नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों के टेंडर को 21 जनवरी 2021 को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत ट्रेन की डिजाइन, विकास, निर्माण, आपूर्ति, एकीकरण, परीक्षण और आईजीबीटी आधारित 3-चरण प्रणोदन, नियंत्रण और 16 कारों के लिए प्रत्येक में 44 रेक का निर्माण किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत टेंडर पाने वाली कंपनी के साथ 5 साल तक सालाना मेंटनेंस (रखरखाव) का भी अनुबंध होगा। स्वदेशी रूप से ट्रेन सेट के निर्माण के लिए विभिन्न स्तरों पर उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद विभिन्न शर्तें तैयार की गई। पहली बार, टेंडर में कुल मूल्य के 75 फीसदी के बराबर जरूरत स्थानीय स्तर से पूरी की जाएंगी। इस पहल से "आत्मनिर्भर भारत" मिशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस टेंडर में, 3 कंपनियों ने निविदाएं डाली थी। उसमें से सबसे कम बोली स्वदेशी कंपनी मेसर्स मेधा सर्वो ड्राइव्स लिमिटेड की थी, जिसने कुल मूल्य के 75 फीसदी के बराबर राशि के लिए स्थानीय सामग्री की आपूर्ति की शर्त को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस आधार पर मेधा सर्वो ड्राइव्स लिमिटेड को टेंडर दिया गया। टेंडर की कुल लागत 22116459644 (दो हजार दो सौ ग्यारह करोड़, चौसठ लाख, उनसठ हजार और छह सौ चौवालीस रुपए) रुपये है। इसके तहत 16 कारों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक कार में 44 रैके होंगी। इनका निर्माण भारतीय रेलवे की तीन उत्पादन इकाइयों में किया जाएगा। इसके तहत आईसीएफ में 24 रैक, आरसीएफ में 10 रैक और एमसीएफ में 10 रैक बनाए जाएंगे। इन रेक की आपूर्ति निम्नलिखित समयसारिणी के अनुसार होंगी। पहले 2 प्रोटोटाइप रैक 20 महीने में वितरित किए जाएंगे, उसके बाद उनके सफल कमीशन होने पर, प्रत्येक तिमाही में औसतन 6 रैक वितरित करना होगा।
असम । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि, आत्मनिर्भर भारत के संबंध में सबसे बड़ा परिवर्तन सहज प्रवृत्ति, क्रियाशीलता तथा प्रतिक्रिया के दायरे में समाहित है और यह आज के युवाओं की मनोदशा के अनुरूप है। वह आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तेजपुर विश्वविद्यालय असम के 18वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की अवधारणा पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि, यह आंदोलन संसाधनों, भौतिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक तथा रणनीतिक बदलावों के बारे में है और सबसे बड़ा परिवर्तन सहज प्रवृत्ति, क्रियाशीलता तथा प्रतिक्रिया के दायरे में समाहित है और यह आज के युवाओं की मनोदशा के अनुरूप है। प्रधानमंत्री ने कहा कि, आज के युवा भारत में चुनौतियों का सामने करने की एक विशिष्ट शैली है। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए ऑस्ट्रेलिया में युवा भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया प्रदर्शन का उदहारण दिया। श्री मोदी ने कहा कि, भारतीय क्रिकेट टीम को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें एक मैच में हार का सामना करना पड़ा, इसके बावजूद भी वे उतनी ही तेजी से उबर गए और अगला मैच जीत लिया। चोटों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने दृढ़ संकल्प दिखाया। उन्होंने चुनौती का सामना किया और कठिन परिस्थितियों से निराश होने के बजाय नए समाधानों की तलाश की। हालांकि खिलाड़ी अनुभवहीन थे लेकिन उनका मनोबल बेहद ऊंचा था और खिलाडियों ने उन्हें मिले अवसरों का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मिज़ाज के साथ मिलकर एक बेहतर टीम की तरह प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि, केवल खेल के क्षेत्र के दृष्टिकोण से ही हमारे खिलाड़ियों का यह शानदार प्रदर्शन महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि ये कई अन्य मायनों में भी महत्वपूर्ण है। श्री मोदी ने प्रदर्शन से महत्वपूर्ण सबक जीवन में उतारने का ज़िक्र किया। सबसे पहले, हमें अपनी क्षमता पर आत्मविश्वास और भरोसा होना चाहिए; दूसरा, सकारात्मक मानसिकता से ही सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है। तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण सबक के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, यदि कोई दो विकल्पों का सामना कर रहा है, एक सुरक्षित और दूसरा मुश्किल जीत का विकल्प है, तो निश्चित रूप से जीत का विकल्प ही तलाशना चाहिए। सामयिक विफलता में कोई नुकसान नहीं है और किसी को भी जोखिम लेने के डर से बचना चाहिए। हमें सक्रिय और निडर होने की जरूरत है। यदि हम असफलता और अनावश्यक दबाव के भय को दूर करते हैं, तो हम निडर होकर उभरेंगे। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि, आत्मविश्वास से लबरेज तथा लक्ष्यों के प्रति समर्पित यह नया भारत केवल क्रिकेट के क्षेत्र में सीमित नहीं है, आप सभी इस तस्वीर का हिस्सा हैं।
