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मौसम विभाग ने दी चेतावनी: प्रचंड गर्मी से जनजीवन हुआ बुरी तरह से प्रभावित, नवतपा का आज दूसरा दिन

मौसम विभाग ने दी चेतावनी: प्रचंड गर्मी से जनजीवन हुआ बुरी तरह से प्रभावित, नवतपा का आज दूसरा दिन

रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी से जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। नवतपा के कल पहले ही दिन चिलचिलापी धूप और प्रचंड गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया। वहीं मौसम विभाग ने प्रदेश के कई इलाकों में लू चलने की चेतावनी भी जारी की है। 

छत्तीसगढ़ में नवतपा का पहला दिन प्रचंड गर्मी के साथ खूब तपा। उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही गर्म-शुष्क हवा के असर से न केवल राजधानी रायपुर बल्कि प्रदेश के अधिकांश इलाकों में तापमान तेजी से ऊपर चढ़ गया है। राज्य के लगभग सभी प्रमुख शहरों में कल अधिकतम तापमान का आंकड़ा 44 से लेकर 45.6 डिग्री के मध्य दर्ज किया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। हालांकि गत सप्ताह आए समुद्री तूफान के चलते तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन तूफान के गुजरने के बाद से ही तापमान में तेजी से इजाफा दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के जिलों में आगामी दो दिनों तक भीषण गर्मी के साथ लू चलने की चेतावनी जारी कर दी हे। इधर राजधानी रायपुर में ही कल अधिकतम तापमान का आंकड़ा 45.4 डिग्री रिकार्ड किया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि गर्मी अब अपने पीक लेवल पर आ गया है, लिहाजा तापमान में अब कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा। तापमान में एकात डिग्री का ही फर्क आ सकता है, इसके अलावा प्रदेश में फिलहाल मौसम का मिजाज शुष्क बना रहेगा। 
 होम आइसोलेशन से बाहर आए युवक की मौत, जाने पूरी खबर

होम आइसोलेशन से बाहर आए युवक की मौत, जाने पूरी खबर

जशपुर। कोरोना की महामारी के कारन पुरे देश में हड़कंप सा मचा हुआ है। आपको बता दे की छत्तीसगढ़ में कोरोना का आकड़ा बहुत तेजी से बढ़ रहा है यहां आय दिन कोरोना के नए-नए मामले सामने आ रहे है। जिससे लोगो में भय का मौहोल बना हुआ है इसी बिच एक खबर सामने आ रही है की जशपुर में होम आइसोलेशन से बाहर आए युवक की मौत हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक युवक की मिर्गी के कारण मौत हुई है। जमशेदपुर से लौटने के बाद युवक को आइसोलेशन पर रखा गया था। बताया जा रहा है युवक कुनकुरी का रहने वाला है।
गुटखा की अवैध बिक्री करते दुकानदार गिरफ्तार, खैनी-गुटखा जब्त

गुटखा की अवैध बिक्री करते दुकानदार गिरफ्तार, खैनी-गुटखा जब्त

जगदलपुर। लॉक डाउन के बाद से ही पान मसाला, तम्बाकू, गुड़ाखू व गुटखा पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिबंध के बावजूद गुटखा बेचे जा रहे एक दुकानदार को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार करते हुए गुटखा जब्त कर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले की जानकारी देते हुए नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस की एक टीम झंकार टाकीज के पास स्थित किराना दुकानदार राहुल जैन के पास से गुटखा बरामद किया गया है, आरोपी के पास से  राजश्री पान मसाला, राजश्री जर्दा, मुसाफिर पान मसाला, मुसाफिर जर्दा के पैकेट व अन्य प्रतिबंधित सामान जब्त किया गया है।
कोरोना मरीज मिलने के बाद राजधानी का देवेन्द्र नगर इलाका कंटेंनमेंट जोन घोषित, समस्त दुकानें, ऑफिस बंद

कोरोना मरीज मिलने के बाद राजधानी का देवेन्द्र नगर इलाका कंटेंनमेंट जोन घोषित, समस्त दुकानें, ऑफिस बंद

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवेन्द्र नगर इलाके में एक कोरोना मरीज मिलने के बाद उस क्षेत्र को कंटेंनमेंट घोषित किया गया है, जिससे बाद इस क्षेत्र में अगले आदेश तक के लिए समस्त दुकानें, ऑफिस व अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानें पूर्णत: रूप से बंद रहेगी। 

देवेन्द्र नगर क्षेत्र के भाटापारा के फाफाडीह काली मंदिर के पास सोमवार को एक कोरोना संक्रमित मरीज मिला है जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने पूर्व में निजी प्रेस के सामने, पश्चिम में भवानी डाइग्नोस्टिक के सामने व फाफाडीह एक्सप्रेस-वे से भाटापारा के लिए एंटी पॉइंट, उत्तर में एक्सप्रेस वे और दक्षिण में सुप्रिता नर्सिग होम तक को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है। इस कंटेनमेंट जोन के अंतर्गत सभी दुकानें, आफिस और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अगले आदेश तक पूरी तरह से बंद रहेंगे। 

प्रभारी अधिकारी द्वारा कंटेन्मेंट जोन में घर पहुंच सेवा के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति उचित दरों पर किया जाएगा। कन्टेनमेंट जोन अंतर्गत सभी प्रकार के वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर अन्य किसी भी कारणों से घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित किया गया है। कन्टेनमेंट जोन में शासन के मानकों के अनुसार व्यवस्था बनाये रखने के लिए जिला पुलिस रायपुर ने आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित किया जाएगा। जिला चिकित्सा और स्वास्थ्य द्वारा संबंधित क्षेत्र में शासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य निगरानी, सेम्पल की जांच आदि आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएगी। 

कंटेंनमेंट जोन में आवश्यक सुरक्षा और व्यवस्था के लिये अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए है। कंटेंटमेंट जोन में प्रवेश और निकाष की व्यवस्था के लिए बेरिकेटिंग कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग, सेनेटाईजेशन व्यवस्था आयुक्त नगर पालिक निगम, घरों का एक्टिव सर्विलांस, स्वास्थ्य टीम को एस.ओ.पी, अनुसार दवा, मास्क, पी.पी.ई. इत्यादि उपलब्ध कराने और बायोमेडिकल अपशिष्ट का प्रबंधन मुख्य चिकित्सा-स्वास्थ्य अधिकारी और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राजीव कुमार पाण्डेय, संयुक्त कलेक्टर रायपुर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बाहर से आए मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की पहल, मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए जिले के कार्यपालन अभियंता से श्रमिक कर सकेंगे संपर्क

बाहर से आए मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की पहल, मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए जिले के कार्यपालन अभियंता से श्रमिक कर सकेंगे संपर्क

रायपुर। राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग द्वारा बाहर से आए श्रमिकों के लिए नई पहल की गई है। लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू के निर्देशानुसार यह निर्णय लिया गया है। निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी श्रमिक जो अन्य राज्यों में रोजगार की तलाश में गए हुए थे और कोविड-19 से उत्तपन्न संकट के कारण उन्हें अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ लाया गया है, ऐसे मजदूरों को रोजगार उपलब्ध करवाए जाएंगे। ऐसे अकुशल श्रमिकों लोक निर्माण विभाग के सड़कों एवं भवनों के कार्यों के साथ-साथ मरम्मत के कार्यो में प्राथमिकता से रोजगार उपलब्ध कराएगी। इसके लिए विस्तृत गाईड लाईन जारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग के कार्यो में मजदूरों के माध्यम से कराये जाने वाले मरम्मत जैसे-नाली खुदाई, पटरी रिपेयर एवं पुल पुलियों की सफाई आदि मरम्मर कार्यों में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी जो अन्य राज्य से आए हैं, उन्हें प्राथमिकता देते हुए उनके लिये रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी। यह रोजगार अस्थाई होंगे।
 
