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Breaking  पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती

Breaking पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती

 पूरी। ओडिशा के पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में कई श्रद्धालु घायल हो गए। एक श्रद्धालु की मौत की भी खबर है।

जमा हुए हैं लाखों श्रद्धालु
यह घटना बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर हुई, जहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ खींचने के कार्यक्रम को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जमा हुए थे।

बचाव अभियान शुरू किया गया
आपातकालीन बचाव दलों ने घायलों को तुरंत बाहर निकाला और पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत बचाव और भीड़ को नियंत्रित करने का अभियान शुरू किया, ताकि स्थिति सामान्य की जा सके।

चश्मदीद ने क्या बताया?

  • पुरी में घटनास्थल पर मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि मरीचि कुंड चौक के पास या तो बाहरी घेरे की रस्सी की बैरिकेड गिर गई या कुछ लोग अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर गए।
  • उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 40 से 50 लोगों को एक-दूसरे के ऊपर गिरते देखा, जिससे कई श्रद्धालु घायल हो गए और चार से पांच को गंभीर चोटें आई हैं।
  • उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने लगभग 20 लोगों को बचाया और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया, और अब उन्हें पता चला है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई है।

इसके अलावा, सूत्रों ने यह भी दावा किया कि गुरुवार को श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ और लगातार बारिश के बीच घुटन और विभिन्न चोटों की शिकायत करने वाले लगभग 200 मरीजों को अब तक पुरी के अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य सुविधाओं में भर्ती कराया गया है।

मुख्यमंत्री माझी ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना में हुई मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।

देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक है पुरी रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। भगदड़ के सही कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

गुरुवार को पवित्र तटीय शहर पुरी में भव्य वार्षिक रथ यात्रा देखने के लिए लाखों लोग एकत्रित हुए। विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत निर्धारित समय से पहले ही दिन में दिव्य भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं के लिए ‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के साथ हुई।

‘पहंडी बीजे’ अनुष्ठान के दौरान पवित्र भाई-बहनों और अन्य देवी-देवताओं को 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से उनके सजाए गए रथों तक भव्य शोभायात्रा के साथ ले जाया गया। इस दौरान घंटा, कहली और तेलिंगी बाजा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर और दिव्य ध्वनि पूरे वातावरण में गूंजती रही।

पुजारियों ने पवित्र वैदिक मंत्रों का जाप किया और पारंपरिक ओडिसी कलाकारों ने अपने मनमोहक नृत्य प्रदर्शनों से देवताओं का उनके जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में नौ दिवसीय प्रवास के लिए स्वागत किया। हालांकि, ‘पहंडी बीजे’ की रस्में निर्धारित समय से पहले शुरू हो गईं। लेकिन गुरुवार को उनके समापन में दो घंटे से अधिक की देरी हुई।

Rath Yatra 2026: आज भक्तों के बीच आएंगे भगवान जगन्नाथ, दर्शन के लिए उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

Rath Yatra 2026: आज भक्तों के बीच आएंगे भगवान जगन्नाथ, दर्शन के लिए उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु

 Rath Yatra 2026: जय जगन्नाथ! आज देशभर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ निकाली जा रही है। यह पर्व केवल ओडिशा के पुरी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा आज अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों के बीच नगर भ्रमण करेंगे। लाखों श्रद्धालु रथों के दर्शन करेंगे और रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानेंगे

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। जो श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ के दर्शन करता है, रथ की परिक्रमा करता है या श्रद्धा से रथ की रस्सी खींचता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि इस पर्व को आस्था, सेवा, समानता और भक्ति का महापर्व कहा जाता है।

क्यों खास है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा?

रथ यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भगवान केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के बीच स्वयं पहुंचते हैं। इस दिन जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र का कोई भेदभाव नहीं रहता। हर व्यक्ति भगवान के रथ की रस्सी खींच सकता है। यही परंपरा इस उत्सव को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।

रथ यात्रा का इतिहास

जगन्नाथ मंदिर पुरी का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने कराया था। तभी से हर वर्ष भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है।

रथ यात्रा का उल्लेख स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण सहित कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार भगवान जगन्नाथ का रथ दर्शन करने मात्र से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

रथ यात्रा की पौराणिक कथा

मान्यता है कि एक बार माता सुभद्रा ने अपने दोनों भाइयों भगवान कृष्ण (जगन्नाथ) और बलराम (बलभद्र) से नगर भ्रमण की इच्छा जताई। बहन की इच्छा पूरी करने के लिए दोनों भाई रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। तभी से हर वर्ष यह परंपरा निभाई जाती है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां कुछ दिन विश्राम करने के बाद पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। इसी यात्रा को रथ यात्रा कहा जाता है।

तीनों रथों का क्या है महत्व?

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के लिए हर वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं।

  • नंदीघोष – भगवान जगन्नाथ का रथ, जिसमें 16 पहिए होते हैं।
  • तालध्वज – भगवान बलभद्र का रथ, जिसमें 14 पहिए होते हैं।
  • दर्पदलन (देवदलन) – माता सुभद्रा का रथ, जिसमें 12 पहिए होते हैं।

विशेष बात यह है कि इन रथों का निर्माण हर वर्ष नई लकड़ियों से पारंपरिक विधि के अनुसार किया जाता है।

रथ की रस्सी खींचने का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सी खींचना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। लाखों श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ रथ यात्रा में शामिल होते हैं।

आज ऐसे करें भगवान जगन्नाथ की पूजा

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। घर के मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और चंदन, तुलसी दल, पीले फूल, फल, नारियल और सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।

मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय
जय जगन्नाथ स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे।

आज करें ये शुभ कार्य

  • भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें।
  • रथ यात्रा में भाग लें।
  • रथ की रस्सी श्रद्धा से खींचें।
  • गरीबों को भोजन कराएं।
  • गौ सेवा करें।
  • तुलसी का पूजन करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • मंदिर में पीले फल और मिठाई का दान करें।

इन कार्यों से बचें

  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से बचें।
  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • धार्मिक आयोजनों में अव्यवस्था न फैलाएं।

क्या घर बैठे भी मिलेगा पुण्य?

