मुंगेली। जिले के जरहागांव थाना में धोखाधड़ी के मामले में कई महीनों से फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिले के पुलिस अधीक्षक अरविंद कुजूर के निर्देश तथा अति.पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं उप पुलिस अधीक्षक साधना सिंह के मार्गदर्शन में जरहागांव थाना प्रभारी राजकुमार साहू के नेतृत्व में टीम गठित कर फरार आरोपियों की पतासाजी में जुटी और आरोपियों के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम के द्वारा इंदौर मध्यप्रदेश में पहुंचकर आरोपियों की मदद करने वाले अभिषेक राठौर से पूछताछ करने पर आरोपियों को पकडऩे में सफलता मिली है। जिले के जरहागांव थाना क्षेत्र में 2 माह पूर्व धोखाधड़ी का दर्ज यह मामला सुलझाने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में जरहागांव पुलिस के द्वारा कार्यवाही करते हुए फरार 5 आरोपियों को इंदौर मध्यप्रदेश प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 3 युवक सहित 2 महिलाएं भी शामिल हैं।
अति.पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने बताया कि जिले के थाना जरहागांव में 6 जनवरी 2021 को प्रार्थी पीयूष तिवारी के द्वारा मामला दर्ज कराया गया था कि प्रियंका लहरे, शशि लहरे, शैलेंद्र लहरे जो जरहागांव थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम खमरिया के निवासी हैं तथा अतुल राठौर जो कि इंदौर मध्यप्रदेश का निवासी है, के द्वारा धोखाधड़ी करते हुए प्रार्थी से 3 लाख रुपये नगद एवं प्रार्थी के जानकार दुकानदार से फर्नीचर ले लिए तथा प्रार्थी के द्वारा अपने रुपयों की मांग करने पर लगातार टालमटोल कर रहे। जिसके बाद पीयूष तिवारी द्वारा आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इसी तरह उक्त आरोपियों के द्वारा ही एक अन्य व्यक्ति अभिषेक गाजलवार को वन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 1 लाख 20 हजार की राशि लेकर उसे फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उसके साथ भी धोखाधड़ी की घटना को अंजाम दिया गया था। धोखाधड़ी के शिकार अभिषेक गाजलवार द्वारा 27 फरवरी 2021 को थाना जरहागांव आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। दोनों मामलों के दर्ज होते ही सभी आरोपी फरार हो गए थे इस दौरान जरहागांव पुलिस के द्वारा आरोपियों के पतासाजी करते हुए अम्बिकापुर से आरोपियों के मदद करने वाले एक अन्य सहयोगी अनुज गुप्ता को 14 मार्च को गिरफ्तार किया जो कि अभी न्यायिक हिरासत में मुंगेली उप जेल में बंद है।पुलिस ने बताया कि आरोपियों गिरफ्तार करने के बाद जरहागांव पुलिस के द्वारा आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया जहाँ से सभी आरोपियों को जेल दाखिल कर दिया गया है। आरोपियों के द्वारा प्रदेश के रायपुर तथा दुर्ग जिले में भी धोखाधड़ी के अन्य मामलों में संलिप्तता रही है जिसके बारे में भी जानकारी ली जा रही है।
पुलिस ने बताया कि बेरोजगारों को ठगने गिरोह चलाने वाली प्रियंका लहरे के खिलाफ प्रदेश के कई थानों में मामले दर्ज हैं। रोजगार की चाह रखने वाले पढ़े लिखे नौजवानों को शिकार बनाते हुए प्रियंका लहरे द्वारा उन्हें सरकारी नौकरी लगवाने के झांसा दिया जाता था तथा उन लोगों से मोटी रकम वसूल कर फर्जी नियुक्त पत्र दे दिया जाता था। प्रियंका के इस कृत्य में उसके पति,भाई एवँ माँ भी साथ देती थी जिनके द्वारा ऐसे ही कई कारनामे प्रदेश के कई जिलों पर किये हैं। जिसमें ठगी के शिकार हुए लोगों ने उनके खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं। कई थानों में इनके खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर पैसा लेने एवं ब्लैकमेलिंग के मामले दर्ज होते चले गए, यही नहीं कुछ शिकायतें ऐसी है जिस पर जांच जारी है और भविष्य में मामले दर्ज हो सकते है।