लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |
राष्ट्रपति आज प्रदान करेंगी 65 पद्म सम्मान, रोहित शर्मा, अलका याज्ञनिक और ममूटी समेत कई हस्तियां होंगी सम्मानित

राष्ट्रपति आज प्रदान करेंगी 65 पद्म सम्मान, रोहित शर्मा, अलका याज्ञनिक और ममूटी समेत कई हस्तियां होंगी सम्मानित

 नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मु आज शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 65 व्यक्तित्वों को पद्म सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। इस चरण में कुल दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और 56 पद्म  पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सम्मान पाने वालों में प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, दिग्गज अभिनेता ममूटी, मशहूर पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा प्रमुख नामों में शामिल हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। इनमें पांच पद्म विभूषण, कई पद्म भूषण और पद्म  सम्मान शामिल हैं। शेष पुरस्कार अलग-अलग चरणों में प्रदान किए जा रहे हैं। पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। ये सम्मान कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, व्यापार एवं उद्योग, खेल तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय और प्रेरणादायक योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं।राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह समारोह देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। समारोह में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, गणमान्य अतिथि और पुरस्कार विजेताओं के परिजन भी मौजूद रहेंगे।

TMC में बड़ा बवाल: ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने का ऐलान, अभिषेक बनर्जी सस्पेंड

TMC में बड़ा बवाल: ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने का ऐलान, अभिषेक बनर्जी सस्पेंड

 West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने और सांसद अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा कर दी। उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ बताते हुए नई संगठनात्मक समिति का गठन किया और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन नियुक्त किया।

न्यू टाउन के एक होटल में हुई बैठक में बागी विधायकों, कोलकाता नगर निगम (KMC) समेत तीन जिलों के करीब 70 पार्षदों ने हिस्सा लिया। बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के पुनर्गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पार्टी संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन जरूरी है, लेकिन 2022 के बाद ऐसा नहीं किया गया, जिससे संगठनात्मक संकट पैदा हुआ।

ताजा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बंटी दिखाई दे रही है। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट और तीसरा काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला सांसदों का समूह है, जिसने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है।

विवाद अब पार्टी के चुनाव चिन्ह और फंड तक पहुंच गया है। बागी नेताओं ने पार्टी के नाम और सिंबल पर दावा ठोकते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए हैं। वहीं, करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड को लेकर भी संघर्ष तेज हो गया है। पुलिस शिकायत के बाद पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपये पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया है। बागी विधायकों का आरोप है कि इन खातों में जमा धन के स्रोत की जांच होनी चाहिए और इसमें कथित अनियमितताओं की आशंका है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: योग से जुड़ेगा विश्व, शांति और सद्भाव का होगा विस्तार

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: योग से जुड़ेगा विश्व, शांति और सद्भाव का होगा विस्तार

 जबलपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित भव्य सामूहिक योग कार्यक्रम में भाग लिया और देशवासियों को योग के महत्व का संदेश दिया। इस दौरान हजारों लोगों ने उनके साथ योगाभ्यास किया। राष्ट्रपति ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने के साथ-साथ समाज, प्रकृति और संपूर्ण मानवता के साथ भी गहरा संबंध स्थापित करती है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में योग शांति, संतुलन, सद्भाव और सामूहिक कल्याण को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर व्यक्ति को स्वस्थ, सकारात्मक और आत्मविश्वासी बनाता है। यही कारण है कि आज योग की लोकप्रियता भारत की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और मानवता को विशाल वैश्विक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। योग के जरिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है और मानसिक तनाव से भी राहत मिलती है। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लेकर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। राष्ट्रपति का यह संदेश योग को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ, संतुलित तथा जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन पर देशभर से शुभकामनाएं, उपराष्ट्रपति बोले- जनसेवा को समर्पित है उनका जीवन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन पर देशभर से शुभकामनाएं, उपराष्ट्रपति बोले- जनसेवा को समर्पित है उनका जीवन

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जन्मदिन पर देशभर के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई केंद्रीय नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्रपति मुर्मु के सादगीपूर्ण जीवन, जनसेवा के प्रति समर्पण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की। सभी नेताओं ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की कामना की।

