BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |
दिमाग के लिए टॉनिक का काम करती है शंखपुष्पी, जानिए और भी फायदे

दिमाग के लिए टॉनिक का काम करती है शंखपुष्पी, जानिए और भी फायदे

आयुर्वेदिक दवाओं में व्यापक रूप से शंखपुष्पी का उपयोग किया जाता है। इस जड़ी-बूटी को दिमाग तेज करने का टॉनिक भी कहा जाता है। ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए अमृत का काम करती है। शंखपुष्पी को वैष्णव, विष्णुकांता और विष्णुगंधी जैसे कई नामों से जाना जाता है।
इस जड़ी-बूटी का स्वाद कड़वा होता है और ये स्निग्ध (तैलीय) और पिछिल (पतला) गुण रखती है। शंखपुष्पी की तासीर ठंडी होती है एवं इससे त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ को संतुलित किया जा सकता है। वात और पित्त दोष पर ये ज्यादा काम करती है।


आइए जानते हैं शंखपुष्पी से स्वास्थ्य को क्या लाभ मिलते हैं?

मस्तिष्क के लिए टॉनिक
इस जड़ी-बूटी को दिमाग और याद्दाश्त तेज करने वाला टॉनिक भी कहा जा सकता है। ये बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने का काम करती है। ये जड़ी-बूटी बढ़ती उम्र में याद्दाश्त कमजोर होने से भी रोकती है और इसे चिंता एवं डिप्रेशन को कम करने में भी असरकारी पाया गया है। इससे अल्जाइमर, तनाव, चिंता, डिप्रेशन और मानसिक तनाव जैसी कई समस्याओं का इलाज किया जा सकता है।

हाइपरटेंशन यानी हाई बीपी का इलाज
शंखपुष्पी से ठीक होने वाली बीमारियों में हाइपरटेंशन का नाम भी शामिल है। ये जड़ी-बूटी ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन जैसे कि एड्रेनलाइन और कोर्टिसोल को नियंत्रित कर स्ट्रेस हार्मोन के उत्पादन को कंट्रोल करने में असरकारी पाई गई है।

हाइपरथायराइड
अध्ययनों की मानें तो शंखपुष्पी में थायराइड-रोधी गुण होते हैं। इस बूटी की जड़ को हाइपरथायराइड पर प्रभावशाली पाया गया है। इसके पौधे का रस स्ट्रेस की स्थितियों में थायराइड हार्मोन के उत्पादन को कम कर के थायराइड ग्रंथि को ठीक तरह से काम करने में मदद करता है। ये जड़ी-बूटी लिवर द्वारा उत्पादित कुछ एंजाइम्स पर तेज असर करती है जिससे हायपरथायराइड के लक्षणों में सुधार आने में मदद मिलती है।

पाचन में सुधार
शंखपुष्पी शरीर में पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने में भी मदद करती है। इसके पौधे के हर हिस्से से निकला रस शरीर में फ्लूइड को जमने से रोकता है और पाचन में मदद करता है। ये पेट से जुड़ी परेशानियों खासतौर पर पेचिस के इलाज में इस्तेमाल की जाती है।

कार्डियक अरेस्ट से बचाव
शंखपुष्पी में मौजूद एथेनोलिक एसिड कार्डियक अरेस्ट आने के प्रमुख कारणों में से एक नॉन-एस्टेरिफाइड फैटी एसिड (एनईएफए) के स्तर को कम करता है। इस पौधे में केंफेरोल नामक फ्लेवेनॉएड पाया जाता है जो कि एनईएफए के असर को कम कर देता है। इस प्रकार शंखपुष्पी दिल को भी स्वस्थ रखती है।

पेट में अल्सर
ग्लाइकोप्रोटीन के स्राव के कारण होने वाले कई तरह के अल्सर पर असरकारी है। इसका रस पेप्टिक अल्सर का इलाज भी करता है।

अनिद्रा
शंखपुष्पी स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के सतर को कम करने में मदद करती है और बेहतर नींद लाती है। एक गिलास दूध में सोने से पहले जीरा और शंखपुष्पी का एक चम्मच पाउडर मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है और नींद से जुड़े विकार जैसे कि अनिद्रा का इलाज होता है।

शंखपुष्पी का सेवन सिरप और पाउडर के रूप में किया जा सकता है। अगर आपके बच्चे की याददाश्त कमजोर है या वो पढ़ाई में कमजोर है तो आप उसे शंखपुष्पी का सिरप जरूर पिलाएं।

 

बालों में तेल लगाने से होते हैं गजब के फायदे, लेकिन तरीका होना चाहिए सही

बालों में तेल लगाने से होते हैं गजब के फायदे, लेकिन तरीका होना चाहिए सही

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बालों की देखभाल के लिए समय नहीं मिल पाता है। जिसके कारण बाल समय से पहले रूखे, बेजान और कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा बालों में तेल लगाए बिना सीधे शैंपू करने या अन्य हेयर प्रोडक्ट लगाने से बाल टूटने और झडऩे लगते हैं।
चूंकि लंबे, घने और आकर्षक बाल महिलाओं की सुंदरता का एक हिस्सा हैं। इसलिए समय-समय पर बालों की उचित देखभाल बेहद जरूरी है। घर के बड़े बुजुर्ग अक्सर हमें बालों में तेल लगाने की सलाह देते हैं। दरअसल, तेल बालों को जड़ से मजबूत करता है और इन्हें हेल्दी रखता है। बालों में हमेशा तेल लगाते रहने से बाल लंबे होते हैं और हेयर फॉल की समस्या भी दूर हो जाती है। यहां जानें बालों में हेयर ऑयल लगाने से क्या फायदे मिलते हैं...


ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाए
हेयर ऑयल न सिर्फ बालों को स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता भी है। स्कैल्प में तेल लगाकर मालिश करने से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है। इससे बालों की सुंदरता बनी रहती है।

हेयर फॉल की समस्या करे दूर
बाल झडऩा एक आम समस्या है। लेकिन नियमित बालों में तेल लगाने से बालों का झडऩा रुक जाता है। हेयर ऑयल बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है और इन्हें मजबूती प्रदान करता है।

बालों को रखे स्वस्थ
हेयर ऑयल में कई तरह के विटामिन और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। ये बालों को गहराई से पोषण प्रदान करते हैं और स्वस्थ रखते हैं। हफ्ते में दो दिन बालों में तेल लगाने से बालों में चमक आती है और हेयर फॉल भी कम होता है।

हेयर टिश्यू को बनाए मजबूत
बालों में तेल लगाकर मसाज करने से हेयर टिश्यू मजबूत होते हैं। इसके कारण बाल सफेद होने या टूटने की समस्या से छुटकारा मिलता है। दरअसल हेयर ऑयल बालों की जड़ों में जाकर इन्हें पोषण प्रदान करता है। जिससे बालों के ऊतक भी मजबूत होते हैं।

बालों में तेल लगाने के लिए कुछ टिप्स
1.बालों में तेल लगाने से पहले स्कैल्प को साफ करें। इससे बालों में तेल अच्छी तरह काम करता है।

2.बालों में शैंपू करें और पूरी तरह सुखने के बाद तेल लगाएं।

3.बालों में धूल और गंदगी जमने से पहले तेल से मसाज करके शैंपू कर लें।

4.हेयर ऑयल को हल्का गर्म करके बालों में लगाने से यह जड़ों में गहराई तक पहुंचता है।

5.बालों में तेल लगाने के बाद हल्के हाथों से 10 से 15 मिनट तक मसाज करें।

6.बालों में तेल लगाने के कम से कम 3 घंटे बाद शैंपू करें।

7.यदि आपके बाल बहुत कमजोर हैं तो रात को सोने से पहले बालों में तेल लगाने की आदत डालें।

हफ्ते में एक दिन बालों में तेल जरूर लगाएं। अगर आपके बाल ड्राई हैं तो हफ्ते में दो दिन ऑयल लगाएं।

 

अगर आपको भी बार-बार डकार आ रही है तो अपनाये ये घरेलू उपाय

अगर आपको भी बार-बार डकार आ रही है तो अपनाये ये घरेलू उपाय

पेट में बनी गैस डकार के जरिए शरीर से बाहर निकलती है। डकार से बदबू आ भी सकती है और नहीं भी। डकार के जरिए शरीर पेट में जमा अत्यधिक गैस को बाहर निकालता है। वैसे तो डकार का कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन अगर बार-बार डकार आए तो ये आपके लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकता है।
अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें बार-बार डकार आने की प्रॉब्लम है तो कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।


डकार बंद करने का घरेलू नुस्खा है पुदीना


पुदीने में मासंपेशियों को आराम देने वाले गुण होते हैं जो पाचन मार्ग को राहत देता है और पेट में बनने वाली गैस को कम करता है। ये पित्त के प्रवाह में भी सुधार लाता है और पाचन को बेहतर करता है जिससे डकार कम आती है। एक चम्मच पुदीने की सूखी पत्तियां लें और उसे एक कप गर्म पानी में डालें। इसे 10 मिनट तक उबालें और फिर छानकर दिन में दो से तीन बार पिएं।


ज्यादा डकार आने का इलाज है अदरक
डकार पैदा करने वाली गैस से संबंधित समस्याओं का असरकारी रूप से इलाज करने में अदरक बुहत फायदेमंद है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लामेट्री और दर्द-निवारक गुण होते हैं। ताजी का अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा लेकर चबाएं।