 इसी प्रकार कुशल श्रमिकों के लिये भी लोक निर्माण विभाग के अनुबंधित कार्यों में संबंधित जिले के निर्माण कार्यों में रखे जाने के लिए प्राथमिकता तय की जायेगी। इसके लिए ऐसे कुशल श्रमिक जो जिस कार्य के लिये अनुभव रखते हैं, वे अपना पूर्ण विवरण संबंधित जिले के कार्यपालन अभियंता के मोबाइल नंबर में व्हाट्सएप से या अन्य माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के कारण छत्तीसगढ़ के लोगों को छत्तीसगढ़ में ही रोजगार मुहैया कराने के लिये राज्य सरकार हर स्तर पर प्रयासरत है एवं रोजगार के अवसर तलाश रही है। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग भी निर्माण कार्यों में ठेका पद्धति को कम करते हुए रोजगार उन्मूलक कार्यों को प्राथमिकता देगी। निर्माण कार्यों में छत्तीसगढ़ मूल के प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिये विशेष प्रावधान किये जाने का निर्णय लोक निर्माण विभाग द्वारा लिया गया है।
 फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए अलर्ट जारी

फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए अलर्ट जारी

रायपुर। फसलों को नुकसान पहुचाने वाले टिड्डी दल का प्रकोप राजस्थान होते हुए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों देखते हुए केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र के सहायक निदेशक ने सीमावर्ती जिले के कृषि अधिकारियों, कर्मचारियों एवं किसानों को सचेत रहने कहा गया है।
टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए किसानों को कीटनाशक मालाथियोन, फेनवालरेट, क्विनालफोस तथा फसलों एवं अन्य वृक्षों के लिए क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल, लामडासाइहलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग करने के सुझाव दिए गए हैं।
 कोरोना: छत्तीसगढ़ में रोज 3000 से अधिक सैंपलों की जांच, अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी

कोरोना: छत्तीसगढ़ में रोज 3000 से अधिक सैंपलों की जांच, अब तक 50 हजार से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी

रायपुर। कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए इसकी जांच और इलाज की प्रदेश में पुख्ता व्यवस्था की गई है। कोरोना वायरस संक्रमितों की पहचान के लिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में स्थापित चार लैबों एम्स, रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय तथा जगदलपुर व रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के माध्यम से रोज तीन हजार से अधिक सैंपलों की जांच हो रही है। आरटीपीसीआर जांच के लिए इन चारों लैब में पर्याप्त मात्रा में किट उपलब्ध हैं। रायपुर के लालपुर स्थित लैब में भी ट्रू-नॉट विधि से सैंपलों की जांच की जा रही है। प्रदेश में अब तक 50 हजार से अधिक कोविड-19 संभावितों के सैंपल की जांच हो चुकी है। राजनांदगांव, बिलासपुर और अंबिकापुर के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में भी कोरोना वायरस जांच के लिए आईसीएमआर के मानकों के अनुरूप बीएसएल-2 लैब की स्थापना का काम जोरों पर हैं।

प्रदेश में कोविड-19 से निपटने की तैयारियां जनवरी माह से ही शुरू कर दी गई थीं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर एयरपोर्ट पर विदेश एवं संक्रमित क्षेत्रों से लौटने वालों की निगरानी फरवरी से ही प्रारंभ कर दी गई थी। वर्तमान में बड़ी संख्या में लौट रहे प्रवासी मजदूरों की स्टेशन में ही आर.डी. किट से जांचकर क्वारेंटाइन सेंटर्स में भेजा जा रहा है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में श्रमिकों की सेहत की जांचकर कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण वालों के आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। अभी तक 15 हजार से अधिक प्रवासियों के सैंपलों की आरटीपीसीआर जांच की जा चुकी है। क्वारेंटाइन सेंटर्स में प्रवासी श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में किसी भी व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से मृत्यु नहीं हुई है। बिलासपुर जिले के मस्तुरी के मोहन लाल, मुंगेली के पुनीत टंडन एवं पाली की अन्टिला बाई के सैंपल लेकर आरटीपीसीआर जांच की गई है। इन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

कोविड-19 के इलाज के लिए प्रदेश में विशेषीकृत अस्पतालों की स्थापना के साथ ही मौजूदा अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। विशेषीकृत अस्पतालों में इसके इलाज के लिए 1760 और अन्य अस्पतालों में 1586 बिस्तरों की व्यवस्था है। प्रदेश के 115 आइसोलेशन सेंटर्स में भी 5515 बिस्तर हैं, जहां कोविड-19 का उपचार किया जा सकता है। इस तरह कुल 8801 बिस्तरों पर अभी इलाज की व्यवस्था है। आवश्यकता पडऩे पर निजी अस्पतालों का भी अधिग्रहण कर इलाज की तैयारी है। राज्य के विभिन्न कोविड अस्पतालों में इलाजरत मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। अलग-अलग अस्पतालों में अभी 185 मरीजों का उपचार चल रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोविड-19 के मद्देनजर स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए सभी जिलों को 25-25 लाख रूपए और प्रत्येक विकासखंड को दस-दस लाख रूपए मुख्यमंत्री राहत कोष से जारी किए हैं।

प्रवासी श्रमिकों के लिए गांवों में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर्स की व्यवस्था राजस्व एवं आपदा प्रबंधन द्वारा जिलों को जारी आपदा राहत निधि तथा ग्राम पंचायतों को दिए गए चौदहवें वित्त आयोग व मूलभूत की राशि से की जा रही है। प्रदेश में अभी 18 हजार 751 क्वारेंटाइन सेंटर्स हैं जिनकी कुल क्षमता छह लाख 86 हजार 579 है। वर्तमान में इन सेंटरों में एक लाख 59 हजार 868 लोग रखे गए हैं। कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए अभी 45 हजार से अधिक लोग होम-क्वारेंटाइन में हैं।
बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती युवक ने लगाई फांसी, पढ़ें पूरी खबर

बड़ी खबर : प्रदेश के इस जिले में अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती युवक ने लगाई फांसी, पढ़ें पूरी खबर

अंबिकापुर | मेडिकल कालेज अस्पताल के टीबी वार्ड में भर्ती 25 वर्षीय एक युवक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
जानकारी के अनुसार उक्त युवक दिल्ली से आया था। उसे टीबी वार्ड में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं है। मामला सामने आने के बाद टीबी वार्ड और स्वास्थ्य एवं छाती रोग विभाग को बंद कर दिया गया है। सूचना पर मणिपुर पुलिस मौके पर पहुंच गई है।  इस घटना से स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप मच गया |

 

 

शहर के एक होटल में पुलिस ने दबिश देकर, 12 युवकों को किया रंगे हाथ गिरफ्तार, लॉकडाउन के बिच चल रहा था यह काम

शहर के एक होटल में पुलिस ने दबिश देकर, 12 युवकों को किया रंगे हाथ गिरफ्तार, लॉकडाउन के बिच चल रहा था यह काम

जगदलपुर। कोरोना की महामारी और लॉकडाउन के बिच भी बदमासों और जुआरिओं की हरकतों में कमी नहीं आई है। आय दिन कोई न कोई मामला सामने आ रहा है इसी कड़ी में एक खबर सामने आ रहा है की हाता ग्राउंड के सामने स्थित हॉटल रवि रेसीडेंसी में जुआ खेल रहे 12 युवकों को पुलिस ने शनिवार रात दबिश देकर पकड़ा। इनके पास से 2 लाख 3 हजार रुपए नगद और मोबाइल बरामद किया गया।