यदि आप किसी कारणवश रथ यात्रा में शामिल नहीं हो सकते तो घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा करें, ऑनलाइन रथ यात्रा के दर्शन करें, दीपक जलाकर “जय जगन्नाथ” का स्मरण करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ा पूजन है।

रथ यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य

  • पुरी की रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है।
  • तीनों रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं।
  • रथ निर्माण में पारंपरिक कारीगरों की पीढ़ियां शामिल होती हैं।
  • लाखों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के रथ की रस्सी खींचते हैं।
  • रथ यात्रा को देखने देश-विदेश से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह

यदि आप रथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं, तो प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त पानी पिएं, धूप से बचाव करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

आस्था, भक्ति और संस्कृति का यह महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की जीवंत पहचान है। आज जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तब पूरा वातावरण “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठेगा। मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने वाला भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता। इसलिए आज श्रद्धा, सेवा और भक्ति के साथ इस पावन पर्व में सहभागी बनें और भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

 
 
वाराणसी को मिलेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, कैबिनेट ने दी 10,998 करोड़ की मंजूरी

वाराणसी को मिलेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर, कैबिनेट ने दी 10,998 करोड़ की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे 43.218 किलोमीटर लंबे संपर्क कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी।

यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगी और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित की जाएगी। परियोजना में मुख्य मार्ग, फ्लाईओवर, रैंप, लूप और सर्विस रोड सहित 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।

यह कॉरिडोर वाराणसी शहर की यातायात भीड़ कम करने की व्यापक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बनने से राष्ट्रीय राजमार्ग-31, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी रिंग रोड, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर बंदरगाह, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के घाटों तथा चंदौली क्षेत्र तक बेहतर और निर्बाध संपर्क मिलेगा।

80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुरूप तैयार किए जाने वाले इस कॉरिडोर से राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक की यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, वाहनों की परिचालन लागत घटेगी तथा यात्री और माल परिवहन अधिक तेज और सुगम होगा।

यह परियोजना चंदौली सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र सहित एक आर्थिक केंद्र, एक सामाजिक केंद्र और छह प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों तक संपर्क को भी मजबूत करेगी। इससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खनिजों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार के अनुसार, यह परियोजना वाराणसी में आधुनिक, नियंत्रित प्रवेश वाले शहरी परिवहन कॉरिडोर का विकास करेगी, जिससे पर्यटन, आर्थिक विकास, बहु-माध्यम परिवहन व्यवस्था और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

 उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और हजारों तीर्थयात्री रोजाना पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है जबकि पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति खराब बनी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, हर दिन 6,000 से ज्यादा तीर्थ यात्री श्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर रहे हैं। वहीं मौजूदा तीर्थयात्रा सीजन के दौरान श्री केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है क्योंकि लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कई इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं, ट्रेकिंग के रास्ते फिसलन भरे हो गए हैं, भूस्खलन हो रहा है और मौसम से जुड़ी अन्य चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों, खासकर चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश व खराब मौसम की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक इंतजाम जारी हैं।

बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद एक श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम यहां हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए आए थे। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद हमें लगा कि हमें बद्रीनाथ धाम के भी दर्शन करने चाहिए। हम यहां भी आए हैं और यह एक शानदार अनुभव रहा। सब कुछ अच्छा है। लोगों को यहां आना चाहिए, पूजा-अर्चना करनी चाहिए और इस जगह का आनंद लेना चाहिए।”

एक अन्य तीर्थयात्री ने भी मौजूदा मौसम की स्थिति के बावजूद यात्रा के लिए किए गए इंतजामों की सराहना की। श्रद्धालु ने कहा कि इंतजाम अच्छे हैं। हमारी तीर्थयात्रा अच्छी रही क्योंकि मौसम की स्थिति के बावजूद सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि मंगलवार शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक, 14 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा पूरी कर चुके हैं। अभी मौसम एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून के दौरान अक्सर सड़कें बंद हो जाती हैं और भूस्खलन का खतरा रहता है। तीर्थयात्रियों को सावधानी से यात्रा करनी चाहिए। उन्हें नदियों को पार करने और झरनों या जलधाराओं के पास जाने से बचना चाहिए क्योंकि पूरे राज्य में भारी बारिश हो रही है।

इससे पहले, मौसम के हालात को देखते हुए गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की थी कि वे यात्रा के दौरान मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चार धाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पर्याप्त तैयारियां और जरूरी इंतजाम मौजूद रहें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम् 2026’ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने AIIA के नए एमआरआई सेक्शन का भी उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने आयुर्वेद जगत से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आचार्य सुश्रुत, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है, ने सदियों पहले सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया था। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद, ट्यूमर उपचार और ईएनटी सर्जरी सहित कई जटिल शल्य तकनीकों की शुरुआत की।

राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत द्वारा रचित ‘सुश्रुत संहिता’ ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को चिकित्सा विज्ञान की नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण से जुड़ी हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को समयानुकूल आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समाज के हित में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का समग्र जीवन दृष्टिकोण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है और इसे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक एवं प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की परंपरा को वैज्ञानिक मानकों पर प्रमाणित करने के प्रयास कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मानकीकृत दस्तावेजीकरण, डिजिटल हेल्थ इंटीग्रेशन और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों के प्रभावी उपयोग से आयुर्वेद को विश्व स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिलेगी।
युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासा, ईमानदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक अनुसंधान तथा उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां नई तकनीकों के उपयोग से पीछे नहीं हटना चाहिए और आचार्य सुश्रुत के मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा नैतिकता तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम 2026’ से आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नए ज्ञान का सृजन होगा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समग्र स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को और सशक्त बनाएंगे।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, 1.27 लाख करोड़ रुपये से बनेगा भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

पीएम मोदी की अध्यक्षता में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, 1.27 लाख करोड़ रुपये से बनेगा भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और अनुसंधान का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना तथा देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है।

सरकार ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा।

पहले स्तंभ के तहत चिप डिज़ाइन को बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान में 105 स्टार्टअप चिप डिज़ाइन पर काम कर रहे हैं। नई योजना के तहत बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिज़ाइन और रणनीतिक व व्यावसायिक उत्पादों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

दूसरे स्तंभ में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक मशीनों, रसायनों, गैसों और अन्य सामग्री के उत्पादन तथा अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे देश में उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

तीसरे स्तंभ के अंतर्गत अधिक फैब्रिकेशन संयंत्र (फैब) स्थापित करने पर जोर रहेगा। पहला फैब वर्ष 2028 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब जैसी इकाइयों को आकर्षित करेगी।

चौथे स्तंभ में एटीएमपी/ओसैट (पैकेजिंग एवं परीक्षण) उद्योग को और मजबूत किया जाएगा। सरकार उन्नत पैकेजिंग तकनीकों को भारत लाने के लिए वैश्विक कंपनियों को प्रोत्साहित करेगी।

पांचवें स्तंभ के तहत अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से आगे बढ़ते हुए अधिक उन्नत तकनीकों पर अनुसंधान किया जाएगा।

छठे स्तंभ में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्तमान में 315 विश्वविद्यालयों में लगभग 68 हजार छात्र आधुनिक चिप डिज़ाइन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण को और व्यापक बनाया जाएगा तथा उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी।

सरकार के अनुसार, यह योजना आर्थिक विकास को गति देने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में सहायक होगी।

सेमीकॉन 1.0 की प्रगति

सरकार ने बताया कि अब तक 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इनमें से माइक्रोन, केयन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई वर्ष 2026 में उत्पादन शुरू करेगी।

डिज़ाइन क्षेत्र में अब तक 24 स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है, जबकि 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ये कंपनियां उपग्रह संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार उपकरण और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों के लिए चिप विकसित कर रही हैं।

जून में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 24.1% की जोरदार बढ़त, 3.88 लाख यूनिट्स के पार पहुंची बिक्री

जून में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 24.1% की जोरदार बढ़त, 3.88 लाख यूनिट्स के पार पहुंची बिक्री

 भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री (कंपनियों द्वारा डीलर्स को बिक्री) जून में सालाना आधार पर 24.1 प्रतिशत बढ़कर 3,88,144 यूनिट्स रही है। इससे पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 3,12,851 यूनिट्स था। यह जानकारी इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।

सियाम के डेटा के मुताबिक, यात्री वाहनों में यूटिलिटी व्हीकल (यूवी) सेगमेंट लगातार बढ़ रहा है और जून में इसकी सालाना वृद्धि दर 19.9 प्रतिशत रही और वॉल्यूम 2,17,228 यूनिट्स रही। यात्री गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत बढ़कर 98,610 यूनिट्स हो गई है। वैन की बिक्री सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर 10,230 यूनिट्स पर पहुंच गई है।

दोपहिया वाहन श्रेणी ने भी मजबूत रफ्तार बनाए रखी। जून में कंपनियों की ओर से डीलरों को भेजे गए दोपहिया वाहनों की संख्या 18.6 प्रतिशत बढ़कर 18,51,400 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा 15,61,283 यूनिट्स पर था। दोपहिया वाहनों में स्कूटर सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी रही। इसकी घरेलू बिक्री 39.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 7,44,823 यूनिट्स पर पहुंच गई।

वहीं, मोटरसाइकिल की बिक्री 6.4 प्रतिशत बढ़कर 10,56,422 यूनिट्स हो गई, जबकि मोपेड की बिक्री कम आधार के चलते 50.4 प्रतिशत बढ़कर 50,155 यूनिट्स हो गई है। तिपहिया वाहनों की डीलरों को बिक्री सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 77,951 यूनिट्स हो गई है, जबकि पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 61,828 यूनिट्स पर था।

जून में पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री 25 प्रतिशत बढ़कर 64,181 यूनिट्स रही, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़कर 11,828 यूनिट्स पर पहुंच गई। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों ने भी मजबूत वृद्धि दर्ज की। ई-रिक्शा की बिक्री 52.4 प्रतिशत बढ़कर 1,590 यूनिट्स हो गई। सियाम के आंकड़ों के अनुसार, जून में वाहन निर्यात भी मजबूत बना रहा।

कुल वाहन निर्यात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 6,73,105 यूनिट्स पर पहुंच गया है। इसमें दोपहिया वाहनों के निर्यात में 40.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 5,43,684 यूनिट्स पर पहुंच गया। वहीं, तिपहिया वाहनों का निर्यात 39.7 प्रतिशत बढ़कर 51,950 यूनिट्स हो गया, जबकि यात्री वाहनों का निर्यात लगभग स्थिर रहा और 76,601 यूनिट्स दर्ज किया गया।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना को दी मंजूरी

