टमाटर के महंगे होने का अगर आपको भी दुख है, तो इसके इन नुकसानों को जरूर जान लीजिए...इन्हें जानने के बाद आपको टमाटर के महंगे होने का जरा भी दुख नहीं होगा और आप तौबा कर लेंगे इन महंगे टमाटरों से। जानें 5 नुकसान –
रायपुर । कोरोना वायरसों से होने वाला फ्लू कोई नयी बीमारी नहीं है। यह एक सामान्य प्रकार के फ्लू के लक्षणों के समान लक्षण वाला फ्लू है आयुर्वेद में इसे प्रतिष्याय कहते हैं। कोरोना वायरस कई वायरस प्रकारों का समूह है, इनमें से अधिकांष वायरस घातक नहीं होते यह स्तनधारियों और पक्षियों में भी रोग के कारक होते हैं। मनुश्य में यह श्वसन तंत्र में संक्रमण करता है, यह वायरस चीन के वुहान शहर से फैलना शुरू हुआ है। ऐसे असंख्य वायरस वातावरण में मौजूद है, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को कुछ भी मालूम नहीं है। फलस्वरूप ऐसे विशाणुओं एवं जीवाणुओं के संक्रमण से बचाव तथा इनसे ग्रसित रोगियों की चिकित्सा के लिये नये-नये वैक्सीन एवं औशधियों का ईजाद करना लगभग असंभव ही है। प्रकृति में असंख्य वायरस एवं बैक्टीरिया मानव उत्पत्ति के पूर्व से ही विद्यमान है, तथा इन्हें कभी नश्ट किया ही नहीं जा सकता। प्रकृति ने इन वायरस के बीच ही मनुश्यों को स्वस्थ बने रहने के लिये उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान किया है, जिसे स्वयं मनुश्य ने ही अपनी दूशित आहार विधि तथा अनियमित जीवन षैली से षनै: षनै: कम करते आ रहे है।
वेट लॉस करना आसान नहीं है। इसके लिए आपको कड़ी मेहनत और डेडिकेशन की जरूरत होती है। जब बात डायट की आती है तो खुद पर कंट्रोल रखना होता है, एक्सर्साइज करनी होती है। और ये सारी मेहनत करने के बाद जब आप वेट मशीन पर अपना वजन करें और आपको उसमें अंतर नजर आए तो कितनी खुशी होती है ना। लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि आखिर अपना वजन नापते वक्त आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...
3 जरूरी बातों का रखें ध्यान
वेट मशीन पर अपना वजन लेना आसान नहीं है। अलग-अलग तरह के स्केल्स और मशीन बाजार में उपलब्ध है लिहाजा आपके लिए कौन सी मशीन सही है, दिन का कौन सा समय वजन देखने के लिए सबसे सही माना जाता है...इस तरह की कई बातें हैं जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए। लिहाजा मशीन पर अपना वेट देखते वक्त इन 3 बातों का ध्यान जरूर रखें।
अपने वेट का रेकॉर्ड मेनटेन करें
वेट स्केल पर अगर वजन में जरा सी भी कमी नजर आए तो वो किसी अचीवमेंट से कम नहीं लगता लेकिन इन बदलावों पर लगातार नजर रखना जरूरी है और इसके लिए आप चाहें तो एक जर्नल मेनटेन कर सकते हैं या फिर ऐप का इस्तेमाल करें या फिर हर बार जब आप वेट मशीन पर चढ़ें और अपना वजन देखें तो उसे कहीं नोट कर लें। ऐसा करने से आपके वेट लॉस प्रोसेस में एकरूपता बनी रहेगी और आप सही दिसा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं ये भी पता चल जाएगा।
वेट चेक करने के लिए सुबह का वक्त है सही
दिन खत्म होते वक्त अपना वजन चेक करने की बजाए सुबह उठते के साथ सबसे पहले अपना वजन चेक करें। ऐसा इसलिए क्योंकि सुबह उठते के साथ आपका शरीर फ्रेश रहता है, रात भर की नींद के बाद शरीर आराम में रहता है, खाने को पचाने के लिए शरीर को पूरा समय मिलता है। ऐसे में अगर आप सुबह उठते के साथ सबसे पहले अपना वेट चेक करें तो आपको ऐक्युरेट और एकदम सही रीडिंग मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।
कितनी बार वेट चेक करना चाहिए?
