BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |
रक्त में इंसुलिन बढ़ाने का काम करता है पपीता, इन लोगों को करना चाहिए नियमित सेवन

रक्त में इंसुलिन बढ़ाने का काम करता है पपीता, इन लोगों को करना चाहिए नियमित सेवन

हम सभी जानते हैं कि पपीता हम सभी के लिए बहुत लाभकारी होता है। लेकिन कम ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि शुगर के रोगियों के लिए पपीता एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम करता है। यदि नियमित रूप से और सीमित मात्रा में हर दिन डायबिटीज के पेशंट पपीता खाएं तो उन्हें कभी भी शुगर बढऩे की शिकायत नहीं होगी...


शुगर को नियंत्रित करने का आसान तरीका
मधुमेह या डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो अब हर उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रही है। एक समय था जब आमतौर पर 50 की उम्र के बाद ही यह बीमारी हुआ करती थी। लेकिन अब तो टीनेजर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हम नहीं चाहते कि आपको कोई ऐसा सुझाव दें, जिसे जीवन में उतारना संभव ना हो इसलिए एक आसान तरीका आपके लिए लेकर आए हैं...

जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती
-मधुमेह या डायबिटीज की समस्या अगर एक बार किसी को हो जाती है तो फिर जीवनभर उस व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती। यानी यह एक लाइलाज बीमारी है। आप इसे सिर्फ कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने खान-पान की आदतों और जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करने की जरूरत होती है।

अपनी डेली डायट में इसे शामिल करें
-डायबिटीज या शुगर के मरीजों को अपनी डेली डायट में पके हुए पपीते का सेवन करना चाहिए। आप इसकी सलाद बनाकर खा सकते हैं। नाश्ते और लंच के बीच के समय में या फिर लंच और डिनर के बीच के समय में इसे खाना सबसे अधिक उपयोगी होता है।

कच्चा पपीता भी है लाभकारी
- जितना लाभकारी पका हुआ पपीता होता है, उतना ही फायदेमंद कच्चा पपीता भी होता है। इस कच्चे पपीते को आप सब्जी और अचार के रूप में उपयोग कर सकते हैं। शुगर के मरीजों के लिए पपीता खाना बिल्कुल किसी औषधि के सेवन जैसा होता है।

पपीते में होते हैं ढेरों गुण
-पपीता बहुत गुणकारी फल है। इसमें विटमिन-ए और विटमिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। विटमिन-ए शुगर का असर हमारी आंखों पर नहीं होने देता है और आंखों की रोशनी को सही बनाए रखने का काम करता है।
-वहीं, विटमिन-सी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने और बढ़ाने का काम करता है। दरअसल, शुगर के बढ़े हुए स्तर के कारण हमारे शरीर में इम्यून सेल्स की कमी होने लगती है। पपीते में पाया जानेवाला विटमिन-सी इम्यून सेल्स की संख्या बढ़ाने में सहायक होता है।

मैग्नीशियम और पोटैशियम
-पपीते में मैग्नीशियम और पोटैशियम बहुत ही संतुलित मात्रा में पाए जाते हैं। ये दोनों ही तत्व हमारे शरीर की हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। मैग्नीशियम हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने में सहायक होता है। साथ ही डेड स्किन सेल्स को हटाने, डैमेज बॉडी सेल्स को रिपेयर करने और ब्लड के फ्लो को बनाए रखने में भी इसका सहयोग होता है।
-पोटैशियम भी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी मिनरल है। यह हमारे शरीर में फ्लूइड को संतुलित करने में सहायक है। हमारी मसल्स को ठीक तरह से काम करने में मदद करता है। साथ ही पोटैशियम हमारे शरीर में नर्व्स के सिग्नल्स भेजने में मदद करता है। यह हमें किडनी स्टोन, हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों से भी सुरक्षा देता है।

इंसुलिन की मात्रा बढ़ाता है
-विटमिन और मिनरल्स की संतुलित मात्रा के कारण पपीता प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर में बढ़े हुए शुगर के स्तर को कम करता है। जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सीमित हो जाती है तो इंसुलिन का स्तर भी ठीक हो जाता है। इससे डायबिटीज के रोगियों को शुगर बढऩे के कारण होनेवाली समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

इस बात का रखें ध्यान
-पपीता गुणकारी होता है, इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप एक बार में बहुत अधिक मात्रा में पपीता खा लें। आप हर दिन एक छोटे पपीते का सेवन कर सकते हैं।
-ध्यान रखें कि पपीते को चाकू से काटने या छीलने के बाद 6 घंटे के अंदर ही खा लेना चाहिए। इस कटे हुए पपीते को फ्रिज में स्टोर ना करें।

 

जानिए कैसे पहचानें कोरोना और आम सर्दी-जुकाम के लक्षण को ?

जानिए कैसे पहचानें कोरोना और आम सर्दी-जुकाम के लक्षण को ?

कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में कोरोना को लेकर एक डर का माहौल बना हुआ है, वहीं इस संक्रमण से बचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ इस वायरस से निपटने के लिए सुझाव भी दे रहे हैं। कोविड-19 का डर लोगों के मन में इतना बढ़ चुका है कि यदि साधारण सर्दी-खांसी भी यदि किसी व्यक्ति को होती है, तो उसका सबसे पहले ध्यान कोरोना पर ही जाता है जिस कारण व्यक्ति मानसिक रूप से खुद को कमजोर भी महसूस करने लगता है।


लेकिन फ्लू, सर्दी-जुकाम और कोरोना में अंतर को समझना जरूरी है।

आइए जानते हैं कैसे पहचानें कोरोना और आम सर्दी-जुकाम के लक्षण को?

अगर सूखी खांसी और छींक आती है तो ये एक तरह से वायु प्रदुषण के लक्षण हैं।

खांसी, बलगम और छींक आए तथा नाक बहने लगे तो ये सामान्य जुकाम के लक्षण हैं।

खांसी, बलगम, छींक और बहती नाक व इसके साथ शरीर में दर्द बना रहना, कमजोरी लगना व हल्का बुखार हो तो ये फ्लू के लक्षण हैं।
सूखी खांसी, छींक, शरीर में दर्द, कमजोरी व तेज बुखार इसके साथ सांस लेने में कठिनाई हो तो यह कोरोनावायरस हो सकता है।

वाकई समय बहुत कठिनाइयों वाला है, लेकिन इस वक्त सकारात्मक रहना भी जरूरी है। मुश्किल का समय है लेकिन सतर्कता और जागरूकता के साथ यदि आगे कदम बढ़ाया जाए तो कोरोना को हराया जा सकता है।

 

रायपुर में बढ़ रहा है साइकिलिंग का क्रेज, बढ़ा रहे है रोग प्रतिरोधक क्षमता

रायपुर में बढ़ रहा है साइकिलिंग का क्रेज, बढ़ा रहे है रोग प्रतिरोधक क्षमता

रायपुर, साइकिलिंग युवाओं के ही नही, बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य को भी बेहतर रखती है । साइकिलिंग रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ साथ सेहत और मानसिक तनाव को कम करने के लिए एक अच्छा उपाय भी हो सकता है।

जि़ला चिकित्सालय, पंडरी के मानसिक स्वास्थ्य इकाई में संचालित स्पर्श क्लीनिक के योग गुरु राधेश्याम साहू ने कहा कोरोना के संक्रमण से खुद को बचाने के लिए जरूरी है व्यक्ति के अपने अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत होना। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सुबह के समय खुले माहौल में हल्के-फुल्के व्यायम,के साथ साथ साइकिलिंग करना सबसे अच्छा व्यायाम है। रोजाना साइकिलिंग कर शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने का प्रयास करें।

रोजाना 30 से 40 मिनट की साइकिलिंग शरीर को फिट बनाकर तन और मन दोनों की परेशानियों से छुटकारा दिला सकती है । साइकिलिंग से कार्टिसोल का लेवल बढ़ता है । इसे हैप्पीनेस सोल कहा जाता है जो शरीर की चर्बी कम करने में मदद करता है । रोजाना 30से 40 मिनट साइकिलिंग करने से व्यक्ति 1 महीने में लगभग 2 किलो वजन कम कर सकता हैं ।

योग गुरु साहू ने कहा: आपको कोई भी बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह के उपरांत ही साइकिलिंग करें । साथ ही साइकिलिंग करते समय मास्क का प्रयोग अवश्य करें । साइकिलिंग करते समय झुंड में साइकिल न चलाएं सुरक्षित दूरी पर भी चले ।'


पॉच वर्षों से नियमित साइकिलिंग कर रहे डॉक्टर आनंद वर्मा कहते है कोरोना महामारी से जंग लडऩे में साइकिलिंग एक कारगर हथियार की तरह काम कर सकता है। इससे किसी भी प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता और यह फिटनेस की दृष्टि से भी उपयोगी है। पर्यावरण को कार्बन मुक्त करने में सहायता मिलती है।
पुलिस उप अधीक्षक पद से वर्ष 2006 सेवानिवृत्त हुए 75 वर्षीय खलीक हुसैन कहते हैं:क्वक्वजब मै सेवानिवृत्त हुआ 3 वर्ष तक तो जीवन सामान्य रहा । उसके बाद मेरा वेट लॉस (वजन कम) होना शुरू हो गया, घुटनों के दर्द की समस्या रहने लगी । मैंने जांच कराई तो पता चला मुझे मधुमेह की समस्या है । उसके बाद से प्रतिदिन 4 से 5 किलोमीटर साइकिलिंग करता हूं । मॉर्निंग वॉक भी करता हूं उसके बाद से जब भी मधुमेह का परीक्षण कराया वह सामान्य निकलती है । साइकिलिंग से शरीर भी स्वस्थ रहता है ।घुटनों के दर्द की समस्या भी जाती रही ।'Ó

