श्रीनगर: कोरोना संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों के बीच जहां सरकार स्कूल और कॉलेज बंद कर रही है, वहीं जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग ने कश्मीर में पर्यटन को बढ़ाने के लिए ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन करने की घोषणा कर दी है. 3-8 अप्रैल तक होने वाले इस "ट्यूलिप फेस्टिवल" में एक लाख लोगों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. इस ट्यूलिप फेस्टिवल का उद्धघाटन जम्मू-कश्मीर के उपराजयपाल मनोज सिन्हा करेंगे. इसमें पर्यटक और स्थानीय लोग को बड़ी संख्या में शामिल हों, इसके लिए फेस्टिवल में कई इंतेज़ाम भी किए गए हैं. ट्यूलिप गार्डन के अंदर विभिन विभागों और निजी कारोबारियों के 25 स्टॉल होंगे, जहां कश्मीर की संस्कृति, हस्तकला, परंपरा, खान पान और शिल्प कला को दर्शाया जाएगा. लेकिन कश्मीर घाटी में हर दिन कोरोना के आंकड़े बढ़ने लगे हैं और मार्च महीने में संक्रमण में 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सबसे बड़ी चिंता इस बात से है कि कश्मीर घूमने आए पर्यटकों में भी कोरोना पाया गया है. इसीलिए ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन को कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. ट्यूलिप गार्डन में पहले 5 दिन में 48 हज़ार लोगों के आने से इस बात का अंदाज़ा लग गया है कि यह बाग लोगों को आकर्षित कर रहा है. इसीलिए बड़ी संख्या में लोग ट्यूलिप फेस्टिवल में आएंगे. इसी को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों के आने की सभावन के चलते आने-जाने के लिए 'ट्रैफिक प्लान' भी बनाया है. कोरोना से लड़ने वाले कश्मीर के एक प्रमुख डॉक्टर डॉ नवीद शाह के अनुसार यह फैसला कश्मीर घाटी के लिए घातक बन सकता है और इसी से संक्रमण कई गुना तेज़ी से फैलने की पूरी सम्भावना है. श्रीनगर निवासी मुदस्सिर अहमद का कहना है कि एक तरफ हम लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की बात करते हैं और दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोगों को एक जगह बुलाकर संक्रमण को एक तरह से बढ़ावा दे रहे हैं. यह बहुत खतरनाक हो सकता है , जहां बाकी राज्य लॉकडाउन की बात कर रहे हैं, हम अपने लोगों को कोरोना की तरफ ढकेल रहे हैं. पिछले हफ्ते महाराष्ट्र से आए एक बुज़ुर्ग की अस्पताल में कोरोना से मृत्यु हुई और उसके परिवार के कई सदस्य अस्पताल में भर्ती हुए. जिसके बाद श्रीनगर में टेस्टिंग को लेकर सवाल उठे. परिवार का तीन दिन पहले हवाई अड्डे पर टेस्ट हुआ था, जो निगेटिव आया था. चिंता इस बात से है कि हवाई जहाज़ से आने वाले लोगों में 900 संक्रमित केस सिर्फ मार्च महीने में मिले. उपराज्यपाल के सलाहकार बसीर खान ने गुरुवार को श्रीनगर में बैठक कर ट्यूलिप फेस्टिवल के आयोजन को लेकर हो रही तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश जारी किए. इन निर्देशों में आने वाले सभी लोगों और पर्यटकों पर कोरोना प्रोटोकॉल के पालन करने पर ज़ोर दिया गया है. लेकिन लोगों के मास्क ना पहनने और कोरोना नियमों की अनदेखी के चलते बड़ी संख्या में लोगों के ट्यूलिप फेस्टिवल में आने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग लद्दाख की तरह कश्मीर आने वाले लोगों का हवाई सफर से पहले RT-PCR टेस्ट करवाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रशासन इस मामले पर ख़ामोश है. वहीं, कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते कश्मीर घाटी में एक दर्जन स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जहां पर शिक्षक और छात्र कोरोना सक्रमित पाए गए. जबकि बाकी स्कूलों ने भी अगले तीन दिनों तक स्कूल बंद करने का खुद ही फैसला लिया है. इसके साथ-साथ कश्मीर यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT SRINAGAR) और सेंट्रल यूनिवर्सिटी को भी बंद करके छात्रों को हॉस्टल खाली करने या फिर हॉस्टल के अंदर ही रहने का आदेश जारी किया गया. ऐसे में जहां हर दिन 400-500 मामले रोज़ सामने आने लगे हैं. ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन मुसीबत को दावत देने जैसा है. क्योंकि ट्यूलिप के फूलों के साथ फोटो लेते समय सभी पर्यटक मास्क का इस्तेमाल नहीं कर रहे और पर्यटकों की नाराज़गी से डरते हुए अधिकारी भी इनको मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग पर ज़ोर नहीं दे रहे.