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इन आरोपियों के खिलाफ मौदहापारा, रायपुर में धारा 384,120बी,201,389,67 आईटी एक्ट के तहत, थाना कुम्हारी में 420,34 के तहत, थाना भिलाई 3 में धारा 384,354,67 आईटी एक्ट के तहत, थाना जरहागांव में 420,120बी 212 आईपीसी के तहत, थाना जरहागांव में 420,468,120 बी आईपीसी के तहत जुर्म दर्ज है।
छत्तीसगढ़ पर महामारी का साया : गांवों तक पहुंचा 'लापरवाही’ का कोरोना, रायपुर और दुर्ग में हालात खराब
दुर्ग/रायपुर, छत्तीसगढ़ में कोरोनावायरस संक्रमण के हालात दिनों दिन बिगड़ते ही जा रहे हैं।पिछले 24 घंटे में राज्य में 15000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। यदि एक दिन में संक्रमण आंकड़ों की बात करें तो छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के बाद तीसरे स्थान पर है, जबकि मौत के मामले में यह राज्य महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां पिछले 24 घंटों में 156 लोगों की मौतें हुई हैं और राज्य के 18 जिले लॉकडाउन की स्थिति से गुजर रहे हैं।
राज्य में अब तक करीब 4 लाख 72 हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि पिछले 24 घंटे में 15 हजार 121 लोग संक्रमित हो चुके हैं। जनसंख्या के अनुपात में देखें तो यह आंकड़ा काफी बड़ा है।इस बीच, खबर है कि छत्तीसगढ़ कोरोना सेल के मीडिया प्रभारी डॉ. सुभाष पांडे की बुधवार को कोरोना से मौत हो गई है।दूसरी बार पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें रायपुर एम्स में भर्ती करवाया गया था।
राज्य में राजधानी रायपुर और दुर्ग में कोरोना की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।रायपुर में पिछले 24 घंटे में 4 हजार 168 नए मरीज मिले हैं और 53 लोगों की मौत हुई है।दूसरी ओर दुर्ग में दुर्ग में 1 हजार 755 नए मरीज मिले हैं और 12 लोगों की मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि हाल ही में दुर्ग और रायपुर के वीडियो वायरल हुए हैं,जिनमें बड़ी संख्या में शव दिखाई दे रहे हैं। श्मशान घाटों में भी दिल दहलाने वाले दृश्य नजर आ रहे हैं।अब गांव-गांव तक कोरोना पहुंच गया है और मौत की खबरें भी सामने आ रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भयावह कोरोना के बीच हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर्स ने काम पर लौटने की घोषणा कर दी है। जूनियर डॉक्टर्स जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके साथ ही यदि दिए गए समय सीमा में मांगे पूरी नहीं होंगी तब, 1 मई से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
जूनियर डॉक्टर एसोशिएशन के अध्यक्ष डॉ. इंद्रेश यादव ने बताया, स्वास्थ्य मंत्री काफी मांगे तुरंत सॉल्व करने का आश्वाशन दिया है साथ ही कुछ मांगो को एक निर्धारित समय सीमा की मांग की है। मंत्री ने सभी मांगों को ध्यान से सुना है।
डॉ. यादव ने बताया कोविड वार्ड में पाई जाने वाले अव्यवस्था और डॉक्टर्स को होने वाली परेशानी को तुरंत सॉल्व किया जाएगा। एमबीबीएस और पीजी के बाद सिर्फ 2 साल का ही ग्रामीण बॉण्ड करना होगा, जो कि पहले 2 प्लस 2 साल का बॉण्ड था। फाइनल ईयर के एग्जाम को पहले से तय टाइम में लिया जाएगा। इंसेंटिव और स्टायफण्ड को दूसरे स्टेट को मिलने वाले स्टेट को फॉलो करते हुए दिया जाएगा। कोविड ड्यूटी के बाद मिलने वाला क्वारंटाइन पीरियड दिया जाएगा। कोविड एरिया और डॉक्टर्स ड्यूटी रूम्स में प्रॉपर एयर कंडीशन्स दिये जायेंगे। 2 दिन के अंदर डोंनिंग और डॉफिंग एरिया को प्रॉपर आईसीएमआर गाइडलाइन के अनुसार किया जाएगा।
