रायपुर | छत्तीसगढ़ प्रदेश में आज कुल 229 नए कोरोना मरीजों की पहचान की गई है | जिसमे जिला रायपुर से सर्वाधिक 82 मरीज, दुर्ग से 50, राजनांदगांव से 3, बालोद से 2, बेमेतरा से 7, कबीरधाम से 1, धमतरी से 3, बलौदा बाजार से 6, महासमुंद से 4, गरियाबंद से 5, बिलासपुर से 12, रायगढ़ से 10, कोरबा से 5, जांजगीर-चांपा से 4, मुंगेली से 2, जीपीएम से 0, सरगुजा से 11, कोरिया से 6, सूरजपुर से 2, बलरामपुर से 1, जशपुर से 6, बस्तर से 6, कोंडागांव से 0, दंतेवाड़ा से 0, सुकमा से 0, कांकेर से 1, नारायणपुर से 0, बीजापुर से 0, अन्य राज्य से 0 मरीज शामिल है । आज प्रदेश में कुल 267 कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ्य होने के उपरांत अपने घर लौटे है | राज्य में आज कुल 6 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है | प्रदेश में अब कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 3287 है |
आज 229 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की पहचान हुई व 267 मरीज़ स्वस्थ होने के उपरांत डिस्चार्ज/रिकवर्ड हुए। राज्य में एक्टिव मरीज़ों की संख्या 3,287 है।@TS_SinghDeo @ChhattisgarhCMO pic.twitter.com/V6gjWjaOCk
— Health Department CG (@HealthCgGov) February 12, 2021
नईदिल्ली। सरकार श्रवण दोष के शिकार बच्चों के हित में देशभर में भारतीय सांकेतिक भाषा के मानकीकरण पर काम करेगीऔर उन बच्चों के उपयोग के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर पाठ्यक्रम सामग्री विकसित करेगी। इस आशय की घोषणा बजट 2021-22 के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के एक हिस्से के रूप में शिक्षा सेजुड़ी पहल के तौर पर की गई है।
इस घोषणा के अनुरूप, शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभागइस वर्ष अप्रैल से निम्नलिखित कार्य करेगा:
- यूडीएल दिशा-निर्देशों के अनुसार पुस्तकों को ई-पुस्तकों के रूप में परिवर्तित किया जायेगा।
- सांकेतिक भाषा के वीडियो बनाये जायेंगे।
- सांकेतिक भाषा के लिए एक शब्दकोश/शब्दावली विकसित की जायेगी।
इन संसाधनों को दीक्षा और पीएम ई–विद्या के माध्यम से प्रसारित करने का प्रयास किया जाएगा। सीआईईटी, एनसीईआरटी और आईएसएलआरटीसी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं और वे भारतीय सांकेतिक भाषा में एनसीईआरटीकीपाठ्यपुस्तकोंपर आधारित वीडियो बनाने के लिए आईएसएलआरटीसी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) के मानकीकरण का यह कार्य समाज को समावेशी बनाने औरपूरे भारत में सांकेतिक भाषा की विभिन्न बोलियों के बीच आपसी सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में सहयोग और योगदान करने का एक अवसर प्रदान करता है। यह कार्य श्रवण दोष के शिकार बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा देगा, जिससे उन्हें अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का बराबरी का अवसर मिलेगा। सभी बच्चे आसानी से एक दूसरे के साथ संवाद कर सकेंगे और एक दूसरे को बेहतर ढंग से जान पायेंगे। यह कदम स्कूल में पढ़ाई के वर्षों के दौरान विकास की महत्वपूर्ण अवधि में समावेशन को बढ़ावा देने में मददगारसाबित होगा।
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पैंगोंग लेक के उत्तर और दक्षिणी तट से भारत और चीन के सैनिकों की वापसी के बीच इसको लेकर सियासत भी खूब हो रही है. डिसइंगेजमेंट को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से उठाए गए सवालों के बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को बयान जारी किया गया. इसके बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए निशाना साधा. इस बीच, राहुल ने एक बार फिर से डिसइंगेजमेंट को लेकर सरकार से तीन सवाल पूछते हुए जवाब मांगा है.
