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Transfers: मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 32 IAS समेत कई अफसरों के तबादले

Transfers: मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 32 IAS समेत कई अफसरों के तबादले

 मध्यप्रदेश।  मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक 32 IAS और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके साथ ही ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्त भी बदले गए हैं। इसके अलावा करीब 10 जिलों के CEO जिला पंचायत को भी नई जगह पदस्थ किया गया है।

2016 से 2024 बैच तक के अफसरों को नई जिम्मेदारी
जारी आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है। इनमें CEO जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, SDM और सहायक कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को राज्य शासन के अलग-अलग विभागों में उप सचिव बनाया गया है, जबकि कुछ को नगर निगम में आयुक्त और अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

ग्वालियर नगर निगम के कमिश्नर बदले
अभिषेक चौधरी (2018 बैच) को CEO जिला पंचायत धार से हटाकर आयुक्त, नगर पालिक निगम ग्वालियर बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के मौजूदा आयुक्त संघ प्रिय को अब CEO जिला पंचायत सिंगरौली की जिम्मेदारी दी गई है। अक्षय कुमार तेजपाल को CEO जिला पंचायत दतिया से अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम भोपाल बनाया गया है।

सतना नगर निगम को भी मिला नया आयुक्त
डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा (2019 बैच) को CEO जिला पंचायत खंडवा से आयुक्त, नगर पालिक निगम सतना बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

जिला पंचायतों में भी बड़ा बदलाव
तबादला सूची में कई जिलों के CEO जिला पंचायत बदले गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को CEO जिला पंचायत सिंगरौली से CEO जिला पंचायत सागर बनाया गया है। नवीन कुमार धुर्वे को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ से CEO जिला पंचायत देवास भेजा गया है। काजल जावला को CEO जिला पंचायत बड़वानी से अपर मिशन संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है। अभिषेक सराफ को CEO जिला पंचायत बालाघाट से अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास बनाया गया है। विवेक के. डी. को CEO जिला पंचायत सागर से CEO, जबलपुर विकास प्राधिकरण बनाया गया है।

2022 बैच के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग
2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा बनाया गया है। कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। अर्पित गुप्ता को CEO जिला पंचायत बड़वानी और तनुश्री मीणा को CEO जिला पंचायत बालाघाट बनाया गया है। वहीं आशीष को अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम इंदौर की जिम्मेदारी मिली है।

कई अधिकारियों को उप सचिव बनाया गया
संजना जैन को अपर कलेक्टर मेहर से उप सचिव, जल संसाधन विभाग भेजा गया है। ज्योति शर्मा को CEO जिला पंचायत देवास से उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन बनाया गया है। अंजली जोसेफ जोनाथन को CEO जिला पंचायत हरदा से उप सचिव, लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अनिल कुमार डामोर को अपर कलेक्टर विदिशा से उप सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पदस्थ किया गया है।

2024 बैच के अधिकारियों को SDM की जिम्मेदारी
2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की जिम्मेदारी दी गई है।

इनमें आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली, पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी, सुशील श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जमादार फरहान इरफान को शाहपुरा, ठाकुर ऋत्विक विजय को बिजावर और नवकीरण कौर को उदयपुरा का SDM बनाया गया है।

श्रद्धा शुक्ला को अपर कलेक्टर खंडवा की जिम्मेदारी
आदेश के अनुसार श्रद्धा शुक्ला (2022 बैच) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए कनिष्ठ वेतनमान का भी उल्लेख किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी स्टारलिंक सेवा: एलन मस्क

भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी स्टारलिंक सेवा: एलन मस्क

 दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि स्टारलिंक की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा भारत में सबसे कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी का इंतजार कर रही है।

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवाएं प्राप्त क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मदद करेगा।” मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट पहुंच का अंतर अभी भी बना हुआ है। एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में अभी भी चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा (4जी) उपलब्ध नहीं थी। यह दर्शाता है कि देश के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक पारंपरिक दूरसंचार ढांचा अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में कुल 109.3 करोड़ इंटरनेट सब्सक्रिप्शन्स थीं, जिनमें से 44.08 करोड़ सब्सक्रिप्शन्स ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन घनत्व केवल प्रति 100 लोगों पर 48.31 था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 प्रति 100 लोगों तक पहुंच चुका था। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल पहुंच के मामले में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।

इसी संदर्भ में पोस्ट में कहा गया कि भारत सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत 8.5 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया जा चुका है और लगभग 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवाओं के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद जून 2026 तक केवल 80,472 ग्राम पंचायत उपस्थिति केंद्र ही पूरी तरह परिचालन में थे।

पोस्ट में आगे कहा गया है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं जहां पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना कठिन और महंगा है। इनमें दूरस्थ गांव, पर्वतीय क्षेत्र, द्वीपीय इलाके और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने से पहले नियामकीय मंजूरियां, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां पूरी की जानी चाहिए। कंपनी लंबे समय से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा है, जो निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित हजारों उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक उच्च-गति इंटरनेट पहुंचाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं सीमित या अनुपलब्ध हैं।

इससे पहले अगस्त में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि एलन मस्क की कंपनी एक्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नए नियम का पालन करना होगा, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक सरकार द्वारा सामग्री हटाने के अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा, एलन मस्क ने दावा किया है कि एक्स में शामिल एक नए एल्गोरिदम का खुलासा करने के बाद ‘सरकारों द्वारा आवश्यक कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है’।

सीमाएं सुरक्षित हुए बिना भारत सुरक्षित नहीं रह सकता: गृह मंत्री अमित शाह

सीमाएं सुरक्षित हुए बिना भारत सुरक्षित नहीं रह सकता: गृह मंत्री अमित शाह

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित रह सकता है।

उन्होंने कहा कि उनके कई बार अनुरोध करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई।

अमित शाह ने कहा कि राज्य के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कार्यक्रमों में कभी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने इस परंपरा को तोड़ने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई दी।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने सिलीगुड़ी स्थित एसएसबी फ्रंटियर मुख्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में कहा, ‘‘मैंने बीएसएफ द्वारा सीमा पर बाड़ लगाए जाने के लिए जमीन देने की कई बार गुहार लगाई लेकिन (पूर्व मुख्यमंत्री) ममता बनर्जी ने इसे अनसुना कर दिया। मैं सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1,129 एकड़ जमीन की मांग 2014 से कर रहा था। राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद ही हमें यह जमीन मिली।’’