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है। ₹62,500 करोड़ के बजट वाली यह योजना भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाने, घरेलू स्तर पर अधिक पुर्जों के निर्माण को बढ़ावा देने, सप्लाई चेन मजबूत करने और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। इसके तहत भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री (Eligible Sales) पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। यदि कंपनियां मोबाइल फोन के प्रमुख पुर्जे और सब-असेंबली भारत से खरीदती हैं तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, भारतीय ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस योजना के दौरान देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही मोबाइल फोन के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

सरकार ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सात गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि हुई है। यह क्षेत्र बड़ी संख्या में युवाओं, खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है।

मोबाइल फोन निर्माण भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। सरकार के मुताबिक, देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया, जिसने डीजल ईंधन और कटे-तराशे हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया।

सरकार का कहना है कि नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) योजना के बाद अगले चरण की पहल है। PLI-LSEM की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। नई योजना से मोबाइल फोन निर्माण, निर्यात, घरेलू वैल्यू एडिशन और भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को दी मंजूरी, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को दी मंजूरी, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने आज बुधवार को यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (NIPU-2026) की राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी। उर्वरक विभाग द्वारा प्रस्तुत इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में गैस-आधारित नई यूरिया निर्माण इकाइयों की स्थापना को आकर्षित करना है, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता कम हो।

नीति के प्रमुख फायदे

– पारदर्शिता बढ़ेगी: निश्चित और परिवर्तनशील लागतों को अलग-अलग किया जाएगा।
– व्यावहारिक रिटर्न: इक्विटी पर रिटर्न (RoE) के लिए 12% न्यूनतम और 16% अधिकतम सीमा तय।
– विदेशी मुद्रा जोखिम कम: चार साल बाद निश्चित लागत को रुपये में बदलने का प्रावधान।
– बड़ी बचत: NIP-2012 की तुलना में प्रत्येक नए संयंत्र पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान।

पृष्ठभूमि

2012 में शुरू की गई पुरानी निवेश नीति (NIP-2012) के तहत कुल 6 नई यूरिया इकाइयां स्थापित हुई थीं। इस नीति की समयसीमा अक्टूबर 2019 में समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में देश में 33 यूरिया इकाइयां संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन है। फिर भी घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर बना हुआ है, जिसे आयात से पूरा किया जाता है। उर्वरक विभाग को कई नए प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद नई निवेश नीति की आवश्यकता महसूस की गई। नई नीति NIPU-2026 के तहत नई यूरिया इकाइयों की स्थापना को गति देगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह फैसला किसानों को सस्ते और पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने तथा देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

Sawan 2026: भोले के भक्तों का इंतजार खत्म! इस दिन से शुरू होगा सावन,जानें कितने पड़ेंगे श्रावणी सोमवार

Sawan 2026: भोले के भक्तों का इंतजार खत्म! इस दिन से शुरू होगा सावन,जानें कितने पड़ेंगे श्रावणी सोमवार

  Sawan Kab Se Hai: भगवान शिव को समर्पित सावन (श्रावण) माह का इंतजार हर साल करोड़ों शिव भक्तों को रहता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि साल 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होगा या 31 जुलाई से?

द्रिक पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग) में सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होगी और 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को श्रावण पूर्णिमा के साथ इसका समापन होगा। वहीं, दक्षिण भारत के कई राज्यों में अमांत पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत अलग तिथि से होती है।

क्यों खास होता है सावन का महीना?

हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर पूरी सृष्टि की रक्षा की थी। तभी से सावन का महीना शिव आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पूरे महीने शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

सावन सोमवार का महत्व

सावन के सभी सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, दांपत्य जीवन सुखमय बनता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कई श्रद्धालु सावन के पहले सोमवार से सोलह सोमवार व्रत भी शुरू करते हैं।

उत्तर भारत में सावन 2026 की प्रमुख तिथियां

  • सावन प्रारंभ: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
  • पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
  • श्रावण पूर्णिमा (समापन): 28 अगस्त 2026

दक्षिण भारत में कब शुरू होगा सावन?

दक्षिण भारत के कई राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है। इसलिए वहां सावन की शुरुआत 13 अगस्त 2026 से मानी जाएगी। 

दक्षिण भारत के सावन सोमवार

  • पहला सोमवार – 17 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार – 24 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार – 31 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार – 7 सितंबर 2026

सावन में पड़ने वाले प्रमुख पर्व

  • सावन सोमवार व्रत
  • मंगला गौरी व्रत
  • सावन शिवरात्रि
  • हरियाली अमावस्या
  • नाग पंचमी
  • रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा)

सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में सुबह स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद साफ जल चढ़ाएं और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, शहद, अक्षत, सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा एवं रुद्राष्टकम का पाठ करें और अंत में भगवान शिव व माता पार्वती की आरती करें।

सावन में क्या करें?

  • प्रतिदिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दूध का दान करें।
  • शिव मंदिर में दीपक जलाएं।
  • सात्विक भोजन करें और संयम रखें।

क्या न करें?

  • मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
  • किसी का अपमान या झूठ न बोलें।
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
 
भारत अंतरिक्ष में रचेगा नया इतिहास, पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ भरेगा उड़ान,जानिए क्यों है खास

भारत अंतरिक्ष में रचेगा नया इतिहास, पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ भरेगा उड़ान,जानिए क्यों है खास

 India First Private Rocket: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। अब तक देश के अंतरिक्ष मिशनों की पहचान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़ी रही है, लेकिन पहली बार एक निजी भारतीय कंपनी अंतरिक्ष में ऐसा इतिहास रचने जा रही है, जो देश के स्पेस सेक्टर की दिशा और भविष्य दोनों बदल सकता है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) अपनी पहली परीक्षण उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट होगा, जो न केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करेगा बल्कि भारत के बढ़ते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम की ताकत भी दुनिया के सामने रखेगा। 

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह मिशन केवल वैज्ञानिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके साथ पहली बार एक भारतीय रॉकेट अंतरिक्ष में हीरा और सोने से बनी विशेष कलाकृतियां भी लेकर जाएगा। यही वजह है कि इस मिशन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच होगी ऐतिहासिक लॉन्चिंग

स्काईरूट एयरोस्पेस ने जानकारी दी है कि विक्रम-1 की पहली परीक्षण उड़ान के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच का लॉन्च विंडो तय किया गया है। इस मिशन का नाम ‘आगमन’ (Agaman) रखा गया है। लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से की जाएगी।

हालांकि अंतिम लॉन्च डेट मौसम, सुरक्षा मंजूरी (Range Clearance) और लॉन्च पैड पर अंतिम तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद घोषित की जाएगी। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो भारत पहली बार किसी निजी कंपनी के ऑर्बिटल रॉकेट को अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरते हुए देखेगा।

कौन है स्काईरूट एयरोस्पेस?

स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की सबसे तेजी से उभरती स्पेस टेक कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने की थी। कुछ ही वर्षों में कंपनी ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतते हुए 1.1 अरब डॉलर से अधिक का मूल्यांकन हासिल किया और भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई।

कंपनी का उद्देश्य छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को कम लागत, कम समय और अधिक विश्वसनीय तरीके से अंतरिक्ष में पहुंचाना है।

क्यों खास है विक्रम-1?

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में इस रॉकेट का नाम विक्रम-1 रखा गया है। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है जिसे विशेष रूप से सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए डिजाइन किया गया है। 

करीब सात मंजिला ऊंचा यह बहु-चरणीय (Multi-stage) रॉकेट अत्याधुनिक कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है, जिससे इसका वजन कम और मजबूती अधिक है। इसमें स्काईरूट द्वारा विकसित 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जो आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो-अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में स्थापित करने की क्षमता रखता है।

पहली बार अंतरिक्ष में जाएगा हीरा

इस मिशन की सबसे अनोखी बात यह है कि पहली बार कोई भारतीय रॉकेट अंतरिक्ष में डायमंड ज्वेलरी लेकर जाएगा।

कॉस्मॉस डायमंड्स द्वारा तैयार ‘कॉस्मिक ब्लूम’ (Cosmic Bloom) नामक पेलोड को विक्रम-1 के साथ भेजा जाएगा। इसमें एल्यूमिनियम प्लेट पर विशेष तरीके से जड़ा गया हीरा शामिल है। यह केवल एक आभूषण नहीं बल्कि कला, डिजाइन और स्पेस टेक्नोलॉजी के संगम का प्रतीक माना जा रहा है।

18 कैरेट सोने की अनोखी कलाकृति भी होगी शामिल

मिशन के साथ एक और विशेष पेलोड भेजा जाएगा, जिसे प्रसिद्ध कलाकार अजय कुमार मटेवाड़ा ने तैयार किया है।

इस माइक्रो आर्ट में 18 कैरेट सोने से बना एक छोटा रॉकेट है, जिसमें भारत के तीन महान वैज्ञानिकों—

  • नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई
  • पूर्व राष्ट्रपति एवं मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

की सूक्ष्म आकृतियां बनाई गई हैं। इनकी खासियत यह है कि प्रत्येक आकृति चावल के दाने से भी छोटी है। यह कलाकृति भारत की वैज्ञानिक विरासत और नवाचार को समर्पित श्रद्धांजलि है।

भारत के लिए क्यों है यह मिशन गेम चेंजर?

दुनिया भर में छोटे सैटेलाइट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। संचार, मौसम, इंटरनेट, रक्षा, कृषि और पृथ्वी अवलोकन जैसे क्षेत्रों में हजारों छोटे उपग्रह लॉन्च किए जा रहे हैं। ऐसे में कम लागत वाले लॉन्च व्हीकल की मांग तेजी से बढ़ी है।

यदि विक्रम-1 सफल रहता है तो भारत वैश्विक स्पेस मार्केट में छोटे सैटेलाइट लॉन्चिंग के क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। इससे विदेशी कंपनियां भी अपने उपग्रह भारत से लॉन्च कराने में रुचि दिखा सकती हैं।

ISRO को मिलेगा बड़ा फायदा

निजी कंपनियों के स्पेस सेक्टर में आने से ISRO पर छोटे और व्यावसायिक मिशनों का दबाव कम होगा। इससे भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी चंद्रयान, गगनयान, शुक्र मिशन, मंगल मिशन और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन जैसे बड़े वैज्ञानिक अभियानों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी। 

इसके साथ ही देश में स्पेस टेक्नोलॉजी, रिसर्च, स्टार्टअप, रोजगार और निवेश के नए अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।

भारत के स्पेस सेक्टर के लिए नई उड़ान

सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद भारत में कई स्पेस स्टार्टअप तेजी से उभरे हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस का यह मिशन केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर स्पेस इकोसिस्टम की नई शुरुआत माना जा रहा है।

यदि यह मिशन सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर अमेरिका, यूरोप और अन्य प्रमुख स्पेस देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में पहुंच सकता है। यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।

 
 
सेप्टिक टैंक बना मौत का गड्ढा, जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, रेस्क्यू से पहले खत्म हुई सांसें

सेप्टिक टैंक बना मौत का गड्ढा, जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, रेस्क्यू से पहले खत्म हुई सांसें