घुटनों के दर्द को कम करने में फायदेमंद
साइकिलिंग घुटनों के दर्द को कम करने में भी फायदेमंद होती है । एंजायटी और डिप्रेशन से मुक्ति मिलती है, हार्ट संबंधी रोगों को दूर करता है । 45 वर्ष के बाद साइकिलिंग बहुत फायदेमंद है। विशेषज्ञ के अनुसार घुटनों के दर्द से बचाने के लिए साइकिलिंग अच्छा व्यायम है। इसके अलावा नियमित रुप से व्यायाम करने से भी हड्डी और जोड़ों के दर्द से बचाव किया जा सकता है।

साइकिलिंग से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
साइकिलिंग करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। जब सुबह खुली हवा में साइकिलिंग करते हैं तो शरीर ठंड का सामना करता है । थोड़ी देर बाद शरीर गर्म होता है । साइकिलिंग करने से फिर अत्यधिक गर्म भी होता है ठंड और गर्म की यह प्रक्रिया शरीर के सेल्स को ताकत देती है । शरीर मौसमी बीमारियों के प्रति भी ज्यादा ताकतवर बनता हैं ।

साइकिलिंग का कैलोरी कनेक्शन
साइकिलिंग का सबसे बड़ा फायदा शरीर में कैलोरी बर्न करना और वजन कम करना माना जाता है । व्यक्ति हर रोज एक घंटा साइकिल चलाएगा 650 कैलोरी घटा सकता है यानी आप हर दिन एक घंटा साइकिल चलाकर 71 ग्राम वजन घटा सकते हैं रोजाना साइकिलिंग से रक्त संचार अच्छा होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है दरअसल साइकिल चलाने से रक्त संचार तेज होता है और जैसे त्वचा और उसका यानी सेल्स को ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक मिलते है ।
 

एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल  में TEVAR (थोरेसिक एन्डोवास्कुलर ओर्टिक रिपेयर) द्वारा छत्तीसगढ़ की 82 वर्ष बुजुर्ग महिला का सफल इलाज

एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में TEVAR (थोरेसिक एन्डोवास्कुलर ओर्टिक रिपेयर) द्वारा छत्तीसगढ़ की 82 वर्ष बुजुर्ग महिला का सफल इलाज

रायपुर, TEVAR,बृहद्धमनी (सबसे बड़ी धमनी) के ऊपरी भाग में धमनीविस्फार का इलाज करने की एक चिकित्सा प्रक्रिया है| धमनीविस्फार, बृहद्धमनी की सतह का एक नाज़ुक और उभरा हुआ हिस्सा हैजिसके फटने से व्यक्ति की मृत्यु तक होसकती है| एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, देश के चुनिंदा अस्पतालों में शुमार है, जहाँ ह्रदय से सम्बंधित जटिल प्रक्रियाएं भी सफलता पूर्वक किया जा रहा है I
एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पतालके कार्डियोलॉजी विभाग एवं उनके टीम द्वारा 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला, जो कि उच्च रक्तचाप से ग्रसित थी उसका टेवर जैसी दुर्लभ एवं जोखिम भरी प्रक्रिया से सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया| जब महिला को खासी में खून आने की तकलीफ के साथ एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में लाया गया तब डॉ. सुमन्त शेखरपाढ़ी (वरिष्ट सलाहकार- ह्रदयरोग) ने उन्हें आगे की जांच करवाने की सलाह दी | जांच के उपरान्त पता चला उनकी वक्ष महाधमनी फ़ैल गई थी और फेफड़े(ब्रोंकस) में जाकर फट रही थी (इस स्थिति में अवरोही वक्ष महाधमनी का अग्र भाग बाई ब्रोंकस की अवर साखा में प्रवेश करता है).


एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पतालकी कुशल कार्डियोलॉजी टीम ने उनकी उम्र और उच्च रक्तचाप की तकलीफ को ध्यान में रखते हुए पहले उन्हें स्थिर करने के लिए रक्त – आधान किया | उनके स्थिर होने के पश्चात डॉ. सुमंत शेखर पाढ़ी के द्वाराडॉ किंजल बक्शी, डॉ. नितिन कुमार राजपूत (ह्रदयशल्यचिकित्सक) और डॉ. अरुन अन्दपन (ह्रदयनिश्चेतनाविशेषज्ञ )के सहयोग से वक्ष महाधमनी और फिस्टुला (महाधमनी और बाएं फेफड़े के ब्रोंकस के बीच का असामान्य संबंध) को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की | इस प्रक्रिया के बाद मरीज को दोबारा स्थिर किया गया | रक्तस्राव की समस्या अब ख़त्म होचुकी थी और 4 दिनों तक निगरानी में रखने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई | अब वह अपनी सामान्य दिनचर्या में वापसलौट चुकी हैं|


डॉ. सुमन्त शेखरपाढ़ी और पूरी कार्डियोलॉजी टीम की ओर आभार व्यक्त करते हुए मरीज ने कहा उच्च रक्तचाप की तकलीफ और मेरी उम्र दोनों ही जोखिम को बढ़ा रहे थे| मेरा पूरा परिवार डरा हुआ था और मुझे भी समझ नहीआरहा था के आगे क्या होने वाला है,लेकिन डॉ. सुमन्त शेखरपाढ़ी और पूरी कार्डियोलॉजी टीम का मैं जितना शुक्रिया अदा करूँ उतना कम है क्यूंकि उन्होंने मेरी ज़िन्दगी को बेहतर बना दिया है |

डॉ. सुमंत शेखर पाढ़ी ने कहा मरीज़ की उम्र को देखते हुए यह प्रक्रिया बहुत जोखिम भरा था क्यूंकि अधिक कैल्शियम के कारण रक्तवाहिका कठोर थी|उच्च रक्तचाप इस प्रक्रिया का एक सामान्य कारण है जिसकी वजह से यह मामला और भी जोखिम भरा होगया था लेकिन हम अंततः सफल हुए |”


श्री नवीन शर्मा (फैसिलिटी डायरेक्टर, एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल) ने भी कार्डियोलॉजी टीम को बधाई दी “यह राज्य में इस तरह की प्रक्रिया से गुजरने वाली सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थीं, यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि हम अपने उद्देश्य को इतनी अच्छी तरह से पूरा करने में सक्षम हैं । टेवर और टावी जैसी दुर्लभ और जोख़िम भरी प्रक्रिया जो की बड़े शहरों में ही होती थी, वो अब सफलता पूर्वक एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर में की जाती हैं | इस तरह की प्रक्रिया में प्रत्येक चरण में सावधानीपूर्वक योजना बनाने और प्रत्येक चरण के निर्दोष निष्पादन की आवश्यकता होती है | इस तरह की टीम वर्क का अभ्यास करने और इस कठिन मामले को सफल बनाने के लिए मैं पूरी कार्डियोलॉजी टीम और विशेष रूप से डॉ. सुमंत शेखर पाढ़ी को बधाई देता हूं।''

एनएचएमएमआईनारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के बारे में


नारायणा हेल्थ ने अगस्त 2011 में रायपुर और छत्तीसगढ़ के लोगों कोसस्ती, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करनेके लिए एमएमआईअस्पताल केप्रबंधन को संभाला और अतिरिक्त देखभाल और सुविधाएं जोड़ी। एमएमआई नारायणासुपरस्पेशिलिटी अस्पताल, रायपुर तब अस्तित्व में आया, जब पुराने अस्पताल की सुविधाओं को अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटरों के साथ-साथक्लिनिकल प्रतिभाओं को शामिल कर बदल दिया गया। रायपुर के सबसे शांत स्थानों में सेएक के बीचयहअस्पताल मरीजों को अतिश्रिघ स्वस्थ्य लाभप्राप्त करने के लिए एक आदर्श स्थान है।


एनएचएमएमआईनारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, रायपुर के डॉक्टरों को उनकी स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों के लिएमहानगरों की यात्रा किये बिना सस्ती कीमत पर मरीजों को उच्चतम सेवा प्रदान करनेहेतु सर्वोत्तम बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी प्रदान करने के दृष्टिकोण के साथअधिग्रहण किया गया था। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह अस्पताल मध्य भारत के शीर्षअस्पतालों के समतुल्य है, - नारायणा हेल्थ ग्रुप द्वारा निरंतर किएजाने वाले सर्वोत्तम अभ्यास - प्रबंधन अभ्यास, मानकसंचालन प्रक्रिया, कर्मचारियों की गुणवत्ता और सेवा केसाथ-साथ इस अस्पताल में बुनियादी ढांचे को लागू किया।

 


 

अपने फेस पैक में डालें बस ये 3 चीजें, मानसून में स्किन नहीं होगी ऑयली

अपने फेस पैक में डालें बस ये 3 चीजें, मानसून में स्किन नहीं होगी ऑयली

मानसून का हमारी त्वचा और बालों दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नमी हमारी त्वचा को ऑयली बना देती है, जिसकी वजह से चेहरा सारा दिन ऑयली दिखाई देता है। तेल से स्किन पोर्स बंद हो सकते हैं, जिससे मुंहासे होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप अपनी स्किन की केयर फेस पैक लगाकर करती हैं, तो आपकी स्किन कम ऑयली होगी।
चेहरे के लिए फेस पैक बनाने के लिए बेसन एक आम सी घरेलू साम्रगी है स्किन के लिए बेहद गुणकारी मानी जाती है। इससे तैयार फेस पैक को नियमित चेहरे पर लगाने से आपको 15 मिनट में ही असर दिखाई देगा। आइए जानते हैं स्किन को इस मौसम में कम ऑयली कैसे बनाया जा सकता है...
सामग्री:
*1 चम्मच एलोवेरा जेल
*2 चम्मच बेसन
*एप्पल साइडर विनेगर / नींबू के रस - ½ टी-स्पून चम्मच
बनाने का तरीका-
1.एक कटोरे में सभी सामग्री लें और उनका एक महीन पेस्ट बना ले।
2.अब इस पेस्ट को अपने साफ चेहरे और गर्दन पर लगाएं।
3.इसे लगभग 15 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर इसे ठंडे पानी से धो लें।
4.आखिर में चेहरे पर मॉइस्चराइजर लगाएं, जिससे स्किन ड्राय न हो।
चेहरे पर बेसन लगाने का फायदा
बेसन का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जा रहा है। यह मुंहासे को दूर कर के चेहरे का रंग निखारता है। इसे चेहरे पर लगाने से स्किन पर जमा अतिरिक्त तेल हट जाता है। बेसन त्वचा पर स्क्रब की तरह काम करता है। इससे चेहरे की मृत कोशिकाएं भी हटती हैं। यह उम्र से पहले चेहरे पर झुर्रियां आने से रोकता है।
एलोवेरा
एलोवेरा जेल स्किन पर ठंडक का एहसास दिलाता है। यह स्किन पोर्स को साफ करता है। ऐसे में ऑयली स्किन वालों के लिए यह बेहद उपयोगी है। इसके अलावा एलोवेरा एक एंटी-एजिंग एलिमेंट के तौर पर काम करता है। ऐलोवेरा में बीटा कैरोटीन, विटामिन-सी और ई जैसे ऐंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो स्किन जवां रखते हैं।
नींबू का रस और एप्पल साइडर विनेगर:
इन दोनों चीजों में ही प्रकृति में अम्लीय गुण पाए जाते हैं, जो आश्चर्यजनक रूप से स्किन पर काम करते हैं। नींबू और एसीवी दोनों को त्वचा के पीएच स्तर को संतुलित करने के लिए जाना जाता है, जो मुंहासे और तैलीय त्वचा के पीछे मुख्य कारण हो सकता है। नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है, जबकि एसीवी रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