डॉ. यादव ने कहा कि आश्वाशन का समय सीमा में पालन नहीं किया जाता तो 1 मई से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर लौट जाएंगे।
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिस कदर कोरोना संंक्रमण विकराल हो रहा है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तो है ही, वहीं टोसीलिजुमेब इंजेक्शन की भी मांग लगातार बढ़ रही है। प्रदेश की राजधानी के थोक दवा बाजार में इंजेक्शन की खेप पहुंच ही नहीं रही है। वहीं इस इंजेक्शन की कमीं से प्रदेश में कोरोना के गंभीर मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
सूत्रों का कहना है कि इंजेक्शन की वाइल 24 घंटे के भीतर गंतव्य तक पहुंचानी होती है। इसे कंपनी के डीपो से लेकर मरीज के शरीर में प्रवेश करने तक कोल्ड चैन मेन्टेन करना पड़ता है। यदि यह इंजेक्शन कंपनी के डीपो से निकलकर 24 घंटे के भीतर मरीज के शरीर में नहीं पहुंची तो डिस्पोज हो जाती है यानि कोल्ड चैन मेन्टेन नहीं हो पाने पर यह खराब हो जाती है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि इस इंजेक्शन की एक वाइल 45 हजार से लेकर 50 हजार रुपए में बाजार में उपलब्ध होती है।
बताया तो यह भी जा रहा है कि इस इंजेक्शन का निर्माण पूरे देश में एक ही फार्मासूटिकल कंपनी करती है, जिसका नाम सिपला है। बता दें कि प्रदेश में कम पडऩे वाली रेमडेसिविर इंजेक्शन का निर्माण भी सिपला ही करती है। रेमडेसिविर की कमीं को देखते हुए प्रदेश के दो अफसर राज्य सरकार ने मुम्बई और हैदराबाद में तैनात कर दिए हैं, लेकिन इस इंजेक्शन के लिए सरकार की तरफ से हाल में कोई खास इंतजाम देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं प्रदेश के बड़े से बड़े अस्पताल में इस इंजेक्शन की अनुपलब्धता के चलते कई मरीजों की जान तक जा चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में यह इंजेक्शन दो अस्पतालों के पास है, लेकिन ये जरूरतमंदों को उपलब्ध क्यों नहीं करवा रहे हैं, यह समझ से परे है। वहीं इस इंजेक्शन की निगरानी और कालाबाजार रोकने सरकार की कोई खास भूमिका भी अब तक नजर नहीं आ रही है।
राज्य में कोरोना संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के संबंध में विचार विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक का आयोजन 15 अप्रैल को दोपहर 12 बजे किया जायेगा। इसके पश्चात दोपहर 1 बजे से सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित किया जाएगा।
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में मुख्यमंत्री निवास में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल रूप से आयोजित होने वाली बैठकों में सभी राजनीतिक दलों और समाज प्रमुखों को राज्य शासन द्वारा अभी तक कोरोना संक्रमण के नियंत्रण एवं उपचार हेतु उठाए गए कदमों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही कोरोना संक्रमण के नियंत्रण एवं बचाव के तरीकों पर उनके सुझाव लिए जायेंगे ।
