कानपुर, यूपी के इत्र व कंपाउंड कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर स्थित आवास से मिले 181 करोड़ के बाद अब कन्नौज के घर की दीवारें, फर्श, सीलिंग, और तहखाने करोडों रुपये और सोना-चांदी उगल रही हैं। रविवार को तीसरे दिन कन्नौज में महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) और आयकर विभाग की कार्रवाई में करीब 110 करोड़ रुपये नकद और 275 किलो सोना-चांदी मिला है। अभी मशीनों से नोटों की गिनती का सिलसिला जारी है। रकम और बढ़ेगी। कर चोरी की आशंका में बुधवार को डीजीजीआई की टीमों ने कानपुर में शिखर पान मसाला, गणपति ट्रांसपोर्ट के यहां छापा मारा था। यहां से मिले सुराग के आधार पर गुरुवार को इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर, कन्नौज, गुजरात, मुंबई स्थित घर, फैक्ट्री, ऑफिस, कोल्डस्टोरेज और पेट्रोल पंप पर कार्रवाई शुरू की गई।
कानपुर में मिली रकम की गिनती पूरी होने के बाद डीजीजीआई की टीम पीयूष को हिरासत में लेकर कन्नौज के छिपट्टी मोहल्ला में स्थित घर पहुंची थी। यहां शनिवार को नोटों से भरे आठे बोरे बरामद हुए थे। तीसरे दिन छिपट्टी में पीयूष जैन के पैतृक मकान, पड़ोस में दो अन्य मकानों और गोदामों में छापेमारी हुई। पैतृक मकान की दीवारों, फर्श, सीलिंग और तहखाने से 110 करोड़ कैश, 250 किलो चांदी और 25 किलो सोना मिला।
10 से 2000 तक के नोटों की गड्डियां मिलीं
सबसे बड़ी रकम पीयूष जैन के बेड रूम में प्लाई और रेक्सीन की बनी शोपीस दीवार के अंदर से मिली है। इसके अलावा सीढ़ियों के अंदर बने होल से भी कुछ रुपये मिले। बरामद रुपयों में दो हजार, पांच सौ, सौ और दस-दस के नोट हैं। गुजरात के अहमदाबाद और लखनऊ से आईं दो टीमों ने छानबीन प्रक्रिया की जानकारी ली।
दीवारों को तोड़ने के लिए करीब 10 मजदूर लगाए गए। ये लोग गैस वेल्डिंग कटर और छेनी-हथौड़ों से दीवारों और लॉकरों को तोड़ने में जुट रहे। दरवाजों को खोलने के लिए डुप्लीकेट चाबी बनाने के लिए पांच कारीगरों को लगाया गया है।
अब तक की छानबीन में मिले नोटों के जखीरे की मशीन से गिनती मकान के दूसरे मंजिल पर चल रही है। सोना और चांदी की तौल के लिए देशी तराजू को भी लाया गया। डीजीजीआई के अधिकारियों ने अभी और कैश मिलने की संभावना जताते हुए सोमवार सुबह तक छानबीन जारी रहने की बात कही है।
पीयूष के पास करोड़ों की नकदी कहां से आई? जांच एजेंसियां इसकी पड़ताल में जुटी हैं। सूत्रों की मानें तो एक प्रभावशाली कारोबारी से प्रतिस्पर्धा में पीयूष के काले कारनामों का चिट्ठा खुल गया। दरअसल, पीयूष बड़े पान मसाला कारोबारियों से सीधे संपर्क बढ़ाने में लग गया था, जो उसे खटक गया था। सूत्रों का दावा है कि पीयूष के ठिकानों से मिला खजाना हवाला कारोबार और एक बड़े पान मसाला कारोबारी का है। पीयूष और उसका भाई अमरीष जैन कन्नौज में कंपाउंड किंग नाम से मशहूर हैं। इनका कंपाउंड (पान मसाला और इत्र में फ्लेवर के लिए मिलाया जाने वाला मिश्रण) का पुश्तैनी कारोबार है। इनके बाबा और पिता भी यही काम करते थे, लेकिन बेहद सीमित