इन्हे किया गया न्यायालय में पेश-
कोतवाली प्रभारी एमन साहु ने बताया कि इन सभी को रंगे हाथ धर दबोचा है। सिटी कोतवाली में दर्ज प्रकरण के तहत शांतिनगर वार्ड निवासी सागर शर्मा, लालबाग हाऊसिंग बोर्ड कालोनी निवासी शिव चौहान, अजय दुबे, बालाजी वार्ड निवासी मो. अगास, मोतीतालब पारा निवासी फयाज़, प्रतापगंज पारा निवासी सन्नी साव, अनुपमा चौक निवासी शिवम, हिकमीपारा निवासी विजय जैन, बालाजी वार्ड निवासी सौरभ यदु, गंगानगर वार्ड निवासी सुभम सिंह, अग्रसेन चौक निवासी एस मिचवी, प्रतापगंज पारा निवासी निकेश को न्यायालय में पेश किया गया फिर जमानत पर रिहा किया गया है।
 
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने 53 ट्रेनों की सहमति

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने 53 ट्रेनों की सहमति

रायपुर नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लाॅकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों तथा अन्य लोगों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर वापस लाने का सिलसिला लगातार जारी है। श्री बघेल के निर्देशन पर राज्य के बाहर फंसे श्रमिकों एवं अन्य लोगों को वापस लाने के लिए राज्य सरकारों से समन्वय कर अब तक 53 ट्रेनों की सहमति दी है।

 श्रम मंत्री डाॅ. शिवकुमार डहरिया ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा प्रवासी श्रमिकों को वापस छत्तीसगढ़ लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए विभिन्न रेल मण्डलों को श्रमिकों के यात्रा व्यय के लिए आवश्यक राशि का भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में 47 हजार 453 यात्रियों को 32 ट्रेनों से वापस लाने के लिए दो करोड़ 91 लाख 40 हजार 930 रूपए का भुगतान किया जा चुका है। 

 डाॅ. डहरिया ने बताया कि लाॅकडाउन के कारण श्रमिकों को जो छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं पर पहुंच रहे है एवं राज्य से होकर गुजरने वाले सभी श्रमिकों के लिए नाश्ता, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवहन की निःशुल्क व्यवस्था से श्रमिकों कोे काफी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ के सभी सीमाओं पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को, चाहें वो किसी भी राज्य के हो, उन्हें छत्तीसगढ़ का मेहमान मान कर शासन-प्रशासन के लोग उनकी हरसंभव मदद कर रहे है। 

 उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर श्रमिकों के लिए राशन एवं नगद आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 26 हजार 102 श्रमिकों को 36 करोड़ रूपए बकाया वेतन का भुगतान भी कराया गया है। वहीं लाॅकडाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग एक लाख से अधिक श्रमिकों को पुनः रोजगार उपलब्ध कराया गया है और छोटे-बड़े 1300 से अधिक कारखानों में पुनः कार्य प्रारंभ हो गया है। 

बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के नाम पर होगा बस्तर विश्वविद्यालय: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के नाम पर होगा बस्तर विश्वविद्यालय: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर। बस्तर टाइगर स्व.महेन्द्र कर्मा की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने तथा उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजली व्यक्त करते हुए बस्तर विश्वविद्यालय का नाम अब स्व.महेंद्र कर्मा के नाम पर रखा जाएगा। 
 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सल हमले में शहीद जवानों और नेताओं को नमन करते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। भूपेश बघेल ने बस्तर विश्व विद्यालय का नाम महेंद्र कर्मा के नाम पर रखने की घोषणाभी कर दी है।। झीरम हमले की बरसी की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में भूपेश बघेल ने कहा कि शहीदों की स्मृति में 25 मई को प्रत्येक साल झीरम श्रद्धांजलि दिवस मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा आज के दिन को कभी भी भूला नहीं जा सकता। शहीदों को अभी तक न्याय नहीं मिला है। हमारी कोशिश जारी हैं लेकिन सफ लता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शहीद नेताओं की याद में हम लगातार काम कर रहे हैं। इससे पहले सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट भी किया है। सीएम बघेल ने ट्वीट कर कहा कि 25 मई को अब जीरम श्रद्धांजलि दिवस के रूप में सदैव स्मरण करेगा। हमारे नेताओं का न होने का एहसास तो हमें हर पल- हर क्षण होता है, छत्तीसगढ़ को लेकर उनकी दूरदर्शिता भी हमें प्रतिदिन कार्य करने को प्रेरित करती है वे आज भी हमारा संबल हैं। आज हम उन जवानों को भी नमन करते हैं जिन्होंने उस काले दिन अपनी जान गंवाई थी। अब तक नक्सलवादी हिंसा में जान गंवाने वाले जवानों और नागरिकों को भी श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं। सीएम बघेल ने कहा 25 मई 2013 को तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में विद्याचरण, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, दिनेश पटेल समेत तमाम कांग्रेस के नेतागण परिवर्तन यात्रा में निकले थे, झीरम घाटी में नक्सल हमले में जो एक राजनीतिक अपराधिक षड्यंत्र था, उसकी शिकार हुए, हमारे प्रथम पंक्ति के सारे नेता काल के गाल में समा गए, एक भीषण षडयंत्रपूर्वक हत्या हुई है, इन नेताओं के यादें हम सबके मन में है राजनीतिक नरसंहार वहां किया गया, लेकिन उन आत्माओं को एक-एक करके न्याय नहीं मिल पाया है, षड्यंत्र से पर्दा उठा नहीं है। उन्होंने कहा कि सब लोग उसे जानने की इच्छुक हैं, लेकिन आप सब जानते हैं कि अनेक बाधाएं हैं, और उन बाधाओं को हम लोग दूर करेंगे। जब सच सामने आएग्क़ तो अपराधी कटघरे में खड़े होंगे, तभी उन महापुरुषों को श्रद्धांजलि मिलेगी, हमारे सुरक्षाकर्मी भी बड़ी संख्या में हताहत हुए थे, और आज के दिन पूरे छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय अशासकीय कार्यालयों में झीरम श्रद्धांजलि दिवस मनाया जाएगा, इस प्रकार का आदेश छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी किया गया है, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की यादों को बनाए रखने के लिए बस्तर विश्वविद्यालय महेंद्र कर्मा के नाम से जाना जाएगा। एनआईए जांच को लेकर सीएम बघेल ने कहा कि एक तकनीकी समस्या है क्योंकि राज्य सरकार ने ही एनआईए को जांच जिम्मा सौंपा था, और जांच को कम्प्लीट कर लिया गया, लेकिन जो षडयंत्र हुआ है, उसके बारे में कोई जांच नहीं हुई, जो नक्सली पकड़े गए है, एनआईए कोर्ट ने जो आदेश दिया कि जिन्होंने आत्मसमपर्ण किया उसका बयान लिया जाए, वह भी नहीं लिया गया और जो लोग घटना स्थल में थे, उनसे भी बयान नहीं लिया गया, चाहे वह फूलों देवी नेताम हो या चाहे अन्य साथी, उनके भी बयान एनआईए ने नहीं लिया, जांच ही अधूरी है इस मामले में जांच पूरी हो इसके लिए कौन जिम्मेदार है, तथ्य सामने आना चाहिए। 
रकम दुगुनी करने का झांसा देकर लोगों से लाखों की धोखाधड़ी, मामला दर्ज

रकम दुगुनी करने का झांसा देकर लोगों से लाखों की धोखाधड़ी, मामला दर्ज

रायपुर। लोगों को झांसा देकर मूल रकम दुगुनी करने का प्रलोभन देकर अपराध करने की घटनाओं में संगठित गिरोह द्वारा लगातार वारदात की जा रही है। खरोरा थाना से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी एस कुमार पिता जीवनलाल को आरोपी कमल देवांगन पिता जागेश्वर देवांगन, विकास, झालाराम पदमवार निवासी ग्राम घीवरा  खरोरा द्वारा प्रार्थी एस कुमार को फर्जी कंपनी बनाकर 15 दिनों में मूल रकम 4805980 रूपये की ठगी कर धोखाधड़ी की। उक्त मामले में खरोरा थाने ने आईपीसी की धारा 420/34 के तहत मामला कायम किया है। 
प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या तक पहुंचा मामला, डायल 112 की टीम ने सुलझाया मामला