 नई दिल्ली।  राजधानी दिल्ली के मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। फैक्ट्री परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस की चपेट में आने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबसे पहले एक व्यक्ति किसी काम के सिलसिले में सेप्टिक टैंक के अंदर उतरा था। उसके बाहर नहीं आने पर दो अन्य लोग उसे बचाने के लिए टैंक में गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। देखते ही देखते तीनों बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद तीनों को टैंक से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतकों की पहचान 38 वर्षीय अरुण, 32 वर्षीय संदीप और 42 वर्षीय चांद के रूप में हुई है। 

दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि दोपहर करीब 12:03 बजे कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक में कुछ लोग फंस गए हैं। सूचना मिलते ही दो दमकल वाहनों को रवाना किया गया। हालांकि रास्ते में भारी ट्रैफिक होने के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ, जिसके बाद वैकल्पिक मार्ग से टिकरी की ओर से एक अतिरिक्त टीम भेजी गई।रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि टैंक में उतरने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों और उपकरणों का पालन किया गया था या नहीं।

 
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बैंक कर्मचारी भी शामिल, बैंक में होता था रकम का बंटवारा, 8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बैंक कर्मचारी भी शामिल, बैंक में होता था रकम का बंटवारा, 8 आरोपी गिरफ्तार

 अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि मंदिर के चढ़ावे की रकम को ट्रस्ट कार्यालय से बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल कुछ बैंक कर्मचारियों की भी कथित भूमिका जांच के दायरे में है। बताया जा रहा है कि नोटों के बंडल बैंक में जमा करने से पहले या जमा प्रक्रिया के दौरान उनमें से नकदी निकाल ली जाती थी और बाद में बैंक परिसर में चोरी की गई रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था।

जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती प्रतिदिन दो शिफ्ट में होती है। पहली शिफ्ट दोपहर 2 बजे और दूसरी रात 8 बजे संचालित होती है। करीब 40 कर्मचारी ट्रस्ट के विश्वासपात्र लोगों की निगरानी में चढ़ावे की गिनती करते हैं। इसके बाद ट्रस्ट के प्रतिनिधि, इंटरनल ऑडिट टीम, आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी और बैंक कर्मी मिलकर पूरी रकम बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। जांच में इसी पूरी व्यवस्था के दौरान कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

सूत्रों का दावा है कि इस कथित हेराफेरी में केवल सेवादार ही नहीं, बल्कि बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एसआईटी इस पूरे मामले की हर कड़ी की जांच कर रही है और बैंक से जुड़े दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज तथा संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है।

राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में अब तक चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और एजेंसियां इस कथित चोरी के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

 
 
 
ट्रैफिक चालान नियमों में बड़े बदलाव, लोक अदालत जाने से पहले भरना होगा 50% जुर्माना

ट्रैफिक चालान नियमों में बड़े बदलाव, लोक अदालत जाने से पहले भरना होगा 50% जुर्माना

 नई दिल्ली।  ट्रैफिक चालान से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब वाहन मालिकों को लोक अदालत में चालान से राहत पाने या जुर्माना कम कराने से पहले निर्धारित चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य हो सकता है। इसके बाद ही मामला लोक अदालत में सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाएगा।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चालान को चुनौती देना चाहता है या लोक अदालत के माध्यम से उसका निपटारा कराना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर चालान राशि का आधा भुगतान करना होगा। इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

45 दिन के भीतर करनी होगी कार्रवाई

नए प्रावधानों के तहत वाहन मालिक को चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर या तो जुर्माना जमा करना होगा या निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही लोक अदालत में मामले की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रस्तावित नियमों में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी सख्त प्रावधान शामिल हैं। यदि 1 जनवरी 2026 से किसी चालक के नाम एक वर्ष के भीतर पांच या उससे अधिक ट्रैफिक चालान दर्ज होते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्वतः निरस्त किया जा सकता है।

लंबित चालान वाले वाहन हो सकते हैं ब्लैकलिस्ट

नए नियम लागू होने पर जिन वाहनों के चालान लंबे समय तक लंबित रहेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं पर भी प्रतिबंध लग सकता है। वाहन स्वामित्व हस्तांतरण, पता परिवर्तन, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, हाइपोथेकेशन हटाने जैसी कई सेवाएं तब तक उपलब्ध नहीं होंगी, जब तक लंबित चालानों का निपटारा नहीं किया जाता।

लाइसेंस की वैधता बढ़ाने पर भी विचार

इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। वर्तमान में लाइसेंस की वैधता 20 वर्ष या 40 वर्ष की आयु तक (जो पहले हो) होती है। प्रस्ताव है कि इसे बढ़ाकर 50 वर्ष की आयु तक किया जाए, जिससे लोगों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। साथ ही वाहन ट्रांसफर और परमिट नवीनीकरण जैसी सेवाओं को भी अधिक सरल और डिजिटल बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगोल रिफाइनरी परियोजना का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगोल रिफाइनरी परियोजना का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

 भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मंगोलिया के दौरे पर हैं। उन्होंने मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया। इस दौरान मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और इंडस्ट्री और माइनिंग मंत्री गोंगोर दमदिन्न्यम भी मौजूद रहे। वहां उन्होंने चल रहे कामों की स्थिति की समीक्षा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग और खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्नयम के साथ मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया। यह लैंडमार्क भारत मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ चल रहे कामों की स्थिति का समीक्षा की।” उन्होंने कहा, “प्रोजेक्ट साइट पर भारतीय और मंगोलियन वर्कफोर्स से भी बातचीत की। मुश्किल हालात में इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में उनके डेडिकेशन और कमिटमेंट के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।”

मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख के साथ मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “भारत और मंगोलिया रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे रिश्ते गहरी सभ्यतागत और आध्यात्मिक जुड़ाव, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विकास की इच्छाओं और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।”

पिछले साल भारत और मंगोलिया ने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाया था। विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख के बीच पिछले साल भारत यात्रा के दौरान हुई बातचीत के फैसलों और प्रगति की समीक्षा करना था। डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, “हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू पर चर्चा की, जिसमें विकास से जुड़ी साझेदारी भी शामिल है। इसमें तेल रिफाइनरी परियोजना सबसे महत्वपूर्ण है।”

मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में एक तेल रिफाइनरी परियोजना बनाई जा रही है। इसके लिए भारत सरकार ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) दी है। यह परियोजना भारत सरकार की दुनियाभर में सबसे बड़ी सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट पहल है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवा सिविल सेवक निभाएं अग्रणी भूमिका: पीएम मोदी

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवा सिविल सेवक निभाएं अग्रणी भूमिका: पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के 183 अधिकारी प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए उन्हें विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि दो वर्षों के फील्ड अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद युवा अधिकारी ऐसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंचे हैं, जहां उनके फैसले न केवल उनके करियर बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसेवा की वास्तविक परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से नवाचार, उद्देश्यपूर्ण कार्यशैली और नागरिक-केंद्रित शासन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

पीएम मोदी ने “नागरिक देवो भव” का मंत्र दिया

पीएम मोदी ने कहा कि प्रशासनिक फाइलों को केवल कागजी प्रक्रिया न समझें, बल्कि यह याद रखें कि हर फाइल के पीछे लाखों लोगों की आकांक्षाएं, समस्याएं और जीवन जुड़े होते हैं। उन्होंने “नागरिक देवो भव” का मंत्र देते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने और शासन को संवेदनशील, जवाबदेह तथा समावेशी बनाने का आग्रह किया।

बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता

उन्होंने कहा कि बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, जिससे स्थायी और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

पीएम मोदी ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख किया

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक नीति और प्रशासनिक निर्णय देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देने वाला होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार एवं अवसर सृजन को वर्तमान समय की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में शासन व्यवस्था प्रक्रिया-आधारित मॉडल से परिणाम-आधारित मॉडल की ओर बढ़ी है। डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक की मदद से सेवा वितरण अधिक पारदर्शी और सुगम हुआ है।

पीएम मोदी ने डेटा आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए कहा

डेटा आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें करोड़ों लोगों के जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब मानना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से यह मूल्यांकन करने को कहा कि सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे रही हैं या नहीं।

पीएम मोदी ने कहा कि अधिकारियों को अपने पद या अधिकार से नहीं, बल्कि अपने कार्यों के ठोस और मापनीय परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करनी चाहिए।उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक अधिकारी महिलाएं हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरणिकांति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निजी निवेश और निर्यात वृद्धि अहम : ईएसी-पीएम चेयरमैन

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निजी निवेश और निर्यात वृद्धि अहम : ईएसी-पीएम चेयरमैन

‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य पाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ना आवश्यक है और इसमें निजी क्षेत्र से बड़ा निवेश और मजबूत निर्यात वृद्धि अहम भूमिका निभाएंगे। यह बयान प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन महेंद्र देव ने मंगलवार को दिया। राष्ट्रीय राजधानी में एफआईसीसीआई इंडिया के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “निजी क्षेत्र से निवेश और निर्यात में बढ़ोतरी, दोनों ही बहुत जरूरी हैं।” देव ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में किए गए ढांचागत सुधारों ने इस दिशा में आगे बढ़ने की नींव रखी है।

सांख्यिकी मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के शानदार प्रदर्शन की वजह से पूरे वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। सरकारी बयान के अनुसार, इस दौरान द्वितीयक क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि तृतीयक क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, प्राथमिक क्षेत्र में 3.2 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्रों के प्रदर्शन से प्रेरित थी।

सरकारी बयान के अनुसार, 2025-26 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, मरम्मत, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग, स्टोरेज, फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर से जुड़ी सेवाओं में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह हाईवे, रेलवे, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकार द्वारा किए गए भारी निवेश को दिखाता है।

इन निवेशों ने ग्रोथ रेट को बढ़ाने में मदद की है, जबकि ग्लोबल मंदी के बीच भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। देव ने कहा कि उन्हें खुशी है कि एफआईसीसीआई फसल पोषण पर यह अहम और इनोवेटिव कॉन्क्लेव आयोजित कर रहा है और किसानों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साझा मंच पर बुला रहा है।

देशभर में वंदे मातरम शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जानें क्यों है खास

देशभर में वंदे मातरम शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जानें क्यों है खास

भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा ‘माई भारत’ अभियान के माध्यम से देश भर में वंदे मातरम शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में पहला शिविर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 24 से 30 जून तक बंकिम चंद्र चटर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और युवा नेतृत्व को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख युवा सशक्तिकरण पहल है।

सात दिवसीय आवासीय शिविरों के रूप में परिकल्पित इस पहल का उद्देश्य युवाओं को भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं की गहरी समझ विकसित करने के अवसर प्रदान करना है, साथ ही सांस्कृतिक आत्मविश्वास और नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है। ये शिविर विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य सूचित, जिम्मेदार और राष्ट्र-उन्मुख युवा नेताओं की एक पीढ़ी का पोषण करना है।

वंदे मातरम शिविर ‘वंदे मातरम’ की भावना से प्रेरित हैं, जो मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और क्षेत्रीय, भाषाई और सामाजिक सीमाओं से परे भावनात्मक एकीकरण का प्रतीक है। यह कार्यक्रम नागरिक भागीदारी, नेतृत्व विकास, डिजिटल साक्षरता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देकर समकालीन युवाओं की चिंताओं का समाधान करना चाहता है।