उपराष्ट्रपति ने बताया जनसेवा और सामाजिक न्याय की प्रेरणा

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा वंचित वर्गों के हितों की वकालत की है और खुद को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता देशभर के लोगों को प्रेरित करती है। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु के दीर्घायु, स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना करते हुए कहा कि सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण देश के अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है।

ओम बिरला ने राष्ट्रपति के नेतृत्व की सराहना की

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि साधारण परिवेश से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यात्रा करोड़ों भारतीयों, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनका गरिमामय नेतृत्व, संविधान के प्रति अटूट निष्ठा और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता देशवासियों का मार्गदर्शन करती है।

एस. जयशंकर ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की बधाई देते हुए जनसेवा के प्रति उनके समर्पण की सराहना की और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को सराहा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का सादगीपूर्ण जीवन, जनजातीय समाज के उत्थान के प्रति समर्पण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से राष्ट्रपति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना की।

रेखा गुप्ता ने बताया नारीशक्ति की प्रतीक

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रपति मुर्मु को राष्ट्र की प्रेरणा और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि संघर्ष से शिखर तक की उनकी यात्रा अनुकरणीय है। उन्होंने राष्ट्रपति को नारीशक्ति का प्रतीक बताते हुए उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

हिमंता बिस्वा सरमा ने राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु शालीनता, बुद्धिमत्ता और गरिमा की प्रतिमूर्ति हैं। उनका जीवन-सफर लोकतंत्र, समावेशिता और दृढ़ता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती है।

अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी दीं शुभकामनाएं

हरियाणा के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने उनके समर्पित जीवन, विनम्र व्यक्तित्व, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की।

पीएम मोदी के साथ योग करने को देशभर में उत्साह, 6 लाख से अधिक संगठनों ने कराया पंजीकरण

पीएम मोदी के साथ योग करने को देशभर में उत्साह, 6 लाख से अधिक संगठनों ने कराया पंजीकरण

 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले देशभर में योग को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल पर पंजीकृत संगठनों की संख्या 6 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योग अब केवल एक स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है।

21 जून को देशभर में होगा सामूहिक योग आयोजन

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय योग कार्यक्रम में देशभर के लाखों लोग एक साथ योग करेंगे। योग संगम पहल के तहत पंजीकृत संगठन अपने-अपने स्थानों पर सामूहिक योग सत्र आयोजित करेंगे और कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनेंगे।

स्कूलों से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक बढ़ी भागीदारी

आयुष मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में पोर्टल पर पंजीकरण की रफ्तार तेज हुई है। स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान, निजी संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं और सामुदायिक समूह बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ रहे हैं। योग संगम का उद्देश्य देश के हर कोने में योग को जन-जन तक पहुंचाना और इसे एक साझा राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में स्थापित करना है।

डिजिटल मंच से जुड़ रहे हैं लाखों प्रतिभागी

योग संगम पोर्टल इस अभियान की डिजिटल रीढ़ बनकर उभरा है। इसके माध्यम से संगठन अपने कार्यक्रमों का पंजीकरण कर रहे हैं, आयोजन स्थलों की जानकारी साझा कर रहे हैं और प्रतिभागियों को जोड़ रहे हैं। यह मंच देशव्यापी समन्वय और व्यापक सहभागिता सुनिश्चित कर रहा है।

778 जिलों तक पहुंचा योग संगम अभियान

यह पहल देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है और 778 जिलों को कवर कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, 3.22 लाख से अधिक सरकारी संस्थानों, लगभग 2 लाख शैक्षणिक संस्थानों, 16 हजार से अधिक निजी संस्थानों, 5 हजार से अधिक गैर-सरकारी संगठनों तथा 44 हजार अन्य संगठनों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

पश्चिम बंगाल और राजस्थान रहे सबसे आगे

राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल सबसे आगे है, जहां 2.76 लाख से अधिक संगठनों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद राजस्थान में लगभग 1.5 लाख पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है।

‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ है इस वर्ष की थीम

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” रखी गई है। यह विषय जीवन के हर चरण में योग की उपयोगिता को रेखांकित करता है और स्वस्थ, सक्रिय तथा संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश देता है।