उन्होंने कहा कि एसएसबी कोई राजनीतिक संगठन नहीं है और सीमावर्ती बलों के समारोहों से पूर्व मुख्यमंत्रियों की दूरी ने गलत संदेश दिया। गृह मंत्री ने कहा कि वह आजादी के बाद देश में बनीं पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को उचित सम्मान नहीं दिए जाने से दुखी थे।

उन्होंने कहा, ‘‘इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया लेकिन इससे पहले भारत में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण कभी नहीं गाया गया था। मुझे इस बात की तसल्ली है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा इसकी रचना के 150वें वर्ष में देश ने इस गीत को आखिरकार उचित मान्यता दी है।’

विशाखापत्तनम में 22-23 अगस्त को ब्रिक्स युवा और खेल मंत्रियों की बैठक

विशाखापत्तनम में 22-23 अगस्त को ब्रिक्स युवा और खेल मंत्रियों की बैठक

 भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 22 अगस्त को ब्रिक्स युवा मंत्रियों की बैठक और 23 अगस्त को ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। दो दिवसीय इन बैठकों में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख शामिल होंगे। बैठकों का उद्देश्य युवा मामलों और खेलों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, जबकि युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी इसमें शामिल होंगी।

लचीलेपन और सहयोग पर भारत का जोर

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। इसके तहत भारत ने जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर जोर दिया है। दोनों मंत्रिस्तरीय बैठकें भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाने और युवा विकास तथा खेलों के क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग मजबूत करने का मंच प्रदान करेंगी।

युवा विकास और सशक्तिकरण पर चर्चा

22 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स युवा मंत्रियों की बैठक में युवा विकास और सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, युवाओं के कल्याण और सतत विकास जैसे विषय बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल होंगे।

युवा परिषद की सिफारिशों पर विचार

बैठक में ब्रिक्स युवा परिषद की बैठक और ब्रिक्स युवा शिखर सम्मेलन से सामने आई सिफारिशों पर भी विचार किया जाएगा। सदस्य देश भविष्य में युवा सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करेंगे। साथ ही, अगले ब्रिक्स अध्यक्ष देशों के कार्यकाल में सहयोग को आगे बढ़ाने के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा होगी।

संयुक्त घोषणा और सहयोग रूपरेखा होगी स्वीकार

युवा मंत्रियों की बैठक के अंत में ब्रिक्स युवा मंत्रिस्तरीय संयुक्त घोषणा और ब्रिक्स युवा सहयोग रूपरेखा को अपनाए जाने की उम्मीद है। मनसुख मांडविया भारत का देश वक्तव्य देंगे, जबकि रक्षा खडसे समापन टिप्पणी प्रस्तुत करेंगी।

खेल सहयोग मजबूत करने पर जोर

23 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में सभी 11 सदस्य देशों के बीच खेलों के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा होगी। भारत की अध्यक्षता के दौरान स्पोर्ट्स ट्रैक में पारंपरिक और स्वदेशी खेलों, खेल प्रौद्योगिकी, खेल विनिर्माण और संयुक्त घोषणा को अंतिम रूप देने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

खेलों पर संयुक्त घोषणा होगी स्वीकार

खेल मंत्रियों की बैठक के समापन पर ब्रिक्स खेल संयुक्त घोषणा को अपनाया जाएगा। ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि बैठक में अपने-अपने देशों का वक्तव्य देंगे।

खेल प्रौद्योगिकी और विनिर्माण पर फोकस

स्पोर्ट्स ट्रैक के तहत खेल प्रौद्योगिकी और खेल विनिर्माण को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में शामिल किया गया है। बैठकों के जरिए ब्रिक्स देश अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के साथ संस्थागत सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे।

साइकिलिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आयोजित

कार्यक्रम के दौरान ब्रिक्स फ्रेंडशिप साइकिलिंग इवेंट भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा द्विपक्षीय बैठकें और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दोनों मंत्रिस्तरीय बैठकें युवा विकास और खेलों से जुड़े साझा मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के बीच संस्थागत सहयोग को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेंगी।

सीएम योगी का भारत-जापान युवाओं से आह्वान, बोले- शिक्षा और संस्कृति से मजबूत होंगे रिश्ते

सीएम योगी का भारत-जापान युवाओं से आह्वान, बोले- शिक्षा और संस्कृति से मजबूत होंगे रिश्ते

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को भारत और जापान के युवाओं के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। लखनऊ में जापान और भारत के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों को मजबूत बनाने में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका होगी। प्रतिनिधिमंडल में यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी, जापान के 13 हाईस्कूल छात्र और लखनऊ के विभिन्न स्कूलों के 20 छात्र शामिल थे।

शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से मजबूत होंगे संबंध

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक संबंधों की नींव शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साझा अनुभवों के जरिए मजबूत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत रिश्ते कक्षाओं, विश्वविद्यालय परिसरों, प्रयोगशालाओं और युवा मनों के बीच बनते हैं। दोनों देशों के बच्चों को एक-दूसरे की संस्कृति, मूल्यों और जीवन-दृष्टि को समझना चाहिए और साथ मिलकर सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

युवा होंगे भारत-जापान साझेदारी के प्रभावी राजदूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बच्चे भविष्य में भारत-जापान साझेदारी के सबसे प्रभावी राजदूत बनेंगे। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होंगे। यह दोनों देशों के लिए अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

जापान की ताकत और भारत की युवा प्रतिभा का मेल

योगी ने कहा कि जापान तकनीक, परंपरा और प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। जापान की ‘इकिगाई’, टीमवर्क और आपसी सम्मान जैसी खूबियों को भारत के युवा कार्यबल और प्रतिभा के साथ जोड़ने से दुनिया के लिए नई संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने छात्रों से कहा कि आज वे विद्यार्थी हैं, लेकिन कल वैज्ञानिक, कलाकार, खेल चैंपियन, नीति निर्माता और वैश्विक नेता बनेंगे।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ से जुड़ी भारत-जापान साझेदारी

मुख्यमंत्री ने भारत-जापान साझेदारी को भारत की पारंपरिक विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का मंत्र इसी विचार का विस्तार है।

जापानी छात्रों ने देखा उत्तर प्रदेश का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वैभव