नईदिल्ली। भारत का पहला 14 लेन वाला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) आम जनता के लिए खुल गया है। इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली और मेरठ के बीच का सफ़र लगभग 45 मिनट में पूरा हो जायेगा। अब तक दिल्ली से मेरठ पहुँचने में ढाई घंटे लगते हैं। दिल्ली-एक्सप्रेसवे 96 किलोमीटर लम्बा है, इसमें कुल 14 लेन हैं। इस एक्सप्रेसवे से मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और देहरादून से दिल्ली आने वाले लोगों को सफ़र में आसानी होगी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में कुल 4 चरण हैं। पहला चरण अक्षरधाम से यूपी गेट तक है। जबकि दूसरा चरण यूपी गेट से डासना तक है। तीसरा चरण डासना से हापुड़ तक है। जबकि चौथा चरण दिल्ली से मेरठ तक है। इस परियोजना का निर्माण 8,346 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। गौरतलब है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पहले चरण का उद्घाटन मई 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। इस एक्सप्रेसवे के पहले चरण के लिए अधिकतम गति सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। जबकि बाकी के तीन चरणों के लिए गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा है।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने बुधवार को स्थानीय निकायों को अनुदान-सहायता प्रदान करने के लिए राज्यों को 4,608 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की। यह अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) दोनों के लिए हैं। इसमें से आरएलबी को 2,660 करोड़ रुपए और यूएलबी को 1,948 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। इस अनुदान को 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार जारी किया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में, वित्त मंत्रालय ने स्थानीय निकाय अनुदान के रूप में 28 राज्यों को कुल 87,460 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इसमें से आरएलबी के लिए 60,750 करोड़ रुपये और यूएलबी के लिए 26,710 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। आरएलबी अनुदान को पंचायत के सभी स्तरों- गांव, ब्लॉक और जिले के साथ-साथ राज्यों में 5वीं और 6वीं अनुसूची के क्षेत्रों के लिए जारी किया जाता हैं। आरएलबी अनुदान आंशिक रूप से बेसिक/संयुक्त और आंशिक रूप में होता हैं। मूल अनुदानों का उपयोग आरएलबी के द्वारा स्थान-विशेष की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। दूसरी ओर, निर्धारित अनुदान का उपयोग केवल की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है (ए) खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) की स्वच्छती और रखरखाव की स्थिति और (बी) पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण के रखरखाव के लिए। वर्ष 2020-21 में, मंत्रालय द्वारा बुनियादी आरएलबी अनुदान के तौर पर 32,742.50 करोड़ रुपये और निर्धारित आरएलबी अनुदान के तौर पर 28,007.50 करोड़ जारी किए गए हैं। यूएलबी अनुदान को दो श्रेणियों (ए) मिलियन प्लस शहरों के लिए और (बी) गैर-मिलियन प्लस शहरों के लिए प्रदान किया गया है। 2020-21 में मंत्रालय से मिलियन प्लस शहरों को 8,357 करोड़ रूपए का अनुदान और नॉन-मिलियन प्लस शहरों को 18,354 करोड़ रूपए का अनुदान प्रदान किया गया है । मिलियन-प्लस शहरों के मामले में, बुधवार को 1,824 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। मिलियन प्लस शहरों के लिए दिया गया समस्त अनुदान विशिष्ठ स्थितियों के अनुसार निर्धारित है। इन अनुदानों को प्राप्त करने के लिए, मिलियन प्लस शहरों को पीएम 10 और पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता के आधार पर परिवेशी वायु गुणवत्ता पर शहर-वार और क्षेत्रवार लक्ष्य विकसित करने की आवश्यकता होती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इन सुधारों की निगरानी और मूल्यांकन करेगा और ऐसे शहरों को अनुदानों के वितरण की सिफारिश करेगा। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क की स्थापना, स्रोत मूल्यांकन अध्ययन और इन शहरों के वायु-गुणवत्ता के आंकड़ों को अद्यतन करने के कार्य भी करेगा। परिवेशी वायु गुणवत्ता में सुधार के अलाना, मिलियन प्लस शहरों को मिलने वाला अनुदान संरक्षण, आपूर्ति, पानी के प्रबंधन और कुशल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार के साथ भी जोड़ा गया है, जो नियोजित शहरीकरण के मामले में महत्वपूर्ण हैं। इस घटक के लिए, आवास और शहरी मामले मंत्रालय एक नोडल मंत्रालय है और शहर-वार और वर्ष-वार लक्ष्यों के विकास की स्थिति के अनुरूप मंत्रालय इन शहरों के लिए अनुदानों के वितरण की सिफारिश करता है। जल आपूर्ति और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अनुदान को विशेष रूप से पानी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार और यूएलबी द्वारा स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए व्यय किया जाता है। राज्यों को क्षमता विकास के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और सेवा स्तर के मानक को पूरा करने के लिए अवसंरचनात्मक मुद्दों के समाधान करने की आवश्यकता होती है। नॉन-मिलियन-प्लस शहरों के मामले में, वर्ष 2020-21 में अनुदान के रूप में 18,354 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसका 50 प्रतिशत मूल अनुदान है, जबकि शेष 50 प्रतिशत (ए) पेयजल (वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रण सहित) और (बी) ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ा है। यह राशि विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (एएमआरयूटी) आदि के तहत प्रदान की गई धनराशि के अतिरिक्त है। राज्यों को 10 कार्य दिवसों के भीतर स्थानीय निकायों को अनुदान हस्तांतरित करने की आवश्यकता होती है। इस अवधि से के बाद होने वाले विलंब की स्थिति में राज्य सरकार स्थानीय निकायों को ब्याज के साथ अनुदान जारी करने के लिए उत्तरदायी होती है।
शिवपुरी | स्कूल शिक्षा विभाग कक्षा पहली से आठवीं के विद्यार्थियों के लिए एक अप्रैल से पूर्वानुसार ही दूरदर्शन और रेडियो पर शैक्षणिक कार्यक्रम का प्रसारण करेंगा। यह शैक्षणिक गतिविधियाँ रेडियो पर प्रात: 10 से 11 और सांय 5 बजे से 5.30 बजे तक एवं दूरदर्शन पर दोपहर 12 बजे से 01.30 बजे तक संचालित की जाएंगी।
नई दिल्ली: दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते अगले आदेश तक सभी स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है. इस दौरान ऑनलाइन क्लास शुरू की जा सकती हैं. शिक्षा निदेशालय ने कहा कि दिल्ली में स्कूलों के किसी भी क्लास के छात्रों को अगले आदेश तक नए एकेडमिक सेशन में नहीं बुलाया जाएगा. हालांकि 9वी से 12वीं कक्षा के छात्रों ( शैक्षणिक सत्र 2020-21) को उनके पेरेंट्स की अनुमति के बाद मिड टर्म/ प्री बोर्ड/एनुअल एग्जाम/ बोर्ड एग्जाम/ प्रैक्टिकल एग्जाम/ प्रोजेक्ट वर्क/ इंटरनल एसेसमेंट के लिए स्कूल बुलाया जा सकेगा. बता दें कि आज ही दिल्ली के स्कूलों में औपचारिक रूप से नए सत्र की शुरुआत हुई थी. पिछले साल कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन से महज कुछ दिन पहले स्कूलों को बंद किया गया था. पिछले साल अप्रैल में नए सत्र की पढ़ाई ऑनलाइन शुरू हुई थी और इस साल अप्रैल में भी वैसी ही स्थिति है. बता दें कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामलों में नए सिरे से तेजी देखी गई है. बुधवार को 1,819 लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे और 11 लोगों की मौत हुई थी. दिल्ली में अब तक 6,62,430 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 11,027 मरीजों की मौत हुई है.