आयुष मंत्रालय ने किया अधिक से अधिक भागीदारी का आह्वान

आयुष मंत्रालय ने देशभर के संगठनों, संस्थानों और समुदायों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। मंत्रालय का कहना है कि योग संगम पोर्टल पर बढ़ती भागीदारी भारत की जनभागीदारी की भावना और स्वास्थ्य के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पहल योग को एक वैश्विक आंदोलन से आगे बढ़ाकर सामुदायिक उत्सव और राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। योग के माध्यम से स्वस्थ भारत और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आदिवासी अंचल से पीएम मोदी का विकास संदेश, ओडिशा में कई परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास

आदिवासी अंचल से पीएम मोदी का विकास संदेश, ओडिशा में कई परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी मौजूद रहेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मु के पैतृक गांव का करेंगे दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ पीएम मोदी का सुबह लगभग 11:15 बजे मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव दौरा करने का कार्यक्रम है। पहाड़पुर राष्ट्रपति मुर्मु का पैतृक गांव है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पवित्र उपवन संथाली जाहेरा एवं हो जाहेरा, कौशल केंद्र तथा पहाड़पुर स्कूल में प्रार्थना करेंगे।

शिक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को मिलेगा बल

यह यात्रा आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक अवसरों, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए चल रहे प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम

दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का विषय “विकास रा धरा, ओडिशा सारा” रखा गया है।

47,600 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 47,600 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा।

जनसभा को भी संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री

इस अवसर पर प्रधानमंत्री रायरंगपुर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं से पूरे ओडिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कनेक्टिविटी में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी परियोजनाओं की रखी जाएगी आधारशिला

जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 600 मेगावाट की ऊपरी इंद्रावती पंप भंडारण परियोजना और आईबी थर्मल पावर स्टेशन की स्टेज-II विस्तार परियोजना शामिल हैं। इस विस्तार परियोजना में 660 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

सड़क, सिंचाई और शिक्षा परियोजनाओं को भी मिलेगी मंजूरी

अन्य परियोजनाओं में 300 टीपीडी स्रोत-पृथक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र, कटकजोड़ी नदी पर पुल, बौध जिले में ढालपुर-हरभंगा रोड का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, नुआपाड़ा-घाटीपाड़ा एनएच-353 खंड का चार लेन निर्माण, कुसुमदिही मेगालिफ्ट सिंचाई परियोजना, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र तथा रायरंगपुर में इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।

स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा

इसके अलावा, ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड और नौ स्वचालित परीक्षण स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा। बौध में 300 बिस्तरों वाले जिला मुख्यालय अस्पताल भवन का भी लोकार्पण होगा। इन परियोजनाओं से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पंजाब दौरे पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस

पंजाब दौरे पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 20 से 22 जून तक पंजाब के तीन दिवसीय संगठनात्मक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के साथ-साथ विभिन्न संगठनात्मक बैठकों, पार्टी पदाधिकारियों से संवाद, सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं से मुलाकात और संगठन को मजबूत करने से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

अमृतसर से होगी दौरे की शुरुआत

दौरे के पहले दिन 20 जून को नितिन नबीन अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। आगमन के बाद वह भाजपा की राज्य कोर ग्रुप की बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा वह श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकेंगे, ऐतिहासिक जलियांवाला बाग का दौरा करेंगे, श्री दुर्गियाना मंदिर में दर्शन करेंगे तथा श्री रामतीर्थ (वाल्मीकि मंदिर) में भी श्रद्धा अर्पित करेंगे। शाम को वह जालंधर पहुंचेंगे, जहां रात 7:45 बजे रोड शो का नेतृत्व करेंगे।

योग दिवस कार्यक्रम और संगठनात्मक बैठकें

दौरे के दूसरे दिन 21 जून को नितिन नबीन फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में सुबह 6:30 बजे आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वह प्रमुख समाचार पत्रों के संपादकों के साथ नाश्ते पर संवाद करेंगे। वह जालंधर में दैनिक सवेरा द्वारा संत समाज की उपस्थिति में आयोजित एक सम्मेलन में भी शामिल होंगे। दोपहर में वह लुधियाना पहुंचेंगे, जहां भाजपा के जिला कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद शक्ति केंद्र प्रभारियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठक करेंगे। शाम को वह क्षेत्र के उद्योगपतियों के साथ विशेष बैठक कर संवाद करेंगे।