ज्यादा डकार आने का घरेलू उपाय है पपीता
पपीते में एक ऐसा एंजाइम होता है जो बैक्टीरिया को बढऩे से रोकता है और पाचन में सुधार लाता है। पपीता डकार और सीने में जलन का बेहद असरकारी घरेलू उपचार है। आप पका पपीता रोज खाएं या इसकी स्मूदी बनाकर पिएं।

बार बार डकार आने का इलाज है केला
केले में फाइबर उच्च मात्रा में होता है जिससे पाचन में सुधार आता है और डकार कम आती है। अगर आपका बार-बार डकार आ रही है तो केला खा लें लेकिन एक दिन में एक से ज्यादा केला न खाएं।

डकार रोकने का तरीका है सौंफ
खट्टी डकार को सौंफ से ठीक किया जा सकता है। पेट दर्द के साथ-साथ खट्टी डकारें आ रही हैं तो एक या आधा चम्मच सौंफ चबा लें। आप गुनगुने पानी में भी इसे मिलाकर पी सकते हैं।

डकार आने का उपाय है हींग
हींग डकार पैदा करने वाली गैस से राहत पाने में मदद करती है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चुटकी हींग, अदरक पाउडर और नमक डालकर मिक्स करें। अब इस पानी को पी लें।

बार बार डकार आने की दवा है इलायची
इलायची पाचक रस का अधिक उत्पादन करने में मदद करती है और गैस को बनने से रोकती है। एक इलायची को मुंह में रखकर चबाएं, आप चाहें को पानी में दो तीन इलायची कूटकर डालने के बाद उबाल भी सकते हैं। इस पानी को छानकर पी लें।

डकार रोकने का उपाय है दही
दही पाचन में मदद करता है और गट बैक्टीरिया को संतुलित कर गैस बनने से रोकता है। यहां तक कि इससे हर प्रकार के पाचन विकार को ठीक करने में मदद मिल सकती है। दही में एक चुटकी नमक मिलाकर खाएं या छाछ पीना भी फायदेमंद रहता है। खाना खाने के बाद छाछ पिएं।
उपरोक्त घरेलू नुस्खों की मदद से आप बार-बार डकार आने की परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।

 

गर्मी में घमौरियों से हो रहे हैं परेशान, 5 मिनट में इन 5 चीजों से करें इलाज

गर्मी में घमौरियों से हो रहे हैं परेशान, 5 मिनट में इन 5 चीजों से करें इलाज

गर्मी के मौसम में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को घमौरियां बहुत ही कष्ट पहुंचाती हैं. इस मौसम में न सिर्फ कई तरह की बीमारियां पैदा होती हैं बल्कि शरीर में घमौरियों की वजह से तेज खुजली भी होती है. घमौरी से शरीर खुजलाने के कारण जलन और इचिंग भी बढ़ जाती है. इससे शरीर पर रैशेज भी हो जाते हैं. त्वचा संबंधी यह दिक्कत यूं तो बहुत बड़ी नहीं होती लेकिन सभी को परेशान कर देती है. आप चाहें तो इसे घर पर ही कुछ आसान टिप्स की मदद से ठीक कर सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कौन से हैं वो घरेलू नुस्खे.


क्या होती है घमौरी
चिलचिलाती हुई गर्मी में जब पसीने की वजह से स्किन के पोर्स बंद हो जाते हैं, तो शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दानें निकल आते हैं. इनमें बेहद तेज खुजली होती है और जलन महसूस होती है. इन्हीं दानों को घमौरियां कहते हैं. यह अक्सर पीठ, छाती, बगल व कमर के आसपास होती है. यह कई बार अपने आप ठीक हो जाती हैं मगर कई बार इन्हें कुछ उपायों सो ठीक करना पड़ता है.

मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल लंबे समय से घमौरियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है. यह बंद पोर्स को खोलती है और स्किन को रिफ्रेश करती है. इसे लगाने के लिए इसको गुलाब जल के साथ मिक्स करें. फिर प्रभावित जगह पर लगा कर 20 मिनट के लिए छोड़ दें. गर्मियों में इसे रोज लगाएं और जब फर्क दिखाई पडऩे लगे तो एक दिन छोड़ कर लगाना शुरू करें. जल्द ही असर नजर आएगा.

खीरा
गर्मी की वजह से स्किन पर होने वाली खुजली को खीरा लगाकर आसानी से ठीक किया जा सकता है. यह त्वचा को तुरंत निखारता है और ठंडक पहुंचाता है. इसके लिए आधा खीरा लेकर उसे छीलें और पतले स्लाइस काट लें. इन्हें कुछ मिनटों के लिए फ्रिज में ठंडा करें और फिर उन्हें घमौरियों पर लगाएं.

बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडे में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह गर्मी और पसीने की वजह से शरीर पर पैदा होने वाले संक्रमण को रोकने में मदद करता है. 2 चम्मच बेकिंग सोडा को 1 कटोरी पानी में मिलाकर शरीर के प्रभावित क्षेत्र को साफ करें. रोजाना दिन में 2 बार ऐसा करने से लाभ मिलता है.

एलोवेरा जेल
एलोवेरा जेल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो गर्मी के कारण होने वाली घमौरियों से राहत दिलाते हैं. यह खुजली के साथ लाल रंगे के रैशेज को भी दूर करता है. अगर आपको घमौरियों से बचना है तो ताजा एलोवेरा जेल लगाएं. इसे कम से कम दिन में दो बार जरूर लगाएं.

बर्फ
बर्फ की ठंडक त्वचा की गर्मी और खुजली को शांत करती है. एक कॉटन के कपड़े में 2-3 आइस क्यूब लेकर उसे घमौरी वाली जगह पर लगाएं. आप चाहें तो पानी में बर्फ डालकर उसे पिघलने दें और फिर उसमें कपड़ा भिगोकर प्रभावित क्षेत्र की सिकाई कर सकते हैं. बर्फ लगाने से खुजली में राहत मिलती है.

 

कोरोना जैसे संक्रमण को दूर रखना है तो साफ-सफाई का रखें ख्याल

कोरोना जैसे संक्रमण को दूर रखना है तो साफ-सफाई का रखें ख्याल

कोरोना के चलते पूरे देशभर में लॉकडाउन है। कोरोना को लेकर कई तरह के भ्रम भी फैलाए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच हमें इन सब बातों से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। जरूरी है तो बस खुद को जागरूक रखने की कि हमारे आस-पास क्या हो रहा है? इस बारे में हमें जानकारी होनी चाहिए और यह जरूरी भी है।


लेकिन उन बातों से खुद को हमें परेशान नहीं करना है। बस इस बात का ध्यान रखें कि कोरोना से दूर रहना है तो हमें साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखने की आवश्यकता है, खुद की भी और हमारे घर की भी। जी हां, इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत है साफ-सफाई की जिससे कि कोरोना जैसे संक्रमण को दूर रखा जा सके।

इस समय आप बार-बार हाथ धोना, सफाई से रहना इन सब बातों का ध्यान तो जरूर रखते ही होंगे। लेकिन जरा सोचिए कि जब आप गेट बंद करते हैं, खिड़कियों को छूते हैं तब? चलिए आप तो समझदार हैं, आपको पता है कि इसके बाद हाथ धोना जरूरी है लेकिन घर में मौजूद बच्चों पर कई बार आपका भी ध्यान नहीं जा पाता। लेकिन, इस समय ऐसी गलती होना आम बात नहीं है। आपको ही इन सब बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। इसलिए घर की सफाई का विशेषतौर पर ध्यान दें। इसके लिए आप क्या कर सकती हैं, आइए जानते हैं।

फिनाइल और पानी का घोल तैयार करके पूरे घर की सफाई करें

घर के दरवाजे, हैंडल व रैलिंग को जरूर पोंछें। इसे अच्छी तरह से साफ करें और ध्यान रहे कि इन्हें साफ करने के बाद अपने हाथों को भी तुरंत साबुन से धोएं।

घर में सबसे पहले उन जगहों की सफाई करें, जहां अधिकतर आपके हाथ जाते हैं, जैसे फ्रिज का हैंडल, मेज-कुर्सी, नल, टीवी के रिमोट, मोबाइल, लैपटॉप, की-बोर्ड, बच्चों के खिलौने, डस्टबिन आदि। इनकी दिन में 2 से 3 बार सफाई करें।
बच्चों के खिलौने जिससे वे खेलते हैं, उन्हें भी जरूर साफ करें।

बच्चों को जरूर सिखाएं-

साबुन से हाथ धोते रहें। बिना हाथ धोएं चेहरे, नाक, आंखों में हाथ न लगाएं।

उन्हें बाहर जाने से रोकें व घर में ही रहने के लिए कहें।

हाथ धोने का सही तरीका उन्हें समझाए।

 

शिशु पर इस तरह करें एलोवेरा जैल का इस्तेमाल, मिलेंगें कई फायदे

शिशु पर इस तरह करें एलोवेरा जैल का इस्तेमाल, मिलेंगें कई फायदे

सदियों से सेहत, सौंदर्य, औषधियों में एलोवेरा का इस्तेमाल होता आया है। अब तो कई बीमारियों जैसे गठिया, जलने पर और पेप्टिक अल्सर में भी एलोवेरा को असरकारी पाया गया है। एलोवेरा में कई गुण होते हैं और अपने शिशु को आप किस तरह इसके लाभ दे सकती हैं, इसी के बारे में हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।

क्या शिशु के लिए एलोवेरा सुरक्षित है

नवजात शिशु की त्वचा पर एलोवेरा लगाया जा सकता है। यूएस नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लीमेंट्री एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ स्टेट्स के मुताबिक एलोवेरा लगाना सुरक्षित होता है। हालांकि, शिशु को एलोवेरा खिलाने या इसके जूस के सेवन को लेकर कोई चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध नहीं है।

