिलती है. इससे नींद का पैटर्न भी सुधरता है. यही नहीं डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह रामबाण है. खुलकर हंसना इम्यून सिस्टम में सुधार की वजह भी बनता है. हंसी की वजह से इम्यून सिस्टम में संक्रमण विरोधी एंटीबॉडी के साथ ही खून में टी-कोशिकाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हो, सकती है. इसलिए किसी भी कीमत पर हंसी के साथ दिन शुरू करना जरूरी है.


हाई बीपी और डायबिटीज को कंट्रोल करती है हंसी
जो लोग नियमित रूप से खूब हंसते हैं उनका हाई बीपी नियंत्रण में रहता है. हंसने से रक्त वाहिकाओं का कार्य सुधरता है और रक्त प्रवाह बढ़ता है. इससे दिल का दौरा या दिल से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है. रोजाना खुलकर हंसने से डायबिटीज कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. शोधों में खुलासा हुआ है कि डायबिटीज के मरीजों से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में हंसी का यह व्यायाम मदद करता है.

जवान दिखना चाहते हैं तो खुलकर हंसें
जवान दिखने की चाह रखने वालों के लिए भी यह बड़े काम का व्यायाम है. मुस्कुराने और हंसने से चेहरे की 15 मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं. चेहरे की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे व्यक्ति युवा दिखता है. शारीरिक और मानसिक ही नहीं यह भावानात्मक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है. हंसी की जरूरत इस बात से ही समझ आ जाती है कि जब एक बच्चा मुस्कुराता है तो उसका मन और शरीर कितना उत्साहित लगता है. यह वयस्कों और बुजुर्गों पर भी सटीक बैठता है. हंसने पर हवा फेफड़ों से बाहर निकल जाती है और इसके साथ गहरी आंतरिक सांस ले सकते हैं. शरीर की मांसपेशियों और अंगों के आसपास ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ जाता है, इससे अधिक ऊर्जा मिलती है. हंसी के साथ साथ शारीरिक व्यायाम किया जाए तो व्यक्ति स्वस्थ और फिट रहता है. हंसी एक ऐसी दवा है जो कि आसानी से उपलब्ध है और जब चाहे, जैसे चाहे इसका लाभ उठा सकते हैं.
 

सेहत को 6 बेहतरीन फायदे पहुंचाता है हॉट लेमन वॉटर, वजन घटाने में भी मिलती है मदद

सेहत को 6 बेहतरीन फायदे पहुंचाता है हॉट लेमन वॉटर, वजन घटाने में भी मिलती है मदद

सेहतमंद बने रहने के लिए हमें कई प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन सावधानीपूर्वक करना पड़ता है। वहीं, कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम अलग-अलग रूपों में अपनी डायट का हिस्सा बना सकते हैं। यहां एक ऐसी ही खास ड्रिंक के बारे में बताया जा रहा है जो नींबू से तैयार होती है। आप सब को यह पता होगा कि नींबू को हम अलग-अलग रूप से खाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। प्रचलित रूप में बात की जाए तो नींबू का सबसे ज्यादा सेवन ड्रिंक के रूप में किया जाता है। इन दिनों हॉट लेमन वॉटर का क्रेज भी लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यह सेहत के लिए कई बेहतरीन फायदे पहुंचाता है जिसके बारे में आपको यहां पर खास जानकारी दी जा रही है।

वजन घटाने में
वजन को कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है, नहीं तो यह टाइप-2 डायबिटीज और कैंसर का खतरा बढ़ा देता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए हॉट लेमन वॉटर को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। कई शोध में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि नींबू पानी का सेवन करने से वजन घटाने में काफी मदद मिलती है।

कब्ज की समस्या से छुटकारा
कब्ज की समस्या से कई लोग परेशान रहते हैं और खासकर बुजुर्गों को यह समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है। वहीं, हॉट लेमन वॉटर का सेवन करने से इसमें मौजूद सिट्रिक एसिड कब्ज की समस्या को ठीक करने में प्रभावी माना जाता है।

रनिंग करने वालों के लिए बहुत जरूरी
ऐसा माना जाता है कि एथलेटिक एक्टिविटी से जुड़े हुए लोगों को हॉट लेमन वॉटर का सेवन जरूर करना चाहिए। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, शरीर की मांसपेशियों को बूस्ट करने और उन्हें एक्टिव बनाए रखने के लिए हॉट लेमन वॉटर सक्रिय रूप से मददगार साबित हो सकता है।

कोल्ड और फ्लू से छुटकारा
कोल्ड और फ्लू की समस्या मॉनसून के दिनों में सबसे ज्यादा परेशान करती है। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में कोल्ड और फ्लू से बचे रहने के लिए हमें हर संभव उपाय करने की जरूरत है। कोल्ड और फ्लू की समस्या से बचे रहने के लिए अगर हॉट लेमन वॉटर का सेवन किया जाता है, तो यह इस समस्या से राहत दिलाने में फायदेमंद साबित हो सकता है।

मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है
मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के लिए हम कई प्रकार के ड्रिंक का सेवन करते हैं, लेकिन हॉट लेमन वॉटर का सेवन किया जाए तो इससे मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में बड़ी तेजी से मदद मिलेगी। इसे हिंदी में चयापचय के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे शरीर में मुख्य रूप से केमिकल रिएक्शन को मेंटेन बनाए रखने और फूड को एनर्जी में कन्वर्ट करने का काम करता है।

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में
नींबू में मौजूद मैग्निशियम और पोटेशियम की मात्रा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए नींबू को प्राथमिक घरेलू उपचार के रूप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, नींबू का सेवन हाइपरटेंशन की समस्या से बचाए रखने के लिए कारगर इलाज माना जाता है।


कैसे तैयार करें यह ड्रिंक
सामग्री
*1 नींबू
*1/2 चम्मच शहद
 

दूध में तुलसी डालकर पीने से होते हैं कई सेहत लाभ, जरूर जानिए

दूध में तुलसी डालकर पीने से होते हैं कई सेहत लाभ, जरूर जानिए

दूध पोषण के लिहाज से अमृत के समान है और तुलसी को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर कई रोगों से आपकी रक्षा करती है। इन दोनों का मिश्रण कर लिया जाएं, तो पोषण के साथ-साथ सेहत और उससे जुड़े कई फायदे पाए जा सकते हैं। अब जब भी आप दूध पिएं, उसमें तुलसी की पत्ति यां डालें और पाएं यह 5 फायदे -

1 दमा के मरीजों के लिए यह उपाय फायदेमंद है। खास तौर से मौसम में बदलाव होने पर होने वाली सांस संबंधी समस्याओं से बचने के लिए दूध और तुलसी का यह मिश्रण बेहद लाभकारी होता है।

2 सि‍र में दर्द या माइग्रेन की समस्या होने पर यह उपाय आपको रोहत देगा। जब भी माइग्रेन का दर्द हो आप इसे पी सकते हैं, रोजाना इसका सेवन करने से आपकी समस्या भी खत्म हो सकती है।

3 तनाव अगर आपके जीवन का भी अभिन्न अंग बन गया है, तो दूध में तुलसी के पत्तों को उबालकर पिएं, आपका तनाव दूर होगा और धीरे-धीरे तनाव की समस्या ही समाप्त हो जाएगी।

4 हृदय की समस्याओं में भी यह लाभदायक है। सुबह खाली पेट इस दूध को पीने से हृदय संबंधी रोगों में लाभ पाया जा सकता है। इसके अलावा यह किडनी में होने वाली पथरी के लिए भी अच्छा उपचार है।

5 तुलसी में कैंसर कोशिकाओं से लड़ने का गुण होता है, अत: इसका सेवन आपको कैंसर से बचा सकता है। इसके अलावा सर्दी के कारण होने वाली सेहत समस्याओं में भी यह कारगर उपाय साबित होगा।

 

गले में खराश, सांस की बदबू और छाले से हैं परेशान, गरारे से मिलेगा आराम

गले में खराश, सांस की बदबू और छाले से हैं परेशान, गरारे से मिलेगा आराम

बदलते मौसम के साथ गले में खराश और खांसी की समस्या होती है, जो थोड़े इलाज करने के बाद सही हो जाती है. लेकिन मुंह से बदबू आना ऐसी समस्या है, जिसके चलते आपको लोगों के बीच बेज्जत होना पड़ता है. गले में खराश, सूखी खांसी, बलगम, मुंह की बदबू से लेकर मसूड़ों में सूजन की परेशानी से निपटने का एक तरीका है और वह है गरारे यानी गार्गल. यह मुंह और दांतों के बीच फंसा खाना निकाल देता है, कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मार सकता है और तुरंत सांसों को ताजा कर करता है. गरारे करना मुंह की स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
गरारे करने से गले में मौजूद बैक्टीरिया द्वारा बनाया जाने वाला एसिड कम होता है. इन्फेक्शन में गरारे करने से संक्रमण की गंभीरता कम होती है और लक्षणों में आराम मिलता है. यूं तो गरारे के ढेरों फायदे हैं, लेकिन इसे अक्सर अनदेखा या गलत तरीके से किया जाता है. सही ढंग से गरारे न करने पर जो लाभ होना चाहिए वह नहीं होता है. इन स्टेप्स को फॉलो कर सही तरीके से इस तरह करें गरारे...

*गरारे करने के लिए एक अलग गिलास रखें. पानी भरने के लिए कई लोग हमेशा हथेलियों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन गिलास का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक है, खासकर यदि गरारे करने वाले मिश्रण या माउथवॉश से करना चाहते हैं.

*ठंडा पानी दांतों की संवेदनशीलता का कारण बन सकता है और गर्म पानी मुंह में जलन पैदा कर सकता है. गुनगुना पानी सबसे अच्छा काम करता है. इसमें नमक या अन्य सामग्री मिलाई जा सकती है.

*यदि गले में खराश या मसूड़े की सूजन है, तो गरारे करने वाले मिश्रण की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं. यह प्रभावी रूप से मुंह के बैक्टीरिया के विकास को भी रोक सकता है.