नई दिल्ली: सीबीआई ने दक्षिण दिल्ली में एक निर्माणाधीन मकान को छुड़वाने की धमकी देकर एक लाख रुपये वसूल रहे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक टीआरएस की सांसद कविता का ड्राइवर है. सीबीआई ने तीन लोगों की गिरफ्तारी की अधिकारिक पुष्टि की है. जबकि सांसद कविता ने इस बात को स्वीकार किया है कि इनमें से गिरफ्तार एक शख्स उनका ड्राइवर है जबकि दो अन्य लोगों को नहीं जानती है. वहीं दिल्ली में उनका कोई निजी सहायक नहीं है. वहीं सीबीआई गिरफ्तार तीनों लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी के मुताबिक दक्षिण दिल्ली में रहने वाले मनजीत सिंह लांबा नाम के शख्स ने सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को शिकायत की थी कि उनके पास राजीव भट्टाचार्य नाम के एक शख्स का फोन आया था. जिसने उनसे कहा कि वह दक्षिण दिल्ली में जो मकान बनवा रहे हैं उसको लेकर बहुत सारी शिकायतें हैं और वह स्थानीय एमसीडी के बड़े अधिकारियों को जानते हैं. अगर वह लोग चाहेंगे तो मकान नहीं टूटेगा. आरोप के मुताबिक राजीव भट्टाचार्य ने मनजीत सिंह लांबा को बताया कि टीआरएस की एमपी कविता की निजी सहायक शुभांगी गुप्ता के नंबर पर बात भी कर लें. साथ ही इन लोगों ने अपना जो पता बताया वह पता भी सांसद कविता का दिल्ली स्थित अधिकारिक निवास का था.
रिश्वत की डिमांड
सीबीआई का कहना है कि मनजीत सिंह लांबा से पहले मकान न तोड़े जाने के बदले पांच लाख रुपये रिश्वत की डिमांड की गई और बाद में यह मामला एक लाख रुपये में सेटल हुआ. मनजीत सिंह लांबा ने इस मामले को लेकर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को शिकायत की. सीबीआई ने पहले इस मामले में स्वतंत्र गवाहों के साथ मिलने वाली शिकायत की आरंभिक जांच की. इस जांच के दौरान यह पाया गया कि शिकायतकर्ता मनजीत सिंह लांबा सांसद के अधिकारिक निवास में गया, जहां राजीव भट्टाचार्य और शुभांगी गुप्ता भी मौजूद थे. शुरुआती जांच के दौरान आरोप की पुष्टि होने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी के मुताबिक शुरुआती जांच के बाद इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र और उगाही करने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनके नाम राजीव भट्टाचार्य शुभांगी गुप्ता और देवेंद्र कुमार मौर्य बताए गए हैं. उधर टीआरएस की सांसद कविता ने अपना एक बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने दिल्ली स्थित अपना आधिकारिक निवास ड्राइवर दुर्गेश कुमार मौर्य को सौंपा हुआ था. सांसद ने कहा कि उनका कोई भी निजी सहायक दिल्ली में नहीं है बाकी अन्य दो लोग जो गिरफ्तार किए गए हैं उनके बारे में वह कुछ नहीं जानती हैं. सांसद ने इन लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने को भी कहा है. फिलहाल सीबीआई इन तीनों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और मामले की जांच जारी है.