अगर आप वेट लॉस की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं तो आपके लिए बेहद जरूरी है कि आप नियमित रूप से अपना वेट चेक करें। लेकिन आखिर हफ्ते या महीने में कितनी बार वेट चेक करना चाहिए, ये कैसे पता चलेगा। तो इसका जवाब ये है कि हफ्ते में 1 बार अपना वजन चेक करें। अलग-अलग फैक्टर्स की वजह से हर दिन आपका वजन ऊपर-नीचे हो सकता है। लिहाजा हफ्ते में एक बार वेट चेक करना काफी है।
सर्दियों का मौसम यानि की सब्जियों का मौसम. सर्दियों में सब्जियों के हमारे पास कई सारे ऑप्शन होते हैं, लेकिन जब बात आती है अच्छी सेहत कि तो दिमाग में हमेशा खाने की ही चीजें चलती हैं. अब जरा सोचिए कि क्या सिर्फ खाने से ही सेहत अच्छी बनेगी ? जी नहीं खाने के साथ हमें अपनी लिक्विड डायट का भी पूरा ध्यान रखना होगा है तभी तो दिल, दिमाग, आंखें और सेहत सब कुछ एकदम फिट रहेगा.
स्किन को खूबसूरत बनाने के लिए मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट्स मौजूद हैं. ये प्रोडक्ट्स स्किन को ग्लोइंग बनाने, खूबसूरत दिखाने और दाग-धब्बे हटाने के कई सारे दावे करते हैं, लेकिन इन प्रोडक्ट्स को खरीदने में जेब पर अच्छा खासा वजन पड़ता है. कई बार तो स्किन के लिए पॉकेट से समझौता किया जा सकता है. पर हर बार ऐसा हो जरूरी नहीं है.
क्या आप जानते हैं की इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने के बजाय आप किचन में इस्तेमाल होने वाली दो चीजों को मिलाकर उबटन बना सकते हैं और स्किन को सुंदर, जवां, फूलों सा खूबसूरत बना सकते हैं. इस घरेलु उबटन के लिए आपको हल्दी और चावल की आवश्यकता होगी.
कैसे बनाएं चावल- हल्दी का उबटन
हल्दी का पाउडर - 2 चम्मच
चावल का आटा - 2 चम्मच
टमाटर का जूस - 1 चम्मच
कच्चा दूध - 2 चम्मच
इन सभी चीजों को मिलाकर एक पेस्ट बनाइए. इस पेस्ट को बनाते वक्त ध्यान रहे कि किसी तरह का बुलबुला न पाए. साथ ही सभी चीजें अच्छे से मिक्स हो जाएं.
गुनगुने पानी से धोएं चेहरा
जब पेस्ट तैयार हो जाए तो इस उबटन को चेहरे पर लगाइए. 30 मिनट के बाग इस उबटन को हल्के गुनगुने पानी से धो लीजिए. सप्ताह में दो या तीन बार इस उबटन का इस्तेमाल करने से पिंपल्स और मुंहासों की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.
कैसे फायदेमंद है ये उबटन
चावल और हल्दी का ये उबटन त्वचा के लिए वरदान साबित हो सकता है. ये उबटन चेहरे पर लगाने से फोड़े फुंसी की समस्या हो सकती है. आयुर्वेद के अनुसार, चेहरे पर रेगुलर बेसिस पर हल्दी लगाने से झुर्रियों से छुटकारा मिलता है. हल्दी लगाने चेहरे पर ग्लो आता है.
