मेरठ | उत्तर प्रदेश के मेरठ में पति की बेवफाई और अय्याशी से तंग पत्नी ने अपनी मां के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं एक लाख रुपये की सुपारी देकर पत्नी ने बदमाशों से पति की गोली मारकर हत्या करवा डाली. मेरठ पुलिस ने मामले में पत्नी और उसकी मां समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. यह सनसनीखेज मामला मेरठ के थाना जानी क्षेत्र का है. जहां टिकरी गांव में रहने वाला परविंदर पेशे से किसान था और शौकिया तौर पर जादू टोने का काम करता था. जिसके चलते उसके संबंध कई महिलाओं से हो गए.
आरोपी पत्नी की माने तो उसका पति गैर महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाता था और इस दौरान वह सेक्स का वीडियो बनाने के लिए उसे मजबूर करता था. अगर पत्नी मना कर देती थी तो फिर उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार भी करता था. पति की इस करतूत से परेशान पत्नी उसे छोड़कर भी चली गई, लेकिन पत्नी लोक लाज के चलते करीब 2 महीना पहले पति के साथ रहने के लिए तैयार हो गई। लेकिन पति का बर्ताव फिर भी नहीं बदला तो फिर पत्नी ने उसकी हत्या की साजिश रच डाली.
मां के साथ मिलकर रची पति की हत्या की साजिश
हत्या की इस वारदात को अंजाम देने के लिए पुलिस की गिरफ्त में खड़ी इस महिला ने अपनी मां का सहारा लिया. मां ने दूर के रिश्तेदार की मदद से बागपत के बदमाशों को 1 लाख रुपये की सुपारी दी और हत्या की पूरी साजिश रची. बदमाशों ने रेकी करके पहले रिहर्सल किया और फिर पत्नी बबली ने पति का लोकेशन बताया और शूटरों ने परविंदर की गोली मारकर हत्या कर दी. हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद घर में मातम का माहौल पसर गया. हत्या की साजिश रचने वाली पत्नी ही खुद को पीड़िता बता कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर बैठी.
पुलिस ने मामले की छानबीन की तो पूरा सच जगजाहिर हो गया. पुलिस ने इस मामले में बबली और उसकी मां समेत आकाश विनीत और शुभम को गिरफ्तार कर लिया. इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे से हर कोई सकते में है, लेकिन आरोपी पत्नी को अपने इस गुनाह पर कोई अफसोस नहीं है. उसकी माने तो उसने एक शैतान को नर्क पहुंचा दिया.
भोपाल | मध्य प्रदेश के शहरी इलाकों में नाइट कर्फ्यू 31 अगस्त तक जारी रहेगा. पूरे प्रदेश में इसकी अवधि रात 11 से सुबह 6 बजे तक रहेगी. गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. इसमें सभी जिलों के कलेक्टर्स को निर्देश हैं कि वो नियमों का सख्ती से पालन करें.
मध्य प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर के तांडव के बाद 12 अप्रैल से कोरोना कर्फ्यू यानि टोटल लॉक डाउन लगा दिया गया था जो 31 मई तक चला. हालात थोड़े बेहतर होने पर 1 जून से कर्फ्यू में रियायत देना शुरू किया गया जो धीरे धीरे बढ़ता गया. शुरू में वीक एंड यानि शनिवार-रविवार कर्फ्यू जारी रहा. बाद में उसे भी हटा लिया गया. लेकिन नाइट कर्फ्यू अब भी जारी है.
रात 11 से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू
पहले नाइट कर्फ्यू रात 8 से सुबह 6 बजे तक होता था. 15 जून को सरकार ने नाइट कर्फ्यू की अवधि घटाकर रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कर दी थी. 2 जुलाई को कर्फ्यू की अवधि में 1 घंटे की और कटौती की गई और नगरीय क्षेत्र में रात 11:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक पाबंदी लागू है, जो 31 अगस्त तक जारी रहेगी.