*नमक एक आजमाया हुआ प्राकृतिक कीटाणुनाशक है. गर्म पानी में एक चम्मच नमक भी डाल सकते हैं और इसके साथ गरारे कर सकते हैं. नमक का पानी गले के ऊतक में मौजूद पानी को निकालता है और गले की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करता है.

*बेकिंग सोडा खराब सांस और प्लाक बिल्ड-अप के लिए एक और आजमाया हुआ उपाय है. गरारे करने से पहले गुनगुने पानी में एक छोटी चुटकी बेकिंग सोडा डालें. अब मिश्रण तैयार है. इसे धीरे-धीरे तब तक लें जब तक कि मुंह में पर्याप्त तरल न हो जाएं.

*अब अपने मुंह के एक तरफ से दूसरे हिस्से तक पानी को सावधानी से घुमाएं. याद रखें कि इसे आगे और पीछे भी घुमाएं. अपने गाल की मांसपेशियों को अंदर और बाहर धकेलें और अपनी जीभ को अपने मुंह के हर कोने में घुमाएं ताकि हर जगह तरल जाए.

*गले में खराश की स्थिति में अपना सिर थोड़ा टेढ़ा करें, जब तक कि तरल मुंह, टॉन्सिल और यूवुला (मुंह के पीछे की ओर जीभ पर लटकते ऊतक का मांस का टुकड़ा) न छुए जाए. अपना मुंह खोलें और एक तेज आवाज करें. कंपन ले कर पीछे पानी के बुलबुले बना देगा, दर्द को शांत करेगा और इसे तरल की एक पतली परत के साथ कोटिंग करेगा.


*20-30 सेकंड के लिए अपने मुंह में पानी भरने के बाद सावधानी से पानी बाहर थूक दें. यदि आवश्यक हो तो प्रक्रिया को दोहराएं. ब्रश करने और फ्लॉस करने के बाद ताजा सांस और स्वस्थ दांतों के लिए रोजाना थोड़ा गरारा करें.


अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

 

इमली के इन 5 फायदों के बारे में नहीं जानते होंगे आप, इम्यूनिटी से लेकर दिल तक जुड़ा है कनेक्शन

इमली के इन 5 फायदों के बारे में नहीं जानते होंगे आप, इम्यूनिटी से लेकर दिल तक जुड़ा है कनेक्शन

इमली को देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ जाता है. मीठे और चटपटे स्वाद वाली इमली का इस्तेमाल दुनिया भर में चटनी, सॉस और यहां तक कि मिठाइयों के लिए भी किया जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि आपके भोजन को स्वाद देने के अलावा इमली से कई स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं. इम्यूनिटी को बढ़ाने से लेकर डाइजेशन को अच्छा रखने और दिल को बीमारियों को दूर रखने तक इमली हेल्थ के लिए बहुत अच्छी होती है. विटामिन सी, ई और बी के अलावा इमली में कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैंगनीज और फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. साथ ही इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं. आइए आपको बताते हैं कि इमली किस तरह से आपके हेल्थ को फायदा पहुंचा सकती है.


डायबिटीज में प्रभावी
इमली के बीज के अर्क की प्रकृति एंटी-इंफ्लेमेटरी होती है और इसे ब्लड शुगर लेवल को स्थिर करने और डायबिटीज से पीडि़त लोगों में अग्नाशय के टिश्यु की क्षति को रोकने के लिए जाना जाता है. इमली में पाया जाने वाला एंजाइम अल्फा-एमिलेज ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद करता है.

इम्यूनिटी बूस्टर
इमली में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन सी मौजूद होता है जो कि शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करती है. इमली एक इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काम करती है. यह शरीर से वायरल इंफेक्शन को कोसो दूर रखती है. इसे खाने से चेहरे पर ग्लो और बालों में चमक नजर आती है.

वजन कम करने में मददगार
इमली फाइबर से भरपूर होती है और इसमें फैट की मात्रा बिल्कुल नहीं होती है. इमली को खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है क्योंकि इसमें फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स होते हैं. इसके अलावा, इमली हाइड्रॉक्सीसिट्रिक एसिड से भरपूर होती है जो एमिलेज को रोककर भूख को कम करती है. यह एक एंजाइम है जो कार्बोहाइड्रेट को फैट में परिवर्तित करने के लिए जिम्मेदार होता है.

डाइजेशन में मददगार
इमली का उपयोग प्राचीन काल से एक अच्छे पाचक के रूप में किया जाता रहा है क्योंकि इसमें टार्टरिक एसिड, मैलिक एसिड और पोटेशियम पाया जाता है. पेट की मसल्स को आराम देने की क्षमता के कारण इसका उपयोग लूज मोशन के उपचार के रूप में भी किया जाता है. इसका इस्तेमाल कब्ज को दूर करने के लिए भी किया जाता है. इमली के सेवन से पेट की बीमारियां दूर रहती हैं.

हेल्दी हार्ट
इमली दिल के लिए बहुत अच्छा होता है. इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स, एलडीएल या बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ाते हैं. इस प्रकार ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स (फैट का एक प्रकार) के निर्माण को रोकते हैं. इसमें पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है.