उपराष्ट्रपति ने आज एक कार्यक्रम में कहा कि लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनते समय कैरेक्टर, कंडक्ट, कैलिबर, और कैपेसिटी यानी 4-सी पर ध्यान देना चाहिए, किसी अन्य विषय को नहीं। तेलंगाना के पूर्व मुख्य सचिव श्री एस.के. जोशी की पुस्तक "इको टी कॉलिंग: टुवर्ड्स पीपल सेंट्रिक गवर्नेंस", के तेलुगू संस्करण सुप्रीपालना" का लोकार्पण करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुर्भाग्य से कास्ट, कम्युनिटी, कैश, और क्रिमिनलिटी ने कैरेक्टर, कंडक्ट, कैलिबर और कैपेसिटी का स्थान ले लिया है जो सुशासन के लिए अपरिहार्य विषय है। उन्होंने याद दिलाया कि नागरिक केंद्रित शासन तभी आ सकता है जब शासन केंद्रित मतदान की परंपरा अस्तित्व में होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सुशासन की आवश्यकता थी। श्री नायडू ने कहा कि खुशहाली सुशासन से आती है। चयनित सरकार जनता का विश्वास धारण करती है। श्री नायडू ने जनता को उसकी आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर और जवाबदेह ढंग से सेवा दिए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने सरकार के सभी प्रयासों में तारतम्यता लाने का आह्वान किया ताकि सभी नागरिकों का जीवन बेहतर किया जा सके। श्री नायडू ने इस पुस्तक के लेखक डॉ. शैलेंद्र जोशी, अनुवादक श्री अन्नावारप्पू ब्रम्हैया और प्रकाशक श्री मारुती की इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए सराहना की।
दुनिया में नॉवेल कोरोनावायरस के खिलाफ पहला पशु टीका रूस में पंजीकृत किया गया है। इसकी घोषणा रूस के कृषि सुरक्षा प्रहरी Rosselkhoznadzor ने की। नॉवेल कोरोनवायरस के खिलाफ दुनिया के पहले पशु टीके का नाम Carnivac-Cov रखा गया है।
Rosselkhoznadzor के अनुसार, टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा 6 महीने तक चलेगी।हालांकि, खुराक के डेवलपर्स लगातार इसका विश्लेषण कर रहे हैं।
Rosselkhoznadzor के अनुसार, कोविड-19 वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन 2021 से शुरू होने की उम्मीद है।
रूसी वैज्ञानिकों के अनुसार, इस टीके के उपयोग से पशुओं में वायरस के उत्परिवर्तन को रोका जा सकता है।
Carnivac-Cov
जानवरों के लिए Carnivac-Cov वैक्सीन को Rosselkhoznadzor (पशु चिकित्सा और फाइटोसैनिटरी निगरानी के लिए संघीय सेवा) की एक इकाई द्वारा विकसित किया गया है।
Carnivac-Cov के नैदानिक परीक्षण अक्टूबर 2020 में शुरू हुए और परीक्षण में बिल्लियों, मिंक, कुत्तों, लोमड़ियों, आर्कटिक लोमड़ियों और अन्य जानवरों को शामिल किया गया।
यह टीका जानवरों में कोविड-19 को रोकने के लिए दुनिया का पहला और एकमात्र उत्पाद है।
परीक्षणों के परिणामों से पता चला है कि टीका हानिरहित और इम्युनोजेनिक है क्योंकि सभी टीकाकृत जानवरों ने 100% मामलों में कोरोनोवायरस के लिए एंटीबॉडी विकसित किया है।
रूस में कोविड-19 मामले
रूस में कोरोनावायरस के मामले 29 मार्च को 8,711 बढ़ गए। महामारी से निपटने के लिए रूस के पास पहले से ही 3 कोविड-19 टीके हैं। मनुष्यों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे लोकप्रिय टीका स्पुतनिक वी (Sputnik V) है। मॉस्को ने दो अन्य लोगों कोविवेक (CoviVac) और एपिवैककोरोना (EpiVacCorona) को भी आपातकालीन स्वीकृति प्रदान की है।
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले 36 घंटों में 5000 किलोमीटर की यात्रा करेंगे. पीएम मोदी इस दौरान कई रैलियों को संबोधित करेंगे. दिल्ली से असम, असम से पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु, तमिलनाडु से केरल होते हुए वापस दिल्ली लौटेंगे. बीजेपी मीडिया सेल के संयोजक अनिल बलूनी ने ट्वीट कर ये जानकारी साझा की है.
दिल्ली से असम, असम से पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु, तमिलनाडु से केरल - आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi करेंगें 36 घंटे में 5,000 किमी से अधिक का सफर और चार राज्यों में चुनाव प्रचार। यही है परिश्रम की पराकाष्ठा। नमन! @PMOIndia @JPNadda @AmitShah pic.twitter.com/liK4SLj0aC
— Anil Baluni (@anil_baluni) April 1, 2021
बलूनी ने ट्वीट कर लिखा कि दिल्ली से असम, असम से पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल से तमिलनाडु, तमिलनाडु से केरल- पीएम मोदी करेंगें 36 घंटे में 5000 किमी से अधिक का सफर और चार राज्यों में चुनाव प्रचार. यही है परिश्रम की पराकाष्ठा. नमन!
पीएम मोदी का कार्यक्रम
पीएम मोदी के 36 घंटों के कार्यक्रम की बात करें तो पीएम मोदी ने आज सुबह 8.30 बजे अपनी यात्रा दिल्ली से शुरू की. वे सीधे असम के गुवाहाटी पहुंचे. यहां से वे कोकराझार पहुंचे. कोकराझार में रैली को संबोधित करने के बाद वे पश्चिम बंगाल में दो रैलियों को संबोधित करने के लिए पहुंचे. पीएम मोदी बंगाल के जयनगर और उलुबेरिया में रैली को संबोधित करने के बाद तमिलनाडु के लिए उड़ान भरेंगे.
तमिलनाडु पहुंचकर पीएम मोदी मदुरै के मशहूर मीनाक्षी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे और फिर रात्रि विश्राम तमिलनाडु के मदुरै में ही करेंगे. पीएम मोदी इसके बाद अगले दिन तमिलनाडु, केरल में चार रैलियां करेंगे. इस दौरान पीएम दो बार तमिलनाडु और दो बार केरल के बीच उड़ान भरेंगे.