महिलाओं के जीवन में मां बनने के बाद काफी कुछ बदलाव आता है. यह बदलाव शारीरिक और मानसिक दोनों रूप में होते हैं. प्रेग्नेंसी की परेशानियों से बाहर निकलने के बाद नवजात की तरह मां की देखभाल की भी जरूरत होती है. डिलीवरी के बाद महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस, कमर के आसपास दर्द होना और गर्भावस्था के दौरान वजन का बढऩा जैसी समस्याएं नजर आने लगती हैं. इन समस्याओं से निपटने के लिए पोषण युक्त आहार के साथ-साथ कुछ योगासन की भी जरूरत होती है. आइए आपको बताते हैं इन योगासनों के बारे में जिकी मदद से डिलीवरी के बाद महिलाएं अपना वजन कम कर सकती हैं.
नए साल के पहले 3 महीने यानी जनवरी से लेकर मार्च तक का समय एग्जाम सीजन माना जाता है। हर क्लास के फाइनल एग्जाम्स के साथ-साथ 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी इसी समय होती हैं। और ये बात तो पैरंट होने के नाते हर माता-पिता मानेंगे कि बच्चों का एग्जाम सिर्फ बच्चों का नहीं होता बल्कि साथ-साथ में माता-पिता का भी एग्जाम होता है। बच्चों की मैराथन पढ़ाई चल रही होती है, उन पर परफॉर्म करने का प्रेशर होता है, मेंटल स्ट्रेस लेवल काफी अधिक होता है। इन सबके साथ-साथ पैरंट्स की बच्चों से अपनी एक्सपेक्टेशन्स भी अलग से होती है।
एग्जाम टाइम पैरंट्स करें बच्चे की मदद
ज्यादातर पैरंट्स इस दौरान बच्चों की पढ़ाई में भी उनकी पूरी मदद करते हैं। उन्हें एक्स्ट्रा क्लास के लिए मदद की जरूरत हो या फिर कोचिंग या अलग टीचर की या फिर सेल्फ रीविजन में पैरंट्स की मदद की...बतौर माता-पिता हम हर तरह से बच्चों की मदद करने की कोशिश करते हैं। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ एक और बेहद इम्पॉर्टेंट चीज है जिसका आपको ध्यान रखना है और वो है बच्चे की डायट। जी हां अगर आपका बच्चा एग्जाम की वजह से इतने सारे मेंटल स्ट्रेस से गुजर रहा है तो उसकी डायट भी उतनी ही अच्छी होनी चाहिए ताकि वो इन सारी चीजों के साथ ष्शश्चद्ग ह्वश्च कर सके।
बच्चे की डायट का रखें पूरा ध्यान
एग्जाम सीजन में बच्चों की हंगर क्रेविंग्स यानी भूख को शांत करने के लिए आपको उन्हें किस तरह की हेल्दी चीजें खिलानी चाहिए इस बारे में हमने बात की डायटिशन्स से और उनके बताए टिप्स हम आपको यहां बता रहे हैं....
बच्चे को दें हेल्दी मील्स
बच्चे का मन पढ़ाई में लगे इसके लिए आपके ब्रेन को एनर्जी की जरूरत होती है और वो एनर्जी आपको सिर्फ हेल्दी और बैलेंस्ड डायट से ही मिल सकती है। आपके बच्चे के खाने में ऐसी चीजें होनी चाहिए जिससे उसका मेंटल अलर्टनेस बढ़े। साथ साथ में छोटी-छोटी भूख के लिए चिप्स या बिस्किट जैसी अनहेल्दी चीजों की बजाए उन्हें हेल्दी स्नैक्स का ऑप्शन दें जैसे- अखरोट, बादाम या फिर एनर्जी बार आदि।
दूध और डेयरी प्रॉडक्ट्स
बच्चे की डायट में दूध और दूध से बने डेयरी प्रॉडक्ट्स को शामिल करें। इसके अलावा स्प्राउट्स, टोफू, अंडा, चिकन, फिश, हेल्दी नट्स के अलावा दलिया, कीन्वा और होल वीट प्रॉडक्ट्स भी बच्चे को खिलाएं जिससे उन्हें अलर्ट रहने और पढ़ाई में फोकस करने में मदद मिले।
ब्रेन को बूस्ट करने वाली चीजें खिलाएं
अखरोट, फिश, फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी, केला, काबुली चना, पालक और ब्रॉकली- ये कुछ ऐसे फूड आइटम्स हैं जिन्हें खाने से याददाश्त बढ़ती है, कॉन्सनट्रेट करने में मदद मिलती है और आपका ब्रेन भी बेहतर तरीके से फंक्शन करने लगता है। साथ ही साथ फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन बिलकुल न करें क्योंकि इन चीजों को पचने में काफी ज्यादा समय लगता है।