योगी ने जापानी छात्रों की उत्तर प्रदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश भारत के आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि छात्र अवध क्षेत्र में हैं और अयोध्या, भगवान राम की जन्मभूमि, यहां से करीब है। छात्रों ने आगरा में ताजमहल का भी दौरा किया है। इसके बाद वे वाराणसी और सारनाथ जाएंगे, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह उत्तर प्रदेश भारत की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।

यामानाशी गवर्नर ने टीमवर्क पर दिया जोर

यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी ने भारत और जापान के बीच समृद्ध भविष्य के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दोनों देशों के छात्रों से टीमवर्क की भावना अपनाने और भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। जापानी छात्रों ने भी भारत यात्रा को लेकर उत्साह जताया और भारतीय छात्रों के साथ भविष्य में अधिक संवाद और सहयोग की उम्मीद व्यक्त की। 

कल्याण सिंह ने सत्ता गंवायी लेकिन रामभक्तों पर गोली नहीं चलाई : योगी आदित्यनाथ

कल्याण सिंह ने सत्ता गंवायी लेकिन रामभक्तों पर गोली नहीं चलाई : योगी आदित्यनाथ

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को अटल बिहारी बाजपेयी इकाना स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से मैं बाबू जी के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कल्याण सिंह ने प्रभु श्रीराम के लिए अपनी सत्ता गंवायी लेकिन रामभक्तों पर गोली नहीं चलाई। याद करिए राम जन्मभूमि आन्दोलन को उन्होंने कहा कि संघर्ष स्वीकार है। सत्ता दूर हो स्वीकार है लेकिन प्रभु श्रीराम का अपमान स्वीकार्य नहीं है। आज जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर को देखते हैं तो बाबू कल्याण सिंह की स्मृति जीवंत हो उठती हैै।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लम्बे समय तक बाबू कल्याण सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में रहने का अवसर प्राप्त हुआ है। 'आज का दिन हिंदू गौरव दिवस है। बाबूजी की स्मृतियां हमारे लिए प्रेरणा हैं। आदमी अपने कर्मों से बड़ा व महान होता है। अतरौली के एक सामान्य किसान परिवार में जन्म लेने वाले बाबू जी अपनी कर्मठता और देश के प्रति समर्पण के भाव से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में तपे हुए एक स्वयंसेवक के रूप में, एक किसान, एक शिक्षक, एक विधायक, सांसद, एक मंत्री व एक मुख्यमंत्री व राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह का जीवन हर उस भारतीय के लिए जिसके लिए भारत प्रथम है, सनातन मूल्य प्रथम है, राष्ट्र प्रथम का भाव रखता है, उसके लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उनकी सादगी, तप व साधना से भरा जीवन था। उन्हाेंने सदैव सनातन मूल्यों की रक्षा करते हुए गरीबों के लिए अन्नदाता किसानों व युवाओं के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गलत काम बाबू जी से कोई करा नहीं सकता था। वह बोलते थे कल्याण सिंह टूट सकता है लेकिन झुक नहीं सकता। गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले पीडीए का अर्थ रोज बदलते रहते हैं। एक दिन पी का मतलब पाकिस्तान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि पिछले नौ वर्ष में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की मृत्यु हुई। कल्याण सिंह की मृत्यु होने पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सारे कार्यक्रम निरस्त कर लखनऊ आये थे। हमारे लिए कष्टकारी था कि एक सामान्य शिष्टाचार होता है। बसपा प्रमुख मायावती ने आकर बाबू जी को श्रद्धांजलि दी लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया ने बाबू जी को प्रत्यक्ष जाकर श्रद्धांजलि देने के बजाय शब्दों से भी व्यक्त् नहीं किया। इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है।

योगी ने कहा कि बाबू जी का जीवन सनातन मूल्यों के लिए समर्पित था। कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश में सुशासन की नींव रखी। बाबू जी ने युवाओं को मंच दिया। उत्तर प्रदेश को एक पहचान दी। सनातन मूल्यों की रक्षा करते हुए अयोध्या में गुलामी के ढ़ांचे को गिराकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। जो बाबूजी ने कहा वो करके दिखाया। डबल इंजन सरकार कल्याण सिंह के सपनों को साकार करेगी।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, सांसद राजबीर सिंह राजू, उन्नाव सांसद सच्चिदानन्द हरि साक्षी महाराज, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए विशेष त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड तैयार : अमित शाह

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए विशेष त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड तैयार : अमित शाह

 सिलीगुड़ी। तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की विशेष बैठक में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले इस संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।

अमित शाह ने बताया कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए विशेष ‘त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड’ तैयार किया गया है। इसके तहत चोपड़ा, किशनगंज और धुबरी स्थित तीन प्रमुख बेस से पूरे कॉरिडोर क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने की पुरानी समस्या का भी उल्लेख किया। हालांकि, वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में इस दिशा में सहयोग मिलने पर उन्होंने संतोष जताया।

अमित शाह ने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2027 के बजट में दिल्ली-सिलीगुड़ी रेल कॉरिडोर बनाने की योजना का उल्लेख किया गया है। इससे उत्तर बंगाल और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय गृह मंत्री के बयान को सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बढ़ती अहमियत के रूप में देखा जा रहा है।

सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरने को राहुल दे रहे धरना: नड्डा

सिर्फ मीडिया में सुर्खियां बटोरने को राहुल दे रहे धरना: नड्डा

 नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने संसद मार्ग थाने के बाहर राहुल गांधी के धरने को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश एक बार फिर राहुल गांधी की सस्ती और सुर्खियां बटोरने वाली राजनीति देख रहा है। उनका यह धरना सिर्फ मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए है।

जेपी नड्डा ने मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि यह धरना न तो छात्रों के हित में है और न ही न्याय के लिए, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और राहुल की मीडिया में बने रहने की कोशिश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की घटना का संज्ञान सुप्रीम कोर्ट पहले ही ले चुका है और एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति जांच कर रही है। ऐसे में जब देश की सर्वोच्च अदालत मामले की जांच कर रही है, तो राहुल का थाने के बाहर कैमरों के सामने धरना देना न्यायपालिका पर अविश्वास दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रदर्शन केवल सुर्खियों में बने रहने का प्रयास है।

नड्डा ने कहा कि यदि इस पूरे घटनाक्रम के समय पर नजर डालें तो साफ होता है कि कांग्रेस इस समय वंदे मातरम् विवाद को लेकर देशभर में आलोचना झेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत के अपमान और कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता द्वारा तिरंगे के आकार का केक काटे जाने के मामले में जनता जवाब मांग रही है।