सागर: मकरोनिया क्षेत्र से एक बार फिर से सेक्स रैकेट का मामला सामने आया है, मकरोनिया क्षेत्र अब एक बार फिर जिस्म फरोशी को लेकर चर्चाओं में आ गया है। बुधवार को मकरोनिया स्थित पंचवटी लॉज में चल रहे सैक्स रैकेट के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 4 महिलाओं सहित 9 पुरषों को संदिग्ध हालात में गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने लॉज से आपत्तिजनक सामान को भी बरामद किया है। जानकारी के मुताबिक पिछले लंबे समय से मकरोनिया की पंचवटी लॉज में संदिग्ध गतिविधियों को संचालित किए जाने की सूचना पुलिस को मिल रही थी।
जिसके बाद बुधवार को पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पुलिस टीम गढ़ित पंचवटी लॉज में छापा मारा गया। जिसमे लॉज के अंदर 4 महिलाओं सहित 9 पुरुषों को संदिग्ध हालात में पकड़ा गया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, 14 साल की लड़की से कथित बलात्कार के मामले में पुलिस ने यहां दो नाबालिग लड़कों को हिरासत में लिया है । पुलिस ने इसकी जानकारी दी । पुलिस के अनुसार यह घटना 17 अगस्त की शाम अर्निया इलाके में हुई । एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी कि उसकी रिश्तेदार से 13 और 14 साल के दो लड़कों ने उस वक्त बलात्कार किया जब वह शौच के लिए जा रही थी ।
काबुल में तालिबानियो के पूरी तरह कब्जे के बाद अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया था. उन्हें संयुक्त अरब अमीरात शरण दी है. संयुक्त अरब अमीरात ने बुधवार को कहा कि वह तालिबान के अधिग्रहण के बीच अफगानिस्तान से भागे राष्ट्रपति अशरफ गनी की "मानवीय आधार पर" मेजबानी कर रहा है. यूएई द्वारा एक संक्षिप्त बयान में कहा गया, "यूएई विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय इस बात की पुष्टि कर सकता है कि यूएई ने राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके परिवार का मानवीय आधार पर देश में स्वागत किया है."
शिलॉन्ग। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के काफिले पर मंगलवार को कुछ शरारती तत्वों ने हमला बोल दिया। बताया गया है कि मलिक गुवाहाटी एयरपोर्ट से लौट रहे थे। इस दौरान उनके काफिले में चल रही कारों पर कुछ लोगों ने पत्थर बरसा दिए। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
बता दें कि मेघालय में 18 अगस्त की सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू लागू है। फिलहाल कम से कम चार जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद है। सरकार ने यह फैसला स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रतिबंधित हाइनीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल के स्वयंभू महासचिव चेरिस्टरफील्ड थांगखियू की शव यात्रा के दौरान उसके समर्थकों द्वारा की गई तोड़-फोड़ और हिंसा के बाद की। थांगखियू हाल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया था, जिसे लेकर शिलॉन्ग में हिंसा भड़क उठी थी।
दो दिन पहले ही मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा के घर पर रविवार रात अज्ञात बदमाशों ने पेट्रोल बम फेंक दिया था। वाहन पर सवार होकर आए उपद्रवियों ने ऊपरी शिलांग के थर्ड माइल में स्थित मुख्यमंत्री के निजी आवास के परिसर में पेट्रोल से भरी दो बोतलें फेंक दीं। इस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ था। हालांकि, सीएम ने पुलिस मुठभेड़ में पूर्व उग्रवादी की मौत की जांच कराने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने यह भी बताया था कि शिलॉन्ग में पिछले कुछ हफ्तों में कई जगहों पर आईईडी मिले हैं। पुलिस कुछ गिरफ्तारियों के लिए तेजी से आगे बढ़ी है।
हिंसा की घटनाओं के बीच गृह मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा
मेघालय के गृह मंत्री लखमेन रिंबुई पूर्व उग्रवादी के मारे जाने और मेघालय में बढ़ती हिंसा के मद्देनजर पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। उधर मेघालय सरकार ने मंगलवार को कहा कि राज्य की राजधानी में तोड़-फोड़ के बाद लागू कर्फ्यू के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है और पुलिस ने उन लोगों के लिए हेल्पलाइन की शुरुआत की है, जो यहां से जाना चाहते हैं।
चुनाव से पहले क्या योगी सरकार यूपी के कुछ शहरों का नाम बदलने की तैयारी में है. वैसे योगी आदित्यनाथ का ये फेवरट एजेंडा रहा है. मुख्यमंत्री बनने से पहले इस मुद्दे को लेकर वे बेहद आक्रामक हुआ करते थे. हाल में ही राज्य के तीन ज़िलों अलीगढ़, फ़िरोज़ाबाद और मैनपुरी के नाम बदलने को लेकर हलचल तेज हो गई है. योगी सरकार पहले ही इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फ़ैज़ाबाद का अयोध्या कर चुकी है. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन लखनऊ, ग़ाज़ियाबाद और देवबंद का भी नाम बदलने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम दीन दयाल उपाध्याय कर दिया गया जबकि झांसी को रानी लक्ष्मी बाई स्टेशन करने का प्रस्ताव है.