पद्मश्री सरदारा सिंह जौहल से करेंगे मुलाकात

दौरे के अंतिम दिन 22 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लुधियाना में प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री और पद्मश्री सम्मानित सरदारा सिंह जौहल से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। भाजपा के अनुसार, इस तीन दिवसीय दौरे का उद्देश्य पंजाब में संगठन को और अधिक मजबूत करना तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक वर्गों के साथ संवाद बढ़ाना है।

तरुण चुघ ने बताया नई शुरुआत का संकेत

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पंजाब में एक नई शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपने दौरे की शुरुआत श्री हरमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर और भगवान वाल्मीकि मंदिर में मत्था टेककर करेंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन को आगे बढ़ाने और पंजाब के सर्वांगीण विकास के संकल्प का प्रतीक है।

पंजाब सरकार पर साधा निशाना

तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब आज एक नए जीवन और नई दिशा की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए राज्य को आर्थिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और गैंगस्टर गतिविधियों के कारण लोग असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य की अर्थव्यवस्था कमजोर होकर दिवालियापन जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था भी चरमरा गई है। उनके अनुसार, भाजपा पंजाब में उम्मीद, विकास और नई संभावनाओं का नया दौर लेकर आएगी।

उपभोक्ता संरक्षण और व्यापार सुगमता के लिए मजबूत परीक्षण अवसंरचना जरूरी: प्रल्हाद जोशी

उपभोक्ता संरक्षण और व्यापार सुगमता के लिए मजबूत परीक्षण अवसंरचना जरूरी: प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने और व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) परिसर में परीक्षण सुविधाओं के विस्तार की आधारशिला रखते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक सशक्त गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए गुणवत्ता प्रणाली को मजबूत करने पर जोर

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विश्व स्तरीय परीक्षण अवसंरचना सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए देश की गुणवत्ता प्रणाली को और मजबूत करना आवश्यक है।

एनटीएच परिसर में विस्तार कार्य की रखी आधारशिला

देश की गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के अवसर पर मंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र, मुंबई परिसर का दौरा किया। कार्यक्रम की शुरुआत भूमि पूजन समारोह और परीक्षण सुविधाओं के भावी विस्तार के लिए आधारशिला रखने के साथ हुई।

परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की सराहना

मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र द्वारा देशभर में उन्नत परीक्षण क्षमताओं के विस्तार तथा उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मुंबई स्थित प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और चल रही आधुनिकीकरण पहलों तथा परीक्षण क्षमताओं की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बातचीत की।

नई प्रयोगशाला और दो केंद्रों का उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान प्रल्हाद जोशी ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र में सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र के उत्तरी क्षेत्र केंद्र तथा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम की ऑरिक सिटी में स्थापित एनटीएच-ऑरिक उपग्रह केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।

परीक्षण क्षमता और उपभोक्ता सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

नई सुविधाओं के शुरू होने से विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ता सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा।

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: भारतीय दूतावास ने श्रद्धालुओं के लिए जारी की यात्रा से जुड़ी अहम जानकारी

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: भारतीय दूतावास ने श्रद्धालुओं के लिए जारी की यात्रा से जुड़ी अहम जानकारी

 चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने शुक्रवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने यात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी सलाह दी।

 बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “विदेश मंत्रालय (एमईए) और चीन की सरकार के सहयोग से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026, 20 जून को भारत से रवाना होगी। दूतावास की टीम आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए हार्दिक स्वागत करती है।”

राजदूत दोरईस्वामी के नेतृत्व में दूतावास की टीम ने हाल ही में यात्रा मार्गों का दौरा किया। टीम ने भारत के सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) तक जाने वाले प्रमुख रास्तों का निरीक्षण किया। इस दौरान नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए यात्रा व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की गई।

दूतावास ने वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह हमारे राजदूत का संदेश है। जल्द ही यात्रा से जुड़ी और तस्वीरें तथा जरूरी यात्रा सलाह भी जारी की जाएंगी। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की शुभकामनाएं।” राजदूत ने संदेश में बताया कि नाथू ला दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारी श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें बसों के जरिए याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।