सुकमा । कलेक्टर नंदनवार ने जिला स्तर पर स्थापित कोविड कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभारी अधिकारियों को कोविड संबंधी कार्यों में कोई भी लापरवाही नहीं करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कंट्रोल रूम प्रभारी आशीष राम को होम आइसोलेशन संबधी कार्य में कोताही बरतने पर फटकार लगाई। इसके साथ ही कंट्रोल रूम में कार्यरत 4 डाटा एंट्री ऑपरेटर को कार्य में कोताही बरतने पर शो कॉस नोटिस जारी किए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर नंदनवार के निर्देश पर एसडीएम सुकमा और कोविड जिला नोडल अधिकारी नभ एल स्माइल द्वारा कमलेश बघेल, ओम प्रकाश, पोज्जा और विनोद कुमार को कार्य में लापरवाही बरतने के परिणामस्वरूप शो कॉस नोटिस जारी किया गया है। सुकमा जिले वासियों को कोविड-19 संबंधी सहायता प्राप्त करने और सूचना देने में किसी भी परेशानी का सामना ना करने पड़े इस उद्देश्य से जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से जिले में कोविड-19 संबंधी कार्यों की निगरानी और आमजन की सहायता के लिए प्रभारियों सहित कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। कंट्रोल रूम के दूरभाष क्रमांक 07864-284262 पर संपर्क कर कोई भी व्यक्ति कोरोना संबंधी या होम आइसोलेशन से संबंधित सहायता प्राप्त कर सकते हैं, या सूचना दे सकते है।
रायपुर, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने प्रदेश में कोरोना विस्फोट के लिए प्रदेश सरकार को दोषी बताकर कहा है कि सरकार कोरोना मरीजों के लिए तत्काल 20 हज़ार बेड की व्यवस्था करे और इसके लिए व प्रदेश के खाली पड़े सरकारी-निजी महाविद्यालयों और विद्यालयों को कोविड सेंटर्स बनाकर लोगों को तत्काल राहत पहुँचाए। सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश सरकार अगर ईमानदारी से कोरोना संक्रमण के ख़िलाफ़ ज़ंग लड़ती तो हालात इतने भयावह नहीं होते। इस प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ को कोरोना विस्फोट के उस मुहाने पर ला पटका है जहाँ एक लाख से पार कोरोना के एक्टिव केस दहशत और हज़ारों अकाल-अनचाही मौतों का डरावना मंजऱ देखने के लिए लोग विवश हो रहे हैं।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश सरकार ज़ुबानी जमाख़र्च करने के बजाय अपने कोरोना प्लेयर्स मंत्रियों को जि़लों का प्रभार सौंपकर सरकार कोरोना संक्रमण की रोकथाम की मॉनीटरिंग के लिए मैदान में उतारे और कोरोना की रोकथाम के लिए संज़ीदा होकर काम करे। छत्तीसगढ़ के हालात तो इतने भयावह हो चले हैं कि यह राज्य कोरोना संक्रमण के मामले में देश की टॉप लिस्ट में शुमार हो ही चुका है, अब अकेले राजधानी व रायपुर जि़ले के आँकड़ों ने इस महामारी के मामले में ब्रिटेन, यूएई, इजऱाइल, दक्षिण अफ्रीका को भी पीछे छोड़ दिया है। सिंहदेव ने कहा कि कोरोना संक्रमण को लेकर शुरू से ही लापरवाह रही प्रदेश सरकार ने अपने सत्ता-मद के चलते कोरोना की रोकथाम के पुख़्ता इंतज़ामात करने के बजाय केवल केंद्र सरकार पर अपनी अपनी विफलताओं का ठीकरा फोडऩे में वक़्त जाया किया। एक दिन में हज़ारों नए मामलों का सामने आना प्रदेश सरकार के निकम्मेपन का जीता-जागता प्रमाण है। सिंहदेव ने कहा कि सालभर के समय में भी प्रदेश सरकार ने कोरोना को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई और प्रदेश आज भी कोरोना से ज़ंग के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। प्रदेश में कोरोना की जाँच का काम धीमी गति से होने, कोविड अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, रेमिडेसिविर इंजेक्शन और ज़रूरी जीवनरक्षक दवाओं की कमी, कालाबाज़ारी और मुनाफ़ाखोरी पर भी सरकार कोई कारगऱ पहल नहीं कर रही है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना से निपटने के मामले में कितनी लापरवाह है, यह ऐन कोरोना संकट के बीच में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से ज़ाहिर हो रहा है। प्रदेश सरकार अपनी वाहवाही कराने में