रायपुर। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बताया कि कल ग्रुप -7 समूह के सदस्य राष्ट्रों की हुई एक बैठक में ग्रुप ऑफ सेवन के सदस्य देशों के बीच गंभीर चर्चा में जिसमें दुनिया की कुछ सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से विभिन्न देशों में किए जाने वाले व्यापार पर कम से कम 15 प्रतिशत की न्यूनतम वैश्विक कॉर्पोरेट कर दर लगाने पर, बनी सहमति का स्वागत करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
कैट ने कहा की यह कदम हालांकि बहुत प्रारंभिक चरण में है और यदि इसे लागू किया जाता है तो निश्चित रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उन व्यापार प्रथाओं पर नियंत्रण और संतुलन स्थापित हो जाएगा जिसके चलते वो जिस देश में व्यापार करती हैं, उस देश को कर के एक बड़े हिस्से से वंचित कर देती हैं। इस सहमति को एक प्रगतिशील कदम कहा जा सकता है जो अंतरराष्ट्रीय कराधान प्रणाली में एक आवश्यक सुधार लाएगा। बड़ी संख्या में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ जो वास्तु और सेवाओं का उपभोग करने वाले देशों के राजकोष से अपनी कर देयता से बचने के तरीके और साधन विकसित कर रही हैं, उन पर लगाम लगने की सम्भावना है। कैट ने जोर देकर कहा की इस तरह के कर का औचित्य तभी उचित है। जब इस तरह के कर की बड़ी राशि उस देश को दी जाएँ जिसमें वस्तु या सेवा का उपयोग किया जाता है।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने कहा कि हालांकि समझौते का बारीक विवरण बाद में जारी होगा। लेकिन प्रथम दृष्टि में यह ऐतिहासिक कदम अंतरराष्ट्रीय कर कानूनों में व्यापक बदलाव लाएगा और विभिन्न देशों के बीच एक बड़े समझौते को जमीन देगा। जिसका उद्देश्य बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टैक्स हेवन की तलाश करने से रोका जाए और उन्हें अपनी आय का अधिक भुगतान उन देशों की सरकारों को करने के लिए मजबूर करें। जहां वे अपना व्यवसाय संचालित करते हैं। यह निश्चित रूप से भारत जैसे देशों के राजस्व को बढ़ावा देगा जो दुनिया में सबसे बड़ी उपभोक्ता आधारित अर्थव्यवस्था है।
श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय सहमति की विशेषता यह है की बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब अपने लाभ को अपारदर्शी या लाभकारी कर ढांचे वाले देशों को चालाकी से स्थानांतरित करके अपने वित्तीय दायित्वों से दूर नहीं रह पाएंगे। वे कर का भुगतान करेंगे जैसा कि उस देश में अंतिम रूप से सहमत हो सकता है जहां वे अपना सामान या सेवाएं बेचते हैं।
ऐसा दिखाई देता है की इस सहमति से दवा पेटेंट, सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा पर रॉयल्टी से आय पर कर देने से बचने के लिए यह कंपनियां अपने पारंपरिक घरेलू देशों में उच्च करों का भुगतान करने से बचने की अनुमति लेती हैं। इस सहमति के अनुसार वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर की दर केवल 15 प्रतिशत तय करना बहुत कम है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के तेजी से बढ़ते व्यापारिक स्वरुप की तुलना में यह कर दर तय होनी चाहिए।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी और प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने कहा कि इस समझौते के पीछे मूल सिद्धांत उपभोग आधारित कर है न कि मूल आधारित कर जी -7 बैठक में लिए गए निर्णयों से यह ष्स्पष्टष् है कि बड़ी डिजिटल फर्मों को उचित स्तर का कर देना चाहिएप्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी जिस देश में वो काम करती हैं ताकि उस देश राजस्व बढ़ा सकें ।