शिशु पर कैसे करें एलोवेरा का उपयोग

आप घर पर ताजा एलोवेरा जैल का शिशु पर कई तरह से इस्तेमाल कर सकत हैं, जैसे कि :

*दिन में कई बार एलोवेरा जैल से शिशु की मालिश करने से स्किन हाइड्रेट रहती है। चेहरे पर जैल लगाने से बचें।

*आप एलोवेरा जैल से शिशु के बालों और स्कैल्प की मालिश भी कर सकते हैं। हालांकि, इसके प्रभाव की पुष्टि को लेकर अभी तक कोई रिसर्च नहीं की गई है।

शिशु को एलोवेरा जैल से मिलने वाले लाभ

एलोवेरा जैल में 200 बायोएक्टिव तत्व जैसे कि एंजाइम, लिग्निन, सैपोनिंगस, सलाइलिक एसिड और अमीनो एसिड होते हैं। ये सभी शिशु के लिए लाभकारी हैं। स्किन जलने, एक्ने या डायपर रैशेज में आप एलोवेरा जैल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

शिशु के लिए कैसे तैयार करें एलोवेरा जैल

आपको बाजार में पाउडर, जैल, जूस या कैप्सूल के रूप में एलोवेरा मिल जाएगा लेकिन बेहतर होगा कि आप शिशु के लिए घर पर ही ताजा एलोवेरा जैल बनाएं। एलोवेरा जैल बनाने का तरीका इस प्रकार है : 

*एलोवेरा के पौधे से एक पत्ती लें और उसे गुनगुने पानी से धो लें।

*इसे सुखाने के बाद छीलें, आपको इसके अंदर सफेद रंग का जैल दिखाई देगा।

*पत्ती को नीचे रख दें और उसमें से नीले का रंग का रस निकलने दें।

*जब ये रस निकल जाए तो चम्मच या चाकू की मदद से जैल को निकाल लें।

*इस जैल को आप एयर टाइट कंटेनर में स्टोर कर के रख सकते हैं और शिशु की त्वचा पर लगा सकते हैं।

*ध्यान रहे कि आपको शिशु की त्वचा पर सिर्फ ताजा एलोवेरा जैल ही लगाना है। बच्चे को एलोवेरा जैल खिलाएं नहीं और न ही इसका जूस पीने को दें। ऐसा बच्चे के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। चूंकि, शिशु की त्वचा बहुत नाजुक होती है इसलिए चेहरे पर जैल लगााने से बचें।

इस प्रकार आप सुरक्षित तरीके से शिशु पर एलोवेरा जैल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 
क्या आप को भी बेड टी की आदत है तो हो जाइए सावधान हो सकती है ये परेशानिया

क्या आप को भी बेड टी की आदत है तो हो जाइए सावधान हो सकती है ये परेशानिया

बेड-टी से दिन की शुरुआत करनेवाले लोगों को कुछ खास तरह की दिक्कतें अपनी सेहत को लेकर अक्सर होती रहती हैं। लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि आखिर उनकी परेशानी की वजह क्या है... अगर आप भी पेट और पाचन संबंधी कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं या अक्सर लो फील करते हैं तो यहां जानें क्या हो सकती है आपकी समस्या की वजह...

एनर्जी नहीं उदासी बढ़ती है!
-आपको थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है लेकिन अगर आप सुबह के समय खाली पेट चाय लेते हैं तो नोजिया, उनिंदापन, रोने की इच्छा होना और उदासी बढऩे जैसी मानसिक समस्याएं होने लगती हैं।
-हालांकि आपको अभी तक यही पता होगा कि कैफीन हमें तुरंत एनर्जी देता है। लेकिन अगर आप सुबह के वक्त खाली पेट कैफीन लेंगे तो इससे तो इसके साइड इफेक्ट मानसिक समस्याओं के रूप में भी सामने आ सकते हैं।

गट बैक्टीरिया को हानि
-हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में गट बैक्टीरिया का बहुत बड़ा रोल होता है। ये ऐसे बैक्टीरिया हैं, जो सेहत को दुरुस्त रखने के लिए भोजन के पाचन और जरूरी एंजाइम्स के उत्पादन में सहायता करते हैं।
-लेकिन खाली पेट चाय पीने से इन्हें हानि पहुंचती है। साथ ही हमारे मुंह में बने अच्छे बैक्टीरिया भी चाय में मिली शुगर को तोडऩे में जुट जाते हैं, जिससे ओरल हेल्थ को हानि होती है। इससे मुंह से स्मेल आने की दिक्कत बढ़ जाती है।

यूरिन अधिक आना
-चाय के साथ दिन की शुरुआत करनेवाले लोगों को सबसे पहले समस्या यूरिन अधिक आने की होती है। इससे इनके शरीर में पानी की कमी होने लगती है। क्योंकि चाय में मौजूद कैफीन और दूसरे डियूरेटिक एलिमेंट्स शरीर से पानी के बाहर करने का काम करते हैं।
-इस कारण बार-बार प्यास लगना और बार-बार यूरिन आने की समस्या अक्सर हो जाती है। इस कारण पेट भी ठीक से साफ नहीं होता। पेट में भारीपन और टफनेस की दिक्कत हो सकती है।


पेट साफ नहीं होता
-अगर आपको पेट ठीक से साफ ना होने की शिकायत रहती है तो इसका एक कारण आपकी बेड-टी लेने की आदत भी हो सकती है। क्योंकि दिन की शुरुआत चाय के साथ करने से पेट में एसिडिटी की समस्या हो जाती है।
-कैफीन से दिन की शुरुआत करना पाचन तंत्र को डिस्टर्ब करता है और चाय में बड़ी मात्रा में कैफीन होता है। खासतौर पर जिन लोगों को मोशन से जुड़ी दिक्कत होती है, उन्हें दिन की शुरुआत चाय के साथ नहीं करनी चाहिए।
 

एम्स रायपुर का ब्लड बैंक नए स्वरुप और सुविधाओ के साथ विस्तृत परिसर में हुआ शिफ्ट

एम्स रायपुर का ब्लड बैंक नए स्वरुप और सुविधाओ के साथ विस्तृत परिसर में हुआ शिफ्ट

रायपुर, एम्स का ब्लड बैंक अब ए-1 ब्लॉक में बने विस्तृत परिसर में शिफ्ट हो गया है। यहां रक्तदाताओं और ब्लड लेने वालों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
ब्लड बैंक कई विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने की योजना बना रहा है जिसमें ल्यूको रेडयूसेड ब्लड, इररेडीएटेड ब्लड, न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (नेट)-जिससे डीएनए-आरएनए स्क्रीनिंग में सहायता मिलेगी, थैराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज और पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल कलेक्शन शामिल है।
रक्तदान हेतु एम्स रायपुर, ब्लड बैंक एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन से संपर्क कर रक्तदान पास प्राप्त कर सकते है जिससे लॉकडाउन में रक्तदाता को एम्स तक आने में कोई कोई समस्या नहीं होगी। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 8518883771 और 8518881735 पर संपर्क किया जा सकता है।
 

गर्मियों में खूब खाएं नारियल, सेहत को नहीं होने देगा इतने नुकसान

गर्मियों में खूब खाएं नारियल, सेहत को नहीं होने देगा इतने नुकसान

नारियल एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो हमें सारे मौसम में बड़ी आसानी से मिल जाता है। वैसे तो पूरे भारत में इसका बड़े चाव से सेवन किया जाता है लेकिन दक्षिण भारत में इसका विशेष रूप से उपयोग होता है। कच्चे नारियल की चटनी से लेकर कई कई प्रकार के पकवान में भी नारियल का इस्तेमाल होता है। वहीं केवल नारियल खाने से भी कई प्रकार का फायदा हमारी सेहत को पहुंचता है। यह कई गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। आइए जानते ही नारियल खाने से हमें क्या-क्या लाभ हो सकते हैं। 

थायरॉइड फंक्शन को ठीक करें

थायरॉइड फंक्शन अगर ठीक से काम नहीं करता है तो हमारे गले में कई प्रकार के रोग भी हो सकते हैं। कुछ लोगों को थायरॉइडरोग भी हो जाता है जो थायरॉइड फंक्शन के ठीक तरीके से काम ना करने के कारण भी हो सकता है। जबकि वैज्ञानिकों ने अध्ययन के पश्चात यह पाया है कि नारियल का सेवन करने वाले लोगों में थायरॉइड फंक्शन ठीक तरीके से काम करता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए आप भी नारियल का सेवन कर सकते हैं। 

दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाए

दिमाग की कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए भी नारियल काफी फायदेमंद साबित होगा। ऐसा इसलिए भी मुमकिन हो सकता है क्योंकि नारियल में ब्रेन बूस्टिंग गुण पाया जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व आपकी ब्रेन सेल्स को एक्टिवेट करते हैं ताकि आपके दिमाग की कार्य क्षमता बढ़ सके। इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है जिससे वह अच्छी तरीके से काम करने लगता है। 

वजन नियंत्रण करने के लिए

कुछ लोग मोटापे की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान होते हैं और उसके लिए वह तरह-तरह की टिप्स को फॉलो करते हैं। इन सबसे अलग अगर खान-पान पर ही विशेष ध्यान दिया जाए तो मोटापे की समस्या से बचने में काफी मदद मिल सकती है। वैज्ञानिक रिपोर्ट की मानें तो नारियल का सेवन करने के कारण वजन को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है। इसलिए वजन को नियंत्रित करने के लिए आप भी नारियल को अपनी डायट में जरूर शामिल करें। 