चाहे जितनी मशगूल रहे, ज़मीनी सच्चाई यह है कि कोरोना वॉरियर्स के लिए राज्य सरकार स्तरीय पीपीई किट, मास्क से लेकर ज़रूरी संसाधन तक सुलभ नहीं करा पा रही है। सिंहदेव ने कहा कि एक तरफ प्रदेश सरकार की बदनीयती और कुनीतियों के चलते अब प्रदेश में आपातकालीन चिकित्सा सेवा और कोविड ड्यूटी से डॉक्टर्स मना करने जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ आज भी प्रदेश के अमूमन सभी कोविड सेंटर्स में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के चलते मरीजों की तड़प-तड़पकर मौत हो रही है। रेमिडेसिविर इंजेक्शन और दीगऱ जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति का सरकार का दावा भी ज़मीनी सच्चाई से अब भी कोसों दूर है। सिंहदेव ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मद्देनजऱ प्रदेश सरकार की विफलता का आलम यह है कि वह कोरोना मृतकों के दाह संस्कार तक का इंतज़ाम नहीं कर पा रही है।
दुर्ग । प्यारे श्री राधा कृष्ण संस्कार मंच ने जामुल में संचालित कोविड केयर सेंटर में लोकतंत्र के चौथे आधार स्तम्भ के लिए पांच बिस्तर आरक्षित होगा। जहाँ पत्रकार और उनके परिवार का बेहतर इलाज और देखरेख की सुविध मुहैया कराई जाएगी।
संस्था के संयोजक ईश्वर उपाध्याय ने इस संबंध में कहा कि पत्रकार देश की रक्षा में खड़े सैनिको के जैसे ही महत्वपूर्ण है। अपने और परायों के बीच घिरे रहने वाले पत्रकारों को तो निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। देश की भीतरी सुरक्षा में सुधार को लेकर पत्रकार की भूमिका किसी सैनिक से कम नहीं होती है। बाढ़, भूकंप, आतंकवाद, नक्सलवाद, हिंसा या कोरोना के कहर बरपाने वाले संक्रमण का भयानक खतरा हो ऐसे खतरनाक, अशांत क्षेत्रो में भी सर पर कफन बांधकर पत्रकारिता करना साहस भरा काम है।
इस भीषण कोरोना काल में सब अपने प्राणों की रक्षा के लिए घरों में हैं ऐसे समय में भी अपनी जान को जोखिम में डाल कर पत्रकार अपने कर्तव्य को निभाते हुए दिन और रात जुटे हुए है। कोरोना संक्रमितो से भरे अस्पताल हो या कोरोना संक्रमित शवों का दाह संस्कार हर स्थान में पहुंच कर वहाँ की कमी को आम जनता तक पहुंचा रहे है।
ऐसे जाबांज पत्रकारों में से कुछ को इस कोरोना के कहर से हमने खो दिया व कुछ पत्रकार व उनके परिवार के सदस्य अभी भी संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों को सच्चा सम्मान देने संस्था प्यारे राधा कृष्ण संस्कार ने पत्रकारों और उनके परिवार के लिए कोविड केयर सेंटर में 5 बिस्तर आरक्षित करने का निर्णय लिया है ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सकें।
जगदलपुर । बस्तर नोनी एप्प के माध्यम से होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की निगरानी की जा रही है। आज जिला कार्यालय में इस एप्प के उपयोेग के संबंध में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण देते हुए इसके व्यापक प्रचार प्रसार के निर्देश कलेक्टर रजत बंसल ने दिए।
कलेक्टर ने कहा कि कोरोना की यह लहर पिछली लहर से काफी अधिक खतरनाक है, जिसके कारण अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। मरीजों को त्वरित उपचार के लिए उन्होंने बेहतर तैयारी के निर्देश भी दिए। उन्होंने होम आईसोलेशन में रहने वाले मरीज को इस एप्प के माध्यम से पंजीयन के बाद उसके सेहत की निगरानी के साथ ही इसकी प्रतिदिन जानकारी एकत्रित की जा रही है। किसी मरीज की सेहत बिगड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि होम आईसोलेशन में रहने वाले मरीजों को चिकित्सीय परामर्श भी नियमित तौर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंद्रजीत चंद्रवाल ने जिला स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष की तरह ही विकासखण्ड स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाए। कोरोना मरीजों को पाए जाने पर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। वापसी कर रहे मजदूरों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ही उन्हें क्वारंटीन करने की व्यवस्था के संबंध में भी निर्देशित किया। 