उन्होंने वीडियो में यात्रा के समय, खाने-पीने की सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी अन्य जरूरी जानकारियां भी दीं। राजदूत ने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़ी और जानकारी देने वाले कई वीडियो आगे भी जारी किए जाएंगे।  पिछले सप्ताह उन्होंने तिब्बत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और सुविधाओं की समीक्षा की।

ल्हासा हवाई अड्डे पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के उप महानिदेशक यांग लाहोंग ने उनका स्वागत किया। दूतावास के अनुसार, बाद में राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की। झाओ पेंग ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के नए नियम, 48 घंटे पहले आवेदन जरूरी

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के नए नियम, 48 घंटे पहले आवेदन जरूरी

 ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब जहाजों को पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में प्रवेश करने से पहले परमिट और बीमा लेना जरूरी होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद हाल ही में यह जलमार्ग फिर से खोला गया है।

ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने ये नए नियम जारी किए हैं। यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है।

अथॉरिटी के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह रास्ता दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है।

पीजीएसए ने कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों के निर्देश जारी होने के बाद, होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सूचित किया जाता है कि तय समय के दौरान केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो जरूरी नियमों को पूरा करते हुए अपनी यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन जमा करेंगे।”

नए नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों को प्रवेश और बाहर निकलने के समय देरी से बचने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।

अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर बताया कि जहाजों को यात्रा की अनुमति मिलने से पहले जरूरी परमिट और बीमा भी लेना होगा। इसके अलावा, जहाजों को ईरानी अधिकारियों की ओर से तय किए गए शिपिंग कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना होगा, ताकि उन इलाकों से बचा जा सके जहां संघर्ष के बाद अभी भी बारूदी माइन या अन्य खतरों की संभावना हो सकती है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिकों की होगी।

कल जारी होगी पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त, 9 करोड़ 44 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा लाभ

कल जारी होगी पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त, 9 करोड़ 44 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा लाभ

   PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान देशभर के पात्र किसानों के बैंक खातों में योजना की 23वीं किस्त की राशि जारी करेंगे। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी। कल 20 जून को 23वीं किस्त के तहत 18 हजार 880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे 9 करोड़ 44 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए ट्रांसफर की जाएगी।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के किसानों को भी इस किस्त का लाभ मिलेगा। जिले के 63,228 पात्र किसानों के बैंक खातों में कुल 12 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। इससे किसानों को खरीफ सीजन की तैयारियों में आर्थिक सहायता मिलेगी और वे बीज, खाद तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर सकेंगे। कृषि विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है।

ई-केवाईसी और आधार लिंक जरूरी

उप संचालक कृषि राजकुमार सोलंकी ने किसानों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों को आधार से लिंक कराएं और ई-केवाईसी की प्रक्रिया समय पर पूरी कर लें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की ई-केवाईसी या आधार सीडिंग लंबित है, उन्हें किस्त प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने किसानों से अपने बैंक खाते और योजना से संबंधित जानकारी की जांच करने तथा किसी भी त्रुटि को जल्द से जल्द सुधारने की सलाह दी है, ताकि किस्त की राशि बिना किसी बाधा के उनके खातों में पहुंच सके।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

 कृषि विभाग का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के दौर में मिलने वाली यह सहायता किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। समय पर राशि मिलने से किसान कृषि निवेश बढ़ा सकेंगे और खेती से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों की खरीद कर सकेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा राशि जारी किए जाने के साथ ही देशभर के करोड़ों किसानों के खातों में धनराशि पहुंचना शुरू हो जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा, जानें क्या है बाबा बर्फानी का पौराणिक इतिहास, जो है लोगों की आस्था का केंद्र

कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा, जानें क्या है बाबा बर्फानी का पौराणिक इतिहास, जो है लोगों की आस्था का केंद्र

 श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित अमरनाथ धाम हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष लाखों भक्त कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए प्रशासन और श्राइन बोर्ड की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही है।