उन्होंने कहा कि इसी विवाद से ध्यान भटकाने और अपनी राष्ट्रविरोधी छवि को छिपाने के लिए राहुल ने यह नया राजनीतिक नाटक रचा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परजीवी पार्टी है। अब कांग्रेस युवाओं और छात्रों के भविष्य को भी खत्म कर देना चाहती हैं। राहुल को समझ लेना चाहिए कि जनता उनके हिट एंड रन की नीति को समझ चुकी है।

राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने किया नमन, पंचायती राज और तकनीकी क्रांति में योगदान को सराहा

राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने किया नमन, पंचायती राज और तकनीकी क्रांति में योगदान को सराहा

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर गुरुवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली स्थित वीर भूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पार्टी ने राजीव गांधी के विजन और योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल देश के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी को पुष्प अर्पित किए। उनके साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे। राहुल गांधी ने भी अपने पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर कांग्रेस नेताओं ने राजीव गांधी के दूरदर्शी फैसलों को याद किया। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, “राजीव गांधी का राजनीतिक कार्यकाल छोटा था, लेकिन उनका योगदान बहुत बड़ा था। उन्होंने कई क्रांतिकारी कदम उठाए, जिनमें पंचायती राज, आईटी क्रांति और वोटिंग की उम्र घटाकर 18 साल करना शामिल है। अगर राजीव आज हमारे बीच होते तो हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नंबर वन होते।”

वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सिर्फ औपचारिकता न निभाएं। उन्होंने कहा, “आज जो लोग यहां आए हैं, उनसे मेरी गुजारिश है कि वे सिर्फ ‘परिक्रमा’ करने के बजाय यह पढ़ें कि राजीव जी ने क्या कहा था, इस देश की यात्रा के लिए उनका विजन क्या था और उन्होंने देश के चरित्र के बारे में हमें क्या बताया था। जब तक हम उन बातों को ध्यान में नहीं रखेंगे, तब तक पीएम मोदी से लड़ना बहुत मुश्किल होगा।”

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने कहा, “आज हम राजीव गांधी और उनके आदर्शों को याद कर रहे हैं। उनकी याद में यहां हजारों लोग जमा हुए हैं। उनके कार्यकाल में देश का कंप्यूटराइजेशन और जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहल की गईं। राजीव गांधी ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए बहुत कुछ किया और उनके उत्थान के लिए काम किया।”

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “हमारे लिए यह प्रेरणा का दिन है और यह जगह भी प्रेरणा का स्रोत है। जब भी हम यहां आते हैं, तो नई ऊर्जा के साथ लौटते हैं। अगर राजीव आज जीवित होते, तो इस देश का इतिहास बदल गया होता, इस देश का भविष्य बदल गया होता, इस देश की किस्मत बदल गई होती। यह हमारा दुर्भाग्य है कि बहुत कम उम्र में ही वे हमें छोड़कर चले गए।”

कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा, “राजीव गांधी की जयंती एक आशीर्वाद की तरह है। उन्होंने आधुनिक भारत का सपना देखा और 18 साल की उम्र में वोट देने का अधिकार देकर युवाओं को सशक्त बनाया। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों को मजबूत करने का भी काम किया, जिसकी झलक आज ग्रामीण महिलाओं की तरक्की में दिखती है। ठीक जब वे पूरी तरह परिपक्व हो गए थे और देश का नेतृत्व करने में सक्षम थे, तभी कुदरत ने उन्हें हमसे छीन लिया। उनके बलिदान और उनकी कमी की भरपाई कभी नहीं हो सकती।”

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि राजीव गांधी ने देश को कंप्यूटर क्रांति, पंचायती राज कानून और 18 साल में वोटिंग का अधिकार दिया। उन्होंने कहा, “हम राजीव गांधी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर आगे बढ़ने और देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान: राजनाथ सिंह

भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान: राजनाथ सिंह

 पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती की अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बड़ा बयान दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत की विकास यात्रा में उनका भी अहम योगदान रहा है।

पूर्व पीएम राजीव गांधी की भूमिका भारत को आधुनिक, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र बनाने में अहम रही। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को विश्व में वर्तमान स्थान दिलाया और इसीलिए उन्हें भारत में ‘सूचना प्रौद्योगिकी का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने देश में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक के उपयोग की शुरुआत की थी।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती को हर साल ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राजीव गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने भारत के निर्माण और तरक्की के लिए आधुनिक तकनीक और नए विचारों को अपनाने में विश्वास जताया। इसके लिए यह बेहद जरूरी था कि युवाओं की भागीदारी और उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए समुचित व्यवस्था और अवसर प्रदान किए जाए।”

पायलट ने लिखा, “अपनी दूरदर्शिता से उन्होंने देश में आधुनिकरण की नई परिभाषा गढ़ी। कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण फैसलों ने देश को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आज उनकी जयंती पर उन्हें हृदय की गहराइयों से नमन करता हूं।”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी न केवल भारत के प्रधानमंत्री थे बल्कि युवाओं के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे, एक ऐसे नेता जिनका मानना ​​था कि युवा भारतीय न केवल भविष्य हैं बल्कि वे शक्ति हैं जो एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण करेंगे। आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सशक्त भारत का उनका विजन कांग्रेस पार्टी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी है। राजीव जी को उनकी 82वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि।” (इनपुट-आईएएनएस)

 

गृह मंत्री अमित शाह ने 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, नदी जल विवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर चर्चा

गृह मंत्री अमित शाह ने 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, नदी जल विवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर चर्चा

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज गुरुवार को मामल्लापुरम के पास कोवलम के होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दक्षिणी राज्यों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय विवादों, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अमित शाह के आगमन पर उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। कार्यवाही शुरू होने से पहले दोनों नेताओं ने संक्षिप्त बातचीत की। इस सम्मेलन में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क उपस्थित थे। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी उपस्थित नहीं थे, जबकि उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल, लक्षद्वीप के अधिकारी और भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे। परिषद की बैठक में विचार-विमर्श में लंबे समय से लंबित नदी-जल और सीमा विवादों पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद थी। इनमें कावेरी और कृष्णा नदियों के जल बंटवारे का विवाद, कर्नाटक का प्रस्तावित मेकेदातु बांध और मुल्लापेरियार बांध से संबंधित चिंताएं शामिल थीं।

तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक सीमा के पास हाल ही में तीन तमिल पुरुषों की गोलीबारी की घटना को भी उठाए जाने और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करने की संभावना है। परिसीमन और दक्षिणी राज्यों पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा होने की संभावना थी।

व्यापक एजेंडा में अंतर्राज्यीय सहयोग को मजबूत करना, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा शामिल थे।

प्रतिभागियों द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना के प्रस्ताव की भी जांच किए जाने की संभावना थी।

अधिकारियों ने बताया कि कोवलम बैठक का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करना और सहकारी संघवाद को आगे बढ़ाना था। यह सम्मेलन भाग लेने वाली सरकारों को केंद्र सरकार के समक्ष अपने-अपने राज्यों से संबंधित चिंताओं को रखने और वर्षों से अनसुलझे विवादों के समन्वित समाधान खोजने का अवसर भी प्रदान करता है।

अधिकारियों ने कहा कि चर्चा में अनुवर्ती कार्रवाई के लिए व्यावहारिक तंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें विभागों के बीच नियमित आदान-प्रदान और भाग लेने वाली सरकारों और प्रशासनों द्वारा संयुक्त रूप से स्वीकृत निर्णयों का तेजी से कार्यान्वयन शामिल है।

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता, रक्षा मंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता, रक्षा मंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

 भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आगे के सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।

समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करने पर जोर

समझौते के तहत जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करने सहित अन्य गतिविधियां शामिल हैं। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा

दोनों रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रमुख आधारों में से एक है। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, नौसेना सहयोग, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान का भी उल्लेख किया।

मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्धता

दोनों मंत्रियों ने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर एक-दूसरे के आकलन साझा करने को महत्वपूर्ण बताया।

यथास्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध

दोनों देशों ने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा सुरक्षा में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का भी विरोध किया। इसके अलावा खोज एवं बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

नौसैनिक यात्राओं और संयुक्त अभ्यासों में होगा विस्तार

दोनों पक्ष समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं बढ़ाएंगे। संयुक्त सैन्य अभ्यासों के साथ सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बंदरगाहों तथा रखरखाव एवं मरम्मत सुविधाओं के इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

जहाज निर्माण और मरम्मत में सहयोग बढ़ेगा

दोनों देशों ने नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्ष नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और डिजाइन की संभावनाएं तलाशेंगे। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की उत्पादन क्षमता के उपयोग को लेकर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। दोनों पक्ष निकट भविष्य में जहाज मरम्मत सुविधाओं के पारस्परिक इस्तेमाल के लिए व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर भी सहमत हुए। समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।

धर्म गार्जियन और जेमेक्स का होगा विस्तार

दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य अभ्यासों का स्वागत किया। इसके तहत ‘धर्म गार्जियन’ और ‘जेमेक्स’ जैसे अभ्यासों को और विस्तार दिया जाएगा। दोनों ने इस साल होने वाले भारत-जापान वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों में हुई प्रगति का भी स्वागत किया।

पहली बार भारत आएंगे जापानी लड़ाकू विमान

‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को अधिक जटिल बनाने, उनमें मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास आयोजित करने पर भी सहमति जताई।

विशेष अभियान बलों के बीच बढ़ेगा आदान-प्रदान

भारत और जापान की सेनाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विशेष अभियान बलों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा। भारत में एकीकृत थिएटर कमान स्थापित होने के बाद जापान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी दोनों पक्षों ने सहमति जताई।

रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी मजबूत करने पर जोर

राजनाथ सिंह ने जापान की ओर से रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे की हालिया समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया में शांति एवं स्थिरता में आगे भी योगदान देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई।

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

 असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में बाढ़ से निपटने के प्रयासों और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने लिखा कि बाढ़ राहत कार्यों के दौरान प्रधानमंत्री लगातार संपर्क में रहे, स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते रहे और हरसंभव सहायता प्रदान करते रहे।

पुनर्निर्माण और सुधार का रोडमैप पेश

हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री के साथ अगले चरण का रोडमैप साझा किया। इसमें प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और व्यापक सुधार सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को सफल बनाने में भारत सरकार के अटूट समर्थन को दोहराया।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा असम की जनता के जनादेश को पूरा करने के लिए पहले 100 दिनों में शुरू की गई प्रमुख पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने ‘विकसित असम’ के साझा विजन को साकार करने के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया।

एनडीए 3.0 के 100 दिनों में महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर

इससे पहले मुख्यमंत्री ने एनडीए 3.0 सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर अलग-अलग पोस्ट में अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि असम की नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं को मजबूत किया गया है, ताकि बेटियां स्वस्थ, आत्मविश्वासी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रह सकें।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि विकसित असम के निर्माण के लिए लोगों की सेवा पूरी ईमानदारी से करने और विकास व कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने का संकल्प दोहराया जा रहा है। 

सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई, अब वे मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं : केंद्रीय मंत्री रिजिजू

सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई, अब वे मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं : केंद्रीय मंत्री रिजिजू

 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में ‘‘चीन की ओर से घुसपैठ’’ के हालिया दावों को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा की जाती थी लेकिन अब ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ हैं।

केंद्रीय मंत्री ने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया

उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें एंटनी ने स्वीकार किया था कि भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों को अविकसित रखने की नीति लंबे समय तक अपनाई गई थी, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमताओं के विकास में चीन ने भारत को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, एंटनी ने उसी भाषण में यह भी स्पष्ट किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सत्ता में आने से 20-25 वर्ष पहले यह नीति बदल दी गई थी और उसके बाद से लगातार भारतीय सरकारें सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं।

एंटनी ने दावा किया था

कांग्रेस नेता एंटनी ने दावा किया था कि तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ‘सबसे अधिक’ काम किया। लोकसभा में अरुणाचल पश्चिम का प्रतिनिधित्व करने वाले रीजीजू की यह टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में ‘‘चीनी सैन्य गतिविधियों’’ को लेकर नये सिरे से चिंता जताए जाने के बीच आई है।

रिजिजू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा

रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ लोगों ने सीमा को लेकर यूं ही टिप्पणी कर दी। सीमावर्ती इलाके दुर्गम हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो और ताकसिंग इलाकों में गया था। सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई लेकिन अब ये सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।’’