लिक्विड डायट पर भी रखें फोकस
पानी बेहद जरूरी है क्योंकि ये हमारे शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा हर दिन कम से 8-10 गिलास पानी पिए। पानी के साथ-साथ लिक्विड डायट भी बच्चे को दें जिसमें आप उन्हें मिल्कशेक, फ्रेश सूप, नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी जैसी चीजें भी दे सकती हैं। अगर आपका बच्चा बोर्ड एग्जाम की तैयारियां कर रहा है तो आप उन्हें 1 कप कॉफी या डार्क हॉट चॉकलेट भी बनाकर दे सकती हैं क्योंकि डायट में कैफीन ऐड करने से ऐक्टिव और अलर्ट रहने में मदद मिलती है।
स्मार्ट होना चाहिए बच्चे का स्नैक्स
सिर्फ ब्रेकफस्ट, लंच और डिनर ही नहीं बल्कि बच्चे का स्नैक्स भी हेल्दी होना चाहिए। इसलिए आप चाहें तो बच्चे को स्नैक्स के तौर पर फ्रेश फ्रूट्स, प्रोटीन बार, भुनी हुई मूंगफली, मखाना, रोस्ट किया हुआ चना या मूंगदाल भी खाने के लिए दे सकती हैं। अगर आपका बच्चा देर रात तक पढ़ाई करता है तो ये सारी चीजें उसके पास जरूर रखें ताकि भूख लगने पर वह मैगी या चिप्स जैसी जंक वाली चीजें खाने की बजाए इन हेल्दी स्नैक्स का सेवन करे।
जो लोग हर समय खुद को थका हुआ, निराशा और उलझन से भरा हुआ महसूस करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि वे बर्नआउट का शिकार हो चुके हैं। यह एक तरह का सिंड्रोम है और इसका संबंध हार्ट रिद्म से भी होता है। यह बात हाल ही एक स्टडी में सामने आई है। ऐसे लोग हर समय एनर्जी की कमी महसूस करते हैं...
बर्नआउट की वजह
वाइटल एग्जॉशन, जिसे आमतौर पर बर्नआउट सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। यह लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने के कारण होता है। जो लोग वर्क प्लेस और घर में किसी ना किसी कारण लंबे समय तक तनाव का सामना करते हैं, उन्हें इस तरह की दिक्कत हो जाती है।
डिप्रेशन से अलग होता है
बर्नआउट और डिप्रेशन में अंतर होता है। जो लोग डिप्रेशन में होते हैं, उनका मूड हर समय लो रहता है। इनमें आत्मविश्वास की कमी होती है और ये किसी तरह के गिल्ट से भरे होते हैं। जबकि बर्नआउट के शिकार लोगों में चिड़चिड़ापन और थकान अधिक देखने को मिलती है।
ऐसे बनती है स्थिति
रिसर्च में यह बात भी सामने आई कि बर्नआउट की यह स्थिति ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलती है, जो एग्जॉशन का लंबे समय तक शिकार रहते हैं। यह कहना है यूएस की साउथर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी द्वारा की गई इस रिसर्च के ऑर्थर परवीन के गर्ग का।
दिल की धड़कनों पर असर
स्टडी में साफ हुआ है कि बहुत अधिक थकान, शरीर में सूजन और सायकॉलजिकल तनाव का बढऩा एक दूसरे से लिंक है। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो हार्ट टिश्यूज को डैमेज करने के का काम करती है। इसी कारण अरिद्मिया की स्थिति बनने लगती है और दिल की धड़कने कभी कम और कभी ज्यादा होती रहती हैं।
दिल की बीमारी का खतरा
एट्रियल फिब्रिलेशन यानी एएफ को अरिद्मिया के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति में हार्ट बीट्स रेग्युलर तरीके से काम नहीं पाती हैं और ब्लड क्लॉट्स, हार्ट फेल्यॉर और दिल संबंधी दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इस खतरे की दर को अभी मापा नहीं जा सका है।
एग्जॉशन से बढ़ती दिल की बीमारी