इस पहल के तहत चिन्हित जिलों में 20 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक में 15 से 29 वर्ष की आयु के 150 युवा प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रत्येक शिविर में छह राज्यों के प्रतिनिधि होंगे, पूर्वोत्तर से अनिवार्य प्रतिनिधित्व होगा, और महिलाओं तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी होगी। इन शिविरों में लगभग 3,000 युवाओं को शामिल किया जाएगा और इनमें संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से लेकर नेतृत्व विकास और प्रमुख योजनाओं तक के विषय शामिल होंगे।

सप्ताह भर चलने वाले इन शिविरों में वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका, संविधान और नागरिक कर्तव्यों पर विषयगत सत्र, भाषा, भोजन और खेलों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का दौरा, राष्ट्र प्रथम संवाद और तात्कालिक भाषण सत्र, नेतृत्व और सामुदायिक लामबंदी कार्यशालाएं और सरकार की प्रमुख पहलों पर चर्चा शामिल होगी। वंदे मातरम शिविर भारत के युवाओं की ऊर्जा, आदर्शवाद और रचनात्मकता का उपयोग करके एकता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

पद्म पुरस्कार- 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने अलका याग्निक, ममूटी समेत 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए

पद्म पुरस्कार- 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने अलका याग्निक, ममूटी समेत 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए

 राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को ‘नागरिक अलंकरण समारोह-द्वितीय’ में ‘पद्म पुरस्कार- 2026’ प्रदान किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत) को पद्म भूषण से सम्मानित किया। उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने सम्मान प्राप्त किया। वहीं, टेनिस के दिग्गज विजय अमृतराज को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। गायिका अलका याग्निक को राष्ट्रपति मुर्मु ने पद्म भूषण से सम्मानित किया।

इस दौरान पी. नारायणन और जस्टिस (रिटायर्ड) केटी थॉमस को साहित्य और शिक्षा तथा जन-कार्य के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पद्म भूषण पाने वाले अन्य लोगों में एसकेएम मैलानंदन, ममूटी, वेल्लापल्ली नटेसन और दत्तात्रेयुडु नोरी शामिल हैं। अवॉर्ड पाने वालों की लिस्ट में दो अमेरिकी, एक रूसी और एक जॉर्जियाई नागरिक भी शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने अलंकरण समारोह में 65 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह और कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।

दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए हैं, जिनमें दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण, और 56 पद्म श्री शामिल हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ने 25 मई को आयोजित पहले नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए थे, जिनमें दो पद्म विभूषण, छह पद्म भूषण और 57 पद्म श्री शामिल थे।

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण। पद्म पुरस्कार कला, समाजसेवा, जन-कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में दिए जाते हैं। ‘पद्म विभूषण’ असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ उच्च स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए और ‘पद्म श्री’ किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस पर की जाती है।

कौन हैं कुणाल शाह, जिन्हें मिला व्हाट्सएप का बड़ा जिम्मा? कहां से पढ़े-लिखे हैं और कितनी मिलेगी सैलरी? जानकर रह जाएंगे हैरान

कौन हैं कुणाल शाह, जिन्हें मिला व्हाट्सएप का बड़ा जिम्मा? कहां से पढ़े-लिखे हैं और कितनी मिलेगी सैलरी? जानकर रह जाएंगे हैरान

 Whatsapp New CEO: मेटा प्लेटफॉर्म्स ने भारत की फिनटेक कंपनी CRED में करीब 8,500 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। यह जानकारी दोनों कंपनियों ने 22 जून को साझा की है। इस निवेश को भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और फिनटेक सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसमें न सिर्फ कंपनियों की साझेदारी मजबूत होगी, बल्कि देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भी बदलाव आने की उम्मीद है।

कुणाल शाह को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

इस बड़े समझौते के बाद CRED के संस्थापक कुणाल शाह को एक बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बन सकते हैं और मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह ले सकते हैं। हालांकि इस नियुक्ति को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन टेक जगत में यह खबर तेजी से फैल रही है और इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

शिक्षा और शुरुआती करियर की कहानी

कुणाल शाह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के विल्सन कॉलेज से की। जहां उन्होंने फिलॉसफी यानी दर्शनशास्त्र में बीए किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई शुरू की लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने NMIMS कॉलेज में पार्ट-टाइम MBA में दाखिला लिया। लेकिन वह कोर्स भी बीच में ही छोड़ दिया। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने पढ़ाई के साथ काम करने की आदत डाल ली थी। जिसने आगे चलकर उन्हें एक सफल उद्यमी बनाया।

सैलरी और कमाई का अनुमान

अगर कुणाल शाह WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बनते हैं तो उनकी सैलरी को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। लेकिन अनुमान के अनुसार, मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में सीईओ को सालाना लगभग 2 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक का पैकेज मिल सकता है। इसके अलावा उन्हें कंपनी के शेयर, बोनस और परफॉर्मेंस आधारित इंसेंटिव भी दिए जाते हैं जो कुल आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

नेटवर्थ और भारत के लिए इस डील का महत्व

कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 15,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। जिसका बड़ा हिस्सा उनकी फिनटेक कंपनी CRED में हिस्सेदारी से आता है। हाल ही में मेटा के निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन भी बढ़ा है। यह डील भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और कॉमर्स को जोड़कर एक बड़ा इकोसिस्टम बन सकता है। साथ ही यह भी संकेत है कि वैश्विक टेक कंपनियां भारत के डिजिटल बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती हैं।