तमिलनाडु-केरल में रैली
पीएम मोदी पहले तमिलनाडु के मदुरै में रैली करेंगे. इसके बाद हेलिकॉप्टर से केरल के पतनमतिट्टा में रैली करने पहुंचेंगे. यहां से हेलिकॉप्टर में सवार होकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी पहुंचेंगे और रैली को संबोधित करेंगे. कन्याकुमारी के बाद पीएम फिर हेलिकॉप्टर से केरल के तिरुवनंतपुरम पहुंचेंगे और रैली को संबोधित करेंगे. यहां रैली करने के बाद पीएम दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे. पीएम देर रात को दिल्ली वापस लौटेंगे.
इन 36 घंटो में पीएम ताबड़तोड़ 7 रैलियां करेंगे. इन रैलियों के लिए पीएम 10 बार हेलिकॉप्टर और विमान में सवार होकर एक जगह से दूसरी जगह के लिए उड़ान भरेंगे. थकान भरे सफर और चुनावी रैलियों के बाद जब पीएम वापस दिल्ली लौटेंगे तो 36 घंटे में वे 5000 किलोमीटर का सफर तय कर चुके होगे. हालांकि पीएम मोदी दिल्ली आकर थमेंगे नहीं और अगले दिन पीएम मोदी फिर चुनावी यात्रा पर निकल जाएंगे. असम और पश्चिम बंगाल में फिर तीन रैलियों को पीएम संबोधित करेंगे.
बिजनौर। उत्तरप्रदेश के बिजनौर में चोरी के बाद बैग में ढेर सारी नकदी देखकर मारे खुशी के एक चोर को दिल का दौरा पड़ गया तो साथी ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। इसी वजह से दोनों पुलिस की पकड़ में भी आ गए। पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि कोतवाली देहात के चौराहे पर उरूज हैदर के जनसेवा केंद्र से 16-17 फरवरी की रात 7.04 लाख रुपए नकदी और अन्य सामानों की चोरी हुई थी।
पुलिस ने नौशाद और एजाज को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से 3.70 लाख रुपए नकदी, 2 तमंचे और 1 बाइक बरामद की है। पुलिस हिरासत में नौशाद ने बताया कि चोरी के बाद बैग मे इतनी नकदी देखकर एजाज को खुशी के मारे दिल का दौरा पड़ गया। उसे जिला मुख्यालय पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसके इलाज में सवा लाख रुपए लग गए। नौशाद भी 1.30 लाख रुपए जुए में हार गया। पुलिस इनके खर्चो से ही इन तक पहुंच पाई और चोरी के मामले को सुलझा लिया।
आयकर विभाग ने हैदराबाद शहर के उपनगरीय क्षेत्र यादगिरीगुट्टा और आसपास के क्षेत्रों में रियल स्टेट के व्यवसाय से जुड़े दो समूह पर छापे मारे हैं। यह दोनों समूह भूखंड की बिक्री और खरीद तथा अपार्टमेंट के निर्माण कार्य से जुड़े हैं। छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं जिनमें हाथ से लिखे बहीखाते, समझौते इत्यादि शामिल हैं जो बेहिसाबी नकद लेनदेन की तरफ इशारा करते हैं। इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है। इस दौरान विशिष्ट सॉफ्टवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजट्स पर मौजूद जानकारी को भी विभाग ने हासिल कर लिया है। यह समूह निर्धारित पंजीकृत मूल्य से ऊपर की राशि नकदी में लेते थे और ऐसे पैसों का उपयोग भूमि खरीद या इस तरह के अन्य आकस्मिक व्यवसायिक खर्चों पर किया जाता था। छापेमारी और तलाशी अभियान के दौरान 11.88 करोड़ रूपए की बेहिसाबी नकदी और 1.93 करोड रुपए मूल्य के स्वर्ण आभूषण जब्त किए गए हैं। छापेमारी की कार्रवाई के दौरान बीते 6 वर्षों में लगभग 700 करोड रुपए की बेहिसाबी नकदी के रूप में लेन देन के साक्ष्य मिले हैं, जो कि कर योग्य राशि है। आगे की जांच जारी है।
केंद्र सरकार ने स्क्रैप सर्टिफिकेट (scrappage certificate) जमा करने पर नए वाहनों की खरीद पर 25 प्रतिशत कर रियायत का प्रस्ताव दिया है। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने स्क्रैप किये गये वाहनों के लिए मोटर वाहन कर में रियायत के बारे में मसौदा नियम प्रकाशित किए हैं। इन मसौदा नियमों के तहत, लोगों को वाहन स्क्रैच सर्टिफिकेट के साथ व्यक्तिगत वाहनों की खरीद पर 25 प्रतिशत रियायत मिलेगी, जबकि वाणिज्यिक वाहनों की खरीद पर कर राहत 15 प्रतिशत होगी। व्यक्तिगत वाहनों के मामले में, कर रियायतें आठ साल तक उपलब्ध रहेंगी जबकि वाणिज्यिक वाहनों के लिए, यह 15 वर्ष तक होगी। सरकार ने 30 दिनों की अवधि में मसौदा नियमों पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इस वर्ष 1 अक्टूबर से यह नियम लागू होगा
नई वाहन स्क्रैपिंग नीति (Vehicle Scrapping Policy)
यह स्क्रैपिंग नीति वाहनों के उत्सर्जन को कम करके ऑटोमोबाइल क्षेत्र में परिवर्तन लाएगी। इस नीति को अयोग्य, पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को उपयोग से बाहर करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया था। इस नीति के तहत, निजी वाहनों को 20 साल बाद स्वचालित केंद्रों पर फिटनेस परीक्षण से गुजरना होगा। दूसरी ओर, वाणिज्यिक वाहनों को 15 साल बाद फिटनेस परीक्षण से गुजरना होगा। यदि वाहन तीन बार फिटनेस टेस्ट पास करने में विफल रहे, तो मालिक इसे सड़क पर नहीं चला पाएंगे।
नीति का महत्व
यह नीति पर्यावरण के अनुकूल, ईंधन कुशल वाहनों को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी। इस प्रकार, यह वाहनों के प्रदूषण और तेल आयात बिल को कम करेगा। यह सड़क सुरक्षा में भी सुधार करेगा। इसके तहत पुनर्नवीनीकरण सामग्री जैसे स्टील, प्लास्टिक और तांबे का पुन: उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार, समग्र वाहन लागत कम हो जाएगी। एक बार जब पुराने वाहनों को हटा दिया जाता है, तो नए वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा जो देश के ऑटोमोबाइल उद्योग को बढ़ावा देगा। यह वाहनों की ईंधन दक्षता को भी बढ़ाएगा और निवेश को आकर्षित करेगा।