यह बात पूर्व में हुई कई स्टडीज में साफ हो चुकी है कि जरूरत से अधिक थकान और एग्जॉशन के कारण कार्डियॉवस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। इसमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी शामिल है। गर्ग का कहना है कि अगर एग्जॉशन से बचने और तनाव को डील करने का तरीका जान लिया जाए तो दिल से जुड़ी कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
यहां हुई पब्लिश
बर्नआउट और हार्ट डिजीज के बीच संबंध की कड़ी पर आधारित इस रिसर्च को हाल ही यूरोपिनयन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियॉलजी में पब्लिश किया गया है। यह स्टडी 25 साल तक चली और इसमें 11 हजार लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों में बहुत अधिक थकान, गुस्सा, ऐंटीडिप्रेशन डोज लेनेवाले और ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनके पास सोशल सपॉर्ट की कमी थी।
आम तौर पर सर्दी होने या शारीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि हल्दी वाले दूध के एक नहीं अनेक फायदे हैं? नहीं जानते तो हम बता रहे हैं-
हल्दी अपने एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के लिए जानी जाती है, और दूध, कैल्शियम का स्त्रोत होने के साथ ही शरीर और दिमाग के लिए अमृत के समान हैं। लेकिन जब दोनों के गुणों को मिला दिया जाए, तो यह मेल आपके लिए और भी बेहतर साबित होता है, जानते हैं कैसे -
1 जब चोट लग जाए - यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए, तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है। क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता।
2 शारीरिक दर्द - शरीर के दर्द में हल्दी वाला दूध आराम देता है। हाथ पैर व शरीर के अन्य भागों में दर्द की शिकायत होने पर रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन करें।
3 त्वचा हो साफ और खूबसूरत - दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है, और दूध के साथ हल्दी का सेवन, एंटीसेप्टिक व एंटी बैक्टीरियल होने के कारण त्वचा की समस्याओं जैसे - इंफेक्शन, खुजली, मुंहासे आदि के बैक्टीरिया को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। इससे आपकी त्वचा साफ और स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।
4 सर्दी होने पर - सर्दी, जुकाम या कफ होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इससे सर्दी, जुकाम तो ठीक होता ही है, साथ ही गर्म दूध के सेवन से फेफड़ों में जमा हुआ कफ भी निकल जाता है। सर्दी के मौसम में इसका सेवन आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।
5 हड्डियां बने मजबूत - दूध में कैल्शितयम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और हल्दी के गुणों के कारण रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इससे हड्डी संबंधित अन्य समस्याओं से छुटकारा मिलता है और ऑस्टियोपोरोसिस में कमी आती है।
6 जब नींद न आए - यदि आपको किसी भी कारण से नींद नहीं आ रही है, तो आपके लिए सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा है, हल्दी वाला दूध। बस रात को भोजन के बाद सोने के आधे घंटे पहले हल्दी वाला दूध पीएं, और देखिए कमाल।
7 पाचन तंत्र हो गड़बड़ - हल्दी वाले दूध का सेवन, आपकी आंतो को स्वस्थ रखकर पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। पेट के अल्सर, डायरिया, अपच, कोलाइटिस एवं बवासीर जैसी समस्याओं में भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद है।