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए

रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के कारण हम कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आने से बचे रहते हैं। एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता हमारे शरीर में एंटीबॉडी इसको प्रवेश करने से रोकती है जिसके कारण हमें कई प्रकार के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी के अनुसार,नारियल का सेवन करने वाले लोगों में इम्यून सिस्टम के मजबूत होने का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। 

हृदय को स्वस्थ रखे

नारियल का सेवन करने वाले लोगों में हृदय रोगों का खतरा भी कई गुना तक कम हो जाता है। इसके वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो नारियल में पाया जाता है। यह हृदय को सुरक्षा प्रदान करने का एक विशेष गुण होता है जो खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसलिए जो लोग ह्रदय रोगों की चपेट में आने से बच के रहना चाहते हैं, वे भी नारियल को खाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। 

पाचन शक्ति को बढ़ाए

कहते हैं कि हमारे शरीर में कई बीमारियों की वजह पेट होता है। इसका मतलब अगर आपका पेट स्वस्थ नहीं है तो आप कई प्रकार की बीमारियां से जूझ सकते हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि अपने पेट की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखें। पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के लिए नारियल में पाया जाता है। इसलिए नारियल का सेवन आपके पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए भी काफी काम आ सकता है। आप चाहें तो ताजे नारियल को स्मूदी के रूप में बनाकर भी पी सकते हैं।

 
कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के साथ-साथ इन 6 रोगों से भी दूर रखता है पंपकिन सीड्स का सेवन

कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के साथ-साथ इन 6 रोगों से भी दूर रखता है पंपकिन सीड्स का सेवन

कद्दू यानी कद्दू का इस्तेमाल कई प्रकार की सब्जियों के रूप में किया जाता है। इसका सेवन करने वाले ज्यादातर लोग ऐसे भी होते हैं जो इसके सीड्स यानी बीजों को फेंक देते हैं। लेकिन इसके बीज के कई सारे फायदे हैं जो आपकी सेहत को कद्दू से ज्यादा लाभ पहुंचा सकते हैं। पंपकिन सीड्स का सेवन तो वैसे भी प्रोटीन शेक या फिर स्मूदी के रूप में किया जाता है। क्या आप जानते हैं कि पंपकिन सीड्स कैंसर और डायबिटीज जैसी कई प्रकार की गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी आप को बचाए रख सकता है। इसके सेवन से होने वाले कुछ और खास फायदों को आगे बताया जा रहा है...


कैंसर से बचाव
पंपकिन सीड्स का सेवन करने वाले लोग कैंसर की चपेट में आने से काफी हद तक बचे रहेंगे। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, इस बात की भी पुष्टि की गई है कि कद्दू के बीज में ऐसे विशेष गुण पाए जाते हैं जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी निष्क्रिय कर देता है। यह पेट के कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, कोलन कैंसर जैसे कैंसर के खतरे से बचाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर सकता है। इसलिए अगर आप भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचे रहना चाहते हैं तो इसे अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं।

डायबिटीज से सुरक्षा
कद्दू के बीजों में एंटी डायबेटिक गुण पाए जाते हैं और यही वजह है कि यह डायबिटीज जैसी बीमारी से बचाए रखने के लिए काफी सक्रिय खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसे खाने के लिए आप चाहें तो इसकी स्मूदी इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर आप इसे प्रोटीन शेक के रूप में भी पी सकते हैं। इसका नियमित रूप से किया गया सेवन शरीर में डायबिटीज की स्थिति को उत्पन्न होने से रोकता है और आप डायबिटीज की बीमारी से सुरक्षित रहते हैं।

हृदय रोगों से बचाने में
हृदय रोगों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें। आप अपनी डाइट में ऐसे फूड्स को शामिल करें जो कार्डियोप्रोटेक्टिव कौन रहते हैं और आपके हृदय के लिए भी लाभदायक हों। ऐसे में जब बात आती है पंपकिन सीड्स की तो यह भी आपके दिल के लिए काफी फायदेमंद सीड साबित हो सकता है। यहां भी मैग्नीशियम के बारे में आपको बताया जाएगा क्योंकि मैग्नीशियम एक ऐसा मिनरल है जो ह्रदय रोगों से भी बचाए रखने के लिए काफी मदद करता है।

सूजन कम करने में
कभी-कभी खेलते वक्त या फिर किसी चोट के कारण या शरीर के अंदर मौजूद कोशिकाओं के टूटने की स्थिति में सूजन हो जाती है। यह सूजन शरीर के किसी भी हिस्से में होती है जो कभी-कभी बढ़ भी सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति के लिए प्राथमिक रूप से पंपकिन सीड्स का सेवन काफी लाभ दिला सकता है। दरअसल, पंपकिन सीड्स में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जिसके कारण यह सूजन को कम करने का विशेष गुण रखता है। इसलिए जब आप इन बीजों का सेवन करेंगे तो इससे आपके शरीर की सूजन को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में
बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के कारण दिल से जुड़ी कई बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। यहां तक कि क्वालिटी ऑफ लाइफ को खराब करने के साथ-साथ कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकती है। इस बीमारी को हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता है। जबकि । यह एक ऐसा मिनरल है जो ब्लड प्रेशर की स्थिति को संतुलित बनाए रखने में सक्रिय रूप से कार्य करता है। इसलिए आप भी इसका नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए
पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप फाइबर वाले शोध खाद्य पदार्थों का नियमित रूप से सेवन करें। फाइबर एक ऐसा पोषक तत्व है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए कार्य करता है। वहीं, पंपकिन सीड में भी फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है और अगर आप इसका नियमित रूप से सेवन करते हैं तो यह आपकी पाचन किया को मेंटेन रखने के लिए भी मदद कर सकता है।

स्पर्म क्वालिटी
पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी लो होने के कारण उनकी सेक्सुअल लाइफ काफी बुरी हो जाती है। उनकी प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए जिन पुरुषों को अपने स्पर्म काउंट को मेंटेन रखना है वह हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार पंपकिन सीड्स का सेवन कर सकते हैं। दरअसल,यहां पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाने के लिए भी काफी मददगार क्रिया होती है जो स्पर्म क्वालिटी को बढ़ाने के साथ-साथ स्पर्म मोटिलिटी में भी मददगार हो सकती है। आप चाहें तो स्पर्म क्वालिटी को बूस्ट करने के लिए कद्दू के बीजों को प्रोटीन शेक के रूप में भी पी सकते हैं।

 

इन 2 तरीकों से नहाने पर बॉडी पेन में मिलती है तुरंत राहत, दूर होती है थकान

इन 2 तरीकों से नहाने पर बॉडी पेन में मिलती है तुरंत राहत, दूर होती है थकान

एक वक्त था जब हम घड़ी देखा करते थे कितने बजे हैं? एक आज का वक्त है कि घड़ी हमें दिखाती है कि इतना वक्त हो गया और तुम्हारा इतना ज्यादा काम बाकी है। हर समय हमारे दिमाग पर काम का प्रेशर रहता है, कभी ऑफिस का काम तो कभी घर का काम। ऐसे में शारीरिक और मानसिक थकान होना तय है। इस स्थिति में हम कुछ ऐसा चाहते हैं जो हमें तुरंत राहत दे सके। हमारे शरीर में फिर से एनर्जी भर सके कि हम बाकी बचे काम को गोली की स्पीड से पूरा कर लें। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा है क्या किया जा सकता है जो तुरंत राहत दे...


जानकर आप हैरान हो सकते हैं कि थकान और बॉडी पेन दूर करने के लिए हम आपको नहाने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन आपको वैसे नहीं नहाना है, जैसे आप अब तक नाहते रहे हैं। आपको अपने नहाने के पानी में कुछ हर्ब्स मिलानी हैं। ये आपकी बॉडी में बढ़े तनाव, जलन और थकान को कम कर आपको तुरंत राहत देंगी। इस तरह नहाने का तरीका हर्ब बाथ के नाम से जाना जाता है।

कैसे करना चाहिए हर्ब बाथ?


- हर्ब बाथ करने के लिए आप कोई भी हर्ब चुन सकते हैं। जैसे, लैवंडर, पिपरमिंट, रोजमैरी और अजवाइन। अगर आपके पास ये लिक्विड फॉर्म में हैं तो आप इन्हें 25 से 30 मिलीलीटर लें। वहीं अगर ये हर्ब्स आपके पास ड्राई फॉर्म में हैं तो आप बाथ टब के लिए 5 से 6 स्पून और बकेट के लिए 3 से 4 स्पून ले सकते हैं।


- अगर आपके पास सूखी हर्ब हैं तो अब आप एक लीटर पानी लेकर उसमें ये हर्ब डाल दीजिए। इस पानी को उबाल लीजिए और फिर 20 मिनट के लिए सोक करने के लिए छोड़ दीजिए।

-अब इस पानी को छलनी में छानकर अपने नाहने के पानी या बाथ टब में भरे पानी में मिला लीजिए। इस बात का ध्यान रखिए कि जब भी आप बहुत थके हुए हों और मौसम ठंडा हो या रात का समय हो तो नहाने का पानी हल्का गुनगुना होना चाहिए। क्योंकि यह बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने और नर्ब्स को रिलैक्स करने का काम करता है।