राहुल गांधी गांधी के तीन सवाल-
1-क्यों हमारी सेना के जवानों को कैलाश रेंज में मजबूती वाले पॉजिशन से वापस बुलाया जा रहा है?
2- क्यों हम अपनी जमीन सौंप रहे हैं और फिंगर 4 से सेना की वापसी कर फिंगर 3 पर ला रहे हैं?
3-क्यों चीन डेपसांग प्लेन्स और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स से सैनिकों को वापस नहीं बुलाया है?
GOI must explain-
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 12, 2021
1. Why our forces are withdrawing from dominant positions in Kailash Ranges?
2. Why we are ceding our territory & withdrawing from forward base at Finger 4 to Finger 3?
3. Why has China not withdrawn from our territory in Depsang Plains & Gogra Hot Springs?
जेपी नड्डा का राहुल पर हमला
गौरतलब है कि इससे पहले, एलएसी पर डिसइंगेजमेंट के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को बड़ा पलटवार किया है. नड्डा ने कहा कि वर्तमान डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया में सरकार की तरफ से भारतीय जमीन नहीं दी गई है.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट करते हुए कहा- “अगर किसी ने हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन छोड़ने जमीन का पाप किया तो यह एक भ्रष्ट, कायर वंश है जिसने देश को अपनी शक्ति को बनाए रखने के लिए तोड़ दिया है.”
No Indian land has been given up by the government as part of the current disengagement process. If anyone committed the sin of giving up thousands of sq km, it is one corrupt, cowardly dynasty that has broken the country to keep their power intact. pic.twitter.com/b8D2uRds2v
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) February 12, 2021
सुकमा । सीआरपीएफ डीजी एपी माहेश्वरी सुकमा दौरे में मिनपा कैंप पहुंचे। कैंप का अवलोकन करने के बाद उन्होंने इसे प्रदेश का सबसे शानदार कैंप बताया। इस दौरान उनके साथ स्पेशल डीजी अशोक जुनेजा भी मौजूद थे। इस दौरान डीजी माहेश्वरी ने सुकमा एसपी कन्हैया लाल ध्रुव को डीजी डिस्क अवॉर्ड देने की घोषणा की। इसके आलावा सीआरपीएफ डीआईजी योज्ञान सिंह को गोल्डन डिस्क अवॉर्ड देने का ऐलान किया है। इसके अलावा जिला पुलिस के जवानों को 5 लाख रूपये रिवॉर्ड देने की भी घोषणा की गई है। सीआरपीएफ जवानों को अब 10 लाख रूपये रिवॉर्ड के तौर पर दिया जाएगा। डीजी ने आरंग स्थित सीआरपीएफ के ग्रुप केंद्र में नए प्रशासनिक भवन का भी लोकार्पण किया। 22 बाइक एम्बुलेंस को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये बाइकें सुरक्षाबल के जवानों के लिए बनाई गई हैं। बाइक नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए रवाना की जाएंगी।
“विज्ञान में लड़कियाँ और महिलाएँ के अंतर्राष्ट्रीय दिवस” के अवसर पर 11 फरवरी 2021 को शुरु हुए विज्ञान ज्योति कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत विज्ञान में लड़कियों की रुचि बढ़ाने तथा एसटीईएम अर्थात विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों के माध्यम से उन्हें अपना करियर बनाने में मदद करने के लिए देश के 50 और जिलों को इस कार्यक्रम के दायरे में लाया गया है।
इस अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यक्रम में पिछले एक वर्ष में प्राप्त अनुभवों से और सुधार लाया जा सकेगा और साथ ही यह देश के अधिक से अधिक जिलों में महिलाओं को सशक्त बनाने और शीर्ष विज्ञान संस्थानों में उनकी संख्या बढ़ाने में मदद करेगा।