प्राकृतिक हिमलिंग है मुख्य आकर्षण

अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग है। माना जाता है कि गुफा के भीतर बर्फ से बनने वाला यह शिवलिंग किसी मानव द्वारा निर्मित नहीं होता, बल्कि प्राकृक रूप से आकार लेता है। श्रद्धालु इसे बाबा बर्फानी के रूप में पूजते हैं। यही कारण है कि यह धाम देश के सबसे महत्वपूर्ण शिव तीर्थों में गिना जाता है। वहीं सनातन धर्म में यह जगह बेहद ही खास महत्व रखती है। यहीं पर वैष्णो देवी मंदिर और अमरनाथ गुफा जैसे पवित्र धार्मिक स्थल हैं, जो हिंदुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं।

भगवान शिव और अमर कथा से जुड़ी है मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। कहा जाता है कि इस गुप्त ज्ञान को किसी अन्य जीव द्वारा न सुना जाए, इसलिए शिव ने यात्रा मार्ग में अपने प्रिय साथियों और प्रतीकों को नंदी, चंद्रमा, नाग, गणेश और अन्य को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया था। इसी कथा के कारण इस स्थान को “अमरनाथ” नाम मिला।

दर्शन से मिलती है आध्यात्मिक शांति

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस पवित्र गुफा के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पापों का नाश होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यही वजह है कि हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनते हैं।

ऊंचाई और कठिन मार्ग बनाते हैं यात्रा को खास

समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण यात्रा होने के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। आस्था, साहस और तपस्या का यह संगम अमरनाथ यात्रा को अन्य तीर्थ यात्राओं से अलग पहचान देता है। अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए प्रशासन ने बिना वैध रजिस्ट्रेशन किसी भी यात्री को यात्रा मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोई भी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोई भी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम

 नई दिल्ली।  दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी कर देशभर में सिरप की बिक्री के नियमों में बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब कफ सिरप समेत किसी भी प्रकार का औषधीय सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदा जा सकेगा।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब मेडिकल स्टोर और फार्मेसी संचालकों को सिरप बेचने से पहले पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी वैध पर्ची की जांच करनी होगी। यह व्यवस्था केवल खांसी की दवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी तरह के औषधीय सिरप पर समान रूप से लागू होगी।

दवाओं के गलत इस्तेमाल पर लगेगी लगाम

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में कई दवाओं, विशेषकर कफ सिरप के अनुचित उपयोग और दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए सरकार ने प्रिस्क्रिप्शन आधारित बिक्री प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है।

मेडिकल स्टोरों को करना होगा नियमों का पालन

नई व्यवस्था लागू होने के बाद देशभर के दवा विक्रेताओं और फार्मेसी संचालकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप बेचने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस

सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देगा और लोगों को स्वयं इलाज करने की आदत से बचाएगा। साथ ही इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

भारत में बैन होगा टेलीग्राम, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है इसकी वजह

भारत में बैन होगा टेलीग्राम, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है इसकी वजह

 नई दिल्ली : RE-NEET परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत टेलीग्राम की सेवाओं पर सीमित अवधि के लिए रोक लगाई जाएगी। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग और कथित पेपर लीक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम जरूरी है।

RE-NEET परीक्षा 21 जून को

गौरतलब है कि RE-NEET परीक्षा का आयोजन 21 जून 2026 को प्रस्तावित है। पिछले कुछ समय से टेलीग्राम के कई समूहों और चैनलों पर परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने या उससे जुड़े दावों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने यह एहतियाती निर्णय लिया है।

मैसेज एडिट फीचर पर भी रोक

सरकार ने टेलीग्राम को यह निर्देश भी दिया है कि भारत में पहले से मौजूद संदेशों के लिए एडिट (संपादन) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद किया जाए। यह व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने में इससे मदद मिलेगी और किसी भी संदिग्ध सामग्री में बाद में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

टेलीग्राम का नाम कई बार पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स का दुरुपयोग कर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश करते हैं। केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियां इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है, बल्कि केवल परीक्षा अवधि और जांच संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीमित समय के लिए लागू किया गया है।

PM Kisan Yojana : पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त की तारीख तय, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे पैसे

PM Kisan Yojana : पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त की तारीख तय, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे पैसे

 नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों किसानों के लिए राहत और खुशी की खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 23वीं किस्त जारी करने की तारीख की घोषणा कर दी है, जिसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।