15 अप्रैल की शाम 6 बजे से जिले में लाॅक डाउन के कारण आवश्यक सामग्री की खरीदी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी के निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति के संबंध में चर्चा, सभी हास्पीटल, रेल्वे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट में यात्रीयों और मरीजो को परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के संबंध चर्चा की गई। ई-पास जारी करने, ग्रामीण स्तर पर अपरिहार्य स्थिति में पास जारी करने के संबंध में चर्चा भी की गई। कान्टेक्ट ट्रेसिंग और एक्टिव सर्विलांन्स कराए जाने की कार्ययोजना, क्वांरटाइन केन्द्रों को संचालन की स्थिति, बकावण्ड, करपावण्ड
भिलाई । मानवता की भलाई के लिए देहदान करने वाले अनेक देहदानयों मरणोपरांत उनकी इच्छा कोरोना संक्रमण के कारण अधूरी रह जा रही है । सामाजिक संस्था प्रनाम के अध्यक्षत पवन केसवानी के माध्यम से जून, 2009 में ईडब्ल्यूएस 1236, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी गुरव दंपति ने एक साथ देहदान किया था । उनमें से वसुदेव गुरव का निधन फरवरी में होने के पश्चात उनकी पार्थिव काया शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर को समर्पित की गई थी । किंतु उनकी पत्नी वसुधा गुरव कब 13 अप्रैल को निधन होने पर कोरोना प्रोटोकॉल लागू होने के कारण उनका देहदान नहीं हो सका । इसी तरह जुलाई 2020 में एचएसएल कॉलोनी, स्टेशन मरोदा निवासी, देहदानी डेहरा राम साहू के 14 अप्रैल को निधन के पश्चात उनका भी देहदान कोरोना संक्रमण के कारण संभव नहीं हो सका। उन्होंने जुलाई 2020 को प्रनाम के पवन केसवानी के माध्यम से देहदान की वसीयत राजीव लोचन आयुर्वेदिक कॉलेज के नाम जारी की थी ।
देहदान जैसी अभिनव मानव सेवा करने वाली संस्था प्रनाम के संस्थापक अध्यक्ष पवन केसवानी ने बताया कि 2020 में भी कोरोना संक्रमण के कारण 11 देहदानियों की पार्थिव काया मानवता को समर्पित नहीं की जा सकी थी । ज्ञात हो कि, प्रनाम की पहल से अभी तक 1000 से ज्यादा लोगों ने देहदान का पुनित संकल्प लिया है । प्रनाम का हेल्पलाइन नंबर - 94792 63500 है।
बिलासपुर । कोविड-19 के तहत् होम आईसोलेशन के मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग से सावधानियां बरतने के लिए कही गयी हैं। होम आईसोलेशन में स्वयं की निगरानी के लिए पल्स ऑक्सीमीटर अनिवार्य रूप से रखें। ऑक्सीजन सैचुरेशन की जांच करें। सामान्य स्थिति में 94 या उससे अधिक होना चाहिए। अपने हृदय गति की जांच करें। सामान्य 60-100 प्रतिमिनट होना चाहिए। थर्मामीटर से शरीर की तापमान की जांच करें। 6 मिनट वाॅक टेस्ट तीन बार प्रतिदिन करें। चलने के पूर्व ऑक्सीजन सैचुरेशन पल्स आक्सीमीटर में देखकर नोट करें। घड़ी से 6 मिनट देखकर सामान्य गति से लगातार 6 मिनट चले। सामान्य गति से चलने के पश्चात् पल्स आक्सीमीटर से आक्सीजन सैचुरेशन से पुनः जांच करें। यदि आक्सीजन सैचुरेशन 94 प्रतिशत या उससे ज्यादा है तो यह सामान्य स्थिति है, लेकिन यदि आक्सीजन सैचुरेशन 94 प्रतिशत से कम है या चलने के पूर्व आक्सीजन जो पल्स आक्सीमीटर से जांच कर नोट किया था, वह तीन प्रतिशत से नीचे जाता है, तो तत्काल होम आईसोलेशन के हेल्प लाईन नंबर पर सूचित करने कहा गया है।