“प्रोफेसर शर्मा ने कहा “विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व एक बहुआयामी समस्या है। हमें सभी पहलुओं से इस समस्या को देखना है और वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए जरुरी उपायों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति इसके रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकती है और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में मदद करने के लिए जनसांख्यिकी लाभांश का उपयोग कर सकती है।”
उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए लड़कियों को समाज में आदर्श स्थापित करने वाले सभी तरह के लोगों विशेषकर अपने जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी महिलाओं के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लड़कियों को विज्ञान में रुचि लेने और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी)की एक नई पहल है जिसके तहत एसटीईएम में अपना करियर बनाने के लिए मेधावी लड़कियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए शुरु किया गया है। यह दिसंबर 2019 से 50 जवाहर नवोदय विद्यालयों में सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है और अब इसे वर्ष 2021-22 के लिए 50 और ऐसे विद्यालयों में शुरु कर दिया गया है।
यह कार्यक्रम एसटीईएम के कुछ क्षेत्रों में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व की समस्या का समाधान करता है। शुरुआती कदम के तौर पर यह कार्यक्रम नौवीं से 12 वीं कक्षा की मेधावी लड़कियों के लिए स्कूल स्तर पर शुरू किया गया है ताकि उन्हें सशक्त बनाकर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में एसटीईएम पाठ्यक्रम में शामिल विषयो की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
विज्ञान ज्योति कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों में छात्र-अभिभावक परामर्श, प्रयोगशालाओं और ज्ञान केंद्रों का दौरा, पार्टनर रोल मॉडल इंटरैक्शन, विज्ञान शिविर, शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, संसाधन सामग्री वितरण और टिंकरिंग गतिविधियाँ शामिल हैं। छात्रों को ऑनलाइन शैक्षणिक सहायता से संबंधित गतिविधियों में वीडियो कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, दैनिक अभ्यास की समस्याएं और किसी भी तरह की शंकाओं का समाधान करने के लिए सुव्यवस्थित तरीके से सत्र आयोजित करना शामिल है।
डीएसटी के सलाहकार और किरण तथा विज्ञान ज्योति कार्यक्रमों के प्रमुख डॉ. संजय मिश्रा ने कहा कि निकट भविष्य में इस कार्यक्रम के साथ अधिक से अधिक जिलों को जोड़ने की योजना है और आगे लड़कियों को एसटीईएम में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मामले में इस कार्यक्रम का प्रभाव 100 जिलों में दिखाई देगा।
नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के आयुक्त विनायक गर्ग ने कहा कि लड़कियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना बहुत महत्वपूर्ण है और यह कार्यक्रम विज्ञान में रुचि लेने वाली लड़कियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
डीएसटी विभिन्न महिला-केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पुरुषों के समान ही महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहा है। डीएसटी विज्ञान ज्योति के अलावा, अन्य महिला-उन्मुख कार्यक्रम जैसे कि करियर में ब्रेक लेने वाली महिलाओं को दोबारा अवसर देने के लिए “महिला वैज्ञानिक योजना”,एसटीईएम में करियर बनाने की इच्छुक महिलाओं के लिए अमरीका में प्रमुख संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय सहयोगपूर्ण अनुसंधान करने के अवसर प्रदान करने के लिए “क्यूरी कार्यक्रम” तथा वैज्ञानिक संस्थानों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए “जीएटीआई कार्यक्रम” आदि शामिल हैं। इसके अलावा डीएसटी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए-आई) और नवाचार को बढ़ावा देने तथा भविष्य में एआई-आधारित नौकरियों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने के लक्ष्य के साथ महिला विश्वविद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशालाएं भी स्थापित की हैं।