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को लेकर कांग्रेस के रिकॉर्ड पर निशाना साधा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस नेताओं में ए. के. एंटनी जी बहुत ईमानदार थे। उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नहीं बनाने की थी।’’

रिजिजू ने पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी द्वारा छह सितंबर 2013 को लोकसभा में दिए गए बयान का उल्लेख किया। तत्कालीन रक्षा मंत्री ने उस समय स्वीकार किया था कि चीन ने सीमा पर भारत की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया है और उन्होंने इस मामले में भारत के पिछड़ने के लिए आजादी के बाद दशकों तक अपनाई गई नीति को जिम्मेदार ठहराया था।

एंटनी ने इस नीति के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा था, ‘‘आजादी के बाद कई वर्षों तक भारत में यह नीति रही कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास न करना ही सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है। अविकसित सीमाएं विकसित सीमाओं की तुलना में अधिक सुरक्षित होती हैं इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों या हवाई पट्टियों का कई वर्षों तक निर्माण नहीं किया गया।’’

कांग्रेस नेता ने कहा था, ‘‘उस दौरान चीन अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का लगातार विकास करता रहा। नतीजतन वह अब हमसे आगे निकल गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमता के मामले में वे हमसे आगे हैं। मैं यह स्वीकार करता हूं। यह इतिहास का हिस्सा है।’’

हालांकि एंटनी ने यह भी कहा था कि भारत को अपनी गलती का एहसास हो गया था और उनके 2013 के बयान से 20 से 25 साल पहले ही देश ने इस संबंध में अपना रुख बदल लिया था। एंटनी ने कहा था, ‘‘लेकिन पिछले 20-25 वर्षों में भारत की सरकारों को भी इस गलती का एहसास हुआ और उन्होंने नीति बदल दी। अब हम भी सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं… मैं बिना किसी अतिशयोक्ति के कह सकता हूं कि पिछले नौ वर्ष में संप्रग सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सबसे अधिक काम किया है। संप्रग के पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान यह काम किया जा रहा है। भविष्य में जो भी सरकार आएगी, वह भी इसे जारी रखेगी।’’

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज कर दिया था

अरुणाचल प्रदेश में हालिया विवाद तक्सिंग क्षेत्र पर केंद्रित है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश के भीतर 60 किलोमीटर तक घुस आए हैं। हालांकि उन्होंने स्थानीय निवासियों की चिंताओं को स्वीकार किया था।

भारत-चीन सीमा का मुद्दा गंभीर विषय

रिजिजू ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भारत-चीन सीमा का मुद्दा गंभीर विषय है। ऐसे संवेदनशील मामले में झूठे दावे न करें। हम अतीत की गलतियां दोहराना नहीं चाहते। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान करेगी और भारतीय क्षेत्र की रक्षा करेगी।’’

दरअसल, भारत और चीन के बीच 3,400 किलोमीटर से अधिक लंबी विवादित सीमा है, जिसके कई हिस्सों में दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा का निर्धारण नहीं हुआ है। हाल में सीमा पर तनाव की खबरें सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन के साथ समग्र संबंधों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है।

रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था, ‘‘भारत और चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मामलों में हमने चीनी पक्ष के साथ बातचीत के दौरान हमेशा इस बात पर बल दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीर मानते हैं।’’ उन्होंने कहा था, ‘‘हमने यह भी कहा है कि सीमा से जुड़े मामलों की स्थिति हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर भी असर डालेगी।’’उन्होंने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण’’ है।

अब प्रति ग्राहक 9 सिम की उच्चतम सीमा, केंद्र ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए सख्त निर्देश

अब प्रति ग्राहक 9 सिम की उच्चतम सीमा, केंद्र ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए सख्त निर्देश

 केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे प्रति ग्राहक नौ सिम की उच्चतम सीमा को किसी भी सब्सक्राइबर के लिए पार न करें। यह जानकारी गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में दी गई।

सरकारी की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि 24 अगस्त 2026 से, टीएसपी (टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर) ऐसे हर सब्सक्राइबर की पहचान करने के लिए जरूरी तकनीकी और संगठनात्मक उपाय करेंगे जो तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन लेना चाहता है। वे उसे सूचित करेंगे कि उसके पास पहले से ही किसी व्यक्ति के लिए अनुमत अधिकतम संख्या में मोबाइल कनेक्शन हैं और इसलिए, उसे नया मोबाइल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है।”

इन निर्देशों के तहत ग्राहकों को ‘कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म’ (सीएएफ) में यह जानकारी देनी होगी कि उनके नाम पर अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटरों और लाइसेंस प्राप्त सर्विस एरिया में पहले से कौन-कौन से मोबाइल कनेक्शन हैं। डीओटी के सर्कुलर में बताया गया है कि जिन ग्राहकों ने तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन ले रखे हैं, उनकी जानकारी विभाग के द्वारा विकसित किए गए ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ (डीआईपी) पर उपलब्ध है।

डीओटी ने टेलीकॉम ऑपरेटरों की मदद के लिए यह सिस्टम बनाया है ताकि वे ऐसे ग्राहकों की पहचान कर सकें, जिनके नाम पर मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा पूरी हो चुकी है। डीआईपी अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों से मिली ग्राहकों की जानकारी का इस्तेमाल करता है। यह जानकारी टेलीकॉम कंपनियों के लिए उन ग्राहकों की पहचान करने में काम आती है जिन्होंने 9 सिम कार्ड की अधिकतम सीमा पार कर ली है।

सर्कुलर में कहा गया है, “जब तक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) की शर्तों के आधार पर ऐसे उपाय लागू नहीं करते, तब तक तय सीमा से ज्यादा एक्टिवेट किए गए किसी भी मोबाइल कनेक्शन को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा। यह सस्पेंशन तब तक रहेगा जब तक मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा पार करने से जुड़ा मामला सुलझ नहीं जाता।

किसान, महिला, युवा और श्रमिक फोकस में, आय बढ़ाना प्राथमिकता: शिवराज सिंह चौहान

किसान, महिला, युवा और श्रमिक फोकस में, आय बढ़ाना प्राथमिकता: शिवराज सिंह चौहान

 पटना के बामेती से शुरू हुआ बड़ा कृषि अभियान

पटना। बिहार में पटना के बामेती से बड़े कृषि अभियान की शुरुआत गुरुवार को की गई। यहां किसान समृद्धि, महिला उधमी, युवा रोजगार, श्रमिक उत्थान एवं जन कल्याण संवाद अभियान का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अभियान के शुभारंभ के मौके पर राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल मौजूद थे।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती पर अगर कोई भगवान है, तो वह किसान है और मैं किसानों का सेवक हूं। खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अथक प्रयासों से एक समेकित कृषि प्रणाली यानी एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित किया गया है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