स्तर पर। बीते 15 साल से दोनों भाई काम देख रहे हैं, लेकिन इनका टर्नओवर भी बहुत अधिक नहीं है। कन्नौज के शीर्ष कारोबारियों की सूची में भी इनकी गिनती नहीं है। सूत्रों का कहना है कि इनका कारोबार गुजरात, मुंबई और कानपुर तक है। कन्नौज में इस तरह का काम बड़े पैमाने पर होता है। छोटे-छोटे कारोबारी बड़े पान मसाला कारोबारियों को कंपाउंड की आपूर्ति करते हैं। पीयूष जैन को शुक्रवार देर रात करीब दो बजे महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद की टीम ने आनंदपुरी स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों के अनुसार कन्नौज में इत्र और कंपाउंड के कारोबार पर कुछ साल से एक सियासी पृष्ठभूमि वाले कारोबारी का एकाधिकार जैसा है। स्थानीय कारोबारियों से इत्र और कंपाउंड खरीदकर वह उस पर अपना टैग लगाकर बड़ी कंपनियों से डील करते हैं। इसमें उन्हें मोटा मुनाफा होता है। इनसे पीयूष और अमरीष की अच्छी पहचान होने के साथ कारोबारी डीलिंग भी रही। कुछ समय पहले जैन बंधुओं ने प्रभावशाली कारोबारी को बाईपास कर देश की तीन बड़ी पान मसाला कंपनियों के साथ सीधी डीलिंग शुरू कर दी।
इसमें शिखर पान मसाला समूह भी शामिल है। 22 दिसंबर को डीजीजीआई (महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस) ने शिखर पान मसाला के मालिक के घर भी छापा मारा था। सूत्रों का दावा है कि जैन बंधुओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कारोबारी ने पूरे गठजोड़ की जानकारी डीजीजीआई को दे दी। इसके बाद यह कार्रवाई हुई। यह भी बताया जा रहा है कि शिकायत करने वाले कारोबारी या जांच एजेंसी के अफसरों को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि पीयूष के ठिकानों से इतना बड़ा खजाना निकलेगा।
एक अंदेशा यह भी, जांच कर रहे अफसर
सूत्रों ने बताया कि पीयूष के आनंदपुरी स्थित आवास से मिले नोटों के बंडल बहुत पुराने नहीं हैं। सामने आया है कि इस साल फरवरी में एक पान मसाला कारोबारी की कानपुर देहात स्थित पॉलिस्टर फिल्म फैक्ट्री में आग लगी थी। इसमें करोड़ों के नुकसान की बात कही गई थी। सूत्रों के अनुसार, इसमें भी खेल हुआ था। प्लांट और मशीनरी को बेचने के बाद जानबूझकर आग लगवाई गई थी। इसमें मशीनों की बिक्री से मिले पैसों के अलावा करोड़ों रुपये का क्लेम भी लिया गया। यह रकम पीयूष के घर में डंप की गई थी। सूत्रों का दावा है कि पीयूष ने अन्य कई कंपनियों के बेनामी धन को भी अपने यहां जमा कर रखा था। 22 दिसंबर को डीजीजीआई अहमदाबाद की टीम ने एक साथ शिखर पान मसाला, ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन और इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां कार्रवाई की थी। अफसर फैक्ट्री में आग लगने की घटना की भी जांच कर रहे हैं।
नोटों में दर्ज साल और नंबर की भी जांच
इतनी नकदी मिलने के बाद रुपयों की भी जांच की जा रही है। मसलन नोट किस साल जारी हुए, इनकी सीरीज क्या है, क्या एक ही सीरीज के हैं? इन बिंदुओं पर भी पड़ताल कराई जा रही है, ताकि नोटों के स्रोत का पता लगाया जा सके।