31 मार्च, 2021 को भारत को तीन राफेल लड़ाकू विमान की तीसरी खेप मिली। ये राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना के गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन में शामिल किये जायेंगे। यह फ्रांस से राफेल की चौथी डिलीवरी है। भारत ने 36 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस सौदे की कुल लागत 59,000 करोड़ रुपये है। इन तीन राफेल लड़ाकू विमानों के साथ, IAF की सूची में राफेल की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। यह लड़ाकू विमान अंबाला में स्थित वायुसेना के एकमात्र राफेल स्क्वाड्रन की ताकत में वृद्धि करेंगे। राफेल जेट का पहला स्क्वाड्रन अंबाला एयरबेस से चालू होगा, दूसरा एयरएस पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में स्थित होगा, ताकि चीनी खतरे का मुकाबला किया जा सके। 5 राफेल जेट की पहली खेप 29 जुलाई, 2020 को अंबाला एयरबेस पर पहुंची थी। जबकि 3 राफेल सेनानियों की दूसरी खेप नवंबर 2020 में पहुंची। इन राफेल विमानों का निर्माण फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन द्वारा किया गया है।
प्रसिद्ध मराठी लेखक डॉ. शरणकुमार लिंबाले (Dr. Sharankumar Limbale) को उनकी पुस्तक ‘सनातन’ (Sanatan) के लिए सरस्वती सम्मान, 2020 से सम्मानित किया जायेगा। डॉ. लिंबाले की पुस्तक ‘सनातन’ को 2018 में प्रकाशित किया गया था। इस पुरस्कार में पंद्रह लाख रुपये, एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका प्रदान की है। के.के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा 1991 में स्थापित सरस्वती सम्मान को देश में सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
सरस्वती सम्मान पुरस्कार (Saraswati Samman)
सरस्वती सम्मान पुरस्कार की शुरुआत के.के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1991 में की गई थी। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष किसी भी आधिकारिक भारतीय भाषा में लिखे गए उत्कृष्ट साहित्यिक कार्य के लिए दिया जाता है। इसमें एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका के अलावा, 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
बिड़ला फाउंडेशन द्वारा गठित अन्य लोकप्रिय साहित्यिक पुरस्कार व्यास सम्मान (हिंदी के लिए) और बिहारी पुरस्कार (हिंदी और राजस्थान के राजस्थानी लेखकों के लिए) हैं। पिछले वर्ष यह पुरस्कार वासदेव मोहि को प्रदान किया गया था। 1991 में हरिवंश राय बच्चन इस पुरस्कार के पहले विजेता थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 तक देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी घरों में पाइप से पेयजल पहुंचाने के लिए 15 अगस्त 2019 को की गई घोषणा के बाद से अबतक जलजीवन मिशन के अंतर्गत चार करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पाइप (नल) से पेयजल आपूर्ति का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। इस समय कुल ग्रामीण घरों के 1/3 से अधिक (38प्रतिशत) अर्थात 07 करोड़ 24 लाख ग्रामीण घरों में नल का पानी उपलब्ध हो गया है। गोवा देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां शत प्रतिशत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने का पानी मिल रहा है। इसके बाद तेलंगाना एवं अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह आते हैं। इन राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के अनथक प्रयासों से जलजीवन मिशन को 56 जिलों के 86,000 से अधिक गावों में रह रहे प्रत्येक परिवार को पेयजल आपूर्ति करना सुनिश्चित हो सका है। अब सभी राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए अपने[अपने लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे है कि देश में हर व्यक्ति को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल मिल सके और ‘कोई भी छूटे नहीं।
आंध्र प्रदेश के वेलीरपद मंडल में दूरस्थ गांव काकीसनूर में घने वनों के बीच 200 से अधिक लोग रहते हैं। यह पहाड़ी क्षेत्र है और सड़क से दूर होने के साथ-साथ यहाँ बिजली भी नहीं है। किन्तु, इस गांव को हाल में ही राज्य /केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता से भारत सरकार के जलजीवन मिशन के अंतर्गत सप्ताह में सातों दिन 24 घंटे पीने का पानी मिल रहा है। ये सभी प्रयास सभी ग्रामीण घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के भारत सरकार के उस संकल्प के अनुरूप हैं जिसमें लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उनका जीवन सुगम बनाने पर जोर दिया गया है। काकीसनूर गांव में स्वच्छ पेयजल मिलने का प्रभाव ग्रामीण समाज के निरंतर बेहतर होते स्वास्थ्य में परिलक्षित होता है। इस गांव में हर घर तक पेयजल के चालू नल का संयोजन पहुंचाना निसंदेह एक दुष्कर कार्य था। गोदावरी नदी के किनारे 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद आने वाले इस दूरस्थ गांव में हर घर जल योजना लागी करने में जिला प्रशासन के सामने बहुत कठिनाइयाँ आईं । इसके लिए नाव से हाथ से चलने वाली ड्रिलिंग मशीनों को ले जाया गया। स्थानीय जलधाराओं के निकट बोरवेल बनाए गए और सौर उर्जा से चलने वाले दोहरे पम्प लगाए गए। इतना सब करने के बाद ही पूरे गांव को पेयजल आपूर्ति सम्भव हो पाई।