नईदिल्ली। केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास(स्वतंत्र प्रभार),कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के राज्य मंत्रीडॉ.जितेन्द्र सिंह ने कहा कि फैमिली पेंशन में सुधार किया गया है और उसके भुगतान कीसीमा 45,000 रुपये से बढ़ाकर 1,25,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस कदम से स्वर्गवासी हो चुके कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों का जीवन आसान हो जाएगा और उन्हें पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। डॉ. सिंह ने कहा कि पेंशन एवं पेंशनर कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने उस राशि के मामले में स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें अपने माता या पिता की मृत्यु हो जाने पर कोई बच्चा फैमिली पेंशन की दो किस्तें निकालने का हकदार होता है। डॉ. सिंह ने कहा कि अब ऐसी दो किस्तों की कुल राशि 1,25,000 से ज्यादा नहीं हो सकती। यह पिछली सीमा से ढ़ाई गुना अधिक की वृद्धि है।
केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमन 1972 के नियम 54 के उपनियम 11 के अनुरूप, यदि पति और पत्नी दोनों ही सरकारी सेवा में हैं और इस नियम के तहत आते हैं, तो उनकी मौत की स्थिति में उनका जीवित बच्चा अपने माता-पिता की दो फैमिली पेंशन पाने के योग्य होगा। इससे पहले के निर्देशों में तय किया गया था कि ऐसे मामलों में दो फैमिली पेंशन की कुल राशि 45,000 रुपये प्रतिमाह और 27,000 रुपये प्रतिमाह, यानी क्रमश: 50 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की दर से अधिक नहीं होगी। यह दर छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 90,000 रुपये केअधिकतम वेतन के संदर्भ में तय की गई थी।
अब जबकि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार अधिकतम वेतन बढ़कर 2,50,000रुपये प्रतिमाह हो गया है, तोकेन्द्रीय सिविल सेवा पेंशन के नियम 54 (11) के अनुसार यह राशि 2,50,000 रुपये का 50 प्रतिशत यानी 1,25,000 रुपये और 2,50,000 रुपये का 30 प्रतिशत यानी 75,000 रुपये तय की गई है।
यह स्पष्टीकरणविभिन्न मंत्रालयों/विभागों से प्राप्त संदर्भों के मामले में जारी किया गया है। मौजूदा नियमों के अनुसार यदि किसी बच्चे के माता-पिता सरकारी सेवा में हैं और उनमें से एक की सेवाकाल में मृत्यु हो जाती है या वह सेवानिवृत्त हो जाते हैं तो स्वर्गवासी होने वाले व्यक्ति की फैमिली पेंशन उसके जीवित साथी को दी जाएगी और यदि उस साथी की भी मौत हो जाती है, तो जीवित बच्चे को, अपनी योग्यता साबित करने के बाद, अपने स्वर्गवासी माता-पिता दोनों की फैमिली पेंशन अदा की जाएगी।
नईदिल्ली। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण(आईआरडीएआई) ने 09 फरवरी, 2021 को जारी एक परिपत्र में सभी बीमा कंपनियों को अपनी डिजिटल बीमा पॉलिसियां डिजीलॉकर के जरिए जारी करने की सलाह दी है। परिपत्र में कहा गया है, ‘‘बीमा क्षेत्र में डिजीलॉकर व्यवस्था को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए अथॉरिटी सभी बीमा कंपनियों को अपनी सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था को लागू करने और डिजीलॉकर सुविधा इस्तेमाल करने की सलाह देती है, ताकि बीमा पॉलिसी धारक अपने सभी पॉलिसी दस्तावेजों को संरक्षित रखने के लिए डिजीलॉकर का इस्तेमाल कर सकें।’’