केन्द्रीय मंत्री चाैहान ने कहा कि प्रधानमंत्री और बिहार सरकार की चिंता यह है कि हमारे ज्यादातर किसान छोटे हैं। कम जोत वाली भूमि में रोजी-रोटी चलाना, फायदे की खेती करना और परिवार चलाना आसान नहीं है। इसलिए हम लोगों ने कोशिश की है कि हम खेती का ऐसा मॉडल बनाएं कि कम खेती में भी ज्यादा आमदनी हो।

उन्होंने कहा कि हमारे किसानों के पास जमीन कम और कृषि लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में हमें कृषि लागत को कम करने की दिशा में काम करना होगा। सरकारी स्तर पर लगातार इसके लिए प्रयास हो रहे हैं।

आज हमारे समक्ष एक बड़ी चुनौती है कि केमिकल वाले फर्टिलाइजर के कारण हमारी जमीनें खराब हो गई हैं, हमारी जमीन का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसके लिए किसानों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से खेती की लागत को कम किया जा सकता है और किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सकता है।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जन कल्याण संवाद अभियान पाटलिपुत्र की धरती से शुरू होकर हर जिले तक पहुंचेगा। यह कृषि विकास का नया विचार है। किसान, महिला, युवा, श्रमिक सबकी इसमें भागीदारी होगी। इसमें कृषि को जन कल्याण और प्रगति का आधार बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। बिहार के विकास और खुशहाली के लिए कृषि का विकास बेहद जरूरी है।

सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि रोड मैप की शुरुआत की गई थी, जिसका राज्य के कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के किसानों ने भी अपनी मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन बढ़ाया है और देश के अन्य राज्यों के किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि से प्राप्त अनुभव साझा किए। 22 अगस्त से मगध की पावन धरती गया जी से कृषि जनकल्याण संवाद अभियान की शुरुआत होगी, जो जिलास्तर पर हर जिले में चलाया जाएगा।

पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधिकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़े किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधिकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़े किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अशोकनगर के बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली किया संबोधित

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नई तकनीक और नवाचार ने खेती में समृद्धि के नए रास्ते खोल हैं। आने वाले समय में कृषि उद्योग, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़ने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन और मछली पालन को अपनाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को अशोक नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अशोकनगर के अन्नदाता अपनी मेहनत से प्रदेश भर के किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं। अशोकनगर की चंदेरी साड़ी ने मध्यप्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई है। अशोकनगर के शरबती गेहूं का स्वाद बेजोड़ है। अशोकनगर के शरबती गेहूं की देशभर में मांग है। प्रसन्नता का विषय है कि जिले के किसानों में धनिया और गुलाब जैसी उद्यानिकी फसलों के लिए रुचि बढ़ी है। कम बारिश की चुनौती के बीच डीआरएस तकनीक से धान की रोपाई का रकबा बढ़ाकर अशोक नगर के किसानों ने आपदा को अवसर में बदला है। फसल विविधीकरण से जिले में चना और मसूर का भी रकबा बढ़ा है।

सीमा पर जवान और खेत में किसान की भूमिका समान है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान, महिला, गरीब और युवा चारों वर्ग राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। किसान के समृद्ध और खुशहाल होने से ही संपूर्ण समाज अन्न और धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा। सीमा पर जवान और खेत में किसान की भूमिका समान है, दोनों ही देश के लिए समर्पित हैं। राज्य सरकार पूर्ण संवेदनशीलता और सक्रियता से किसान हित में कार्य कर रही है। इसी के परिणाम स्वरुप पूरा साल किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान का अर्थ ही स्वावलंबन है, अपने बलबूतों पर अपने परिवार के साथ-साथ संपूर्ण समाज के पालन पोषण के लिए अन्न का कटोरा भरने का सार्मथ्य किसानों में ही है। खेती को लाभप्रद बनाने के लिए संपूर्ण प्रदेश में बिजली, पानी की व्यवस्था के साथ-साथ खेतों तक सड़क संपर्क उपलब्ध कराने का कार्य जारी है। किसानों की सुविधा के लिए साल में एक ही बार खाते को क्लियर करने की व्यवस्था की गई है। कृषि भूमि के भूअर्जन पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

किसानों को राज्य सरकार की ओर से अनेक सौगातें उपलब्ध कराई जा रही हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 12 से 20 प्रतिशत तक ले जाने के लिए विभिन्न गतिविधियां जारी हैं। कुछ माह बाद किसानों को दिन में ही पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। लाड़ली बहना योजना और किसान सम्मान निधि से हमारे भाई-बहनों का जीवन स्तर उन्नत हुआ है। बड़ी राशि की सब्सिडी के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पांच, सात और दस हॉर्स पॉवर के बिजली पंपों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह राज्य सरकार का किसानों के लिए सहयोग है। किसानों को राज्य सरकार की ओर से अनेक सौगातें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सांदीपनि विद्यालय के साथ-साथ प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को भी बेहतर किया जा रहा है। किसानों की आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा और उनके संवर्धन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को दी आगामी त्यौहारों की बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्माष्टमी, बलराम जयंती, रक्षाबंधन आदि त्यौहारों की बधाई दीं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अशोकनगर के बलराम कृषि महोत्सव में उपस्थित कृषकों से वर्चुअली संवाद किया। विधायक हेमंत खंडेलवाल तथा किसान जयपाल चावड़ा भी उपस्थित थे। विधायक बृजेंद्र सिंह यादव, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर रघुवंशी ने अशोक नगर को विभिन्न सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना।

रक्षाबंधन 2026: 27 को पूर्णिमा, फिर 28 को ही क्यों बंधेगी राखी? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026: 27 को पूर्णिमा, फिर 28 को ही क्यों बंधेगी राखी? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

 नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन 2026 इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच काफी असमंजस है, क्योंकि सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि, आखिर राखी 27 अगस्त को बांधी जाएगी या 28 अगस्त को.पंचांग गणना के अनुसार, 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। इसी वजह से उदयातिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाना शुभ माना जा रहा है। ऐसे में 27 अगस्त को राखी बांधने को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।