 

पेट- जांघ और कमर की चर्बी को करना है कम तो दालचीनी का ऐसे करें इस्तेमाल

पेट- जांघ और कमर की चर्बी को करना है कम तो दालचीनी का ऐसे करें इस्तेमाल

आज के समय में ज्यादातर लोग अपने मोटापे के चलते काफी परेशान हैं। जिसके लिए लोग डाइटिंग से लेकर एक्सरसाइज करते हुए नजर आते हैं। लेकिन इसमें से कौन सा तरीका बेहतर है यह कह पाना काफी मुश्किल है। वहीं वेट कम करने के लिए घरेलू उपाय को ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसी बीच आज हम आपको वेट कम करने का बहुत ही असरदार उपाय बताने जा रहे हैं। किचन में मौजूद दालचीनी के इस्तेमाल से आप अपना वेट कम कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि दालचीनी का कैसे करना है इस्तेमाल।

आपको बता दें कि दालचीनी एक ऐसा मसाला है जिसका इस्तेमाल कई पकवानों में किया जाता है। इसका स्वाद थोड़ा कड़वा होता है। यह खाने के स्वाद तो बढ़ाता ही है। साथ ही इसके कई फायदे होते हैं। यह वेट कम करने में काफी मदद करता है। इसके लिए आपको दालचीनी का ऐसे करना है इस्तेमाल। दालचीनी और शहद इसके लिए आप नींबू, शहद और दालचीनी चाय का सेवन करें। यह आपको कई बीमारियों से भी बचाता है। दालचीनी स्टिक को पानी में उबालें और इसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं। यह आपका फेट काटने में काफी मदद करता है। दालचीनी और स्प्राउट्स पेट की चर्बी कम करने के लिए डेली दालचीनी का सेवन करना फायदेमंद होता है। यह भूख कम करता है। इसके साथ ही ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। वेट कम करने के लिए स्प्राउट्स में दालचीनी मिलाकर सेवन करें। दालचीनी और पानी दालचीनी के पाउडर को पानी में डालकर उबालकर पिएं। यह वजन कम करने में काफी मदद करता है।

दालचीनी और कॉफी आप चाहें तो कॉफी में भी आप एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिला कर पी सकते हैं। इससे आपका वेट काफी कम होगा। ध्यान रखें कि अगर आप कॉफी में दालचीनी मिला रहे हैं तो उसमें चीनी न मिलाएं।


 

क्या आप भी अंडरआर्म्स के पसीने और बदबू से परेशान है तो अपनाएं ये 5 उपाय

क्या आप भी अंडरआर्म्स के पसीने और बदबू से परेशान है तो अपनाएं ये 5 उपाय

गर्मियों के मौसम में अंडरआर्म्स से पसीने की बदबू आना एक आम समस्या है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप दिन में कितनी दफा नहा लें, मगर पसीने को निकलने से नहीं रोका जा सकता। इस बदबू से न केवल अगल-बगल वाले ही परेशान होते हैं, बल्कि आपके कपड़ों पर भी पसीने के धब्बे पड़ जाते हैं। यह ऐसी समस्या है जिससे न चाहते हुए भी लोग आपसे दूर भागने लगते हैं।


यदि आप इस गर्मी के मौसम में अपने पसीने से परेशान हैं और इसका कोई समाधान चाहते हैं, तो यहां कुछ बेहद आसान से उपाय बताए जा रहे हैं। इन्हें अपनाकर आप देखेंगे कि आपके अंडरआर्म्स से कम पसीना आएगा...

करें लूफा का प्रयोग
अंडरआर्म्स को एक्सफोलिएट करने से आपको अनचाही बदबू से मुक्ति मिल सकती है। यह मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाता है और आपकी त्वचा को ताजा और त्वचा के पोर्स को बंद करता है। क्लीन पोर्स होने की वजह से आपको कम पसीना आएगा। लूफा आपके अंडरआर्म्स को एक्सफोलिएट करने का सबसे आसान तरीका है।

डियोड्रंट नहीं एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करें
पसीने की दुर्गंध को कंट्रोल करने के लिए हमें इनकी जरूरत पड़ती ही पड़ती है। लेकिन डियो जहां गंध को दबाता है, वहीं एंटीपर्सपिरेंट पसीने को दबाने का काम करता है। यह आपके अंडरआर्म्स में पसीने की ग्रंथियों को ब्लॉक कर देता है, जिससे पसीने से बचाव होता है।

सूती कपड़े पहनें
गर्मियों के दौरान आपकी त्वचा को सांस लेने देने वाले कपड़े सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। सिंथेटिक कपड़े आपकी त्वचा को सांस लेने या पसीने को सोखने नहीं देते हैं। यह न केवल आपको असहज महसूस करवाते हैं, बल्कि इनको पहनने से आपके अंडरआर्म्स में अधिक पसीना भी आने लगता है। हल्के पेस्टल शेड्स और ढीले ढाले सूती कपड़े पहनें जो आपके अंडरआर्म्स को पसीने से बचाएंगे।

टाइम-टू-टाइम करें शेव
अपने अंडरआर्म्स को शेव करें, इसे वैक्स करें या हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल करें, लेकिन अपने अंडरआर्म्स को साफ रखें जिससे आपको कम पसीना आएगा। यह पसीने को दूर करने का सबसे प्रभावी तकनीक में से एक है।

शॉवर और ड्रेसिंग के बीच एक रखें गैप
स्नान करते समय जल्दबाजी न करें। और ड्रैसिंग के वक्त थोड़ा समय लगाएं। यदि आप ऐसे स्थान पर रहते हैं, जहां का मौसम गर्म और उमस भरा है, तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आपके शरीर को ठंडा होने के लिए पर्याप्त समय न देना अंडरआर्म में पसीने का कारण हो सकता है। इसलिए शॉवर के बाद थोड़ी देर प्रतीक्षा करें। कपड़े पहनने से पहले अपने शरीर को पूरी तरह से ठंडा होने दें।

ढेर सारा पानी पिएं
गर्मी के मौसम में पानी पीना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आपके शरीर को ठंडा करता है और इस प्रकार आपके शरीर को पसीने से बचाता है। अपने साथ हमेशा एक बोतल रखें और हर दिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं।

 

कोरोना काल में खुद को रखें मानसिक रूप से स्वस्थ

कोरोना काल में खुद को रखें मानसिक रूप से स्वस्थ

इस वक्त जो देश की स्थिति है, उससे हर एक व्यक्ति के मन में डर बना हुआ है।
दिन-रात सिर्फ कोरोना से संबंधित खबरों को देख-पढ़ रहे हैं। ऐसे में मन में बेचैनी और चिढ़चिढ़ापन व मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कोरोना वायरस के खौफ से लोगों के मन में नकारात्मकता देखी जा रही है। इस वक्त पूरे समय घर पर रहने से न ही शारीरिक कसरत हो रही जिससे कि फिट रहा जा सके और न ही मानसिक सूकून मिल रहा।

इससे शारीरिक और मानसिक रूप से व्यक्ति खुद को फिट महसूस नहीं कर पा रहा है। लेकिन कुछ बदलाव कर कर हम इन सब परेशानियों से बाहर आ सकते हैं।
आइए जानते हैं कुछ खास टिप्स जिससे कि आप खुद को मानसिक तौर पर स्वस्थ महसूस कर सकते हैं।

मेडिटेशन

मेडिटेशन हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में हमारी मदद करता है, वहीं नकारात्मक विचार भी मन में नहीं आते जिससे हम मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ तो रख ही सकते हैं, साथ ही सूकून भी मिलता है और ऐसे वक्त में हमें मेडिटेशन की बहुत जरूरत है ताकि हम खुद को इन विचारों से दूर रख सकें। इन्हें खुद पर हावी न होने दें। मेडिटेशन से कई फायदे होते हैं, जैसे भावनात्मक स्थिरता में सुधार, रचनात्मकता में वृद्धि, प्रसन्नता में संवृद्धि, मानसिक शांति एवं स्पष्टता, परेशानियों का छोटा होना आदि।


सोशल मीडिया से दूरी बनाएं

अगर आप इन खबरों से व्याप्त नकारात्मकता से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले सोशल मीडिया से दूर हो जाएं, क्योंकि दिन-रात सिर्फ यही खबरें पढ़ व सुनकर आप परेशान हो सकते हैं इसलिए दूरी ही भली।

अकेले न रहें, परिवार के साथ समय बिताएं

इस समय खुद को मोबाइल के साथ ही व्यस्त न रखें बल्कि अपने परिवार के साथ वक्त बिताएं। अगर आप अकेले बैठते हैं तो कई तरह के विचार मन में आते हैं अत: इनसे बचें और परिवार के साथ समय बिताएं।