दूसरा तरीका


आप एक लीटर पानी लीजिए और इसे उबाल लीजिए। इस उबले हुए पानी में लैवंडर या लेमन असेंशियल ऑइल मिक्स कर लीजिए। साथ ही 5 स्पून रोज वॉटर यानी गुलाबजल मिक्स कर लीजिए। तैयार लिक्विड को नहाने के पानी में मिक्स कर लीजिए। बेहतर होगा कि आप बाथ टब में इस पानी को मिक्स कर उसमें 20 मिनट के लिए सोक करें। इससे आपकी मसल्स रिलैक्स होंगी और सारी थकान दूर हो जाएगी।
 

इस समय भूलकर भी न खाएं दही, हो सकते हैं ये खतरे

इस समय भूलकर भी न खाएं दही, हो सकते हैं ये खतरे

दही यूं तो सेहत के लिए काफी अच्छा होता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार अगर इसे गलत समय पर खाया जाए तो इसका उल्टा प्रभाव भी हो सकता है। गर्मियां आते ही, लंच में खाने के साथ दही खाना अधिकतर लोगों की आदत में शामिल होता है। यह एक अच्छी आदत भी है। दही कई मामलों में सेहत के लिए काफी अच्छा होता है और अधिकतर लोगों को इसे खाने से परेशनी नहीं होती। आपको बता दें, आयुर्वेद में कहा गया है की रात को दही खाने से बचना चाहिए। रात को दही लेने पर यह एक तरह से शरीर के लिए हानिकारक साबित होता है।

क्या है इसके पीछे की वजह?
रात के समय हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से कफ की प्रबलता बढ़ जाती है। इसलिए रात को दही खाने से पेट से जुडी कई बीमारियां होने का खतरा रहता है। कई एक्सपर्ट्स के अनुसार, रात को दही खाने से फूड पॉइजनिंग तक हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग लैक्टोस नहीं ले पाते हैं, वो भी दही खा सकते हैं। आमतौर पर, जो लोग दूध ले पाते हैं, उन्हें दही भी कोई दिक्कत नहीं करता है। वैज्ञानिक रूप से तो दही के कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यह आयुर्वेदिक कांसेप्ट है की हमें ठंडा और गर्म खाना मिक्स नहीं करना चाहिए। इससे आपको गले में परेशानी और सूजन हो सकती है।

कब और कैसे खाएं दही?
दही सबसे अधिक फायदेमंद नाश्ते में खाने से होता है। दही में चीनी मिलाकर खाने से खून की कमी दूर होती है। पेट की परेशानी को दूर करने के लिए दही से बानी लस्सी या छाछ भी सेहत के लिए अच्छी होती है।

पचाने में हो सकती है मुश्किल
रात को दही खाने से इसे पचाने में मुश्किल हो सकती है। इस तरह के भोजन को पचाने के लिए एनर्जी बर्न करनी की जरूरत पड़ती है। खाने के बाद तुरंत सोने से पाचन तंत्र कमजोर होता है। दही सूजन को बढ़ाता है, इसलिए शरीर में सूजन हो तो इसे न खाएं।

गलत समय पर दही कर सकते हैं बड़ी परेशानी
रात में दही खाने से खांसी-जुखाम, जोड़ो के दर्द की परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हो सके तो रात के समय दही खाने से परहेज करना ही बेहतर होता है। दही को रात के साथ-साथ बसंत में भी नहीं खाना चाहिए।
 

काम की खबर : प्रेग्नेंट होने से पहले महिलाओं को करवा लेने चाहिए ये टेस्ट

काम की खबर : प्रेग्नेंट होने से पहले महिलाओं को करवा लेने चाहिए ये टेस्ट

प्रेग्नेंसी के बाद तो मां और शिशु के स्वास्थ्य स्थिति जानने के लिए टेस्ट और नियमित चेकअप करवाए ही जाते हंस लेकिन गर्भधारण करने से पहले भी महिलाओं को कुछ जरूरी टेस्ट करवा लेने चाहिए। डॉक्टर प्रेग्नेंसी से पहले कुछ टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं जिन्हें प्री-प्रेग्नेंसी टेस्ट कहा जाता है।


क्या है प्री-प्रेग्नेंसी चेकअप
गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर महिला और पुरुष दोनों के ही कुछ टेस्ट करवाते हैं जिनकी मदद से ये पता लगता है कि उन दोनों को कोई बीमारी या स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है। इन टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर ही डॉक्टर प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी आहार, एक्सरसाइज और सप्लीमेंट देते हैं।


ब्लड ग्रुप और एंटीबॉडी स्क्रीन
सबसे पहले महिला का ब्लड ग्रुप जानने के लिए ब्लड टेस्ट करवाया जाता है। यदि किसी महिला का आरएच नेगेटिव या आरएच पॉजीटिव ब्लड है और उसके पार्टनर का आरएच नेगेटिव ब्लड ग्रुप है तो आरएच नेगेटिव महिला एवं आरएच पॉजीटिव पुरुष के शिशु में हीमोलिएटिक डिजीज का खतरा रहता है। इस स्थिति में शिशु के मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है या नवजात की मृत्यु भी हो सकती है।

प्रेग्नेंसी से पहले महिला का एंटीबॉडी टेस्ट भी करवाया जाता है। अगर किसी महिला ने पहले कभी खसरे या रूबैला के लिए बहुत समय पहले वैक्सीन लगवाया था तो इस टेस्ट की मदद से पता लगाकर उन्हें बूस्टर वैक्सीन लेने की जरूरत जांची जाती है।

सिफलिस सेरोलॉजी
सिफलिस इंफेक्शन के लिए ब्लड टेस्ट करवाया जाता है। सिफलिस एक यौन संक्रमित इंफेक्शन है जिसमें अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। सिफलिस के कारण गर्भावस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है लेकिन इसके पता चलने के बाद एंटीबायोटिक की मदद से आसानी से इसका इलाज किया जा सकता है।

वायरल इंफेक्शन
डॉक्टर इस बात की सलाह देते हैं कि सभी महिलाओं को गर्भधारण से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी की जांच करवा लेनी चाहिए। इनकी वजह से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ही मुश्किल हो सकता है।

यूरिन टेस्ट
प्री-प्रेग्नेंसी चेकअप में मूत्रमार्ग में संक्रमण यानी यूटीआई और किडनी से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए पेशाब की जांच की जाती है।

गायनेकोलोजिकल स्क्रीनिंग
इस स्क्रीनिंग में यूटराइन फाइब्राएड, सिस्ट, गैर-कैंसरकारी ट्यूमर या पेल्विक इंफ्लामेट्री डिजीज का पता लगाया जाता है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी को प्रभावित करने वाली समस्याओं जैसे कि अनियमित माहवारी और पीसीओएस की भी जांच की जाती है।

अन्य ब्लड टेस्ट
विटामिन बी की कमी, हीमोग्लोबिन काउंट जानने, आरएच फैक्टर, रूबैला, वैरीसेला, टीबी, थायराइड और टोक्सोप्लासमोसिस आदि की जांच के लिए भी प्रेग्नेंसी से पहले डॉक्टर महिलाओं को ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

 

बदलते मौसम में हो गई बलगम वाली खांसी, इन उपायों से करें दूर

बदलते मौसम में हो गई बलगम वाली खांसी, इन उपायों से करें दूर

भारत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. एक तरफ इस महामारी ने लोगों को घेरा हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ अप्रैल के महीने में भी कभी सर्दी, तो कभी गर्मी पड़ रही है. जिसके कारण लोगों को खांसी, जुकाम जैसी समस्याएं आ रही हैं. सूखी खांसी वाले लोग तो परेशान नहीं हो रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को बलगम वाली खांसी आ रही है उन्हें बार-बार कफ बन रहा है, जिसके कारण वो परेशान हो रहे हैं. ऐसे में क्या करना चाहिए आइए जानते हैं इसके बारे में...


बलगम वाली खांसी के कारण


सिर्फ मौसम बदलने से नहीं बल्कि कई बार गले में इंफेक्शन के कारण भी बलगम वाली खांसी हो सकती है. ऐसा माना जाता है कि नियमित तौर पर बलगम वाली खांसी का इलाज नहीं किया जाता तो ये कई बीमारियों की वजह बन सकता है. आइए जानते हैं कैसे खत्म की जा सकती है बलगम वाली खांसी. बलगम वाली खांसी को ठीक करने के लिए लोग कुछ खास तरह की दवाओं का सेवन करने लगते हैं. दवाइयों के अलावा आप घर पर ही कुछ प्राकृतिक चीजों को अपनाकर बलगम वाली खांसी को ठीक कर सकते हैं.


शहद


किसी भी प्रकार की बीमारी में शहद सबसे स्टीक दवा है. रात को सोने से लगभग आधे घंटे पहले 1.5 चम्मच शहद को पिएं. ऐसा करने से नींद भी अच्छी आएगी और गले का कफ भी कम हो जाएगा.


विटामिन सी


शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए विटामिन सी बहुत जरूरी माना जाता है. विटामिन सी का इस्तेमाल करने से यह शरीर के वायरस से तेजी से लडऩे में सक्षम हो पाता है. बलगम वाली खांसी में विटामिन सी युक्त फल जैसे की संतरा खा सकते हैं. संतरा खाते वक्त ध्यान रहे कि यह ठंडा न हो.

अदरक की चाय


एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर अदरक की चाय पीना हर किसी को बहुत पसंद होता है. दिन में 2 बार अदरक की चाय पीने से गले को आराम मिल सकता है और बलगम वाली खांसी खत्म हो सकती है.

भाप


भाप को देसी इलाज माना जाता है. नियमित तौर पर भाप लेने से चेस्ट में जमा हुए म्यूकस टूट जाते हैं. जिन लोगों को बलगम वाली खांसी होती है उन्हें दिन में कम से कम 5 मिनट तक भाप लेने की सलाह दी जाती है.