नई दिल्ली । फिल्म प्रभाग नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125वीं जयंती समारोह पर उनके जीवन पर बनी दो फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ 23 जनवरी, 2021 को पराक्रम दिवस का आयोजन कर रहा है। भारत सरकार ने नेताजी के राष्ट्र के प्रति अदम्य साहस और निःस्वार्थ सेवा को सम्मान देने के लिए उनके 23 जनवरी को उनके जन्म दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस अवसर महान नेता के जीवन और अंग्रेजों के शासन से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए उनके वीरतापूर्ण व अथक संघर्ष पर बनी फिल्में द फ्लेम बर्न्स ब्राइट (43 मिनट/ अंग्रेजी/ 1973/ आशीष मुखर्जी) और नेताजी (21 मिनट/ हिंदी/ 1973/ अरुण चौधरी) दिखाई जा रही हैं। दोनों ही वृत्तचित्र 23 जनवरी, 2021 को फिल्म प्रभाग की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर दिन भर दिखाए जाएंगे। फिल्मों का लुत्फ उठाने के लिए कृपया https://filmsdivision.org/पर जाएं और @ “Documentary of the Week” पर क्लिक करें या https://www.youtube.com/user/FilmsDivisionपर फॉलो करें।
नई दिल्ली | विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उत्कृष्टता को अब नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के साथ जोड़कर उसकी प्रतिभा के रूप में देखा जा रहा है। देश पहले से ही वैज्ञानिक शोध-पत्रों के प्रकाशन के मामले में पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। यह अब वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में भी शीर्ष 50 नवाचार आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है और इस तरह से कई विकसित और विकासशील देशों से आगे निकल चुका है। वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार का संयोजन वैज्ञानिक गतिविधियों, अवसंरचना तथा मानव ससांधन कार्यबल के विकास में निवेश बढ़ाने के साथ ही स्टार्ट अप इंडिया मुहिम के माध्यम से पूरी नवाचार श्रृंखला को प्रोत्साहित करने से संभव हो सका है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने इन उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए ‘कहा ज्ञान सृजित करने वाले उत्कृष्ट वातावरण और ऐसे ज्ञान की खपत वाले नवाचार युक्त वातावरण को एक साथ लाने के हमारे प्रयासों से ही यह बदलाव सभंव हो सका है। पांचवी राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी तथा नवाचार नीति हमारे इन प्रयासों को और आगे ले जाने में मददगार बनेगी’’ । देश में 2017-18 के दौरान कुल 1,13,825.03 करोड़ रूपए का निवेश किया गया जो 2018-19 में बढ़कर 1,23,847.71 करोड़ रूपए पर पहुंच गया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से शुरु की गई ‘निधी’ जैसी पहल ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निधी येाजना के कार्यान्वय से देशभर में 3681 स्टार्टअप्स को उनके शुरुआती चरण में विज्ञान और प्रौदयोगिकी विभाग की ओर से स्थापित 150 इनक्यूबेटरों के नेटवर्क के माध्यम से मदद दी गई। इनके जरिए 1992 बौद्धिक प संपदाओं का सृजन किया गया। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों के दौरान इनके माध्यम से 65,864 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित किए गए और 27,262 करोड़ रूपए कीआर्थिक संपदा बनाई गई। नए विचारों को प्रयोग में लाई जा सकने वाली प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने और फिर पूरे देश में बड़े पैमाने पर उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने का चलन शुरु हो चुका है। वर्ष 2017- 18 में जिन 13,045 पेटेंट को मंजूरी दी गई उनमें से 1937 पेटेंट भारतीय नागरिकों के थे। भारत के पेटेंट कार्यालय में 2017-18 के दौरान कुल 15550 पेटेंटों के लिए आवेदन किया गया जिनमें से 65 प्रतिशत महाराष्ट्र,कर्नाटक,तमिलनाडु और दिल्ली से थे। भारत सरकार के स्टार्ट-अप मिशन ने इन पेटेंटों के जरिए लाए गए नवाचार को स्टार्ट-अप के रूप में मूर्त रूप देने का काम किया है। आज भारत सबसे ज्यादा स्टार्टअप्स वाले देशों में से एक बन चुका है। एक ओर जहां स्टार्टअप इंडिया अभियान और पेटेंट को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में आमूल बदलाव आया है वहीं दूसरी ओर देश ने वैज्ञानिक उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में शोध पत्रों के प्रकाशन के मामले में भी अपनी बढ़त कायम रखी है। पिछले दस वर्षों के दौरान देश में शोध-पत्रों के प्रकाशन में काफी वृद्धि देखी गई है। अमरीका के नेशनल साइंस फांउडेशन से मिले डेटा के अनुसार इस मामले में अमरीका और चीन के बाद तीसरा स्थान भारत का है। वर्ष 2018 में देश में ऐसे कुल 135,788 वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित किए गए। इससे यह पता चला है कि देश में वैज्ञानिक शोधपत्रों के प्रकाशन में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि इसका वैश्विक औसत 4.9 प्रतिशत रहा। वर्ष 2008-2018 के दौरान शोध पत्रों के प्रकाशन के मामलें में भारत की औसत वार्षिक वृद्धि दर 10.73 प्रतिशत रही जबकि इस अवधि में चीन की दर 7.81 प्रतिशत और अमरीका की 0.71 प्रतिशत रही। यह अनुसंधान और विकास गतिविधियों , उसके लिए आवश्यक बुनियादी ढ़ाचें और मानव संसाधन कार्यबल के विकास पर निवेश बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा शेाधकर्ताओं को सरकार की ओर से दिए गए प्रोत्साहन का परिणाम रहा। वर्ष 2017-18 के दौरान देश में प्रति व्यक्ति अनुसंधान और विकास पर खर्च बढ़कर 47.2 डॉलर हो गया था जबकि 2007-08 में यह 29.2 डॉलर रहा था। कार्यबल भी 2018 में 3.42 लाख हो गया जबकि 2015 में यह 2.83 लाख था। देश के पास इस समय एक मजबूत शोध कार्यबल है।वर्ष 2017 में यह प्रति दस लाख लाख आबादी पर बढ़कर 255 हो गया जबकि 2015 में यह 218 पर था। इतनी बड़ी तादाद में वैज्ञानिक गतिवधियों का केन्द्र देश के 993 विश्वविद्यालय/ डीम्ड विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय महत्व के 127 संस्थान और देश भर में मौजूद 39,931 कॉलेज रहे। ये संस्थान वैज्ञानिक शोधों के लिए ऐसे आवश्यक मानव संसाधनों का पोषण करते हैं जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के भविष्य की उम्मीद हैं और जो देश की वैज्ञानिक और तकनीकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे। देश आज की तारीख में ऐसी प्रतिभाओं को विकसित करने का अवसर देने के मामले में सबसे आगे है। पीचडी की डिग्री प्राप्त करने वालों की संख्या के मामले में भारत का दुनिया में तीसरा स्थान है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत एक मजबूत मानव संसाधन कार्यबल तैयार कर रहा है जो देश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी आगे ले जाएगा।
नई दिल्ली | देश ने वैश्विक महामारी के खिलाफ अपनी सामूहिक और साहसिक लड़ाई में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 22 जनवरी, 2021 को प्रात: सात बजे तक लगभग 10.5 लाख (10,43,534) लाभार्थियों को देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत टीके लग गए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान 4049 सत्रों में 2,37,050 लोगों को टीके लगाए गए हैं। अभी तक 18,167 सत्रों का आयोजन हो गया है।राष्ट्रव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान के छठे दिन तक देश में लगभग 10.5 लाख लाभार्थियों को टीके लगाए गए, यह आंकड़ा अन्य देशों की तुलना में बहुत अधिक है । देश में कोविड के परीक्षणों में उत्साहजनक बढ़ोतरी – परीक्षणों की कुल संख्या 19 करोड़ से अधिक हुई