म्यूजिक सुनें

कहते हैं संगीत स्ट्रेस बूस्टर का काम करता है इसलिए म्यूजिक जरूर सुनें। यदि रात में नींद नहीं आती है और बुरे ख्याल परेशान कर रहे हैं तो इस समय भी अपने पसंदीदा संगीत को सुना जा सकता है।

 

7 जुलाई Chocolate Day : स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है चॉकलेट, जानें सेहत के 7 फायदे

7 जुलाई Chocolate Day : स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है चॉकलेट, जानें सेहत के 7 फायदे

चॉकलेट न केवल बच्चों और युवतियों की पसंद है, बल्कि अब जन्मदिन या किसी समारोह में दिए जाने वाले उपहारों में भी शामिल है। इतने आकर्षक और अलग- अलग फ्लेवर्स में उपलब्ध हैं, कि आप कई बार चाह कर भी खुद को रोक नहीं पाते होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि चॉकलेट में स्वाद के अलावा और भी फायदे हैं।

हम बता रहे हैं चॉकलेट के ऐसे ही कुछ फायदे, जिन्हें जानकर आप भी खुद को चॉकलेट खाने से रोक नहीं पाएंगे- बाजार में उपलब्ध कई तरह की चॉकलेट्स में से, सबसे बेहतर है डार्क चॉकलेट। इसमें शुगर की मात्रा बेहद कम या नहीं के बराबर होती है और यह चॉकलेट आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है।

1 तनाव हो या डिप्रेशन- जी हां, यदि आप किसी प्रकार के तनाव में हैं, तो चॉकलेट आपका वह साथी है, जो बिन कुछ कहे और सुने ही आपका तनाव कम कर सकता है। आप जब भी तनाव या डिप्रेशन में हों, चॉकलेट खाना न भूलें। इससे आप रिलेक्स महसूस करेंगे।

2 त्वचा को रखे जवां- चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो आपकी त्वचा पर दिखने वाले बढ़ती उम्र के लक्षणों और झुर्रियों को कम करती है। इससे आपकी त्वचा जवां नजर आती है। इसके गुणों के कारण आजकल चॉकलेट बाथ, फेशि‍यल, पैक और वैक्स का इस्तेमाल भी होने लगा है।

3 जब कम हो ब्लड प्रेशर- जिन लोगों को लो-ब्लडप्रेशर की समस्या है, उनके लिए चॉकलेट बेहद लाभदायक है। ब्लडप्रेशर कम होने की स्थि‍ति में चॉकलेट तुरंत राहत देती है। इसीलिए हमेशा अपने पास चॉकलेट जरूर रखें।

4 कोलेस्ट्रॉल- शरीर में मौजूद एलडीएल कोलेस्ट्रॉल यानी बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने में चॉकलेट बहुत फायदेमंद है। यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम कर मोटापे व इसकी वजह से होने वाली अन्य बीमारियों को भी नियंत्रित करने में सहायक है।

5 दिमाग रहे स्वस्थ- एक शोध के मुताबिक रोजाना दो कप हॉट चॉकलेट ड्रिंक पीने से दिमाग स्वस्थ रहता है और याददाश्त कमजोर नहीं होती। चॉकलेट से दिमाग में रक्त संचार बेहतर होता है।

6 हृदय-रोग- एक रिसर्च के अनुसार चॉकलेट या चॉकलेट ड्रिंक का सेवन ह्दय-रोग की संभावना को एक तिहाई कर देता है और ह्दय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

7 एथिरोस्क्लेरोसिस- एथिरोस्क्लेरोसिस एक प्रकार कर बीमारी है, जिसमें धमनियां अवरूद्ध हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में चॉकलेट बेहद लाभदायक है।
 

वर्क फ्रॉम होम के दौरान आंखों से आ रहा है पानी, तो इस घरेलू उपचार की लें मदद

वर्क फ्रॉम होम के दौरान आंखों से आ रहा है पानी, तो इस घरेलू उपचार की लें मदद

कोरोना वायरस की महामारी के चलते कई सारे लोग अपने दफ्तर का काम घर से ही कर रहे हैं। इस दौरान लगातार कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते रहने के कारण उन्हें कई प्रकार की समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। एक ऐसी ही समस्या आंखों से पानी आने की है जिससे कई सारे लोग परेशान हैं। यह समस्या उन लोगों को ज्यादा हो रही है जो चश्मे का प्रयोग नहीं करते हैं।
अभी अगर इसी समस्या से जूझ रहे हैं तो निश्चिंत हो जाएं, क्योंकि यहां पर एक ऐसे ही खास घरेलू उपाय के बारे में बताया जा रहा है जिसका आप घर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आंखों से पानी बहने की समस्या को ठीक करने में काफी मददगार साबित हो सकता है।
क्या है यह घरेलू उपचार
आंखों से पानी गिरने की समस्या को दूर करने के लिए हम जिस घरेलू उपचार के बारे में आपको बताने जा रहे हैं दरअसल वह बेकिंग सोडा से तैयार होगा। बेकिंग सोडा आपको किसी भी ग्रॉसरी शॉप पर बड़ी आसानी से मिल जाएगा। इस बात का विशेष ध्यान दें कि बेकिंग सोडा को आंखों में लगाना नहीं है बल्कि इसे उपचार के रूप में बंद आंखों के ऊपर से प्रयोग करना है।
एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, बेकिंग सोडा में विशेष गुण मौजूद होते हैं जिन्हें आंखों से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि अगर आंखों से पानी गिरने की समस्या आपको परेशान कर रही है तो बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से आपको राहत मिल सकती है। आइए अब इसे इस्तेमाल करने की विधि के बारे में जानते हैं।
यह भी पढ़ें :
सामग्री
*2 कप पानी
*1/2 चम्मच बेकिंग सोडा
बनाने की विधि
*सबसे पहले एक पैन लें।
*अब इसमें पानी को उबलने के लिए रख दें।
*जब पानी उबलने लगे तो उसमें बेकिंग सोडा को मिला दें।
*अब इसे ठंडा होने दें और एक कपड़े में इस पानी को भिगोकर आंखों की सिकाई करें।
*इस प्रक्रिया को हफ्ते में चार से पांच बार प्राप्त को सोने से पहले जरूर करें।
*आपको कुछ दिनों में इसका फायदा दिखने लगेगा।


इसके अलावा इस बात का जरूर ध्यान रखें कि आंखें हमारे शरीर का बहुत कोमल हिस्सा होती हैं। गर्म पानी को बिल्कुल आंखों पर ना लगाएं और जब तक यह मिश्रण ठंडा ना हो जाए, इसे आंखों से दूर ही रखें। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि लंबे समय तक अगर यह समस्या बनी रहे तो बिना देर किए किसी नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें। यहां बताया गया घरेलू उपचार आपकी समस्या को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन अगर कुछ समय के बाद आपको आराम नहीं दिखता तो आप फौरन डॉक्टर की सलाह लें।
 

जानिए क्यों होते हैं पिंपल्स और इन्हें दूर करने के उपाय

जानिए क्यों होते हैं पिंपल्स और इन्हें दूर करने के उपाय

पिंपल्स, कील-मुंहासों की समस्या से कई लोग परेशान हैं, जाने-अनजाने युवा कुछ ऐसी गलतियां कर देते है जिस कारण से पिंपल्स उनका पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं लेते। आइए, जानते हैं कुछ ऐसी आदतों के बारे में जो पिंपल्स को बढ़ावा देती है -

पिंपल्स होने के कारण :

1 पिंपल्स होने की बड़ी वजहों में से एक है जंक फूड और तले-भुने भोजन का अधिक सेवन। ऐसे भोजन से त्वचा ऑयली हो जाती है और कील-मुंहासों और पिंपल्स को पैदा करती है।

2 यदि त्वचा प्रदूषण और धूल मिट्टी के ज्यादा संपर्क में रहती है, तो इस वजह से चेहरे पर गंदगी जम जाती है और फिर कील-मुंहासे हो जाते हैं। इसलिए कोशिश करें कि बाहर जाते समय चेहरे को अच्छी तरह से ढंककर चलें और रोजाना चेहरे की साफ सफाई करें।
3 ज्यादा कॉफी या चाय पीने से शरीर में सीबम बनने लगता है जो बाद में चेहरे पर मुंहासे आने का कारण बन सकता हैं।

4 अभिक धूम्रपान और शराब का सेवन भी पिंपल के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

5 कई बार पिंपल्स आने की वजह जेनेटिक भी हो सकती है, वहीं कुछ लोगों की त्वचा बहुत ऑयली होती है जिस वजह से उन्हें जल्दी-जल्दी पिंपल्स हो जाते है।

6 कई बार दवाईयों के ज्यादा सेवन व हार्मोन में बदलाव के कारण भी पिंपल्स हो जाते हैं।
7 चेहरे को बार-बार साबुन से धोने के कारण भी पिंपल्स की शिकायत हो जाती है। क्योंकि ऐसा करते रहने से चेहरा की स्किन ड्राय हो जाता है और पिंपल्स निकल आते हैं।

पिंपल्स दूर करने के उपाय

* यदि बार-बार चेहरा धोना हो तो सिर्फ पानी से धोएं। हर बार साबुन व फेस वॉस से धोने की जरूरत नहीं होती।

* जंक फूड और तली-भुनी चीजों को कम ही खाएं।

* टेंशन और स्ट्रेस से दूर रहें, अधिक समय तक धूप में रहने से भी त्वचा को बचाए।

* योगा करें और खूब पानी पीएं।

 

अगर आपके कानो में हो रही हो खुजली तो अपनाये ये घरेलू तरीके, नहीं जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास

अगर आपके कानो में हो रही हो खुजली तो अपनाये ये घरेलू तरीके, नहीं जाना पड़ेगा डॉक्टर के पास

कान में खुजली होना, नहाते समय पानी चले जाना या पपड़ी जमने की समस्या होना...ये सब ऐसी दिक्कतें हैं, जो हम सभी के साथ होती हैं। सामान्य दिनों में तो हम कान में दिक्कत होने पर तुरंत ईएनटी स्पेशलिस्ट के पास चले जाते थे। लेकिन लॉकडाउन और कोरोना काल में हॉस्पिटल के बारे में सोचकर भी डर लगता है! ऐसे में कान में इस तरह की समस्या होने पर घरेलू नुस्खों के जरिए कैसे ठीक किया जा सकता है, यहां जानें...