 

जानिए तुलसी के पत्तों से होने वाले 5 आश्चर्यजनक फायदे

जानिए तुलसी के पत्तों से होने वाले 5 आश्चर्यजनक फायदे

तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल केवल पूजन सामग्री के तौर पर ही नहीं किया जाता। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्तों में आश्चर्यजनक गुण होते है, जो सेहत की दृष्टि से बेहद फायदेमंद होते है। आइए, जानते हैं उन्हीं के बारे में -


1. तुलसी के पत्तों में एंटी ऑक्सीडेंट होते है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।

 

2. यदि आपको सर्दी व फिर हल्का बुखार हो गया हो तो आप मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर काढ़ा बना ले और फिर इसे पी ले। आप चाहें तो इस घोल को सुखाकर इसकी गोलियां बनाकर भी खा सकते हैं। इससे आपको सर्दी व हल्के बुखार में फायदा होगा।

 

3. जिन लोगों को सांस की दुर्गंध की समस्या होती है उन्हें रोजाना सुबह उठकर तुलसी के कुछ पत्तों को मुंह में रखना चाहिए, ऐसा करने से सांस की दुर्गंध धीरे-धीरे कम होने लगेगी।

 

4. यदि आपको कहीं चोट लग जाए तो आप तुलसी के पत्तों को फिटकरी के साथ मिलाकर, अपने घाव पर लगा सकते हैं, ऐसा करने से चोट व घाव जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।

 

5. यदि आपको दस्त हो गए हैं तो तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाएं और पीस लें। अब इस मिश्रण को दिनभर में 3-4 बार चाटते रहें। ऐसा करने से आपको दस्त बंद होने में फायदा मिलेगा।


 

कोरोना बनाम कैंसर देखभाल: आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब बालको मेडिकल सेंटर के डॉ द्वारा

कोरोना बनाम कैंसर देखभाल: आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के जवाब बालको मेडिकल सेंटर के डॉ द्वारा

रायपुर,दुनिया भर में कोरोनवायरस के संक्रमण के कारण बढ़ता हुआ लॉकडाउन लोगों की असुविधा का कारण बनता जा रहा है । कुछ स्वास्थ्यप्रद कमजोर लोगों के मन में कुछ वास्तविक संदेह हो सकते हैं, खासकर कैंसर के मरीजों में , कैंसर सरवाइवर और उनके चाहने वाले को । नया रायपुर के एक प्रमुख कैंसर अस्पताल बालको मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों ने कोरोना महामारी के समय कैंसर से संबंधित आम दुविधा को दूर किया।


1. 'इम्यूनोकोम्प्रोमाइज़' होने का क्या मतलब है?
बालको मेडिकल सेंटर के सी एम् एस और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ। जयेश शर्मा ने विस्तृत रूप से बताया कि इम्यूनोकोम्प्रोमाइज़ वे व्यक्ति हैं जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर, अधिक बिगड़ा हुआ या औसत स्वस्थ वयस्क की तुलना में कम मजबूत माना जाता है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों को संक्रमण होने का अधिक खतरा होता है, जिसमें वायरल संक्रमण जैसे कोविड -19 शामिल हैं। कैंसर, मधुमेह, या हृदय रोग, अधिक उम्र, या धूम्रपान की आदतें जैसे स्वास्थ्य की स्थिति भी कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली में योगदान कर सकती हैं। कैंसर रोगियों के कैंसर के प्रकार, उनके द्वारा प्राप्त उपचार के प्रकार, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और उनकी आयु के आधार पर इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड होने का अधिक खतरा होता है। सक्रिय, चल रहे कैंसर उपचार के दौरान आमतौर पर इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड होने का जोखिम सबसे अधिक होता है। कम श्वेत रक्त कोशिका की गिनती या रक्त में इम्युनोग्लोबुलिन के निम्न स्तर व्यक्ति के इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड अवस्था का संकेत देते हैं।

 

2. क्या कोविड -19 से स्वास्थ्य-संबंधी जटिलताओं के लिए कैंसर का इतिहास मेरे जोखिम को बढ़ाता है?
डॉ। जयेश ने बताया कि कैंसर रोगियों और कैंसर से ठीक होने वाले लोगों को कोरोनवायरस संक्रमण से होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं का अधिक खतरा है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि ऐसे लोग अकसर इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड अवस्था में पाएं जाते हैं। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कैंसर के इतिहास वाले मरीजों में गंभीर जटिलताओं की अधिक घटना होती है, जिसमें अन्य रोगियों की तुलना में जिनमें कैंसर नहीं था,आई.सी.यू. देखभाल या वेंटिलेशन की जरूरत या यहां तक कि मृत्यु हो सकती है । हालांकि, अध्ययन किए गए रोगियों की कम संख्या के कारण, यह आवश्यक रूप से कैंसर के सभी रोगियों के लिए सामान्य कृत नहीं हो सकता है। अपने व्यक्तिगत जोखिम के मूल्यांकन के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

 

3. क्या अतीत में कीमोथेरेपी या विकिरण प्राप्त होने से कोविड -19 संक्रमण या बीमारी का अधिक गंभीर होने का खतरा है?
अब तक, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि कोई भी कैंसर उपचार कोरोनोवायरस से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ाता है, जो वायरस के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति से कम या ज्यादा होता है। कुछ सबूत बताते हैं कि कैंसर के मरीज़ कोविड -19 संक्रमण का अधिक गंभीर लक्षण अनुभव कर सकते हैं, सबसे अधिक संभावना है कि कैंसर और इसके उपचार से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है, जिससे अंततः संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। वे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार हॉस्पिटल विजिट के कारण ज्यादा एक्सपोज्ड हो जाते है, जिससे संक्रमण होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

 

4. यदि कोई कैंसर रोगी या कैंसर बीमारी से ठीक होने वाले कुछ शुरुआती लक्षणों जैसे बुखार, खांसी या सांस लेने में तकलीफ महसूस करता है, तो क्या उन्हें अपने ऑन्कोलॉजिस्ट या अन्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए?
यदि सक्रिय कैंसर उपचार चल रहा है तो रोगियों को तुरंत अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से फोन पर संपर्क करना चाहिए और उनकी सलाह का पालन करना चाहिए। यदि सक्रिय उपचार पर नहीं है, तो कैंसर सरवाइवर लोगों को अपने नजदीकी प्राथमिक देखभाल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए या फोन पर ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह करना चाहिए और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी देनी चाहिए और सभी लक्षणों को बताना चाहिए, जो तब रोगी का आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन करेंगे ।

 

5. यदि कोई व्यक्ति कैंसर चिकित्सा शुरू करने वाला है, तो क्या उन्हें कोविड -19 के कारण उपचार स्थगित करने पर विचार करना चाहिए?
ध्यान रखें कि कोविड -19 के साथ संक्रमण के जोखिम के बारे में चिंताओं के कारण कैंसर के उपचार को स्थगित करना या छोड़ देना एक गंभीर निर्णय है और कैंसर रोगियों को अपने उपचार करने वाले ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ इसकी चर्चा करनी चाहिए। कैंसर उपचार के संभावित जोखिम एवं लाभ बनाम संक्रमण के जोखिम के बारे में सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करें और एक सूचित निर्णय लें।

 

6. मैं एक कैंसर सरवाइवर हूं जो संभावित पुनरावृत्ति का पता लगाने के लिए नियमित स्कैन / इमेजिंग / परीक्षण के लिए जाता है। क्या मुझे यह परीक्षण करवाते रहना चाहिए?
इस महामारी के दौरान, किसी भी अस्पताल का दौरा स्थगित किया जा सकता है यदि रोगी को जोखिम न हो । कैंसर की पुनरावृत्ति का पता लगाने के लिए नियमित स्कैन आमतौर पर 3 से 6 महीने की सीमा के भीतर होता है, इसलिए मूल्यांकन के बीच समय का विस्तार अभी भी अनुशंसित अवधि के भीतर हो सकता है।

 

यदि आपमें एक नया लक्षण विकसित होता हैं जो पुनरावृत्ति का संकेत दे रहा है, तो देरी के बिना टेलीफोन या वीडियोकांफ्रेंसिंग द्वारा अपनी कैंसर देखभाल टीम से संपर्क करें। कैंसर रोगियों के लाभ के लिए, बालको मेडिकल सेंटर ने टेलीकंसल्टेशन सुविधा उपलब्ध करायी है और मरीज टेलीफोनिक और वीडियो परामर्श के लिए 828282 3333 पर अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। 

CoronaVirus : रोज के इस्तेमाल में आने वाली इन चीजों को न करें नजरअंदाज, करें सेनिटाइज

CoronaVirus : रोज के इस्तेमाल में आने वाली इन चीजों को न करें नजरअंदाज, करें सेनिटाइज

इस वक्त कोरोना वायरस से पूरा देश परेशान है। हर जगह सिर्फ कोविड-19 के बारे में ही बात हो रही है और इससे कैसे बचा जा सकता है, किन बातों का ध्यान रखना है, ये तमाम जानकारियां हम तक पहुंच रही हैं। कोरोना से बचना है तो इसका एकमात्र तरीका है और वो है सिर्फ सफाई। जी हां, आप खुद भी सफाई का पूरा ध्यान रखें, साथ ही घर की सफाई का भी पूरा ध्यान रखें।
कोरोना से बचने का यही एक तरीका है कि बार-बार हाथ धोएं और पूरी तरह से जागरूक रहें। लेकिन घर की सफाई में ऐसी कई चीजें हैं, जो कहीं-न-कहीं हमसे साफ होने से रह ही जाती हैं और इन चीजों का रोजमर्रा में ज्यादा इस्तेमाल भी हम करते हैं, जैसे मोबाइल, टीवी रिमोट, चश्मा, घड़ी, रूमाल, अंगूठी, पेन, टूथब्रश, स्लीपर, कड़ा, पानी की बॉटल, बालों में लगाने वाले क्लिप्स, रबर बैंड, कंघी, पर्स, लाइटर आदि।

इन सभी चीजों का इस्तेमाल तो हम रोज करते हैं लेकिन इन्हें साफ व सैनिटाइज करना भूल जाते हैं। लेकिन यह लापरवाही आज के माहौल को देखते हुए छोटी नहीं है इसलिए सफाई में इन सभी रोजमर्रा की चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी है।


तो आइए जानते हैं घर की साफ-सफाई के साथ-साथ आप इन सभी चीजों को कैसे साफ रख सकते हैं?