नाम में क्या रखा है ? ऐसा लोग कहते हैं. लेकिन चुनाव में नाम और उसके पीछे की नीति और नीयत दोनों काम करती है. चुनावी नफ़ा नुक़सान देख कर ये काम दशकों से होता रहा है. यूपी में छह महीने बाद विधानसभा के चुनाव हैं. उससे पहले कुछ जिलों के नाम बदलने को लेकर काग़ज़ी कार्रवाई शुरू हो गई है. बीजेपी के लोग फ़िरोज़ाबाद का नाम चंद्रनगर करना चाहते हैं .कांच की चूड़ियों के लिए मशहूर फ़िरोज़ाबाद में ज़िला पंचायत बोर्ड की बैठक में इस बात का प्रस्ताव पास भी हो गया है. अलीगढ़ का भी नाम बदलने की चर्चा है. तालों के लिए मशहूर इस ज़िले में ज़िला पंचायत बोर्ड की इमरजेंसी बैठक हुई. इस मीटिंग में अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने का प्रस्ताव पेश हुआ. ज़िला पंचायत की अध्यक्ष अर्चना भदौरिया ने प्रस्ताव पास करा लिया. उनका कहना है कि पहले भी अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ ही था.
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से लोकसभा के सांसद हैं. मैनपुरी का नाम बदलने को लेकर बीजेपी एक्टिव हो गई है. मैनपुरी का नाम वे मयन नगरी करना चाहते हैं. ज़िला पंचायत की बैठक में इस प्रस्ताव को ध्वनि मत से पास करा लिया गया. अब ये सारे प्रस्ताव मुख्यमंत्री ऑफिस भेजे दिए गए हैं. अब योगी को इस मामले में आख़िरी फ़ैसला लेना है. यूपी में कई ऐसे शहर हैं जहां से नाम बदलने की मांग आती रही है. दुनिया में इस्लामिक शिक्षकों सबसे बड़े सेंटर देवबंद का भी नाम बदलने को लेकर बजरंग दल वाले आंदोलन चला रहे हैं. वहां से बीजेपी के विधायक कुंवर ब्रजेश सिंह भी लखनऊ से लेकर देवबंद तक इस मुद्दे को उठाते रहे हैं.
हिंदू वादी संगठन चाहती हैं कि देवबंद का नाम देववृन्द हो जाए. लखनऊ का नाम लखनपुरी करने के लिए भी डिमांड होती रही है. ग़ाज़ियाबाद का नाम भी इस लिस्ट में है. बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों को लगता है कि नाम बदल देने से उनके एजेंडे को धार मिलेगी.
नई दिल्ली: इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस से कथित जासूसी की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया और कहा कि इस पर सार्वजनिक बहस नहीं हो सकती है। सर्वोच्च अदालत ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए 10 दिन बाद दोबारा इस विचार करने की बात कही है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सरकार को ऐसा कुछ खुलासा करने की जरूरत नहीं है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो।
चीफ जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय बेंच ने यह टिप्पणी सरकार के यह कहने के बाद की कि हलफनामे में सूचना की जानकारी देने से राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा जुड़ा है। पीठ ने कहा कि उसने सोचा था कि सरकार एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी लेकिन इस मामले में सिर्फ सीमित हलफनामा दाखिल किया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह 10 दिन बाद इस मामले को सुनेगी और देखेगी कि इसमें क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
केंद्र ने कहा- हम अपने रुख पर कायम
केंद्र का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार ने सोमवार को दाखिल हलफनामे में अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया था। मेहता ने पीठ को बताया, हमारी प्रतिक्रिया वही है जो हमने सम्मानपूर्वक अपने पिछले हलफनामे में दी थी। कृपया इस मामले को हमारे नजरिए से देखें क्योंकि हमारा हलफनामा पर्याप्त है। भारत सरकार देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि वह वह सभी पहलुओं के निरीक्षण के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करेगी और यह समिति शीर्ष अदालत के सामने अपनी रिपोर्ट देगी। उन्होंने कहा, छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और इस मामले से राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू जुड़ा है। मेहता ने कहा कि यह मामला सार्वजनिक बहस का मुद्दा नहीं हो सकता और विशेषज्ञों की समिति शीर्ष अदालत को रिपोर्ट देगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई शब्द नहीं चाहते: कोर्ट