8 जोड़ों के लिए असरकारी - हल्दी वाले दूध का प्रतिदिन सेवन, गठिया- बाय, जकड़न को दूर करता है, साथ ही जोड़ों मांसपेशियों को लचीला बनाता है।
9 ब्लड शुगर कम करे - खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाने पर हल्दी वाले दूध का सेवन ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है।लेकिन अत्यधिक सेवन शुगर को अत्यधिक कम कर सकता है, इस बात का ध्यान रखें।
10 सांस की तकलीफ - हल्दी वाले दूध में मौजूद एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुण, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, फेफड़ों में जकड़न व कफ से राहत देने में सहायता करते हैं। गर्म दूध के सेवन से शरीर में गर्मी का संचार होता है जिससे सांस की तकलीफ में आराम मिलता है।
11 वायरल संक्रमण में आए बदलाव एवं अन्य कारणों से होने वाले वायरल संक्रमण में हल्दी वाला दूध सबसे बेहतर उपाय है, जो आपको संक्रमण से बचाता है।
जब हरी पत्तेदार सब्जियों की बात करें तो पालक का नाम सबसे पहले आता है। इसका पौधा लगभग एक से डेढ़ फुट ऊंचा होता है। पालक की सब्जी जितनी आसानी से बन जाती है, इसके सेवन से उतनी ही आसानी से आपको सेहत और सौन्दर्य दोनों लाभ मिल सकते है। आइए, जानते हैं पालक के पत्तों का किसी भी रूप में सेवन करने से होने वाले फायदे –
सुबह काम का बोझ और शाम को ऑफिस में ओवर टाइम। ऐसे में जिम ज्वॉगइन करना एक आसान नहीं है। ऐसे में आपको चाहिए कि सुबह के वक्त थोडा सा समय निकाल लें तो आप दिनभर फिट और तरोताजा महसूस करेंगे। करना आपको इतना है कि अपने लिए सुबह सिर्फ 40 मिनट निकालना है। और इन 40 मिनट में आपको धीमी गति से लेकिन मिलेगी स्थाई फिटनेस। जानते हैं कैसे।
आधा घंटा पहले उठे
सुबह जल्दीह उठते हैं तो बेहतर। अगर देरी से उठने की आदत है तो कम से कम इतना कर लें कि 30 या 40 मिनट पहले उठ जाए। इसके बाद यह 40 मिनट आप योगा को दें।
रोज करें योगा
यह पूरे 40 मिनट आप योगा को दें। योगा में आप अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति और दूसरे प्राणायाम शामिल करें। इन्हें 5- 5 मिनट का वक्त दें।
सूर्य नमस्कार
प्राणायाम करने के बाद करीब पांच मिनट का वक्तग सूर्य नमस्का र को दें। प्राणायाम जहां आपके अंदर की कोशिकाओं को मजबूत करेगा वहीं सूर्य नमस्कार बाहर की मांसपेशियों को लचीला बनाएगा।
पांच मिनट करें रिलेक्सन
प्राणायाम और कसरत करने के बाद पांच मिनट ध्याीन में लगाएं। इसके बाद अपना पसंदीदा संगीत सुने। सकारात्मचक सोचे और मुस्कुराए। यह दोनों तरह के अभ्याणस आपकी शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करेगा, मन को शांत रखेगा और स्वीस्य्ानस बनाएगा। अगर आपके दिन की शुरुआत इसी तरह होगी तो आप दिनभर तंदरुस्त रहेंगे।
यू करें शाम की शुरुआत
1. रात 8 बजे से पहले खाना जरुर खा लें।
2. डिनर जितना हो सके लाइट रखें।
3. शाम 6 बजे के बाद पानी पीना कम कर दें, ताकि रात को बार-बार यूरीन आने पर आपकी नींद न डिस्टर्ब हो।
4. ज्यादा ऑयली फूड रात के वक्त खाने से परहेज करें।
5. रात बेड पर लेटे हुए मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल न करें।
6. खाने के दो घंटे बाद 1 छोटा कप दूध जरुर पिएं, इससे कम समय में आप अपनी नींद पूरी कर लेंगे।
सफर चाहे लंबा हो या छोटा आजकल हर किसी के कानों में ईयरफोन और हेडफोन जरूर मिलेगा. आज के वक्त में घंटों तक ईयरफोन का इस्तेमाल करना एक आदत सी बन गई है. अगर, आपको भी कोई ऐसी ही आदत लग गई है, तो सावधान हो जाइए.
