घर की सफाई-

घर की सफाई में आप 1 बाल्टी में फिनाइल डालकर पूरे घर की सफाई कर सकते हैं। अपने पूरे घर को पोंछें। इसके बाद आप एक अलग कपड़ा लेकर फ्रिज का हैंडल, गेट व डाइनिंग टेबल को साफ करें। इस बात का भी ध्यान रहे कि जब आप सिंक पर बर्तन धोते हैं, उसी समय आप अपने नल को भी साबुन से साफ कर सकती हैं, क्योंकि हाथ धोने के बाद आप नल को बंद करते हैं। अगर नल साफ नहीं रहेगा तो बैक्टीरिया वापस आपके हाथों में लग सकते हैं इसलिए बर्तन धोने के साथ ही हर बार नल को भी साफ करें।


मोबाइल को करें सैनिटाइज

आप अपने फोन का उपयोग नियमित रूप से करते हैं, चाहे कॉल का जवाब देना हो, ऑनलाइन खरीदारी की सूची देखनी हो या लेटेस्ट न्यूज पढ़नी हो या कोई वीडियो देखना हो। वहीं रिसर्च में पाया गया है कि कोरोना वायरस कुछ सतहों पर जीवित रहने में सक्षम हो सकता है। आपके प्रिय मोबाइल सहित कोई भी बैक्टीरिया फोन से सीधे आपकी स्कीन पर जा सकता है और अपनी जगह बना सकता है। बार-बार हाथ धोने पर आप वायरस से तो बच सकते हैं लेकिन वापस अपना मोबाइल फोन उठाने पर वायरस को आपके हाथों में जगह मिल जाती है। इसके लिए हमारे फोन का साफ होना बेहद जरूरी है।
मोबाइल फोन साफ करने के लिए आप क्लोरॉक्स शीट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बात Apple ने अपनी वेबसाइट पर कही है। इसके लिए आप क्लोरॉक्स शीट्स से सुरक्षित रूप से अपने मोबाइल फोन को साफ कर सकते हैं।

इसके साथ ही सैमसंग ने भी अपनी वेबसाइट में कहा है कि अल्कोहल आधारित सॉल्यूशन (70%) का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि सीधे सॉल्यूशन को अपने मोबाइल में न लगाएं। सबसे पहले इसे आप माइक्रोफाइबर कपड़े में लें और बिलकुल हल्के हाथों से आप इसे क्लीन करें। चाहो तो आप सिर्फ माइक्रोफाइबर कपड़े के माध्यम से ही अपने फोन को साफ कर सकते हैं।


चश्मा करें सैनिटाइज

चश्मे को भी साफ करना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धो लें। हैंडवॉश या किसी लिक्विड सोप की 1-1 बूंद दोनों लैंस पर डालें।

अब अपने साफ हाथों से पूरे लैंस व किनार और कोनों को साफ धीमे से बहते हुए पानी में चश्मे को धो लें। अब आखिर में जिस तरह के कपड़े का टुकड़ा आपने सभी ऑप्टिकल्स की दुकानों पर देखा होगा या जो आपके नंबर वाले चश्मे के साथ बॉक्स में आया होगा, उससे अपने गीले चश्मे को अच्छी तरह से पोंछ लें। तो लीजिए इन आसान प्रक्रिया को अपनाकर आपने अपने चश्मे को भी साफ कर लिया है। चलिए इसके साथ आगे बढ़ते हैं।


अंगूठी, पेन

अंगूठी और पेन को भी नियमित साफ करें। अंगूठी को साफ करने के लिए आप लिक्विड सोप लें। अब इससे अच्छी तरह से अपनी अंगूठी को साफ करें। आप या आपके बच्चे पेन का तो इस्तेमाल करते ही होंगे, इसके लिए आपको इसकी सफाई करना भी जरूरी है। इसके लिए आप अपने पेन को हैंडवॉश से साफ कर सकती हैं। इसके बाद इसे पानी से धो लें। इसे भी आपको नियमित साफ करना है।

 

पानी की बॉटल


गर्मी का मौसम आ चुका है। हम में से अधिकतर लोग होंगे जिन्होंने ठंडा पानी पीना भी शुरू कर दिया होगा। लेकिन फ्रिज में रखी बॉटल का साफ होना भी जरूरी है। आप इसके लिए सारी बॉटल को साबुन के घोल से धो लें। साथ ही पूरी तरह से साफ करने के लिए बॉटल में सफेद सिरका करीब 2 ढक्कन बॉटल में डालें। ढक्कन को बंद करने के बाद पानी की बॉटल को अच्छी तरह से हिलाएं। बॉटल को ब्रश से साफ करें। इसके बाद गर्म पानी से बॉटल को धो लें।


कंघी

कंघी जिसका इस्तेमाल हम सुबह-शाम करते है, लेकिन क्या नियमित इस्तेमाल की जाने वाली कंघी को आप साफ करते हैं? कंघी को साफ करने के लिए आप डिटर्जेंट का घोल तैयार करें और इसमें कंघी को डाल दें। अब ब्रश के माध्यम से इसे अच्छी तरह से साफ करें, फिर साफ पानी से इसे धो लें।

रिमोट

रिमोट को साफ करने के लिए आप सर्फ के घोल को एक कपड़े में लें। अब इससे रिमोट को साफ करें। रिमोट बटन साफ करने के लिए आप टूथ ब्रश का इस्तेमाल कर सकती हैं। ध्यान रहे, आपको डाइरेक्ट घोल को रिमोट पर नहीं डालना है। सिर्फ हल्का-सा कपड़े में लेकर साफ करना है।

लैपटॉप

इस वक्त अधिकतर लोग 'वर्क फ्रॉम होम' हैं और लैपटॉप का इस्तेमाल भी नियमित ही किया जा रहा है। इसी के साथ लैपटॉप की सफाई की भी जरूरत है ताकि संक्रमण से दूर रहा जा सके। लैपटॉप साफ करने के लिए माइक्रो फाइबर कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बालों में लगाने वाले क्लिप्स व रबर बैंड

बालों में लगाने वाले क्लिप्स, रबर बैंड। जी हां, भले ही ये बहुत छोटी चीजें हैं लेकिन इनका साफ होना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इनका इस्तेमाल भी आप नियमित करती हैं। इसको आप साबुन के घोल से साफ कर इनका इस्तेमाल कर सकती हैं।


 

इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ माइग्रेन में असरदार है अंगूर का सेवन, होते हैं ये 7 बेहतरीन फायदे

इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ माइग्रेन में असरदार है अंगूर का सेवन, होते हैं ये 7 बेहतरीन फायदे

अंगूर तो आप सभी लोग खाते होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि अंगूर खाने से आपको कितना लाभ होता है। इतना ही नहीं, फलों के रूप में छोटा सा दिखने वाला ये फल माइग्रेन जैसे गंभीर सिरदर्द की स्थिति में भी आपके लोए काफी फायदेमंद हो सकता है।

गर्मियों में यह फल सबसे ज्यादा बिकता है और वो भी बेहद सस्ते दाम में। नीचे आपको अंगूर के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में बताया जा रहा है, जो आपको सेहतमंद रखने के साथ-साथ कई प्रकार के रोगों से भी बचाए रखने का काम करता है।

इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए खाएं अंगूर

रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करके आप विभिन्न प्रकार के रोगों से बचे रह सकते हैं। एक मजबूत इम्यून सिस्टम होने के कारण आपको किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी भी आसानी से नहीं होगी। दरअसल अंगूर में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है जो कि इम्यूनिटी बढ़ाने का गुण भी रखता है। इसलिए एक स्ट्रांग इम्यून सिस्टम के लिए अपनी डायट में अंगूर को आज से ही शामिल कर सकते हैं।

माइग्रेन में असरदार है अंगूर का सेवन

माइग्रेन सिरदर्द की एक ऐसी स्थिति है जिसमें 2 से 3 दिन तक सिर दर्द बना रहता है और कभी-कभी यह सिर दर्द बर्दाश्त से बाहर भी हो जाता है और लोगों को ड्रिप तक का भी सहारा लेना पड़ता है। जबकि अंगूर के सेवन से माइग्रेन की स्थिति में काफी हद तक राहत पाई जा सकती है क्योंकि इसमें सूदिंग का गुण पाया जाता है जो सिर दर्द की स्थिति को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। अगर आप भी माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं तो अपनी डायट में अंगूर को जरूर शामिल करें।