28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन:
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम के अनुसार इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
यानी इस वर्ष 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के बावजूद रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का शुभ समय:
रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह का समय विशेष माना जा रहा है।
पहला शुभ समय:
सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक
दूसरा शुभ समय:
दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक
इस दौरान बहनें भाई की पूजा कर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

रक्षाबंधन पर राहुकाल का समय:
सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

क्या 28 अगस्त को भद्रा है?
रक्षाबंधन के दिन भद्रा को लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त को भद्रा नहीं है। इसलिए इस दिन भद्रा के कारण राखी बांधने को लेकर किसी तरह की रोक नहीं बताई गई है।

रक्षाबंधन पर कैसे करें पूजा और राखी बांधने की रस्म?
*रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान की पूजा करें और राखी बांधने के लिए पूजा की थाली तैयार करें।
*राखी हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर बांधना बेहतर माना जाता है।
*पूजा की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें।
*भाई को तिलक लगाने के बाद अक्षत लगाएं और आरती करें।
*इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधें।
*राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाएं।
*भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके सुख और सम्मान की कामना करे।
*राहुकाल के दौरान राखी बांधने से बचें।

रक्षाबंधन 2026 को लेकर 27 और 28 अगस्त की तारीख का जो कन्फ्यूजन है, उसे दूर कर लें। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी और 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा होने के कारण उदयातिथि के अनुसार इसी दिन पर्व मनाना शुभ माना गया है। राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय विशेष बताया गया है। इसके अलावा दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक भी राखी बांधी जा सकती है। वहीं सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

मोदी कैबिनेट की बैठक में देश के लिए पांच बड़े फैसले, 13,041 करोड़ रुपये होंगे खर्च

मोदी कैबिनेट की बैठक में देश के लिए पांच बड़े फैसले, 13,041 करोड़ रुपये होंगे खर्च

 नई दिल्ली।  देश की बुनियादी ढांचे यानी फाउंडेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के लिए पांच बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़े फैसले लिए गए हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 13041 करोड़ रुपये है।

समझिए किन प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी?

बुधवार को मोदी कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इन पांच प्रोजेक्ट्स में से चार रेलवे से और एक हाईवे से जुड़ा हुआ है।

हावड़ा-चेन्नई मुख्य मार्ग का चौहरीकरण- देश के इस बेहद अहम मुख्य रेल मार्ग पर यातायात को सुगम और तेज बनाने के लिए रेलवे लाइन के चौहरीकरण का बड़ा फैसला लिया गया है।

कटक से पारादीप रेल लाइन- इस रूट पर क्षमता बढ़ाने के लिए तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है।

अन्य दो रेलवे प्रोजेक्ट्स- रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत करने के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई गई है।

मुजफ्फरपुर-नेपाल बॉर्डर हाईवे प्रोजेक्ट- पांचवां प्रोजेक्ट सड़क परिवहन से जुड़ा है, जिसके तहत बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए नेपाल सीमा तक जाने वाले सोनबरसा मार्ग पर फोर लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा।

देश के विकास को मिलेगी रफ्तार
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आम लोगों का सफर सुगम तथा तेज हो जाएगा। बुनियादी ढांचे के विकास की दृष्टि से मोदी सरकार का यह एक और बड़ा और अहम कदम है।

सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में न घसीटें: किरेन रिजिजू

सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में न घसीटें: किरेन रिजिजू

 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कई अहम मुद्दों पर खुलकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। रिजिजू ने चीन सीमा विवाद, राहुल गांधी के बयानों, संसद में हंगामे और अन्य विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।

चीन के 60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे को किया खारिज 

राहुल गांधी के इस दावे पर कि चीन भारत में 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गया है, रिजिजू ने कहा कि यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा का कई इलाकों में स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है। रिजिजू ने याद दिलाया कि पहले कांग्रेस सरकार के समय चीन ने अपनी तरफ सड़कें और बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित किया, जबकि भारत की नीति सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर न बनाने की थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने भी संसद में इसकी पुष्टि की थी। 2014 के बाद मोदी सरकार ने नीति बदली और सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण तेज किया। ताकसिंग तक सड़क संपर्क 2019 में पूरा हुआ। उन्होंने जोर दिया कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा नहीं किया है और आईटीबीपी की पेट्रोलिंग पहले से मजबूत हुई है।

सेना को राजनीति से दूर रखने की अपील

रिजिजू ने कहा कि सेना के जनरल के लिए ‘सड़क छाप’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। कांग्रेस नेताओं को ऐसी भाषा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सफाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के लिए है जो संविधान के खिलाफ काम करते हैं। हथियारबंद नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन कुछ लोग माओवादी विचारधारा से जुड़े होकर जवानों की मौत पर जश्न मनाते हैं।

संसद हंगामा और अमित शाह पर टिप्पणी

विपक्ष के इस आरोप पर कि गृह मंत्री अमित शाह संसद नहीं आए, रिजिजू ने कहा कि शाह सुबह से रात तक संसद में रहते थे। विपक्ष ने सिर्फ अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस सांसदों के गाली-गलौज और हंगामे को रोक सकते हैं। कोई भी नेता संविधान के खिलाफ अराजकता पैदा करे तो उसका समर्थन नहीं करना चाहिए।

अन्य मुद्दों पर सरकार का पक्ष

परिसीमन: सरकार कांग्रेस से समर्थन मांग रही है। सकारात्मक रुख आने पर सहयोग संभव है। 
वंदे मातरम: यह राष्ट्रीय गीत है। हर भारतीय को इसका सम्मान करना चाहिए। 
अभिजीत दिपके प्रकरण: आम आदमी पार्टी ने चुनाव हारने के बाद छात्रों को आगे बढ़ाया। केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं को सुनती है, लेकिन राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहिए। 
विशेषाधिकार नोटिस: नियमों का उल्लंघन होने पर जारी किया जाता है। 
विपक्षी गठबंधन: फिलहाल विपक्ष बंटा हुआ है और आत्मविश्वास की कमी झेल रहा है। चुनाव न जीत पाने की हताशा संसद में निकालता है।

रिजिजू ने इटली की प्रधानमंत्री पर संदीप दीक्षित की टिप्पणी को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं। उनका मजाक उड़ाने से देश की बदनामी होती है।

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