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि बीमा कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को डिजीलॉकर सुविधा के बारे में सूचित करें और उन्हें इसके उपयोग के बारे में जानकारी दें। बीमा कंपनियों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे ऐसी प्रक्रिया अपनाएं, जिससे उनके उपभोक्ता अपनी पॉलिसियों को डिजीलॉकर में रख सकें। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस विभाग (एनईजीडी) इस संदर्भ में आवश्यक तकनीकी मार्ग-निर्देशन और लॉजिटिक्स सहायता उपलब्ध कराएगा।
डिजीलॉकर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत एक पहल है, जिसमें नागरिकों को बीमा कंपनियों की ओर से जारी प्रमाण-पत्रों के मूल दस्तावेज और प्रमाण-पत्र डिजिटल फॉरमेट में प्राप्त हो सकेंगे। इसका लक्ष्य कागजी दस्तावेजों के इस्तेमाल को कम करना या समाप्त करना है और इससे सेवा प्रदान करने की कुशलता बढ़ेगी, नागरिकों को इसका इस्तेमाल करने में आसानी होगी और उनकी परेशानी कम होगी।
बीमा क्षेत्र में डिजीलॉकर,लागत को कम करने, उपभोक्ताओं कीपॉलिसी दस्तावेज की प्रति नहीं मिलने की शिकायतों को दूर करने, बीमा सेवा की प्रक्रिया में सुधार करने, दावों का तेजी से निष्पादन करने, विवादों और धोखाधड़ी के मामलों को कम करने और उपभोक्ताओं से अधिक बेहतर सम्पर्क कायम करने में मदद करेगा। कुल मिलाकर उम्मीद की जाती है कि इससे उपभोक्ताओं का अनुभव काफी बेहतर होगा।
आईआरडीएआई का यह फैसला उस पत्र की पृष्ठभूमि में आया है जो इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे ने वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर को लिखा था। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि डिजिटल बीमा पॉलिसियों को नागरिकों के डिजीलॉकर खातों में जारी किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। अपने पत्र में श्री धोत्रे ने श्री ठाकुर से अनुरोध किया था कि आईआरडीएआई को सलाह दी जाए कि वह सभी बीमा कंपनियों को इस बारे में परामर्श जारी करे कि वे सभी बीमा पॉलिसी धारकों की डिजिटल पॉलिसियों को डिजीलॉकर खातों में उपलब्ध कराएं और डिजीलॉकर द्वारा जारी दस्तावेजों को वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाए। इससे उन्हें अपनी सभी बीमा पॉलिसियों तक सुरक्षित और वैध तरीके से पहुंच बनाने और उनका प्रबंधन करने का एक वैकल्पिक माध्यम मिलेगा। यह बीमा पॉलिसी धारकों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होगा।
किसी भी नागरिक और उसके परिवार के लिए बीमा प्रमाण-पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस दस्तावेज तक समय पर पहुंच बना पाना उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अत: डिजीलॉकर के माध्यम से डिजिटल बीमा प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने से नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया बहुत आसान हो जाएगी।
नईदिल्ली। देश में कोविड के सक्रिय मामलों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है और आज इनकी संख्या 1.35 लाख (1,35,926) पर पहुंच गई है। देश में कुल पुष्टि वाले मामलों की संख्या कुल मामलों की 1.25 प्रतिशत है। पिछले कुछ हफ्तों से दिन-प्रतिदिन सक्रिय मामलों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों में भारत में नये मामलों के प्रसार पर सकारात्मक रुख नजर आता है। देश में मात्र एक राज्य में 1000 से ज्यादा मामले दर्ज होने के अलावा शेष सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में 1000 से कम नये मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले 24 घंटों में 4 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया है। इनमें दादरा और नागर हवेली, दमन और दीव, लद्दाख, त्रिपुरा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।