प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या तक पहुंचा मामला, डायल 112 की टीम ने सुलझाया मामला

जगदलपुर। बस्तर जिले के थाना परपा क्षेत्रांतर्गत ग्राम कुरेंगा व करंजी के बीच एक लड़की प्रेम प्रसंग के कारण आत्महत्या करने जाने की सूचना 24 मई की रात लगभग 12:40 बजे डायल 112 को प्राप्त हुई। सूचना पर डायल 112 परपा बायसन 01 को तत्काल घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। डायल 112 की टीम आत्महत्या करने के लिए आमादा नाराज लड़की तक घटना स्थल पहुंचकर लड़की को लड़के तथा उनके परिजनों से मिलवाकर मामले का समाधान करने में सफल हुई है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार डायल 112 की टीम घटना स्थल पहुंचकर पुछताछ करने पर लड़की ने बताया कि वो हिड़मा पारा के लड़के से प्रेम करती है, उससे विवाह करना चाहती है। जिसे समझाकर घर छोडऩे की बात कहने पर वह नहीं मानी। लड़की ने अपने हाथ में मिट्टी तेल एक जरकिन पकड़ी हुई थी, तथा आत्महत्या करने की बात बोल रही थी। लड़की को थाना प्रभारी ने समझाकर उसे प्रेमी लड़के घर हिड़मा पारा लेकर गये, जहां वह लड़का मिला जिसे पूछताछ करने पर पीडि़त लड़की से विवाह करने के लिए अपनी सहमति जताई। दोनों लड़का-लड़की की सहमति के बाद लड़के के माता-पिता नहीं होने से लड़की को उसके चाचा के सुपुर्द किया गया है। आगे पारिवारिक सहमति से इनका विवाह की सहमति बनी है। इस कार्यवाही में ईआरव्ही आरक्षक 39 मोतीलाल नागेश, आरक्षक 984 चितू मौर्य एवं चालक परमेश्वर ठाकुर ने अपना योगदान मामले के निपटारे में दिया।
उत्तर-पश्चिम की गर्म-शुष्क हवा से तप रहा छत्तीसगढ़, रायपुर समेत इन जिलो में चल रहा लू

उत्तर-पश्चिम की गर्म-शुष्क हवा से तप रहा छत्तीसगढ़, रायपुर समेत इन जिलो में चल रहा लू

रायपुर। राज्य में आ रही उत्तर पश्चिम दिशा की गर्म शुष्क हवा से पारा लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। मई माह के अंत में ही पारा अब 45 डिग्री तक पहुंच गया है। हालांकि आगामी दो दिनों में तापमान में कोई विशेष परिवर्तन भी नहीं होगा। 

मौसम वैज्ञानिक एचपी चन्द्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस समय उत्तर पश्चिम दिशा से गर्म और शुष्क हवाएं आ रही है। इसी के प्रभााव से राज्य में तापमान तेजी से बढ़ा है। राज्य के लगभग सभी प्रमुख शहरों में इन दिनों गर्मी में इजाफा हुआ है और धूप असहनीय हो गई है। वर्तमान में अधिकतम तापमान का आंकड़ा अब अपने पीक पोजिशन पर आ गया है। इससे संभावना है कि अब आने वाले एक-दो दिनों में अधिकतम तापमान के आंकड़े में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा। राज्य की राजधानी रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के जिलों में आज औरर कल लू के हालात बन सकते हैं। 

इधर गर्म-शुष्क हवा के असर से तापमान में हुई वृद्धि का असर आम जनजीवन में भी देखने को मिल रहा है। दिन में चिलचिलाती धूप से घरों से बाहर निकलना दुभर हो गया है। बहुत जरूरी काम होने पर ही लोग अपने-अपने घरों या कार्यालयों से बाहर निकल रहे हैं। दिन के अलावा अब रात में भी कूलर, पंखे बेअसर साबित होने लगा है। हालांकि अब अधिकतम तापमान में एक डिग्री से ज्यादा वृद्धि अथवा कमी की भी संभावना काफी कम है। ऐसे में यह भीषण गर्मी अभी पूरे माह सताएगा, वहीं इस बार मानसून भी अपने तय समय पर ही प्रदेश में दस्तक देगा। हाल ही में आए समुद्री तूफान एम्फान के चलते हालांकि थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब भीषण गर्मी से बेहाल लोग बेसब्री से ठंडी फुहार का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। 
शराब पीने के लिए पत्नी से मांग रहा था रूपये, नहीं देने पर रस्सी से गला दबाकर कर दी हत्या

शराब पीने के लिए पत्नी से मांग रहा था रूपये, नहीं देने पर रस्सी से गला दबाकर कर दी हत्या

महासमुंद। शराब पीने के लिए रूपये नहीं देने पर एक युवक ने अपनी पत्नी को मवेशी बांधने के गेरवा रस्सी से गला दबाकर हत्या कर दिया। पीएम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने रविवार को आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। घटना बसना थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ेसाजापाली का है। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 302, 203, 201 के तहत अपराध दर्ज कर किया है। बसना थाना प्रभारी वीणा यादव ने बताया कि ग्राम बड़ेसाजापाली निवासी हीरालाल लहरे पिता चैनदास लहरे को अपनी पत्नी गंगाबाई लरहे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। वह अपने माता पिता से अलग रहता था। उन्होंने बताया कि 18 मई के दोपहर आरोपी शराब के लिए अपनी पत्नी से रूपये मांग रहा था। जब वह रूपये नहीं दी, तो उसके साथ झगड़ा करने लगा। दूसरे दिन 19 मई सुबह फिर से आरोपी पत्नी से मारपीट कर रूपये मांग रहा था। नहीं देने पर वह मवेशी बांधने के गेरवा रस्सी में गला दबाकर हत्या कर दिया और उसे दरवाजे के चौखट के पास छोड़कर भाग गया। कोई देखे तो समझे की वह गिर कर मर गई है। कुछ देर बाद मृतका का भतीजा घर आया तो देखा कि उसकी चाची चौखट के पास पड़ी थी। परिजनों को आवाज देकर बुलाए और उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। 19 तारीख को ही मृतका के गले में निशान था। चिकित्सक सांस रूकने से मौत होने का कारण बताया। रविवार को पीएम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हुआ कि मृतका की मौत गला दबने से हुई है। उसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन की। तब पता चला कि 18 व 19 मई को इसके घर में विवाद हुआ था। शक के आधार पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ किया। अंत में आरोपी टूट गया और हत्या करना कबूल किया।
सावधान: लगातार तीन महीने नहीं चुकाया बिजली का बिल तो नहीं मिलेगा बिजली बिल हाफ का लाभ

सावधान: लगातार तीन महीने नहीं चुकाया बिजली का बिल तो नहीं मिलेगा बिजली बिल हाफ का लाभ