कान की देखभाल करने के घरेलू तरीके

कान में सबसे अधिक दिक्कत नमी यानी मॉइश्चर के कारण होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नहाते वक्त या हर समय जुकाम रहने के कारण हमारे कान की अंदरूनी नसों में मॉइश्चर जमा रहता है। इस कारण वहां फंगस और बैक्टीरिया पनप जाते हैं। जो तेज खुजली करते हैं।

मैल नहीं मोम है वह


-हमें लगता है कि हमारे कान से मैल निकल रहा है। जबकि असर में वह मैल नहीं मोम होता है। वह मोम, जिसे हमारे कानों का मैकेनिज़म अपनी सेफ्टी के लिए खुद ही तैयार करता है।
-अब आपको लग रहा होगा कि यह मोम कान की सेफ्टी कैसे करेगा...जरा सोचकर देखिए, चीटी से लेकर मच्छर तक कितने ही छोटे-मोटे कीट-पतंगे होते हैं, जो हमारे कान में जाकर अंदर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
-ये कीट कान में ना घुस पाएं और अगर घुस भी जाएं तो मोम में चिपककर मर जाएं और अंदर हमारे कान के पर्दे तक ना पहुंचें...इसलिए हमारे कान में यह मोम तैयार होता है। जब यह मोम अधिक हो जाता है या काफी पुराना हो जाता है, तब कान के मैनेनिज़म द्वारा खुद ही इस मोम को बाहर की तरफ धकेल दिया जाता है।
-ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा शरीर अपनी अंदरूनी सफाई खुद ही करता है। पुराने मोम में गंदगी, नमी, बैक्टीरिया पनपकर कान को नुकसान ना पहुंचा दें, इसलिए प्राकृतिक रूप से हमारा शरीर इस मोम को बाहर फेंकता है और नया मोम बनाता है।

कान को खुजली वाले बैक्टीरिया से बचाने का तरीका

-अगर आपको कान में खुजली की समस्या हो रही है तो बेहतर रहेगा कि आप 1 चम्मच सरसों तेल में एक कली लहसुन और एक चुटकी अजवाइन गर्म कर लें। जब यह मिश्रण ठंडा हो जाए तो इसे छानकर इयर ड्रॉप की तरह कान में डालें और 20 से 25 मिनट तक करवट लेकर लेटे रहें। ताकि तेल अंदर जा सके।
-इस दौरान बेड पर लेटे हुए आप धीमे-धीमें अपना मुंह इस तरह चलाते रहें, जैसे कुछ चबाकर खा रहे हों। ऐसा करने से तेल आपके कान के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचेगा और मसल्स की मसाज भी होगी। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यदि आपको जुकाम है और इस दौरान कान में खुजली हो रही है तो आपको सरसों के तेल का उपयोग नहीं करना है।
-जुकाम-नजले की स्थिति में कान में सरसों का तेल डालने से कान की सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसलिए इस स्थिति में आपको डॉक्टर से ही परामर्श करना चाहिए। आप किसी आयुर्वेदाचार्य से फोन पर कंसल्ट करके भी अपनी स्थिति के अनुसार कुछ घरेलू नुस्खे जान सकते हैं ताकि आपको तुरंत राहत मिल सके।
-यदि आपके पास कोई भी विकल्प उपलब्ध नहीं है और कान में तेज खुजली हो रही है तो इस स्थिति में आप कोई गर्म पेय पदार्थ लें। यह हल्दी का दूध, हॉट कॉफी या ब्लैक टी जैसा कुछ भी हो सकता है जो तासीर में गर्म हो। इसे फूंक मारकर और घूंट-घूंट करके चाय की तरह पिएं। ऐसा करने से आपके कान की मसल्स की अंदर से सिकाई होगी और आपको तुरंत राहत मिलेगी।
-नहाने से पहले दोनों कानों में रुई यानी कॉटन लगा लें। इससे नहाते समय पानी की बूंदें भी कान में नहीं जा पाएंगी और आपको कान में खुजली होने की संभावना कम हो जाएगी।

 

सुबह-शाम इसलिए चलना चाहिए पैदल, टल जाता है इन 5 गंभीर बीमारियों का खतरा

सुबह-शाम इसलिए चलना चाहिए पैदल, टल जाता है इन 5 गंभीर बीमारियों का खतरा

स्वस्थ बने रहने के लिए हमें कई प्रकार की आदतों का विशेष ध्यान देना पड़ता है। जरा-सी लापरवाही हमें कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में ला देती है। कहा जाता है कि रोज सुबह उठने के बाद हमें पैदल जरूर चलना चाहिए, यह आदत हमें कई प्रकार की बीमारियों से बचाए रखने में मदद करती है। हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध में इस बात की पुष्टि भी की गई कि पैदल चलना कैसे सेहत पर प्रभाव डालता है।
इसके बारे में आपको नीचे विस्तारपूर्वक बताया जाएगा। साथ ही आपको इस बारे में भी जानकारी दी जाएगी कि पैदल चलना सेहत को किस प्रकार मेंटेन बनाए रखता है।

दिल को स्वस्थ बनाए रखने में
दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आपको कार्डियोप्रोटेक्टिव फूड का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा पैदल चलने का भी सकारात्मक फायदा दिल को मिलता है। पैदल चलने के कारण ब्लड सर्कुलेशन में होने वाले अच्छे प्रभाव का नतीजा ही हृदय रोगों से बचाए रखने के लिए मददगार साबित होता है। इसलिए नियमित रूप से पैदल चलने की आदत अपने जीवन में जरूर शामिल करें।

हड्डियों को मजबूत बनाने में
हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए कैल्शियम नामक पोषक तत्व की बहुत जरूरत होती है। हालांकि पैदल चलना भी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए काफी मददगार साबित होता है। इसके वैज्ञानिक कारण को समझने की कोशिश करें तो यह काफी आसान होगा। पैदल चलना हड्डियों को इसलिए मजबूती प्रदान कर सकता है, क्योंकि पैदल चलने के कारण शरीर की लगभग सभी हड्डियों की एक्सरसाइज हो जाती है और हड्डियों में मौजूद एक विशेष प्रकार का द्रव इन्हें मजबूती प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाता है।

मूड
लॉकडाउन के दौरान आप डिप्रेशन और स्ट्रेस का भी शिकार हो सकते हैं। इसलिए बंद कमरे से बाहर निकल कर आपको 15 से 20 मिनट रोज पैदल चलना चाहिए। खुले वातावरण में टहलने के कारण आप फ्रेश फील करेंगे और आपका मूड भी काफी अच्छा होगा। नेगेटिविटी को दूर करने के लिए पैदल चलना प्रभावी रूप से मददगार साबित होता है।

वजन कम करने 
बढ़ा हुआ वजन टाइप टू डायबिटीज और कैंसर का कारण माना जाता है। इसलिए जरूरी है कि अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए आप खान-पान पर विशेष ध्यान दें। इसके अलावा नियमित रूप से 20 से 25 मिनट तक पैदल चलने की आदत डालें। यह ना केवल आपकी पेट को कम करेगा, बल्कि वजन को नियंत्रित बनाए रखने में भी काफी मददगार साबित होगा।

दिमाग
दिमाग को दुरुस्त बनाए रखने के लिए पैदल चलना बहुत जरूरी है और यह सकारात्मक रूप से हमें प्रभावित करता है। पैदल चलने के कारण ब्लड सर्कुलेशन बहुत अच्छी तरह से होता है और यह दिमाग को भी पर्याप्त मात्रा में ब्लड की आपूर्ति करने में सक्षम हो जाता है। इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी कई गुना तक कम हो सकता है। इसलिए रोज सुबह और शाम को नियमित रूप से पैदल चलने की आदत को अपनी दिनचर्या में जरूर अपनाएं।

 

सैर सपाटा संघ द्वारा संस्कृत कॉलेज परिसर में विश्व योग दिवस के अवसर पर किया योगाअभ्यास

सैर सपाटा संघ द्वारा संस्कृत कॉलेज परिसर में विश्व योग दिवस के अवसर पर किया योगाअभ्यास

रायपुर,सैर सपाटा संघ, संस्कृत कॉलेज में विश्व योगा दिवस पर आज शोशल डिस्डेन्टिग का पालन करते हुऐ हमारे योगा महागुरू श्री अशोक शर्मा जी के द्वारा योगाअभ्यास कराया गया,76वर्षीय महायोग गुरु ने बताया गया कि अगर आप रोज सुबह 1घण्टे योग करते है,100 साल की उम्र में भी 50 साल के लगेंगे एवम सभी प्रकार के रोग से मुक्त रहेंगे,साथ ही उन्होंने जिंदगी भर योग से जुड़े रहने की शपथ दिलाई,इस अवसर पर मुख्य रूप से सचिनानंद व्यास, धनेश व्यास, रमेश यदु, राजेन्द्र पारेख, हीरालालजी, अशोक अग्रवाल, राजेश कृष्णानी, गोपाल बंक, रमेश कुमार जी उपस्थित रहे 

अक्सर महिलाये हो जाती है अनचाहे बालो को लेकर परेशान,जानें इसका कारण और बचने के उपाय

अक्सर महिलाये हो जाती है अनचाहे बालो को लेकर परेशान,जानें इसका कारण और बचने के उपाय

पुरुषों की ही तरह महिलाओं में भी चेहरे पर बाल (फेशियल हेयर) होना सामान्य सी बात है, क्योंकि हमारे शरीर की त्वचा पर सभी जगह हेयर फॉलिकल्स होते हैं. हालांकि सभी महिलाओं के शरीर में बालों का विकास अलग-अलग तरीके से होता है. कुछ महिलाओं में जहां चेहरे पर बेहद पतले, बारीक और छिटपुट बाल होते हैं, वहीं दूसरी महिलाओं में बालों का विकास बेहद घना हो सकता है. बालों के विकास का पैटर्न आपके पारिवारिक इतिहास पर भी काफी हद तक निर्भर करता है. कई बार किसी बीमारी की वजह से भी महिलाओं के चेहरे पर ज्यादा बाल उगने लगते हैं.