इसके अतिरिक्त होम आईसोलेशन में दिन में दो बार खाली पेट काढ़े का सेवन करने, भाप स्टीम लेने और कुनकुने पानी में नमक डालकर दिन में दो बार गरारे करने कहा गया है।
होम आईसोलेशन के लिए नागरिक हेल्प लाईन नंबर 74770-52129 पर संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
धमतरी । रामकृष्ण केयर हास्पिटल रायपुर के चेस्ट फिजिशियन गिरीश अग्रवाल ने कोविड- 19 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की है। जिसमें उन्होंने कोरोना के लक्षण, पूर्व के कोरोना से अभी के कोरोना में अंतर जांच, कब और क्या करानी चाहिए, आदि के संबंध में बताया है।
उन्होंने बताया कि यह वायरस पिछले वायरस से अलग है। इस बार मरीज को तेज बुखार आ रहा है जो दस से 12 दिनों तक रहता है। शरीर पूरा कमजोर हो जाता है। पसीना आने लगता है। इसके साथ दस्त के भी लक्षण देखे जा सकते हंै। सिर दर्द, आंखों में दर्द ये नए लक्षण है। पिछले साल के वायरस में बच्चे ज्यादा प्रभावित नहीं होते थे लेकिन इस बार बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
00 टेस्ट करवाने में जल्दबाजी न करें:-
खतरनाक बात यह है कि संक्रमण बच्चों से बड़ों में और बड़ों से बच्चों में फैल रहा है। लोगों में यह देखा गया है कि, यदि कोई कोरोना संक्रमित मरीज के करीब आये तो लोग तुरंत अपना आरटीपीसीआर करवा लेते हैं। वहां पर टेस्ट निगेटिव आया तो लोग निश्चिंत हो जाता है। जबकि यहां पर लोगों को इंतजार करना चाहिए। संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बाद संक्रमण होने में कम से कम 5 से 7 दिन लगता है। लक्षण आने के बाद तुरंत सिटी स्केन कराने पहुंचते हैं। यहां भी रिपोर्ट में कुछ भी नहीं आएगा। फिर लोग दिग्भ्रमित होना शुरू हो जाते हैं। इसलिए संक्रमित के संपर्क में आने के बाद पूरी तरह लक्षण आने के तक इंतजार करें।
00 कोई भी एलोपैथी दवा कोरोना से बचाव के लिए नहीं है:-
कोई भी दवा संक्रमण के बचाव के लिए नहीं तैयार हुआ है। चाहे वह डाक्सीसाइक्लिन, आईवरमेक्टिन, एजिथ्रोमाईसिन हो, चाहे फ्लेवीप्योर हो। पॉजिटिव आने के बाद तुरंत लोग ब्लड टेस्ट और अन्य टेस्ट कराते हैं। जबकि इन सब चीजों की जरूरत नहीं होती है। बुखार 10 से 12 दिन तक रहेगा ही। लोग बुखार कम नहीं हो रहा है यह सोचकर टेस्ट की ओर भोगते हैं। सिटी स्केन कराने पर निमोनिया दिखाएगा ही। अलग अलग स्कोर बताया जाता है। यह भर्ती होने के लिए मापदंड नहीं है।
00 मरीजों को इस समय भर्ती होना चाहिए:-
मरीज को तभी भर्ती होना चाहिए जब ऑक्सीजन का लेवल 90 से नीचे चला जाए। जो गंभीर बीमारी से पीडिघ्त है, गर्भवती, 60 वर्ष से अधिक लोगों के लिए आक्सीजन बेस लाईन 94 माना गया है। इससे नीचे जाने पर ही भर्ती हो। सिटी स्केन में कितना स्कोर आ रहा है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इलाज मरीज का होता रिपोर्ट का नहीं।
00 रेमडीसिविर इंजेक्शन लगाने में हड़बड़ी न करें:-
मरीज जब भर्ती होता है तो उसके दिमाग में यह होता है कि रेमडीसिविर इंजेक्शन लगाया जाएगा और वह ठीक हो जाएगा। इसमें सच्चाई नहीं है। यदि यह सही होता तो कोरोना संक्रमण होते ही उसे भर्ती कर पहले दिन से ही 5 दिन तक इस इंजेक्शन को लगाकर उसे ठीक कर दिया जाता। लेकिन ऐसा नहीं है। इस इंजेक्शन के लगने के बावजूद व्यक्ति को खतरा हो सकता है। डल्ब्यूएचओ ने बताया कि रेमडीसिविर इंजेक्शन तभी लगायें जब आक्सीजन लेवल कम होने लगे। मरीजों से निवेदन है कि वे डाक्टर के ऊपर दवाब न डाले कि उसे रेमडीसिविर इंजेक्शन लगाए।