महासमुंद। 400 यूनिट बिजली बिल छूट का लाभ लेना है, तो कोरोना काल के दौरान तीन महिने का बिल भुगतान करना अनिवार्य है। यदि बिजली बिल का भुगतान उपभोक्ता नहीं करेंगे तो, उन्हें इस छूट का लाभ नहीं मिलेगा। विद्युत विभाग ने 31 मई तक बिना अधिभार के बिल अदा करने का समय उपभोक्ताओं को दिया है। कोरोना काल के चलते उपभोक्ताओं को पिछले तीन महीने से बिना अधिभार का बिल दिया गया है। हालांकि एटीपी सेंटरों में बिल पटाने वालों की कतार लग रही है, लेकिन पिछले तीन महिने से वूसली बहुत कम आई है। वहीं ऑनलाइन पेंमेट में भी कमी आई है। हर महिने सरायपाली व महासमुंद डिविजन में तीन से चार करोड़ रूपये का भुगतान होता था, इस बाद केवल एक से डेढ़ करोड़ का ही भुगतान हुआ है। बिजली बिल पटाने के लिए लगातार विभाग प्रयासरत है, वहीं एसएमएस के माध्यम से बिल पटाने के लिए सूचना दे रहा है। कार्यपालन अभियंता महेश नायक ने बताया कि सरकार पहले 31 मई तक बिना अधिभार के बिल पटाने की छूट दी है। अब शासन ने आदेश दिया है कि जो लगातार तीन महीने तक बिल नहीं पटाएगा उन्हें आने वाले महीनों में बिजली हाफ यानी 400 यूनिट का छूट नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि हर महीने की भांति इस बार बिजली बिल का भुगतान धीमी गति से हो रहा है। अभी भी समय शेष है। उपभोक्ता समय रहते अधिभार व छूट का लाभ बिल अदा कर ले सकते हैं। ज्ञात हो कि जिले में अभी भी 10 हजार उपभोक्ताओं को छूट का लाभ नहीं मिल रहा है। ये ऐस उपभोक्ता है जिन्होंने अभी तक बिल नहीं पटाया है। वहीं इनके कनेक्शन विभाग ने काट दिए हैं। जानकारी के अनुसार जिले में तीनों डिविजन में करीब 2 लाख उपभोक्ता है। इसमें घरेलू, उद्योग शामिल है।

कोरोना के चलते बंद था दफ्तर-
कोरोना संकट को देखते हुए 22 मार्च से 20 अप्रैल तक बिजली दफ्तर को बंद कर दिया था। इस दौरान बिजली बिल पटाने लोग पहुंच रहे थे, लेकिन दफ्तर बंद होने के कारण वे वापस लौट आए थे। 21 अप्रैल के बाद फिर से दफ्तर को खोला गया और उपभोक्ताओं को बिना सरचार्ज के 31 मई तक बिजली बिल का भुगतान करने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद से बिजली बिल का भुगतान उपभोक्ता कर रहे है, लेकिन पूर्व की भांति वसूली कम हो रही है।

शासन ने किया सकुर्लर जारी-
तीन माह तक बिजली बिल का भुगतान यदि उपभोक्ता नहीं करते हैं, तो उन्हें बिजली हॉफ का लाभ नहीं देने के लिए शासन ने सकुर्लर जारी कर दिया है। यहीं नहीं उनसे अधिभार शुल्क भी लिया जाएगा।
ट्रेक्टर और मोटरसाइकिल में भिड़ंत, 2 की मौत 2 घायल

ट्रेक्टर और मोटरसाइकिल में भिड़ंत, 2 की मौत 2 घायल

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सड़क हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा। जिले के बिलासपुर मार्ग में  पाली थाना क्षेत्र के चैतुरगढ़ लाफा मुख्य मार्ग में सोमवार की सुबह एक ट्रैक्टर व बाइक के बीच आमने-सामने भिड़ंत हो जाने से ट्रैक्टर सीधे पलट गई और ट्रैक्टर में सवार चालक और परिचालक ट्रैक्टर में दब जाने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई है जबकि पल्सर बाइक में सवार 2 लोग बुरी तरह घायल हो गए हैं जिन्हें उपचार के लिए पाली स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है जहां दोनों की बिगड़ती हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने बिलासपुर सिम्स रिफर कर दिया है।
छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को मिलेगा कृषि का दर्जा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी सहमति

छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को मिलेगा कृषि का दर्जा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी सहमति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को अब कृषि का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लाख की खेती को फायदेमंद बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा इस संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को उपयुक्त और किसानों के लिए लाभकारी मानते हुए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान करते हुए कृषि, वन और सहकारिता विभाग को समन्वय कर लाख और इसके जैसी अन्य लाभकारी उपज को कृषि में शामिल करने का प्रस्ताव मंत्रीपरिषद की अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए है। प्रदेश में लाख की खेती को कृषि का दर्जा मिलने से लाख उत्पादन से जुड़े कृषकों को भी सहकारी समितियों से अन्य कृषकों की भांति सहजता से ऋण उपलब्ध हो सकेगा। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में लाख की खेती की अपार संभावनाएं है। यहां के कृषकों के द्वारा कुसुम, पलाश और बेर के वृक्षों में परंपरागत रूप से लाख की खेती की जाती रही है। परंतु व्यवस्थित एवं आधुनिक तरीके से लाख की खेती न होने की वजह से कृषकों को लागत के एवज में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है। वन विभाग ने लाख की खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से इसे कृषि का दर्जा देने तथा कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से अन्य कृषकों की तरह लाख की खेती करने वाले किसानों को भी ऋण उपलब्ध कराने का सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को प्रेषित प्रस्ताव को मान्य किए जाने का आग्रह किया था। 

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने वन विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देने के साथ ही लाख उत्पादन एवं अन्य कोई ऐसी उपज जिसे कृषि की गतिविधियों में शामिल करना हो तो कृषि, वन एवं सहकारिता विभाग के साथ समन्वय कर प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ के दक्षिण वनांचल की आदि परंपरा में शामिल है सोशल डिस्टेंसिंग , जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है

छत्तीसगढ़ के दक्षिण वनांचल की आदि परंपरा में शामिल है सोशल डिस्टेंसिंग , जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है

नारायणपुरपूरी दुनिया कोविड-19 की महामारी से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कर रही है। लेकिन तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उड़िसा एवं महाराष्ट्र की सरहदों से घिरा तथा लोक संस्कृतियों और सामाजिक परंपराओं का जीवन्त उदाहरण रहा छत्तीसगढ़ का दक्षिण वनांचल बस्तऱ क्षेत्र इस मामले में पुरातन काल से आगे रहा है। प्रकृति के उपहारों से घिरा समूचे बस्तर क्षेत्र में उन्मुक्त प्राकृतिक परिवेश के बीच दूर-दूर घरों में निवास का चलन वनांचल क्षेत्र में पुरातन काल से चली आ रही परंपरा का अहम् हिस्सा है, जो वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के वैश्विक संदेश का पुरातन संकेत दर्शा रहा है। इस परम्परा के तहत अबूझमाड़िया जनजाति बाहुल्य क्षेत्र नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में निवास करने वाले जनजाति वर्ग के परिवार पुरातन काल से ही दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित वन भूमि पर निवास बनाकर अपना जीवनयापन करने की महत्वाकांक्षी परम्परा वर्तमान समय में उपयोगी साबित हो रही है।

प्रकृति के बीच सादगी से सेहत का वरदान

जनजाति बाहुल्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्र में जनजाति वर्ग के आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर भी वन भूमि पर निवास बनाकर निवास करते आ रहे हैं एवं इसी अरण्य स्थल में निवास के साथ जीवन का आनन्द उठाते रहे हैं। वर्तमान समय में दूर-दूर निवास की परम्परा सोशल डिस्टेसिंग के मूलभूत सिद्धान्त को पूरा करती नजर आ रही है। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आज भी सोशल डिस्टेसिंग पालन के जीवन्त उदाहरणों को आसानी से देखा जा सकता है।  

आदिवासी परिवार में यह चलन है कि परिवार में जितने भी बच्चे हैं उनका अपना अलग घर होता है। परिवार में बड़े बेटे की शादी होने के तुरन्त बाद ही अपने घर से थोड़ी दूरी पर उसका घर बना दिया जाता है और इसी प्रकार अन्य लड़कों का भी शादी के बाद उनका अपना घर अलग बना दिया जाता है। यह अपने आप में आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र जीवनयापन के साथ ही परम्परा सोशल डिस्टेंिसंग को ही अभिव्यक्त करता रहा है। जनजाति क्षेत्र के ग्रामीण इलाको में आज भी अलग-अलग घर बनाकर रहते हैं।