मेहता ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है जिसे संवेदनशीलता से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस्तेमाल किए जा रहे सुरक्षा तंत्र के बारे में जानकारी सार्वजनिक तौर पर नहीं दे सकती है। पीठ ने मेहता से कहा कि वह ऐसी कोई चीज नहीं चाहती जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो। अगर सक्षम प्राधिकार हमारे सामने हलफनामा दायर करे तो इसमें क्या परेशानी है। हम राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में कोई शब्द नहीं चाहते। मेहता ने कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि सरकार किसी को कुछ नहीं बताएगी और दलील यह है कि वह इसे सार्वजनिक तौर पर नहीं कहना चाहती।
क्या है पेगासस जासूसी का पूरा मामला
ये याचिकाएं इजराइली कंपनी एनएसओ के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर प्रमुख नागरिकों, राजनेताओं और पत्रकारों की जासूसी कराए जाने से संबंधित हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संघ ने बताया है कि 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबर पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके निगरानी के लिए संभावित लक्ष्यों की सूची में थे।
मेक्सिको सिटी: मेक्सिको सिटी में सोमवार को एक गैस विस्फोट में अपार्टमेंट की एक इमारत नष्ट हो गया और एक व्यक्ति की मौत हो गई और जबकि से कम 29 अन्य घायल हो गए। शहर के मेयर ने यह जानकारी दी।
विस्फोट राजधानी के दक्षिण हिस्से में सुबह हुआ, जिससे इमारत तबाह हो गई।
मेयर क्लाउडिया शिनबाम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मेयर ने बाद में एक बयान में कहा कि घायलों में से 11 को अस्पतालों में ले जाया गया है। उनमें से एक की बाद में मृत्यु हो गई।
एहतियात के तौर पर करीब 300 लोगों को पड़ोसी इमारतों से निकाला गया।
मेक्सिको सिटी अभियोजक का कार्यालय और अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञ गैस विस्फोट की घटना का पता लगाने के लिए जांच कर रहे हैं।
मास्को: जहाँ हर तरफ अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद चिंता देखने मिल रही है, वहीं रूस ने उनकी खुलकर तारीफ की है।अफगानिस्तान में रूस के राजदूत ने सोमवार को तालिबान के आचरण की प्रशंसा की और कहा कि समूह, जिसे अभी भी आधिकारिक तौर पर रूस में एक आतंकवादी संगठन नामित किया गया है, ने पहले 24 घंटों में काबुल को पिछले अधिकारियों की तुलना में सुरक्षित बना दिया है।
राजदूत दिमित्री जिऱनोव की टिप्पणियां रूस द्वारा तालिबान के साथ अपने सुस्थापित संबंधों को गहरा करने के लिए एक निर्विवाद प्रयास को दर्शाती हैं। रूस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अफगानिस्तान में अस्थिरता मध्य एशिया में न फैले, दरअसल, रूस पूर्व सोवियत संघ के हिस्से को अपना बैकयार्ड मानता है, और यह अन्य चरम इस्लामी समूहों के लिए लॉन्चपैड नहीं बनने देना चाहता।
रूस ने कहा है कि वह कई अन्य देशों की तरह आश्चर्यचकित था, जिस गति से तालिबान ने देश पर नियंत्रण कर लिया, जबकि अमेरिकी सेना अभी भी अमेरिकी नागरिकों को निकालने की कोशिश कर रही थी। ऐसे में मॉस्को के एको मोस्किवी रेडियो स्टेशन से बात करते हुए, जिऱनोव ने कहा कि वह तालिबान के अब तक के आचरण से प्रभावित हुए हैं, उन्होंने उनके दृष्टिकोण को अच्छा, सकारात्मक और व्यापार जैसा बताया है।
जिऱनोव ने आगे कहा है, स्थिति शांतिपूर्ण और अच्छी है और शहर में सब कुछ शांत हो गया है। तालिबान के तहत अब काबुल में स्थिति (राष्ट्रपति) अशरफ गनी की तुलना में बेहतर है।
गनी, जिनका स्थान फिलहाल अज्ञात है, ने रविवार को यह कहते हुए भागने का फैसला किया था कि वह खूनखराबे को रोकना चाहता हैं। जिसपर जिऱनोव कहते हैं, कल शासन ताश के पत्तों की तरह गिर गया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में तालिबान की निहत्थे इकाइयां राजधानी में दाखिल हुईं और सरकार और अमेरिकी बलों से अपने हथियार आत्मसमर्पण करने को कहा।