20 जून को जारी होगी राशि

योजना से जुड़े आधिकारिक अपडेट के अनुसार, पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को किसानों के खातों में भेजी जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होगी, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

किसानों को मिलती है सालाना आर्थिक सहायता

केंद्र सरकार ने किसानों की आय को सहारा देने और खेती-किसानी से जुड़े खर्चों में मदद के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त के रूप में 2,000 रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे जाते हैं।

अब तक जारी हो चुकी हैं 22 किस्तें

 योजना की शुरुआत के बाद से अब तक किसानों को 22 किस्तों का लाभ मिल चुका है। अब सरकार 23वीं किस्त जारी करने जा रही है, जिससे लाखों किसान परिवारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा। यह राशि खेती से जुड़े कार्यों, बीज, खाद और अन्य आवश्यक खर्चों में मददगार साबित होती है।

Accident: दर्दनाक हादसे ने छिनी परिवार की खुशियां, कुएं में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 8 लोगों की मौत

Accident: दर्दनाक हादसे ने छिनी परिवार की खुशियां, कुएं में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 8 लोगों की मौत

 सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर से एक बेहद ही दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। जहां एक पिकअप वाहन सड़क किनारे स्थित एक कुएं में जा गिरी। जिससे की इस हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने छह अन्य लोगों को बचा लिया। बताया गया की मृतकों में बच्चें भी शामिल थे। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।

मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। पुलिस, आपदा राहत दल और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद सभी घायलों और मृतकों को कुएं से बाहर निकाला गया। जानकारी के मुताबिक, वाहन में सवार सभी 14 लोग सोलापुर जिले के रंजनीगांव के निवासी थे। वे म्हास्वद स्थित प्रसिद्ध सिद्धनाथ मंदिर में दर्शन करने गए थे और वापस अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान तंदुलवाड़ी गांव के समीप यह हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि जिस कुएं में वाहन गिरा, वह सड़क के बेहद करीब स्थित है और उसकी सुरक्षा दीवार भी पर्याप्त ऊंची नहीं थी। कुआं पूरी तरह पानी से भरा हुआ था, जिससे हादसा और भी घातक साबित हुआ। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतकों में चार महिलाएं और चार बच्चे शामिल हैं। वहीं कुछ पुरुष यात्रियों को स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक

 घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचने लगे। सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं विधायक उत्तम जानकर ने भी इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए प्रशासन से त्वरित राहत और सहायता सुनिश्चित करने की बात कही। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। वहीं मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है।

बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान

बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान

 BIG NEWS : करीब चार महीने से जारी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो गया है. इस समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की. इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है.

उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाई जाएगी. साथ ही दुनिया भर के जहाजों को फिर से सामान्य आवाजाही शुरू करने का संदेश दिया गया.

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
समझौते तक पहुंचने में पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई गई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, ‘दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमति जताई है. इसमें लेबनान भी शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा.’

आखिरी वक्त पर फंस सकता था समझौता
रिपोर्ट के अनुसार रविवार को यह समझौता लगभग टूटने की स्थिति में पहुंच गया था. कारण यह था कि इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाके में हमला किया, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया था. इसके बावजूद बातचीत जारी रही और अंततः समझौते की घोषणा कर दी गई.

समझौते में क्या-क्या शामिल है?
दोनों देशों के बीच हुई सहमति में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.

सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना.
लेबनान को भी समझौते के दायरे में शामिल करना.
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना.
इस सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखना.
19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर करना.

परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति
समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है. जानकारी के अनुसार, समझौते में परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और अत्यधिक समृद्ध परमाणु सामग्री को नष्ट करने की बात कही गई है. इसके लिए निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करने का प्रस्ताव है.

हालांकि यहां एक बड़ा मतभेद भी सामने आया है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि परमाणु सामग्री को नष्ट किया जाएगा, जबकि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपने देश में ही अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.

अभी अंतिम शांति समझौता नहीं
यह समझौता फिलहाल अंतिम शांति संधि नहीं है. इसे एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बताया गया है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत करेंगे. इस दौरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारी आगे की शर्तों पर चर्चा करेंगे.