सेहत के लिहाज से भी बेहतर व्यवस्था है यह

सेहत की दृष्टि से भी इनके घर अत्यन्त अनुकूल और सादगीपूर्ण हैं। घर के आगे खुला आँगन, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली और सूरज की भरपूर रोशनी इनके स्वास्थ्य और शारीरिक दृष्टि से प्रभावकारी होते हैं। आज कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का होना ही आवश्यक है। कोविड 19 के बचाव व सुरक्षा के लिए जहां सोशल डिस्टेसिंग को अपनाना सर्वाेपरि प्राथमिकता हो गई है और विश्व स्तर पर माना गया है कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में सामाजिक दूरी ही इस महामारी के प्रसार को रोकने का बेहतर और सहज-सरल एवं स्वीकार्य उपाय है। 

इस दृष्टि से जनजाति अंचलों को इस मायने में आदर्श परंपराओं का आदि संवाहक कहा जा सकता है कि उनमें संक्रमण को रोकने के लिए बचाव के उपाय सदियों से चले आ रहे हैं और यह सामाजिक परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। मौजूदा समय में सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में जनजाति क्षेत्रों को अग्रणी माना जा सकता है, आज पूरी दुनिया इसे अपना रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से जनजाति क्षेत्र के लोग भी अपनी जागरूकता दिखा रहे हैं तथा मास्क का उपयोग, साबुन से हाथ धोने सहित बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। 

प्रवासी श्रमिक प्रशासन के लिए बन रहे हैं चुनौती 

राज्य शासन की मंशानुरूप देश के विभिन्न राज्यों में काम करने गये प्रवासी मजदूर अब अपने गृहग्राम की ओर रूख कर रहे हैं। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बनाये रखना प्रशासन के लिए चुनौती भरा काम है। इस चुनौती को कलेक्टर श्री पी.एस.एल्मा के नेतृत्व में जिला एवं पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी प्राथमिकता देते हुए जिले को सुरक्षित रखने में लगे हुए हैं। अन्य राज्यों से वापस जिले में आने वाले प्रवासी मजदूरों को सीधे उनके घर न भेजकर सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें जिला प्रशासन द्वारा जिले में बनाये गये 14 क्वारंटाइन सेंटरों में 14 दिनों के लिए संस्थागत कोरांटाईन एवं 14 दिन होम कोरंटाईन में रखा जा रहा हैं। जहां उन्हें सभी जरूरी सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही है। जिससे इस वनांचल क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखा जा सके। 

इलाज के दौरान युवती की तबियत बिगड़ने से हुई मौत, जाने कहा की है खबर

इलाज के दौरान युवती की तबियत बिगड़ने से हुई मौत, जाने कहा की है खबर

बालोद जिले के डौंडी लोहारा में एक कोरोना संदिग्ध युवती की मौत हो गई है जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। मिली जानकारी के मुताबिक पचेड़ा गांव के क्वारंटाइन सेंटर में रह रही युवती ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। हालांकि युवती का कोरोना टेस्ट रिपोर्ट आना बाकी है पर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।
बता दें कि मृतिका युवती 14 मई को आंध्रप्रदेश से बालोद जिले में आई थी, जिसे आने के बाद डौंडी क्षेत्र के पचेड़ा गांव में क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। युवती की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। तबियत बिगड़ने पर बालोद के बाद युवती को राजनांदगांव लाया गया था। डॉक्टरों ने हालत बिगड़ता देख पुनः उसे रायपुर रिफर किया गया रायपुर पहुंचने से पहले ही रास्ते में युवती ने दम तोड़ दिया है।

 

मुंबई से शहर में लौटे पांच मजदूर, सूचना पर किए गए क्वांरटाईन, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रैपिड टेस्ट से भी कराई गई

मुंबई से शहर में लौटे पांच मजदूर, सूचना पर किए गए क्वांरटाईन, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रैपिड टेस्ट से भी कराई गई

महासमुंद | मुंबई से पांच मजदूरों के शहर में आने की खबर लगते ही उक्त इलाके में हड़कंप मचा गया। देर शाम पुलिस को इसकी सूचना दी गई। बाद पुलिस टीम ने सभी मजदूरों को एहतियात के तौर पर घर रखने की बजाए नयापारा स्थित जूदेव भवन में क्वांरटाईन किया। सुबह चिकित्सकों की टीम ने स्वास्थ्य जांच की।

चिकित्सक क्षत्रपाल चंद्राकर ने बताया कि मुंबई से आए मजदूरों का थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रैपिड टेस्ट से भी की गई है। जांच में सभी निगेटिव मिले हैं। हालांकि एहतियात के तौर पर वे सभी क्वांरटाईन किए गए हंै। एसडीओपी नारद सूर्यवंशी ने बताया कि पांच सदस्यीय मजदूर शुक्रवार दोपहर मुंबई के धारावी इलाके स्थित निचली बस्ती से आए हंै। उन्होनें बताया कि सभी मजदूर यहीं के निवासी हैं जो मुंबई में मजदूरी करते हैं। ये सभी कुछ दिन पूर्व यहां आने के लिए पैदल निकले थे जो अन्य साधनों से शुक्रवार को यहां पहुंचे और अपने-अपने घर चले गए। जिसकी जानकारी लोगों ने पुलिस को दी। देर रात सभी मजदूरों को घर से ले जाकर जुदेव भवन में लाकर क्वांरटाईन कर रखा गया। आज सुबह सभी की स्वास्थ्य जांच भी गई है।
देर शाम शहर में पुलिस हुई सक्रिय
इधर, देर शाम को शहर के नेहरू चौक पर पुलिस ने अचानक बेवजह घूम रहे लोगों की जांच शुरू कर दी। पुलिस जांच की खबर शहर में फैल गई और लोगों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने शहर के नेहरू चौक में ही नहीं बल्कि वार्डों में भी पेट्रोलिंग पार्टी की गाडिय़ां दौड़ाकर शहर में लॉकडाउन की स्थिति का जायजा लिया। अफसरों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोग घूम रहे हैं जिसकी शिकायत मिल रही थी। इसे देखतेे हुए ही जांच शुरू की गई है।
 
होटल में जुआ खेल रहे 12 रईसजादे जुआरी पकड़ाये, ताश के पत्तों सहित दो लाख से अधिक रुपये और मोबाईल बरामद, जाने कहा की है यह खबर

होटल में जुआ खेल रहे 12 रईसजादे जुआरी पकड़ाये, ताश के पत्तों सहित दो लाख से अधिक रुपये और मोबाईल बरामद, जाने कहा की है यह खबर

जगदलपुर | शहर में कोरोना लॉक डाउन के नियमों के साथ लागू कर्फ्यू के दौरान कोतवाली पुलिस ने शनिवार की देर रात थाना कोतवाली क्षेत्र के एक होटल में लाखों रुपयों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे 12 जुआरियों को दो लाख रूपये सहित गिरफ्तार किया है।