महिलाओं के चेहरे और शरीर के दूसरे अंगों पर अत्यधिक बालों के उगने की इस समस्या को मेडिकल टर्म में हिर्सुटिज्म कहते हैं. प्रजनन के उम्र वाली दुनियाभर की करीब 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं में हिर्सुटिज्म की समस्या देखने को मिलती है. आमतौर पर महिलाओं के शरीर में उगने वाले बालों की बनावट बेहद बारीक होती है और उनका रंग भी हल्का रहता है. हालांकि वैसी महिलाएं जो हिर्सुटिज्म की समस्या से ग्रसित हों उनके शरीर में मौजूद बाल बेहद घने, मोटे और गहरे रंग के होते हैं. ये बाल महिलाओं की ठुड्डी पर, साइडबर्न्स यानी कलम की जगह पर, छाती पर, पेट पर, पीठ पर, जांघ के अंदरूनी हिस्सों में हो सकते हैं.

1.चेहरे पर ज्यादा बाल आने का कारण

वैसे तो महिलाओं में जींस की वजह से चेहरे और शरीर पर ज्यादा बाल उगने लगते हैं, लेकिन कई बार इसके पीछे कोई बीमारी भी जिम्मेदार हो सकती है:

पीसीओएस: महिलाओं के चेहरे पर ज्यादा बाल होने के ज्यादातर मामलों में पीसीओएस या पीसीओडी बीमारी मुख्य कारण होती है. इस बीमारी में शरीर में सेक्स हार्मोन्स का संतुलन बिगडऩे लगता है जिससे चेहरे पर अनचाहे और अतिरिक्त बाल उगने लगते हैं.

एन्जाइम की कमी: महिलाओं के शरीर में एन्जाइम की कमी की वजह मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की शरीर में अधिकता होने लगती है जिस कारण चेहरे और शरीर पर हद से ज्यादा बाल उगने की समस्या होने लगती है.

हाइपरट्राइकोसिस: इसे वेयरवोल्फ सिंड्रोम भी कहते हैं और यह कई बीमारियों की वजह से भी हो सकता है, जैसे- हाइपोथायराइडिज्म, ऐक्रोमेगाली (शरीर में ग्रोथ हार्मोन की अधिकता), कुपोषण और एचआईवी. हाइपरट्रिकोसिस की वजह से नाक के टिप और कान के पास ज्यादा बाल उगने लगते हैं.

कशिंग्स सिंड्रोम: यह एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें ऐड्रिनल ग्लैंड में गड़बड़ी की वजह से शरीर में कोर्टिसोल जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहते हैं ज्यादा बनने लगता है. कशिंग्स सिंड्रोम से पीडि़त महिला में हद से ज्यादा बालों के विकास के अलावा बहुत ज्यादा वजन बढऩा, हाई बीपी और चिड़चिड़ापन भी देखने को मिलता है.

दवाइयां: कई बार कुछ दवाइयों की वजह से भी महिलाओं के शरीर में अनचाहे बालों का विकास होने लगता है. हार्मोनल थेरेपी और एन्डोमेट्रिओसिस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां और मल्टीपल इन्फ्लेमेशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाले ग्लूकोकोर्टिकोयड्स की वजह से भी महिलाओं के शरीर में बालों का असामान्य विकास होने लगता है.

2. चेहरे के अनचाहे बाल हटाने के टिप्स

जो महिलाएं चेहरे पर मौजूद अनचाहे बालों से छुटकारा पाना चाहती हैं वे हेयर रिमूवल का इनमें से कोई भी तरीका इस्तेमाल कर सकती हैं:

प्लकिंग: प्लकर की मदद से आइब्रो, अपर लिप और ठुड्डी के पास के अतिरिक्त बालों को हटाया जा सकता है, लेकिन अगर चेहरे पर बालों की ग्रोथ ज्यादा हो तो उसमें यह तरीका कारगर साबित नहीं होगा.

शेविंग: चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने के लिए आप रेजर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. शेविंग हो जाने के बाद उस हिस्से को पानी से साफ कर मॉइश्चराइजर लगा लें.

क्रीम: डेपिलेटरी क्रीम इस्तेमाल कर अनचाहे बाल हटाने का तरीका दर्द रहित है. क्रीम को बाल हटाने वाली जगह पर लगाएं, स्पैट्यूला से फैलाएं, 5-10 मिनट के लिए लगा रहने दें और फिर स्पैट्यूला की मदद से क्रीम के साथ-साथ बालों को भी हटा दें.

वैक्सिंग: आप चाहें तो घर पर ही वैक्सिंग की मदद से भी चेहरे के अनचाहे बाल हटा सकती हैं. इसके लिए गर्म वैक्स की जगह वैक्सिंग स्ट्रिप का इस्तेमाल कर सकती हैं.

थ्रेडिंग: एक खास तरह के कॉटन धागे की मदद से अनचाहे बालों को एक-एक कर प्लकिंग के जरिए हटाया जाता है. आप चाहें तो पार्लर या सलॉन में जाकर थ्रेडिंग के जरिए अनचाहे बालों को हटवा सकती हैं.

एपिलेटसर्: यह जड़ों से अनचाहे बालों को खींचकर निकालता है. इसे इस्तेमाल करने के दौरान काफी दर्द होता है.

लेजर ट्रीटमेंट: इस दौरान डॉक्टर लेजर लाइट की मदद से हेयर फॉलिकल्स को डैमेज करते हैं. ऐसा करने से बालों की ग्रोथ कम हो जाती है.

इलेक्ट्रोलाइसिस: इसमें डॉक्टर हेयर फॉलिकल्स के बीच से बिजली के करेंट को दौड़ाते हैं जिससे बालों को नुकसान पहुंचता है और वे दोबारा उग नहीं पाते.

ब्लीचिंग: ब्लीचिंग करवाने से चेहरे पर मौजूद अतिरिक्त बाल हटते नहीं हैं लेकिन उनका रंग हल्का हो जाता है जिससे वे कम नजर आते हैं. किसी भी तरह की ब्लीच को सीधे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें.

3. अनचाहे बाल हटाते वक्त बरतें सावधानी

शेविंग करते वक्त ध्यान रखें कि आपका रेजर नया हो. जंग वाले रेजर का इस्तेमाल करने से स्किन इंफेक्शन हो सकता है. हॉट वैक्स इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखें कि स्किन उसे सह पाए. ज्यादा गर्म वैक्स इस्तेमाल करने से स्किन जल सकती है. बालों के उगने की विपरित दिशा में शेविंग न करें वरना इससे स्किन के अंदर उगने वाले इन्ग्रोन हेयर की समस्या हो सकती है. शेविंग करने से स्किन ड्राई होने लगती है लिहाजा शेविंग के तुरंत बाद स्किन पर मॉइश्चराइजर लगाएं.

 

अगर आप भी लैपटॉप पर अधिक समय बिताते हैं तो आंखों को हो सकता है नुक्सान,बचने के लिए अपनाये ये उपाय

अगर आप भी लैपटॉप पर अधिक समय बिताते हैं तो आंखों को हो सकता है नुक्सान,बचने के लिए अपनाये ये उपाय

जब हम ऑनलाइन काम करते हैं तो लाख कोशिश के बाद भी हम पलके कम झपकते हैं। पलकें कम झपकाने (आई ब्लिंकिंग) की वजह से हमारी आंखों की ऑइल ग्लैंड काम करना बंद कर देती हैं। ये ग्लैंड्स या महीन धमनियां हमारी आखों में नैचरली गीलापन बनाए रखने का काम करती हैं। लेकिन पलकें ना झपके के चलते हमारी आंखों में ड्राईनेस बढ़ जाती है।

आंखों में आ जाता है रुखापन

-आंखों में जब ड्राईनेस की समस्या होती है तो व्यक्ति को बार-बार ऐसा लगता है कि आंख में कुछ गिर गया है, जबकि ऐसा होता नहीं है। आंख में किरकिराहट की यह दिक्कत ड्राईनेस की वजह से होती है। इस स्थिति में आंखों तो तुरंत मिनरल वॉटर से धोना चाहिए। आंखों को रगडऩे से बचें नहीं तो आंखों को अधिक नुकसान हो सकता है।

इन कारणों से भी बढ़ती है ड्राईनेस

-स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने के साथ ही एसी कमरों में घंटों बैठना या सर्दी के मौसम में हीटर में अधिक बैठना भी आंखों में बढ़ती ड्राईनेस की एक वजह होता है। स्क्रीन पर अधिक समय देना, पलकें कम झपकना और आर्टिफिशल एटमॉसफेयर में रहने के कारण हमारी आंखों में बननेवाले आंसू जल्दी सूख जाते हैं और आंखे ड्राई होने लगती हैं।

-दूसरी कई ऐसी वजहें होती हैं, जिनसे आंखों में ड्राईनेस होती है। जैसे, कोई एलर्जी, किसी दवाई का साइडइफेक्ट, किसी तरह के इंफेक्शन की चपेट में आना या बढ़ती उम्र के कारण होनेवाली समस्याएं। जैसे, महिलाओं में मेनॉपॉज और पुरुषों में हॉर्मोनल इंबैलंस।

-आंखों में ड्राईनेस के कारण किरकिराहट के साथ ही बार-बार ऐसा अहसास हो सकता है कि आंख में मिट्टी गिर गई है, आंखों में भारीपन हो सकता है, यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे और आप लापरवाही बरतें तो आंखों में एलर्जी भी हो सकती है।