केरल में त्रिशूर जिले के ओरुमनाईयूर गांव की सात वर्षीय वैष्णवी को उस समय अकेले पीने का पानी लाने का काम करना पड़ा जब उसके माता-पिता और दादी कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आ गए और उन्हें संगरोध में (क्वारंटाइन) होना पड़ा। तीनों बच्चों में सबसे बड़ी होने के कारण उसे अचानक से ही बड़े होने की भूमिका में आना पड़ा। हालांकि उसे और उसके भाई बहनों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता था क्योंकि उन्हें भी स्थानीय गांव वालों ने संभावित संक्रमण का वाहक मान लिया था। किन्तु उनके अचरज का तब ठिकाना न रहा जब अगले दिन ही उनके घर में पाइप डलने के साथ ही पीने के पानी के लिए नल भी लग गया। समय पर नल से पानी मिल जाने के कारण इस परिवार को उसके कठिन समय में कठिनाइयों से उबरने में बड़ी सहायता मिली।
ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी कई गाथाएं मिली हैं जिनसे यह पता चलता है कि कैसे जल जीवन मिशन –हर घर जल लोगों के जीवन में बदलाव ले आया है। जल जीवन मिशन को राज्यों के सहयोग से लागू किया जा रहा है और इसका उद्देश्य नियमित एवं दीर्घ-कालिक आधार पर निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता का पेयजल पर्याप्त मात्र में उपलब्ध करवाना है। ‘नीचे से शुरुआत’ की अवधारणा को अपनाते हुए राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश इसके लिए व्यापक योजनाएं बना रहे है। तदनुसार ही उन्होंने प्रत्येक ग्रामीण आवास में पाइप के साथ ही नल लगा कर पेयजल आपूर्ति के लिए कार्य योजनाएं बनाई हैं। इन्हें लागू करते समय राज्य जल की गुणवत्ता से प्रभावित क्षेत्रों, सूखा सम्भावित एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति बहुल गाँवों, आकान्क्षीय जिलों और सांसद आदर्श ग्राम योजना वाले गाँवों को वरीयता दे रहे हैं।
चूंकि दूषित जल से सबसे अधिक बच्चों के रोगग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है,इसलिए देशभर के विद्यालयों और आश्रमशालाओं एवं आँगनवाड़ियों में नल से पानी पहुंचाने का अभियान शुरू किया गया है ताकि जब भी विद्यालय दुबारा खुलें, बच्चों को पीने के लिए सुरक्षित स्वच्छ पेयजल मिल सके। नल के इस पानी का प्रयोग मध्याह्न भोजन तैयार करने, हाथ धोने की सुविधा और शौचालय में किया जा सकेगा।
पानी की गुणवत्ता से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति करना जलजीवन मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। दूषित पानी विशेषकर आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी की उपलब्धता वाले गाँवों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जलजीवन मिशन पीने का पानी वास्तव में पीने योग्य हो, को सबसे अधिक प्राथमिकता देता है। ऐसा होने से पानी से होने वाली बीमारियों में कमी आएगी और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। राज्य/ केन्द्रशासित प्रदेश अब पानी की गुणवत्ता की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं को अद्यतन और उच्चीकृत करने के साथ ही आम लोगों के लिए खोल रहे हैं ताकि लोग नाममात्र का शुल्क देकर अपने यहाँ के पानी के नमूनों की जांच करवा सकें।
प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद अब जलजीवन मिशन का प्रयास यह है कि हर व्यक्ति पानी से जुड़े अर्थात यह एज जन आन्दोलन बन जाए । प्रधानमंत्रीजी ने 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर ‘कैच द रेन’ अभियान शुरू करने के साथ ही लोगों से आह्वान किया था कि वे वर्षा के पानी की हर बूँद को सहेजें । अतः इसी को आगे बढाते हुए इस काम में सभी हितधारकों को शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बंगाल की खाड़ी से चलीनिचलीसतह की तेज दक्षिण- पश्चिमी हवाओं के प्रभाव के कारण 29 मार्च से लेकर 2 अप्रैल, 2021 के बीच, खासकर 30 और 31 मार्च, 2021 के दौरान अधिकतम सक्रियता के साथ पूर्वोत्तर भारत में अलग-अलग स्थानों पर गरज / बिजली चमकने के साथ काफी व्यापक रूप से लेकर व्यापक रूप से वर्षा होने की संभावना है।
दक्षिण असम, मेघालय, त्रिपुराऔर मिजोरम में 29 मार्च एवं 1 अप्रैल को कहीं – कहीं भारी वर्षा और 30 एवं 31 मार्च को कहीं – कहीं भारी से लेकर बहुत भारी वर्षा होने कीकाफी संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 1 अप्रैल कोकहीं – कहीं भारी वर्षाहोने की संभावना है।
इसकी वजह से 30 मार्च से लेकर 01 अप्रैल, 2021 के दौरान दक्षिण असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरमके कुछ स्थानों पर निचले इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतराहो सकता है।
विस्तृत पूर्वानुमान और चेतावनियां अगले पृष्ठ में दी गई हैं:
सब - डिवीज़न
29-Mar-21
30-Mar-21
31-Mar-21
01-April-21
02- April-21
असम एवं मेघालय
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी, गरज और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा।दक्षिणअसम, एवं मेघालय में कहीं – कहीं भारी वर्षा
अधिकतर स्थानों पर आंधी, गरज और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा। दक्षिण असम, एवं मेघालय में कहीं – कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा
अधिकतर स्थानों पर आंधी, गरज और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा। दक्षिण असम, एवं मेघालय में कहीं – कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी, गरज और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा। दक्षिण असम, एवं मेघालय में कहीं – कहीं भारी वर्षा
कई स्थानों पर वर्षा
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी, गरज और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा। मिजोरम एवं त्रिपुरामें कहीं – कहीं भारी वर्षा
अधिकतर स्थानों पर आंधी, गरज और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा।मिजोरम एवं त्रिपुरामेंकहीं – कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा
अधिकतर स्थानों पर आंधी, गरज और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा। मिजोरम एवं त्रिपुरा में कहीं – कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी, गरज और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे) के साथ वर्षा।मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरामें कहीं – कहीं भारी वर्षा
कई स्थानों पर वर्षा
अरुणाचल प्रदेश
कुछ स्थानों पर छिटपुट आंधी औरगरज के साथ वर्षा
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी और गरज के साथ वर्षा
कई स्थानों पर छिटपुट आंधी और गरज के साथ वर्षा
कई स्थानों पर छिटपुट रूप से भारी वर्षा
कई स्थानों पर वर्षा
असम एवं मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा में 29 मार्च से लेकर 1 अप्रैल, 2021 के दौरान आंधी, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे तक की गति) के कारण होने वाले अपेक्षित प्रभाव और सुझाये गये कदम।
अपेक्षित प्रभाव:
तेज हवाओं से वृक्षारोपण, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
तेज हवाएं खुली जगहों पर लोगों और मवेशियों को घायल कर सकती हैं।
सुझाये गये कदम:
घरों के अंदर रहें, खिड़कियों एवं दरवाजों को बंद रखें और यदि संभव हो, तो यात्रा से बचें।
सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें।
कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों पर न लटकें।
इलेक्ट्रिकल / इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें।
जल निकायों से तुरंत बाहर निकलें।
बिजली संचालित करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें।
बारिश के दौरान खेती के कार्यों को स्थगित किया जा सकता है।
दक्षिण असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा में 29 मार्च से लेकर 1 अप्रैल, 2021 के दौरान भारी वर्षा के कारण होने वाले अपेक्षित प्रभाव और सुझाये गये कदम।
अपेक्षित प्रभाव
सड़कों पर स्थानीय स्तर पर बाढ़, निचले इलाकों में जल -जमाव और उपरोक्त इलाकों के मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अंडरपासों का बंद होना।
भारी वर्षा / बर्फबारी के कारणकभी-कभी दृश्यता में कमी।
बर्फबारी।
सड़कों पर जल -जमाव से होने वाले यातायात में व्यवधानके कारण यात्रा के समय में वृद्धि।
कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान।
कमजोर संरचना को नुकसान की संभावनाएं।
स्थानीय स्तर पर भूस्खलन / कीचड़ धंसना।
सुझाये गये कदम:
अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अपने मार्ग पर यातायात संबंधी अवरोध के बारे में पता कर लें।
इस संबंध में जारी किए गए यातायात संबंधी सलाह का पालन करें।
अक्सर जल – जमाव की समस्या से ग्रस्त रहने वालेइलाकों में जाने से बचें।
कमजोर संरचना के नीचे रहने से बचें।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यहां के सभी सरकारी कार्यालयों में तिरंगा झंडा फहराने के आदेश दिए हैं। सरकारी दफ्तरों में अगले 15 दिनों में यह झंडे फहरा देने को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इस बाबत संभागीय आयुक्त कार्यालय जम्मू ने सभी उपायुक्तों और विभागाध्यक्षों को अगले 15 दिनों के भीतर सभी सरकारी कार्यालयों में झंड़ा फहराने को कहा है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आयुक्तों, जिला अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक के साथ बैठक की थी। बैठक में राज्य के 20 जिलों के सरकारी इमारतों और कार्यालयों पर झंडा फहराने का निर्देस जारी किया है साथ ही इसका सख्ती से पालन हो यह भी सुनिश्चित करने को कहा है।
नई दिल्ली् । पूरे देश में आज होली का त्योाहार कोविड-19 के डर के बीच मनाई जा रही है। कई राज्यों में घरों के भीतर ही होली खेलने की ताकीद की गई है। बाहर निकलकर होली भले न खेल सकें, पुरानी होलियों की यादें तो ताजा कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर लोग पुरानी होलियों की तस्वीकरें शेयर कर रहे हैं। इनमें एक तस्वीहर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी की भी है।
इस तस्वीऔर में वाजपेयी के साथ मोदी ढोल की थाप पर थिरकते नजर आ रहे हैं। साथ में कुछ और लोग भी दिख रहे हैं। वाजपेयी के घर पर हर साल होली के मौके पर बड़ा मजमा लगता था। पक्ष-विपक्ष के नेताओं की भीड़ जुटती थी और जमकर होली खेली जाती थी। वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तो वह अपने निवास पर होली मिलन का कार्यक्रम जरूर रखते थे। तब प्रधानमंत्री निवास को 7, रेसकोर्स रोड के नाम से जाना जाता था।