मामले की जानकारी देते हुए कोतवाली टीआई एमन साहू ने बताया कि बीती रात मुखबिर से सूचना मिली कि प्रतापगंज पारा में स्थित होटल रवि रेजीडेंसी में शहर के कुछ रईसजादे लाखों रुपयों का जुआ खेल रहे है। सूचना पर पुलिस की एक टीम तैयार कर होटल रवि रेजीडेंसी में में छापा मार कार्रवाई में पुलिस ने यहां जुआ खेल रहे सागर शर्मा निवासी शांतिनगर, अजय दुबे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी लालबाग, मो.अगस  बालाजी वार्ड, मो.फायास मोतीतालाब पारा, शांति साव निवासी प्रतापगंजपारा, शिव चौहान हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी लालबाग, शिवम अनुपमा चौक, विजय जैन हिकमीपारा, सौरभ यदु बालाजी वार्ड, शुभम सिंह गंगानगर, एच. मिचवी अग्रसेन चौक और निकेश प्रतापगंजपारा को मौके पर पुलिस ने ताश के पत्तों समेत दो लाख से अधिक रुपये सहित पकड़ा है। 
उल्लेखनिय है कि जब आरोपियों के परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो देर रात अपने बच्चों को छुड़वाने के लिए थाने के बाहर शहर के रईसों की कतार लग गई। सभी परिजन अपने बच्चों को छुड़वाने और मामला रफा-दफा करने के लिए अपनी पहुंच का इस्तेमाल करने लगे। लेकिन कोतवाली टीआई ने किसी की भी एक नही सुनी, जिसकी सराहना की जा रही है। पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद जुआ खिलाने और सट्टा खाईवालों में भी हड़कम्प मचना तय माना जा रहा है। 
 
किसान, मजदूर और वनवासियों की जेब में पैसा आने से ग्रामीण और शहरी व्यवसाय में होगी बढ़ोत्तरी : भूपेश बघेल

किसान, मजदूर और वनवासियों की जेब में पैसा आने से ग्रामीण और शहरी व्यवसाय में होगी बढ़ोत्तरी : भूपेश बघेल

रायपुरमुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश के किसानों, मजदूरों और वनवासियों की जेब में पैसा आने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूती होगी बल्कि इससे ग्रामीण और शहरी व्यवसाय में भी बढ़ोतरी होगी। पिछले साल हमने देखा है कि किसानों की ऋण माफी और 2500 क्विंटल में धान खरीदी से देशव्यापी मंदी के बावजूद छत्तीसगढ़ इससे अछूता रहा यह इस साल भी होगा। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज यहां आकाशवाणी से प्रसारित विशेष भंेटवार्ता में कोरोना संकट के दौर में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों, प्रवासी मजदूरों, वनवासियों और ग्रामीणों सहित समाज के सभी वर्गो के हित में उठाए जा रहे कदमों के बारें में विस्तार से जानकारी देते हुए उपरोक्त बातें कहीं।  

  श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिले, उनके साथ न्याय हो इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की है। इस योजना से प्रदेश के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ रूपए चार किश्तों में दिया जा रहा है। पहली किश्त 1500 करोड़ रूपए की राशि 21 मई को किसानों के खातों में राजीव गांधी जी की शहादत दिवस पर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले साल किसानों की ऋण माफी और 25 सौ प्रति क्विंटल में धान खरीदी की गई थी, लेकिन भारत सरकार के निर्देशानुसार हमें इस साल समर्थन मूल्य पर ही धान खरीदी करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों की जो स्थिति है वह किसी से छुपी हुई नहीं है और ऐसी स्थिति में उनका हक है कि हम वह राशि उन्हें दे। ऐसी स्थिति में हम लोगों ने राजीव गांधी किसान योजना लागू की और इस योजना के तहत जो धान के साथ-साथ मक्का उत्पादक किसानों को 10 हजार रूपए प्रति एकड़ और गन्ना उत्पादक किसानों को 13 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से कृषि आदान सहायता राशि मुहैया करा रहे है। आने वाले वर्ष में दलहन तिलहन की फसल को भी इस योजना में शामिल करेंगे ताकि किसान अपनी पसंद से कोई भी लगाएं उनकों इसका लाभ मिलें प्रदेश के भूमिहीन किसानों को भी इस योजना में शामिल करने के लिए हमने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों की कमेटी बना दी गई है जो 2 महीने के भीतर अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट कैबिनेट के सामने प्रस्तुत करेगी।

वनोपज संग्रहण से आदिवासियों को पिछली से साल से इस साल आमदनी में बढ़ोत्तरी

       श्री बघेल ने कहा कि लाॅकडाउन के बावजूद भी हमने छत्तीसगढ़ में मनरेगा के काम शुरू किए और अभी लगभग 26 लाख मजदूर मनरेगा में काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ राजीव गांधी किसान योजना के तहत हमने किसानों के खातों में राशि दी है इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के 44 प्रतिशत वनांचल में आदिवासी और परंपरागत निवासी रहते है। जिनकी अर्थव्यवस्था लघु वनोपज पर आधारित है। इस परिस्थिति में भी जब सारी दुकानें बंद है जो लोग लघु वनोपज खरीदते हैं वह काम बंद पड़ा था। ऐसे समय में हमने ग्रामीण स्तर पर स्व सहायता समूहों के माध्यम से महुआ, इमली की खरीदी की शुरुआत की है। महुआ इमली और इसके बाद तेंदूपत्ता के काम को भी हमने रोका नहीं। भारत सरकार ने महुआ का समर्थन मूल्य 17 रूपए तय किया था जब मांग बढ़ी तो छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे 17 से बढ़ाकर 30 रूपए कर दिया इस प्रकार पिछले वर्षों में जितनी आमदनी लोगों को हुई थी उस से बढ़कर आमदनी इस साल हुई। जंगल में रहने वाले हमारे भाई बहन हैं उनकी जेब में 2500 करोड़ रुपए आएगा । मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ किसान और दूसरी तरफ मजदूर और तीसरी तरफ हमारे आदिवासी जो वनांचल में रहते हैं इन सबकी जेब में पैसा आएगा जब इनकी जेब में पैसा होगा और इनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी तो चाहे वह ग्रामीण व्यवसाय हो चाहे वह शहर के व्यवसाय हो वह बढ़ेगा ही। इसका अनुभव हमने पिछले साल ही कर लिया है। हमने ऋण माफी की और 2500 रूपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी की। पूरे देश में मंदी का दौर रहा लेकिन छत्तीसगढ़ में मंदी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा इस वर्ष भी ऐसा होगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी कभी पलायन नहीं करते थे और जंगल में ही उनकी सारी आवश्यकता पूरी हो जाती थी लेकिन धीरे-धीरे जंगल से आंवला, चिरौंजी और आम के पेड़ काटने लगे और आय के जो स्रोत थे वह घटने लगे। इस साल हमने निर्णय लिया है कि ऐसे पेड़ लगाए जाए जिनसे आदिवासियों को सीधा लाभ मिलें। हम इस साल 70 लाख फलदार पौघे लगाने जा रहे है। जिसमें हर्रा, बहेरा, चिरौंजी, आंवला आदि होंगे जो आदिवासियों की आय के स्रोत बनेंगे। साथ मैंने यह निर्देश भी दिया है कि वन अधिकार का जो पट्टा दिया है वहां इन पेड़ों का लगाएं और इन पेड़ों के बीच में जिमीकांदा-हल्दी आदि जो पेड़ की छाया में भी पैदा हो सकते हैं उन्हें भी लगाए ताकि निरंतर आए मिलती रहे।

  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 90 प्रतिशत से अधिक औद्योगिक प्रतिष्ठान हैं वह प्रारंभ हो चुके हैं। अभी ये पूरी क्षमता के साथ वह काम नहीं कर रहे हैं लेकिन समय धीरे-धीरे बीते जा रहा है वैसे वैसे उनकी क्षमता बढ़ती जा रही है। जो व्यवसाय शहरी मजदूरों को रोजगार देते हैं हमारी कोशिश है कि वो जल्दी से जल्दी खुले। श्री बघेल ने बताया कि प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए हमने 43 स्पेशल ट्रेन चलाने की सहमति दी है। विभिन्न प्रदेशों आने वाले मजदूरों के 16 हजार 499 क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाए हैं जिसमें लोगों के रहने, भोजन और स्वास्थ्य जांच आदि की व्यवस्था की गई है।