नई दिल्ली | डीआरडीओ ने एक और उपलब्धि हासिल करते हुए स्वदेश में निर्मित स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (एसएएडब्ल्यू) का कल 21 जनवरी, 2021 को ओडिशा तट से कुछ दूर सफल ‘कैप्टिव एंड रिलीज’ उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के हॉक-I विमान के जरिए किया गया। इस स्मार्ट वेपन का एचएएल में निर्मित भारतीय हॉक-एमके132 विमान से सफलतापूर्वक प्रायोगिक परीक्षण किया गया। डीआरडीओ द्वारा अब तक किए गए सफल परीक्षणों की श्रृंखला में एसएएडब्ल्यू का यह परीक्षण नौवां था। यह एक टेक्स्ट बुक परीक्षण था जिसने अपने सभी लक्ष्य हासिल किए। बालासोर स्थित अंतरिम परीक्षण अड्डे (आईटीआर) पर स्थापित टेलीमीट्री और ट्रैकिंग प्रणाली ने इस मिशन के सभी दृश्यों को कैमरे में कैद किया। स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन का डिजाइन और विकास डीआरडीओ के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) द्वारा स्वेदशी तौर पर किया गया है। यह 125 किलोग्राम वजन श्रेणी का स्मार्ट वेपन है जो कि स्थल पर शत्रु की एयरफील्ड सम्पत्तियों जैसे रेडार, बंकर, टैक्सी ट्रैक और रनवे को 100 किलोमीटर की दूरी से निशाना बना सकता है। इसका उच्च सटीकता वाला निर्देशित बम भी इस श्रेणी की अन्य हथियार प्रणालियों की तुलना में कम वजन का है। इस हथियार का इससे पहले भी जगुआर विमान के जरिए एक सफल प्रायोगिक परीक्षण किया जा चुका है। डीआरडीओ के अध्यक्ष एवं डीडीआरएंडडी के सचिव डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने इस सफल परीक्षण में शामिल टीम को उसकी सफलता पर बधाई दी।
रायपुर | छत्तीसगढ़ प्रदेश में आज कुल 560 नए कोरोना मरीजों की पहचान की गई है | जिसमे जिला रायपुर से सर्वाधिक 94 मरीज, दुर्ग से 52, राजनांदगांव से 27, बालोद से 15, बेमेतरा से 13, कबीरधाम से 5, धमतरी से 18, बलौदा बाजार से 29, महासमुंद से 18, गरियाबंद से 6, बिलासपुर से 75, रायगढ़ से 51, कोरबा से 11, जांजगीर-चांपा से 20, मुंगेली से 5, जीपीएम से 0, सरगुजा से 22, कोरिया से 15, सूरजपुर से 28, बलरामपुर से 7, जशपुर से 18, बस्तर से 3, कोंडागांव से 7, दंतेवाड़ा से 6, सुकमा से 0, कांकेर से 11, नारायणपुर से 2, बीजापुर से 2, अन्य राज्य से 0 मरीज शामिल है । आज प्रदेश में कुल 598 कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ्य होने के उपरांत अपने घर लौटे है | राज्य में आज कुल 6 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है | प्रदेश में अब कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 5638 है |
पुणे | महाराष्ट्र के पुणे में स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में आग लगने की खबर सामने आइ थी | कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड बना रहे महाराष्ट्र के पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट के टर्मिनल 1 गेट के पास गुरुवार दोपहर भीषण आग लगी थी | जानकारी के अनुसार सीरम इंस्टीट्यूट के मंजरी प्लांट में लगी आग पर करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया है |
इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की खबर मिली है | अब तक मिली जानकारी के मुताबिक आग सीरम इंस्टीट्यूट के टर्मिनल गेट 1 SEZ3 बिल्डिंग के चौथे और पांचवें तल तक फैल गई थी | पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया | इसके साथ ही एनडीआरएफ की एक टीम को राहत एवं बचाव कार्य के लिए सीरम इंस्टीट्यूट रवाना किया गया |
The five people who died, were perhaps the workers at the under-construction building. The cause of the fire is yet to be ascertained but it is being speculated that welding, that was going on at the building, caused the fire: Pune Mayor Murlidhar Mohol#SerumInstituteofIndia https://t.co/KmSngS3TI6
— ANI (@ANI) January 21, 2021
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मिडिया से को जानकारी देते हुए पुणे के मेयर मुरलीधर मोहोल ने कहा कि चार लोगों इमारत से सुरक्षित निकाल लिया गया था | लेकिन जब आग पर काबू पाया गया तब हमारे जवानों को 5 लोगों के शव मिले | मेयर ने कहा कि पांच लोग जिनकी मौत हुई है वह निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम करने वाले कर्मचारी हो सकते हैं | आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है हालांकि ऐसा लगता है कि बिल्डिंग में चल रहा वेल्डिंग का काम इसकी वजह हो सकता है |
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 22 जनवरी, 2021 को वाराणसी मेंकोविड टीकाकरण अभियान के लाभार्थियों और टीके लगाने वालों के साथ दोपहर 1:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करेंगे। बातचीत में भाग लेने वाले टीकाकरण के बारे में अपने प्रत्यक्ष अनुभव साझा करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री की वैज्ञानिकों, राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर संवाद और चर्चा चल रही है।