कुल स्वस्थ हुए रोगियों की संख्या 1,05,89,230 है। सक्रिय मामलों और स्वस्थ हुए मामलों के बीच का अंतराल निरंतर बढ़ रहा है और यह 1,04,53,304 पर है। 12 फरवरी, 2021 को सुबह 8 बजे तक, देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 75 लाख (75,05,010) से ज्यादा लाभार्थियों का टीकाकरण किया गया है। 75,05,010 की कुल संचयी टिकाकरण कवरेज में 58,14,976 स्वास्थ्य देखभाल कर्मी और 16,90,034 अग्रिम पंक्ति कर्मी शामिल हैं। अब तक 1,54,370 सत्रों का आयोजन किया जा चुका है। भारत सबसे तेजी से 70 लाख (7 मिलियन) टीकाकरण आंकड़ा पार करने वाला देश है। टीकाकरण अभियान के 27वें दिन (11 फरवरी, 2021) 11,314 सत्रों के माध्यम से 4,87,896 लाभार्थियों (एचसीडब्ल्यू-1,09,748 और एफएलडब्ल्यू-3,78,148) का टीकाकरण किया गया। प्रतिदिन टीकाकृत किये जा रहे लाभार्थियों की संख्या में भी सकारात्मक रूप से वृद्धि दर्ज की गई है।कुल लाभार्थियों में से 69 प्रतिशत का टीकाकरण 10 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में किया गया है। उत्तर प्रदेश में ही कुल लाभार्थियों में से 10.2 प्रतिशत (7,63,421) लोगों का टीकाकरण किया गया है। 6 राज्यों में नये स्वस्थ हुए रोगियों के 86.89 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र में सर्वाधिक नये स्वस्थ मामले (6,107) दर्ज किए गए हैं, इसके बाद केरल में (5,692) और छत्तीसगढ़ में (848) रोगी स्वस्थ हुए हैं। 6 राज्यों से नये मामलों का 79.87 प्रतिशत रहा है। केरल ने 5,281 नये मामलों के साथ सर्वाधिक दैनिक मामले दर्ज किए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु में क्रमश: 652 और 481 नये मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले 24 घंटों में 87 मृत्यु दर्ज की गई हैं। इनमें 6 राज्यों का आंकड़ा 75.86 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 25 नये मृत्यु के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद केरल में 16 नये मृत्यु के मामले दर्ज किए गए हैं।
नई दिल्ली। ट्विटर के खिलाफ भारत सरकार की सख्ती का अब असर दिख रहा है। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने केंद्र सरकार की ओर से लगातार दबाव के बाद 97 फीसदी अकाउंट्स ब्लॉक कर दिए हैं। 'भड़काऊ कंटेंट' से संबंधित पोस्ट करने वाले कई अकाउंट्स को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने ब्लॉक करने की मांग की थी। ये वो अकाउंट्स हैं, जो 'किसान जनसंहार' जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे थे। केंद्र सरकार ने दो बार अपील के जरिए 1,435 खातों को चिन्हित किया था, जिसमें से कंपनी ने 1,398 खातों को ब्लॉक कर दिया है। बुधवार देर शाम को सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी और ट्विटर पब्लिक पॉलिसी उपाध्यक्ष मोनिक मेचे और जिम बेकर के बीच बैठक हुई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हादसे पर दुख जताया। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने कहा कि फैक्ट्री के अंदर फंसे हुए लोगों के जल्द सुरक्षित बाहर निकलने की कामना करता हूं। उन्होंने राज्य सरकार से पीडि़तों को तत्काल राहत पहुंचाने की अपील भी की।
ज्ञात हो कि इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में मदुरै में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें तीन महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में पता चला था कि केमिकल मिक्स करते समय घर्षण के चलते आग लग गई थी, जिससे सिलसिलेवार धमाके हुए।
#GhaziabadPolice- थाना कौशाम्बी पुलिस द्वारा अज्ञात शव की शिनाख्त करते हुए ब्लाइन्ड हत्याकाण्ड का किया खुलासा, हत्यारा अभियुक्त गिरफ्तार @Uppolice pic.twitter.com/meQIEWvA6Y
— GHAZIABAD POLICE (@ghaziabadpolice) February 11, 2021







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