00 पहले हफ्ते में स्टेराईड लेना खतरनाक:-
बहुत सारे मरीज ऐसे आ रहे हैं जो स्टेराईड जैसे वाइसोलोन, डेक्सोना जैसी दवाई सुनकर खा लेते हैं। आपको पहले हफ्ते में स्टेराईड नहीं लेना है। यदि आप पहले हफ्ते में स्टेराईड खाते हैं तो वह वायरस के प्रसार के लिए सुविधाजनक हो जाता है और वायरस तेजी से बढने लग जाता है। पहले हफ्ते में स्टेराईड का कोई रोल नहीं है। ऐसे मरीज जिनका इलाज घर पर चल रहा है वो खून पतला करने वाली दवाई न खाएं। जो व्यक्ति पहले से ही स्टेराईड या खून पतला करने की दवाई खा रहे हैं वह नियमित लेते रहें।
वैक्सीन के दोनो डोज लेने के बाद भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। कई लोगों का दोनो डोज के बाद भी पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं बनता है। वेक्सीन जरूर लगवाये, दो गज की दूरी बनाये रखें, मास्क जरूर लगाएं। कोविड के मरीज न डरे, हिम्मत से काम लें। मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर न हो। कोविड के पहले डरें, कोविड होने के बाद न घबराए। अपने आप को डाॅक्टर को समर्पित कर दें।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच दिल दहला देने वाली तस्वीरें इन दिनों राज्य के अस्पतालों से वायरल हो रही है। इन सब के बाद प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा के जूनियर डॉक्टर पिछले दो दिन से हड़ताल पर हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मेकाहारा में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। यहां की मर्चूरी की हालत किसी से छुपी नहीं है, लेकिल मर्चूरी से भी ज्यादा दयनीय स्थिति में डॉक्टरों द्वारा मरीजों का उपचार के बाद फेंका गया पीपीई किट जानलेवा साबित हो सकता है।
इस्तेमाल किए गए पीपीई किट के समय पर डिस्पोज नहीं होने से मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों पर संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसके सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर मेडिकल कॉलेज पीजी डॉक्टर एशोसिएशन इन दिनों हड़ताल पर है। मेडिकल कॉलेज पीजी डॉक्टर एशोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. इंद्रेश यादव ने बताया कि अस्पताल में उपचार कर रहे डॉक्टर्स को घटिया गुणवत्ता के मास्क और पीपीई किट दी जा रही है, जिससे उपचार के दौरान ही जूनियर डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार करने के बाद क्वारंटीन अवधि में जो जूनियर डॉक्टर आइसोलेशन में रहते हैं, इस अवधि पर प्रबंधन अवैतनिक अवकाश दे रहा है।
डॉ. इंद्रेश यादव ने बताया कि अब तक 9 सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। हालांकि एसोशिएशन की बैठक गुरूवार को डीन के होना प्रस्तावित है। बैठक के बाद ही हड़ताल की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन अब तक एशोसिएशन की तरफ से बगैर मांगों के पूरा हुए हड़ताल समाप्ति पर कोई विचार नहीं किया गया है।
एशोसिएशन मरीजों का पूरा ध्यान रख रहा है, इसलिए आपात कालीन परिस्थिति में आने वाले मरीजों के लिए जूनियर डॉक्टर्स अपने ड्यूटी अनुसार उपचार के लिए उपस्थित हैं, लेकिन ओपीडी व ओटी के डॉक्टर हउ़ताल पर हैं।
उल्लेखनीय है कि मेकाहारा के मर्चूरी की तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, लेकिन इससे भी बुरा होले मेकाहारा में इस्तेमाल किए पीपीई किट के इक_ा होने से हो गया है। पीपीई किट के डिस्पोज नहीं होने से संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।