आंखों को हेल्दी रखने के घरेलू तरीके

-अगर आपका काम ही ऐसा कि लंबा वक्त स्क्रीन पर बिताना पड़ता है तो पलकें झपकने पर ध्यान दें। हर 45 मिनट बाद स्क्रीन से कुछ देर का ब्रेक लें। लुब्रिकेंटिंग आई ड्रॉप का यूज करें, गर्म पानी से आंखों की सिकाई करें, आंखों की मसाज करें।

-चाय और कॉफी पीने के दौरान गर्म कप से आपकी उंगलियां गर्म हो जाती हैं, उन गर्म उंगलियों से आंखों को हल्का प्रेस करें मसाज करें।

-आंखों की देखभाल के लिए जरूरी है कि आप आंखों को मिनरल वॉटर से धोएं, टंकी में सप्लाई होनेवाले पानी से नहीं। खासतौर पर उस स्थिति में जब आप अपने एरिया में सप्लाई होनेवाली पानी की क्वालिटी को लेकर श्योर ना हों। कई बार लो क्वालिटी वॉटर भी आंखों में दिक्कत की वजह बन जाता है।

-हर दिन और लगातार कई घंटें स्क्रीन पर काम करने वाले युवाओं को अपनी आंखों की सेहत और सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए रुटीन आई चेकअप कराना चाहिए। अगर आपको पहले से डायबीटीज है या इसकी हिस्ट्री है तो ऐसे में और अधिक सतर्क रहना चाहिए।

-एक बात हमेशा याद रखें कि एलर्जी ट्रीटेबल होती है क्यॉरेबल नहीं। यानी जब तक आप इससे बचाव करते रहेंगे, बचे रहेंगे। जरा-सी असावधानी बरतेंगे तो फिर से समस्या हो सकती है। किसी भी परेशानी में डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई ना खरीदें।

-आंखों की देखभाल के लिए पेशंट्स को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे, अगर आप कॉन्टेक्ट लैंस का यूज करते हैं तो कभी भी इन्हें लगाकर ना सोएं।

- कॉन्टेक्ट लैंस का सलूशन रोज बदलें। नहीं तो यह भी आपकी परेशानी की वजह बन सकता है।

-परिवार में अगर किसी की आंखों का इलाज चल रहा है तो आप भी उन्हीं की दवाइयां इस्तेमाल करना ना शुरू करें। जब तक कि डॉक्टर आपको सजेस्ट ना करे।

-अगर डॉक्टर ने आपको कोई दवाई एक आंख में डालने के लिए बोला है तो सिर्फ उसी आंख में डालें, दोनों आंखों में नहीं। ऐसे केस अक्सर देखने को मिलते हैं।

 

-परिवार में एक-दूसरे की दवाइयों का उपयोग ना करें। यदि आंखों में एक जैसी समस्या हो तब भी बिना डॉक्टर की सलाह के किसी अन्य व्यक्ति की आई ड्रॉप का उपयोग ना करें।

    

 

अगर आपके सर के बाल भी झड़-झड़ कर कम हो गए हैं, तो हफ्ते में 2 बार जरूर लगाएं इसको

अगर आपके सर के बाल भी झड़-झड़ कर कम हो गए हैं, तो हफ्ते में 2 बार जरूर लगाएं इसको

हम सभी जानते हैं कि नीम का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। नीम की पत्तियों समेत हम इसकी छाल, जड़ों और तेल का प्रयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए करते हैं। खासकर, नीम का तेल स्कैल्प और बालों के कई रोगों को दूर करने में उपयोग किया जाता है। इसे सिर पर लगाने से हेल्दी और मजबूत बालों का विकास होता है।

नीम के तेल में ऐंटिफंगल और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो कि रूसी और सिर की खुजली भगाने के लिए असरदार होता है। यही नहीं यह एक्जिमा और पपड़ीदार स्कैल्प को मॉइस्चराइज करता है। यही नहीं, यह हेयर फॉल को भी कंट्रोल करता है और उनकी ग्रोथ बढ़ाता है। इसे किस तरह से प्रयोग करें, आइए जानते हैं...

बालों की ग्रोथ के लिए सामग्री-
*डेढ़ छोटा चम्मच नीम का तेल
*3 बड़े चम्मच नारियल का तेल
*10 बूंद लैवेंडर एसेंशियल ऑयल (वैकल्पिक)

एक कटोरी में नीम और नारियल का तेल अच्छी तरह मिलाएं और बालों में लगाकर मसाज करें। बालों की ग्रोथ प्रभावी रूप से बढ़े इसके लिए इसमें लैवेंडर ऑयल मिक्स करें। इस तेल को सिर में लगभग एक घंटे के लिए बैठने दें और बाद में प्राकृतिक शैंपू से धो लें।

खुजली और रूसी से दिलाए छुटकारा

सामग्री-
*डेढ़ छोटा चम्मच नीम का तेल
*3 बड़े चम्मच जैतून का तेल
इन सभी सामग्रियों को मिलाएं और अपने सिर पर लगाकर कुछ देर मालिश करें। इसे एक या दो घंटे के लिएछोड़ दें और फिर धो लें।

एक्जिमा से दिलाए राहत
*डेढ छोटा चम्मच नीम का तेल
*3 बड़े चम्मच बादाम का तेल
एक कटोरी में, बादाम के तेल के साथ नीम का तेल मिलाएं। फिर इसे सिर की एक्जिमा वाली जगह पर लगाएं। तेल के सोखने तक सिर की धीरे-धीरे मालिश करें और फिर छोड़

सोरायसिस को कम करने में करे मदद
आप नीम के तेल का उपयोग उसी तरह से कर सकते हैं, जैसे एक्जिमा। या फिर स्कैल्प पर नीम के तेल की कुछ बूंदें लगाकर मालिश करें।
नीम का तेल जूं को दूर करे
सामग्री-
*1 चम्मच नीम का तेल
*3 बड़े चम्मच नारियल का तेल
*20 बूंद टी ट्री ऑयल (वैकल्पिक)
एक कटोरे में नीम का तेल और नारियल का तेल डालें और अच्छी तरह मिलाएं। जरूरत पडऩे पर आप इसमें टी-ट्री ऑयल की कुछ बूंदें मिक्स कर सकते हैं। इस तेल से सिर की मालिश करें। फिर कुछ घंटों के लिए बैठने दें। जब तक सिर की जूं खत्म न हो जाए, इसे हर दूसरे दिन दोहराएं।

 

क्या आप भी मोटापे से परेशान है, तो कम करने अपनाए ये आसान घरेलू टिप्स

क्या आप भी मोटापे से परेशान है, तो कम करने अपनाए ये आसान घरेलू टिप्स

अगर हमारे मोटापे की वजह कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है तो हम सिर्फ अपने लाइफस्टाइल में जरूरी और छोटे-छोटे बदलाव करके बहुत ही आसानी से खुदो को शेप-अप कर सकते हैं। आइए यहां बात करते हैं उन ईजी फैक्टर्स के बारे में जो हमारी रुटीन लाइफ से जुड़े हैं और बढ़ते वेट की बड़ी वजह बन जाते हैं...

रात को पूरा आराम करें
-देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना। या फिर देर रात तक जागना और मात्र 4 से 5 घंटे की नींद लेना और अगले दिन अपने काम में जुट जाना। साथ ही सोने और जागने का कोई निश्चित समय ना होना। ये कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं, जिनके चलते हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती और बॉडी ब्लॉट करने लगती है।

-यानी हमारी बोन्स और मसल्स पर जो फैट है, बॉडी उसे लूज छोड़ देती है। जिस कारण हम मोटे ना होते हुए भी मोटे दिखने लगते हैं। इसके साथ ही हमारी स्किन का चार्म भी लूज होने लगता है। इसके साथ ही नींद पूरी ना होने के कारण हमारी ईटिंग हेबिट बहुत अधिक प्रभावित होती है।

- हमारे शरीर को भूख नहीं लग रही होती है लेकिन हमारा ब्रेन हमें इस तरह के संकेत देने लगता है कि हर समय क्रेविंग होती रहती है। इसकी वजह होता है नींद पूरी ना होने के कारण ब्रेन में रिलीज होनेवाला लेप्टिन हॉर्मोन। यही वह हॉर्मोन है, जो हमारे वेट को कंट्रोल करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक मेडिकली टेस्टेड फॉर्म्यूला है, जो आपको फिट रखने में बहुत काम आएगा।
पानी पीते रहना

-पानी अगर सही तरीके से पिया जाए तो ना केवल आपके शरीर को फैटी होने से बचाता है बल्कि बीपी कंट्रोल रखता है और स्किन को ग्लोइंग बनाए रखता है। अपने शरीर को हाइड्रेट रखना फिटनेस का एक सॉलिड मंत्र है।

-एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हर व्यक्ति को एक दिन में कम से कम तीन लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। ऐसा करना आपकी फिजिकल फिटनेस को ही नहीं बल्कि मेंटल फिटनेस को भी बनाए रखता है।

-इससे हमारी पाचन क्रिया सही रहती है, मेटाबॉलिज़म हाई होता है साथ ही हम जो भी खाना खाते हैं वो हमारे शरीर को पूरा लाभ देता है। अब आपको लग सकता है कि खाने का लाभ पानी से कैसे मिलेगा... तो जबाव है मेटाबॉलिज़म। यही तो हमारे शरीर को पोषित करने का काम करता है।

प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं

-प्रोटीन से भरपूर चीजें जैसे दालें और साबुत अनाज खाने से हमारे शरीर को प्रोटीन की भरपूर मात्रा मिलती है। प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी एक ऐसा तत्व है, जो हमारी भूख को कंट्रोल करने का काम करता है। अगर आपको लगता है कि आपको भूख अधिक लगती है तो अपने डॉक्टर से सलाह करने के साथ ही आपको प्रोटीन डायट बढ़ा देनी चाहिए।