किसी भी प्रदेश के श्रमिक सभी हमारे मेहमान है

     मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 7 राज्यों से घिरा हुआ है। इन राज्यों के अलावा कई अन्य राज्यांे के मजदूर  छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रहे हैं। बड़ी संख्या में मजदूर पैदल आ रहे है जिनके लिए राज्य सरकार भोजन, पानी, स्वास्थ्य जांच के साथ चरणपादुका और उन्हें राज्य की सीमा तक सकुशल पहुंचाने की व्यवस्था कर रही है। हम यह समझते हैं कि ये जो श्रमिक हैं वह किसी भी प्रदेश के हो हमारे मेहमान हैं उनकी बराबर देखभाल हो। मैं सभी भाई बहनों से अपील करना चाहता हूॅ। संकट की इस घड़ी में जो लोग आ रहे हैं वह हमारे अपने हैं, हमारे रिश्तेदार है,ं हमारे भाई-बहन हैं। हमारे गांव के लोग हैं, हमारे शहर के लोग हैं ऐसे में हम लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि उनकी देखभाल करें उनके साथ ऐसा कोई व्यवहार न करें जिससे उन्हें ठेस पहुंचे। साथ ही हमारी गाइडलाइन है उसका भी कड़ाई से पालन होना होना चाहिए उनकी देखरेख भी करें और नियमों का कड़ाई से पालन भी करें । हमारे मजदूर भाई जो दूसरे प्रदेश से आए हैं उनसे भी मैं अपील करना चाहता हूं कि यह संकट के समय में थोड़ा धैर्य और संयम रखें आप अपने गांव पहुंच गए हैं हजारों किलोमीटर चलकर आए हैं अब थोड़े दिन की बात है।

      श्री बघेल ने कहा कि जो कोरोना पॉजिटिव मरीज आए हैं उनके साथ हम लोग को अच्छा व्यवहार करना चाहिए और साथ ही उनके इलाज की व्यवस्था हमें करनी है। मैं समझता हूं कि पहले प्रथम चरण में हम सभी छत्तीसगढ़ के लोगों ने मिलकर काम किया है, संकट आया है इससे हमें घबराने की आवश्यकता नही है। जब हमने प्रथम चरण में बहुत अच्छा काम करके दिखाएं हैं तो द्वितीय चरण में भी अच्छा काम करेंगे कुछ दिन की बात है। यदि आप ठीक ढंग से बचाव कर लिए तो हम करोना को परास्त करने में सफल होंगे।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि बीपीएल परिवारों के राशनकार्डधारियों को जून माह का भी चावल भी निशुल्क मिलेगा। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें भी प्रति व्यक्ति के मान से 5 किलो चावल मिलेगा। जिनके पास जॉब कार्ड मनरेगा का नहीं है उसको भी हम तत्काल जॉब कार्ड बना कर देंगे ताकि उन्हें मनरेगा में काम मिल सके । यहां के उद्योग के श्रमिक बाहर गए है बाहर से श्रमिक यहां आएं है उद्योग को इन श्रमिकों को एडजस्ट करना चाहिए और उनकों अवसर देना चाहिए। हम मनरेगा के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर रहे है जिससे मजदूरों को रोजगार मुहैया हो सकेगा। हमारी कोशिश है कि सब को रोजगार दे सके। हमने लाॅकडाउन के प्रारंभ होने के साथ ही सब्जियों सहित सभी जरूरी आवश्यकताओं की सामग्रियों की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की। कालाबाजारी पर कड़ाई से निगरानी रखी जिससे लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नही करना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी। भीड़-भाड़ वाली जगह में जाने से बचे। मास्क अनिवार्य रूप से लगाए और अपने हाथों को धोते रहे। इन सुरक्षात्मक उपायों को अपनाने से ही हम सभी इस संक्रमण पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।

अजीत जोगी के ब्रेन को एक्टिव करने हर संभव कोशिश जारी, पढ़ें पूरी खबर

अजीत जोगी के ब्रेन को एक्टिव करने हर संभव कोशिश जारी, पढ़ें पूरी खबर

रायपुर | पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की हालत आज भी नाजुक बनी हुई है। उन्हें राईल्स ट्यूब से तरल आहार दिया जा रहा है, वहीं उनके ब्रेन को एक्टिव करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। 

अजीत जोगी की हालत में आज 16वें दिन भी कोई सुधार नहीं आया है। विगत 9 मार्च को अचानक तबियत खराब होने तथा सांस लेने में तखलीफ होने पर उन्हें शहर के ही एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। इसी दिन से ही वे लगातार कोमा में चल रहे हैं, गंगा ईमली खाते समय उनके श्वांस नली में गंगा ईमली का बीज फंस गया था, इसके बाद उन्हें अटैक आया और वे अचेत हो गए थे। उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने श्वांस नली में फंसे गंगा ईमली के बीज को निकाल दिया, इसके बाद इसके बाद भी श्री जोगी की चेतना वापस नहीं लौटी और वे कोमा में चले गए। इसके अलावा उनके मस्तिष्क की गतिविधियां भी लगभग समाप्त हो गई हैं। उनके मस्तिष्क को जागृत करने चिकित्सक देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त चिकित्सकों और चिकित्सकीय संस्थाओं से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। वर्तमान में उन्हें राईल्स ट्यूब के माध्यम से तरह आहार दिया जा रहा है। चिकित्सकों का दल उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। 
 
रायपुर हुआ ऑरेंज जोन : सप्ताह के पांच दिन दुकान खुली रखने की मांग, जाने क्या है पूरी खबर

रायपुर हुआ ऑरेंज जोन : सप्ताह के पांच दिन दुकान खुली रखने की मांग, जाने क्या है पूरी खबर

रायपुर |  राजधानी रायपुर के रेड जोन से बाहर होकर ऑरेंज जोन में आने के बाद अब जिला प्रशासन ने शहरवासियों को और छूट देने का मन बना लिया है। इसके तहत अब सभी तरह के व्यापारिक गतिविधियों को अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा शाम को दुकानों के बंद होने के समय में भी छूट देने की तैयारी की जा रही है। 

सूत्रों ने बताया कि अब तक शहर के बाजारों में दुकानों के खुलने और बंद होने का नियम बड़ा अटपटा बना हुआ है। शहर में जब सड़क के एक ओर की दुकानें खुलती हैं तो वहीं दूसरी ओर की दुकानें बंद रहती है। वहीं दूसरी ओर की दुकानें खुलने पर एक तरफ की दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में शहर के व्यापारी भी बेहाल हो गए हैं। इसीलिए अब जिला प्रशासन की मंशा है कि इस तरह के नियमों को अब शिथिल किया जाए और सभी तरह की दुकानों को खोला जाए। बताया जाता है कि इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। अभी शहर में शाम 5 बजे तक सभी दुकानों को बंद करा दिया जाता है, बताया जाता है कि यह समय बढ़कर शाम 7 बजे तक होगा और सभी तरह की दुकानें खुल जाएंगी। वहीं राजधानी रायपुर सहित प्रदेश भर में शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक कफ्र्यू का आदेश यथावत रखा गया है। 
इसके अलावा अभी तक जिन दुकानों को सप्ताह में केवल दो से तीन दिन खुलने की अनुमति दी गई है, उसे अब सप्ताह में 5 दिन दुकान खुली रखने का आदेश दिया जा सकता है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर सहमति देती है तो बाजार हर दिन यानी सोम से शुक्रवार तक खुले रह सकते हैं। केवल दो दिनों तक कारोबार खुलने की वजह से सभी व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन पर जबर्दस्त दबाव बनाया था। कारोबारियों का कहना है कि दो दिन दुकान खोलकर महीनेभर का खर्चा नहीं निकाला जा सकता है। इसलिए दुकानें पांच दिनों तक खुलने की अनुमति देनी चाहिए। इसके बाद ही अफसरों ने नया प्रस्ताव तैयार किया।