आंखों के लिए फायदेमंद हैं अंगूर

यह तो हम सभी जानते हैं कि आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए विटामिन ए का सेवन करना बहुत जरूरी है। हालांकि विटामिन ए किन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, हमें इसके बारे में भी जरूर जाना चाहिए। अगर बात की जाए अंगूर की तो इसमें विटामिन ए की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो आंखों के लिए लाभदायक हो सकती है। इसलिए आंखों के स्वास्थ्य के लिए आप भी अपनी डायट में अंगूर को शामिल कर सकते हैं।

किडनी रोग का नहीं होगा खतरा

किसी भी इंसान के शरीर में किडनी उसके शरीर की बहुत जरूरी क्रिया का संचालन करती है। हालांकि इसे स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए और खासकर एल्कोहल जैसे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। किसी स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप अंगूर का भी सहारा ले सकते हैं, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी क्रिया होने के कारण किडनी से जुड़ी होने वाली कई प्रकार की बीमारियों से बचे रहने में मदद मिल सकती है। इसलिए किडनी को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए आप भी अपनी डायट में अंगूर को जरूर शामिल करें।

वायरल संक्रमण से सुरक्षा

वायरल संक्रमण से आपको कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। खासकर इन दिनों पूरे विश्व में महामारी के रूप में फैल चुका कोविड-19 भी एक संक्रामक रोग है जो एक लोग से दूसरे लोग तक पहुंचता है। दूसरी ओर वायरल संक्रमण के जरिए आपको खांसी सर्दी जुकाम जैसी जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। वहीं अंगूर का सेवन आपको वायरल संक्रमण से बचाने में मदद कर सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार अंगूर में एंटीवायरल गुण पाया जाता है जिसकी वजह से यह आपको विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगों से बचाए रखने में सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो जाएगा कम

अंगूर खाने के फायदे महिलाओं के लिए भी काफी लाभदायक हो सकते हैं क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण एक एंटी कैंसर एजेंट की तरह कार्य करते हैं। यही कारण है कि अगर महिलाओं के द्वारा भी अंगूर का सेवन किया जा रहा है तो उनमें ब्रेस्ट कैंसर के साथ-साथ पेट के कैंसर के जोखिम से भी बचने में मदद मिल सकती है।

कोलेस्ट्रोल के संतुलन में मिलती है मदद

कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में अगर असंतुलन हो जाए तो यह हृदय रोग का कारण बन सकता है। इसलिए आपको अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में किसी भी प्रकार का असंतुलन ना होने पाए। वहीं, अंगूर का सेवन आपको कोलेस्ट्रॉल के संतुलन में काफी मदद प्रदान कर सकता है क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की वृद्धि हो सकती है जो आपको हृदय रोगों से बचाए रखने की भी बहुत काम आ सकता है।

 

नहाने के टॉवल में भी होते हैं कई तरह के वायरस, ऐसे करें सफाई

नहाने के टॉवल में भी होते हैं कई तरह के वायरस, ऐसे करें सफाई

टॉवल एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल सभी लोग नहाने के समय करते हैं. दिन की शुरुआत में नहाने से लेकर रात को सोते समय मुंह धोने तक लोग दिन में कई बार टॉवल का इस्तेमाल करते हैं. आपको बता दें कि हर बार इसको यूज करने के साथ ही टॉवल के सरफेस पर कई प्रकार के कीटाणु आ जाते हैं. क्या आपको पता है कि एक गंदा टॉवल यूज करने से आपके शरीर में एकसाथ कई प्रकार के खतरनाक जर्म्स प्रवेश कर सकते हैं. टॉवल को रोज धोना-सुखाना मुश्किल होता है तो ऐसे में इसे साफ करना और जर्म्स फ्री रखने के टिप्स के बारे में जरूर जानना चाहिए. आइए आपको बताते हैं कि कैसे आप कुछ स्टेप्स को फॉलो करके टॉवल को क्लीन और हाइजीनिक बना सकते हैं.

नियमित रूप से करें साफ

लोग हर रोज नियमित रूप से टॉवल का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए जरूरी हो जाता है कि इसकी सफाई भी नियमित रूप से ही की जाए. ध्यान रखें कि टॉवल को हर 5 से 7 बार यूज करने के बाद अच्छे से धो दिया जाए. इसको जर्म्स फ्री बनाने के लिए इसे गर्म पानी में धोएं. टॉवल को माइक्रोब्स फ्री बनाने के लिए ऑक्सीजन ब्लीच वाले किसी भी डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. सादे पानी से हर रोज धोने की कोशिश करें.

खुली हवा और धूप में सुखाएं

ज्यादातर लोग टॉवल का इस्तेमाल करने के बाद उसको बेड, चेयर या बाथरूम में ही छोड़ देते हैं जिससे उसमें अधिक मात्रा में जर्म्स और बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं. टॉवल को क्लीन बनाए रखने के लिए इसको धुप में जरूर सुखाएं या किसी ऐसे स्थान पर डालें जहां हवा आ रही हो. जिन जगहों पर वेंटिलेशन रहता है वहां इसको सुखाने से बैक्टीरिया और सीलन की बदबू पैदा नहीं होगी.

विनेगर मिलाकर धोएं

टॉवल को अच्छे से साफ करने के लिए धोने वाले पानी में डिटर्जेंट के साथ साथ विनेगर भी मिला सकते हैं. दरअसल हार्ड वॉटर के कुछ रिमेंस जो टॉवल के रेशों में जम जाते हैं वह विनेगर की मदद से आसानी से साफ हो जाते हैं. इस तरह आपका टॉवल पूरी तरह क्लीन हो जाएगा.

ज्यादा पुरानी टॉवल का न करें इस्तेमाल

एक टॉवल को लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से उसके धागे कमजोर पड़ जाते हैं जिससे वह अच्छी तरह आपकी बॉडी को क्लीन नहीं कर पाता है. जैसे ही आपको लगे कि आपका टॉवल हल्का हो गया है या काफी पुराना हो गया है तो उसे तुरंत बदल दें.

अपना टॉवल शेयर न करें

माइक्रोब्स और जर्म्स से बचने के लिए टॉवल को साफ रखना तो जरूरी होता ही है साथ ही इसे घर के किसी और सदस्य के साथ शेयर नहीं करना चाहिए. कुछ घरों में कई लोग एक ही टॉवल को शेयर करते हैं. ऐसा करने से उनको कई प्रकार के इन्फेक्शन और स्किन एलर्जी हो सकती है. इसलिए हमेशा अपने टॉवल को किसी भी फैमिली मेंबर या पार्टनर के साथ शेयर बिल्कुल न करें.

 
लॉकडाउन के इस दौर में खुद को रखें स्ट्रेस फ्री, फॉलो करें ये 5 टिप्स

लॉकडाउन के इस दौर में खुद को रखें स्ट्रेस फ्री, फॉलो करें ये 5 टिप्स

कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने के लिए दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन जारी है. ऐसे में लोग घरों में बंद हैं और स्ट्रेस फील कर रहे हैं. जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं उनके शरीर पर भी तनाव का असर साफ दिखाई दे रहा है. हालांकि कोविड 19 से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन बहुत जरूरी है और साथ ही साथ स्ट्रेस को दूर करना भी बहुत जरूरी है. आइए आपको बताते हैं ऐसे पांच टिप्स के बारे में जिनसे आप घर में बैठकर ही स्ट्रेस व तनाव से दूर रह सकते हैं.


नियमित रूप से करें एक्सरसाइज


घरों में बंद हो जाने के बाद भी लोगों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करते रहना चाहिए. लॉकडाउन के चलते सभी पार्लर व योग सेंटर बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा बाहर जाकर जॉगिंग और वॉकिंग करना खतरे से खाली नहीं है. ऐसे में लोगों को घर पर ही कुछ हल्की एक्सरसाइज की मदद लेनी चाहिए. एक्सरसाइज करने से स्ट्रेस व तनाव से आसानी से दूर रहा जा सकता है.


हेल्दी डाइट का करें सेवन


स्ट्रेस को दूर करने के लिए हेल्दी डाइट का सेवन भी बहुत जरूरी है. खानपान का असर शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी पड़ता है. ऐसे में हेल्दी डाइट लेने से तनाव को दूर किया जा सकता है. अपनी डाइट में ऐसी चीजों का इस्तेमाल करें जिनसे आपका शरीर भी स्वस्थ रहे और दिमाग भी.

काम के बीच में जरूर लें ब्रेक


लॉकडाउन में जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं उनके लिए समय-समय पर ब्रेक लेना बेहद जरूरी होता है. काम के बीच में स्ट्रेचिंग करें, अच्छा खाना खाएं, बातचीत करें, कुछ अच्छा पढ़ें. ऐसा करने से शरीर तो फ्रेश रहता ही है साथ ही दिमाग भी रिफ्रेश फील करता है. काम के स्ट्रेस को दूर करने के लिए ब्रेक जरूर लें.


लोगों से बनाएं रखें कनेक्शन


लॉकडाउन में घर से बाहर निकलना भले ही बंद हो गया हो लेकिन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की मदद से आप लोगों से कनेक्शन बनाकर रख सकते हैं. आप अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से कॉल, मैसेज और वीडियो चैट के जरिए जुड़े रह सकते हैं. इसके अलावा आप घर के दूसरे सदस्यों के साथ घर में ही इंडोर गेम्स का मजा ले सकते हैं.


करें आराम और लें भरपूर नींद


स्ट्रेस को दूर करने के लिए आराम करना भी बहुत जरूरी होता है. शरीर को आराम तभी मिलता है जब नींद पूरी होती है. लॉकडाउन में घर से बाहर न निकलें. घर पर ही आराम करें और भरपूर नींद लें.