जिऱनोव ने कहा कि तालिबान ने पहले ही रूसी दूतावास की सुरक्षा परिधि पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें 100 से अधिक कर्मचारी हैं और वह मंगलवार को उनके साथ आगे की सुरक्षा वार्ता करेंगे।
वॉशिंगटन: अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद तीखी आलोचना झेल रहे अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक दिन बाद व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति बिना लड़े देश छोड़कर भाग गए, लेकिन हम अपने फैसले पर अडिग हैं और नागरिकों की सुरक्षा का प्रयास करेंगे। साथ ही आने वाले दिनों में सहायता प्रदान करेंगे।
अमेरिकी ऱाष्ट्रपति बाइडन ने अफगानिस्तान के हालात पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आज कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान की जीत ने डेमोक्रेटिक पार्टी के घरेलू राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि हम अतीत की गलतियों से चिपके नहीं रहना चाहते। हम अपनी सेना को कुछ और दिन वहां रख सकते थे, लेकिन हमारी सोच अलग थी।
उन्होंने कहा कि हम नागरिकों की सुरक्षा का प्रयास करेंगे और आने वाले दिनों में सहायता प्रदान करेंगे।
अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए बाइडन ने कहा कि मैं अपने फैसले पर अडिग हूं। गनी बिना लड़ाई किए भाग खड़े हुए हैं, उन्होंने मुकाबले का माद्दा क्यों नहीं दिखाया। उन्होंने कहा कि हमने लगातार लड़ाई लड़ी, हमने कोशिशें लगातार जारी रखी हैं।
बाइडन ने कहा कि ट्रंप सरकार के दौरान भी 15 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में थे। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खात्मे में हमने काफी काम किया और बतौर राष्ट्रपति मुझे कड़े फैसले लेने पड़े हैं। बीस सालों से हमारी सेना वहां लड़ रही थी। लोग कहते हैं कि हम हिम्मत हार गए और अभियान को बीच में छोड़ दिया, लेकिन हमने सही फैसला लिया, हमने ये सोचा था कि हमें और ज्यादा लोगों को मरने नहीं देना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अफगानिस्तान में लोकतंत्र स्थापना का हमारा सपना था, लेकिन वहां अचानक हालात बदले और देशों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है।
अजमेर। राजस्थान के अजमेर में बड़ा हादसा हो गया। यहां नेशनल हाईवे-8 पर दो ट्रेलरों में जोरदार भिडंत हो गई। भिडंत इतनी जोरदार थी कि देखते ही देखते दोनों ट्रेलर आग का गोला बन गए। पुलिस के मुताबिक इस हादसे में ट्रेलर में सवार चार लोग जिंदा जल गए। मरने वालों की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है। वहीं ट्रेलर से एक ने कूदकर अपनी जान बचा ली।
पुलिस के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर सुबह करीब छह बजे हादसा हुआ। टाइल्स पाउडर से भरा ट्रेलर जयपुर से ब्यावर की तरफ जा रहा था। इसी दौरान ट्रेलर अनियंत्रित हो गया, जिससे वह ब्यावर से जयपुर की तरफ जा रहे दूसरे ट्रेलर से जा टकराया। दूसरे ट्रेलर में मार्बल की थप्पियां भरी थीं। भिडंत होते ही दोनों ट्रेलरों में आग लग गई, जिससे चालक उसी में फंस गए और जिंदा चल गए। पुलिस ने बताया कि मृतकों के शव को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है।
हादसा इतना भयावह था कि देखते ही देखते आग ने भीषण रूप धारण कर लिया। सूचना पर आदर्श नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और दमकल को इसकी जानकारी दी। दमकल गाड़ियों के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाया गया।
लग गया पांच से छह किलोमीटर लंबा जाम
दोनों वाहनों में टक्कर और आग के बाद नेशनल हाईवे-8 पर जाम लग गया। जाम करीब पांच से छह किलोमीटर तक लगा, जिससे लोगों को परेशानी हुई। इसके बाद पुलिस ने डाइवर्जन कर जाम में फंसे वाहनों को निकाला।
COVID curfew to remain in force in the State from 6 am of August 17 to August 24, 6 am; vaccination exercise to continue during the curfew: Uttarakhand Government pic.twitter.com/j1SL75HCYj
— ANI (@ANI) August 16, 2021