ईरान ने रखी अपनी शर्त
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान यह सुनिश्चित कर लेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें सैन्य कार्रवाई रोकना, नाकाबंदी हटाना और संपत्तियों को जारी करना जैसी बातें शामिल हैं. साथ ही उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता अमेरिका पर भरोसा करने का संकेत नहीं है और ईरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन पर नजर रखेगा.

अब आगे क्या?
अब सबकी नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर है. अगर आने वाले 60 दिनों की बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है.

16 महीने बाद आमने-सामने होंगे PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप, G-7 समिट में होगी अहम मुलाकात

16 महीने बाद आमने-सामने होंगे PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप, G-7 समिट में होगी अहम मुलाकात

 नई दिल्ली/पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने बाद पहली बार आमने-सामने मुलाकात करने जा रहे हैं। दोनों नेता 17 जून को फ्रांस में आयोजित G-7 समिट के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि भारतीय समयानुसार शाम 6:15 बजे होने वाली इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील प्रमुख एजेंडा रहेगी। दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है और अब इस मुलाकात से महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे G-7 देशों, साझेदार राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक आर्थिक विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, मोदी-ट्रंप बैठक में व्यापार के अलावा रक्षा सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका का मानना है कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक आर्थिक साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

इस मुलाकात के दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हाल के दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। ओमान तट के पास तेल टैंकरों पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के बाद भारत ने अपनी चिंता अमेरिका के समक्ष दर्ज कराई थी। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा भी दोनों नेताओं के बीच उठ सकता है।

G-7 समिट के बाद प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस में विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम VivaTech Summit में भी शामिल होंगे। साथ ही वे फ्रांस में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।

भारत ने रचा इतिहास, ‘मेड इन इंडिया’ C-295 सैन्य विमान ने भरी पहली सफल उड़ान

भारत ने रचा इतिहास, ‘मेड इन इंडिया’ C-295 सैन्य विमान ने भरी पहली सफल उड़ान

 नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। भारत में असेंबल किए गए पहले C-295 सैन्य परिवहन विमान ने बुधवार को अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी भारतीय वायु सेना (IAF) ने दी और इस परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों व विशेषज्ञों को बधाई दी।

करीब 21,935 करोड़ रुपये की लागत वाले इस रक्षा सौदे के तहत भारतीय वायु सेना कुल 56 C-295 विमान खरीद रही है। इनमें से 16 विमान सीधे एयरबस से प्राप्त किए जा रहे हैं, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबली भारत में की जा रही है।

गुजरात के वडोदरा स्थित अत्याधुनिक उत्पादन केंद्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के सहयोग से इन विमानों का निर्माण हो रहा है। यह पहली बार है जब भारत में इस स्तर का आधुनिक सैन्य परिवहन विमान तैयार किया जा रहा है।

C-295 विमान दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में जवानों, हथियारों और भारी सैन्य उपकरणों को तेजी से पहुंचाने में सक्षम है। इसकी सफल उड़ान भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल रक्षा क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी और देश सैन्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।

 
 

 

 
काशी में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में तैयार होगा भव्य शिव थीम पार्क

काशी में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में तैयार होगा भव्य शिव थीम पार्क

 वाराणसी। मोक्ष और भगवान शिव की नगरी काशी जल्द ही एक और ऐतिहासिक पहचान हासिल करने जा रही है। वाराणसी में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नगर निगम ने स्थान का चयन कर लिया है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, आगामी 9 से 10 महीनों के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की लगभग 20 एकड़ भूमि पर यह भव्य शिवलिंग स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही शिव थीम पर आधारित एक आधुनिक अर्बन पार्क भी विकसित किया जाएगा, जो धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पार्क परिसर में आकर्षक लेजर शो, थीम आधारित संरचनाएं और मनोरम हरित क्षेत्र तैयार किए जाएंगे, जिससे यह स्थल धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन सके।

गौरतलब है कि वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध भगवान काशी विश्वनाथ धाम स्थित है, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इसके अलावा काशी में अनेक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

 परियोजना पूरी होने के बाद काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग के दर्शन का अवसर मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि यह नया धार्मिक स्थल वाराणसी की आध्यात्मिक और पर्यटन पहचान को और अधिक वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।