नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर दो मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार किया है। हेरोइन झारखंड व मणिपुर के रास्ते आती थी। आरोपियों के कब्जे से 10 किलो हेरोइन बरामद की गई है। बरामद हेरोइन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोपियों ने हेरोइन को छिपाने के लिए कार में पिछली सीट में विशेष जगह बना रखी थी।
स्पेशल सेल डीसीपी जसमीत सिंह के अनुसार इंस्पेक्टर शिवकुमार को सूचना मिली थी कि मणिपुर, असम, यूपी, बिहार और दिल्ली में मादक पदार्थ की तस्करी करने वाला गिरोह सक्रिय है। गिरोह के सदस्य म्यांमार से मणिपुर होकर हेरोइन लेकर आ रहे हैं। करीब चार महीने की तफ्तीश के बाद इंस्पेक्टर शिव कुमार को फिर 24 मार्च को सूचना मिली थी कि यूपी के दो मादक पदार्थ तस्कर नाजिर और दिनेश सिंह ने झारखंड से हेरोइन की बड़ी खेप ली है।
सूचना के अनुसार, हेरोइन की खेप को देने के लिए दोनों मारूति एसएक्स4 कार से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस टी पाइंट, सरायकालेखां के पास आएंगे। एसीपी अत्तर सिंह की देखरेख में इंस्पेक्टर शिव कुमार व एसआई राजेश कुमार की टीम ने यहां घेराबंदी कर वार्ड नंबर-23, हरपुर जामानिया गाजीपुर, यूपी निवासी दिनेश सिंह (57) और मुहल्ला सुभान टोली जामानिया गाजीपुर यूपी निवासी नाजिर उर्फ नाजिम (28) को गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने पीछे बैग लटका रखा था।
पुलिस ने बताया कि इनके बैग से छह किलो हेराइन बरामद की गई, जबकि कार से चार किलो हेरोइन बरामद की गई। इन्होंने कार में पिछली सीट पर हेरोइन को छिपाने के लिए विशेष जगह बना रखी थी। दोनों आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा कि वह बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्य हैं। दोनों ही दिल्ली-एनसीआर व यूपी में पांच वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। आरोपियों ने बताया कि वह हेरोइन की इस खेप को झारखंड से लेकर आए थे। इसमें से छह किलो हेरोइन दिल्ली व चार किलो हेरोइन गाजीपुर में सप्लाई करनी थी।
आरोपियों ने पूछताछ में ये भी बताया कि हेरोइन की सप्लाई करने वालों के म्यांमार और मणिपुर से संबंध हैं। म्यांमार से हेरोइन मणिपुर होकर भारत के अन्य हिस्सों में आती है। इसके बाद दिल्ली व यूपी में हेरोइन की खेप भेजी जाती है। ये भी पता चला है कि झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों और मणिपुर में उग्रवाद प्रभावित इलाकों में अवैध रूप से हेरोइन बनाई जाती थी। ये झारखंड स्थित दवा निर्माताओं से भी हेरोइन खरीदते थे।
दोनों आरोपियों ने खुलाया किया है कि म्यांमार और मणिपुर से तस्करी की गई हेरोइन की गुणवत्ता भारत में वैध खेती वाले क्षेत्रों में अफीम से निर्मित हेरोइन से काफी बेहतर है। यही कारण है कि म्यांमार और मणिपुर में निर्मित हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत में भी अत्यधिक मांग है। ये देखने में आया है कि पिछले 5-6 वर्षों से म्यांमार से मणिपुर के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में हेरोइन की तस्करी का प्रमुख नया मार्ग बन गया है।
म्यांमार और मणिपुर से लाई गई हेरोइन न केवल लागत में तुलनात्मक रूप से सस्ती है बल्कि यह उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं, बाराबंकी, मध्य प्रदेश के मंदसौर और झालावाड़,राजस्थान के पारंपरिक क्षेत्रों में कानूनी रूप से उगाई गई अफीम से निर्मित हेरोइन की तुलना में बहुत अच्छी गुणवत्ता की है।