उपराष्ट्रपति नायडू ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की बात कहा जीनोम वैली में ....पढ़ें पूरी खबर
नई दिल्ली । उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से बात की और हैदराबाद के जीनोम वैली में टीका परीक्षण एवं प्रमाणन प्रयोगशाला स्थापित करने को लेकर तेलंगाना सरकार के अनुरोध पर केन्द्र सरकार से विचार करने की मांग की। श्री नायडू ने इस मुद्दे पर तेलंगाना सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री के. टी. रामाराव के अनुरोध के संदर्भ में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा की।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे गए एक पत्र में श्री राव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया था कि हैदराबाद में प्रतिवर्ष छह बिलियन से अधिक खुराक तैयार की जाती है, जो विश्व स्तर पर टीके के उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा है।
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डॉ. हर्षवर्धन ने उपराष्ट्रपति को आश्वासन दिया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस अनुरोध पर विचार किया जाएगा। उन्होंने उपराष्ट्रपति को यह भी बताया कि विश्व भर में सात टीका परीक्षण एवं प्रमाणन प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें से एक हिमाचल प्रदेश के कसौली में स्थित है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के संयंत्र के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था की स्वीकृति की जरूरत होगी।
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 23 जनवरी 2021 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पराक्रम दिवस समारोह को संबोधित करने के लिए कोलकाता जाएंगे। प्रधानमंत्री असम के शिवसागर में जेरेंगा पठार भी जाएंगे, वहां पर वे 1.06 लाख जमीन के पट्टों का वितरण करेंगे।
पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित 'पराक्रम दिवस’ के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राष्ट्र के प्रति नेताजी की अदम्य भावना और निस्वार्थ सेवा को सम्मान देने और याद रखने के लिए, भारत सरकार ने हर साल 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है ताकि देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को प्रेरित किया जा सके, जैसा कि नेताजी ने किया था, वैसी ही विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए और उनमें देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए।
श्री मोदी इस अवसर पर एक स्थायी प्रदर्शनी और नेताजी पर एक प्रोजेक्शन मैपिंग शो का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री द्वारा एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। नेताजी की थीम पर आधारित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम 'आमरा नूतन जिबनेरी' भी उस दिन आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में ही राष्ट्रीय पुस्तकालय का दौरा करेंगे। इसी स्थान पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन '21वीं सदी में नेताजी सुभाष की विरासत का फिर से दौरा' और एक कलाकार शिविर का आयोजन भी किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कलाकारों और सम्मेलन के प्रतिभागियों के साथ बातचीत करेंगे।
असम में प्रधानमंत्री
इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री असम के शिवसागर भी जाएंगे जहां पर वे 1.06 लाख जमीन के पट्टों का वितरण करेंगे। राज्य के स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, असम सरकार ने व्यापक नई भूमि नीति के साथ यहां के लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा पर नए सिरे से जोर दिया है। असम के इन लोगों के लिए पट्टा / आवंटन प्रमाणपत्र जारी करना और उनके बीच सुरक्षा की भावना पैदा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। असम में 2016 में 5.75 लाख भूमिहीन परिवार थे। वर्तमान सरकार ने मई 2016 से 2.28 लाख आवंटन प्रमाण पत्र वितरित किए हैं। 23 जनवरी को होने वाला समारोह इस प्रक्रिया में अगला कदम है।