-यहां हम प्रोटीन शेक की बात बिल्कुल नहीं कर रहे हैं। प्रोटीन डायट लेने से पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहता है और हमें भूख कम लगती है। क्योंकि प्रोटीन हमारे शरीर में भूख बढ़ाने से संबंधित हॉर्मोन घ्रेलिन के प्रोडक्शन को कम कर देता है। प्रोटीन डायट में आप अंडा, सोयाबीन और प्रोटीन राइज जैसी चीजें ले सकते हैं। हां दाल और स्प्राउट्स को भूल मत जाना।
पाचनतंत्र को मजबूत बनाने का तरीका

-फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेब के सिरके का इस्तेमाल अपने फूड में करने से हमारा मेटाबॉलिज़म बहुत ही मजबूत बनता है। जब मेटाबॉलिज़म सही और फास्ट होता है तो वह एक्स्ट्रा फैट को हमारी बॉडी में स्टोर ही नहीं होने देता है।

-अगर आप फूड में इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं तो हर दिन दो चम्मच सेब का सिरका पानी डायल्यूट करके खाने के बाद पीना शुरू कर दें। यह पाचन बेहतर करने के साथ ही आपका वेट भी कम करेगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो सिर्फ इतना करके आप तीन महीने में 2 किलो से अधिक वेट लूज कर सकते हैं।

हेल्दी रहने का पुराना तरीका

-वेट घटाने का और बॉडी को फर्म करने का सबसे अच्छा तरीका है योग। अगर आप हर दिन योग की प्रैक्टिस करेंगे तो बेशक लंबे समय तक हेल्दी रहेंगे। हां, योग के साथ अपनी डायट पर जरूर ध्यान रखें। हेल्दी डायट लें और इस बात को सुनिश्चित करें कि आपको खाना खाए हुए 4 घंटे हो चुके हों।

-साथ ही योग करने के 1 घंटे बाद तक हैवी डायट ना लें। ऐसा करने से आपको खाने का भी पूरा पोषण मिलेगा और योग का भी पूरा फायदा मिलेगा। और इन दोनों ही चीजों का भरपूर फायदा लेने कि लिए आपको टाइमिंग का ध्यान रखना होगा।

-याद रखें अगर आप योग की दुनिया में पहला कदम रख रहे हैं तो एक्सपर्ट्स की मदद जरूर लें। ताकि ट्रेनर आपको सही पोश्चर और सही बॉडी स्ट्रैस के बारे में बता सके। ताकि आपको दर्द या दूसरी दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।
डायट में रखें इन बातों का ध्यान

-फाइबर से भरपूर डायट हमारे शरी को कई तरीकों से लाभ पहुंचाती है। सबसे पहले तो वेट कम करने पर ही हम फोकस करेंगे। दरअसल, हाई फाइबर डायट जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और बीन्स आदि में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। यह फाइबर हमारे पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है।

-क्योंकि रेशे डायजेस्ट होने में वक्त लगता है। इससे हमें भूख कम लगती है और शरीर को पोषण पूरा मिलता है। एक खास फायदा जो हाई फाइबर डायट का है, वह है इसे लेने से हमें कब्ज की समस्या नहीं होती है। यानी पेट साफ रहेगा तो मोटापा भी दूर रहेगा। क्योंकि बीमारियां नहीं पनप पाएंगी।

 

क्या आप भी Body Spray का उपयोग करते है तो जानिये उससे  से होने वाले नुकसान के बारे में

क्या आप भी Body Spray का उपयोग करते है तो जानिये उससे से होने वाले नुकसान के बारे में

पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए लोग बॉडी स्प्रे का सहारा लेते हैं जिससे कि शरीर से आ रही पसीने की बदबू से छुटकारा मिल सके। कुछ लोग बॉडी स्प्रे के इतने शौकीन होते हैं कि वे अलग-अलग वैरायटी के डियोडरेंट अपनी अलमारी में सजाकर रखते हैं और इन बॉडी स्प्रे का रोज इस्तेमाल भी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉडी स्प्रे से आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचता है। जी हां, यदि आप भी डियोडरेंट के शौकीन हैं तो एक बार उनके नुकसान के बारे में भी जान लीजिए।

बॉडी स्प्रे से होने वाले नुकसान

डियोडरेंट के नियमित इस्तेमाल से त्वचा में लाल रेशेज हो जाते हैं व खुजली जैसी समस्या होने लगती है।

बॉडी स्प्रे के इस्तेमाल से सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या भी हो सकती है। किसी-किसी को तेज महक वाले डियोडरेंट से एलर्जी भी होती है।

बॉडी स्प्रे पसीने की दुर्गंध को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन डिओ से पसीना निकलने की प्रक्रिया प्रभावित होती है जिससे अंदर रहने वाला पसीना और भी अधिक दुर्गंधित हो जाता है।
डिओ के इस्तेमाल से आपके अंडरआर्म्स काले भी पड़ सकते हैं। अगर आप सीधे डिओ को स्कीन पर लगाते हैं तो यह धीरे-धीरे आपकी त्वचा को काला करने लगता है।

परफ्यूम व डिओ का इस्तेमाल करते समय सावधानी रखें। इसे सीधे शरीर पर न लगाएं बल्कि कपड़ों पर स्प्रे करें।

ज्वेलरी पहनने से पहले ही परफ्यूम को स्प्रे कर लें, नहीं तो इसमें मिले केमिकल्स से ज्वेलरी की चमक प्रभावित हो सकती है।

 

कीवी खाने से मजबूत होगी इम्यूनिटी, नहीं होंगी ये 7 बीमारियां

कीवी खाने से मजबूत होगी इम्यूनिटी, नहीं होंगी ये 7 बीमारियां

फलों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यह हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के उपचार में तो सहायक होते ही हैं साथ ही साथ यह हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से भी बचाए रखते हैं। इन्हीं फलों में से एक गुणकारी फल का नाम कीवी है। यह तो किसी भी फ्रूट शॉप पर बड़ी आसानी से मिल जाएगा जो आपके लिए बहुत लाभदायक साबित होगा। 

कीवी फल को खाने से होने वाले सात प्रमुख स्वास्थ्य फायदों को यहां बताया जा रहा है, जिसके बाद आप भी इस फल को अपनी डायट में शामिल करके सेहतमंद बने रह सकते हैं। इतना ही नहीं, तेजी से बढ़ रहे संक्रमण को रोकने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी इम्यूनिटी बढ़ाने के कुछ टिप्स जारी किए हैं। 

बूस्ट करेगा इम्यून सिस्टम

सबसे पहले अगर बात की जाए कीवी फल को खाने से होने वाले फायदे के बारे में तो वह आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सक्रिय रूप से असर डालता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कीवी फल में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है जो इम्यून सेल्स को मजबूत करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में मदद करता है। इसलिए एक इम्यूनिटी बूस्टर फ्रूट के रूप में आप इसका सेवन कर सकते हैं।

आंखों के स्वास्थ्य के लिए

आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी कीवी फल के फायदे देखे जा सकते हैं क्योंकि इसमें ल्यूटिन नामक पौष्टिक तत्व पाया जाता है। यह आंखों के लिए बेहद स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसका कार्य आंखों की रेटिना को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसमें होने वाली किसी भी बीमारी से भी बचाए रखने का है। इसलिए आंखों से जुड़ी हुई समस्या से बचे रहने के लिए भी आप कीवी फल का सेवन कर सकते हैं। 

डायबिटीज से बचाए रखने में मदद करे

डायबिटीज की समस्या से बचे रहने के लिए भी कीवी फल का सेवन काफी फायदेमंद रहेगा, क्योंकि इस फल में एंटीडायबेटिक गुण होने के साथ-साथ ब्लड शुगर की मात्रा कम करने की भी क्षमता पाई जाती है। इसलिए डायबिटीज के जोखिम से बचे रहने की साथ-साथ इस बीमारी की चपेट में आने से बचे रहने के लिए भी कीवी फल का सेवन आप नियमित रूप से कर सकते हैं।

कैंसर से बचाने में मददगार

कैंसर आज एक जानलेवा बीमारी बन चुकी है जिसके कारण हर साल हजारों लोगों की मौत होती है। इसलिए हमें अपने खान-पान के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए ताकि हम ऐसी जानलेवा बीमारियों से बचे रहें। कीवी फल का सेवन आपको इस घातक बीमारी से बचाए रखने में मदद कर सकता है क्योंकि इसमें एंटी-कैंसर गुण मौजूद होता है। इसलिए यदि अगर आप हफ्ते में तीन से चार बार भी कीवी फल का सेवन करते हैं तो यह आपको कैंसर के खतरे से काफी हद तक बचाए रखेगा। 

मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए

मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए भी कीवी फल काफी फायदेमंद साबित होगा । इसमें मौजूद विटामिन सी की मात्रा एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में चेहरे की त्वचा के लिए कार्य कर सकती है। एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी कील मुहांसों की समस्या को खत्म करके चेहरे पर मौजूद दाग-धब्बों को भी दूर करने में काफी मददगार साबित होती है इसलिए अगर आप भी मुंहासों की समस्या से परेशान हैं तो कीवी फल का सेवन करके इसके फायदे देख सकते हैं।

बालों के लिए

बालों से जुड़ी हुई समस्या अब धीरे-धीरे आम होती जा रही है। वहीं, कई लोग रूसी और बाल झडऩे की समस्या से परेशान रहते हैं। इससे बचे रहने के लिए कीवी फल काफी फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इसमें विटामिन सी के साथ-साथ विटामिन ए और विटामिन बी भी पाया जाता है। यह बालों के लिए बहुत जरूरी पौष्टिक तत्व माने जाते हैं जिनका सेवन करने से न केवल बालों से रूसी की समस्या खत्म होती है बल्कि बालों की जड़ें मजबूत होने के साथ-साथ बाल झडऩा भी काफी हद तक कम हो जाता है। 

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में

ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने से कई प्रकार के हृदय रोगों से तो बचने में मदद मिलती ही मिलती है साथ ही साथ स्ट्रोक का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। कीवी फल में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में काफी हद तक सक्षम होते हैं। इसलिए ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोज सुबह कीवी फल का सेवन जरूर करना चाहिए।